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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 3: नीम
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
27 – 39 10 45 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 47 pages
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कक्षा 4 हद अध्याय 3 नीम AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 4 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 3: नीम
NCERT कक्षा 4 हद क पाठ्यपुस्तक वीणा के पाठ 3 नीम के सभी प्रश्न के पूरे हल। यह हरीश नगम क लखी एक क वता है। इसम नीम का पेड़
दनभर हँसता-गाता है, प क्षय से नेह जताता है, रोग भगाता है और गंद हवा को शुद्ध बनाता है। पृष्ठ 27 से 37 तक के हर अभ्यास — बातचीत के
लए, पाठ के भीतर, भाषा क बात, अ भनय, वृक्ष एक गुण अनेक, म नीम ँ, बूझो तो जान और मेरा पौधा — के उत्तर यहाँ दए गए ह। इसके बाद पृष्ठ
38 और 39 पर छपे छोटे पाठ भाँ त-भाँ त क प त्तयाँ को भी अलग भाग म हल कया गया है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 4) 27 – 39
खं ड प्रश्न
10 45
माध्यम
हन्द
क वता का सरल अथ — पृष्ठ 27
पं क्त → सरल अथ → भाव (क व — हरीश नगम)
क वता क ाख्या
प्र.1 “लहराता-बलखाता नीम, / दनभर हँसता-गाता नीम। / च ड़या, कौआ, तोता सबसे, / अपना नेह जताता
नीम।” — इन पं क्तय का सरल अथ और भाव ल खए।
इन चार पं क्तय म क व नीम के पेड़ का रूप और उसका स्वभाव बता रहे ह।
लहराता-बलखाता नीम,
िदनभर हँसता-गाता नीम।
िचिड़ या, कौआ, तोता सबसे,
अपना ने ह जताता नीम।
पहले क ठन शब्द समझ ली जए —
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कक्षा 4 हद अध्याय 3 नीम AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ
लहराना हवा म लहर क तरह हलना
बलखाना टे ढ़ा-मेढ़ा होकर मुड़ना
िदनभर पूरे दन
नेह प्यार, स्नेह
अब पं क्त-दर-पं क्त अथ दे खए —
पं क्त सरल अथ
“लहराता-बलखाता नीम,” हवा चलती है तो नीम क डा लयाँ लहराती और बल खाती ह।
“िदनभर हँस ता-गाता नीम।” नीम पूरे दन खुश रहता है, मानो हँस और गा रहा हो।
“िचिड़या, कौआ, तोता सबसे ,” च ड़या, कौआ और तोता — तीन पक्षी उस पर आकर बैठते ह।
“अपना नेह जताता नीम।” नीम इन सब प क्षय से अपना प्यार दखाता है।
भाव: क व ने नीम को एक जीते-जागते मत्र क तरह दखाया है। पेड़ हँसता या गाता तो नह , पर उसक प त्तयाँ
हलने पर सर-सर क आवाज़ आती है। वही आवाज़ क व को हँसी और गीत जैसी लगती है। पक्षी उसक डाल पर
घ सला बनाते ह, इस लए क व कहते ह क नीम उनसे नेह जताता है।
ध्यान द जए: ‘लहराता-बलखाता’ और ‘हँसता-गाता’ — ये जोड़ी शब्द ह। इनसे क वता म लय बनती है और पेड़
क हलचल आँख के सामने आ जाती है।
प्र.2 “नह डॉक्टर फर भी दे खो, / कतने रोग भगाता नीम। / चले प्रदू षत वायु कभी तो, / उसको शुद्ध बनाता नीम।”
— इन पं क्तय का सरल अथ और भाव ल खए।
इन पं क्तय म क व नीम के दो बड़े काम बता रहे ह — रोग भगाना और हवा को साफ़ करना।
नही ं डॉक्टर िफर भी दे खो,
िकतने रोग भगाता नीम।
चले पदू िषत वायु कभी तो,
उसको शुद्ध बनाता नीम।
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पं क्त सरल अथ
“नही ं डॉक्टर िफर भी दे खो,” नीम कोई डॉक्टर नह है, फर भी ज़रा दे खो तो सही।
“िकतने रोग भगाता नीम।” वह कतनी ही बीमा रय को दूर भगा दे ता है।
“चले पदू िषत वायु कभी तो,” कभी गंद हवा चलने लगे तो,
“उसको शुद्ध बनाता नीम।” नीम उस हवा को फर से साफ़ बना दे ता है।
ऐसा क्य : नीम क प त्तयाँ, कोमल टह नयाँ और नबौ रयाँ घरेलू उपचार म काम आती ह। प त्तय के पानी से नहाने
पर खुजली म आराम मलता है और टहनी से दातुन क जाती है। इसी लए इसे औषधीय वृक्ष कहते ह। हर पेड़ क
तरह नीम भी गंद हवा लेकर हम साफ़ हवा लौटाता है।
ध्यान र खए: पेड़ दवा का काम करते ह, पर बीमार पड़ने पर डॉक्टर को दखाना ज़रूरी है। क वता पेड़ के गुण क
तारीफ़ कर रही है, डॉक्टर क जगह नह ले रही।
प्र.3 “कड़वे तन म मन को मीठा, / रखना हम सखाता नीम। / हवा चले तो झूम-झूमके, / सब का मन बहलाता
नीम।” — इन पं क्तय का सरल अथ और भाव ल खए।
ये क वता क सबसे सुंदर पं क्तयाँ ह। यहाँ नीम एक शक्षक क तरह हम एक बात सखाता है।
कड़ वे तन में मन को मीठा,
रखना हमें िसखाता नीम।
हवा चले तो झूम-झूमके ,
सब का मन बहलाता नीम।
पं क्त सरल अथ
“कड़वे तन में मन को मीठा,” नीम का शरीर (तन) कड़वा है, पर उसका मन मीठा है।
“रखना हमें िसखाता नीम।” वह हम सखाता है क मन हमेशा मीठा रखो।
“हवा चले तो झूम -झूम के ,” हवा चलती है तो नीम झूम-झूमकर हलता है।
“सब का मन बहलाता नीम।” उसे झूमता दे खकर सबका मन खुश हो जाता है।
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भाव: नीम का हर भाग स्वाद म कड़वा है, पर उससे मलता सबको भला ही है — छाया, हवा और दवा। इसी से
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सीख मलती है क बाहर से कड़वे लगने वाले भी भीतर से बहुत अ े हो सकते ह। जैसे दवा कड़वी
हम ठ क कर.c oी है। a
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“लेता नह कसी से कुछ भी, / पर कतना दे जाता नीम।” — इन पं क्तय का अथ ल खए और पूरी क वता का
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प्र.4
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भाव अपने शब्द म बताइए।
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अथ: नीम कसी से कुछ भी नह माँगता, फर भी सबको बहुत कुछ दे कर जाता है।
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नीम हम क्या-क्या दे ता है —
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शुद्ध हवा, जो साँस लेने के काम आती हैg; la
ठं डी छाया, जसके नीचे हम खेलते और बैठते ह;
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दवा — प त्तयाँ, टह नयाँ और नबौ रयाँ;
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प क्षय के लए घर और झूला झूलने के लए मज़बूत डाल।
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पूरी क वता का भाव: क व कहना चाहते ह क पेड़ हमारे स े मत्र ह। वे बदले म कुछ नह माँगते, केवल दे ते ह।
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l a se इस लए हम पेड़ लगाने चा हए और उन्ह काटने से बचाना चा हए।
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करके दे खए: क वता को ताली बजाकर गाइए। हर दूसरी पं क्त के अंत म ‘नीम’ पर ज़ोर द जए — क वता अपने
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आप याद हो जाएगी।
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बातचीत के लए — पृष्ठ 28
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क वता पढ़ने के बाद कक्षा म चचा
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बातचीत े लए
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नीम के बारे म आप क्या-क्या जानते ह?
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नीम एक बड़ा और छायादार पेड़ है, जो हमारे आस-पास आसानी से मल जाता है।
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इसक प त्तयाँ लंबी, नुक ली और कनार से आरी जैसी दाँतेदार होती ह।
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प त्तय का स्वाद कड़वा होता है।
इसके छोटे -से फल को नबौरी कहते ह। पकने पर वह पीली हो जाती है।
इसक कोमल टहनी से दातुन क जाती है।
प त्तय को उबालकर उस पानी से नहाने पर खुजली म आराम मलता है।
सूखी प त्तयाँ अनाज और कपड़ म रखी जाती ह, जससे क ड़े नह लगते।
यही बात क वता भी कहती है: “नह डॉक्टर फर भी दे खो, कतने रोग भगाता नीम।” यानी नीम बना डॉक्टर हुए
भी हमारे काम आता है।
संकेत: अपने घर, स्कूल या मोहल्ले के नीम को दे खए और एक बात अपनी ल खए — जैसे “मेरे स्कूल के नीम पर
रोज़ तोते आते ह।”
प्र.2 आपने अपने प रवेश म बहुत से पेड़-पौधे दे खे ह गे। कुछ के नाम बताइए।
यह आपके अपने आस-पास का प्रश्न है। जो पेड़-पौधे आप रोज़ दे खते ह, उन्ह के नाम बताइए।
नमूना उत्तर:
बड़े पेड़ फल के पेड़ छोटे पौधे
नीम आम तुल सी
बरगद अमरूद गुल ाब
पीपल के ला धिनया
शीशम जामुन पुद ीना
संकेत: कक्षा म सबके नाम सु नए। जो नाम आपने नह लखा, उसे भी अपनी सूची म जोड़ ली जए।
प्र.3 आप व भन्न प्रकार के पेड़-पौध क पहचान कस आधार पर कर पाते ह?
हम पेड़-पौध को उनके अलग-अलग भाग को दे खकर पहचानते ह।
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कस आधार पर उदाहरण
प ी का आकार पीपल क पत्ती दल जैसी, केले क बहुत बड़ी
प ी का िकनारा नीम क पत्ती का कनारा आरी जैसा दाँतेदार
फल और फू ल आम पर आम, नीम पर नबौरी
तने और छाल बरगद क लटकती जड़, ना रयल का सीधा लंबा तना
गंध और स्वाद तुलसी क महक, नीम का कड़वापन
पेड़ का आकार बरगद बहुत फैला हुआ, पपीता पतला और सीधा
क्य : हर पेड़ क पत्ती, फल और तना अलग होता है। यही अंतर उसक पहचान बन जाता है।
प्र.4 पेड़-पौध से जुड़ा अपना कोई अनुभव सुनाइए, जैसे आपने कोई पौधा लगाया हो या कसी वृक्ष क छाया के नीचे
आप खेलते ह ।
यह आपका अपना अनुभव है, इस लए उत्तर हर ब े का अलग होगा।
अ े उत्तर म ये बात होनी चा हए —
1. कौन-सा पेड़ या पौधा था;
2. वह कहाँ था — घर, स्कूल, खेत या मोहल्ले म;
3. आपने क्या कया या वहाँ क्या हुआ;
4. आपको कैसा लगा।
नमूना उत्तर: पछली बरसात म मने दाद के साथ आँगन म तुलसी का पौधा लगाया था। म रोज़ सुबह उसम थोड़ा
पानी डालता ँ। एक दन उसम नई क पल आईं तो म बहुत खुश हुआ। अब वह मुझसे घुटने तक ऊँचा हो गया है।
प्र.5 आपको सबसे अ ा पेड़ कौन-सा लगता है? आपको यही पेड़ सबसे अ ा क्य लगता है?
इस प्रश्न म कोई एक उत्तर सही नह है। आपको अपनी पसंद बतानी है और साथ म कारण भी।
मुझे ............ पेड़ सबसे अच्छा लगता है,
क्योंिक ............।
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नमूना उत्तर: मुझे नीम सबसे अ ा लगता है। गरमी म उसक छाया सबसे ठं डी लगती है। उस पर च ड़या और तोते
आकर बैठते ह। उसक टहनी से दातुन भी हो जाती है। वह हम बहुत कुछ दे ता है और बदले म कुछ नह माँगता।
ध्यान र खए: कारण बताते समय ‘क्य क’ शब्द का प्रयोग क जए। इससे आपक बात पूरी लगती है।
पाठ के भीतर — पृष्ठ 28 और 29
क वता पढ़कर उत्तर द जए
पाठ के भीतर
प्र.1 इस क वता म कन प क्षय के नाम आए ह? उनके नाम ल खए।
क वता म तीन प क्षय के नाम आए ह — च ड़या, कौआ और तोता।
“िचिड़ या, कौआ, तोता सबसे,
अपना ने ह जताता नीम।”
क्य : ये तीन पक्षी नीम पर आकर बैठते ह। क व इन्ह के नाम लेकर बताते ह क नीम सब प क्षय से प्यार करता है।
प्र.2 नीम से कन- कन रोग म लाभ हो सकता है? कन्ह तीन के नाम पता करके ल खए।
............ ............ ............
पुस्तक क तरह तीन प त्तयाँ, जनम लखने के लए खाली जगह बनी है।
नीम के तीन लाभ इस प्रकार लखे जा सकते ह —
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खुजली दाँतों के रोग फोड़ े-फं ु सी
तीन प त्तय म भरे हुए उत्तर।
रोग या परेशानी नीम का कौन-सा भाग कैसे काम आता है
खुजली प त्तयाँ प त्तय को उबालकर उस पानी से नहाने पर आराम मलता है
दाँतों के रोग कोमल टहनी टहनी क दातुन से दाँत और मसूड़े साफ़ रहते ह
फोड़ े-फुं सी प त्तयाँ प त्तय का लेप घाव पर लगाया जाता है
यही बात क वता कहती है: “नह डॉक्टर फर भी दे खो, कतने रोग भगाता नीम।” नीम डॉक्टर नह है, पर उसके
भाग म दवा वाले गुण होते ह। इसी लए उसे औषधीय वृक्ष कहते ह।
ध्यान र खए: ये घर के पुराने नुस्खे ह। बीमारी म डॉक्टर को दखाना और उनक दवा लेना सबसे ज़रूरी है। अपने
आप कोई दवा मत बनाइए।
प्र.3 नीम का वृक्ष सबका मन कैसे बहलाता है?
जब हवा चलती है तब नीम झूम-झूमकर हलता है। उसे झूमता दे खकर सबका मन खुश हो जाता है।
“हवा चले तो झूम-झूमके ,
सब का मन बहलाता नीम।”
नीम और भी तरीक़ से मन बहलाता है —
उसक प त्तय से सर-सर क मीठ आवाज़ आती है;
उसक ठं डी छाया म बैठकर लोग सुस्ताते ह;
उसक डाल पर झूला डालकर ब े झूलते ह;
उस पर बैठे पक्षी चहचहाते रहते ह।
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क्य : ‘मन बहलाना’ का अथ है — मन लगाना और खुश कर दे ना। नीम क हलचल, आवाज़ और छाया, तीन
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मलकर यही काम करती ह।
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प्र.4 (क) क वता क नम्न ल खत पं क्तय को प ढ़ए — “ च ड़या, कौआ, तोता सबसे / अपना नेह जताता नीम”।
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इन पं क्तय म रेखां कत शब्द ‘नेह’ का भाव है – प्यार व स्नेह। अब बताइए — नीम का वृक्ष प क्षय से
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अपना नेह कस प्रकार जताता है?
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नीम प क्षय से अपना नेह उन्ह आश्रय और भोजन दे कर जताता है।
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वह अपनी डा लय पर उन्ह घ सला बनाने दे ता है;
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वह उन्ह धूप, वषा और तेज़ हवा से बचाता है;
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gl वह कसी पक्षी को मना नह करता — च ड़या, कौआ, तोता सबका स्वागत करता है।
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क्य : प्यार केवल कहने से नह , करने से दखता है। नीम बोलता नह , पर सबको जगह दे ता है — यही उसका नेह
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जताना है।
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क वता क नम्न ल खत पं क्तय को प ढ़ए — “ च ड़या, कौआ, तोता सबसे / अपना नेह जताता नीम”।
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प्र.4 (ख)
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.co और अध्यापक आपसे अपना नेह कस प्रकार जताते ह? g
इन पं क्तय म रेखां कत शब्द ‘नेह’ का भाव है – प्यार व स्नेह। अब बताइए — आपके प रवार के सदस्य
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यह आपके अपने घर और कक्षा क बात है। उत्तर हर ब े का अलग हो सकता है।
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नेह कस प्रकार जताते ह
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माँ मेरी पसंद का खाना बनाती ह और बीमार होने पर पास बैठ रहती ह
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मेरे साथ खेलते ह और मुझे स्कूल छोड़ने जाते ह
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दादी–दादा कहानी सुनाते ह और सर पर हाथ फेरते ह
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अध्यापक
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समझ न आने पर दोबारा समझाते ह और अ ा काम करने पर शाबाशी दे ते ह
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नमूना उत्तर: मेरी माँ रोज़ मेरा बस्ता लगाने म मेरी मदद करती ह। मेरे अध्यापक मेरी लखाई सुधारने के लए मुझे
अलग से समय दे ते ह। इन छोट -छोट बात से मुझे उनका नेह दखाई दे ता है।
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सो चए: नीम क तरह बड़े भी अपना प्यार बोलकर नह , करके दखाते ह।
प्र.5 (क) नीचे द गई क वता क पं क्तय को पढ़कर उत्तर द जए — “चले प्रदू षत वायु कभी तो / उसको शुद्ध
बनाता नीम”। ‘प्रदू षत वायु’ से आप क्या समझते ह?
प्रदू षत वायु का अथ है — गंद हवा। यानी ऐसी हवा जसम धुआँ, धूल और गंदे कण मल गए ह ।
हवा गंद कैसे होती है —
गा ड़य और कारखान के धुए ँ से;
कूड़ा और पत्ते जलाने से;
सड़क और नमाण-काय क धूल से;
पटाख के धुएँ से।
ऐसी हवा से क्या होता है: साँस लेने म परेशानी होती है, खाँसी आती है और आँख म जलन होती है। इसी लए
क व ने ‘प्रदू षत’ शब्द का प्रयोग कया है — यह शब्द बताता है क हवा साफ़ नह रही।
शब्द क बात: ‘प्रदू षत’ का उल्टा शब्द है शुद्ध। यही शब्द अगली पं क्त म आया है।
प्र.5 (ख) नीचे द गई क वता क पं क्तय को पढ़कर उत्तर द जए — “चले प्रदू षत वायु कभी तो / उसको शुद्ध
बनाता नीम”। वृक्ष प्रदू षत वायु को कैसे शुद्ध बनाते ह?
वृक्ष हवा क गंदगी अपने भीतर ले लेते ह और बदले म हम साफ़ हवा दे ते ह।
गंद ी हवा → पेड़ की पि याँ → शुद्ध हवा
यह कैसे होता है —
1. प त्तयाँ हवा म मली गंद गैस अपने भीतर ख च लेती ह;
2. वे हवा म हमारे काम आने वाली साफ़ हवा छोड़ती ह;
3. चौड़ी प त्तय पर हवा क धूल चपक जाती है, जो वषा म धुल जाती है;
4. पेड़ के बीच क हवा ठं डी और साफ़ रहती है।
इसी लए: जहाँ पेड़ ज़्यादा होते ह, वहाँ साँस लेने म अ ा लगता है। यही कारण है क हम अ धक-से-अ धक पेड़
लगाने चा हए।
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प्र.6 (क) नीचे लखे भाव क वता क कन पं क्तय म आए ह? — “नीम का वृक्ष डॉक्टर नह है, फर भी बहुत सारे
रोग को भगाता है।” क वता क पं क्त ल खए।
क वता क पं क्त —
“नही ं डॉक्टर िफर भी दे खो,
िकतने रोग भगाता नीम।”
कैसे पहचान: दए गए भाव म दो बात ह — डॉक्टर नह है और रोग भगाता है। क वता म यही दोन बात इन्ह दो
पं क्तय म एक साथ आई ह।
प्र.6 (ख) नीचे लखे भाव क वता क कन पं क्तय म आए ह? — “नीम का वृक्ष दनभर प्रसन्न रहता है।” क वता क
पं क्त ल खए।
क वता क पं क्त —
“लहराता-बलखाता नीम,
िदनभर हँसता-गाता नीम।”
कैसे पहचान: ‘प्रसन्न रहना’ का अथ है — खुश रहना। क वता म खुशी के लए ‘हँसता-गाता’ शब्द आए ह और
‘ दनभर’ शब्द तो ज्य -का-त्य वह है।
भाषा क बात — पृष्ठ 29, 30 और 31
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लग — सं ा शब्द स्त्रीवाचक है या पुरुषवाचक; तथा ‘प्र’ से बनने वाले शब्द
भाषा क बात
प्र.1 (क) नीचे लखे वाक्य पर ध्यान द जए — “लड़क पुस्तक पढ़ती है।” “लड़का पुस्तक पढ़ता है।” इन दोन
वाक्य म लड़क व लड़का सं ा शब्द ह। लड़क के लए ‘पढ़ती’ और लड़के के लए ‘पढ़ता’ क्रया रूप का
प्रयोग कया गया है। यह अंतर ‘ लग’ के कारण आया है। अब इस क वता म आए उन शब्द को ल खए
जनसे पता चलता है क नीम पु ल्लंग है।
पुस्तक के उदाहरण (पृष्ठ 30) पुस्तक के उदाहरण (पृष्ठ 30)
माताजी समाचार पढ़ती ह। पताजी भाजी काटते ह।
मनीषा पतंग उड़ाती है। अर वद झूला झूलता है।
इमली ख है। टमाटर ख ा है।
क वता म नीम के साथ जो क्रया शब्द आए ह, वे सब ‘-ता’ पर समाप्त होते ह। इसी से पता चलता है क नीम पु ल्लंग है।
शब्द क वता क पं क्त
लहराता “लहराता-बलखाता नीम,”
बलखाता “लहराता-बलखाता नीम,”
हँस ता “ दनभर हँसता-गाता नीम।”
गाता “ दनभर हँसता-गाता नीम।”
जताता “अपना नेह जताता नीम।”
भगाता “ कतने रोग भगाता नीम।”
बनाता “उसको शुद्ध बनाता नीम।”
िसखाता “रखना हम सखाता नीम।”
बहलाता “सब का मन बहलाता नीम।”
ले ता “लेता नह कसी से कुछ भी,”
जाता “पर कतना दे जाता नीम।”
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नयम: पु ल्लंग सं ा के साथ क्रया प्रायः ‘-ता’ म आती है और स्त्री लग सं ा के साथ ‘-ती’ म। जैसे — लड़का
पढ़ता है, लड़क पढ़ती है।
जाँच कर दे खए: य द नीम स्त्री लग होता तो पं क्त ऐसी होती — “लहराती-बलखाती नीम”। पढ़ने म ही अटपटा
लगता है, इस लए नीम पु ल्लंग है।
अपना एक वाक्य: आँगन का नीम हर दोपहर छाया दे ता है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 3 नीम
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नीचे रखी टोकरी म बहुत से फल और साग-भाजी दखाए गए ह। इन्ह स्त्री लग और पु ल्लंग क श्रेणी म
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टोकरी म रखे फल और साग-भाजी।
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पहले टोकरी क चीज़ के नाम ली जए, फर हर नाम के साथ ‘अ है’ या ‘अ
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लग है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 3 नीम AglaSem · NCERT Solutions
स्त्री लग पु ल्लंग
लौकी बैगं न
िभंडी आलू
गाजर क ू
गोभी प्याज़
— अंगूर
— से ब
— आम
— संतरा
जाँचने क आसान व ध:
लौक अ है ✓ — इस लए लौक स्त्री लग।
बगन अ ा है ✓ — इस लए बगन पु ल्लंग।
यही तरीक़ा हर नाम पर लगाकर दे खए।
ध्यान द जए: दोन खान म बराबर नाम होना ज़रूरी नह है। अपनी पुस्तक क टोकरी म आप जो-जो चीज़
पहचान पाएँ, उसे इसी तरह सही खाने म ल खए।
प्र.2 ‘प्रदू षत’ शब्द म ‘प्र’ लगा है। ऐसे ही कुछ और शब्द ढूँ ढ़कर नीचे ल खए।
पदू िषत ............
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बीच म ‘प्र’, और चार ओर शब्द लखने के खाने।
‘प्र’ को शब्द के आगे जोड़कर बहुत से नए शब्द बनते ह। कुछ शब्द इस प्रकार ह —
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कक्षा 4 हद अध्याय 3 नीम AglaSem · NCERT Solutions
पदूिषत पकाश
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पसन्न पयोग
‘प्र’ से बने चार शब्द।
शब्द अथ वाक्य म प्रयोग
पकाश रोशनी सूरज का प्रकाश खड़क से आ रहा है।
पस न्न खुश अ े अंक पाकर म प्रसन्न हो गया।
पयोग इस्तेमाल केले के पत्ते का प्रयोग थाली क तरह होता है।
पकार तरह, कस्म प त्तयाँ कई प्रकार क होती ह।
पितिदन हर दन प्र त दन अपने पौधे को पानी द जए।
पाथना वनती, प्राथना-गीत हम रोज़ सुबह प्राथना करते ह।
ध्यान द जए: ‘प्रकार’, ‘प्रयोग’ और ‘प्र त दन’ — ये तीन शब्द आपक इसी पुस्तक के पाठ 3 म आए ह। ‘प्र’
जोड़ने से शब्द का अथ बदल जाता है।
करके दे खए: अपनी पुस्तक के कसी एक पृष्ठ पर ‘प्र’ से शुरू होने वाले शब्द ढूँ ढ़ए और गनकर ल खए क
कतने मले।
अ भनय — पृष्ठ 32
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कक्षा 4 हद अध्याय 3 नीम AglaSem · NCERT Solutions
‘नीम’ क वता म बहुत से क्रया शब्द आए ह
अ भनय गतवध
प्र.1 ‘नीम’ क वता म बहुत से क्रया शब्द आए ह। क वता एक बार पुनः प ढ़ए और नीचे लखे क्रया शब्द के भाव के
अनुसार अ भनय क जए — लहराना, बलखाना, हँसना, गाना, नेह जताना, भगाना।
यह करने वाला काम है। हर शब्द का पहले अथ सम झए, फर वैसा ही करके दखाइए।
क्रया शब्द अथ अ भनय कैसे कर
लहराना हवा म लहर क तरह हलना दोन हाथ ऊपर उठाकर धीरे-धीरे इधर-उधर हलाइए
बलखाना टे ढ़ा-मेढ़ा होकर मुड़ना कमर को बाएँ-दाएँ घुमाते हुए लहर जैसी आकृ त बनाइए
हँस ना खल खलाना खुलकर मुस्कुराइए और हँसी क आवाज़ नका लए
गाना गीत गाना क वता क दो पं क्तयाँ सुर म गाकर सुनाइए
नेह जताना प्यार दखाना साथी के कंधे पर हाथ र खए या गले लगाइए
भगाना दूर हटाना हाथ से ‘दूर जाओ’ का इशारा क जए
कैसे कर: कक्षा को दो दल म बाँ टए। एक दल शब्द बोले और दूसरा दल अ भनय करे। फर बदल ली जए। इससे
शब्द के अथ जल्द याद हो जाते ह।
संकेत: ये सब क्रया शब्द ह, यानी काम बताने वाले शब्द। ध्यान द जए क ये सब क वता म नीम के साथ आए ह
— लहराता, बलखाता, हँसता, गाता, जताता, भगाता।
वृक्ष एक, गुण अनेक — पृष्ठ 32, 33 और 34
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वृक्ष क वशेषताएँ और प त्तय क पहचान
वृ क्ष एक, गु ण अने क पहचा नए
प्र.1 वृक्ष क बहुत-सी वशेषताएँ होती ह, उन वशेषताओं को ल खए।
हरा-भरा
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.............. ..............
.............. ..............
वृक्ष के चार ओर खाली खाने; एक खाने म ‘हरा-भरा’ पहले से लखा है।
वृक्ष हम बहुत कुछ दे ते ह। उनक कुछ वशेषताएँ ये ह —
हरा-भरा
छायादार फलदार
पि यों का घर
हवा शुद्ध करने वाला औषधीय
लकड़ ी देने वाला वष में सहायक
वृक्ष क वशेषताओं से भरे हुए खाने।
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वशेषता इसका अथ
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हरा-भरा
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प त्तय से भरा और हरा दखने वाला (यह पुस्तक म दया हुआ है)
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छायादार गरमी म ठं डी छाया दे ता है
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फलदार आम, अमरूद, जामुन जैसे फल दे ता है
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पि यों का घर
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च ड़या, कौआ और तोता उस पर घ सला बनाते ह ag
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हवा शुद्ध करने वाला
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गंद हवा लेकर साफ़ हवा दे ता है
औषधीय
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इसके भाग दवा के काम आते ह, जैसे नीम
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लकड़ ी दे ने वाला
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इसक लकड़ी से मेज़, कुरसी और दरवाज़े बनते ह
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वष में सहायक जहाँ पेड़ अ धक होते ह, वहाँ वषा अ होती है
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क्य : वृक्ष लेता कुछ नह और दे ता बहुत कुछ है। इसी लए क वता कहती है — “लेता नह कसी से कुछ भी, पर
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कतना दे जाता नीम।”
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और लख सकते ह: म a
को बहने से रोकने वाला, फूल दे ने वाला, ग द दे ने वाला, जानवर को चारा दे ने वाला।
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प्र.2 नीचे कुछ वृक्ष /पौध क प त्तय के चत्र ह। उनके नाम उलट-पुलट गए ह। उन्ह पहचानकर मलान क जए।
अपनी भाषा म भी उनके नाम पता करके ल खए।
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प त्तय के चत्र प त्तय के नाम आपक भाषा म नाम
(क) बरगद ..............
(ख) धिनया ..............
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प त्तय के चत्र प त्तय के नाम आपक भाषा म नाम
(ग) आम ..............
(घ) तुल सी ..............
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प त्तय के चत्र प त्तय के नाम आपक भाषा म नाम
(ङ) के ला ..............
(च) शीशम ..............
पत्ती का आकार, कनारा और डंठल दे खकर पहचान हो जाती है। सही मलान इस प्रकार है —
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चत्र सही नाम पहचान कैसे हुई अंग्रेज़ी म नाम
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(क) आम लंबी-पतली प त्तयाँ और साथ म छोटे हरे आम लगे ह
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मोट -चौड़ी प त्तयाँ और बीच म छोटे लाल फल Banyan
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(ख)
(ग) शीशम एक ही डंठल पर तीन गोल-सी प त्तयाँ Sheesham
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(घ) धिनया
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बहुत छोट , कट -फट प त्तयाँ; इन्ह सब्ज़ी पर डाला जाता है Coriander ag
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(ङ) तुल सी
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छोट -छोट प त्तयाँ आमने-सामने, ऊपर मंजरी (फूल क बाली) Tulsi
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(च) बहुत बड़ा पत्ता, जसम एक-सी सीधी नस दखती ह Banana
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ध्यान द जए: पुस्तक म (क) वाली पत्ती का मलान आम से पहले ही जोड़कर दखा दया गया है। बाक पाँच का
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मलान आपको करना है।
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अपनी भाषा वाला खाना: इसे आप घर पर पूछकर भ रए। हर भाषा म इनके नाम अलग होते ह — जैसे आम को
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कह ‘आंबा’ कहते ह तो कह ‘आम्र’। दाद -नानी से पू छए, उन्ह सबसे अ े नाम याद होते ह।
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प्र.3 नीचे द गई प त्तय को पहचा नए और इनके नाम तथा वशेषताएँ अपने अध्यापक तथा अ भभावक क
सहायता से ल खए —
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प त्तयाँ नाम वशेषता
आम बंदनवार बनाने म प्रयोग क जाती ह।
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प त्तयाँ नाम वशेषता
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पूरी ता लका इस प्रकार भरी जाएगी —
पत्ती नाम वशेषता
पहली आम बंदनवार बनाने म प्रयोग क जाती ह। (यह पुस्तक म दया हुआ है)
दू स री शीशम एक ही डंठल पर तीन-चार प त्तयाँ साथ लगती ह। इसक लकड़ी बहुत मज़बूत होती है।
तीसरी पीपल इसका सरा लंबी नोक जैसा होता है। हल्क हवा चलने पर भी यह खड़खड़ाने लगती है।
चौथी कमल गोल थाली जैसी होती है और पानी पर तैरती रहती है। पानी क बूँद इस पर ठहरत नह , फसल जाती ह।
पाँचवी ं पालक इसका साग बनाकर खाया जाता है। पालक खाने से शरीर को ताकत मलती है।
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पहचान का आधार: पीपल क पत्ती का लंबा नुक ला सरा और कमल क पत्ती क गोल थाली जैसी बनावट — इन
दो नशा नय से ये दोन तुरंत पहचानी जाती ह।
संकेत: ‘बंदनवार’ वह लड़ी होती है जो त्योहार पर दरवाज़े के ऊपर बाँधी जाती है। इसम आम क प त्तयाँ और गदे
के फूल लगाए जाते ह।
प्र.4 आपके प रवेश म जो भी पत्ते दखते ह, उनका संग्रहण क जए। पत्त को कसी मोटे कागज पर चपकाइए।
उनक वशेषताओं को ध्यान म रखते हुए उनके बारे म दो-दो वाक्य ल खए।
यह आपको स्वयं करने वाला काम है। इसे इस तरह क जए —
1. अपने आँगन, स्कूल या पाक से गरे हुए पाँच-छह पत्ते चु नए। पेड़ से पत्ते मत तो ड़ए।
2. पत्त को दो दन कसी पुरानी कताब के बीच दबाकर सुखा ली जए।
3. मोटे कागज़ पर ग द से चपकाइए। हर पत्ते के नीचे उसका नाम ल खए।
4. हर पत्ते के बारे म दो वाक्य ल खए — एक उसके आकार का, एक उसके काम का।
नमूना उत्तर:
पत्ता दो वाक्य
नीम नीम क पत्ती के कनारे आरी जैसे दाँतेदार होते ह। इसे उबालकर उस पानी से नहाने पर खुजली म आराम मलता है।
के ला केले का पत्ता बहुत बड़ा और चौड़ा होता है। द क्षण भारत म इस पर खाना परोसा जाता है।
तुल सी तुलसी क प त्तयाँ छोट और महकदार होती ह। इन्ह काढ़े म डाला जाता है।
अ े काम म क्या होना चा हए: हर पत्ते का नाम, उसका आकार और उसका उपयोग — तीन बात। इससे
आपक कॉपी एक छोट -सी पत्ती-पुस्तक बन जाएगी।
म नीम ँ — पृष्ठ 35 और 36
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कक्षा 4 हद अध्याय 3 नीम
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नीम स्वयं अपने बारे म बता रहा है
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म नीम ँ सं वाद
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a s emनीम के बारे म कुछ आधे-अधूरे वाक्य लखे ह। सहपा ठय से चचा करके इन वाक्य को पूरा क जए — •
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नीचे
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प्र.1
मेरा एक-एक भाग ......... है। • मेरी प त्तय का आकार ......... और रंग ......... होता है। • मेरी प त्तय के कनारे
......... होते ह। • मेरी प त्तय को उबालकर उस पानी से नहाने से ......... दूर होते ह। • मेरी कोमल टह नयाँ दाँत
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......... करने के काम आती ह। इसे ......... कहते ह। • मेरे फल को ......... कहा जाता है। • मेरी प त्तय का स्वाद
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a s em म रखा जाता है। • ......... मास म मेरी छटा दे खने लायक होती
......... होता है। • मेरी प त्तय को सुखाकर .........
है। • आओ, कभी मेरी डाल पर .........
aglका आनंद लो।
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नीम अपने बारे म यह कह रहा है। पूरे वाक्य इस प्रकार बनगे —
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अधूरा वाक्य पूरा वाक्य
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a मेरा एक-एक भाग ......... है। मेरा एक-एक भाग काम का (उपयोगी) है।
m मेरी प त्तय का आकार लंबा-नुक ला और रंग हरा होता है। a s
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मेर ी पि यों का आकार ......... और रंग ......... होता है।
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मेर ी पि यों के िकनारे ......... होते है।
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मेर ी पि यों को उबालकर उस पानी से नहाने से ......... दू र होते है।
ं ... नहाने से खुजली और चम-रोग दूर होते ह।
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मेर ी कोमल टहिनयाँ दाँत ......... करने के काम आती है।
ं इसे ......... मेरी कोमल टह नयाँ दाँत साफ़ करने के काम आती ह। इसे दातुन
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कहते ह।
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कहते है।
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g l रे फल को ......... कहा जाता है। मेरे फल को नबौरी कहा जाता है।
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मेर ी पि यों का स्वाद ......... होता है। मेरी प त्तय का स्वाद कड़वा होता है।
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मेर ी पि यों को सुखाकर ......... में रखा जाता है। मेरी प त्तय को सुखाकर अनाज और कपड़ म रखा जाता है।
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......... मास में मेर ी छटा दे खने लायक होती है। चैत्र मास म मेरी छटा दे खने लायक होती है।
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आओ, कभी मेर ी डाल पर ......... का आनंद लो। आओ, कभी मेरी डाल पर झूला झूलने का आनंद लो।
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दो बात समझ ली जए:
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a 2. चैत्र (माच–अप्रैल) म नीम पर नई क पल और छोटे सफ़ेद फूल आते ह। तब पूरा पेड़ नया-नया लगता है — यही
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उसक छटा है।
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संकेत: ‘छटा’ का अथ है सुंदरता। ‘दातुन’ वह टहनी है जससे दाँत साफ़ कए जाते ह।
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कक्षा 4 हद अध्याय 3 नीम AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 आपने नीम के बहुत से गुण के बारे म जाना। इसक टह नय , प त्तय , नबौ रय म औषधीय गुण पाए जाते ह।
इस लए इसे औषधीय वृक्ष भी कहते ह। अपने सहपा ठय से चचा करके कुछ और औषधीय पेड़-पौध एवं
लताओं के नाम नीचे ल खए — (एक नाम दया गया है — तुलसी)
औषधीय का अथ है — दवा के काम आने वाला। ऐसे कुछ पेड़-पौधे और लताएँ ये ह —
नाम कस काम आता है
तुल सी सद -खाँसी म इसक प त्तयाँ काढ़े म डाली जाती ह (यह दया हुआ है)
पुद ीना पेट ठ क रखने और चटनी बनाने म
अदरक खाँसी और गले क खराश म
हल्दी चोट लगने पर और दूध म डालकर
आँवला बाल और पेट के लए; इसम वटा मन-सी होता है
घ ृतकु मारी (एलोवेरा) जलने या कटने पर इसका गूदा लगाया जाता है
िगलोय (लता) बुखार के बाद ताकत के लए; यह एक बेल है
लता कसे कहते ह: जो पौधा अपने आप खड़ा न रह सके और कसी सहारे पर चढ़े , उसे लता या बेल कहते ह।
गलोय ऐसी ही एक लता है।
ध्यान र खए: कोई भी पत्ती या जड़ अपने आप खाकर मत दे खए। बड़ से पूछे बना कोई घरेलू दवा न ल।
प्र.3 आप नीम क डा लय पर रस्सी डालकर झूला झूलने का आनंद लेना चाहते ह। आप वहाँ झूला डालने गए।
कल्पना क जए क नीम क डा लयाँ आपसे बात करने लग । उस संवाद को ल खए — नीम – अरे! बहुत दन
बाद आई/आए हो!
यह कल्पना का काम है। आपका संवाद अपना होगा। बस दो बात का ध्यान र खए — हर पं क्त छोट हो, और बात झूले तथा पेड़
क दे खभाल के आस-पास घूमे।
नमूना उत्तर:
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नीम – अरे! बहत
ु िदन बाद आई/आए हो!
आप – हाँ नीम भै या, परी ा चल रही थी। आज झूला डालने आया हूँ।
नीम – डालो, पर रस्सी मोटी वाली डालना। पतली रस्सी मेरी छाल काट दे त ी है।
आप – ठीक है। मै ं रस्सी के नीचे कपड़ ा भी लपेट दू ँगा।
नीम – वाह! तब तो मुझे िबलकु ल दद नही ं होगा। झूलो और खूब हँसो।
आप – धन्यवाद! गरमी में त म्ु हारी छाया ही हमारा सबसे ठं डा कमरा है।
अ े संवाद म क्या हो: पेड़ भी एक साथी क तरह बोले, ब ा उससे वनम्रता से बात करे, और अंत म पेड़ क
दे खभाल क कोई बात आ जाए। क वता म भी नीम ऐसा ही मत्र है जो सबका मन बहलाता है।
करके दे खए: इस संवाद को दो साथी मलकर कक्षा म बोलकर दखाइए — एक नीम बने, एक ब ा।
बूझो तो जान — पृष्ठ 36
चार पहे लयाँ — पहले अथ सम झए, फर उत्तर
बू झो तो जान
प्र.1 पगरी म भी, गगरी म भी, और तुम्हारी नगरी म भी। क ी खाओ, पक्क खाओ, सर पर उसका तेल लगाओ।
उत्तर — गरी (ना रयल के भीतर का सफ़ेद गूदा)।
पहेली क पं क्त इसका सुराग
“पगरी में भी, गगरी में भी, और तुम्हारी नगरी में भी।” पगरी, गगरी, नगरी — तीन शब्द के अंत म गरी छपा है।
“कच्ची खाओ, पक्की खाओ,” गरी क ी भी खाई जाती है और सुखाकर भी।
“िसर पर उसका तेल लगाओ।” गरी से ही ना रयल का तेल नकलता है, जो बाल म लगाया जाता है।
यह पहेली कैसे बनी: इसम शब्द के भीतर छपा हुआ एक टु कड़ा ढूँ ढ़ना है। ऐसी पहेली म हर शब्द को धीरे-धीरे
बोलकर दे खए — छपा हुआ शब्द अपने आप सुनाई दे जाता है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 3 नीम AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 म भाग नह सकती फर भी लोग मुझे बाँधते ह। बताओ म कौन ँ?
उत्तर — हाथ घड़ी।
क्य : घड़ी के पैर नह होते, इस लए वह भाग नह सकती। फर भी लोग उसे कलाई पर बाँधते ह। सामान्यतः तो
भागने वाले को बाँधा जाता है — यही उल्ट बात इस पहेली को मज़ेदार बनाती है।
मज़े क बात: हम कहते ह “घड़ी चल रही है”, जब क वह अपनी जगह से हलती भी नह ।
प्र.3 वह क्या है जहाँ नद , नहर, समुद्र है पर गा ड़याँ नह ?
उत्तर — मान चत्र (नक़्शा)।
क्य : मान चत्र पर नद , नहर, समुद्र, पहाड़ और सड़क — सब बनी होती ह। पर वे सब केवल चत्र ह। इसी लए वहाँ
कोई गाड़ी, नाव या आदमी नह दखता।
करके दे खए: अपनी कक्षा म भारत का मान चत्र दे खए। उसम गंगा नद और हद महासागर ढूँ ढ़ए।
प्र.4 वह क्या है जसे दे खा जा सकता है पर छु आ नह जा सकता?
उत्तर — छाया (परछाईं)।
क्य : धूप म खड़े होने पर हमारी छाया ज़मीन पर दखती है। पर हाथ बढ़ाकर उसे पकड़ा नह जा सकता, क्य क
छाया कोई वस्तु नह है। वह तो केवल वह जगह है जहाँ प्रकाश नह पहुँच पाता।
जोड़ ली जए: नीम क छाया भी ऐसी ही है — दखती है, ठं डक दे ती है, पर छु ई नह जाती।
मेरा पौधा — पृष्ठ 37
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कक्षा 4 हद अध्याय 3 नीम AglaSem · NCERT Solutions
गमले म अपना मनपसंद पौधा लगाइए
मे रा पौधा गतवध
प्र.1 पुस्तक म द गई व ध से गमले या बतन म अपना मनपसंद पौधा लगाइए। ‘प्र त दन अवलोकन क जए क
आपके ारा लगाया गया बीज कब अंकु रत होता है। अपने पौधे को बढ़ते हुए दे खने का आनंद ली जए।’ — यह
काम कन- कन चरण म पूरा होगा, क्रम से ल खए।
यह करने वाला काम है। पुस्तक म द गई व ध इन चरण म पूरी होती है —
1 2 3 4
गमला तैयार करने से लेकर अंकुर नकलने तक के चार चरण।
1. म या टन का खुले मुँह वाला बतन ली जए। छोटा या बड़ा गमला मल जाए तो वही ले ली जए।
2. बड़ क सहायता से बतन क तली के बीच एक छे द क जए। यह छे द अ त रक्त पानी के रसाव के लए है।
3. टू टे घड़े या सुराही के दो-तीन छोटे टु कड़े (या छोटे कंकड़-पत्थर) लेकर छे द पर टका द जए।
4. गमले के आकार के अनुसार म ली जए। चाह तो उसम थोड़ी खाद मला ली जए।
5. म को भुरभुरा करके गमले म डा लए और अपने मनपसंद पौधे का बीज बोइए।
6. ऊपर से थोड़ा-सा पानी छड़ कए। एक साथ बहुत पानी मत डा लए।
7. प्र त दन दे खए क बीज कब अंकु रत होता है, और अपने पौधे को बढ़ते हुए दे खने का आनंद ली जए।
छे द क्य ज़रूरी है: य द पानी बाहर न नकले तो जड़ पानी म डू बी रह जाती ह और पौधा गल जाता है। कंकड़
इस लए रखे जाते ह ता क छे द से म न बह जाए।
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कक्षा 4 हद अध्याय 3 नीम
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नमूना उत्तर (अवलोकन ता लका):
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दन क्या दखा
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a glपहला िदन बीज बोया, थोड़ा पानी डाला
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चौथा िदन म से छोटा-सा सफ़ेद अंकुर नकला
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छठा िदन
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दसवाँ िदन aउँgगlली जतना ऊँचा हो गया
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सूरज क धूप वाली जगह पर गमला र खए और रोज़ थोड़ा पानी द जए।
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aglत-भाँ त क प त्तयाँ — पृष्ठ 38 और 39
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पाठ 3 के बाद छपा बना क्रमांक का छोटा पाठ — ह रनी नगद्र और सीमा मुंडोली
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भाँ त-भाँ त क प त्तयाँ पहचा नए
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प्र.1
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‘भाँ त-भाँ त क प त्तयाँ’ पाठ क पहली तीन पं क्तयाँ प त्तय के बारे म क्या बताती ह?
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पाठ क शुरुआत म ले खकाएँ बताती ह क सब प त्तयाँ एक जैसी नह होत ।
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ag “पि याँ कई पकार की होती है।
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कु छ छोटी तो कु छ बड़ ी।
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कु छ गोल और कु छ प ी के पंख जै सी।”
इन तीन पं क्तय से दो बात पता चलती ह —
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प त्तयाँ आकार म अलग होती ह — कोई छोट , कोई बड़ी;
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प त्तयाँ बनावट म अलग होती ह — कोई गोल, तो कोई पक्षी के पंख जैसी।
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ag ‘भाँ त-भाँ त’ का अथ: तरह-तरह क , कई प्रकार क । यही पाठ का नाम भी है और यही उसक मुख्य बात भी।
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कक्षा 4 हद अध्याय 3 नीम AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 नीचे एक पत्ते का चत्र है। पाठ के अनुसार बताइए क यह कस पौधे का पत्ता है और इसके पत्ते कतने लंबे होते
ह?
एक बहुत बड़ा पत्ता, जसके ऊपरी सरे पर गहरा कटाव है।
यह हाथीकान पौधे का पत्ता है।
“हाथीकान पौधा (जायंट एिलफैंट-ईयर कोलोके िसया)
अरवी का एक पकार है। इसके प े छह फीट तक
लंबे होते है ं यानी अिधकतर मनुष्यों से लंबे।”
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कक्षा 4 हद अध्याय 3 नीम AglaSem · NCERT Solutions
यह अरवी का एक प्रकार है।
इसके पत्ते छह फ ट तक लंबे होते ह।
यानी ये अ धकतर मनुष्य से भी लंबे होते ह।
नाम ऐसा क्य : पत्ता इतना बड़ा और फैला हुआ होता है क हाथी के कान जैसा दखता है। इसी लए इसे
‘हाथीकान’ कहते ह।
पुस्तक क बात: पुस्तक म यह शब्द ‘अरवी’ छपा है। बहुत जगह इसे ‘अरबी’ भी लखा जाता है। दोन एक ही
पौधे के नाम ह।
प्र.3 नीचे दए चत्र म प त्तयाँ बहुत छोट -छोट ह। पाठ के अनुसार ये कस पेड़ क प त्तयाँ ह? पाठ म इनके छोटे होने
क तुलना कससे क गई है?
एक डंडी के दोन ओर लगी बहुत-सी छोट -छोट प त्तयाँ।
ये इमली क प त्तयाँ ह।
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“इमली की पि याँ इतनी छोटी होती है ं िक हमारी
छोटी उँ गली के नाखून को भी नही ं ढँक सकती ं।”
पाठ म इनक तुलना हमारी छोट उँगली के नाखून से क गई है। ये प त्तयाँ उस नाखून से भी छोट होती ह।
ऐसी तुलना क्य : ‘बहुत छोट ’ कहने से आकार समझ नह आता। पर नाखून तो हमारे पास ही है — उससे तुलना
करते ही आकार आँख के सामने आ जाता है।
करके दे खए: अपनी छोट उँ गली का नाखून दे खए। अब सो चए क इमली क पत्ती उससे भी छोट होती है।
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प्र.4 नीचे द गई पत्ती को ध्यान से दे खए। पाठ के अनुसार यह कस पेड़ क पत्ती है और इसका आकार कस चीज़
जैसा बताया गया है?
एक पत्ती, जसके कई नुक ले भाग एक ही बदु से चार ओर फैले हुए ह।
यह पपीते क पत्ती है। पाठ के अनुसार इसका आकार तारे जैसा होता है।
“पपीते की पि याँ तारे के आकार की होती है।
ं ”
क्य ऐसा लगता है: पत्ती के कई नुक ले भाग एक ही जगह से चार ओर फैलते ह। इसी लए पूरी पत्ती आसमान के
तारे जैसी दखाई दे ती है।
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नीचे द गई पत्ती कस पेड़ क है? पाठ म इसके आकार क तुलना कससे क गई है?
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एक पत्ती, जसका सरा लंबी नोक जैसा खचा हुआ है।
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यह पीपल क पत्ती है।
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“पीपल की पि याँ मनुष्य के हृदय के आकार की
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होती है।
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पाठ म इसक तुलना मनुष्य के हृदय ( दल) के आकार से क गई है।
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पहचान क नशानी: पीपल क पत्ती का सरा लंबी नोक जैसा होता है। यह नोक कसी और पत्ती म ऐसी नह
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मलती, इस लए पीपल तुरंत पहचाना जाता है।
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प्र.6 नीचे दया गया चत्र कस पेड़ क प त्तय का है? पाठ के अनुसार ये कस चीज़ जैसी दखती ह?
एक लंबी डंडी, जसके दोन ओर बहुत-सी पतली-पतली प त्तयाँ लगी ह।
यह ना रयल क प त्तय का चत्र है।
“नािरयल की पि याँ कागजी पंखे जै सी िदखती है।
ं ”
पाठ के अनुसार ये कागज़ी पंखे जैसी दखती ह।
क्य : एक लंबी डंडी के दोन ओर बहुत-सी पतली प त्तयाँ पास-पास लगी होती ह। हवा चलने पर वे कागज़ के पंखे
क तरह हलती ह।
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प्र.7 नीचे द गई पत्ती कस पेड़ क है? पाठ म इसक तुलना कससे क गई है?
एक ही डंठल से नकली पाँच लंबी प त्तयाँ।
यह सेमल क पत्ती है।
“सेमल की पि याँ हाथ के पंजे की तरह होती है।
ं ”
पाठ म इसक तुलना हाथ के पंजे से क गई है।
क्य : एक ही जगह से पाँच प त्तयाँ नकलती ह, ठ क जैसे हमारे पंजे से पाँच उँ ग लयाँ। अपनी हथेली खोलकर इस
चत्र के पास र खए — दोन एक जैसे लगगे।
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प्र.8 नीचे द गई पत्ती कस पेड़ क है? पाठ के अनुसार यह कस चीज़ क तरह होती है?
एक पत्ती जसके दो गोल भाग ह और ऊपर बीच म गहरा कटाव है।
यह कचनार क पत्ती है।
“कचनार की पि याँ ऊँ ट के पैरों की तरह होती है।
ं ”
पाठ के अनुसार यह ऊँट के पैर क तरह होती है।
क्य : पत्ती बीच से कट होती है और उसके दो गोल भाग बन जाते ह। ऊँट का पैर भी नीचे से इसी तरह दो भाग म
बँटा दखता है।
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प्र.9 नीचे दए गए पौधे क प त्तयाँ कैसी होती ह? इन पौध को कतने पानी क आवश्यकता होती है?
मोटे और चपटे हरे भाग, जन पर चार ओर नुक ली सूइयाँ ह।
यह नागफनी है।
“नागफनी की पि याँ नुक ीली और काँटे द ार होती है।
ं
इन पौधों को कम पानी की आवश्यकता होती है।”
इसक प त्तयाँ नुक ली और काँटेदार होती ह।
इन पौध को कम पानी क आवश्यकता होती है।
दोन बात जुड़ी हुई ह: पत्ती चौड़ी हो तो उससे पानी जल्द उड़ जाता है। नागफनी क प त्तयाँ काँट जैसी पतली
होती ह, इस लए उसका पानी नह उड़ता। यही कारण है क वह रे गस्तान जैसी सूखी जगह म भी हरी रहती है।
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नीचे दया गया पत्ता कस पेड़ का है? पाठ के अनुसार इसका उपयोग कस तरह कया जाता है?
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एक बहुत बड़ा पत्ता, जसम एक-सी सीधी नस दखाई दे ती ह।
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agl यह केले का पत्ता है।
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“के ले के प े इतने बड़ े होते है ं िक इनका उपयोग
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थाली की तरह िकया जाता है।” ase
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पाठ के अनुसार इसका उपयोग थाली क तरह कया जाता है, यानी इस पर खाना परोसा जाता है।
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omहै, इस लए कूड़ा भी नह फैलता।
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क्य : पत्ता बड़ा, चौड़ा और मज़बूत होता है, इस लए उस पर खाना रखा जा सकता है। यह अपने आप गल- मल
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क्या आप जानते ह: द क्षण भारत म त्योहार और ववाह म आज भी केले के पत्ते पर भोजन परोसा जाता है।
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प्र.11 अब आप भी अपने आस-पास के पेड़-पौध क प त्तय को दे खए और उनके आकार के बारे म जा नए।
यह आपको स्वयं करने वाला काम है। इसे इस तरह क जए —
1. अपने घर, स्कूल या पाक म पाँच अलग-अलग प त्तयाँ दे खए।
2. हर पत्ती का आकार कसी जानी-पहचानी चीज़ से मलाकर बताइए — जैसे दल, तारा, पंखा, पंजा।
3. उसका नाम बड़ से पूछ ली जए और अपनी कॉपी म लख ली जए।
नमूना उत्तर:
पत्ती कस चीज़ जैसी लगी
पीपल दल जैसी, ऊपर लंबी नोक
नीम लंबी-पतली, कनारे आरी जैसे दाँतेदार
के ला बहुत बड़ी, चटाई जैसी चौड़ी
तुल सी छोट और महकदार
कमल गोल थाली जैसी
इससे क्या सीखगे: हर पेड़ क पत्ती अलग होती है। यही अंतर हम पेड़ को पहचानना सखाता है — बना नाम पूछे
भी।
अध्याय — एक नज़र म
नीम एक क वता है। इसे हरीश नगम ने लखा है। पूरी क वता म एक ही पेड़ क बात है — नीम क । हर दो पं क्तय के अंत
म ‘नीम’ शब्द आता है, इस लए क वता गाने जैसी लगती है।
क वता क हर जोड़ी पं क्त नीम का एक गुण बताती है। पहले उसका रूप, फर उसका स्वभाव, फर उसका काम — इसी क्रम
से क व आगे बढ़ते ह।
पहली दो पं क्तय म नीम हवा म लहराता-बलखाता है और दनभर हँसता-गाता है। क व ने पेड़ को एक खुश रहने वाले मत्र
क तरह दखाया है।
तीसरी और चौथी पं क्त म च ड़या, कौआ और तोता आते ह। नीम इन सबसे अपना नेह जताता है। ‘नेह’ का अथ है —
प्यार और स्नेह।
आगे क व कहते ह क नीम डॉक्टर नह है, फर भी कतने रोग भगाता है। नीम क प त्तयाँ, टह नयाँ और नबौ रयाँ घरेलू
उपचार म काम आती ह। इसी लए इसे औषधीय वृक्ष कहते ह।
हवा प्रदू षत यानी गंद हो जाए तो नीम उसे शुद्ध बना दे ता है। पेड़ गंद हवा लेकर हम साफ़ हवा दे ते ह। यही बात क वता को
पयावरण से जोड़ती है।
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‘कड़वे तन म मन को मीठा, रखना हम सखाता नीम।’ — नीम का स्वाद कड़वा है, पर उसका काम मीठा है। यह क वता क
सबसे सुंदर सीख है: बाहर से कड़वे दखने वाले भी भीतर से अ े हो सकते ह।
अंत म क व कहते ह क नीम कसी से कुछ लेता नह , पर सबको बहुत कुछ दे जाता है — छाया, हवा, दवा और झूला झूलने
क डाल।
अभ्यास म बातचीत के प्रश्न, क वता पर आधा रत प्रश्न, लग (स्त्री लग–पु ल्लंग) का ाकरण, ‘प्र’ से बनने वाले शब्द,
अ भनय, वृक्ष के गुण, प त्तय क पहचान, ‘म नीम ँ’ के अधूरे वाक्य, संवाद-लेखन, चार पहे लयाँ और गमले म पौधा लगाने
क ग त व ध द गई है।
पाठ के बाद पृष्ठ 38 और 39 पर एक छोटा पाठ छपा है — भाँ त-भाँ त क प त्तयाँ, जसे ह रनी नगद्र और सीमा मुंडोली
ने लखा है। इसम बताया गया है क प त्तयाँ कतने अलग-अलग आकार क होती ह — कोई हाथी के कान जतनी बड़ी, तो
कोई नाखून से भी छोट ।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपने वाक्य म प्रयोग
लहराना हवा में लहरों की तरह “लहराता-बलखाता नीम,” खेत म गे ँ क बा लयाँ लहरा रही ह।
िहलना
बलखाना टेढ़ा-मेढ़ा होकर मुड़ना “लहराता-बलखाता नीम,” पहाड़ी सड़क बलखाती हुई ऊपर
जाती है।
नेह प्यार, स्नेह “अपना नेह जताता नीम।” दाद मुझसे बहुत नेह करती ह।
प्रदू षत गंद ी, मैल ी (वायु या पानी) “चले प्रदू षत वायु कभी तो,” कारखाने के धुएँ से हवा प्रदू षत हो
गई।
शुद्ध साफ़ , िबना िमलावट का “उसको शुद्ध बनाता नीम।” पेड़ के बीच क हवा शुद्ध होती है।
कड़वा िजसका स्वाद तीखा- “कड़वे तन म मन को मीठा,” नीम क पत्ती कड़वी होती है।
कसै ल ा हो
झूम- झूम ते हुए , िहलते-डुल ते हुए “हवा चले तो झूम-झूमके,” ब े झूम-झूमके गीत गा रहे थे।
झूमके
बहलाना मन लगाना, खुश करना “सब का मन बहलाता नीम।” छोट बहन का मन खलौने से
बहलाया।
नबौरी नीम का छोटा-सा फल “इसक टह नय , प त्तय , नबौ रय म औषधीय गुण पाए च ड़या पक नबौरी खा रही है।
जाते ह।”
औषधीय दवा के काम आने वाला “इस लए इसे औषधीय वृक्ष भी कहते ह।” तुलसी एक औषधीय पौधा है।
छटा सुंद रता, शोभा “............ मास म मेरी छटा दे खने लायक होती है।” वषा के बाद बाग क छटा दे खने
लायक थी।
भाँ त- तरह-तरह की, कई पकार “भाँ त-भाँ त क प त्तयाँ” मेले म भाँ त-भाँ त के खलौने सजे थे।
भाँ त की
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