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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा6
एनसीईआरट समाधान
अध्याय 1: ग णत म पैटन
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — ग णत प्रकाश
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
1 – 12 7 27 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 34 pages
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 6 · ग णत · ग णत प्रकाश
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: ग णत म पैटन
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक ग णत प्रकाश (क ा 6) के अध्याय 1 — ग णत म पैटन के सभी प्रश्न के वस्तृत, चरण-दर-चरण हल। पृष्ठ 2, 3, 5, 8,
11 और 12 के प्रत्येक “आइए, पता लगाएँ” प्रश्न का उत्तर कारण एवं चत्र स हत दया गया है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
ग णत प्रकाश (कक्षा 6) 1 – 12
खं ड प्रश्न
7 27
माध्यम
हन्द
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 2
अनुभाग 1.1 ग णत क्या है?
ग णत चचा
प्र.1 क्या आप अन्य उदाहरण के वषय म सोच सकते ह, जहाँ ग णत दै नक जीवन म हमारी सहायता करता है?
हाँ — दन भर म हम जो कुछ भी करते ह, उसम कह न कह ग णत छपा होता है। कुछ उदाहरण जन पर आप क ा म चचा कर
सकते ह—
खरीदारी — बल जोड़ना, छू ट ( डस्काउं ट) नकालना, दुकानदार ारा लौटाए गए पैसे क जाँच करना।
खाना बनाना — आटा और पानी नापना, अ धक मेहमान के लए व ध (रे सपी) को दोगुना करना।
यात्रा — रेल समय-सारणी पढ़ना, चाल, दूरी और समय नकालना, आवश्यक पे ोल का अनुमान लगाना।
धन — जेबखच बचाना, मा सक बजट बनाना, बक पासबुक म ब्याज समझना।
खेल — क्रकेट म रन रेट, बल्लेबाज़ी औसत, अंक ता लका, कैरम या ब लयड् स म कोण।
घर म — कमरा नापना, फश के लए टाइल गनना, भूखंड का ेत्रफल ात करना।
कला और डज़ाइन — रंगोली और कोलम के पैटन, मं दर ापत्य म सम म त, साड़ी के बॉडर क दोहराई जाने वाली
डज़ाइन।
प्रौ ो गक — बारकोड और क्यू.आर. कोड, ड जटल चत्र, मौसम पूवानुमान, पासवड और गुप्त कोड।
ग णत चचा: आज आपने जहाँ-जहाँ कसी संख्या का उपयोग कया — उठने के समय से लेकर नाश्ते क क मत
तक — उसक सूची बनाइए और अपने मत्र क सूची से मलाइए।
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प्र.2 ग णत ने कस प्रकार मानव को आगे बढ़ाने के लए प्रे रत करने म सहायता क है? (आप उन उदाहरण के वषय
म वचार कर सकते ह जनम वै ा नक प्रयोग करना; अथव्यव ा और लोकतंत्र को चलाना; पुल , घर या अन्य
ज टल भवन का नमाण; ट .वी., मोबाइल फोन, कम्प्यूटर, साइ कल, रेलगाड़ी, कार, वायुयान, कैलडर, घड़ी
इत्या द बनाना स म्म लत ह।)
ग णत केवल पैटन का वणन ही नह करता — उसके स्पष्टीकरण आगे चलकर उपकरण बन जाते ह, और उन्ह उपकरण ने मानव
जीवन बदल दया है। कुछ प्रमुख उदाहरण—
व ान और अंत रक्ष — तार तथा ग्रह क ग त के पैटन से गुरुत्वाकषण का सद्धांत बना। इसी एक स्पष्टीकरण के कारण
आज हम उपग्रह प्र े पत करते ह, मोबाइल म जी.पी.एस. चलाते ह तथा चंद्रमा और मंगल तक रॉकेट भेजते ह।
अथव्यव ा और लोकतंत्र — ब कग, कर, बजट, जनगणना तथा चुनाव म करोड़ मत क गनती — सब अंकग णत और
सां ख्यक पर टके ह।
अ भयां त्रक और नमाण — पुल, बाँध और ऊँची इमारत ज्या म त तथा भार क सावधानीपूवक गणना से बनाई जाती ह,
ता क वे दशक तक सुर त खड़ी रह।
मशीन और उपकरण — कम्प्यूटर, मोबाइल और ट .वी. आधारी संख्याओं (0 और 1) तथा को डत संकेत पर चलते ह;
साइ कल के गयर, कार का इंजन और वायुयान का पंख — सभी ग णतीय रूप से अ भक ल्पत होते ह।
समय — कैलडर, घ ड़याँ और ग्रहण क भ वष्यवाणी सूय व चंद्रमा क ग त के पैटन से प्राप्त होती है।
च कत्सा — सां ख्यक से तय होता है क कोई नई औष ध वास्तव म काम करती है या नह , और जीनोम के पैटन पढ़कर
च कत्सक रोग क पहचान और उपचार करते ह।
ग णत चचा: यह प्रश्न चचा के लए है। ऊपर क सूची से कोई एक वषय चु नए, उसका एक वास्त वक भारतीय
उदाहरण (जैसे चंद्रयान मशन या स्टै चू ऑफ यू नट ) खो जए और क ा को बताइए क उसम कौन-सा ग णत
आवश्यक था।
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 3
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अनुभाग 1.2 संख्याओं म पैटन
ग णत चचा
प्र.1 क्या आप सारणी 1 म दए प्रत्येक अनुक्रम म पैटन क पहचान कर सकते ह?
1, 1, 1, 1, 1, 1, 1, … (सभी ‘1’)
1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, … (गणन संख्याएँ)
1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, … (िवषम संख्याएँ)
2, 4, 6, 8, 10, 12, 14, … (सम संख्याएँ)
1, 3, 6, 10, 15, 21, 28, … (ि भुजाकार संख्याएँ)
1, 4, 9, 16, 25, 36, 49, … (वग संख्याएँ)
1, 8, 27, 64, 125, 216, … (घन संख्याएँ)
1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, … (िवरहांक संख्याएँ)
1, 2, 4, 8, 16, 32, 64, … (2 की घाते)ं
1, 3, 9, 27, 81, 243, 729, … (3 की घाते)ं
अध्याय क सारणी 1 — दस संख्या अनुक्रम और उनके नाम।
हाँ। सारणी 1 का प्रत्येक अनुक्रम एक सरल नयम को बार-बार दोहराने से बनता है—
सभी ‘1’ — हर बार वही संख्या 1 लखी जाती है।
गणन संख्याएँ — पछली संख्या म 1 जो ड़ए।
वषम संख्याएँ — 1 से आरंभ क जए और 2 जोड़ते जाइए।
सम संख्याएँ — 2 से आरंभ क जए और 2 जोड़ते जाइए।
त्रभुजाकार संख्याएँ — पहले 2 जो ड़ए, फर 3, फर 4, फर 5 … (जोड़ी जाने वाली संख्या हर बार एक बढ़ जाती है)।
वग संख्याएँ — कसी गणन संख्या को स्वयं से गुणा क जए: 1×1, 2×2, 3×3, …
घन संख्याएँ — कसी गणन संख्या को स्वयं से तीन बार गुणा क जए: 1×1×1, 2×2×2, 3×3×3, …
वरहांक संख्याएँ — प्रत्येक संख्या अपने से पहले क दो संख्याओं का योग है (2+3 = 5, 3+5 = 8, 5+8 = 13)।
2 क घात — पछली संख्या को दोगुना क जए।
3 क घात — पछली संख्या को 3 से गुणा क जए।
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यह क्य महत्वपूण है: एक बार नयम शब्द म कह दे ने पर आप अनुक्रम को जतना चाह आगे बढ़ा सकते ह —
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फर संख्याएँ याद रखने क आवश्यकता ही नह रहती।
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प्र.2 सारणी 1 म दए प्रत्येक अनुक्रम को उसक अगली तीन संख्याओं स हत अपनी नोटबुक पर पुन: ल खए। प्रत्येक
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अनुक्रम के बाद, उस अनुक्रम म संख्याओं को बनाने वाले नयम को अपने शब्द म ल खए।
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1, 1, 1, 1, 1, 1, 1, … (सभी ‘1’)
(गणन संख्याएँ)
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1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, …
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1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, … (िवषम संख्याएँ)
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(सम संख्याएँ)
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1, 3, 6, 10, 15, 21, 28, … (ि भुजाकार संख्याएँ)
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1, 4, 9, 16, 25, 36, 49, … (वग संख्याएँ)
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1, 8, 27, 64, 125, 216, …
g l a (घन संख्याएँ)
1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, …
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ं संख्याएँ)
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1, 2, 4, 8, 16, 32, 64, … (2 की घाते)ं
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(3 की घाते)ं
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अध्याय क सारणी 1 — दस संख्या अनुक्रम और उनके नाम।
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प्रत्येक अनुक्रम क अगली तीन संख्याएँ नारंगी रंग म तथा नयम उसके साथ दया गया है।
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन AglaSem · NCERT Solutions
संख्या अनुक्रम सारणी 1 म दया अगली तीन अपने शब्द म नयम
अनुक्रम संख्याएँ
सभी ‘1’ 1, 1, 1, 1, 1, 1, 1, … 1, 1, 1 प्रत्येक संख्या 1 है। कुछ भी नह बदलता।
गणन संख्याएँ 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, … 8, 9, 10 पछली संख्या म 1 जो ड़ए।
वषम संख्याएँ 1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, … 15, 17, 19 1 से आरंभ करके 2 जोड़ते जाइए। ये 2 से वभाज्य नह
होत ।
सम संख्याएँ 2, 4, 6, 8, 10, 12, 14, 16, 18, 20 2 से आरंभ करके 2 जोड़ते जाइए। ये 2 के गुणज ह।
…
त्रभुजाकार 1, 3, 6, 10, 15, 21, 28, 36, 45, 55 पहले 2, फर 3, फर 4 … जो ड़ए। nव संख्या = 1 + 2 +
संख्याएँ … 3 + … + n।
वग संख्याएँ 1, 4, 9, 16, 25, 36, 49, 64, 81, 100 कसी गणन संख्या को स्वयं से गुणा क जए: n × n।
…
घन संख्याएँ 1, 8, 27, 64, 125, 216, 343, 512, 729 कसी गणन संख्या को स्वयं से तीन बार गुणा क जए: n ×
… n × n।
वरहांक संख्याएँ 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, … 34, 55, 89 प्रत्येक संख्या अपने ठ क पहले क दो संख्याओं का योग है।
2 क घात 1, 2, 4, 8, 16, 32, 64, 128, 256, 512 पछली संख्या को दोगुना क जए।
…
3 क घात 1, 3, 9, 27, 81, 243, 2187, 6561, पछली संख्या को 3 से गुणा क जए।
729, … 19683
संकेत: कसी त्रभुजाकार संख्या को शीघ्रता से जाँचने के लए Tn = n × (n + 1) ÷ 2 का उपयोग क जए। जैसे
10व त्रभुजाकार संख्या = 10 × 11 ÷ 2 = 55 — ठ क वही जो पैटन से मलती है।
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अनुभाग 1.3 संख्या अनुक्रम का दृश्यांकन
ग णत चचा
प्र.1 सारणी 2 म दए संख्या अनुक्रम को चत्रात्मक रूप से दशाने के लए अपनी नोटबुक म प्र त ल प बनाकर प्रत्येक
अनुक्रम के लए अगला चत्र बनाइए।
सभी ‘1’
1 1 1 1 1
गणन संख्याएँ
1 2 3 4 5
िवषम संख्याएँ
1 3 5 7 9
सम संख्याएँ
2 4 6 8 10
ि भुजाकार
संख्याएँ
1 3 6 10 15
वग संख्याएँ
1 4 9 16 25
घन संख्याएँ
1 8 27 64 125
अध्याय क सारणी 2 — सारणी 1 के प्रथम सात अनुक्रम का चत्रीय नरूपण।
प्रत्येक अनुक्रम का छठा चत्र नीचे बताया गया है — इसे सारणी 2 के पाँचव चत्र के ठ क बाद बनाइए।
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अनुक्रम पहले से बने चत्र अगला चत्र
सभी ‘1’ 1, 1, 1, 1, 1 एक और अके ला िबंद ु → 1
गणन संख्याएँ 1, 2, 3, 4, 5 6 िबंद ुओ ं की पंि त → 6
वषम संख्याएँ 1, 3, 5, 7, 9 11 िबंद ुओ ं की “L / T” आकृ ित → 11
सम संख्याएँ 2, 4, 6, 8, 10 6-6 िबंद ुओ ं की दो पंि तयाँ → 12
त्रभुजाकार संख्याएँ 1, 3, 6, 10, 15 6 पंि तयों का ि भुज → 21
वग संख्याएँ 1, 4, 9, 16, 25 6 × 6 िबंद ुओ ं का वग → 36
घन संख्याएँ 1, 8, 27, 64, 125 6 × 6 × 6 का घन → 216
1
3
6
10
15
त्रभुजाकार संख्याएँ 1, 3, 6, 10, 15 — प्रत्येक नए चत्र म नीचे एक पं क्त और जुड़ती है। अगले चत्र म 6 बदुओं क पं क्त होगी,
अथात् 21।
1
4
9
16
25
वग संख्याएँ 1, 4, 9, 16, 25 — प्रत्येक नए चत्र म एक पं क्त और एक स्तंभ जुड़ता है। अगला चत्र 6 × 6 = 36 है।
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प्र.2 1, 3, 6, 10, 15, ... त्रभुजाकार संख्याएँ क्य कहलाती ह? 1, 4, 9, 16, 25, ... वग संख्याएँ या वग क्य
कहलाती ह? 1, 8, 27, 64, 125, ... घन संख्याएँ या घन क्य कहलाती ह?
क्य क बदुओं को व्यव त करने पर वे जो आकार बनाते ह, नाम उसी पर आधा रत है—
त्रभुजाकार संख्याएँ — उतने बदुओं को एक पूण त्रभुज म सजाया जा सकता है: 1, 2, 3, 4, … बदुओं क पं क्तयाँ एक
के नीचे एक। जैसे 1 + 2 + 3 = 6 बदु 3 पं क्तय का त्रभुज बनाते ह, अत: 6 एक त्रभुजाकार संख्या है।
वग संख्याएँ — उतने बदुओं को एक पूण वगाकार ग्रड म सजाया जा सकता है जसम पं क्तय और स्तंभ क संख्या समान
हो। 4 = 2 × 2, 9 = 3 × 3, 25 = 5 × 5।
घन संख्याएँ — उतने बदुओं (या छोटे घन ) को एक ठोस घन म सजाया जा सकता है जसक लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई
बराबर हो। 8 = 2 × 2 × 2, 27 = 3 × 3 × 3, 125 = 5 × 5 × 5।
मुख्य वचार: संख्या को उसका नाम उस आकार से मलता है जसम उसे व्यव त कया जा सकता है। इसी लए
एक ही संख्या के एक से अ धक नाम भी हो सकते ह — अगला प्रश्न दे खए।
प्र.3 आपने ध्यान दया होगा क 36 एक त्रभुजाकार संख्या और वगाकार संख्या दोन है। अथात् 36 बदुओं को
त्रभुज और वग दोन म पूरी तरह व्यव त कया जा सकता है। इसे स्पष्ट करते हुए अपनी नोटबुक म चत्र
बनाइए।
हाँ — 36 एक साथ दो भू मकाएँ नभाती है—
ि भ ुज के रूप में: 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 + 7 + 8 = 36 (8 पंि तयाँ)
वग के रूप में: 6 × 6 = 36 (6 पंि तयाँ, पत्येक में 6)
36 = 1+2+ ⋯+8 (triangle) 36 = 6 × 6 (square)
वही 36 बदु — 8 पं क्तय के त्रभुज के रूप म, तथा 6 × 6 के वग के रूप म।
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इससे पता चलता है क संदभ के अनुसार एक ही संख्या अलग-अलग भू मकाएँ नभा सकती है। कुछ अन्य संख्याएँ भी एक से
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अ धक तरीक से दशाई जा सकती ह—
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1 त्रभुजाकार, वग और घन — तीन है।
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g64l वग (8 × 8) भी है और घन (4 × 4 × 4) भी।
16 वग (4 × 4) भी है और आयत (2 × 8) भी।
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क्या आप जानते ह? 1 और 36 के बाद अगली संख्या जो त्रभुजाकार और वग दोन है, 1225 है (= 35 × 35,
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तथा 1 + 2 + 3 + … + 49 भी)। ऐसी संख्याएँ बहुत
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आप संख्याओं के नम्न ल खत अनुक्रम को क्या कहगे? 1, 7, 19, 37 … इन्ह षड् भुजाकार (hexagonal)
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संख्याएँ कहते ह। इन्ह अपनी नोटबुक म बनाइए। अनुक्रम म अगली संख्या क्या होगी?
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इस प्रश्न के साथ छपा बदुओं का अनुक्रम, जन पर 1, 7, 19 और 37 अं कत ह।
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ये षड् भुजाकार संख्याएँ ह — बदु मलकर एक षड् भुज (छह भुजाओं वाली आकृ त) बनाते ह, जसके कद्र म एक बदु होता है
और उसके चार ओर बदुओं के छल्ले होते ह।
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षड् भुजाकार संख्याएँ 1, 7, 19, 37। प्रत्येक नए चत्र म बाहर क ओर एक छल्ला और जुड़ता है; इन छल्ल म 6, 12 तथा 18 बदु ह।
दे खए हर बार कतना जुड़ रहा है—
1 +6→ 7 +12→ 19 +18→ 37 +24→ 61
जोड़ी जाने वाली संख्याएँ 6, 12, 18, 24, … (6 के गुणज) ह। अत: अगले छल्ले म 24 बदु ह गे और
37 + 24 = 61
उत्तर: अगली षड् भुजाकार संख्या 61 है। अनुक्रम आगे इस प्रकार चलता है — 1, 7, 19, 37, 61, 91, 127, …
प्र.5 क्या आप ‘2 क घात’ के अनुक्रम का चत्रीय नरूपण कर सकते ह? ‘3 क घात’ का?
हाँ। यु क्त यह है क दखाया जाए क हर चत्र अपने से पछले चत्र क प्र त ल पय से बना है।
2 क घात — हर चत्र पछले चत्र क दो प्र त ल पयाँ है, अत: बदुओं क संख्या दोगुनी होती जाती है: 1, 2, 4, 8, 16, …
1 2
4 8
16
2 क घात: 1, 2, 4, 8, 16। हर चरण म पछला चत्र बस दो बार ले लया जाता है।
3 क घात — हर चत्र पछले चत्र क तीन प्र त ल पयाँ है, अत: बदुओं क संख्या तगुनी होती जाती है: 1, 3, 9, 27, …
1
3
9
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3 क घात: 1, 3, 9, 27। एक बदु; त्रभुज म तीन बदु; ऐसे तीन त्रभुज; फर ऐसे तीन समूह।
यह चत्र क्य उपयोगी है: इससे एक ही नज़र म स्पष्ट हो जाता है क संख्याएँ इतनी तेज़ी से क्य बढ़ती ह — हर
चरण पर पूरा चत्र 2 (या 3) बार प्र त ल पत हो जाता है। इसे ही दोगुना करना और तगुना करना कहते ह।
पाठ्य प्रश्न — पृष्ठ 7
अनुभाग 1.4 संख्या अनुक्रम के बीच संबंध
प्र.1 इसी प्रकार एक अन्य चत्र बनाकर, क्या आप यह बता सकते ह क प्रथम 10 वषम संख्याओं का योग क्या है?
1 से आरंभ करके वषम संख्याओं को जोड़ने पर सदै व वग संख्या प्राप्त होती है, और उत्तर उस बात का वग होता है क आपने
कतनी वषम संख्याएँ जोड़ ।
1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 = 36
6 × 6 बदुओं का वग, जसे 1, 3, 5, 7, 9 और 11 बदुओं क मुड़ी हुई “L” परत म बाँटा गया है। इसी लए 1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 =
36।
यहाँ हम प्रथम 10 वषम संख्याएँ जोड़ रहे ह, अत: चत्र 10 × 10 का वग होगा—
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1 + 3 + 5 + 7 + 9 + 11 + 13 + 15 + 17 + 19 = 10 × 10 = 100
उत्तर: 100।
प्र.2 अब एक ऐसे ही चत्र क कल्पना क जए या आवश्यकतानुसार आं शक चत्र बनाकर क्या आप बता सकते ह क
प्रथम 100 वषम संख्याओं का योग क्या है?
अब सभी बदु बनाने क आवश्यकता नह — नयम स्पष्ट है। प्रथम n वषम संख्याओं का योग n × n होता है। अत: 100 वषम
संख्याओं के लए हम 100 × 100 के वग क कल्पना करते ह—
1 + 3 + 5 + … + 197 + 199 = 100 × 100 = 10 000
उत्तर: 10,000।
बड़ा वचार: चत्र केवल सजावट नह है। चूँ क ऐसा वग कसी भी माप के लए बनाया जा सकता है, अत: यह चत्र
सद्ध करता है क पैटन सदै व चलता रहेगा — 10 के लए, 100 के लए, दस लाख वषम संख्याओं के लए भी।
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 8 और 9
अनुभाग 1.4 संख्या अनुक्रम के बीच संबंध
प्रयास कर
प्र.1 गणन संख्याओं को ऊपर और नीचे जोड़ने पर अथात् 1, 1 + 2 + 1, 1 + 2 + 3 + 2 + 1, ..., से वग संख्याएँ क्य
प्राप्त होती ह, क्या आप इसके लए एक चत्रीय स्पष्टीकरण दे सकते ह?
हाँ। बदुओं के वगाकार ग्रड को “L” आकृ तय के ान पर तरछे वकण के अनुसार रं गए।
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1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 + 5 + 4 + 3 + 2 + 1 = 36
6 × 6 का वग, वकण के अनु दश काटा गया। वकण म 1, 2, 3, 4, 5, 6, 5, 4, 3, 2, 1 बदु ह — अथात् ऊपर और फर नीचे क ओर
गनती।
6 × 6 वग क प्रत्येक तरछ रेखा पर बदु ग नए। ऊपरी बाएँ कोने से आरंभ करने पर उनम ह गे—
1, 2, 3, 4, 5, 6, 5, 4, 3, 2, 1 िबंद ु
वग का प्रत्येक बदु ठ क एक ही वकण पर त है, अत:
1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 + 5 + 4 + 3 + 2 + 1 = 6 × 6 = 36
ऐसा चत्र कसी भी माप के वग के लए बनाया जा सकता है, जससे स्पष्ट है क गणन संख्याओं को ऊपर और फर नीचे जोड़ने पर
सदै व वग संख्या ही प्राप्त होती है।
प्र.2 इस चत्र के बड़े संस्करण क कल्पना करके या आवश्यकतानुसार उसका आं शक चत्र बनाकर, क्या आप ात
कर सकते ह क 1 + 2 + 3 + ... + 99 + 100 + 99 + ... + 3 + 2 + 1 का मान क्या होगा?
ऊपर के चत्र म बीच क सबसे बड़ी संख्या ही वग क भुजा बताती है। यहाँ बीच क संख्या 100 है, अत: 100 × 100 बदुओं के
वग क कल्पना क जए।
1 + 2 + 3 + … + 99 + 100 + 99 + … + 3 + 2 + 1 = 100 × 100 = 10 000
उत्तर: 10,000।
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as e
क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन
a g l AglaSem · NCERT Solutions
. com
होता है? जब आप सभी ‘1’ वाले अनुक्रम को ऊपर और नीचे जोड़ते ह, तब कौन-सा अनुक्रeमm
प्र.3 जब आप सभी ‘1’ वाले अनुक्रम को ऊपर क ओर जोड़ना प्रारंभ करते ह, तब आपको कौन-सा अनुक्रम प्राप्त
m a s
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प्राप्त होता है?
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उत्तर as
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(क) ‘1’ को ऊपर क ओर जोड़ने पर—
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1+1+1=3
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1+1+1+1=4 …
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l सभी ‘1’ को ऊपर और नीचे जोड़ने पर—
प्राप्त होता है 1, 2, 3, 4, 5, … — गणन संख्याओं का अनुक्रम।
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1=1
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1+1+1=3
1+1+1+1+1=5
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1+1+1+1+1+1+1=7 …
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प्राप्तm .coहै 1, 3, 5, 7, 9, … — वषम संख्याओं का अनुक्रम। a g l
se
होता
g l a
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क्य : ऊँचाई n तक “ऊपर और नीचे” जाने म ऊपर जाते समय n इकाइयाँ और नीचे आते समय n − 1 इकाइयाँ
a se
com l
लगती ह, अथात् कुल n + (n − 1) = 2n − 1 — और 2n − 1 ठ क nव वषम संख्या है।
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प्र.4 जब आप गणन संख्याओं को ऊपर क ओर जोड़ना प्रारंभ करते ह, तब आपको कौन-सा अनुक्रम प्राप्त होता है?
क्या आप एक छोटे से चत्र के माध्यम से स्पष्टीकरण दे सकते ह?
1=1
1+2=3
1+2+3=6
1 + 2 + 3 + 4 = 10
1 + 2 + 3 + 4 + 5 = 15 …
प्राप्त होता है 1, 3, 6, 10, 15, … — त्रभुजाकार संख्याओं का अनुक्रम।
1 + 2 + 3 + 4 + 5 = 15
1, 2, 3, 4 और 5 बदुओं क पं क्तयाँ एक के नीचे एक रखने पर 15 बदुओं का त्रभुज बनता है। इसी लए इन योग को त्रभुजाकार
संख्याएँ कहते ह।
चत्र से बात तुरंत स्पष्ट हो जाती है: 1 बदु क पं क्त, फर 2 बदुओं क , फर 3 बदुओं क … एक के नीचे एक रखने से त्रभुज
स्वयं बन जाता है। अत: गणन संख्याओं के क्र मक योग ही त्रभुजाकार संख्याएँ ह।
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.5 जब आप क्रमागत त्रभुजाकार संख्याओं के युग्म को जोड़ते ह तब क्या होता है? उदाहरण के लए, 1 + 3, 3 +
6, 6 + 10, 10 + 15, … को ली जए। आपको कौन-सा अनुक्रम मलता है? क्य ? क्या आप इसे एक चत्र ारा
स्पष्ट कर सकते ह?
1+3=4 3+6=9 6 + 10 = 16 10 + 15 = 25 15 + 21 = 36
प्राप्त होता है 4, 9, 16, 25, 36, … — वग संख्याओं का अनुक्रम।
10 + 15 = 25
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन AglaSem · NCERT Solutions
5 × 5 का वग उसके वकण से बँटा हुआ: हरा भाग 15 बदुओं का त्रभुज और नारंगी भाग 10 बदुओं का त्रभुज। दोन मलकर 10 + 15
= 25।
ऐसा क्य होता है: बदुओं के वग को उसके मुख्य वकण के अनु दश का टए। एक भाग ( वकण स हत) बदुओं का
त्रभुज बनता है और दूसरा भाग उससे ठ क पहले वाला, थोड़ा छोटा त्रभुज। अत: दो क्रमागत त्रभुजाकार संख्याएँ
सदै व मलकर एक वग को पूरा भर दे ती ह।
प्र.6 जब आप 1 से प्रारंभ करते हुए 2 क घात को जोड़ना प्रारंभ करते ह तब क्या होता है? उदाहरण के लए, 1, 1 +
2, 1 + 2 + 4, 1 + 2 + 4 + 8, … ली जए। अब, इनम से प्रत्येक संख्या म 1 जोड़ द जए— आप कौन-सी
संख्याएँ प्राप्त करते ह? ऐसा क्य होता है?
चरण 1 — क्र मक योग—
1=1
1+2=3
1+2+4=7
1 + 2 + 4 + 8 = 15
1 + 2 + 4 + 8 + 16 = 31 …
प्राप्त होता है 1, 3, 7, 15, 31, … — प्रत्येक संख्या 2 क कसी घात से एक कम है।
चरण 2 — प्रत्येक म 1 जोड़ने पर—
1+1=2 3+1=4 7 + 1 = 8 15 + 1 = 16 31 + 1 = 32
प्राप्त होता है 2, 4, 8, 16, 32, … — पुन: 2 क घात!
ऐसा क्य होता है: दोगुना करने वाला चत्र सो चए। 1 + 2 + 4 + 8 बदुओं के ढे र म एक और अकेला बदु जोड़
द जए। अब 1 + 1 = 2, वह 2 अगले 2 से मलकर 4 बनाता है, वह 4 अगले 4 से मलकर 8, और इसी प्रकार सब
कुछ मलकर 16 का एक ही ढे र बन जाता है। सं ेप म—
1 + 2 + 4 + … + 2n−1 = 2n − 1, अत: 1 जोड़ने पर ठ क 2n प्राप्त होता है।
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प्र.7 जब आप त्रभुजाकार संख्याओं को 6 से गुणा करते ह और 1 जोड़ते ह तो क्या होता है? आपको कौन-सा
अनुक्रम मलता है? क्या आप इसे चत्र के माध्यम से समझा सकते ह?
(1 × 6) + 1 = 7
(3 × 6) + 1 = 19
(6 × 6) + 1 = 37
(10 × 6) + 1 = 61
(15 × 6) + 1 = 91
प्राप्त होता है 7, 19, 37, 61, 91, … — षड् भुजाकार संख्याओं का अनुक्रम (पृष्ठ 5 के प्रश्न 4 वाला)।
6 × 6 + 1 = 37
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a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
षड् भुजाकार संख्या 37 = 6 × 6 + 1। काला बदु कद्र है; उसके चार ओर छह रंगीन खंड 6-6 बदुओं के छह एकसमान त्रभुज ह।
se m.
o m l a
g मलते ह। कद्र का बदु
m .c है: षड् भुज छह एकसमान त्रभुज से बना होता है जो एक कद्र य बदुaपर
हटाaदse
ऐसा क्य होता
g l जए तो शेष बदु 6 बराबर त्रभुजाकार समूह म बँट जाते ह। अत: प्रत्येक षड् भुजाकार संख्या = “6 × कोई
a त्रभुजाकार संख्या + बीच का 1 बदु”।
com
e m . ag
g l as
a
प्र.8 जब आप षड् भुजाकार संख्याओं को जोड़ना प्रारंभ करते ह तब क्या होता है? उदाहरण के लए, 1, 1 + 7, 1 + 7
+ 19, 1 + 7 + 19 + 37, … ली जए। आप कौन-सा अनुक्रम प्राप्त करते ह? क्या आप इसे एक घन के चत्र का
उपयोग करते हुए स्पष्ट कर सकते ह?
co m
em.
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a gl 1 = 1
1+7=8
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1 + 7 + 19 = 27
g l a
1 + 7 + 19 + 37 = 64
a
1 + 7 + 19 + 37 + 61 = 125
co m
m .
m as e
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प्राप्त होता है 1, 8, 27, 64, 125, … — घन संख्याओं का अनुक्रम।
m
eऐसा a
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agl क्य होता है (घन वाला चत्र): छोटे इकाई घन से एक घन बनाइए — एक बार म एक परत।
1 छोटे घन से आरंभ क जए — यही 1 × 1 × 1 का घन है।
se m
com g l a
. a
इसे 2 × 2 × 2 का घन बनाने के लए 7 और छोटे घन जोड़ने पड़गे (8 − 1 = 7)।
m
ase
उसे 3 × 3 × 3 बनाने के लए 19 और (27 − 8 = 19)।
agl
4 × 4 × 4 तक पहुँचने के लए 37 और (64 − 27 = 37)।
m
प्रत्येक नई परत के घन क संख्या ठ क 1, 7, 19, 37, … अथात् षड् भुजाकार संख्याएँ ह। अत: षड् भुजाकार
. co
m
संख्याओं को जोड़ने पर घन परत-दर-परत बनता जाता है और योग घन संख्याएँ होती ह।
m as e
.co a g l
se m स्वयं जाँ चए: 8 − 1 = 7, 27 − 8 = 19, 64 − 27 = 37, 125 − 64 = 61। क्रमागत घन संख्याओं के अंतर ही
g l a
a षड् भुजाकार संख्याएँ ह।
c
m .
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.9 सारणी 1 म दए गए अनुक्रम म और उनके बीच स्वयं अपनी ओर से अन्य पैटन या संबंध खो जए। क्या एक चत्र
या कसी अन्य माध्यम से आप यह स्पष्ट कर सकते ह क ऐसा क्य होता है?
1, 1, 1, 1, 1, 1, 1, … (सभी ‘1’)
1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, … (गणन संख्याएँ)
1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, … (िवषम संख्याएँ)
2, 4, 6, 8, 10, 12, 14, … (सम संख्याएँ)
1, 3, 6, 10, 15, 21, 28, … (ि भुजाकार संख्याएँ)
1, 4, 9, 16, 25, 36, 49, … (वग संख्याएँ)
1, 8, 27, 64, 125, 216, … (घन संख्याएँ)
1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, … (िवरहाक
ं संख्याएँ)
1, 2, 4, 8, 16, 32, 64, … (2 की घाते)ं
1, 3, 9, 27, 81, 243, 729, … (3 की घाते)ं
अध्याय क सारणी 1 — दस संख्या अनुक्रम और उनके नाम।
कुछ पैटन नीचे दए गए ह — इनके अ त रक्त और भी खोजने का प्रयास क जए।
सम संख्याओं का योग: 2, 2 + 4 = 6, 2 + 4 + 6 = 12, 2 + 4 + 6 + 8 = 20 → 2, 6, 12, 20, 30 … ये ठ क
त्रभुजाकार संख्याओं के दोगुने ह, और प्रत्येक बदुओं का आयत है: 1 × 2, 2 × 3, 3 × 4, 4 × 5, …
वग संख्याओं के अंतर: 4 − 1 = 3, 9 − 4 = 5, 16 − 9 = 7, 25 − 16 = 9 → वषम संख्याएँ। (यह पृष्ठ 7 वाला “L”
चत्र ही है, उल्ट दशा म पढ़ा हुआ।)
घन संख्याओं के अंतर: 8 − 1 = 7, 27 − 8 = 19, 64 − 27 = 37 → षड् भुजाकार संख्याएँ।
घन संख्याओं का योग: 1 + 8 = 9, 1 + 8 + 27 = 36, 1 + 8 + 27 + 64 = 100 → त्रभुजाकार संख्याओं के वग: 3²,
6², 10²।
त्रभुजाकार × 8 + 1: (1×8)+1 = 9, (3×8)+1 = 25, (6×8)+1 = 49, (10×8)+1 = 81 → वषम संख्याओं के वग।
वरहांक संख्याएँ: पहली कुछ जो ड़ए — 1 + 2 + 3 + 5 = 11, जो 13 से 2 कम है (13 अगली-से-अगली वरहांक संख्या
है)। फर से क जए: 1 + 2 + 3 + 5 + 8 = 19 = 21 − 2। पैटन बना रहता है!
सम- वषम: 1 के बाद 2 क प्रत्येक घात सम है, जब क 3 क कोई भी घात कभी सम नह होती।
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन AglaSem · NCERT Solutions
प्रयास कर: सारणी 1 से कोई दो अनुक्रम चु नए और उनके पद को क्रमश: जो ड़ए। जैसे वषम + सम: 1 + 2 = 3,
3 + 4 = 7, 5 + 6 = 11 → 3, 7, 11, 15 … एक नया अनुक्रम जो हर बार 4 बढ़ता है। स्पष्ट क जए क ऐसा क्य
है।
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 11
अनुभाग 1.5 आकार म पैटन
ग णत चचा
प्र.1 क्या आप सारणी 3 के प्रत्येक अनुक्रम म पैटन क पहचान कर सकते ह?
सम बहुभजु
ि भ ुज चत ुभ ुज प ंच भ ुज ष ड् भ ुज
प्
स त भ ुज ष्
अ ट भ ुज न वभ ुज दशभ ुज
संपूण आलेख
K2 K3 K4 K5 K6
ढे िरत वग
ढे िरत ि भुज
कोच िहमकण
अध्याय क सारणी 3 — आकार अनुक्रम के पाँच उदाहरण।
हाँ। प्रत्येक आकार अनुक्रम एक स्पष्ट नयम पर चलता है—
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन AglaSem · NCERT Solutions
आकार अगला आकार बनाने का नयम संबं धत संख्या अनुक्रम
अनुक्रम
सम बहुभुज हर बार एक भुजा (और एक कोना) और जो ड़ए — त्रभुज, चतुभुज, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 …
पंचभुज, षड् भुज …
संपूण आलेख एक और बदु जो ड़ए और उसे पहले से मौजूद सभी बदुओं से मला 1, 3, 6, 10, 15 … (ि भुजाकार )
Kn द जए।
ढे रत वग छोटे वग क एक पं क्त और एक स्तंभ और जो ड़ए। 1, 4, 9, 16, 25 … (वग )
ढे रत त्रभुज नीचे छोटे त्रभुज क एक पं क्त और जो ड़ए। 1, 4, 9, 16, 25 … (वग )
कोच हमकण प्रत्येक रेखाखंड को 4 छोटे खंड वाले “ग त उभार” से बदल द जए। 3, 12, 48, 192 … (4 की घातों का 3
ु ा)
गन
1
4
9
16
25
ढे रत वग: 1, 4, 9, 16, 25 छोटे वग।
1
4
9
16
25
ढे रत त्रभुज: 1, 4, 9, 16, 25 छोटे त्रभुज (ऊपर क ओर हरे तथा नीचे क ओर पीले, दोन मलाकर)।
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 सारणी 3 के प्रत्येक अनुक्रम को अपनी नोटबुक म पुन: बनाने का प्रयास क जए। क्या आप प्रत्येक अनुक्रम म
अगले आकार को ख च सकते ह? क्य और क्य नह ? प्रत्येक अनुक्रम के बाद, अपने शब्द म उस नयम या पैटन
क व्याख्या क जए।
सम बहुभजु
ि भ ुज चत ुभज
ु पंचभ ुज षड्भ ुज
स तभ ुजप् ष्
अ टभ ुज नवभ ुज दशभ ुज
संपूण आलेख
K2 K3 K4 K5 K6
ढे िरत वग
ढे िरत ि भुज
कोच िहमकण
अध्याय क सारणी 3 — आकार अनुक्रम के पाँच उदाहरण।
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन
a g l AglaSem · NCERT Solutions
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चार अनुक्रम म हाँ, और पाँचव म “ स ांत रूप म ही”।
m a
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सम बहुभुज — दशभुज के बाद अगला आकार 11 भुजाओं वाला सम बहुभुज होगा। बनाना सरल है: सभी भुजाएँ बराबर
g l
a संपूण आलेख — अगला K7 है: एक वृत्त पर 7 बदु अं कत क जए और प्रत्येक युग्म को मलाइए। इसम 21 रेखाएँ ह गी,
और सभी कोने एक जैसे र खए।
co m
ag
अत: चत्र भीड़भाड़ वाला हो जाएगा, फर भी बनाया अवश्य जा सकता है।
m .
as e
ढे रत वग — अगले म 6 पं क्तयाँ, प्रत्येक म 6 छोटे वग = 36।
a g l
ढे रत त्रभुज — अगले म 6 पं क्तयाँ, कुल 36 छोटे त्रभुज।
कोच हमकण — अगला चरण बनाया तो जा सकता है, परंतु हर चरण म रेखाखंड 4 गुने हो जाते ह (3 → 12 → 48 →
m
192 → 768 …) और प्रत्येक 3 गुना छोटा। कुछ ही चरण के बाद उभार इतने सूक्ष्म हो जाते ह क उन्ह हाथ से बनाना या
co
m.
दे खना ही क ठन हो जाता है। अत: नयम तो पूणत: स्पष्ट है, पर चत्र शीघ्र ही प सल क सीमा से बाहर चला जाता है।
o m l a se
.cपं क्त म नयम: बहुभुज — एक भुजा जो ड़ए; संपूण आलेख — एक बदु
a gजोड़कर सबसे मलाइए;
e
एक-एक
m
ढेsरत वग/ त्रभुज — एक पं क्त जो ड़ए; कोच हमकण — हर खंड को 4 खंड वाले उभार से बद लए।
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m .co agl
आइए, पता लगाएँ — पृष्ठ 11 और 12
l a se
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन AglaSem · NCERT Solutions
अनुभाग 1.6 संख्या अनुक्रम से संबंध
प्रयास कर
प्र.1 सम बहुभुज के प्रत्येक आकार म भुजाओं क संख्या ात क जए। आपको कौन-सा संख्या अनुक्रम प्राप्त होता
है? कोन के वषय म आप क्या कहगे? क्या वही संख्या अनुक्रम प्राप्त होता है? क्या आप स्पष्ट कर सकते ह क
ऐसा क्य होता है?
सम बहुभजु
ि भ ुज चत ुभज
ु पंचभ ुज षड्भ ुज
स तभ ुजप् ष्
अ टभ ुज नवभ ुज दशभ ुज
संपूण आलेख
K2 K3 K4 K5 K6
ढे िरत वग
ढे िरत ि भुज
कोच िहमकण
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन AglaSem · NCERT Solutions
अध्याय क सारणी 3 — आकार अनुक्रम के पाँच उदाहरण।
आकार त्रभुज चतुभुज पंचभुज षड् भुज सप्तभुज अष्टभुज नवभुज दशभुज
भुजाएँ 3 4 5 6 7 8 9 10
कोने 3 4 5 6 7 8 9 10
दोन पं क्तय से एक ही अनुक्रम मलता है — 3 से आरंभ होने वाली गणन संख्याएँ: 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, …
दोन गणनाएँ सदै व बराबर क्य होती ह: सरल रेखाओं से बनी कसी बंद आकृ त क सीमा पर एक बार घू मए।
प्रत्येक भुजा कसी कोने पर समाप्त होती है और प्रत्येक कोने पर ठ क दो भुजाएँ मलती ह। अत: भुजाओं और
कोन म एक-से-एक संग त बन जाती है — हर भुजा को उसके अंत वाले कोने से जोड़ा जा सकता है। इस लए
कसी भी बंद आकृ त म भुजाओं क संख्या = कोन (शीष ) क संख्या, चाहे वह सम हो या न हो।
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 संपूण आलेख के प्रत्येक आकार म रेखाओं क संख्या ग नए। इससे आपको कौन-सा संख्या अनुक्रम प्राप्त होता
है? क्या आप स्पष्ट कर सकते ह क ऐसा क्य होता है?
सम बहुभजु
ि भ ुज चत ुभज
ु पंचभ ुज षड्भ ुज
स तभ ुजप् ष्
अ टभ ुज नवभ ुज दशभ ुज
संपूण आलेख
K2 K3 K4 K5 K6
ढे िरत वग
ढे िरत ि भुज
कोच िहमकण
अध्याय क सारणी 3 — आकार अनुक्रम के पाँच उदाहरण।
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन AglaSem · NCERT Solutions
संपूण आलेख K2 K3 K4 K5 K6 K7
बदु 2 3 4 5 6 7
रेखाएँ 1 3 6 10 15 21
प्राप्त होता है 1, 3, 6, 10, 15, 21, … — त्रभुजाकार संख्याओं का अनुक्रम।
ऐसा क्य होता है: एक आलेख से अगले पर जाइए। K2 ( जसम 2 बदु ह) म एक नया बदु जोड़ने पर उसे उन 2
बदुओं से मलाना पड़ता है, अत: 2 नई रेखाएँ बनती ह। अगला बदु जोड़ने पर 3 नई रेखाएँ, फर 4, और इसी
प्रकार। अत: कुल रेखाएँ—
1, 1 + 2 = 3, 1 + 2 + 3 = 6, 1 + 2 + 3 + 4 = 10 …
जो ठ क गणन संख्याओं के क्र मक योग, अथात् त्रभुजाकार संख्याएँ ह।
दे खने का दूसरा तरीका: Kn म प्रत्येक n बदु शेष (n − 1) बदुओं से जुड़ा होता है। इसम हर रेखा दो बार गनी
जाती है (दोन सर से), अत: रेखाओं क संख्या n × (n − 1) ÷ 2 है। K6 के लए: 6 × 5 ÷ 2 = 15। ✔
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन
a g l AglaSem · NCERT Solutions
co m
m.
ढे रत (stacked) वग के अनुक्रम के प्रत्येक आकार म कतने छोटे वग ह? इससे कौन-सा संख्या अनुक्रम प्राप्त
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प्र.3
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होता है? क्या आप स्पष्ट कर सकते ह क ऐसा क्य होता है?
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ु पंचभ ुज षड्भ ुज
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अ टभ ुज नवभ ुज दशभ ुज
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संपूण आलेख
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K2 K3 K4 K5
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mढे िरत वग as e
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कोच िहमकण
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अध्याय क सारणी 3 — आकार अनुक्रम के पाँच उदाहरण।
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन AglaSem · NCERT Solutions
1
4
9
16
25
ढे रत वग — 1, 4, 9, 16 और 25 छोटे वग।
1, 4, 9, 16, 25, 36 …
प्राप्त होता है वग संख्याओं का अनुक्रम।
ऐसा क्य होता है: nवाँ आकार एक बड़ा वग है जसम n पं क्तयाँ ह और प्रत्येक पं क्त म n छोटे वग। अत: कुल =
n × n = n²। जैसे चौथे आकार म 4 पं क्तयाँ × 4 छोटे वग = 16।
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प्र.4 ढे रत त्रभुज के अनुक्रम के प्रत्येक आकार म कतने छोटे त्रभुज ह? इससे कौन-सा संख्या अनुक्रम प्राप्त होता
है? क्या आप स्पष्ट कर सकते ह क ऐसा क्य होता है? (संकेत— प्रत्येक आकार म, प्रत्येक पं क्त म कतने
त्रभुज ह?)
सम बहुभजु
ि भ ुज चत ुभज
ु पंचभ ुज षड्भ ुज
स तभ ुजप् ष्
अ टभ ुज नवभ ुज दशभ ुज
संपूण आलेख
K2 K3 K4 K5 K6
ढे िरत वग
ढे िरत ि भुज
कोच िहमकण
अध्याय क सारणी 3 — आकार अनुक्रम के पाँच उदाहरण।
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1
4
9
16
25
ढे रत त्रभुज — ऊपर क ओर और नीचे क ओर मुँह वाले छोटे त्रभुज मलाकर ग नए: 1, 4, 9, 16, 25।
1, 4, 9, 16, 25 …
पुन: वग संख्याओं का अनुक्रम प्राप्त होता है।
ऐसा क्य होता है (संकेत के अनुसार): छोटे त्रभुज को पं क्त-दर-पं क्त ग नए।
पंि त 1 → 1 ि भुज
पंि त 2 → 3 ि भुज (2 ऊपर की ओर, 1 नीचे की ओर)
पंि त 3 → 5 ि भुज (3 ऊपर, 2 नीचे )
पंि त 4 → 7 ि भुज (4 ऊपर, 3 नीचे )
पं क्तय म 1, 3, 5, 7, 9 … अथात् वषम संख्याएँ ह। और पृष्ठ 7 से हम जानते ह क वषम संख्याओं का योग वग
संख्या दे ता है—
1 + 3 + 5 + 7 = 16 = 4 × 4
इसी लए n पं क्तय वाले ढे रत त्रभुज म n² छोटे त्रभुज होते ह।
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प्र.5 कोच हमकण वाले अनुक्रम म, एक आकार से अगला आकार प्राप्त करने के लए प्रत्येक रेखाखंड ‘—’ को एक
‘ग त उभार’ से प्र त ा पत करना पड़ता है। कोच हमकण के प्रत्येक आकार म कुल कतने रेखाखंड ह? इनके
संगत संख्या अनुक्रम क्या है?
सारणी 3 का कोच हमकण अनुक्रम — पहली पाँच आकृ तयाँ।
आरं भक आकार एक समबाहु त्रभुज है जसम 3 रेखाखंड ह। हर चरण म प्रत्येक रेखाखंड 4 छोटे खंड वाले उभार से बदल जाता
है, अत: संख्या हर बार 4 से गुणा हो जाती है।
चरण पहला दूसरा तीसरा चौथा पाँचवाँ
रेखाखंड 3 12 48 192 768
गुणनफल के रूप म 3 3×4 3×4×4 3×4×4×4 3×4×4×4×4
संख्या अनुक्रम है 3, 12, 48, 192, 768, … अथात् 4 क घात का 3 गुना। (यह अनुक्रम सारणी 1 म नह है।)
क्य : एक खंड → 4 खंड। अत: य द कसी चरण म k खंड ह, तो अगले चरण म 4k खंड ह गे। 3 से आरंभ करने
पर संख्याएँ 3, 3×4, 3×4², 3×4³, … बनती ह।
अध्याय — एक नज़र म
ग णत पैटन क खोज है और साथ ही इस बात का स्पष्टीकरण भी क वे पैटन क्य बनते ह।
ग णत के सबसे मौ लक पैटन संख्या अनुक्रम ह — गणन संख्याएँ, वषम, सम, त्रभुजाकार, वग, घन, वरहांक संख्याएँ तथा
2 क घात।
संख्या अनुक्रम आपस म सुंदर ढं ग से जुड़े होते ह। वषम संख्याओं का योग वग संख्याएँ दे ता है; गणन संख्याओं का योग
त्रभुजाकार संख्याएँ; और षड् भुजाकार संख्याओं का योग घन संख्याएँ।
कसी अनुक्रम को चत्र के रूप म बनाने पर प्राय: यह स्पष्ट हो जाता है क पैटन क्य बनता है — यह एक ऐसी उपप त्त है
जसे आप दे ख सकते ह।
आकार अनुक्रम — सम बहुभुज, संपूण आलेख, ढे रत वग व त्रभुज तथा कोच हमकण — पैटन का दूसरा बड़ा प रवार ह,
और इनम से प्रत्येक कसी न कसी संख्या अनुक्रम से जुड़ा है।
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क ा 6 ग णत अध्याय 1 ग णत म पैटन
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त्व रत पुनरावृ त्त
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m .coपहले कुछ पद agके रूप म
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अनुक्र म अगला पद कैसे पाएँ चत्र
agl
गणन संख्याएँ 1, 2, 3, 4, 5 +1 बदुओं क पं क्त
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वषम संख्याएँ 1, 3, 5, 7, 9 +2 वग क मुड़ी हुई “L” परत
सम संख्याएँ 2, 4, 6, 8, 10
la
+2
sem बदुओं क दो बराबर पं क्तयाँ
त्रभुजाकार 1, 3, 6, 10, 15
agअगली गणन संख्या जो ड़ए बदुओं का त्रभुज
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वग 1, 4, 9, 16, 25 अगली वषम संख्या जो ड़ए बदुओं का वगाकार ग्रड
m 1, 8, 27, 64, 125 as e
घन
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अगली षड् भुजाकार संख्या जो ड़ए
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ठोस घन
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षड् भुजाकार 1, 7, 19, 37, 61 6 का अगला गुणज जो ड़ए कद्र बदु के चार ओर छल्ले
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वरहांक 1, 2, 3, 5, 8, 13 पछली दो संख्याएँ जो ड़ए स पल तथा पौध क वृ द्ध
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2 क घात 1, 2, 4, 8, 16 ×2 पछले चत्र क दो प्र त ल पयाँ
3 क घात 1, 3, 9, 27, 81 agl × 3 पछले चत्र क तीन प्र त ल पयाँ
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