Page 1
अंक योजना (2022-23)
हंद (ऐि छक) कोड सं या 002
क ा - बारहवीं
पण
ू ाक :80
सामा य नदश :
(1) इस अंक योजना का उ दे य मू यांकन को अ धका धक व तु न ठ बनाना है । इस नप म व तप
ु रक
एवं वणना मक न ह। अत: अंक योजना म दए गए वणना मक न के उ र- बंद ु अं तम नह ं ह। ये
सुझावा मक एवं सांके तक ह।
(2) य द पर ु ं से भ न, कंतु उपयु त उ र द, तो उ ह अंक दए जाएँ।
ाथ इन सांके तक बंदओ
(3) समान ु टय के लए थान- थान पर अंक न काटे जाएँ।
(4) गण
ु व ापूण, सट क उ र पर शत तशत अंक दे ने म कसी कार का संकोच न कया जाए।
(5) मू यांकन म 0 से 100 तशत अंक का पैमाना वीकाय है।
(6) मू यांकन काय नजी या या के अनस
ु ार नह ं, बि क अंक योजना के नदशानस
ु ार ह कया जाए।
खंड - अ
न1 (1×10 =10)
(1) (ख) भौ तक साधन क योतक है । (1)
(2) (ख) य ,अ य (1)
(3) (घ) अ त े ठ (1)
(4) (ख) स यता मानव के वकास का वधायक गुण है। (1)
(5) (क) आदाय- दाय (1)
(6) (घ) हमार सोच-समझ को उजागर करता है (1)
(7) (घ)संप नता (1)
(8) (घ) मान सक ु टय पर नयं ण पाने के लए चे टावान रहे । (1)
(9) (ख) चा र क पतन (1)
(10) (घ) वकारमु त यि त (1)
न2 का यांश – 1 (1×8 =8)
Page 2
(1) (ख) ढ़संक पी (1)
(2) (घ) चर थायी (1)
(3) (ख) सब के अनुकूल वयं को ढाल लेती है । (1)
(4) (ग) कई बार या असं य बार का संकेत (1)
(5) (ग) मक
ू म ट को मनु य इ छानुसार प दान करता है (1)
(6) ( क) थरकना (1)
(7) (क) सौ बार बने सौ बार मटे (1)
(8) (ग) म ट क म हमा वारा रे णा दे ना (1)
का यांश – 2
(1) (ख) अपने ल य को पाकर रहेगा (1)
(2) (क) शार रक एवं मान सक प से तैयार है । (1)
(3) (घ) ा य को पाने के लए सावधान (1)
(4) (ख) तीका मक (1)
(5) (ख) था य व (1)
(6) (ग) उ दे य ाि त के लए ढ़ संकि पत रहना (1)
(7) (घ) कथन (A)सह है ले कन कारण(R)उसक गलत या या करता है। (1)
(8)(घ) अद य साहस का धनी है (1)
न3 (1×5=5)
(1) (ग) उपसंपादक (1)
(2) (ख) I-(iii). II-(iv) III-(i) IV-(ii) (1)
(3) (ख) ि ं गर कसी समाचार संगठन के लए एक नि चत मानदे य पर काम
करने वाला प कार है । (1)
(4) (घ) च के बना खबर के बारे म दशक को सीधे-सीधे बताता है । (1)
(5) (घ) य दश (1)
न4 (1 × 6 = 6 )
Page 3
(1) (ग) नेह (1)
(2) (घ) पा रवा रक सद य से बछोह (1)
(3) (ग) केवल (ii) (1)
(4) (घ) तकूलताओं के आगे आ मसमपण कर रहे ह। (1)
(5) (ग) वयोगाव था (1)
(6) (ख) बथा मन ह राखो गोय (1)
न5 (1 × 6 = 6 )
(1) (ग) अंतर वं व (1)
(2) (ख) श ा णाल पर यं य कया गया है । (1)
(3) (ख) कृ मता का लबादा उतर गया। (1)
(4) (ग) तरानुसार श ा के प धर ह। (1)
(5) (क) वाभा वक वकास हे तु सहज एवं आनंदपण
ू वातावरण होना चा हए। (1)
(6) (घ) कथन(A)सह है ले कन कारण(R)उसक गलत या या करता है। (1)
न6 (1× 5 = 5 )
(1) (घ) (i), ( ii) और (iii) (1)
(2) (ख) दष
ू ण (1)
(3) (ख) ( ii) और (iii) (1)
(4) (ग) आकां ा का अधूरा रह जाना (1)
(5) (घ) अनेक ोत का जल मला होता है । (1)
खंड - ब वणना मक न
न 7 कसी एक शीषक पर लगभग 120 श द म रचना मक लेख: (5)
भू मका - 1 अंक
वषय व तु - 3 अंक
भाषा - 1 अंक
Page 4
न8 (3 ×2 =6)
(क)
● क वता हमार संवद
े ना के नकट
● संपूण सिृ ट से जड़
ु ने तथा उसे अपना बना लेने का बोध
● क वता यि त को भावक
ु क व या स दय पाठक बनाती है ।
(ख)
● रं गमंच तरोध का सश त मा यम
● शाि दक अथ से यंजना क ओर ले जाने वाला
● नायक- तनायक एवं सू धार वारा तनाव, उ सुकता, रह य, रोमांच, उपसंहार क सश त
संवाद वारा तु त
● भावी तु त वारा सामािजक जाग कता
(ग)
● पा के गण
ु का कहानीकार वारा बखान। जैसे - डॉ टर आलोक ीवा तव शहर के जाने-
माने डॉ टर ह। लगभग 20 वष से वे मर ज के लए भगवान बने हुए ह।
● पा के काय वारा िजससे गुण वतः ह उभरकर सामने आएँ। जैसे सड़क पर पड़े खन
ू से
लथपथ वनोद को दे खते ह डॉ टर आलोक ीवा तव उसे अपनी कार म लेकर अ पताल
पहुँचे और तुरंत उसका इलाज शु कर दया।
● कसी पा वारा अ य पा का च र - च ण अपने संवाद के मा यम से करना।
जैसे - वनोद अपने प रवार के सद य को डॉ टर आलोक ीवा तव के बारे म बता रहा है।
वनोद - "माँ, म तो बहुत बरु हालत म सड़क पर पड़ा कराह रहा था। डॉ टर साहब मझ
ु े
अ पताल लाए और मेरा इलाज कया। डॉ टर साहब सचमुच दे वता ह।"
न-9 (3 ×2 =6)
(क)
उ टा परा मड शैल
य क इसम सबसे मह वपूण त य या सूचना यानी लाइमे स परा मड के सबसे
नचले म न होकर ऊपर होता है
Page 5
इस शैल का योग 19वीं सद के म य म शु हो गया था। इसका वकास अमे रका
के गहृ यु ध के बाद हुआ। धीरे -धीरे इस शैल का वकास हुआ और यह समाचार
लेखन क मानक शैल बन गई।
(ख)
फ़ चर म लेखक के पास अपनी राय और भावनाएँ ज़ा हर करने का अवसर।
कोई एक फामला
ू नह ं, काफ़ हद तक कथा मक शैल
भाषा सरल, पा मक, आकषक और मन को छूनेवाल
न 10. (2 ×2 = 4)
(क)
बद
ँू क णभंगुरता क या या
णभर के लए ढलते सूरज से रं ग जाना
समु से अलग अि त व, न वरता के दाग से ,न ट होने के बोध से मुि त का अहसास
क व वारा जीवन म म के मह व को तपा दत कया गया
(ख)
क व घनानंद क वयोगाव था का मा मक वणन
अपनी य
े सी सज
ु ान क ती ा म बेस , ती ा करते-करते मरणास न दशा
ाण अटके हुए य क वे सुजान का संदेशा लेकर ह नकलना चाहते ह
(ग)
क व व वंसकार भू मका म न होकर सज
ृ न के लए उपयु त भू म तैयार करने क
ेरणा दे ना
च टान और ऊसर भू म को तोड़ने क बात ता क सज
ृ न या शु क जा सके
कृ त से मानव मन क तुलना करके नया आयाम
मन म समाई ऊब और खीझ को तोड़ना आव यक
न 11 (6 ×1 = 6 )
संग - 2 अंक
या या - 2 अंक
वशेष +भाषा - 2 अंक
Page 6
न 12 (2 ×2 =4)
(क)
बड़ी बहु रया के क ट से हरगो बन अ यंत दख
ु ी
ल मी जैसी बहु रया के गाँव छोड़कर चले जाने क बात सोचकर याकुल
संव दया और बड़ी बहु रया के मा यम से समाज के बड़े वग के साथ संबध
ं , वतमान म
बज़
ु ुग और असहाय लोग के त कत यबोध का अभाव, संव दया जैसी संवद
े ना
आव यक
(ख)
द ल क भीड़ लोग के द तरआने-जाने, बाज़ार से सामान खर दने क भीड़, सभी के
उ दे य अलग-अलग
हर क पौड़ी क भीड़ म एकसू ता, े व जा त क असमानता के बाद भी समान
उ दे य - जीवन के क याण क कामना, धा मक आ था का भाव
(ग)
शेर यव था का तीक िजसके वारा आम जनता का संचालन
नौकर का आकषण ले कन केवल दखावा
उसके मँह
ु म जाने वाला वापस नह ं आता, अि त व समा त हो जाता है
न 13 (6 × 1=6 )
संग - 2 अंक
या या - 2 अंक
वशेष +भाषा - 2 अंक
न 14 (3 ×1 = 3 )
(क)
वकास क औ यो गक स यता उजाड़ क अपस यता, पयावरण असंतुलन, मौसम
च का बगड़ना
Page 7
कारखाने व उ योग को शहर से दरू लगाना, न दय का संर ण, लाि टक क
थै लय पर तबंध, अ धका धक व ृ ारोपण वारा व छ व दष
ू ण र हत पयावरण
(ख)
झ पड़ी जलने व पये चोर होने से सूरदास अ यंत नराश, कुछ यि तय क
सरू दास से ई या
सूरदास वारा वषम प रि थ तय का सामना साहस व धैय के साथ करना,
ीणकाय, दब
ु ल, सरलमना सूरदास आ मबल के सहारे ई या व अ याय के व ध
सफल
……………………………………………………………………………