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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 10: हमारा आकाश
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — हमारा अ त संसार
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
152 – 163 12 37 हन्द
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कक्षा 4 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 10 हमारा आकाश AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 4 · हमारे चार ओर क दु नया · हमारा अ त सं सार
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 10: हमारा आकाश
हमारा अ त संसार का पाठ 10 इकाई 5, हमारा पयावरण को पूरा करता है — और पुस्तक को भी। इस पाठ म आप बाहर नकलकर ऊपर दे खते ह।
सुबह, दोपहर और रात के आकाश का चत्र बनाते ह, सूय क पूव से सर के ऊपर और फर प श्चम तक क यात्रा दे खते ह, छाया को लंबा और छोटा
होते हुए दे खते ह, तार के पैटन बनाते ह और चंद्रमा क बदलती आकृ तय का रकॉड रखते ह।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
हमारा अ त संसार (कक्षा 4) 152 – 163
खं ड प्रश्न
12 37
माध्यम
हन्द
चत्र बनाइए — पृष्ठ 152
आकाश के छाया चत्र
चत्र बनाइए
प्र.1 नीचे दए गए ान पर सुबह, दोपहर और रात के आकाश का चत्र बनाइए।
सुबह का आकाश दोपहर का आकाश रात का आकाश
पुस्तक म दए गए तीन खाली ान, जनम आपको चत्र बनाना है।
तीन बॉक्स म अलग-अलग आकाश बनाइए। उनम रंग भी भ रए — केवल रेखाएँ मत ख चए।
1. सुबह का आकाश: आकाश म नारंगी और गुलाबी रंग भ रए। नीचे क ओर एक बड़ा नारंगी सूय बनाइए।
2. उड़ते हुए तीन-चार पक्षी भी बनाइए।
3. दोपहर का आकाश: आकाश म चमक ला नीला रंग भ रए। ऊपर, सर के ऊपर एक छोटा पीला सूय बनाइए।
4. दो-तीन सफेद बादल जोड़ द जए।
5. रात का आकाश: आकाश म गहरा नीला या काला रंग भ रए। चंद्रमा और बहुत सारे छोटे तारे बनाइए।
सही चत्र एक बात स्पष्ट दखाता है — दन के हर समय आकाश का रंग अलग-अलग होता है।
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नमूना उत्तर:
सुबह का आकाश दोपहर का आकाश रात का आकाश
तीन आकाश का एक नमूना चत्र। आपका चत्र इससे भन्न हो सकता है।
ऐसा क्य होता है: सूय ही हमारे आकाश को प्रका शत करता है। जब सूय नीचे होता है तब आकाश नारंगी दखता
है। जब सूय ऊपर होता है तब आकाश नीला दखता है। जब सूय नह होता तब अंधेरा हो जाता है और हम चंद्रमा
तथा तारे दखाई दे ते ह।
करके दे खए: एक ही खड़क से दन म तीन बार बाहर दे खए। जो सचमुच दखे, वही बनाइए। हो सकता है
आपक रात के आकाश म बादल ह और एक भी तारा न दखे।
ल खए — पृष्ठ 153
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आकाश के छाया चत्र
ल खए
प्र.1 नीचे द गई ता लका म सुबह, दोपहर और रात के समय आकाश म आप जो दे खते ह, उसके वषय म ल खए।
आपके लए कुछ बॉक्स पहले से भरे हुए ह। आप इनम नई बात जोड़कर अपनी ता लका को बढ़ा सकते ह।
सुबह का आकाश दोपहर का आकाश रात का आकाश
नारंगी रंग का आकाश
सूय का तेज प्रकाश चंद्रमा और तारे
नारंगी सूय
ता लका जैसी पुस्तक म छपी है — कुछ बॉक्स पहले से भरे हुए ह।
हर खाली बॉक्स म एक बात ल खए। केवल वही ल खए जो आपको आकाश म सचमुच दखता है।
नमूना उत्तर: पूरी भरी हुई ता लका। काले रंग क चार बात वे ह जो पुस्तक म पहले से छपी ह।
सुबह का आकाश दोपहर का आकाश रात का आकाश
नारंगी रंग का आकाश आकाश चमकीला नीला आकाश गहरा काला
सूय नीचे की ओर िदखाई दे ता है सूय का तेज प्रकाश चंद्रमा और तारे
नारंगी सूय सूय िसर के ऊपर आ जाता है चंदमा की आकृित बदलती रहती है
छाया लंबी होती है छाया छोटी होती है सूय नहीं, इसिलए छाया नहीं
प ी घोंसलों से बाहर िनकलते है ं बहतु कम प ी िदखाई दे ते है ं उल्लू और चमगादड़ उड़ ते है ं
ऐसा क्य होता है: आकाश म हम जो कुछ दखता है, वह सूय पर नभर करता है। सुबह और शाम सूय नीचे रहता
है, इस लए आकाश नारंगी दखता है और छाया लंबी होती है। दोपहर म सूय सर के ऊपर आ जाता है, इस लए
प्रकाश तेज होता है और छाया छोट होती है। रात म सूय नह होता, इस लए आकाश काला दखता है और चंद्रमा
तथा तारे दखाई दे ते ह।
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संकेत: पुस्तक कहती है क आप नई बात जोड़ सकते ह। तो अपनी एक पं क्त और बनाइए — “आकाश म उड़ती
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पतंग”, “हवाई जहाज क सफेद लक र” या “बा रश से पहले के काले बादल”।
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प्र.2 सहपा ठय के साथ अपने अवलोकन को साझा क जए और उनके अवलोकन से इनक तुलना क जए।
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यह काम चार-पाँच ब a
के छोटे समूह म क जए।g
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1. अपनी ता लका एक-एक खाना करके पढ़कर सुनाइए।
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2. मत्र क बात सु नए। जो बात आपक बात से मलती हो, उस पर सही का नशान लगाइए।
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4. ग नए .कc कतनी बात मल और कतनी नई थ । g
3. जो नई बात अ लगे, उसे रंगीन प सल से अपनी ता लका म जोड़ ली जए।
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l a sपाएँe गे क अ धकतर बात मलती-जुलती ह, क्य क आप सबने एक ही आकाश देखा है। जो बात नह मलत , वे समय और
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ान के कारण अलग होती ह।
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नमूना उत्तर: “हमम से पाँच ब ने सुबह के लए ‘नारंगी आकाश’ लखा था। केवल र व ने लखा — ‘आकाश म अब भी पतला
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चंद्रमा दख रहा था’, क्य क वह पाँच बजे उठता है। कमला रात के आकाश म एक भी तारा नह था, क्य क उस रात उसके गाँव
म बादल थे।”
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तुलना क्य कर: तुलना से पता चलता है क आकाश सबके लए एक ही है, पर आप क्या दे खते ह यह इस पर
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नभर करता है क आपने कब और कतने ध्यान से दे खा।
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ag प्र.3 क्या आपने दन के अलग-अलग समय पर जंतुओं और पौध क ग त व धय म और उनके व्यवहार म कोई
प रवतन दे खा है? इन प रवतन पर अपने मत्र के साथ चचा क जए और एक सूची बनाइए।
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हाँ। दन बीतने के साथ जंतुओं और पौध क ग त व धयाँ बदलती रहती ह।
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नमूना उत्तर: एक पूरे दन के अवलोकन के बाद बनाई गई सूची।
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दन का जंतु और पक्षी पौधे
समय
प्रात:काल मुग बाँग दे ता है। प ी चहचहाकर घोंसलों से िनकलते है।ं गाय-बकरी बहतु -से फू ल िखल जाते है।ं पत्तों पर ओस की
चरने जाती है।ं बूदँ े ं िदखती है।ं
मध्याह्न कु त्ते और भैसं े ं छाया में आराम करते है।ं बहुत कम प ी िदखाई दे ते है।ं तेज धूप में पित्तयाँ कु छ मुरझाई-सी लगती है।ं
सायंकाल प ी घोंसलों की ओर लौटते है।ं गाय-बकरी घर आती है।ं दीये के पास िदन में िखलने वाले फू ल बंद होने लगते है।ं
कीड़ े मँडराने लगते है।ं
रात उल्लू, चमगादड़ , झींगरु और मच्छर िनकलते है।ं अिधकतर जंत ु सो रात की रानी जैसे फू ल िखलते है ं और तेज
जाते है।ं सुगंध दे ते है।ं
ऐसा क्य होता है: अ धकतर जंतु तभी घूमते- फरते ह जब प्रकाश हो और भोजन मल सके, और अंधेरे म आराम
करते ह। कुछ जंतु इसके उलट होते ह — उल्लू और चमगादड़ रात को नकलते ह। पौधे सूय के प्रकाश से काम करते
ह, इस लए बहुत-से फूल सुबह खलते ह और शाम को बंद हो जाते ह।
संकेत: अपने घर के पास कसी एक जंतु को एक सप्ताह तक दे खए — कौआ, गली का कुत्ता या च टय क
कतार। हर सुबह और हर शाम उसके बारे म एक पं क्त ल खए। पैटन अपने आप दख जाएगा।
प्र.4 क्या आप आकाश म सबसे चमक ली वस्तु का अनुमान लगा सकते ह?
सूय। यही हमारे आकाश क सबसे चमक ली वस्तु है।
यह इतना चमक ला है क जब यह आकाश म होता है, तब हम अन्य तारे दखाई नह दे ते।
यह हम प्रकाश और ऊष्मा दोन दे ता है।
तारे कहाँ छप जाते ह: दन म भी तारे आकाश म रहते ह। सूय का प्रकाश इतना तेज होता है क उनक छोट -सी
टम टमाहट हमारी आँख को दखाई नह दे ती। सूयास्त के बाद यह तेज प्रकाश हट जाता है और तारे फर दखने
लगते ह।
स्वयं जाँ चए: अंधेरे कमरे म जलती हुई टॉच दे खए — वह तुरंत दख जाती है। अब ूबलाइट जलाकर दे खए।
टॉच जल तो रही है, पर अब मु श्कल से दखती है।
चचा क जए — पृष्ठ 154
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सूय दय और सूयास्त
चचा क जए
प्र.1 जब सूय उगता है तब — आकाश कैसा दखाई दे ता है?
अंधेरा आकाश धीरे-धीरे उजला होने लगता है।
आकाश का जो भाग सूय क ओर होता है, वह नारंगी, गुलाबी और सुनहरा हो जाता है।
सूय स्वयं नारंगी दखता है और नीचे, धरती के पास होता है।
तारे और चंद्रमा धीरे-धीरे धुँधले होकर दखना बंद हो जाते ह।
थोड़ी दे र म पूरा आकाश हल्का नीला हो जाता है।
ऐसा क्य होता है: सूय आकाश क सबसे चमक ली वस्तु है। जैसे ही यह दखाई दे ता है, इसका प्रकाश पूरे आकाश
म फैल जाता है और तार का हल्का प्रकाश दखाई नह दे ता।
प्र.2 जब सूय उगता है तब — पक्षी और जंतु क्या करते ह?
वे जाग जाते ह और काम म लग जाते ह।
मुगा बाँग दे ता है। पक्षी जोर-जोर से चहचहाते ह और भोजन क खोज म घ सल से बाहर नकलते ह।
गाय, बकरी और भस को चरने के लए बाहर ले जाया जाता है।
तत लयाँ और मधुम क्खयाँ खले हुए फूल पर आती ह।
उल्लू और चमगादड़, जो रात भर बाहर थे, लौटकर आराम करने लगते ह।
ऐसा क्य होता है: अ धकतर जंतुओं को भोजन प्रकाश म ही मलता है। इस लए उनका दन तभी शुरू होता है जब
सूय का प्रकाश लौट आता है।
प्र.3 जब सूय उगता है तब — घर पर हम क्या-क्या प रवतन दखाई दे ते ह?
सूय के साथ पूरा घर जाग जाता है।
ब त्तयाँ बुझा द जाती ह — अब खड़ कय से धूप अंदर आने लगती है।
सब लोग उठते ह, दाँत साफ करते ह और नहाते ह।
चाय बनती है और नाश्ता पकता है। घर म भोजन क सुगंध फैल जाती है।
कपड़े सुखाने के लए धूप म डाले जाते ह।
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ब े व ालय के लए तैयार होते ह और बड़े काम पर नकलते ह।
ऐसा क्य होता है: धूप हम मुफ्त म प्रकाश और ऊष्मा दे ती है। इस लए हम अपने अ धकतर काम, कपड़े सुखाना
और पकाना उसी समय करते ह।
प्र.4 जब सूय डू बता है तब — आकाश कैसा दखाई दे ता है?
उजला आकाश धीरे-धीरे अंधेरा होने लगता है।
आकाश का जो भाग सूय क ओर होता है, वह नारंगी और लाल हो जाता है।
सूय बड़ा और नारंगी दखता है और आकाश क दूसरी ओर ढल जाता है।
रंग फ के पड़ते ह, आकाश पहले धूसर और फर काला हो जाता है।
एक-एक करके तारे और चंद्रमा दखाई दे ने लगते ह।
ऐसा क्य होता है: सूय का तेज प्रकाश हट रहा होता है। उसके हटते ही तार का हल्का प्रकाश छपा नह रहता,
इस लए वे दखने लगते ह।
प्र.5 जब सूय डू बता है तब — पक्षी और जंतु क्या करते ह?
वे लौट आते ह और रात के लए बैठ जाते ह।
पक्षी कतार बनाकर, एक-दूसरे को पुकारते हुए अपने घ सल क ओर उड़ते ह।
गाय और बक रयाँ खेत से घर लौटती ह।
मु गयाँ दड़बे म चली जाती ह और अ धकतर जंतु सो जाते ह।
उल्लू, चमगादड़, झ गुर और मच्छर बाहर नकलते ह — उनका समय अब शुरू होता है।
ऐसा क्य होता है: जो जंतु दन के उजाले म भोजन खोजते ह, उन्ह अंधेरा होने से पहले सुर क्षत जगह पहुँचना
होता है। उल्लू और चमगादड़ जैसे कुछ जंतु अंधेरे म भी घूम सकते ह, इस लए वे तभी नकलते ह।
प्र.6 जब सूय डू बता है तब — घर पर हम क्या-क्या प रवतन दखाई दे ते ह?
घर रात के लए तैयार होने लगता है।
ब त्तयाँ और द ये जलाए जाते ह, क्य क अब धूप नह है।
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ब े खेल से लौटकर हाथ-पैर धोते ह।
सूखने के लए डाले गए कपड़े अंदर ले लए जाते ह।
रात का भोजन बनता है और पूरा प रवार साथ बैठकर खाता है।
गृहकाय पूरा होता है, दरवाजे बंद होते ह और सब सो जाते ह।
ऐसा क्य होता है: सूयास्त के बाद हम मुफ्त प्रकाश और ऊष्मा नह मलती। इस लए हम अपना प्रकाश स्वयं
जलाते ह और दन का शांत, घर के भीतर वाला भाग पूरा करते ह।
संकेत: घर के कसी बड़े से पू छए क सूय दय और सूयास्त के समय उन्ह क्या-क्या बदलता दखता है। बुजुग को
अक्सर याद रहता है क बजली आने से पहले गाँव का आकाश और उसक आवाज कैसी होती थ ।
छाया — पृष्ठ 155
छाया के वषय म रोचक बात
प्र.1 क्या आपने कभी अपनी छाया को अपने साथ चलते हुए दे खा है?
हाँ। आप जहाँ जाते ह, छाया भी वह जाती है।
आप चलते ह तो छाया चलती है। आप दौड़ते ह तो छाया भी दौड़ती है।
आप अलग-अलग मुद्राएँ बनाते ह तो छाया का आकार भी वैसे ही बदल जाता है।
आप कूदते ह तो छाया भी कूदती है।
ऐसा क्य होता है: छाया वह बनती है जहाँ आपका शरीर प्रकाश को रोक दे ता है। आपका शरीर हमेशा आपके
साथ ही रहता है, इस लए उसके ारा बनने वाला काला धब्बा भी आपके साथ ही चलता है।
करके दे खए: धूप म खड़े होकर दोन हाथ सर पर स ग क तरह र खए और जमीन पर दे खए। छाया के भी स ग
बन जाएँगे।
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ऊपर दए गए चत्र क छायाओं म क्या अंतर है?
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पृष्ठ 155 पर दए गए तीन चत्र, सरल रूप e
पात:काल की छाया मध्याह्न की छाया सायंकाल की छाया
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छायाओं म लंबाई और दशा का अंतर है।
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सुबeह:mछाया लंबी होती है।
a gl दोपहर: छाया छोट होती है — यह लगभग पैर के नीचे ही रहती है।
शाम: छाया फर से लंबी हो जाती है।
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पर सायंकाल क छाया सुबह क छाया के वपरीत दशा म बनती है।
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अथात पैटन यह है — लंबी → छोट → लंबी, और दोन लंबी छायाएँ उलट दशाओं म।
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ऐसा क्य होता है: सुबह और शाम को सूय आकाश म नीचे रहता है, इस लए छाया लंबी बनती है। दोपहर म वह
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सर के ऊपर आ जाता है, इस लए छाया समटकर छोट हो जाती है। और चूँ क सूय सुबह एक ओर तथा शाम को
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दूसरी ओर होता है, इस लए छाया पूरी तरह घूम जाती है।
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मेरी छाया कैसे बदल गई?
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पात:काल की छाया मध्याह्न की छाया सायंकाल की छाया
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पृष्ठ 155 पर दए गए तीन चत्र, सरल रूप म बनाए गए।
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आपक छाया तीन तरह से बदलती है।
a s em छोट और सायंकाल फर से लंबी।
aglसुबह क छाया के ठ क वपरीत दशा म जाती है।
1. लंबाई बदलती है। प्रात:काल लंबी, मध्याह्न
2. दशा बदलती है। शाम क छाया
3. आकार बदलता है — जब भी आप मुद्रा बदलते ह। हाथ फैलाइए, छाया भी हाथ फैला दे गी।
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ऐसा क्य होता है: सूय दन भर आकाश म चलता हुआ प्रतीत होता है। हर घंटे प्रकाश नई जगह से आता है,
इस लए जमीन पर बनने वाले काले धब्बे क लंबाई और दशा भी हर घंटे नई होती है।
प्र.4 क्या ऐसा सभी वस्तुओं के साथ होता है?
पात:काल की छाया मध्याह्न की छाया सायंकाल की छाया
पृष्ठ 155 पर दए गए तीन चत्र, सरल रूप म बनाए गए।
हाँ। ऐसा हर उस वस्तु के साथ होता है जो प्रकाश को रोकती है।
पेड़, खंभा, द वार, बाल्ट , साइ कल — हर वस्तु क छाया बनती है।
इनम से हर छाया सुबह लंबी, दोपहर छोट और शाम को फर लंबी होती है।
आपक पुस्तक के पृष्ठ 158 पर यही बात पेड़ के लए दखाई गई है — तीन चत्र, तीन अलग छायाएँ।
ऐसा क्य होता है: यह नयम आपका नह , प्रकाश का है। आपके चार ओर क हर वस्तु को वही सूय प्रका शत
करता है, इस लए सबक छाया एक साथ, एक ही तरह बदलती है।
स्वयं जाँ चए: दोपहर म एक ही समय पर खंभे क छाया और मत्र क छाया दे खए। दोन छोट ह गी। शाम को
फर दे खए। दोन लंबी ह गी।
प्र.5 क्या छाया केवल सूय के प्रकाश म ही बनती है?
नह । छाया कसी भी प्रकाश से बन सकती है, केवल सूय के प्रकाश से नह ।
टॉच से छाया बनती है — यह आप पृष्ठ 156 क ग त व ध म दे खगे।
द या, मोमबत्ती, ूबलाइट और मोबाइल क स्क्र न से भी छाया बनती है।
पू णमा क चाँदनी रात म भी हल्क -सी छाया बन जाती है।
ऐसा क्य होता है: छाया बनने के लए केवल दो चीज चा हए — एक प्रकाश, और एक वस्तु जो उस प्रकाश को
रोके। प्रकाश सूय का हो या टॉच का, इससे कोई अंतर नह पड़ता।
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करके दे खए: कमरे का दरवाजा बंद क जए, टॉच जलाइए और उसके सामने अपना हाथ र खए। द वार पर तुरंत
छाया बन जाएगी।
प्र.6 म आश्चयच कत ँ, यह प रवतन क्य होता है?
ये प रवतन इस लए होते ह क्य क सूय आकाश म चलता हुआ प्रतीत होता है।
1. प्रात:काल सूय पूव म, नीचे क ओर दखाई दे ता है।
2. दोपहर तक वह सर के ऊपर आ जाता है।
3. दोपहर के बाद वह प श्चम क ओर बढ़ता है और फर नीचे चला जाता है।
इस लए हर घंटे प्रकाश आप तक कसी नई दशा से पहुँचता है। छाया हमेशा प्रकाश से उलट ओर बनती है — इस लए सूय के घूमने
के साथ वह घूमती है, और सूय के नीचे रहने पर लंबी हो जाती है।
ऐसा क्य होता है: आपक पुस्तक पृष्ठ 157 पर इसे एक ही पं क्त म कहती है — “छाया क दशा भी सूय क ग त
के कारण प रव तत होती है।”
पता क जए — पृष्ठ 156
छाया
पता क जए
प्र.1 एक टॉच और एक छड़ी ली जए। दरवाजे और खड़ कयाँ बंद करके कमरे म अंधेरा क जए। एक हाथ म छड़ी
पक ड़ए और टॉच को जलाइए। टॉच के प्रकाश को छड़ी पर डा लए। नम्न ल खत प र तय म छड़ी क छाया
म होने वाले प रवतन का अवलोकन क जए — (क) छड़ी को आगे-पीछे करने पर। (ख) टॉच क दशा म
प रवतन करने पर।
साम ी: एक टॉच, एक सीधी छड़ी या प सल, और साद द वार वाला एक अंधेरा कमरा।
1. दरवाजे और खड़ कयाँ बंद करके कमरे म अंधेरा क जए।
2. छड़ी को खड़ा क जए, या कसी मत्र से द वार से लगभग एक मीटर दूर पकड़वाइए।
3. टॉच जलाकर उसका प्रकाश छड़ी पर डा लए। द वार पर छड़ी क काली छाया बन जाएगी।
4. (क) टॉच को र रखकर छड़ी को टॉच क ओर और फर टॉच से दूर ले जाइए। हर बार छाया दे खए।
5. (ख) छड़ी को र रखकर टॉच को हलाइए — बाएँ, दाएँ, ऊपर, नीचे। हर बार छाया दे खए।
आप क्या दे खगे:
छड़ी टॉच के पास → छाया बड़ी हो जाती है। छड़ी टॉच से दूर → छाया छोट हो जाती है।
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टॉच बाईं ओर → छाया दाईं ओर चली जाती है, और उलटा भी वैसा ही।
नमूना उत्तर: “जब मने प सल टॉच के पास क , तो उसक छाया बढ़कर आधी द वार पर फैल गई। जब मने टॉच बाईं ओर क , तो
छाया खसककर द वार क दाईं ओर चली गई।”
दीवार दीवार
टॉच छड़ ी के समीप टॉच छड़ ी से दूर
बड़ ी छाया छोटी छाया
वही छड़ी, वही द वार — केवल टॉच क जगह बदली गई है।
ऐसा क्य होता है: छाया वस्तु के पीछे का वह भाग है जहाँ प्रकाश पहुँच ही नह पाता। वस्तु को प्रकाश के पास
लाइए, वह अ धक प्रकाश रोकेगी, इस लए वह काला भाग बड़ा हो जाएगा। प्रकाश को नई ओर ले जाइए, तो काला
भाग भी उलट ओर चला जाएगा।
संकेत: यही नयम धूप म भी चलता है — बस यहाँ प्रकाश आप हलाते ह, और बाहर सूय चलता हुआ प्रतीत होता
है।
प्र.2 य द हम छड़ी (वस्तु) और प्रकाश के ोत के बीच क दूरी को प रव तत कर तो छाया कैसे प रव तत होती है?
छाया का आकार बदल जाता है।
य द वस्तु प्रकाश के ोत के समीप होती है तो छाया बड़ी होती है।
य द वस्तु प्रकाश के ोत से दूर होती है तो छाया छोट होती है।
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दीवार दीवार
टॉच छड़ ी के समीप टॉच छड़ ी से दूर
बड़ ी छाया छोटी छाया
वही छड़ी, वही द वार — केवल टॉच क जगह बदली गई है।
ऐसा क्य होता है: प्रकाश आगे बढ़ते हुए फैलता जाता है। टॉच के पास रखी वस्तु प्रकाश के सँकरे भाग म होती है
और उसका बड़ा हस्सा रोक लेती है, इस लए बड़ी छाया बनती है। वही वस्तु दूर हटाने पर बहुत कम प्रकाश रोक
पाती है, इस लए छाया छोट हो जाती है।
स्वयं जाँ चए: अपना हाथ द ये या लप के पास ले जाइए और द वार दे खए — बहुत बड़ा हाथ। पीछे ह टए, हाथ
फर छोटा हो जाएगा।
प्र.3 य द हम टॉच (प्रकाश के ोत) क दशा को बदलते ह तो छाया कैसे प रव तत हो जाती है?
छाया क दशा बदल जाती है।
टॉच बाईं ओर से जलाइए → छाया दाईं ओर बनेगी।
टॉच दाईं ओर से जलाइए → छाया बाईं ओर बनेगी।
टॉच ठ क ऊपर से डा लए → छाया छोट होकर छड़ी के ठ क नीचे आ जाएगी।
एक पं क्त का नयम — छाया हमेशा प्रकाश से उलट ओर बनती है।
ऐसा क्य होता है: प्रकाश सीधी रेखा म चलता है। छड़ी उस प्रकाश को रोक दे ती है और उसके ठ क पीछे काला
भाग रह जाता है। इस लए जैसे ही प्रकाश नई ओर से आता है, “छड़ी के पीछे ” का अथ भी नई ओर हो जाता है।
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हम सुबह और शाम क छाया को अलग-अलग दशाओं म बनते हुए दे खते ह। ऐसा क्य होता है?
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क्य gकl इन दोन समय सूय आकाश क अलग-अलग ओर होता है।
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1. सुबह सूय पूव म दखाई दे ता है। छाया उससे उलट ओर, प म क ओर बनती है।
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2. शाम तक सूय प श्चम म पहुँच जाता है। अब छाया दूसरी ओर, पूव क ओर बनती है।
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इसी लए शाम क छाया सुबह क छाया के ठ क वपरीत दशा म जाती है।
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ऐसा क्य होता है: यह वही नयम है जो आपने अभी टॉच से जाँचा। प्रकाश क दशा बद लए, छाया क दशा बदल
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जाएगी। बाहर सूय ही टॉच है, और वह दन भर पूव से प म क ओर चलता हुआ प्रतीत होता है।
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gl बनाइए — पृष्ठ 157
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सूय क त और छाया
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चत्र बनाइए
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प्र.1 नीचे दए गए चत्र म सूय क a त और उसक छाया को च त्रत क जए।
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पात:काल म ध्याह्नकाल
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सायंक ाल
पुस्तक म दए गए तीन चत्र। इनम.c a
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य और छाया नह बने ह।
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हर चत्र म दो चीज बनानी ह — सूय कहाँ है, और छाया कधर बनेगी।
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em2. मध्याह्नकाल: सूय को ठ क ऊपर, ब े के सर के ऊपर बनाइए। पैर के नीचे छोट छाया बनाइए।
1. प्रात:काल: सूय को एक ओर, नीचे क ओर बनाइए। ब े क दूसरी ओर जमीन पर लंबी छाया बनाइए।
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3. सायंकाल: सूय को सुबह से उलट ओर, नीचे क ओर बनाइए। छाया फर लंबी बनाइए, पर दूसरी ओर।
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नमूना उत्तर:
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कक्षा 4 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 10 हमारा आकाश AglaSem · NCERT Solutions
पूव पि चम
पात:काल मध्याह्नकाल सायंकाल
वही तीन चत्र, जनम सूय क त और छाया बना द गई है।
आपके चत्र म यह नयम दखना चा हए — छाया हमेशा सूय से उलट ओर बनती है।
ऐसा क्य होता है: प्रात:काल सूय पूव से उगता हुआ प्रतीत होता है और दोपहर तक सर के ऊपर आ जाता है, फर
धीरे-धीरे प म क ओर बढ़ता है। छाया क दशा भी सूय क इसी ग त के कारण बदलती है।
संकेत: पुस्तक के पृष्ठ 158 पर पेड़ के चत्र भी इसी तरह बने ह — प्रात:काल सूय बाईं ओर और छाया दाईं ओर,
मध्याह्न सूय ऊपर, सायंकाल सूय दाईं ओर और छाया बाईं ओर।
छाया के साथ खेलना — पृष्ठ 158
सूय ारा छाया- नमाण
गतवध
प्र.1 छाया से अलग-अलग आकृ तयाँ बनाना बहुत रोचक है। अपने मत्र के साथ करके दे खए।
द वार पर हाथ क छाया से आकृ तयाँ बनाइए। इस तरह क जए —
1. साद , हल्के रंग क द वार वाला कमरा चु नए। दरवाजे और खड़ कयाँ बंद कर ली जए।
2. एक टॉच या लप जलाकर उसका प्रकाश द वार पर डा लए।
3. प्रकाश और द वार के बीच खड़े होकर अपने हाथ प्रकाश म लाइए।
4. उँ ग लय को मोड़कर अलग-अलग आकृ तयाँ बनाइए और हाथ नह , द वार दे खए।
5. हाथ को प्रकाश के पास ले जाइए — छाया बड़ी हो जाएगी।
नमूना उत्तर — शुरू करने के लए सरल आकृ तयाँ:
पक्षी: दोन हाथ कलाइय पर आड़े रखकर उँ ग लय को पंख क तरह हलाइए।
कुत्ता: उँ ग लयाँ मलाकर लंबा मुँह बनाइए; अंगूठे को मुँह क तरह खो लए-बंद क जए।
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कक्षा 4 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 10 हमारा आकाश AglaSem · NCERT Solutions
हरण: एक मु के पीछे दूसरे हाथ क उँ ग लयाँ फैलाकर स ग बनाइए।
साँप: एक हाथ सीधा रखकर धीरे-धीरे लहराइए।
इस खेल से आप एक बात सीखते ह — छाया उसी का आकार लेती है जो प्रकाश रोकता है, उसका रंग नह । गोरा हाथ हो या
साँवला, दोन क छाया एक जैसी काली बनती है।
ऐसा क्य होता है: प्रकाश सीधी रेखा म चलता है। जहाँ आपका हाथ उसे रोक दे ता है, वहाँ द वार पर प्रकाश नह
पहुँचता, और उस काले भाग क रूपरेखा आपके हाथ जैसी ही होती है।
क्या आप जानते ह? छाया-कठपुतली भारत म लंबे समय से प्रच लत है। मोटे कागज से मोर या हाथी क आकृ त
काटकर, उसे तीली पर चपकाकर आप कक्षा म छाया-नाटक कर सकते ह। छाया से समय भी पता चलता है —
प्राचीन लोग ने इसके लए सूयघड़ी बनाई। राजा जय सह ने जयपुर, उ ैन, दल्ली, वाराणसी तथा मथुरा म जंतर-
मंतर बनवाया, जसक सूयघड़ी स ाट यंत्र छाया के आधार पर सट क समय बताती है।
रा त्र का आकाश — पृष्ठ 159
तार के पैटन
चत्र बनाइए
प्र.1 नीचे दए गए बॉक्स म अपने दे खे हुए एक पैटन का चत्र बनाइए —
पुस्तक म दया गया खाली बॉक्स।
पहले सचमुच रात का आकाश दे खए। उसके बाद जो दे खा, वही बनाइए।
1. सूयास्त के लगभग एक घंटे बाद कसी बड़े के साथ बाहर जाइए। तेज रोशनी से दूर खुली जगह चु नए।
2. पाँच मनट रु कए, ता क आँख अंधेरे क अभ्यस्त हो जाएँ। तब बहुत अ धक तारे दखने लगगे।
3. ऐसे चमक ले तार का समूह ढूँ ढ़ए जो मलकर कोई आकृ त बनाते लग।
4. हर चमक ले तारे को बॉक्स म एक बदु के रूप म लगाइए। बदुओं क जगह वैसी ही र खए जैसी आकाश म थी।
5. बदुओं को हल्क प सल से जो ड़ए और अपने पैटन को कोई नाम द जए।
नमूना उत्तर: सात चमक ले तार का एक प्र सद्ध पैटन। भारत म इसे सप्त ष कहा जाता है।
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तार के एक पैटन का नमूना — सात चमक ले तारे, रेखाओं से जुड़े हुए।
हम पैटन क्य दखते ह: तारे सचमुच एक-दूसरे से जुड़े नह होते। हमारी आँख पास-पास दखने वाले चमक ले
बदुओं को अपने आप जोड़ लेती ह, जैसे हम बादल म आकृ तयाँ दे ख लेते ह। इसी लए इन्ह सात तार को अलग-
अलग लोग ने अलग-अलग नाम दए ह।
संकेत: आपका पैटन सप्त ष ही हो, यह जरूरी नह , और आपके मत्र के पैटन से मलना भी जरूरी नह । आपने
स्वयं जो तार का समूह दे खा, वही सही उत्तर है। इस ग त व ध का उ े श्य यही है क आप आकाश दे ख।
प्र.2 अपनी चत्रकारी को अपने मत्र के साथ साझा क जए और तार के व भन्न सामान्य पैटन पर चचा क जए।
यह काम अगले दन कक्षा म क जए।
1. सारे चत्र एक द वार पर लगाइए या मेज पर फैलाइए।
2. जन चत्र म तार का वही समूह बना हो, उन्ह एक साथ र खए।
3. हर मत्र से पू छए क उसने अपने पैटन को क्या नाम दया।
4. कक्षा क एक सूची बनाइए — पैटन, कसने दे खा, और उसे क्या-क्या नाम दए गए।
आप पाएँगे क कुछ पैटन बार-बार आते ह, क्य क सबने एक ही आकाश दे खा है। सात चमक ले तार वाला समूह प्राय: कई ब े
बनाते ह। पर नाम अलग-अलग होते ह — कोई उसे कलछ कहता है, कोई पतंग, कोई सप्त ष।
नमूना उत्तर: “हमम से सात ब ने वही सात चमक ले तारे बनाए। आशा ने उसे ‘बड़ा चम्मच’ कहा। इकबाल ने ‘हल’ कहा। मेरी
दाद उसे सप्त ष कहती ह।”
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यह करना क्य उपयोगी है: साझा करने से पता चलता है क आपके नगर म आकाश सबके लए एक ही है, पर
उसम आकृ त दे खना आपक अपनी कल्पना है। दोन बात एक साथ सच ह।
चत्र बनाइए — पृष्ठ 160
चंद्रमा क आकृ तयाँ
चत्र बनाइए
प्र.1 आकाश म चंद्रमा को दे खए और इसक उन आकृ तय के चत्र बनाइए जो आपने अलग-अलग रात म दे खी ह।
पुस्तक म दए गए नौ खाली बॉक्स।
यह दे खने का काम है। लगभग दो सप्ताह तक चंद्रमा क एक डायरी र खए।
1. एक समय तय क जए — जैसे रात के आठ बजे — और रोज उसी समय बाहर जाइए।
2. चंद्रमा ढूँ ढ़ए। बॉक्स के कोने म तारीख लख ली जए।
3. पहले हल्के से एक वृत्त बनाइए। फर काला भाग भर द जए और चमक ला भाग सफेद छोड़ द जए।
4. हर रात के लए एक बॉक्स। बादल ह तो “बादल” लखकर अगले बॉक्स पर जाइए।
5. इसी तरह नौ बॉक्स भर ली जए।
आपके नौ बॉक्स यह दखाएँगे — आकृ त हर रात थोड़ी-सी बदलती है, और क्रम से बदलती है, कभी उछलकर नह ।
नमूना उत्तर:
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कक्षा 4 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 10 हमारा आकाश
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a gl नही ंिदखता पतला ‘C’ आधा लगभग पूरा पूरा गोल लगभग पूरा आधा पतला ‘C’
(अमावस्या) (पूिणमा)
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िफर से अमावस्या
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रात-दर-रात चंद्रमा क आक
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जस रात चंद्रमा पूण वृत्त दखता है, उसे पू णमा कहते ह।
जस रात चंद्रमा बल्कुल नह दखता, उसे अमावस्या कहते ह।
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बीच क रात म वह अक्षर ‘C’ जैसा दखता है, और कभी ऐसा लगता है जैसे बीच से कट गया हो।
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यह करना क्य उपयोगी है: प्राचीन लोग ठ क यही करते थे। वे चंद्रमा के आकार से दन क गनती रखते थे, और
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संकेत: कुछ रात म सूयास्त के तुरंत बाद दे खए और कुछ म दे र से। कई दन चंद्रमा दे र से नकलता है, इस लए
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प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। बादल वाली रात बेकार नह जाती — उसे लख ली जए और आगे ब ढ़ए।
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चचा क जए — पृष्ठ 160
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चंद्रमा क आकृ तयाँ
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क्या चंद्रमा के आकार म प रवतन का कोई पैटन है?
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हाँ, है। आकृ त एक न त क्रम म बदलती है, और फर वही क्रम दोहराया जाता है।
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1. पहले वह रात जब चंद्रमा बल्कुल नह दखता — अमावस्या।
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2. फर अक्षर ‘C’ जैसी पतली आकृ त।
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em4. फर लगभग गोल, और फर पूण वृत्त — पू णमा।
3. फर ऐसा लगता है जैसे वह बीच से कट गया हो।
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5. उसके बाद वह रात-दर-रात फर पतला होता जाता है, और अंत म दखना बंद हो जाता है।
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नही ं िदखता पतला ‘C’ आधा लगभग पूरा पूरा गोल लगभग पूरा आधा पतला ‘C’
(अमावस्या) (पूिणमा)
िफर से अमावस्या
रात-दर-रात चंद्रमा क आकृ त कस क्रम म बदलती है।
अथात पैटन यह है — पतला → आधा → पूरा → आधा → पतला → नह दखता → और फर वही क्रम।
यह क्य महत्वपूण है: क्य क यह पैटन हर बार एक ही तरह दोहराया जाता है, इस लए लोग इससे दन गन सकते
थे। घड़ी और छपे हुए कैलडर से बहुत पहले, इसी से त थपत्र का आरंभ हुआ।
पुस्तक म ध्यान द जए: हद पुस्तक पृष्ठ 160 पर लखा है — “पंद्रह रात म यह एक पूण वृत्त होता है, जसे
पू णमा कहा जाता है।” अं ेजी संस्करण म यहाँ कोई संख्या नह द गई है, केवल “कुछ रात म” लखा है। आप
अपनी गनती स्वयं करके दे खए — यही इस ग त व ध का असली मजा है।
प्र.2 क्या कभी ऐसा भी होता है जब चंद्रमा आकाश म दखाई नह दे ता?
हाँ। ऐसी रात होती ह जब चंद्रमा बल्कुल दखाई नह दे ता।
ऐसी रात को अमावस्या कहा जाता है।
यह आव धक रूप से होता है — अथात हर बार उतने ही दन के बाद फर से आती है।
द पावली उसी दन मनाई जाती है, जब आकाश म चंद्रमा नह होता। इसी लए हम इतने द ये जलाते ह।
ईद उस दन मनाई जाती है, जब अमावस्या के बाद पहली रात को चंद्रमा दखाई दे ता है।
यहाँ सावधान र हए: बादल वाली रात अमावस्या नह होती। बादल वाली रात म चंद्रमा होता तो है, पर बादल के
पीछे छपा रहता है। अमावस्या को आकाश बल्कुल साफ हो, तब भी चंद्रमा नह दखता।
पुस्तक क एक गलती: हद पुस्तक पृष्ठ 160 पर लखा है — “चंद्रमा, रा त्र के आकाश म सबसे बड़ा प्रतीत होने
वाला तारा है।” चंद्रमा तारा नह है। अं ेजी पुस्तक म यहाँ “object” अथात वस्तु लखा है, जो सही है। इसी पाठ
म तारा केवल सूय को कहा गया है।
ल खए — पृष्ठ 162
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सूय और चंद्रमा से जुड़े पव
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प्र.1 क्या आप अपने प रवार या समुदाय म सूय या चंद्रमा से संबं धत कोई पव मनाते ह? आप उन्ह अपनी भाषा म
क्या कहते ह?
पहले पता क जए, फर ल खए। यह उत्तर आपके अपने प रवार का होना चा हए।
1. माता, पता या दादा-दाद से पू छए क घर के कौन-से पव सूय या चंद्रमा पर नभर करते ह।
2. हर पव के बारे म दो बात पू छए — हम इसे अपनी भाषा म क्या कहते ह? और यह पू णमा को है, अमावस्या को है, या सूय से
जुड़ा है?
3. नाम पहले अपनी भाषा म ल खए, फर हद या अं ेजी म।
नमूना उत्तर:
पव सूय या चंद्रमा अलग-अलग जगह के नाम
मकर संक्रां त सूय पोंगल , माघ िबहू, उत्तरायण, लोहड़ ी
छठ पूजा सूय छठी मैया, सूय षष्ठी
द पावली चंदमा — आकाश में चंदमा नहीं िदवाली, दीपावली
करवा चौथ चंदमा करक चतुथ
रक्षाबंधन चंदमा — पूिणमा राखी, नािरयल पूिणमा
गुरु पू णमा, बुद्ध पू णमा चंदमा — पूिणमा पूिणमा, पूनम
ईद चंदमा — अमावस्या के बाद पहली रात ईद-उल -िफतर, चाँद रात
इतने पव आकाश से क्य जुड़े ह: छपे हुए त थपत्र से बहुत पहले लोग अपनी त थयाँ उसी से तय करते थे जो वे
दे ख सकते थे — चंद्रमा का आकार और सूय क यात्रा। उनम से बहुत-सी त थयाँ आज भी वैसे ही मानी जाती ह।
संकेत: पव का नाम अपनी ल प म भी ल खए। प गल और Pongal एक ही दन के नाम ह।
आइए वचार कर — पृष्ठ 162–163
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पाठ के अंत के प्रश्न
आइए वचार कर
प्र.1 नम्न ल खत के मध्य दो अंतर बताइए — (क) दन और रात
दन और रात के दो अंतर —
1. दन म सूय आकाश म होता है और चार ओर उजाला रहता है। रात म सूय आकाश म नह होता और अंधेरा रहता है।
2. दन म हम सूय और नीला आकाश दखता है। रात म हम चंद्रमा और तारे दखाई दे ते ह।
(आप यह भी लख सकते ह — दन म धूप से छाया बनती है, रात म धूप क छाया नह बनती।)
कारण: दन और रात के सारे अंतर एक ही बात से नकलते ह — सूय का प्रकाश है, या नह है।
प्र.2 नम्न ल खत के मध्य दो अंतर बताइए — (ख) प्रात:कालीन आकाश और सायंकालीन आकाश
प्रात:कालीन और सायंकालीन आकाश के दो अंतर —
1. प्रात:काल आकाश पूव क ओर नारंगी होता है, जहाँ से सूय उगता है। सायंकाल आकाश प श्चम क ओर नारंगी होता है, जहाँ
सूय ढलता है।
2. प्रात:कालीन आकाश उजला होता जाता है — तारे धुँधले पड़ते जाते ह। सायंकालीन आकाश काला होता जाता है — तारे
दखने लगते ह।
कारण: दोन समय आकाश नारंगी इस लए दखता है क्य क सूय नीचे रहता है। अंतर बताने वाली बात है —
आकाश क कौन-सी ओर, और प्रकाश बढ़ रहा है या घट रहा है।
प्र.3 नम्न ल खत के मध्य दो अंतर बताइए — (ग) दन और रात के समय हमारी ग त व धयाँ
हमारी ग त व धय के दो अंतर —
1. दन म हम व ालय जाते ह, काम करते ह, बाहर खेलते ह और धूप म कपड़े सुखाते ह। रात म हम घर के भीतर रहते ह, भोजन
करते ह और सो जाते ह।
2. दन म हम सूय के प्रकाश म काम करते ह, जो मुफ्त मलता है। रात म दे खने के लए हम द ये और ब त्तयाँ जलानी पड़ती ह।
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कारण: हम अ धकतर काम तभी करते ह जब दे खना और घूमना- फरना आसान हो। प्रकाश हटते ही दन का बाहरी
काम समाप्त हो जाता है।
प्र.4 नम्न ल खत के मध्य दो अंतर बताइए — (घ) दन और रात के समय जंतुओं क ग त व धयाँ
जंतुओं क ग त व धय के दो अंतर —
1. दन म अ धकतर पक्षी और जंतु जागते ह — पक्षी भोजन क खोज म उड़ते ह, गाय चरती है, तत लयाँ फूल पर आती ह। रात
म इनम से अ धकतर अपने घ सल , दड़ब और बाड़ म सो जाते ह।
2. कुछ जंतु इसके उलट करते ह। उल्लू, चमगादड़, झ गुर और मच्छर रात म नकलते ह और दन म आराम करते ह।
कारण: जंतु तभी घूमते ह जब उन्ह भोजन सुर क्षत रूप से मल सके। अ धकतर को यह दन के उजाले म मलता
है, पर कुछ अंधेरे म भी शकार कर लेते ह, इस लए उनका दन और रात उलटे हो जाते ह।
प्र.5 कुछ बात क जाँच क जए — एक शक्षक ने कहा क दन के समय सूय पूव से प श्चम क ओर चलता हुआ
प्रतीत होता है। इस कथन के बारे म मीरा क कुछ ज ासा है और वह अपने शक्षक से प्रश्न पूछना चाहती है।
कम-से-कम दो ऐसे प्रश्न ल खए, जो वह पूछ सकती है।
अ ा प्रश्न वही है जो उस बात के आगे पूछे, जो कथन म नह बताई गई। मीरा ये प्रश्न पूछ सकती है —
1. “आप ‘प्रतीत होता है’ क्य कहते ह? क्या सूय सचमुच चलता है, या हम केवल ऐसा दखता है?”
2. “क्या सूय हर दन पूव म ठ क उसी जगह से उगता हुआ दखता है?”
वह ये प्रश्न भी पूछ सकती है —
“प म म डू बने के बाद सूय कहाँ चला जाता है? सुबह तक वह फर पूव म कैसे पहुँच जाता है?”
“क्या रात म चंद्रमा और तारे भी पूव से प म क ओर चलते हुए प्रतीत होते ह?”
नमूना उत्तर: इनम से कोई भी दो प्रश्न, अपने शब्द म ल खए।
ये अच्छे प्रश्न क्य ह: हर प्रश्न शक्षक के वाक्य को लेकर अगला कदम पूछता है — सचमुच या केवल दखने म?,
हर दन या नह ?, और रात म क्या होता है? इस दखाई दे ने वाली यात्रा का कारण आपके शक्षक आगे क कक्षा म
बताएँगे।
संकेत: पूछने से पहले अपने प्रश्न लख ली जए। लखा हुआ प्रश्न जल्दबाजी म पूछे गए प्रश्न से लगभग हमेशा बेहतर
होता है।
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कक्षा 4 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 10 हमारा आकाश
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प्र.6 समझाइए — मान ली जए, आप सुबह और दोपहर के समय एक ही ान पर खड़े ह। सुबह आपक छाया एक
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दशा म होगी, जब क दोपहर को दूसरी दशा म, ऐसा क्य ? क्या आपक छाया क लंबाई दोन
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दशा क्य बदलती है: क्य क इन दोन समय सूय आकाश क अलग-अलग ओर होता है।
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2. दोपहर तक सूय प श्चम क ओर बढ़ जाता है। अब छाया दूसरी ओर, पूव क ओर बनती है।
आप तो हले ही नह । सूय हला, इस लए छाया हल गई।
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वही ब ा, वही ान — दन के दो अलग-अलग समय।
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दोपहर के आसपास सूय सर के ऊपर आ जाता है, इस लए छाया सबसे छोट होती है।
उसके बाद सूय फर नीचे जाता है और छाया फर.cसेoलंबी हो जाती है। g
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अथात दोन छायाओं क दशा अलग होगी, और प्राय: लंबाई भी अलग होगी।
ऐसा क्य होता है: छाया हमेशा प्रकाश से उलट ओर बनती है, और प्रकाश नीचे से आने पर वह खचकर लंबी हो
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जाती है। दोन बात सूय क एक ही यात्रा से नकलती ह — पूव, सर के ऊपर, प म।
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पर एक पत्थर र खए, और फर दोन पत्थर क तुलना क जए।
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कक्षा 4 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 10 हमारा आकाश AglaSem · NCERT Solutions
प्र.7 शब्द के साथ रचनात्मक ब नए — (क) आकाश क सुंदरता से प्रे रत होकर एक क वता ल खए।
चार से आठ पं क्तयाँ ल खए। क वता बनाने का एक आसान तरीका —
1. आकाश क एक चीज चु नए — सूय, चंद्रमा, तारा, बादल या इंद्रधनुष।
2. एक पं क्त म ल खए क वह कैसी दखती है। कसी जानी-पहचानी चीज से तुलना क जए — लड्डू, द या, नाव, रुई।
3. एक पं क्त म ल खए क वह क्या करती है — उगता है, छपता है, टम टमाता है, तैरता है।
4. हो सके तो दूसरी पं क्त का अं तम शब्द पहली पं क्त के अं तम शब्द से मलाइए।
5. क वता को एक शीषक द जए।
नमूना उत्तर:
मेरा आकाश
सुबह का सूरज नारंगी गोला,
धीरे-धीरे दीवार पर बोला।
दोपहर में वह िसर पर आता,
छोटी छाया पैरों में समाता।
रात को चंद ा फाँक िनराली,
तारे िगनती करते ताली।
यह क वता क्य बनी: हर पं क्त एक छोट , स ी बात कहती है जो आपने सचमुच दे खी है। तुक तो केवल याद
रखने म मदद करती है — असली बात पं क्त के भीतर का चत्र है।
संकेत: क वता उसी भाषा म ल खए जसम आप सोचते ह। आकाश पर लखी भोजपुरी, त मल या मराठ क वता
भी उतनी ही अ है।
प्र.8 शब्द के साथ रचनात्मक ब नए — (ख) पहेली पूण क जए और उसका उत्तर द जए — “रंग म एक, आकार
अनेक / उजाले म दखता, जैसे हो रहस्य कोई वशेष।” यह क्या है?
पहेली का उत्तर है — छाया।
अब दो छू ट हुई पं क्तयाँ। इनम एक और संकेत जो ड़ए और तुक बनाए र खए।
नमूना उत्तर — पूरी पहेली:
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कक्षा 4 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 10 हमारा आकाश AglaSem · NCERT Solutions
रंग में एक, आकार अने क
उजाले में िदखता, जै से हो रहस्य कोई िवशेष।
साथ -साथ चलती, पर बोले न कभी,
दीवार पर, धरती पर िदखती सभी।
यह क्या है? → छाया
ये दो पं क्तयाँ भी उतनी ही सही ह —
सुबह लंबी, दोपहर छोटी,
अंधेरा होते ही हो जाए लापता।
हर संकेत छाया पर कैसे ठ क बैठता है:
रंग म एक — वस्तु का रंग कुछ भी हो, छाया हमेशा काली ही होती है।
आकार अनेक — सुबह लंबी, दोपहर छोट , शाम को फर लंबी।
उजाले म दखता — प्रकाश नह , तो छाया नह ।
उत्तर छाया ही क्य है: इस पाठ म और कोई चीज ऐसी नह है जो हमेशा एक ही रंग क हो, जसका आकार
बदलता रहे, और जो केवल प्रकाश होने पर ही दखे। सूय, चंद्रमा और तारे तो चमक ले ह, काले नह ।
अध्याय — एक नज़र म
दन के अलग-अलग समय पर आकाश भन्न- भन्न दखाई दे ता है। सुबह, दोपहर और रात म आकाश का रंग बदलता
हुआ दखाई दे ता है। सूय का रंग भी बदलता हुआ दखाई दे ता है। प क्षय , जंतुओं, पेड़ और मनुष्य क ग त व धयाँ भी
बदलती रहती ह।
सूय आकाश क सबसे चमक ली वस्तु है। यह इतना चमक ला है क जब यह आकाश म होता है, तब हम अन्य तारे दखाई
नह दे ते। सूय हम प्रकाश और ऊष्मा दे ता है। यह सुबह उगता हुआ, फर सर के ऊपर आता हुआ और फर दूसरी ओर ढलता
हुआ प्रतीत होता है।
छाया दन भर बदलती रहती है। सुबह क छाया लंबी होती है, दोपहर क छाया छोट होती है और शाम क छाया फर से
लंबी हो जाती है। सायंकाल क छाया सुबह क छाया के वपरीत दशा म बनती है।
छाया प्रकाश का पीछा करती है। य द वस्तु प्रकाश के ोत के समीप होती है तो छाया बड़ी होती है। य द प्रकाश के ोत क
दशा बदलती है तो छाया क दशा भी बदलती है। सूय पूव से उगकर दोपहर तक सर के ऊपर आता है और फर प म क
ओर बढ़ता है, इस लए छाया क दशा दन भर घूमती रहती है।
छाया से समय का पता चलता है। प्राचीन लोग ने समय बताने के लए सूयघड़ी बनाई। राजा जय सह ने जयपुर, उ ैन,
दल्ली, वाराणसी तथा मथुरा म जंतर-मंतर बनवाया। इसक सूयघड़ी को स ाट यंत्र कहा जाता है।
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कक्षा 4 हमारे चार ओर क दु नया अध्याय 10 हमारा आकाश AglaSem · NCERT Solutions
रा त्र का आकाश हजार टम टमाते तार से चमकता है और हम उनम अलग-अलग पैटन दे खते ह। चंद्रमा रा त्र के आकाश
म सबसे बड़ा प्रतीत होता है और उसका आकार प्रत्येक रा त्र म भन्न दखता है।
पू णमा और अमावस्या। जस रात चंद्रमा पूण वृत्त दखता है, उसे पू णमा कहते ह। जस रात चंद्रमा बल्कुल नह दखता,
उसे अमावस्या कहते ह। प्राचीन लोग चंद्रमा के आकार से दन गनते थे और इससे त थपत्र (कैलडर) का आरंभ हुआ।
द पावली अमावस्या को, रक्षाबंधन, गुरु पू णमा और बुद्ध पू णमा पू णमा को, तथा ईद अमावस्या के बाद पहली रात चंद्रमा
दखने पर मनाई जाती है।
भारत चंद्रमा तक पहुँचा है। 23 अगस्त 2023 को भारत का वक्रम लडर चंद्रमा पर सफलतापूवक उतरा और चंद्रमा क
सतह के आँकड़े एकत्र कए।
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ म कहाँ आया है पृष्ठ
सूय आकाश की सबसे चमकीली वस्तु; यह हमें पकाश और सूय के रहते हुए अन्य तारे दखाई नह दे ते 153
ऊष्मा दे ता है
सूय दय वह समय जब सुबह सूय उगता हुआ िदखाई दे ता है आकाश नारंगी हो जाता है और पक्षी घ सल से नकल 154
पड़ते ह
सूयास्त वह समय जब शाम को सूय डू बता है पक्षी लौटते ह, द ये जलते ह और तारे दखने लगते ह 154
छाया वह काली आकृ ित जो िकसी वस्तु के पकाश रोकने पर आपक छाया आपके साथ दौड़ती है और मुद्रा बदलने पर 155
बनती है बदल जाती है
प्रात:काल क लंबी छाया, जो सूय के नीचे रहने पर बनती है छाया के तीन चत्र म से पहला 155
छाया
मध्याह्न क छाया छोटी छाया, जो सूय के िसर के ऊपर आने पर बनती है छाया के तीन चत्र म से दूसरा 155
पूव और प म वह िदशा जहाँ से सूय उगता है, और जहाँ वह ढलता है सूय पूव से सर के ऊपर और फर प म क ओर बढ़ता 157
प्रतीत होता है
सूयघड़ी छाया से समय बताने वाला उपकरण जंतर-मंतर का स ाट यंत्र, जसे राजा जय सह ने बनवाया 158
तार का पैटन राि के आकाश में चमकीले तारों को जोड़ने पर बनने आप अपना दे खा हुआ पैटन बनाकर मत्र से तुलना करते 159
वाली आकृ ित ह
पू णमा वह रात जब चंद मा पूण वृत्त िदखाई दे ता है रक्षाबंधन, गुरु पू णमा और बुद्ध पू णमा पू णमा के पव ह 160
अमावस्या वह रात जब चंद मा िबल्कु ल िदखाई नही ं दे ता द पावली उस दन मनाई जाती है, जब आकाश म चंद्रमा 161
नह होता
चंद्रयान भारत का चंद मा िमशन वक्रम लडर 23 अगस्त 2023 को उतरा और आँकड़े 162
एकत्र कए
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