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CBSE Class 12 Sample Paper 2021 for Hindi Elective

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CBSE Class 12 Sample Paper 2021 for Hindi Elective – Text

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Page 1

प्रतिदर्श प्रश्न पत्र 2020- 21 तिषय- त िं दी (ऐच्छिक)तिषय कोड- 002 कक्षा- बार िी िं
तिर्ाशररि समय- 3 घिं टे अतर्किम अिं क – 80
सामान्य तिदे र्: तिम्नतिच्छिि तिदे र्ोिं का पािि कीतिए:
इस प्रश्न-पत्र में दो ििं ड ैं - ििं ड 'अ' और 'ब'| ििं ड 'अ' में िस्तुपरक िथा ििं ड 'ब' में िर्शिात्मक प्रश्न पू छे गए ैं |
ििं ड 'अ' में कुि 6 प्रश्न पू छे गए ैं , तििमें कुछ प्रश्नोिं के िैकच्छिक प्रश्न भी सच्छितिि ैं | तदए गए तिदे र्ोिं का पािि
करिे हुए प्रश्नोिं के ी उत्तर दीतिए|
ििं ड 'ब' में कुि 8 प्रश्न पूछे गए ैं , तििमें कुछ प्रश्नोिं के िैकच्छिक प्रश्न भी सच्छितिि ैं | तदए गए तिदे र्ोिं का पािि करिे
हुए प्रश्नोिं के ी उत्तर दीतिए|
ििंड – अ िस्तु परक-प्रश्न
प्रश्न सिंख्या अपतिि गद्ािंर् (10)

प्रश्न तिम्नतिच्छिि में से तकसी एक गद्ािंर् को ध्यािपू िशक पतिए:-
1. इं सान अपनी स्मृति की आधारतिला पर तिका होिा है | उसकी स्मृतियााँ उसकी अस्मस्मिा है और ये
स्मृतियााँ ही उसके वितमान को अिीि से जोड़िी हैं | हम िायद कलम कहााँ रखी है यह भू ल जाएाँ ,
पर यह नहीं भूलिे तक उदू त क्लास के मौलवी साहब पान कैसे चबािे थे | ले तकन स्मृतियााँ कई बार
हमारे तदमाग़ पर बोझ भी बन जािी हैं , तिर उन्हें तदमाग़ के कवाड़ से ढू ाँ ढना कतिन होिा है | ले तकन
कोई छोिी बाि, कोई गंध, कोई स्पित झि से आपको पुरानी स्मृति से जोड़ दे िे हैं |
संस्मरण वितमान में अिीि के बारे में तलखे जािे हैं | अिीि और वितमान के बीच वाचक के साथ
काफ़ी कुछ घतिि हो चुका होिा है | संवेदना, भाषा, पररप्रेक्ष्य, अतभव्यस्मि, जीवन की प्राथतमकिा,
संबंध, दृति आतद ऐसे बदल चु के होिे हैं तक अिीि तबल्कुल उल्टा भी तदख सकिा है | इमली िोड़ने
के तलए आप बचपन में पेड़ पर चढ़े , तगरे , हाथ िुड़वा बैिे| िकलीफ़ हुई ऊपर से तपिा ने पीिा, मााँ
ने कोसा| आज उसी घिना को याद कर हाँ सी आ सकिी है | इमली की डाल कमज़ोर होिी है , यह
बच्चे को कहााँ पिा? बेवकूफ़ी और उत्साह के मारे हाथ िुड़वा बैिे| पर िब वह हरक़ि बेवकूफ़ी
कहााँ लगी थी|
आजकल तहं दी सातहत्य में संस्मरणों की बहार है | संस्मरण की बहार यहीं नहीं है | अमरीका में लेखन-
तवधा के गुरु हैं तवतलयम तजं सर| वे ले खन का मै नुअल तलखिे हैं - जीवनी कैसे तलखें , आत्मकथा कैसे
तलखें आतद आतद| उन्होंने संस्मरणों के धुाँआधार प्रकािन पर तिप्पणी की, "यह संस्मरण का युग है |
बीसवीं सदी के अं ि के पहले कभी भी अमरीकी धरिी पर व्यस्मिगि आख्यान की ऐसी जबदत स्त
िसल कभी नहीं हुई थी| हर तकसी के पास कहने के तलए एक कथा है और हर कोई कथा कह रहा
है | संस्मरणों की बाढ़ से अमरीकी इिने दु खी हुए तक संस्मरणों की पैरोडी िक तलखी जाने लगी|
िु क्र मनाइये तक तहं दी में मामला यहााँ िक नहीं पहुाँ चा है |"
संस्मरण क्ों तलखे जािे हैं ? क्ा संस्मरण नहीं तलखे िो लेखक के पेि में मरोड़ होगा? या उबकाई
आ जाएगी? वह कौन-सी दु तनत वार इच्छा है जो संस्मरण तलखवािी है ? तहं दी में संस्मरण यदाकदा
तलखे जािे थे | आलोचना भी उसे एक अमहत्त्वपूणत तवधा मानकर चलिी थी, तलहाज़ा संस्मरणों की
अनदे खी होिी थी| जहााँ िक मे रा अनु मान है तक तवश्वनाथ तिपािी द्वारा नामवर तसंह पर तलखे
संस्मरण 'हक जो अदा न हुआ' ने ऐसा धूम मचाया तक एकदम से इस तवधा की क्षमिा का
पुनप्रतकिीकरण हुआ और संस्मरण की ओर कई रचनाकार मु ड़े| कािीनाथ तसंह का इस िरफ़
सबसे पहले मु ड़ना संगि ही माना जाना चातहए|
तिम्नतिच्छिि में से तिदे र्ािु सार सबसे उतिि तिकिोिं का ियि कीतिए:-

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(i) “हम िायद कलम कहााँ रखी है यह भू ल जाएाँ , पर यह नहीं भू लिे तक उदू त क्लास के मौलवी साहब 1
पान कैसे चबािे थे |” प्रस्तु ि पंस्मि का क्ा भाव है ?-
I. बचपन की यादों को भू लना मुस्मिल ही नहीं असंभव होिा है।|
II. पान चबाना दृश्य आधाररि स्मृति है इसतलये भू लना कतिन होिा है ।
III. तिक्षकों के हाव भाव स्मृति पिल पर स्थायी प्रभाव छोड़ दे िे हैं |
IV. आयु के साथ हमारी लघु कालीन स्मृति कम हो जािी है और हम चीज़ें खोना िु रू कर दे िे
हैं |
(ii) तकसी चीज़ की पैरोडी कब तलखी जािी है ….? 1
I. जब हम तकसी तविे ष कायत िैली से सहमि नहीं होिे हैं |
II. जब हम तकसी संदभत कायत का केवल उपहास करना चाहिे हैं |
III. तकसी कायत िै ली की कतमयों को बढ़ा चढ़ा कर उजागर करना चाहिे हैं |
IV. तकसी कायत के मू ल ले खक से ईर्ष्ात वि उसके उतचि कायत को नीचा तदखाना चाहिे हैं |
(iii) तहं दी सातहत्य में संस्मरणों की स्मस्थति कैसी है ? 1
I. संस्मरण की अनदे खी बंद हो गई है |
II. संस्मरण प्रचुर मािा में तलखे जा रहे हैं |
III. आलोचक संस्मरण को महत्त्व नहीं दे िे हैं |
IV. तहं दी के पािक संस्मरण से व्यतथि नहीं हैं |
(iv) संस्मरण क्ों तलखने चातहए? 1
I. िातक अपने तलये तलख कर अपनी जीवन साथत किा तसद्ध की जा सके व दू सरों के तलये
प्रेरणा दी जा सके।
II. िातक चुनौिी पूणत जीवन सबक सीखने के बारे में तलख जीवन की भाग दौड़ से थके लोगों
का मनोरं जन तकया जा सके।
III. िातक पेचीदा सवालों या सामातजक मु द्ों पर नए और साथत क दृतिकोणों द्वारा तिक्षण
प्रदान तकया जा सके।
IV. िातक तिक्षकों व संपादकों के अनु सार न तलख कर अपने ढं ग से मौतलक व नई बाि की
जा सके।
(v) बचपन में हाथ िुड़वाना बेवकूफ़ी क्ों नहीं लगिी है ? 1
I. बच्चे यह चाहिे हैं तक वह भी जो वस्तु लेना चाहिे है उसे ले सके|
II. बच्चों को यह नहीं बिाया जाना अच्छा नहीं लगिा तक क्ा कब िथा कैसे करना है ।
III. बच्चे इस का अंदाजा नहीं कर पािे की तक उनके तकस कायत से क्ा हो सकिा है |
IV. बच्चों में अत्यतधक ऊजात होिी है िथा जब वे उत्ते जना में कमी पािे हैं िो ऊब जािे हैं
तजसकी पररणीति िरारि के रूप में होिी है ।
(vi) 'धूम मचाने '- का क्ा िात्पयत हो सकिा है ? 1
I. संस्मरण तवधा का िड़क भड़क व तवलातसिा पूणत प्रकार से सातहत्य जगि में प्रवेि।
II. संस्मरण की तवधा को प्रतसस्मद्ध तमलना व जगह-जगह इसकी चचात होना।
III. संस्मरण तवधा का धूम धड़ाके से कायाकल्प होना।
IV. संस्मरण तवधा का बातक सारी तवधाओं पर वचतस्व स्थातपि होना।
(vii) प्रस्तु ि गद्ां ि का िीषत क हो सकिा है ? 1
I. संस्मरण तवधा का वितमान तहंदी सातहत्य में स्थान|
II. संस्मरण तवधा का तहं दी सातहत्य पर प्रभाव|
III. तहं दी व पाश्चात्य सातहत्य में संस्मरणों की िुलना|
IV. तहं दी सातहत्य में संस्मरण तवधा की तनरथत किा|
(viii) जो कल सीधा तदखाई दे िा था वही आज उल्टा क्ों तदख सकिा है ? 1

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I. आयु बढ़ने के साथ-साथ वाचक की नज़र प्रभातवि हो जािी है ।
II. अिीि और वितमान के बीच दे खने वाले की दृति और पररप्रेक्ष्य बदल जािा है ।
III. बच्चों में भावनाओं पर तनयंिण रख कायत के संभव पररणाम को समझने की क्षमिा कम
होिी है ।
IV. संवेदना, भाषा, पररप्रेक्ष्य और अतभव्यस्मि संस्मरण के ले खन को प्रभातवि करिे हैं ।
(ix) संस्मरण ले खन का उद्े श्य हुआ करिा है ....? 1
I. जीवन की घिनाओं का उनकी िमाम बारीतकओं के साथ ब्यौरा दे सातहत्य जगि में इस
तवधा का डं का बजवाना।
II. मानव लालन पालन, तिक्षा अथवा जीवन के बारे में तलख यह संदेि तदया जाना तक हम
कुछ तवश्वासों को कैसे धारण करिे हैं ।
III. जीवन घिनाओं की वह जानकाररयााँ दे ना जो जीवन के महत्वपूणत मु द्ों को गहराई से
समझने में मदद कर सकिी हैं ।
IV. सोिल ने िवतकिंग द्वारा आम लोगों को अपने जीवन पर तवचार प्रकि करने के अवसर तदया
जाना।
(x) मनु र्ष् की यादें उसके तलए क्ों आवश्यक हैं ? 1
I. यादें हमें बिािी हैं क्ा गलि और क्ा सही है |
II. तबना यादों के मानव सभ्यिा का तवकास संभव नहीं है |
III. यतद हम चीज़ों को भली भां ति याद रखिे हैं िो परीक्षा में असिल होने का डर नहीं रहिा|
IV. यादें होने से हम जीवन के वो महत्वपूणत सबक सीखिे हैं तजनका हम भतवर्ष् में उपयोग
जीवन सुधार सकिे हैं |
अथिा
गद्ािंर् को ध्यािपूिशक पतिए:-
मु झे एक अफ़सोस है , वह अफ़सोस यह है तक मैं उन्हें पूरे अथों में िहीद क्ों नहीं कह पािा हाँ ,
मरिे सभी हैं , यहााँ बचना तकसको है ! आगे -पीछे सबको जाना है , पर मौि िहीद की ही साथत क है ,
क्ोंतक वह जीवन की तवजय को घोतषि करिी है | आज यही ग्लातन मन में घुि-घुिकर रह जािी है
तक प्रेमचंद िहादि से क्ों वंतचि रह गए? मैं मानिा हाँ तक प्रेमचंद िहीद होने योय थ थे , उन्हें िहीद
ही बनना था|
और यतद नहीं बन पाए हैं वे िहीद िो मे रा मन िो इसका दोष तहं दी संसार को भी दे िा है |
मरने से एक-सवा महीने पहले की बाि है , प्रेमचंद खाि पर पड़े थे | रोग बढ़ गया था, उि-चल न
सकिे थे | दे ह पीली, पेि िूला, पर चेहरे पर िां ति थी|
मैं िब उनकी खाि के पास बराबर काफ़ी-काफ़ी दे र िक बैिा रहा हाँ | उनके मन के भीिर कोई
खीझ, कोई कड़वाहि, कोई मै ल उस समय करकरािा मैंने नहीं दे खा, दे खिे िो उस समय वह
अपने समस्त अिीि जीवन पर भी होंगे और आगे अज्ञाि में कुछ िो कल्पना बढ़ाकर दे खिे ही रहे
होंगे ले तकन दोनों को दे खिे हुए वह संपूणत िां ि भाव से खाि पर चुपचाप पड़े थे | िारीररक व्यथा
थी, पर मन तनतवतकार था|
ऐसी अवस्था में भी उन्होंने कहा- जै नेन्द्र! लोग ऐसे समय याद तकया करिे हैं ईश्वर| मु झे भी याद
तदलाई जािी है | पर अभी िक मु झे ईश्वर को कि दे ने की जरुरि नहीं मालू म हुई है |
िब्द हौले-हौले तथरिा से कहे गए थे और मैं अत्यंि िां ि नास्मस्तक संि की िस्मि पर तवस्मस्मि था|
मौि से पहली राि को मैं उनकी खतिया के बराबर बैिा था| सबेरे साि बजे उन्हें इस दु तनया से
आाँ ख मीच ले नी थीं| उसी सबेरे िीन बजे मु झसे बािें होिी थीं| चारों िरि सन्नािा था| कमरा छोिा
और अंधेरा था| सब सोए पड़े थे | िब्द उनके मुाँ ह से िुसिुसाहि में तनकलकर खो जािे थे | उन्हें
कान से अतधक मन से सुनना पड़ा था|

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राि के बारह बजे 'हं स' की बाि हो चुकी थी| अपनी आिाएाँ , अपनी अतभलाषाएाँ , कुछ िब्दों से और
अतधक आाँ खों से वह मु झपर प्रकि कर चुके थे | 'हं स' की और ‘सातहत्य’ की तचंिा उन्हें िब भी दबाए
थी| तचंिा का केंद्र यही था तक 'हं स' कैसे चले गा? नहीं चले गा िो क्ा होगा? 'हं स' के तलए जीने की
चाह िब भी उनके मन में थी और 'हं स' न तजएगा, यह कल्पना उन्हें असहाय थी| तहं दी-संसार का
अनु भव उन्हें आश्वस्त न करिा| 'हं स' के तलए न जाने उस समय वे तकिना झुककर तगरने को िैयार
थे | अपने बच्चों का भतवर्ष् भी उनकी चेिना पर दबाव डाले हुए था| मु झसे उन्हें कुछ ढााँ ढस था|
मु झे यह योय थ जान पड़ा तक कहाँ - 'वह' मरे गा नहीं! वह आपका अख़बार है , िब वह तबना झुके ही
तजएगा| ले तकन मैं कुछ भी न कह सका और कोई आश्वासन उस सातहत्य-सम्राि को आश्वस्त न कर
सका|
तिम्नतिच्छिि में से तिदे र्ािु सार सबसे उतिि तिकिोिं का ियि कीतिए:-
(i) प्रेमचंद को ले खक से क्ा आिा थी? 1
I. ले खक तहं दी सातहत्य में उनके द्वारा रतचि सातहत्य को उतचि स्थान तदलवायेंगे|
II. ले खक उनके बच्चों का उतचि मागतदित न कर उन्हें जीवन कौिल हातसल करने में सहायिा
करें गे|
III. ले खक उनके पश्चाि हं स को गुणवत्ता में तबना कोई समझौिा तकये चलाएगें|
IV. ले खक तहं दी संसार में ऐसे बदलाव लाएाँ गें तजसमे प्रगतििील व भतवर्ष्ोन्मु खी सातहत्य भी
अपना उतचि स्थान प्राप्त कर सकेगा|
(ii) प्रेमचंद की तचंिा का तवषय क्ा था? 1
I. समाज में प्रचतलि जाति प्रथा व ऐसी ही अन्य कुरीतियााँ , मानवातधकारों का हनन आतद मु द्े|
II. सामतजक न्याय, अन्याय के तवरुद्ध संघषत , रूतढ़यों के स्मखलाि तजहाद जै से मू योंों रखने
वाले लोगों का अभाव|
III. तहं दी संसार द्वारा प्रगतििील, क्रस्मिकारी व समाजवादी सातहत्य की अवहे लना|
IV. दे ि को पराधीनिा की बेतड़यों से मु ि कराने का सपना िू ि जाने की तचंिा|
(iii) प्रेमचंद जी के व्यस्मित्व के तवषय मैं कौन सा तनष्कषत तनतश्चि रूप से तनकाला जा सकिा है ?- 1
I. वह ईश्वरीय सत्ता में तवश्वास नहीं रखने वाले थे |
II. वह अपने बच्चों से अत्यतधक प्रेम करिे थे |
III. वह कलम के तलये िहीद होने की भावना रखिे थे |
IV. उनमें दे ि भस्मि कूि कूि कर भरी थी|
(iv) गद्ां ि के अनु सार प्रेमचंद अधूरे िहीद थे | ऐसा क्ों कहा गया है ? 1
I. पूणत िहीद होने के तलये अपने तवचारों के चलिे अन्य लोगों के हाथों मरना होिा है |
II. िहीद कभी समझौिा नहीं करिे पर वे झुकने को िैयार थे |
III. क्ोंतक वह साम्यवादी थे जो िहीद हो जाने के तवरुद्ध तवचार का पक्षधर है |
IV. िहादि तवजय घोष का प्रिीक है तजसका अनु भव वे नहीं कर पाये थे |
(v) प्रेमचंद तहं दी सातहत्य संसार के िहीद नहीं बन पाए| लेखक का मन तहं दी संसार को इसका दोष 1
क्ों दे िा है ?
I. तहं दी संसार द्वारा उनकी मृ त्यु पश्चाि् उनके तवचारों को सराहा गया व महत्ता दी गई|
II. तहं दी संसार से उन्हें ऐसा अनुभव हुआ था तक वे तकसी भी हद िक झुकने को भी िैयार थे |
III. तहं दी संसार अंग्रेज़ों के भय वि तहं दी क्रस्मिकारी सातहत्य को मान्यिा नहीं दे िा था|
IV. प्रेमचंद प्रचतलि परम्पराओं की वकालि करने से इनकार कर प्रगतििील सातहत्य का
सृजन करिे रहे इसतलए तहं दी जगि ने उन्हें नहीं स्वीकारा था।
(vi) "िारीररक व्यथा थी, पर मन तनतवतकार था|"- पंस्मि के सबसे उतिि भाव का चयन कीतजए:- 1
I. िन बीमार और मन तनरं कार था|
II. िन व्यातधग्रस्त था पर मन तकंकितव्यतवमू ढ़ था|

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III. िन बीमार पर मन तनतवतचार था|
IV. िन बीमार पर मन तनश्छल था|
(vii) हं स नहीं जी पायेगा मैं ‘हं स’ क्ा हो सकिा है ?- 1
I. सरस्विी दे वी का वाहन|
II. प्रेमचंद की उपातध जै से रामकृष्ण जी की ‘परमहं स’ थी|
III. पि सातहत्य का नाम|
IV. ज्ञान व तवद्ा का प्रिीक|
(viii) तथरिा िब्द का अथत है 1
I. तथरकिे हुए|
II. थरथरािे हुए|
III. स्मस्थरिा से|
IV. रुक रुक कर|
(ix) प्रस्तु ि गद्ां ि का उतचि िीषतक हो सकिा है ? 1
I. जग चेिना के प्रिीक प्रेमचंद|
II. तहं दी संसार का अधूरा िहीद|
III. एक रतचयिा की िहादि|
IV. प्रेमचंद से जै नेन्द्र िक|
(x) "उन्हें कान से अतधक मन से सुनना पड़ा था|"- प्रस्तु ि पंस्मि से ले खक का क्ा अतभप्राय है ? 1
I. चूाँतक वह स्पि नहीं बोल रहे थे इसतलये अंदाज़े से काम चलाना पड़ा था|
II. वह िुसिुसा रहे थे और कदातचि मनगढ़ं ि बािें कर रहे थे |
III. वह िब्दों से कम परिु भावों से अतधक बाि कर रहे थे |
IV. अंतिम समय तनकि जान वह मन की बािें कर रहे थे |
प्रश्न तिम्नतिच्छिि में से तकसी एक पद्ािंर् को ध्यािपू िशक पतिए:- 8
एक बार मु झे आाँ कड़ों की उस्मल्टयााँ होने लगीं
तगनिे तगनिे जब संख्या
करोड़ों को पार करने लगी
मैं बेहोि हो गया
होि आया िो मैं अस्पिाल में था
खू न चढ़ाया जा रहा था
ऑस्मिजन दी जा रही थी
तक मैं तचल्लाया
डाक्टर मु झे बुरी िरह हाँ सी आ रही
यह हाँ साने वाली गैस है िायद
प्राण बचाने वाली नहीं
िुम मु झे हाँ सने पर मजबूर नहीं कर सकिे
इस दे ि में हर एक को अफ़सोस के साथ जीने का
पैदाइिी हक़ है वरना
कोई माने नहीं रखिे हमारी आज़ादी और प्रजािंि
बोतलए नहीं- नसत ने कहा- बेहद कमज़ोर हैं आप
बड़ी मु स्मिल से क़ाबू में आया है रिचाप
डाक्टर ने समझाया- आाँ कड़ों का वायरस
बुरी िरह िैल रहा आजकल
सीधे तदमाग़ पर असर करिा
भाय थवान हैं आप तक बच गए

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कुछ भी हो सकिा था आपको –
सतन्नपाि तक आप बोलिे ही चले जािे
या पक्षाघाि तक हमेिा के तलए बन्द हो जािा
आपका बोलना
मस्मस्तष्क की कोई भी नस िि सकिी थी
इिनी बड़ी संख्या के दबाव से
हम सब एक नाज़ु क दौर से गुज़र रहे
िादाद के मामले में उत्ते जना घािक हो सकिी है
आाँ कड़ों पर कई दवा काम नहीं करिी
िां ति से काम लें
अगर बच गए आप िो करोड़ों में एक होंगे.....
अचानक मु झे लगा
ख़िरों से सावधान करािे की संकेि-तचह्न में
बदल गई थी डाक्टर की सूरि
और मैं आाँ कड़ों का कािा
चीख़िा चला जा रहा था
तक हम आाँ कड़े नहीं आदमी हैं|
तिम्नतिच्छिि में से तिदे र्ािु सार सबसे उतिि तिकिोिं का ियि कीतिए:-
(i) डॉक्टर के अनु सार आाँ कड़े क्ा कर सकिे हैं ? 1
I. बहुि अतधक तचंिाग्रस्त कर सकिे हैं |
II. बहुि अतधक उत्ते तजि कर सकिे हैं |
III. आं कड़ों की िादादनुसार इं सान का मूयों घि-बढ़ सकिा है |
IV. तचत्त भ्ां ि कर अंड- बं ड बकने पर मजबूर कर सकिे हैं|
(ii) कतविा का सटीक केंद्रीय भाव तकसे कहा जा सकिा है ? 1
I. इं सान का अस्मस्तत्व उसकी सोच व भावनाएं अब एक आं कड़ा माि रह गयी हैं |
II. आं कड़े मानविा की बारीतकओं व अन्य सामातजक पहलुओं का समावेि नहीं हैं |
III. अफ़सोस के साथ जीने का अतधकार जन्मतसद्ध है |
IV. इं सान के गुण,प्रतिभा व तविे षिाएाँ आज की स्मस्थति में गौण हो गये हैं |
(iii) अफ़सोस के साथ जीने का पैदाइिी हक़ संतवधान में तदये तकस अतधकार के अंिगति आयेगा? 1
I. अतभव्यस्मि की स्विंििा|
II. िोषण के तवरुद्ध|
III. संवैधातनक उपचार|
IV. संस्कृति व तिक्षा|
(iv) 'आाँ कड़ों की उस्मल्टयााँ '- से कतव का क्ा िात्पयत है ? 1
I. आं कड़े इिने अतधक थे तक तदमाग उन्हें स्वीकार नहीं कर रहा था|
II. आं कड़े इिने सिीक थे की लेखक का तदमाग भ्तमि हो गया था|
III. आं कड़ों में तनतहि तनष्कषत अत्यंि खे द-जनक व उपायहीन थे |
IV. आं कड़े इिनी िेज़ी से बढ़ रहे थे तक सतन्नपाि का रोग हो सकिा था|
(v) "िादाद के मामले में उत्तेजना घािक हो सकिी है "- पंस्मि का स ी भावाथत हो सकिा है ? 1
I. िादाद घािीय प्रकार से वृस्मद्ध कर उत्ते तजि कर सकिी है |
II. िादाद द्वारा जतनि उत्तेजना प्राणनािक हो सकिी है |
III. समझदार लोग िादाद की घाि से प्रभातवि नहीं होिे हैं |
IV. उत्ते जना की िादाद मनुर्ष् के पिन का एक मु ख्य कारण हो सकिा है |

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(vi) 'आाँ कड़ों का वायरस बुरी िरह िैल रहा आजकल'- पंस्मि में आाँ कड़ों के तकस प्रभाव की बाि कही 1
गई है ?
I. बड़ी मािा में िथ्य असतलयि को ढााँ प ले िे हैं |
II. बड़ी मािा में िथ्य लोगों का तदमाग़ ख़राब कर दे िे हैं |
III. बड़ी मािा में िथ्य भी एक प्रकार का वायरस ही है |
IV. बड़ी मािा में िथ्य उत्ते तजि कर दे िे हैं |
(vii) ‘हमारी आज़ादी और प्रजािंि मायने िभी रखिे हैं जब-…………………’? 1
I. पैदाइशी हक़ ददए जाएँ|
II. हँ सने पर मजबूर न दिया जाए|
III. अफ़सोस िे साथ जीने ददया जाए|
IV. अपनी मर्ज़ी से जीवन जीने ददया जाए|
(viii) 'नाजु क दौर'- से कतव कहना चाहिा है तक.................? 1
I. सत्य बहुत िदिन है |
II. साँच िो आँच नह ीं|
III. आँिड़े बहुत ज़्यादा हैं , सत्य िम|
IV. सवेक्षणों ने मानससि परे शासनयाँ पैदा िर द हैं |
अथिा
तकिने तदनों बाद आज तिर जब
िुमसे सामना हुआ
उस भीड़ में अकस्माि,
जहााँ इसकी कोई आिं का न थी,
िो मैं कैसा अचकचा गया
राँ गे हाथ पकड़े गये चोर की भााँ ति|
िुरंि अपनी घोर अकृिज्ञिा का
भान हुआ
लज्जा से मस्तक झुक गया अपने आप|
याद पड़ा िुमने ही तदया था
वह बोध,
जो प्यार के उलझे हुए धागों को
धीरज और ममिा से साँवारिा है ,
दी थी वह करुणा
तजसके सहारे
आत्मीयों के असहाय आघाि सहे जािे हैं ,
सह्य हो जािे हैं -
और वह अकुस्मिि तवश्वास
तक जीवन में केवल प्रवंचना ही नहीं है
अंिर की अतकंचनिाएाँ प्रतितिि
सहयोतगयों की कुतिलिा ही नहीं है ,
तकसी क्षतणक तसस्मद्ध दम्भ में
तिखर की छािी कुचलने को उद्ि
बौनों का अहं कार ही नहीं है -

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जीवन में और भी कुछ है |
िुम्हारी ही दी हुई थी
वह अनन्य अनु भूति
तक वषात की पहली बौछार से
तसर-चढ़ी धूल के दबिे ही
खु ली तनखरने वाली
आकाि की िां तिदातयनी अगाध नीतलमा,
वषों बाद अचानक
अकारण ही तमला
तकसी की अम्लान तमििा का संदेि,
दू र रहकर भी साथ-साथ एक ही तदिा में
चलिे हुए सहकतमत यों का आश्वासन-
ये सब भी िो जीवन में है ,
िुम ने कहा था|
यह सब,
न जाने और क्ा-क्ा
मु झे याद आया
और एक अपूवत िां ति से
पररपूणत हो गया मैं
जब आज
अचानक ही भीड़ में
इिने तदनों बाद
िुम से यों सामना हो गया
ओ मे रे एकां ि!
तिम्नतिच्छिि में से तिदे र्ािु सार सबसे उतिि तिकिोिं का ियि कीतिए:-
(i) "जहााँ इसकी कोई आिं का न थी"- पंस्मि में कतव ने 'आिं का' िब्द के स्थान पर 'आिा' िब्द का 1
प्रयोग नहीं तकया है | ऐसा क्ों? -
I. कतव का तजससे सामना हुआ कतव उससे तमलने में डर रहा था|
II. कतव का तजससे सामना हुआ कतव उससे तमलने के तलए उद्ि था|
III. कतव का तजससे सामना हुआ उसके कतव पर बहुि उपकार थे |
IV. कतव का तजससे सामना हुआ उसके प्रति कतव ईमानदार नहीं था|
(ii) कतव का अचानक से तकस से सामना हुआ है ? - 1
I. प्रेयसी|
II. प्रेरणा|
III. पररपूणतिा|
IV. पृथकत्व|
(iii) ‘अंिर की अतकंचनिाएाँ ’ कतव के तकस गुण को प्रदतित ि करिी हैं ? 1
I. अनु कूलन|
II. अदक्षिायें|
III. आं िररक प्रज्ञिा|
IV. अकरुणामयिा|
(iv) "अम्लान तमििा"- से कतव का सटीक िात्पयत क्ा है ? 1
I. अपररपूणत दोस्ती|

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II. अप्रत्यातिि तमििा|
III. आभापूणत स्नेह|
IV. अतवश्वसनीय मैिी|
(v) कतव को लज्जा का अनु भव क्ों हुआ? 1
I. एकां ि से नज़रे चुराने के कारण कतव अपने आप को दोषी मान रहा था|
II. कतव ने सोचा तक लोगों को पिा चले गा िो वो क्ा कहे गें|
III. कतव को अपनी क्षु द्रिा का अनु भव हो गया था|
IV. कतव का आत्म सम्मान नि हो गया था|
(vi) तसर-चढ़ी धूल कैसे धुल गई? 1
I. वर्ाा िी पहली बौछार से|
II. अहीं िार िे समटने से|
III. एिाींत में सत्य िी अनुभसू त से|
IV. अपनी गलसतयों पर लज्जजत होने से|
(vii) कतव अचकचा गया क्ोंतक…………………? 1
I. एिाींत में स्वयीं से सामना होने िे िारण|
II. उसने अवश्य िोई अपराध दिया था|
III. िवव लज्जजत हो गया था|
IV. पुराने समत्र से भेंट होने िे िारण|
(viii) 'प्रवंचना' से कतव का िात्पयत है ..............? 1
I. धोखा|
II. सनींदा|
III. अिृ तज्ञता
IV. ईर्षयाा
कायाशियी त िं दी और रििात्मक िेिि (5)
3. तिम्नतिच्छिि में से तिदे र्ािु सार सबसे उतिि तिकिोिं का ियि कीतिए:- 5x1
=5
(i) जनसंचार के आधुतनक माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम है :- 1
I. रे तडयो|
II. िीवी|
III. तप्रंि|
IV. नारद मु तन|
(ii) दृश्य-श्रव्य-तप्रंि जनसंचार माध्यम का उदाहरण हो सकिे हैं :- 1
I. िीवी-रे तडयो-कागज़|
II. िीवी-रे तडयो-समाचारपि|
III. समाचारपि-रे तडयो-िीवी|
IV. तसने मा-आकािवाणी-इं िरने ि|
(iii) इं िरने ि पिकाररिा आजकल बहुि लोकतप्रय है क्ोंतक:- 1
I. इससे दृश्य-श्रव्य एवं तप्रंि िीनों माध्यम एक साथ लाभ दे िे हैं |
II. इससे खबरें बहुि िीव्र गति से पहुाँ चाई जािी हैं |
III. इससे सही समाचार जल्दी प्राप्त होिे हैं |

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IV. इससे खबरों की पुति जल्दी हो जािी है |
(iv) फ्रीलां सर होिा है : 1
I. पूणतकातलक पिकार|
II. अंिकातलक पिकार|
III. स्विंि पिकार|
IV. अधतकातलक पिकार|
(v) समाचार लेखन के छः ककार हैं : 1
I. क्ा, कौन, कहााँ , कभी, तकस के, कैसे|
II. क्ा, कौन, कहााँ , कब, क्ों, तकस से|
III. क्ा, कौन, कहााँ , कब, क्ों, कैसे|
IV. क्ा, कौन, कहााँ , कब, क्ों, तकस से|
पाठ्य-पुस्तक (10)
4. तिम्नतिच्छिि काव्ािंर् को ध्यािपूिशक पतिए:- 5x1
िोड़ो िोड़ो िोड़ो =5
ये पत्थर ये चट्टानें
ये झूिे बंधन िू िे
िो धरिी को हम जाने
सुनिे हैं तमट्टी में रस है तजससे उगिी दू ब है
अपने मन के मै दानों पर व्यापी कैसी ऊब है !
तिम्नतिच्छिि में से तिदे र्ािु सार सबसे उतिि तिकिोिं का ियि कीतिए:-
(i) कतव तकसे िोड़ दे ने की बाि करिा है ? 1
I. पत्थर को|
II. चट्टान को|
III. झूिे बंधनों को|
IV. जीवन के अवरोधों को|
(ii) झूिे बंधन तकसे कहा गया है ? 1
I. परं परा|
II. रीति-ररवाज|
III. धमत - जाति|
IV. खोखले ररश्ते |
(iii) धरिी तकसका प्रिीक है ? 1
I. जमीन|
II. मन|
III. िरीर|
IV. रचनािीलिा|
(iv) तजससे उगिी दू ब है - पंस्मि में ‘दू ब’ क्ा है ? 1
I. सृजन
II. पुस्तक
III. घास
IV. रस
(v) मन में ऊब होने से क्ा होगा? 1
I. रचना नहीं होगी|

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II. आधी रचना होगी|
III. अच्छी रचना होगी|
IV. अधूरी रचना होगी|
5. तिम्नतिच्छिि गद्ािंर् को ध्यािपूिशक पतिए:- 5x1
भारि की सां स्कृतिक तवरासि यूरोप की िरह म्यू तज़यम्स और संग्रहालयों में जमा नहीं थी- वह उन =5
ररश्तों से जीतवि थी, जो आदमी को उसकी धरिी,उसके जंगलों,नतदयों-एक िब्द में कहें - उसके
समू चे पररवेि के साथ जोड़िे थे । अिीि का समू चा तमथक संसार पोतथयों में नहीं, इन ररश्तों की
अदृश्य तलतप में मौजू द रहिा था। यूरोप में पयात वरण का प्रश्न मनु र्ष् और भू गोल के बीच संिुलन
बनाए रखने का है –भारि में यही प्रश्न मनु र्ष् और उसकी संस्कृति के बीच पारं पररक सं बंध बनाए
रखने का हो जािा।
तिम्नतिच्छिि में से तिदे र्ािु सार तिकिोिं का ियि कीतिए:-
(i) भारि की सां स्कृतिक तवरासि तकसमें तनतहि है ? 1
I. संग्रहालयों में |
II. पररवेि में |
III. जं गलों में |
IV. ररश्तों में |
(ii) गदयां ि में तकसके तमथक संसार की बाि हो रही है ? 1
I. यूरोप की|
II. भारि की|
III. अिीि के ररश्तों की|
IV. मनु र्ष् की|
(iii) ररश्तों की अदृश्य तलतप– से आप क्ा समझिे हैं ? 1
I. मनु र्ष् के आपसी संबंध|
II. भारि की सां स्कृतिक पहचान|
III. प्रकृति से ररश्ते |
IV. मनु र्ष् और प्रकृति का संबंध|
(iv) ‘मनु र्ष् और भू गोल के बीच संिुलन’ से क्ा अतभप्राय है ? 1
I. मनु र्ष् और धरिी का संबंध|
II. अपने पररवेि से संबंध|
III. पयात वरण और मनु र्ष् का संबंध|
IV. पयात वरण को बचाना|
(v) भारि में पयात वरण का प्रश्न तकससे संबस्मिि है ? 1
I. मनु र्ष् से|
II. पररवेि से|
III. प्रकृति से|
IV. संस्कृति से|
पू रक पाठ्य-पु स्तक (07)

6. तिम्नतिच्छिि प्रश्नोिं में तिदे र्ािु सार तिकिोिं का ियि कीतिए:- 07
(i) ’चूल्हा िं डा तकया होिा िो दु श्मनों का कले जा कैसे िं डा होिा’– पंस्मि में ‘चूल्हा िं डा करने ’ का 1
क्ा अथत है ?
I. चूल्हा बुझा दे ना|
II. चूल्हे की आग बुझा दे ना|

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III. पानी से आग बुझा दे ना|
IV. चूल्हे में पानी डाल दे ना|
(ii) सैलानी तकसे कहिे हैं ? 1
I. सैल पर तनवास करने वाले |
II. पहाड़ घूमने वाले |
III. पयतिन करने वाला|
IV. सैर करने वाला|
(iii) महीप कौन था? 1
I. एक पहाड़ी लड़का|
II. भू पदादा का बेिा|
III. तिरलोक तसंह का बेिा|
IV. रूप तसंह का बेिा|
(iv) ‘आरोहण’ कहानी की मू ल संवेदना क्ा है ? 1
I. पवतिीय लोगों की संघषत मयी तज़ं दगी|
II. भू पदादा का कतिन जीवन|
III. पहाड़ों में भौतिक उन्नति की कमी|
IV. रोजगार का अभाव|
(v) ले खक ने मााँ की िुलना बिख से क्ों की है ? 1
I. अपनी नजरों के सामने रखने से|
II. उसके खाने -पीने का खयाल रखने के कारण|
III. उसकी दे खभाल करने से|
IV. बच्चों के प्रति सिकत रहने से|
(vi) कोइयााँ तकसे कहिे है ? 1
I. कमल|
II. मखाना|
III. जलकुंभी|
IV. कुमु द|
(vii) औद्ोगीकरण के तवकास का प्रभाव हमारी नतदयों पर तकस प्रकार पड़ रहा है ? 1
I. नतदयां तवकतसि हो रही हैं |
II. नतदयां दू तषि हो रहीं हैं |
III. नतदयां सुख रहीं हैं |
IV. नतदयों में बाढ़ आ रही है |
ििंड 'ब' िर्शिात्मक प्रश्न
कायाशियी त िं दी और रििात्मक िेिि (20)
7. तिम्नतिच्छिि में से तकसी एक तिषय पर िगभग 150 र्ब्ोिं में रििात्मक िेि तिच्छिए:- 5
I. अक्ल बड़ी या भैं स|
II. गााँ व लौििे मज़दू र|
III. मैं ने हारना नहीं सीखा|
प्रश्न सावतजतनक स्थानों पर धूम्रपान तनषे ध तनयम के उल्लं घन पर तचंिा जिािे हुए अपने क्षे ि के पयात वरण 5x1
8. तनदे िालय के संयुि सतचव को सुझावात्मक पि तलस्मखए| =5
अथिा

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महामारी के बाद लोगों के असहाय-तनरुपाय जीवन के बारे में बिािे हुए तकसी प्रतितिि समाचार-
पि के संपादक को पि तलस्मखए|
9. तिम्नतिच्छिि प्रश्नोिं के उत्तर िगभग 40-50 र्ब्ोिं में तिच्छिए:- 5
(i) रे तडयो के संदभत में श्रव्य माध्यमों की दो सीमाएाँ बिाएाँ ? तकसी एक सीमा से पार पाने का उपाय भी 3
बिाएाँ | अथिा
कतविा के महत्त्वपूणत घिक कौन-कौन से हैं ?
(ii) कहानी और नािक में क्ा समानिाएाँ होिी हैं ? अथिा 2
कहानी और नािक में क्ा अंिर होिा है । कोई दो अंिर स्पि कीतजए।
10. तिम्नतिच्छिि प्रश्नोिं के उत्तर िगभग 40-50 र्ब्ोिं में तिच्छिए:- 5
(i) उलिा तपरातमड िैली से क्ा अतभप्राय है ? 3
अथिा
तविे ष लेखन तकसे कहिे हैं ? समाचार-पिों में तविेष ले खन की भू तमका स्पि कीतजए।
(ii) स्तं भ ले खन से आप क्ा समझिे हैं ? तिप्पणी कीतजए| 2
अथिा
िीचर क्ा है ? यह कैसे तलखा जािा है ?
पाठ्य-पुस्तक (20)
11. तिम्नतिच्छिि प्रश्नोिं में से तकन्ी िं दो प्रश्नोिं के उत्तर िगभग 50-60 र्ब्ोिं में तिच्छिए:- 6
(i) काने तलया के गीि कतविा में वतणति भारि के प्राकृतिक सौंदयत को अपने िब्दों में तलस्मखए। 3
(ii) स्विन्त्रिा के बाद ईमानदार लोग हाथ िैलाने पर तववि क्ों हो गए? 3
(iii) राम वन गमन के पश्चाि कौियोंा की स्मस्थति पर तिप्पणी कीतजए| 3
12. तिम्नतिच्छिि प्रश्नोिं में से तकन्ी िं दो प्रश्नोिं के उत्तर िगभग 30-40 र्ब्ोिं में तिच्छिए:- 4
(i) तवद्ापति की नातयका पर कोयल और भौंरे का प्रभाव तकस प्रकार पड़िा है ? 2
(ii) वसंि के आने की सूचना कतव को कैसे तमलिी है ? 2
(iii) सत्य का तदखने और ओझल होने से आप क्ा समझिे हैं ? 2
13. तिम्नतिच्छिि प्रश्नोिं में से तकन्ी िं दो प्रश्नोिं के उत्तर िगभग 50-60 र्ब्ोिं में तिच्छिए:- 6
(i) पं. रामचंद्र िु क्ल का तहन्दी सातहत्य के प्रति झुकाव तकस िरह बढ़िा गया? 3
(ii) थाना तबंहपुर स्टे िन पहुं चने के बाद हरगोतबन का मन भारी क्ों हो गया? 3
(iii) गंगापुि के तलए गंगा मै या ही जीतवका और जीवन है - कैसे? 3
14. तिम्नतिच्छिि प्रश्नोिं में से तकन्ी िं दो प्रश्नोिं के उत्तर िगभग 30-40 र्ब्ोिं में तिच्छिए:- 4
(i) आदमी उजडें गे िो पेड़ जीतवि रहकर क्ा करें गे – कथन का आिय स्पि कीतजए? 2
(ii) राजा ने प्रजा को आाँ खें बंद करने के तलए क्ों कहा है ? 2
(iii) बालक द्वारा लड् डू मां गे जाने पर ले खक को अच्छा क्ों लगा? 2

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Board / OrgCBSE
ExamClass 12
TypeSample Paper
Pages13
Updated30 Apr 2026