Page 1
प्रतिदर्श प्रश्न पत्र 2020- 21 तिषय- त िं दी (ऐच्छिक) कक्षा- 12
अिंक योजना
तनर्ाशरिि समय- 3 घिं टे अतर्किम अिं क – 80
सामान्य तनदे र्:-
अंक योजना का उद्दे श्य मू ल्ां कन को अधिकाधिक वस्तु धनष्ठ बनाना है |
खं ड-अ में धिए गए वस्तु परक प्रश्ों के उत्तरों का मू ल्ां कन धनधिि ष्ट अंक योजना के आिार पर ही धकया जाए|
खं ड-ब में वर्िनात्मक प्रश्ों के अंक योजना में धिए गए उत्तर-धबंिु अंधिम नहीं हैं | ये सुझावात्मक एवं सां केधिक हैं |
यधि परीक्षार्थी इन सां केधिक धबंिुओं से धिन्न, धकंिु उपयुक्त उत्तर िे िो उसे अंक धिए जाएँ |
मू ल्ां कन कायि धनजी व्याख्या के अनु सार नहीं, बल्कि अंक-योजना में धनधिि ष्ट धनिे शानु सार ही धकया जाए|
खिंड – अ
िस्तु पिक- प्रश्नोिं के उत्ति
प्रश्न क्रम सिंख्या उत्ति तनर्ाशरिि अिं क
तिभाजन
प्रश्न1. प्रश्न सिंख्या 1 में तदए गए गद्ािंर्-I पि आर्ारिि प्रश्नोिं के उत्ति:- 10x1=10
(i) III. धशक्षकों के हाव िाव स्मृधि पटल पर स्र्थायी प्रिाव छोड़ िे िे हैं | 1
(ii) II. धकसी कायि शै ली की कधमयों को बढ़ा चढ़ा कर उजागर करना चाहिे हैं | 1
(iii) I. संस्मरर् की अनिे खी बंि हो गई है | 1
(iv) III. िाधक पेचीिा सवालों या सामाधजक मु द्दों पर नए और सार्थि क दृधष्टकोर्ों द्वारा धशक्षर् प्रिान 1
धकया जा सके।
(v) III. बच्चे इस का अंिाजा नहीं कर पािे की धक उनके धकस कायि से क्या हो सकिा है | 1
(vi) II. संस्मरर् की धविा को प्रधसल्कि धमलना व जगह-जगह इसकी चचाि होना। 1
(vii) I. संस्मरर् धविा का वििमान धहं िी साधहत्य में स्र्थान | 1
(viii) II. अिीि और वििमान के बीच िे खने वाले की दृधष्ट और पररप्रेक्ष्य बिल जािा है । 1
(ix) III. जीवन घटनाओं की वह जानकाररयाँ िे ना जो जीवन के महत्वपूर्ि मु द्दों को गहराई से समझने 1
में मिि कर सकिी हैं ।
(x) IV. यािें होने से हम जीवन के वो महत्वपूर्ि सबक सीखिे हैं धजनका हम िधवष्य में उपयोग जीवन 1
Page 2
सुिार सकिे हैं |क्या छात्र अपने ज्ञान को िाधकिक रूप से लागू कर सकिे हैं ?
अथिा
प्रश्न सिंख्या 1 में तदए गए गद्ािंर्-II पि आर्ारिि प्रश्नोिं के उत्ति:- 10X1=10
(i) III. ले खक उनके पश्चाि हं स को गुर्वत्ता में धबना कोई समझौिा धकये चलाएगें| 1
(ii) III. धहं िी संसार द्वारा प्रगधिशील, क्रल्किकारी व समाजवािी साधहत्य की अवहे लना| 1
(iii) II. वह अपने बच्चों से अत्यधिक प्रेम करिे र्थे | 1
(iv) II. शहीि किी समझौिा नहीं करिे पर वे झुकने को िैयार र्थे| 1
(v) III. धहं िी संसार से उन्हें ऐसा अनु िव हुआ र्था धक वे धकसी िी हि िक झुकने को िी िैयार र्थे| 1
(vi) IV. िन बीमार पर मन धनश्छल र्था| 1
(vii) III. पत्र साधहत्य का नाम| 1
(viii) III. ल्कस्र्थरिा से| 1
(ix) II. धहं िी संसार का अिूरा शहीि| 1
(x) II. वह शब्ों से कम परिु िावों से अधिक बाि कर रहे र्थे | 1
प्रश्न2. प्रश्न सिंख्या 2 में तदए गए पद्ािंर्-I पि आर्ारिि प्रश्नोिं के उत्ति:- 8X1=8
(i) IV. धचत्त भ्ां ि कर अंड- बंड बकने पर मजबूर कर सकिे हैं | 1
(ii) I. इं सान का अल्कस्तत्व उसकी सोच व िावनाएं अब एक आं कड़ा मात्र रह गयी हैं | 1
(iii) I. अधिव्यल्कक्त की स्विंत्रिा| 1
(iv) I. आं कड़े इिने अधिक र्थे धक धिमाग उन्हें स्वीकार नहीं कर रहा र्था| 1
(v) II. िािाि द्वारा जधनि उत्ते जना प्रार्नाशक हो सकिी है | 1
(vi) II. बड़ी मात्रा में िथ्य लोगों का धिमाग़ ख़राब कर िे िे हैं | 1
(vii) I. पैिाइशी हक़ धिए जाएँ | 1
(viii) III. आँ कड़े बहुि ज़्यािा हैं , सत्य कम| 1
अथिा
प्रश्न2. प्रश्न सिंख्या 2 में तदए गए पद्ािंर्-II पि आर्ारिि प्रश्नोिं के उत्ति:- 8X1=8
Page 3
(i) I. कधव का धजससे सामना हुआ कधव उससे धमलने में डर रहा र्था| 1
(ii) IV. पृर्थकत्व| 1
(iii) II. अिक्षिायें| 1
(iv) III. आिापूर्ि स्नेह| 1
(v) III. कधव को अपनी क्षु द्रिा का अनु िव हो गया र्था| 1
(vi) III. एकां ि में सत्य की अनु िूधि से| 1
(vii) I. एकां ि में स्वयं से सामना होने के कारर्| 1
(viii) I. िोखा| 1
प्रश्न3. तिकल्ोिं का चयन कीतजए:- 5X1=5
(i) III. धप्रंट| 1
(ii) II. टीवी-रे धडयो-समाचारपत्र| 1
(iii) II. इससे खबरें बहुि िीव्र गधि से पहुँ चाई जािी हैं | 1
(iv) III. स्विंत्र पत्रकार| 1
(v) III. क्या, कौन, कहाँ , कब, क्यों, कैसे| 1
प्रश्न4. (पद्ािंर्) तिकल्ोिं का चयन कीतजए:- 5X1=5
(i) IV. जीवन के अवरोिों को| 1
(ii) III. िमि - जाधि| 1
(iii) II. मन| 1
(iv) I. सृजन 1
(v) IV. अिूरी रचना होगी| 1
प्रश्न5. (गद्ािंर्) तिकल्ोिं का चयन कीतजए:- 5X1=5
(i) IV. ररश्ों में| 1
(ii) II. िारि की| 1
(iii) IV. मनु ष्य और प्रकृधि का संबंि| 1
Page 4
(iv) III. पयाि वरर् और मनु ष्य का संबंि| 1
(v) IV. संस्कृधि से| 1
प्रश्न6. (पू िक पाठ्य-पु स्तक) तिकल्ोिं का चयन कीतजए:- 7X1=7
(i) II. चूल्हे की आग बुझा िे ना| 1
(ii) III. पयिटन करने वाला| 1
(iii) II. िू पिािा का बेटा| 1
(iv) I. पवििीय लोगों की संघर्ि मयी ध ं िगी| 1
(v) IV. बच्चों के प्रधि सिकि रहने से| 1
(vi) IV. कुमु ि| 1
(vii) II. नधियां िू धर्ि हो रहीं हैं | 1
खिंड 'ब'
िर्शनात्मक प्रश्नोिं के सिंभातिि उत्ति सिंकेि
प्रश्न क्रम सिंख्या उत्ति अिं क तिभाजन
प्रश्न7. तकसी एक तिषय पि लगभग 150 र्ब्ोिं में िचनात्मक लेख तलच्छखए:- 5x1=5
िू धमका - 1 अंक
धवर्यवस्तु - 3 अंक
िार्ा - 1 अंक
प्रश्न8. 2 में से तकसी 1 तिषय पि पत्र (लगभग 80-100 र्ब्-सीमा) 5x1=5
आरं ि और अंि की औपचाररकिाएँ - 1 अंक
धवर्यवस्तु - 3 अंक
िार्ा - 1 अंक
प्रश्न9. प्रश्नोिं के उत्ति लगभग 40-50 र्ब्ोिं में तलच्छखए:- 3+2-=5
(i) रे धडयो संचार का एक िरफ़ा माध्यम है । इसधलए, संिेशों के संबंि में कोई प्रधिधक्रया प्राप्त नहीं 3
की जा सकिी है । चूंधक श्रोिा का ध्यान केवल ध्वधन पर होिा है , इसधलए रे धडयो के माध्यम से
संचाररि संिेश केवल उन लोगों िक पहुं च सकिे हैं जो ध्यानपूविक और बुल्किमानी से सुनिे हैं ।
रे धडयो से संिेश प्राप्त करने के धलए बहुि चौकस रहना पड़िा है अन्यर्था संिेश का कुछ एक
Page 5
धहस्सा ही याि रहिा है । रे धडयो में टे लीधवजन द्वारा प्रिान की गई धचत्रात्मक गुर्वत्ता का अिाव
है ।
प्रधिधक्रया िंत्र की कमी को धनम्नधलल्कखि िरीके से िू र धकया जा सकिा है :-
ने टवधकिंग में रे धडयो के उपयोग को मजबूि करने के धलए संस्र्थागि और सामु िाधयक स्तर पर
श्रोिा मं च स्र्थाधपि धकये जा सकिे हैं जो लोगों की धवधिन्न कायिक्रमों पर प्रधिधक्रयाएं ले कर
श्रोिाओं पर अनु संिान के धलए डे टा प्रिान कर सकिे हैं और प्रोग्राधमं ग को और अधिक सार्थि क
बना सकिे हैं । प्रधिधक्रयाओं का धवश्लेर्र् करने और क्षे त्र-आिाररि धवकास कायिक्रमों के
उत्पािन में सहायिा करने के धलए धवशे र्ज्ञों को रे धडयो स्टे शनों से संलग्न धकया जा सकिा है ।
---------------------------------------------------------------------------------------
अथिा
कधविा िार्ा में होिी है , इसधलए िार्ा का सम्यक ज्ञान रूरी है ।
िार्ा शब्ों से बनिी है । शब्ों का एक धवन्यास होिा है धजसे वाक्य कहा जािा है । िार्ा
प्रचधलि एवं सहज हो पर संरचना ऐसी धक पाठक को नयी लगे। कधविा में संकेिों का बड़ा
महत्त्व होिा है । इसधलए धचन्हों (,') यहाँ िक धक िो पंल्कक्तयों के बीच का खाली स्र्थान िी कुछ
कह रहा होिा है । वाक्यगठन की जो धवधशष्ट प्रर्ाधलयाँ होिी हैं , उन्हें शै ली कहा जािा है ।
इसधलए धवधिन्न काव्य शै धलयों का ज्ञान िी रूरी है ।
छं ि के अनु शासन की जानकारी से होकर गु रना एक कधव के धलए रूरी है । ििी आं िररक
लय का धनवाि ह संिव है । कधविा छं ि और मु क्त छं ि िोनों में होिी है । छं िोबि कधविा के धलए
छं ि के बारे में बुधनयािी जानकारी आवश्यक है ही, मु क्त छं ि में धलखने के धलए िी इसका ज्ञान
रूरी है ।
कधविा समय धवशे र् की उपज होिी है उसका स्वरूप समय के सार्थ-सार्थ बिलिा रहिा है ।
अिः धकसी समय धवशे र् की प्रचधलि प्रवृधत्तयों की ठीक-ठीक जानकारी िी कधविा की िु धनया
में प्रवेश के धलए आवश्यक है ।
कम से कम शब्ों में अपनी बाि कह िे ना और किी-किी िो शब्ों या िो वाक्यों के बीच कुछ
अनकही छोड़ िे ना कधव की िाकि बन जािी है ।
(ii) क ानी औि नाटक में समानिाएँ :- 2
मानक ित्व
साधहत्य के अधिकां श रूपों की िरह, नाटक और कर्थाएँ कर्थानक, पररल्कस्र्थधियां और द्वं द्व जै से
ित्वों को साझा करिे हैं । कहानी में पररल्कस्र्थधि को किी-किी स्पष्ट रूप से प्रकट धकया जािा है ,
ले धकन अक्सर एक समय में इसके एक अंश का ही पिा चलिा है , जै से धक चररत्र का उल्ले ख,
समय, या स्र्थान का मौसम। नाटक में , पररल्कस्र्थधियां पाठकों के धलए मं च धनिे शन करने के धलये
बिाई जािी हैं और िशि कों को यह पृष्ठिू धम और वेशिू र्ा के सार्थ-सार्थ बोली जाने वाले संवािों
से ज्ञाि होिी है ।
Page 6
नाटकीय रूपां िर
नाटक और कर्था िोनों ही चररत्र और कर्थानक को प्रकट करने के धलए नाटकीयिा का उपयोग
करिे हैं । कहाधनयों में नाटक के सामान संवाि और एक्शन होिे हैं ।
चररत्र धनमाि र्
कहानी और नाटक िोनों में पात्रों के चररत्र का न्यू निम वर्िन और स्पष्टीकरर् होिा है । पात्र
अपने संवािों से अपना चररत्र धनमाि र् करिे हैं ।
प्रकटीकरर् और व्याख्या
कर्थाओं और नाटकों िोनों में , स्पष्टीकरर्, पृष्ठिू धम और प्रेरर्ा आधि को खोजने और िय करने
की ध म्मेिारी िशि क या पाठक की होिी है क्योंधक यह सब कुछ स्पष्ट रूप से नहीं बिाया गया
होिा है । प्रत्येक िशि क या पाठक खु ि के धलए कहानी/ नाटक की व्याख्या करिा है और एक
ही नाटक को िे खने या एक ही कहानी को पढ़ने वाले धकसी अन्य व्यल्कक्त की िुलना में उसके
अनु िव अलग हो सकिे हैं ।
---------------------------------------------------------------------------------------
अथिा
---------------------------------------------------------------------------------------
क ानी औि नाटक में अिं िि:-
नाटक कृत्यों और दृश्यों के माध्यम से मं धचि धकया जािा है । इसमें कर्थानक, पररल्कस्र्थधियाँ ,
स्पष्टीकरर् आधि स्विः स्पष्ट होिे हैं । प्रत्येक पात्र के संवाि अलग-अलग धलखे होिे हैं । नाटक
अधिव्यल्कक्त केंधद्रि िर्था िावप्रिान होिे हैं िर्था कलाकारों की अधिव्यल्कक्त कला,संवाि-सम्प्रे र्र्,
आवाज आधि इसमें प्रमु ख िू धमका अिा करिी हैं ।
अधिनय द्वारा धकसी िाव, घटना, सामाधजक राय आधि प्रस्तु ि की जािी हैं | नाटक में सिी
प्रकार के चररत्रों का समावेश होिा है , जै से- नायक-नाधयका, खलनायक, लघुचररत्र इत्याधि।
कहानी वह रचना होिी है , धजसे कक्षा में िी सुना सकिे हैं अर्थवा धलख िी सकिे हैं | कहानी
प्रायः कर्थन बहुल होिी है परिु कहीं-कहीं इसमें संवाि िी सल्कम्मधलि धकये जािे हैं । इसमें
कर्थन के माध्यम से पात्रों का चररत्र धवकास धकया जािा है । इसमें साधहल्कत्यक उपकरर्ों का
उपयोग उिारिा-पूविक धकया जािा है । इसकी धवर्य-वस्तु कर्थानक के इिि -धगिि बुनी होिी है
िर्था इसमें कर्थन के माध्यम से पररल्कस्र्थधियोँ का वर्िन धकया जािा है ।
प्रश्न10. तनम्नतलच्छखि प्रश्नोिं के उत्ति लगभग 40-50 र्ब्ोिं में तलच्छखए:- 3+2=5
(i) यह समाचार ले खन की सबसे लोकधप्रय, उपयोगी और बुधनयािी शै ली है । यह शै ली कहानी या 3
कर्था ले खन की शै ली के ठीक उलटी है धजसमें क्लाइमे क्स धबिुल आल्कखर में आिा है । इसमें
Page 7
धकसी घटना धवचार या समस्या के सबसे महत्वपूर्ि िथ्यों या जानकारी को सबसे पहले बिाया
जािा है | जबधक कहानी या उपन्यास में क्लाइमे क्स सबसे अंि में आिा है । उलटा धपराधमड-
शै ली में कोई धनष्कर्ि नहीं होिा। उलटा धपराधमड शै ली के िहि समाचार को िीन धहस्सों में
धविाधजि धकया जा सकिा है -इं टरो-बॉडी और समापन। समाचार के इं टरो या लीड को धहं िी में
मु खड़ा िी कहिे हैं । इसमें खबर के मू ल ित्व को शु रू की िो या िीन पंल्कक्तयों में बिाया जािा
है । यह खबर का सबसे अहम धहस्सा होिा है । इसके बाि बॉडी में समाचार के धवस्तृ ि ब्योरे को
घटिे हुए महत्त्वक्रम में धलखा जािा है । हालाँ धक इस शै ली में अलग से समापन जै सी कोई ची
नहीं होिी और यहाँ िक धक प्रासंधगक िथ्य और सूचनाएँ िी जा सकिी हैं , अगर रूरी हो िो
समय और जगह की कमी को िे खिे हुए आल्कखरी कुछ लाइनों या पैराग्राफ़ को काटकर हटाया
िी जा सकिा है और उस ल्कस्र्थधि में खबर वहीं समाप्त हो जािी है । इसे उलटा धपराधमड इसधलए
कहा जािा है क्योंधक इसमें सबसे महत्त्वपूर्ि िथ्य या सूचना ‘यानी क्लाइमे क्स’ धपराधमड के
सबसे धनचले धहस्से में नहीं होिा बल्कि इस शै ली में धपराधमड को उलट धिया जािा है ।
---------------------------------------------------------------------------------------
अर्थवा
---------------------------------------------------------------------------------------
धकसी खास धवर्य पर सामान्य ले खन से हट कर धकया गया ले खन है । धजसमें राजनीधिक,
आधर्थि क, अपराि, खे ल, धिल्म, कृधर्, कानू न, धवज्ञान और अन्य धकसी िी मत्त्वपूर्ि धवर्य से
संबंधिि धवस्तृ ि सूचनाएँ प्रिान की जािी हैं ।
डे स्क:- समाचारपत्र, पधत्रकाओं, टीवी और रे धडयो चैनलों में अलग-अलग धवर्यों पर धवशे र् ले खन
के धलए धनिाि ररि स्र्थल को डे स्क कहिे हैं । और उस धवशे र् डे स्क पर काम करने वाले पत्रकारों
का िी अलग समू ह होिा है । यर्था, व्यापार िर्था कारोबार के धलए अलग िर्था खे ल की खबरों के
धलए अलग डे स्क धनिाि ररि होिा है ।
धवशे र् ले खन की िार्ा-शै ली:- धवशे र् ले खन की िार्ा-शै ली सामान्य ले खन से अलग होिी है ।
इसमें संवाििािा को संबंधिि धवर्य की िकनीकी शब्ावली का ज्ञान होना आवश्यक होिा है ,
सार्थ ही यह िी आवश्यक होिा है धक वह पाठकों को उस शब्ावली से पररधचि कराए धजससे
पाठक ररपोटि को समझ सकें। धवशे र् ले खन की कोई धनधश्चि शै ली नहीं होिी।
धवशे र् ले खन के क्षे त्र:- धवशे र् ले खन के अने क क्षे त्र होिे हैं , यर्था- अर्थि-व्यापार, खे ल, धवज्ञान-
प्रौद्योधगकी, कृधर्, धविे श, रक्षा, पयाि वरर्-धशक्षा, स्वास्थ्य, धफ़ल्म-मनोरं जन, अपराि, कानू न व
सामाधजक मु द्दे आधि।
(ii) स्तं ि ले खन धवचारपरक ले खन का एक प्रमु ख रूप है । कुछ महत्त्वपूर्ि ले खक अपने खास 2
वैचाररक रुझान के धलए जाने जािे हैं । उनकी अपनी एक लेखन-शै ली िी धवकधसि हो जािी है ।
ऐसे ले खकों की लोकधप्रयिा को िे खकर अखबार उन्हें एक धनयधमि स्तं ि धलखने की ध म्मेिारी
Page 8
िे िे िे हैं । स्तं ि का धवर्य चुनने और उसमें अपने धवचार व्यक्त करने की स्तं ि ले खक को पूरी
छूट होिी है । स्तं ि में ले खक के धवचार अधिव्यक्त होिे हैं । यही कारर् है धक स्तंि अपने
ले खकों के नाम पर जाने और पसंि धकए जािे हैं । कुछ स्तं ि इिने लोकधप्रय होिे हैं धक अखबार
उनके कारर् िी पहचाने जािे हैं , ले धकन नए ले खकों को स्तंि ले खन का मौका नहीं धमलिा है ।
---------------------------------------------------------------------------------------
अर्थवा
---------------------------------------------------------------------------------------
फ़ीचर एक सुव्यवल्कस्र्थि, सृजनात्मक और आत्मधनष्ठ ले खन है धजसका उद्दे श्य पाठकों को सूचना
िे ने, धशधक्षि करने के सार्थ मु ख्य रूप से उसका मनोरं जन करना होिा है । इसकी िार्ा सरल,
आकर्ि क व मन को छूने वाली होनी चाधहए।
1. िीचर एक धवशे र् वगि व धवचारिारा पर केंधद्रि रहिे हुए धवधशष्ट शै ली में धलखा जािा है ।
2. एक समाचार हर एक पत्र में एक ही स्वरूप में रहिा है परं िु एक ही धवर्य पर िीचर अलग-
अलग प्रस्तु धि धलए होिे हैं ।
3. िीचर में अधिररक्त साज-सज्जा िथ्यों और कल्पना का रोचक धमश्रर् रहिा है ।
4. िोटो की प्रस्तु धि से िीचर अधिक प्रिावशाली बन जािा है । िीचर में आकड़े , काटू ि न, चाटि ,
नक्शे आधि का प्रयोग उसे रोचक बना िे िा है ।
िीचर ले खन की िार्ा सरल, रूपात्मक, होिी है परं िु समाचार की िार्ा में सपाटबयानी होिी
है |
िीचर में शब्ों की अधिकिम सीमा नहीं होिी है | ये आमिौर पर 250 से ले कर 500 शब्ों में
धलखे जािे हैं | इनकी शै ली कर्थात्मक होिी है |
प्रश्11. प्रश्ों में से धकन्हीं िो प्रश्ों के उत्तर लगिग 50-60 शब्ों में धलल्कखए:- 3+3=6
(i) लाधलमायुक्त प्यारा सूयोिय| 3
चारों ओर हररयाली|
नीले आसमान में उड़िे पक्षी|
नीला समु द्र और उसकी लहरें |
(ii) जीवन में छल-कपट नहीं होना| 3
वास्तधवकिा नहीं धछपना|
चालाक लोगों द्वारा अवसर और हक धछन ले ना|
(iii) मानधसक ल्कस्र्थधि ठीक न होना| 3
बार-बार राम को याि करना|
राम की वस्तु ओं को बार-बार आँ खों से लगाना और बेचैन होना|
किी बोलना किी चुप हो जाना|
प्रश्12. प्रश्ों में से धकन्हीं िो प्रश्ों के उत्तर लगिग 30-40 शब्ों में धलल्कखए:- 2+2=4
Page 9
(i) कोयल और िौरें की आवाज से बेचैन होना| 2
धवरह में आिुर होना|
आँ ख-कान बंि करना|
(ii) प्रकृधि में हुए पररवििन से| 2
धचधड़याँ के बोलने से|
कैलें डर से|
पीले सूखे पत्ते पर पैर पड़ने से|
(iii) सत्य का ल्कस्र्थर न होना| 2
सत्य की पहचान मु ल्किल|
सत्य का प्रत्यक्ष नहीं होना आधि|
प्रश्13. प्रश्ों में से धकन्हीं िो प्रश्ों के उत्तर लगिग 50-60 शब्ों में धलल्कखए:- 3+3=6
(i) घरे लू पररवेश के कारर्| 3
पं केिारनार्थ जी के पुस्तकालय से पुस्तक पढ़ना|
अपने धपिा िर्था उनके धमत्र स्व. रामकृष्ण वमाि के साधनध्य रहने के कारर्|
(ii) धवंहपुर बड़ी बहुररया का मायका| 3
हरगोधवन संवाि सुनाना नहीं चाहिा|
संवाि सुनाने को ले कर असमं जस|
अपने गाँ व की बिनामी से ियिीि|
(iii) गंगा और हर की पैड़ी ही आजीधवका का सािन| 3
श्रिालू द्वारा गंगा में पैसा िेंकना|
गंगापुत्र द्वारा डूबकी लगाकर पैसा धनकालना|
पररवार के अन्य सिस्यों द्वारा रे जगारी िे कर|
प्रश्14. प्रश्ों में से धकन्हीं िो प्रश्ों के उत्तर लगिग 30-40 शब्ों में धलल्कखए:- 2+2=4
(i) प्राकृधिक आपिा में मनु ष्य अस्र्थायी रूप से पलायन करिा है | 2
औद्योगीकरर् में स्र्थायी पलायन|
मनु ष्य और प्रकृधि का संबंि|
(ii) अपनी शां धि के धलए| 2
उनसे कोई प्रश् न पूछे|
वास्तधवकिा से अनधिज्ञ रहने के धलए|
(iii) बच्चे ने अपने मन की बाि कही| 2
बच्चे की िावनाएं बची होने के कारर्|
बच्चे द्वारा स्वयं का उत्तर िे ने के धलए|