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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 13: पेड़ क बात
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — मल्हार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
145 – 154 12 18 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 22 pages
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · हद · मल्हार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 13: पेड़ क बात
NCERT कक्षा 6 हद क पाठ्यपुस्तक मल्हार के अं तम पाठ 13 पेड़ क बात के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह कोई कहानी या क वता नह , ब ल्क एक
व ान-लेख ( ानवधक गद्य) है, जसे प्र सद्ध वै ा नक जगद शचंद्र बसु (1858–1937) ने मूल रूप से बांग्ला म लखा था; इसका हद अनुवाद
शंकर सेन ने कया है। लेख बीज के अंकु रत होने से लेकर वृक्ष के गर जाने तक क पूरी यात्रा कहानी क तरह सुनाता है। पृष्ठ 145 से 154 तक क
हर ग त व ध — मेरी समझ से, पं क्तय पर चचा, मलकर कर मलान, सोच- वचार के लए, लेख क रचना, अनुमान या कल्पना से, प्रवाह चाट,
अंकुरण, शब्द के रूप, मेरे प्रय, आज क पहेली और खोजबीन के लए — शीषक-दर-शीषक हल क गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
मल्हार (कक्षा 6) 145 – 154
खं ड प्रश्न
12 18
माध्यम
हन्द
मेरी समझ से — पृष्ठ 150
पाठ से
पाठ से सही वकल्प
प्र.1 ★
(क) नीचे दए गए प्रश्न का सट क उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा ( ) बनाइए— (1) “जैसे पौधे को भी
सब भेद मालूम हो गया हो” पौधे को कौन-सा भेद पता लग गया? • उसे उल्टा लटकाया गया है। • उसे कसी ने
सजा द है। • ब े को गमला रखना नह आया। • प्रकाश ऊपर से आ रहा है।
सही उत्तर है — उसे उल्टा लटकाया गया है। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
इस वाक्य से ठ क पहले लेखक ने अपना प्रयोग बताया है —
“एक गमले में पौधा था। परीक्षण करने के िलए कु छ िदन गमले को औंधा लटकाए रखा। पौधे का िसर नीचे की
तरफ़ लटका रहा और जड़ ऊपर की ओर रही।
दो-एक िदन बाद क्या दे खता हूँ िक जै से पौधे को भी सब भे द मालूम हो गया हो। उसकी सब पि याँ और डािलयाँ
टे ढ़ी होकर ऊपर की तरफ़ उठ आईं तथा जड़ घूमकर नीचे की ओर लटक गई।”
यानी पौधे ने ताड़ लया क उसके साथ ‘चालाक ’ हुई है — उसे उल्टा टाँग दया गया है। इसी लए उसने दो ही दन म अपने आप को
सीधा कर लया। लेखक इसी बात को पहले नयम क तरह लख चुका है — “पेड़-पौध को जस तरह ही रखो, जड़ नीचे क
ओर जाएगी व तना ऊपर क ओर उठे गा।” मूली काटकर बोने वाला उदाहरण भी यही सद्ध करता है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / ग़लत कारण
उसे उल्टा लटकाया सही ★ पौधे ने अपनी दशा पहचानकर प त्तयाँ ऊपर और जड़ नीचे कर ल — यही ‘भेद’ खुलने का
गया है। प्रमाण है।
उसे कसी ने सजा द ग़लत सज़ा क बात पाठ म कह नह है। यह प्रयोग था, दं ड नह ।
है।
ब े को गमला ग़लत गमला कसी क लापरवाही से नह , ब ल्क लेखक ने जान-बूझकर “परीक्षण करने के लए”
रखना नह आया। औंधा लटकाया था।
प्रकाश ऊपर से आ ग़लत (पर प्रकाश क बात पाठ म आगे आती है। यहाँ लेखक का बदु यह है क पौधा ऊपर-नीचे पहचान
रहा है। सोचने लायक) लेता है — इसी लए जड़ भी घूमकर नीचे आ गई, जब क जड़ को प्रकाश नह चा हए।
कैसे तय कर: जब दो वकल्प ठ क-से लग, तब दे खए क वाक्य के आस-पास लेखक कस बात पर बात कर रहा
है। यहाँ आस-पास का पूरा प्रसंग औंधे गमले का है, प्रकाश का नह । इसी लए यही उत्तर ‘सट क’ है। हाँ, चचा म यह
ज़रूर क हए क प त्तय का ऊपर उठना प्रकाश से भी जुड़ा है — पर जड़ का नीचे लौटना केवल दशा- ान से ही
समझा जा सकता है।
प्र.2 (2) पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मत्र कैसे ह? • हमारे जैसे ही साँस लेते ह। • हमारे जैसे ही भोजन ग्रहण करते ह। •
हवा को शुद्ध करके सहायता करते ह। • धरती पर हमारे साथ ही जन्मे ह।
सही उत्तर है — हवा को शुद्ध करके सहायता करते ह। इसी वकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
पाठ म इसका सीधा प्रमाण है —
“जब हम श्वास-पश्वास गहण करते है ं तब पश्वास के साथ एक पकार की िवषाक्त वायु बाहर िनकलती है, उसे
ं अगर यह ज़हरीली हवा पृथ्वी पर इक ी होती रहे तो तमाम जीव-जंत ु कु छ ही िदनों में
‘अंगारक’ वायु कहते है।
उसका सेवन करके नष्ट हो सकते है।
ं
… ु ं के िलए ज़हर है, पेड़-पौधे उसी का सेवन करके उसे पूणतया शुद्ध कर दे ते है।ं ”
जो जीव-जंतओ
यही स ी मत्रता है — पेड़ वह चीज़ ले लेते ह जो हमारे लए हा नकारक है, और बदले म हम साफ़ हवा लौटा दे ते ह।
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
वकल्प सही / कारण
ग़लत
हमारे जैसे ही साँस लेते ह। ग़लत यह समानता बताता है, मत्रता नह । कसी के हमारे जैसा होने भर से वह हमारा उपकार नह
करने लगता।
हमारे जैसे ही भोजन ग्रहण ग़लत यह भी केवल समानता है — और अधूरी भी, क्य क लेखक कहता है “पेड़-पौध के दाँत नह
करते ह। होते… वे केवल तरल द्रव्य या वायु से भोजन ग्रहण करते ह।”
हवा को शुद्ध करके सही ★ पेड़ हमारी छोड़ी हुई ज़हरीली वायु लेकर उसे शुद्ध कर दे ते ह — इसी से जीव-जंतुओं का
सहायता करते ह। जीवन बचता है।
धरती पर हमारे साथ ही ग़लत साथ जन्म लेना कोई उपकार नह , और पाठ म ऐसी कोई बात कही भी नह गई है।
जन्मे ह।
ध्यान द जए: ‘ मत्र कैसे ह?’ जैसे प्रश्न म हमेशा वही वकल्प चु नए जसम कोई एक पक्ष दूसरे का भला कर रहा
हो। केवल ‘हमारे जैसा है’ कहने वाले वकल्प प्रायः ध्यान भटकाने के लए रखे जाते ह।
प्र.3 (ख) अब अपने मत्र के साथ चचा क जए और कारण बताइए क आपने ये उत्तर ही क्य चुने?
चचा म केवल ‘मने यह चुना’ कहना काफ़ नह है। हर उत्तर के साथ पाठ क एक पं क्त प्रमाण के रूप म र खए। नीचे वही तक
क्रम से दए गए ह, जन्ह आप अपने समूह म बोल सकते ह।
मने चुना कारण (पाठ से प्रमाण)
(1) उसे उल्टा लटकाया याँ और डािलयाँ टेढ़ी होकर ऊपर की तरफ़ उठ आईं
क्योंिक गमला औंध ा लटकाने के दो ही िदन बाद “सब पि
गया है। तथा जड़ घूमकर नीचे की ओर लटक गई।” पौधे ने अपनी उलटी िस्थित पहचानी और स्वयं सुधार ली।
(2) हवा को शुद्ध करके क्योंिक ले खक ने साफ़ िलखा है — “जो जीव-जंतओ
ु ं के िलए ज़ हर है, पेड़-पौधे उसी का से वन करके उसे पूणतया
सहायता करते है।
ं शुद्ध कर दे ते है।ं ”
चचा का तरीका: समूह म तीन बात बारी-बारी क हए — (1) मने क्या चुना, (2) पाठ क कौन-सी पं क्त इसका
प्रमाण है, (3) बाक वकल्प क्य नह । य द कसी साथी का उत्तर अलग है तो ल ड़ए मत — दोन पं क्तयाँ पाठ म
खोलकर प ढ़ए और फर तय क जए। इसी तरीके से पढ़ना ‘सोच-समझकर पढ़ना’ कहलाता है।
नमूना उत्तर (बोलने के लए): “मने पहला वकल्प चुना, क्य क पाठ म लेखक ने स्वयं प्रयोग कया था और दो
दन बाद पौधे क जड़ नीचे और प त्तयाँ ऊपर हो गईं। अगर पौधे को केवल प्रकाश दखता, तो जड़ नीचे क्य जाती?
इसका मतलब पौधे को यह ‘भेद’ मालूम हो गया क उसे उल्टा लटका दया गया है।”
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात
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पं क्तय पर चचा — पृष्ठ 150
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पाठ से
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पाठ से भावाथ
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पाठ म से चुनकर कुछ पं क्तयाँ नीचे द गई ह। इन्ह ध्यान से प ढ़ए और इन पर वचार क जए। आपको इनका
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प्र.1
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क्या अथ समझ म आया? अपने वचार अपने समूह म साझा क जए और अपनी लेखन पु स्तका म ल खए।
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(क) “पेड़-पौध के रेशे-रेशे म सूरज क करण
s emआबद्ध ह। ईंधन को जलाने पर जो प्रकाश व ताप बाहर प्रकट
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होता है, वह सूय क ही ऊजा है।”
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सीधा अथ — पेड़ का हर रेशा असल म सूरज क रोशनी का बना हुआ है। पत्ते दन-भर सूय क ऊजा लेm
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(आबद्ध) कर लेoतm la और गरमी बनकर बाहर
कर उसे अपने शरीर म बंद
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े ह। जब हम लकड़ी या कोयला जलाते ह, तो वही जमा क हुई ऊजा आग क लपट
m है। इस लए चूल्हे क आँच भी सूरज क ही उधार ली हुई रोशनी है।
नकल eआती
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agl पं क्त का हस्सा उसका भाव
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कही ं थोड़.cी-oसीm
“रे शे-रे शे में”
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नही,ं पूरे शरीर में — तने, डाल , प ी, जड़ , सब में।
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“सूर ज की िकरणें आबद्ध है”ं
a gl िकरणें कैद है,ं बँधी पड़ ी है।ं यह रूपक है — रोशनी को बंदी की तरह िदखाया गया है।
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आग जलाना असल में उस बँधी हुई िकरण को छोड़ दे ना है।
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“ईंध न को जलाने पर… वह सूय की ही ऊज है”
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पाठ से जो ड़ए: इसी वचार को लेखक आगे और बड़ा कर दे ता है — “पेड़-पौधे व समस्त ह रयाली प्रकाश ह थयाने
s e mे जाल ह… अनाज व सब्ज़ी न खाने पर हम भी बच नह सकते ह। सोचकर दे खा जाए तो हम भी प्रकाश क
la खुराक पाने पर ही जी वत ह।” यानी रोट , दाल, दूध — सब घुमा- फराकर सूरज से ही आते ह।
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comम चूल्हे क आग दे खता ँ तो मुझे लगता है क पेड़ ने बरस g l a
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m रोट सक रही है।”
अपनी लेखन-पु स्तका के लए एक वाक्य: “जब
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पहले जो धूप जमा क थी, वह आज मेरsे eलए
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(ख) “मधुमक्खी व ततली के साथ वृक्ष क चरकाल से घ नष्ठता है। वे दल-बल स हत फूल दे खने आती ह।”
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प्र.2
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a s emउत्तर
agl सीधा अथ — पेड़ और मधुमक्खी- ततली क दोस्ती बहुत पुरानी है ( चरकाल = बहुत लंबे समय से, घ नष्ठता = गहरी मत्रता)। वे
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अकेली नह , झुंड बनाकर फूल पर आती ह।
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यह दोस्ती दोन के फ़ायदे क है — इसे पाठ खुद बताता है :
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
पेड़ क्या दे ता है मधुमक्खी- ततली क्या दे ती ह
फू लों में जमा िकया हुआ शहद — “वृक्ष अपने फू लों में शहद का एक फू ल के पराग-कण दू स रे फू ल तक पहचु ँ ाना — “पराग-कण के िबना
संचय करके रखते है।
ं ” बीज पक नही ं सकता।”
रंग -िबरंग ी पंखिु ड़यों का पता-िनशान, तािक रास्ता न भूले ं उनके आने से “वृक्ष का भी उपकार होता है” — बीज बनता है, वंश चलता है
शाम होते ही चारों ओर फै लाई गई सुग ंध , तािक रात में उड़ने वाले अँधेरे में भी परागण का काम पूरा हो जाता है
पतंग े भी पहच
ु ँ सकें
भाषा क बात: ‘दल-बल स हत’ प्रायः सेना या बारात के लए आता है। यहाँ इसे तत लय के लए बरतकर लेखक
ने फूल के मौसम को एक उत्सव, एक नमंत्रण बना दया है। इसी लए इससे पहले पेड़ पुकारता है — “कहाँ हो मेरे
बंधु, मेरे बांधव, आज मेरे घर आओ।” यह मानवीकरण है।
आज क भाषा म: जसे व ान ‘परागण’ (pollination) कहता है, उसी को बसु ने ‘पुरानी दोस्ती’ कहकर
समझा दया — यही इस लेख क सबसे बड़ी खूबी है।
मलकर कर मलान — पृष्ठ 151
पाठ से
पाठ से मलान
प्र.1 पाठ म से चुनकर कुछ वाक्यांश नीचे दए गए ह। अपने समूह म इन पर चचा क जए और इन्ह इनके सही अथ या
संदभ से मलाइए। इसके लए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शक्षक क सहायता ले सकते ह। वाक्यांश —
1. बीज का ढक्कन दरक गया 2. उसे ‘अंगारक’ वायु कहते ह 3. पत्ते सूय ऊजा के सहारे ‘अंगारक’ वायु से अंगार
नःशेष कर डालते ह 4. प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है 5. जैसे फूल-फूल के बहाने वह स्वयं हँस रहा हो 6. इस
अपरूप उपादान से कस तरह ऐसे सुंदर फूल खलते ह। अथ या संदभ — 1. मटमैली माट और वषाक्त वायु से
सुंदर-सुंदर फूल म प रव तत होते ह। 2. जीवन के लए सूय का प्रकाश आधारश क्त या महत्वपूण है। 3. अपनी
संपन्नता और भावी पीढ़ क उत्प त्त से प्रसन्न-संतुष्ट। 4. साँस छोड़ने पर नकलने वाली वायु-काबन
डाईआक्साइड। 5. सूय के प्रकाश से पत्ते वषाक्त वायु के प्रभाव को नष्ट कर दे ते ह। 6. बीज के दोन दल म दरार
आ गई या फट गए।
दोन स्तंभ जान-बूझकर आगे-पीछे कर दए गए ह। सही मलान नीचे दया गया है — पुस्तक म इन्ह के बीच रेखा ख चए।
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वाक्यांश मलेगा अथ या संदभ मलान का सुराग़
1. बीज का ढक्कन दरक →6 बीज के दोन दल म दरार आ ‘दरकना’ का अथ ही है फटना, दरार पड़ना। बीज के दो
गया गई या फट गए। दल ( हस्से) चने-मटर म खोलकर दे खए — वही यहाँ
‘ढक्कन’ कहे गए ह।
2. उसे ‘अंग ारक’ वायु कहते →4 साँस छोड़ने पर नकलने वाली पाठ म — “प्र ास के साथ एक प्रकार क वषाक्त वायु
है ं वायु-काबन डाईआक्साइड। बाहर नकलती है, उसे ‘अंगारक’ वायु कहते ह।”
शब्दकोश म भी ‘अंगारक’ का अथ काबन दया है।
3. प े सूय ऊज के सहारे →5 सूय के प्रकाश से पत्ते वषाक्त दोन म एक ही क्रया है — सूय का प्रकाश + पत्ते =
‘अंग ारक’ वायु से अंग ार वायु के प्रभाव को नष्ट कर दे ते ज़हरीली हवा का सफ़ाया। ‘ नःशेष’ यानी कुछ भी शेष
िनःशेष कर डालते है ं ह। न रहना।
4. पकाश ही जीवन का →2 जीवन के लए सूय का प्रकाश ‘मूलमंत्र’ = सबसे बड़ी, सबसे पहली बात;
मूल मंत्र है आधारश क्त या महत्वपूण है। ‘आधारश क्त’ भी यही कहता है। दोन वाक्य एक-दूसरे
का अनुवाद-जैसे ह।
5. जैसे फू ल-फू ल के बहाने →3 अपनी संपन्नता और भावी पीढ़ यहाँ फूल = पेड़ क हँसी। पेड़ इस लए खुश है क उसके
वह स्वयं हँस रहा हो क उत्प त्त से प्रसन्न-संतुष्ट। फूल म बीज, यानी उसक संतान बन रही है।
6. इस अपरूप उपादान से →1 मटमैली माट और वषाक्त वायु ‘अपरूप’ = भ ा, कुरूप और ‘उपादान’ = बनाने क
िकस तरह ऐसे सुंद र फू ल से सुंदर-सुंदर फूल म प रव तत सामग्री। भ सामग्री (मैली म , ज़हरीली हवा) से सुंदर
िखलते है ं होते ह। फूल — यही लेखक का अचरज है।
मलान का तरीका: पहले वे जो ड़याँ बना ली जए जनका अथ शब्द से ही खुल जाता है (दरक → दरार, अपरूप-
उपादान → मटमैली माट )। फर बचे हुए म दे खए क दोन तरफ़ एक ही क्रया हो रही है या नह — जैसे 3 और 5
म ‘नष्ट कर दे ना’।
सावधानी: 2 और 3 दोन म ‘अंगारक’ शब्द है, इस लए भ्रम हो सकता है। फ़क याद र खए — 2 केवल नाम
बताता है (यह वायु कौन-सी है), जब क 3 काम बताता है (पत्ते उसका क्या करते ह)।
सोच- वचार के लए — पृष्ठ 151
पाठ से
पाठ से सोच- वचार
प्र.1 पाठ को एक बार फर से प ढ़ए, पता लगाइए और ल खए— (क) बीज के अंकु रत होने म कस- कस का
सहयोग मलता है?
पाठ के पहले ही अनु े द म अंकुरण क पूरी शत आ जाती ह —
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“बहत
ु िदनों तक िम ी के नीचे बीज पड़ े रहे। … सिदयों के बाद वसंत आया। उसके बाद वष की शुरूआत में
दो-एक िदन पानी बरसा। अब और िछपे रहने की आवश्यकता नही ं थी! … आिहस्ता-आिहस्ता बीज का ढक्कन
दरक गया, दो सुक ोमल पि यों के बीच अंकु र बाहर िनकला।”
इस लए बीज को अंकु रत होने म इनका सहयोग मलता है —
सहयोगी उसका काम पाठ का आधार
िम ी बीज को ढककर सुरिक्षत रखती है और उसमें घुले “म के नीचे बीज पड़े रहे”; “माट म पानी डालने पर उसके
द व्य भोजन बनते है ं भीतर बहुत-से द्रव्य गल जाते ह।”
पानी (वष ) बीज का िछलका नरम करके फोड़ ता है, िम ी के “वषा क शुरूआत म दो-एक दन पानी बरसा।”
द व्यों को घोलता है
उपयुक्त ऋतु/ ठं ड बीत जाने पर ही बीज जागता है “स दय के बाद वसंत आया।”
गरमाहट
पकाश (सूय) बाहर िनकलते ही अंकु र को बढ़ ने की ऊज दे ता है, “ऊपर उठ जाओ, सूरज क रोशनी दे खो।”; “प्रकाश ही जीवन
उसी की ओर तना उठता है का मूलमंत्र है।”
हवा प ों को साँस और ‘अंगारक ’ वायु दे ती है, िजससे “वृक्ष के पत्ते हवा से आहार ग्रहण करते ह।”
पौधा भोजन बनाता है
समय और धै य अंकु रण एक झटके में नही ं होता “महीना-दर-महीना बीतता गया।”; “आ हस्ता-आ हस्ता बीज
का ढक्कन दरक गया।”
एक वाक्य म: म , पानी, उ चत ऋतु क गरमाहट, हवा और सूरज का प्रकाश — इन पाँच के मल जाने पर
ही बीज का ढक्कन दरकता है और अंकुर बाहर आता है। इनम से एक भी न हो तो बीज सोया ही रह जाता है।
खुद दे खए: इसी पाठ क ‘अंकुरण’ ग त व ध (पृष्ठ 153) म चने या राजमा के बीज बोकर आप ये सारी शत अपनी
आँख से जाँच सकते ह — एक गमला अँधेरे म और एक धूप म रखकर तुलना क जए।
प्र.2 (ख) पौधे अपना भोजन कैसे प्राप्त करते ह?
लेखक पहले तुलना से बात शुरू करता है — “हमारे दाँत ह, कठोर चीज़ खा सकते ह… पेड़-पौध के भी दाँत नह होते, इस लए
वे केवल तरल द्रव्य या वायु से भोजन ग्रहण करते ह।” इस लए पौधे दो रास्त से भोजन लेते ह —
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रास्ता कैसे पाठ क पं क्त
1. जड़ ों से पानी पड़ ने पर िम ी के भीतर बहुत-से द व्य घुल जाते है ं (जैसे “पेड़-पौधे जड़ के ारा माट से रस-पान करते ह।” …
— नीचे से पानी में चीनी घुल ती है); जड़ ें वही घुल ा हआ
ु रस पी ले ती है।ं पेड़ “पेड़ म हज़ार -हज़ार नल ह। इन्ह सब नल के ारा माट
के भीतर हज़ ारों-हज़ ार नल होते है ं िजनसे यह रस पूरे शरीर में से पेड़ के शरीर म रस का संचार होता है।”
पहचु ँ ता है।
2. प
ों से प ों में अनिगनत छोटे-छोटे मुँह होते है ं और हर मुँह पर होंठ, जो “वृक्ष के पत्ते हवा से आहार ग्रहण करते ह।” … “पत्ते सूय-
— ऊपर ज़ रूरत न होने पर बंद हो जाते है।ं ये मुँह हवा से ‘अंगारक ’ वायु ऊजा के सहारे ‘अंगारक’ वायु से अंगार नःशेष कर डालते
से ले ते है ं और सूय-ऊज के सहारे उससे अंगार खी ंचकर पेड़ के ह। और यही अंगार वृक्ष के शरीर म प्रवेश करके उसका
शरीर में िमला दे ते है।ं संवद्धन करते ह।”
यानी पौधे का भोजन तीन चीज़ से बनता है — जड़ से लया पानी और घुले हुए द्रव्य + पत्त से ली ‘अंगारक’
वायु + सूरज का प्रकाश। इसी लए लेखक चेतावनी भी दे ता है — “जड़ को पानी न मलने पर पेड़ का भोजन बंद हो
जाता है, पेड़ मर जाता है।” और “प्रकाश न मलने पर ये बच नह सकते।”
आज क भाषा म: जसे बसु ने ‘पत्त के छोटे -छोटे मुँह और ह ठ’ कहा, व ान उसे रंध्र (stomata) कहता है;
‘हज़ार नल’ को जाइलम-फ्लोएम, और भोजन बनाने क इस पूरी क्रया को प्रकाश-सं ेषण। सन 1858–
1937 म जीने वाले लेखक ने यह सब ब के लए बना क ठन नाम लए समझा दया।
लेख क रचना — पृष्ठ 152
पाठ से
पाठ से ले ख न
प्र.1 इस लेख म एक के बाद एक वचार को लेखक ने सुसंगत रूप से प्रस्तुत कया है। गमले को औंधा लटकाना या
मूली काटकर बोना जैसे उदाहरण दे कर बात कहना इस लेख का एक तरीका है। अपने तथ्य को वास्त वकता या
व्यावहा रकता से जोड़ना भी इस लेख क वशेषता है। (क) जैसे लेखक ने ‘पेड़ क बात’ कही है वैसे ही अपने
आस-पास क चीज़ दे खए और कसी एक चीज़ पर लेख ल खए, जैसे—गे ँ क बात।
पहले दे ख ली जए क बसु का तरीका क्या है — वही आपके लेख का ढाँचा बनेगा।
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लेखक क चाल पाठ का उदाहरण आप क्या करगे
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अपनी चीज़ कीlaभीsशुरू से अंत तक की यात्रा
काम → अंत) .c
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म से चलना (जन्म → बढ़ ना → बीज → अंकुर → तना-जड़ → भोजन → फूल →
िलिखए।ag
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बीज → वृक्ष का गरना
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aघरglका उदाहरण दे ना औंधा गमला, मूली काटकर बोना, चीनी का पानी म कम-से -कम दो ऐसे उदाहरण दीिजए जो
घुलना पाठक ने खुद दे खे हों।
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पाठक से सीधे बात करना “क्या तुमने अंकुर को उठते दे खा है?” बीच-बीच में एक -दो पश्न पूिछए।
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बीज ‘सोता’gहै, पेड़ ‘हँसता’ है, ‘बंधुओं को बुलाता’
मानवीकरण
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a अपनी चीज़ को भी एक जीव की तरह बोलने-
चलने दीिजए।
अंितम पंिक्त ऐसी हो .जोco m के मन में रह
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अंत में एक बड़ ी बात “संतान के लए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष पाठक
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समाप्त हो जाता है।”
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नमूना उत्तर: गे ँ क बात
agक्या तुमने कभी रोट को फूलते देखा है? उसी फूली हुई रोट के पीछे गे ँ क एक लंबी कहानी छपी है।
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का तक के बाद, जब खेत क म ठं डी और भुरभुरी हो जाती है, कसान गे ँ के दाने उसम बो दे ता है। दाना पहले चुपचाप पड़ा
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रहता है, मानो सोच रहा हो क बाहर नकलूँ या नह । फर पहला पानी लगता है और उसका छलका दरक जाता है। एक सफ़ेद जड़
नीचे उतरती है और एक हरी सुई ऊपर क ओर म
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फोड़कर नकल आती है। पंद्रह दन बाद पूरा खेत ऐसा दखता है जैसे कसी ने
हरी चादर बछा द हो।
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गे ँ भी हमारी तरह भोजन करता है। उसक जड़ पानी म घुली म का रस पीती ह और उसक प त्तयाँ धूप पीती ह। जाड़े क कोहरे
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वाली सुबह म जब सूरज दे र से नकलता है, गे ँ क बढ़त भी धीमी पड़ जाती है — यह मने अपने दादा के खेत म खुद दे खा है।
m a s em है, जैसे कोई सुनहरी नद
gl सारा रस दान को दे चुका होता है।
फर फागुन आता है। बा लयाँ नकलती ह, हवा चलती है और पूरा खेत एक साथ झुककर लहराने लगता
. coदाना पकते-पकते गे ँ का हरा शरीर पीला पड़ जाता है, सूख जाता है। पौधा aअपना
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बह रही हो।
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चै त म कटाई होती है। दाने कोठ म चले जाते ह, भूसा पशुओं के काम आता है, और थोड़े-से दाने अगली बुआई के लए बचा लए
a जाते ह। इस तरह गे ँ का पौधा मट जाता है, पर उसका दाना हमारी थाली तक और अगले खेत तक — दोन जगह पहुँच जाता है।
सचमुच, हर रोट कसी पौधे क पूरी ज़दगी है।
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दूसरे वषय जन पर आप लख सकते ह: चावल क बात, आम के पेड़ क बात, तुलसी के पौधे क बात, बाँस क
बात, मधुमक्खी क बात, च ट क बात, बरसात क एक बूँद क बात, हमारे नल के पानी क बात, मेरी पुरानी
साइ कल क बात।
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. com(ख) उसे कक्षा म सबके साथ साझा क जए। a g l
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यह लखने के बाद बोलकर सुनाने क ग त व ध है। इसे इस तरह क जए —
1. पहले चुपचाप एक बार पढ़ ली जएse m
l a — जहाँ जीभ अटके, वह वाक्य छोटा कर द जए। लंबे वाक्य सुनने म उलझ जाते ह।
2. शुरुआत ऐसी क जए जससे ag सबके कान खड़े हो जाएँ — कोई प्रश्न या कोई चत्र। जैसे बसु ने शुरू कया था — “क्या
आपने कभी कोई बीज बोया है?”
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
3. धीरे, साफ़ और रुक-रुककर बो लए। हर अनु े द के बाद एक क्षण ठह रए।
4. य द हो सके तो एक चीज़ दखाइए — गे ँ क बाली, अंकु रत चना, पत्ती या अपना बनाया चत्र। दखाई गई चीज़ बात को
याद रहने लायक बना दे ती है।
5. अंत म सा थय से पू छए — “आपने अपने आस-पास ऐसा क्या दे खा है?” इससे चचा आगे बढ़े गी।
6. दूसर को सुनते समय दो बात नोट क जए — एक जो आपको अ लगी और एक सुझाव। सुझाव वनम्रता से द जए।
मूल्यांकन के लए तीन कसौ टयाँ: (1) क्या लेख म चीज़ क पूरी यात्रा क्रम से आई? (2) क्या उसम कम-से-कम
दो असली उदाहरण थे? (3) क्या अंत क पं क्त ने कुछ सोचने पर मजबूर कया? इन्ह तीन बात पर एक-दूसरे को
राय द जए।
कक्षा के लए सुझाव: सभी लेख को एक साथ जोड़कर एक हस्त ल खत प त्रका बनाइए — नाम रख सकते ह
‘हमारे आस-पास क बात’। हर लेख के साथ ब े का बनाया चत्र भी लगाइए और उसे कक्षा क द वार पर लगा
द जए।
अनुमान या कल्पना से — पृष्ठ 152
पाठ से
पाठ से कल्पना
प्र.1 अपने समूह म मलकर चचा क जए। (क) “इस तरह संतान के लए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त
हो जाता है।” वृक्ष के समाप्त होने के बाद क्या होता है?
वृक्ष का गरना अंत नह , एक नई शुरुआत है। लेखक स्वयं पहले लख चुका है — “सब पेड़ मरने से पहले संतान छोड़ जाने के
लए व्यग्र ह। बीज ही उनक संतान है।” इस लए वृक्ष के गरने के बाद यह होता है —
1. उसके बीज नया वंश चलाते ह। जो बीज म म गर चुके थे, वे अगली वषा म अंकु रत होकर नए पौधे बन जाते ह। इस तरह
वही चक्र फर से शुरू हो जाता है — बीज से बीज तक।
2. उसका शरीर म बन जाता है। गरा हुआ तना, डा लयाँ और पत्ते धीरे-धीरे गलकर म म मल जाते ह और उसे उपजाऊ
बना दे ते ह। जस माट से पेड़ ने जीवन-भर रस लया था, अंत म वह अपना पूरा शरीर उसी माट को लौटा दे ता है।
3. वह दूसरे जीव के काम आता है। सूखे तने म द मक, च टयाँ, भृंग और कठफोड़वा जैसे पक्षी घर बना लेते ह; उस पर काई
और कुकुरमुत्ते उग आते ह। एक गरा हुआ पेड़ भी अनेक जीव को आश्रय दे ता है।
4. वह मनुष्य के काम आता है। उसक लकड़ी से ईंधन, हल, दरवाज़े, फ़न चर और काग़ज़ बनते ह। और जब हम वह लकड़ी
जलाते ह तो, जैसा पाठ कहता है, उसम बँधी हुई सूरज क करण ही प्रकाश और ताप बनकर बाहर आती ह।
5. उसक जगह खाली होते ही धूप नीचे तक पहुँचती है और छाया म दबे छोटे पौध को बढ़ने का मौका मल जाता है — वही
‘होड़’ जसका ज़क्र पाठ म है।
नष्कष: पेड़ मरकर भी कुछ बरबाद नह होने दे ता — बीज से नया जीवन, शरीर से म , लकड़ी से ऊजा और
खोखर से दूसर का घर। इसी लए लेखक ने उसके अंत को त्याग कहा है, हार नह ।
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
चचा के लए एक प्रश्न: क्या मनुष्य भी अपने पीछे ऐसा कुछ छोड़ जाता है जो दूसर के काम आए? अपने समूह म
इसके उदाहरण खो जए।
प्र.2 (ख) पेड़-पौध के बारे म लेखक क रु च कैसे जागृत हुई होगी?
यह अनुमान का प्रश्न है, पर अनुमान हवा म नह लगाना है — ‘लेखक से प रचय’ (पृष्ठ 149) और लेख क भाषा, दोन म सुराग़
मौजूद ह।
सुराग़ इससे क्या अनुमान लगता है
“जगदीशचंद बसु का बचपन पकृ ित का अवलोकन करते हुए बीता।” रुिच बचपन में ही, खेल -खेल में जगी होगी — पेड़, तालाब, कीड़ े-
मकोड़ े दे खते हुए ।
“पेड़-पौधों, जीव-जंतओ
ु ं से पेम करते हुए उनकी िशक्षा आरंभ हुई।” पढ़ ाई से पहले पेम आया। पहले उ न्हे ं पेड़ अच्छे लगे, िफर उनके
बारे में जानने की भूख जगी।
“एक गमले में पौधा था। परीक्षण करने के िलए कु छ िदन गमले को औंध ा वे के वल दे खकर संतष्ु ट नही ं होते थे — पयोग करके जाँचते थे।
लटकाए रखा।” यही स्वभाव उ न्हे ं वै ािनक बनाता चला गया।
“दो-एक िदन बाद क्या दे खता हू…
ँ ”, “क्या तुमने अंकु र को उठते दे खा है?” उनके भीतर बच्चों जैस ा अचरज िज़ ंद ा था। अचरज ही हर खोज
की पहली सीढ़ ी है।
“उन्होंने िसद्ध िकया िक पौधों का एक िनिश्चत जीवनचक्र व पजनन पणाली उ न्हे ं लगा होगा िक पौधे भी हमारी तरह अनुभव करते है ं — यही
होती है और वे अपने पिरवेश के पित जाग रूक होते है।
ं ” िवचार आगे उनकी सबसे बड़ ी खोज बना।
नमूना उत्तर: जगद शचंद्र बसु का बचपन गाँव के खुले प रवेश म, प्रकृ त को दे खते हुए बीता। उन्ह ने बरसात के बाद बीज को फूटते,
अंकुर को म भेदकर उठते और बेल को पेड़ पर चढ़ते दे खा होगा। पढ़ाई से पहले उन्ह पेड़-पौध से प्रेम हुआ, और प्रेम से
ज ासा जगी — “ये ऐसा क्य करते ह?” इसी ज ासा ने उन्ह प्रयोग करने पर मजबूर कया, जैसे गमले को औंधा लटकाकर
दे खना। जब उन्ह ने पाया क पौधा दो ही दन म अपनी दशा सुधार लेता है, तो उन्ह व ास हो गया क पौधे भी अपने चार ओर क
दु नया को समझते ह। यही व ास आगे चलकर उनके शोध का आधार बना और उन्ह ने संसार म पहली बार यह सद्ध कया क
पौधे कसी भी अन्य जीव के समान होते ह।
अपने लए भी सो चए: रु च जगाने का यही नुस्खा आप पर भी लागू होता है — ध्यान से दे खए, प्रश्न पू छए,
फर छोटा-सा प्रयोग करके खुद जाँ चए। इसी क्रम से एक साधारण ब ा वै ा नक बनता है।
प्रवाह चाट — पृष्ठ 152
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से आरे ख
प्र.1 बीज से बीज तक क यात्रा का आरेख पूरा क जए— बीज → __ __ र → प __ __ → __ त्ता → क __ → __ ल →
फ __ → बी __
पुस्तक के आठ खान म से एक ही भरा है (बीज); बाक म शुरू या आ ख़री अक्षर का संकेत दया गया है। पूरा आरेख इस प्रकार
बनेगा —
बीज → अंकुर → पौधा → प ा → कली → फू ल → फल → बीज
पुस्तक म दया सही पाठ का आधार
संकेत शब्द
बीज (भरा हआ
ु ) बीज “बहुत दन तक म के नीचे बीज पड़े रहे।”
__ __ र अंकु र “दो सुकोमल प त्तय के बीच अंकुर बाहर नकला।”
प __ __ पौधा “एक गमले म पौधा था।”
__ ा प ा “वृक्ष के पत्ते हवा से आहार ग्रहण करते ह।”
क __ कली शब्दकोश म ‘अंकुर’ का एक अथ ही ‘कली’ दया गया है; फूल खलने से पहले कली ही बनती
है।
__ ल फू ल “फूल से आ ा दत होने पर पेड़ कतना सुंदर दखलाई पड़ता है।”
फ __ फल “इस प्रकार फूल म बीज फलता है।” — फूल के बाद फल ही बनता है।
बी __ बीज “बीज ही उनक संतान है।” — यात्रा फर वह लौट आती है जहाँ से चली थी।
चाट को पढ़ने का तरीका: पुस्तक म खाने अंग्रेज़ी के ‘S’ क तरह मुड़े हुए ह — पहले खंभा ऊपर से नीचे (बीज,
अंकुर, पौधा), फर दूसरा खंभा नीचे से ऊपर (पत्ता, कली, फूल), और तीसरा फर ऊपर से नीचे (फल, बीज)।
तीर के साथ-साथ च लए, भट कएगा नह ।
यही चक्र क्य कहलाता है: पहला खाना और आ ख़री खाना, दोन ‘बीज’ ह। इसी लए इसे जीवनचक्र कहते ह —
इसका न कोई सरा है, न अंत। ‘लेखक से प रचय’ म भी यही लखा है क बसु ने सद्ध कया क पौध का एक
न त जीवनचक्र होता है।
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
अंकुरण — पृष्ठ 153
पाठ से
पाठ से गतवध
प्र.1 • म के कसी भी पात्र म म भरकर उसम राजमा या चने के 4–5 बीज बो द जए। • हल्का-सा पानी छड़क
द जए। • 3–4 दन तक थोड़ा-थोड़ा पानी डा लए। • अब इसम आए प रवतन लेखन पु स्तका म ल खए। (संकेत
— एक दन म पौधे क लंबाई कतनी बढ़ती है, कतने पत्ते नकले, प्रकाश क तरफ़ पौधे मुड़े या नह आ द।)
यह करके दे खने क ग त व ध है। पहले ठ क तरीके से क जए, फर रोज़ का ब्योरा ल खए।
करने का तरीका
1. म के कुल्हड़ या गमले म भुरभुरी म भ रए। पात्र के नीचे एक छोटा छे द र खए ता क अ त रक्त पानी नकल जाए —
ज़्यादा पानी बीज को सड़ा दे ता है।
2. राजमा या चने के 4–5 बीज लगभग एक अंगुल गहराई म, थोड़ी-थोड़ी दूरी पर बोइए।
3. ऊपर से हल्का-सा पानी छड़ कए — धार से नह , छड़ककर, वरना बीज एक ओर बह जाएँगे।
4. 3–4 दन तक रोज़ थोड़ा-थोड़ा पानी डा लए और गमला खड़क के पास र खए।
5. रोज़ एक ही समय पर (जैसे सुबह 8 बजे) स्केल से लंबाई ना पए और अपनी लेखन-पु स्तका म ता लका भ रए। हो सके तो
साथ म एक छोटा चत्र भी बनाइए।
नमूना उत्तर (मेरी अवलोकन-ता लका — चने के बीज):
दन जो दखा पौधे क लंबाई पत्ते
पहला िदन कुछ नह दखा; म ऊपर से नम रही। — —
दू स रा िदन म हटाकर दे खा तो एक बीज फूल गया था और उसका छलका दरक गया था। — —
तीसरा िदन दो जगह म ऊपर उठ और सफ़ेद-सी मुड़ी हुई डंडी बाहर नकली। लगभग 1 से मी 0
चौथा िदन डंडी सीधी होकर हरी पड़ने लगी; ऊपर दो मुड़े हुए दल दखे। लगभग 3 से मी 2 (बीजपत्र)
पाँचवाँ िदन दोन दल खुल गए; बीच से नन्ही हरी प त्तयाँ झाँकने लग । लगभग 6 से मी 2 + 2 नई
छठा िदन पौधा साफ़ तौर पर खड़क क ओर झुक गया, यानी प्रकाश क तरफ़। लगभग 9 से मी 4
सातवाँ िदन गमला घुमाकर उल्टा रख दया; अगले दन पौधा फर खड़क क ओर मुड़ गया। लगभग 12 से मी 4–6
नष्कष जो आपको लखना चा हए: (1) पौधा शुरू म धीरे बढ़ा, फर रोज़ लगभग 2–3 सेमी बढ़ने लगा। (2)
पहले जड़ नीचे गई, फर तना ऊपर आया — बलकुल वैसे ही जैसे पाठ म लखा है। (3) गमला घुमा दे ने पर भी
पौधा प्रकाश क ओर ही मुड़ा — यही बात बसु ने लखी थी : “सारी प त्तयाँ व डा लयाँ अंधकार से बचकर प्रकाश
क ओर बढ़ रही ह।”
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात
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और मज़ा लेना हो तो: दो गमले बोइए — एक धूप वाली खड़क पर और एक अलमारी के अँधेरे म। एक सप्ताह
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बाद तुलना क जए। अँधेरे वाला पौधा लंबा तो होगा, पर पीला, कमज़ोर और पतला। इससे ‘प्रकाश
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मूलमंत्र है’ बात
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शब्द के रूप — पृष्ठ 153
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से
पाठ से शब्द क बात
प्र.1 नीचे दए गए चत्र को दे खए। यहाँ म से जुड़े, कुछ शब्द नीचे दए गए ह जो उसक वशेषता बता रहे ह।
िचकनी
उपजाऊ नम
िम ी
रे तीली भ ुरभ ुरी
काली
पुस्तक (पृष्ठ 153) का शब्द- चत्र — बीच के सूरज म ‘ म ’ और उसके चार ओर छह बादल म म क वशेषता
बताने वाले शब्द।
अब आप पेड़, सद , सूय जैसे शब्द क वशेषता बताने वाले शब्द बॉक्स बनाकर ल खए—
पहले समझ ली जए क पुस्तक म क्या हुआ है। बीच म सूरज के आकार म एक सं ा है — म , और चार ओर बादल म छह
शब्द ह — उपजाऊ, चकनी, नम, भुरभुरी, काली, रेतीली। ये सब म क वशेषता बता रहे ह, इस लए इन्ह वशेषण कहते ह
और ‘ म ’ को वशेष्य।
अब इसी तरह अपनी लेखन-पु स्तका म तीन शब्द-बॉक्स बनाइए — बीच म शब्द, चार ओर उसक वशेषताएँ।
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
बीच का शब्द ( वशेष्य) चार ओर लखने के शब्द ( वशेषण)
पेड़ हरा-भरा, घना, ऊँ चा, छायादार, फलदार, िवशाल , बूढ़ा, सूखा, प े द ार, टेढ़ा
सद कड़ ाके की, हाड़ कँ पाने वाली, िठठुरन भरी, कोहरे भरी, हल्की, सुहावनी, लंबी, तीखी
सूय तेज़, पचंड, दहकता, सुनहरा, गुनगुना, चमकीला, जीवनदायी, ढलता, उगता
अब इन्ह वाक्य म बरतकर दे खए — तभी शब्द अपना बनता है।
वशेषण वाक्य
छायादार दोपहर में हम उसी छायादार पीपल के नीचे बैठकर पढ़ ते है।ं
कड़ाके की पूस की कड़ ाके की सद में भी िकसान खेत में पानी लगाता रहा।
जीवनदायी सिद यों की जीवनदायी धूप पौधों को भी उतनी ही भाती है िजतनी हमें।
भुर भुर ी बािरश के बाद क्यारी की िम ी इतनी भुरभुरी हो गई िक बीज हाथ से ही बो िदए।
पहचानने का सूत्र: जस शब्द से पहले ‘कैसा / कैसी / कैसे’ पूछा जा सके, वही वशेषण है। ‘ म कैसी?’ —
काली, नम, भुरभुरी। ‘पेड़ कैसा?’ — घना, ऊँचा। ध्यान र खए, वशेषण अपने वशेष्य के लग के अनुसार बदल
जाता है — म काली, पर पेड़ काला।
पाठ म से भी चु नए: ‘पेड़ क बात’ म ही ऐसे कतने ही वशेषण भरे पड़े ह — सुकोमल प त्तयाँ, वषाक्त वायु,
मटमैली माट , अपरूप उपादान, रंग- बरंगे फूल, हरा-भरा शरीर। इन्ह रेखां कत क जए और अपने बॉक्स म जोड़
ली जए।
मेरे प्रय — पृष्ठ 154
पाठ से आगे
पाठ से आगे अपनी बात
प्र.1 नीचे द गई ता लका से प्रत्येक के लए अपनी पसंद के तीन-तीन नाम ल खए— फूल | पक्षी | वृक्ष | पुस्तक |
खेल
यह आपक अपनी पसंद का प्रश्न है, इस लए हर ब े क ता लका अलग होगी। पर अ े उत्तर क तीन शत ह —
1. नाम सही और पूरे ल खए (‘लाल फूल’ नह , गुड़हल; ‘ च ड़या’ नह , गौरैया)।
2. वही चु नए जसे आपने सचमुच दे खा या पढ़ा हो — नाम कह से रटकर मत ल खए।
3. हर नाम के आगे मन म एक कारण र खए, क्य क शक्षक पूछ सकते ह — “यही क्य ?”
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
नमूना उत्तर:
फूल पक्षी वृक्ष पुस्तक खेल
गेंद ा गौरै या नीम म ार (हमारी िहंद ी की पाठ पुस्तक ) कब ी
गुड़हल मोर पीपल पंचतंत्र की कहािनयाँ खो-खो
कमल कोयल आम मुंशी पेमचंद की कहािनयाँ ि के ट
क्र
और य द कारण भी बताना हो —
मेरी पसंद क्य
गेंद ा क्योंिक यह कम दे खभाल में भी िखलता है और हर त्योहार पर हमारे दरवाज़ े की बंद नवार में लगता है।
गौरै या क्योंिक वह हमारे आँग न में घोंस ला बनाती है; आजकल शहरों में कम िदखती है, इसिलए उसे बचाना ज़ रूरी है।
नीम क्योंिक उसकी छाया सबसे ठं डी होती है और उसकी पि याँ दवा का काम करती है।ं
पंचतंत्र की कहािनयाँ क्योंिक उसमें पशु-पक्षी बोलते है ं और हर कहानी के अंत में एक सीख िमलती है।
कब ी क्योंिक इसमें कोई सामान नही ं चािहए , के वल साँस , फु त और सािथयों का भरोसा चािहए।
कक्षा क ग त व ध: सबक ता लकाएँ मलाकर दे खए क कस फूल, पक्षी, वृक्ष, पुस्तक और खेल का नाम सबसे
ज़्यादा बार आया। उसी को ‘कक्षा का प्रय’ घो षत क जए और चाट-पेपर पर लखकर लगाइए। यह पाठ के
अनुरूप भी है — पेड़ भी अपने ‘बंधु-बांधव ’ को बुलाकर मलकर उत्सव मनाता है।
आज क पहेली — पृष्ठ 154
पाठ से आगे
पाठ से आगे बू झो तो जान
प्र.1 इस शब्द सीढ़ म पाठ म आए शब्द ह। उन्ह पूरा क जए और पाठ म रेखां कत क जए— (सीढ़ म दए गए अक्षर
— रा, मा, म, ल्ल, सं, ना, ज, त, क)
पहले सीढ़ का नयम सम झए। यह साधारण वग-पहेली नह , सीढ़ है — इस लए हर शब्द अगले शब्द से एक खाने म जुड़ा हुआ
है :
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
एक शब्द का आिख़ री अक्षर = अगले शब्द का पहला अक्षर
और शब्द बारी-बारी से आड़ े (→) तथा खड़ े (↓) पढ़ े जाते है।ं
इसी नयम से पूरी सीढ़ म बारह शब्द बनते ह। पूरा क्रम यह है —
रात → तमाम → ममता → ताप → पल्लव → वसंत → तना → नाम → मज़बूत → तरल → लटक → कम
क्रम दशा अक्षर क संख्या पुस्तक म दया अक्षर पूरा शब्द
1 आड़ा → 2 रा (पहला) रात
2 खड़ा ↓ 3 मा (बीच का) तमाम
3 आड़ा → 3 म (बीच का) ममता
4 खड़ा ↓ 2 — ताप
5 आड़ा → 3 ल्ल (बीच का) पल्लव
6 खड़ा ↓ 3 सं (बीच का) वसंत
7 आड़ा → 2 ना (अं तम) तना
8 खड़ा ↓ 2 ना (पहला — वही खाना) नाम
9 आड़ा → 4 ज (दूसरा) और त (अं तम) मज़ बूत
10 खड़ा ↓ 3 त (पहला — वही खाना) तरल
11 आड़ा → 3 क (अं तम) लटक
12 खड़ा ↓ 2 क (पहला — वही खाना) कम
अब दूसरा काम — इन शब्द को पाठ म रेखां कत क जए। हर शब्द इसी पाठ से लया गया है :
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात
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शब्द पाठ क पं क्त
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रात
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“इस लए रात का अँधेरा घरने तक वे छपे रहते ह।”
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तमाम
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ममता “मेरे वचार से माँ क ममता ही वह म ण है।” 147
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ताप
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“ईंधन को जलाने पर जो प्रकाश व ताप बाहर प्रकट होता है…” 147 ag
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पल्लव
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“सूय- करण का स्पश पाकर ही पेड़ पल्ल वत होता है।” (शब्द ‘पल्लव’ इसी के भीतर है) 147
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वसंत “स दय के बाद वसंत आया।” 145
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तना
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“जो अंश ऊपर क ओर बढ़ता है, उसे तना कहते ह।” 145
e m. “उसका नाम जड़ है…”
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नाम 145
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तरल “वे केवल तरल द्रव्य या वायु से भोजन ग्रहण करते ह।” 146
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लटक
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“जड़ घूमकर नीचे क ओर लटक गई।” 146
कम “शायद पेड़ भी कम प्रफु ल्लत नह होते!” 148
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.cबीच म ‘ल्ल’ और तीन अक्षर वाला पाठ का शब्द केवल पल्लव ही है। उसीagसे आगे-पीछे क क ड़याँ खुलती
पहेली सुलझाने क तरक ब: सबसे पहले वह शब्द भ रए जसम सबसे अनोखा अक्षर दया हो। यहाँ ‘ल्ल’ ऐसा ही
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aseचली जाती ह : पल्लव का पहला अक्षर ‘प’ माने पछला शब्द ‘प’ पर ख़त्म होगा — यानी ताप; और आ ख़री अक्षर
है —
agl ‘व’ माने अगला शब्द ‘व’ से शुरू होगा — यानी वसंत।
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m . a
ase
मलान क जए: ये उत्तर पुस्तक के अंत म, पृष्ठ 165 पर द गई ‘पहे लय के उत्तर’ ता लका से भी जाँचे जा सकते
agl
ह — वहाँ पाठ 13 ‘पेड़ क बात’ के सामने यही बारह शब्द छपे ह।
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खोजबीन के लए — पृष्ठ 154
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
पाठ से आगे
पाठ से आगे प रयोजना
प्र.1 इंटरनेट क ड़य का प्रयोग करके आप जगद शचंद्र बसु के बारे म और जान-समझ सकते ह— • जगद शचंद्र बसु •
जगद शचंद्र बसु— एक वलक्षण और संवेदनशील वै ा नक
यह खोजबीन क ग त व ध है। इंटरनेट पर ये दोन शीषक खो जए, और जो पढ़ उसे अपनी लेखन-पु स्तका म अपने शब्द म
उता रए — नकल मत क जए। खोज को दशा दे ने के लए ये प्रश्न सामने र खए :
1. जगद शचंद्र बसु का जन्म कब और कहाँ हुआ? बचपन कैसा बीता?
2. उन्ह ने पौध के बारे म क्या सद्ध कया, और उसके लए कौन-सा यंत्र बनाया?
3. रे डयो तरंग पर उनका काम क्य महत्वपूण माना जाता है?
4. उन्ह ने अपनी खोज का पेटट क्य नह लया? इससे उनके स्वभाव के बारे म क्या पता चलता है?
5. उन्ह ने व ान के अलावा और क्या लखा?
नमूना उत्तर (खोज के बाद तैयार प रचय):
बदु जानकारी
जीवनकाल 1858–1937 (पुस्तक में िचत्र के नीचे यही वष िदए गए है)ं । जन्म बंग ाल में; बचपन पकृ ित का अवलोकन करते हुए बीता।
कायक्षेत्र जीविव ान, भौितकी, वनस्पित िव ान और िव ान कथा ले खन — इसीिलए उ न्हे ं बहिु वद् (अनेक िवषयों का ाता) कहा गया
है।
सबसे बड़ ी उ न्होंने िस द्ध िकया िक पौधों का भी एक िनिश्चत जीवनच और पजनन पणाली होती है तथा वे अपने पिरवेश के पित जागरूक
क्र
खोज होते है।ं इस तरह वे यह स्थािपत करने वाले िवश्व के पहले व्यिक्त बने िक पौधे िकसी भी अन्य जीव रूप के समान होते है।ं
दू स री बड़ ी उ न्होंने सवपथम रे िडयो तरंगों के ारा संचार स्थािपत िकया — आज का बेतार संचार इसी िदशा का िवस्तार है।
खोज
‘संवेद नशील ’ क्योंिक उ न्होंने पौधों को के वल वस्तु नही,ं अनुभव करने वाला जीव माना। ‘पेड़ की बात’ में पेड़ हँस ता है, बुल ाता है और संतान
क्यों के िलए सब कु छ लुटा दे ता है — यह वै ािनक की क़ लम से िनकली क रुणा है।
‘िवल क्षण’ क्यों क्योंिक उ न्होंने भौितकी और वनस्पित िव ान — दो अलग िदशाओं में एक साथ काम िकया, और किठन िव ान को िचत्रात्मक
सािहित्यक स्वरूप दे क र बच्चों तक पहचु ँ ा िदया।
इस पाठ से ‘पेड़ की बात’ मूल रूप से बांग्ला में िलखी गई थी; इसका िहंद ी अनुवाद शंक र से न ने िकया है।
जुड़ाव
खोजबीन का सही तरीका: (1) कम-से-कम दो अलग ोत से जाँ चए — य द दोन जगह एक ही बात मले
तभी ल खए। (2) सन् और नाम ध्यान से उता रए। (3) हर जानकारी के आगे ोत का नाम ल खए। (4) इंटरनेट
का प्रयोग बड़ क दे खरेख म ही क जए।
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
आगे ब ढ़ए: कक्षा म ‘हमारे वै ा नक’ नाम से एक द वार-प त्रका बनाइए। उसम जगद शचंद्र बसु के साथ सी.वी.
रामन, होमी जहाँगीर भाभा, वक्रम साराभाई, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और जानक अम्माल जैसे नाम भी जो ड़ए —
हर एक का चत्र, एक खोज और एक वाक्य।
अध्याय — एक नज़र म
रचना का नाम ‘पेड़ क बात’ है। लेखक ह जगद शचंद्र बसु (1858–1937) और अनुवादक ह शंकर सेन। पाठ के बाद
दया गया ‘लेखक से प रचय’ बताता है क बसु जीव व ान, भौ तक , वनस्प त व ान तथा व ान कथा लेखन म रु च रखने
वाले बहु वद् व्य क्त थे। उन्ह ने सद्ध कया क पौध का भी एक न त जीवनचक्र और प्रजनन प्रणाली होती है और वे अपने
प रवेश के प्र त जागरूक होते ह। रे डयो तरंग ारा संचार ा पत करने क बड़ी खोज भी उन्ह ने ही सबसे पहले क थी।
बीज से अंकुर तक — बीज महीन म के नीचे पड़ा रहा। स दय के बाद वसंत आया, फर वषा क पहली बूँद पड़ और
बीज का ढक्कन दरक गया। दो सुकोमल प त्तय के बीच से अंकुर नकला — एक अंश नीचे माट म गड़ गया (जड़) और
दूसरा माट भेदकर ऊपर उठा (तना)। गमले को औंधा लटकाकर कया गया प्रयोग और मूली काटकर बोने का उदाहरण यही
सद्ध करते ह क पौधे को जस तरह भी रखो, जड़ नीचे जाएगी और तना ऊपर उठे गा।
पेड़ का भोजन — पेड़-पौध के दाँत नह होते, इस लए वे केवल तरल द्रव्य या वायु से भोजन लेते ह। जड़ माट म घुले द्रव्य
का रस-पान करती ह; सूक्ष्मदश से दे खने पर पेड़ म हज़ार -हज़ार नल दखाई दे ते ह जनसे रस का संचार होता है। पत्त म
अन गनत छोटे -छोटे मुँह और ह ठ होते ह, जो सूय के प्रकाश क सहायता से ‘अंगारक’ वायु (काबन डाइऑक्साइड) से अंगार
ख च लेते ह और हवा को शुद्ध कर दे ते ह।
पाठ का कद्र य वाक्य — ‘प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है।’ वन म पेड़ इस होड़ म रहते ह क कौन पहले सर उठाकर प्रकाश
झपट ले; बेल-लताएँ इसी लए पेड़ से लपटकर ऊपर चढ़ती ह। ईंधन जलाने पर मलने वाला प्रकाश और ताप भी असल म
सूय क ही ऊजा है, जो पेड़ के रेशे-रेशे म बँधी थी। लेखक का नष्कष है — अनाज और सब्ज़ी खाकर हम भी वास्तव म
प्रकाश क ही खुराक पाते ह।
फूल, बीज और अंत — बीज क सुरक्षा के लए पेड़ पंखु ड़य का छोटा-सा घर (फूल) बनाता है, रंग और सुगंध से
मधुमक्खी- ततली-पतंग को बुलाता है, और वे एक फूल के पराग-कण दूसरे फूल तक पहुँचा दे ती ह। फर पेड़ अपने शरीर का
रस पलाकर बीज का पोषण करता है, स्वयं सूख जाता है, हवा का एक थपेड़ा भी नह सह पाता और अंत म जड़ स हत गर
पड़ता है — ‘इस तरह संतान के लए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त हो जाता है।’
भाषा क खूबी — पूरा लेख मानवीकरण पर टका है : बीज ‘सोता’ है, अंकुर ‘ सर उठाकर’ नई दु नया दे खता है, पेड़
‘हँसता’ है, ‘बंधु-बांधव को बुलाता’ है और संतान पर सब लुटा दे ता है। क ठन वै ा नक बात को लेखक ने रोज़मरा के
उदाहरण (गमला, मूली, चीनी का घुलना, पारस पत्थर) से समझाया है। पाठ के बाद पृष्ठ 155–156 पर ‘पढ़ने के लए’ म
क व प्रद प का गीत ‘आओ ब ो, तुम्ह दखाएँ झाँक हदुस्तान क ’ दया गया है, फर पृष्ठ 157–164 पर पूरी पुस्तक का
शब्दकोश और पृष्ठ 165 पर पहे लय के उत्तर।
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कक्षा 6 हद अध्याय 13 पेड़ क बात AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
पाठ का अथ पाठ क पं क्त अपना एक वाक्य
शब्द
अंकुर बीज फू टने पर िनकला नया “दो सुकोमल प त्तय के बीच अंकुर बाहर बा रश के बाद क्यारी म चने के अंकुर
कोमल अंश नकला।” नकल आए।
दरकना फटना, दरार पड़ जाना “बीज का ढक्कन दरक गया” गरमी म तालाब सूखकर उसक ज़मीन
जगह-जगह दरक गई।
अंगारक काबन; पाठ में — काबन “उसे ‘अंगारक’ वायु कहते ह।” पत्ते अंगारक वायु लेकर हम शुद्ध हवा
डाइऑक्साइड वायु लौटा दे ते ह।
सूक्ष्मदश बहुत बारीक चीज़ें दे खने वाला यंत्र “सूक्ष्मदश से अत्यंत सूक्ष्म पदाथ स्पष्ट रूप से प्रयोगशाला म हमने सूक्ष्मदश से पत्ती क
दे खे जा सकते ह।” को शकाएँ दे ख ।
नःशेष िबलकु ल समाप्त, कु छ भी शेष न “‘अंगारक’ वायु से अंगार नःशेष कर डालते सफ़ाई अ भयान म गली का कूड़ा नःशेष
रहना ह” हो गया।
आबद्ध बँध ा हुआ , जकड़ा हुआ “पेड़-पौध के रेशे-रेशे म सूरज क करण इस पुरानी पोथी म गाँव का पूरा इ तहास
आबद्ध ह।” आबद्ध है।
पल्ल वत प ों से भर जाना, फलना-फू लना “सूय- करण का स्पश पाकर ही पेड़ पल्ल वत अ े शक्षक के सा न्नध्य म ब क
होता है।” प्र तभा पल्ल वत होती है।
चरकाल बहत
ु लंबा समय “मधुमक्खी व ततली के साथ वृक्ष क हमारे दोन प रवार म चरकाल से मेल-
चरकाल से घ नष्ठता है।” जोल है।
अपरूप कु रूप, भ ा “इस अपरूप उपादान से कस तरह ऐसे सुंदर कुम्हार अपरूप म से सुंदर सुराही गढ़
फूल खलते ह” दे ता है।
उपादान वह द व्य िजससे कोई वस्तु बनती “इस अपरूप उपादान से…” बाँस और म ही इस झ पड़ी के मुख्य
है, कच्ची सामग ी उपादान ह।
क्षीण दुबल, घट जाना “अपने ही शरीर का भार उठाने क श क्त लगातार बीमारी से दादाजी क आवाज़
क्षीण हो चली है।” क्षीण हो गई है।
न्योछावर अपण कर दे ना, कु ब न कर दे ना “संतान के लए अपना जीवन न्योछावर करके सै नक दे श क रक्षा म अपना सब कुछ
वृक्ष समाप्त हो जाता है।” न्योछावर कर दे ते ह।
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