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प्रथम सत्र
अभ्यास प्रश्नपत्र प्रथम (2021-22)
हिन्दी पाठ्यक्रम- अ (कोड-002)
कक्षा - नव ीं
ननर्ाारित समय- 90 ममनट अधर्कतम अींक-40
सामान्य ननदे श-
इस प्रश्नपत्र में कुल त न खींड िैं- खींड-क, खींड-ख औि खींड-ग ।
इस प्रश्नपत्र में कुल 10 वस्तप
ु िक प्रश्न पछ
ू े गए िैं। सभ प्रश्नों में उपप्रश्न हदए गए िैं। हदए गए ननदे शों का
पालन किते िुए प्रश्नों के उत्ति दीजिए।
खींड-क में कुल 20 प्रश्न पछ
ू े गए िैं, हदए गए ननदे शों का पालन किते िुए केवल 10 प्रश्नों के उत्ति दीजिए।
खींड-ख में कुल 20 प्रश्न पूछे गए िैं, हदए गए ननदे शों का पालन किते िुए केवल 16 प्रश्नों के उत्ति दीजिए।
खींड-ग में कुल 14 प्रश्न पछ
ू े गए िैं। सभ प्रश्न अननवाया िैं।
सिी उत्ति वाले गोले को भली प्रकाि से केवल न ली या काली स्यािी वाले बॉल पॉइींट पेन से िी ओ.एम.आि.
श ट में भिें ।
खींड – क
. (अपहितअींश) अधर्कतम अींक-10
1. न चे दो अपहित गदयाींश हदए गए िैं। ककस एक गदयाींश को ध्यानपूवाक पहिए औि उस पि आर्ारित
प्रश्नों के उत्ति सिी ववकल्प चन
ु कि
मलखखए- 1x5=5
प्रकृनत ने िमें इतना कुछ हदया िै कक िम सोच भ निीीं सकते। इस र्ित पि ि वन प्रकृनत के कािण िी
सम्भव िै। ब्रह्माण्ड में औि भ कई ग्रि िैं लेककन इस प्रकृनत के बबना विााँ ि वन सम्भव निीीं िै। इस प्रकाि
प्रकृनत िमािे ि वन का आर्ाि िै। र्ित पि िि स्थान पि प्रकृनत एक िैस निीीं िै। स्थान के अनस
ु ाि
प्रकृनत अपना रूप-िीं ग बदल लेत िै औि उस स्थान के अनस
ु ाि िमें सींसार्न उपलब्र् किात िै साथ िी
िमािे मन, िमािी आाँखों को सुकून प्रदान कित िै। प्रकृनत िमें इतना कुछ दे त िै तो िमािा भ फिा बनता िै
कक िम इसके मित्व को िानते िुए इसका सम्मान किें औि इसे अपने स्वाथा के मलए उिाड़ें निीीं। जिससे
मनुष्य की सींतानें भ इसकी सद
ुीं िता का आनन्द ले सके औि इसका लाभ उिा सकें अन्यथा एक हदन वि
िोगा िब इस प्रकृनत के सौंदया को लोग कम््यट
ू ि पि िी देख औि मिसूस कि पायेंगे। िमािे चािों औि िम
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िो भ प्राकृनतक वस्तए
ु ीं दे खते िैं वि प्रकृनत िी िै। प्रकृनत से िमें वि सब ममलता िै िो इींसान के ि वन के
मलए अनतआवश्यक िै। िैसे सााँस लेने के मलए वायु (ऑक्स िन), प ने के मलए पान औि पेट भिने के मलए
खादय सामग्र । लेककन इींसान अपन औि अधर्क चाि के मलए प्रकृनत का दोिन किता िा ििा िै ओि इस
र्ित को प्रकृनत के सौंदया से वींधचत कि ििा िै। समय िमें चेता ििा िै कक यहद िमने अभ इस ववषय पि
िोस कदम न उिाये तो वि हदन दिू निीीं िब इस र्ित पि ि वन सींभव न िो पायेगा। इस प्रकृनत में िब
तक सींतल
ु न िै तभ तक िमािे ि वन में भ सींतल
ु न िै। ििााँ इस प्रकृनत का सींतल
ु न खिाब िोगा विीीं िमािे
ि वन का सींतुलन भ डगमगाने लगेगा। यि र्ित िो िमें इतन सुींदि लगत िै वि इस प्रकृनत के कािण िै
अन्यथा एक ननिान ग्रि के अलावा कुछ न िो।
(i) प्रकृनत अपना रूप िीं ग ककसके अनुसाि बदल लेत िै?
(क) गुण।
(ख) स्थान।
(ग) दोष।
(घ) िल।
(ii) साींस लेने के मलए िमें ककस की आवश्यकता िै?
(क) ऑक्स िन।
(ख) िाइड्रोिन।
(ग) नाइट्रोिन।
(घ) काबान डाइऑक्साइड।
(iii) र्ित को प्रकृनत के सौंदया से वींधचत कौन कि ििा िै?
(क) प्रकृनत का सि
ृ न।
(ख) प्रकृनत का दिन।
(ग) प्रकृनत का सींवथान।
(घ) प्रकृनत का दोिन।
(iv) िमािे ि वन में सींतल
ु न के मलए क्या आवश्यक िै?
(क) पान ।
(ख) िवा।
(ग) प्रकृनत में सींतुलन।
(घ) घि।
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(v) र्ित की सींद
ु िता ककसके कािण िै?
(क) नदी के कािण।
(ख) पिाड़ के कािण।
(ग) प्रकृनत के कािण।
(घ) वनस्पनतयों के कािण।
अथवा
मशक्षा मनुष्य को सत्य की पिचान किाने वाली िै। यि ज्ञान की आाँख दे त िै। यि िमािी सोई प्रनतभा को
िगाकि उसे कािगि बनात िै। दे खा िाए, तो समच
ू ा ववश्व एक खल
ु ी पािशाला िै। िि व्यजक्त ि वनभि
कुछ न कुछ स खता िी ििता िै। व्यजक्त के मलए उसका अनुभव िी मशक्षा का स्वरूप िै। ककन्तु उम्र के पिले
पड़ाव को, जिसे सामान्यतया ववदयाथी ि वन किते िैं यिी मशक्षा के मलए उपयुक्त स्व काि ककया गया िै।
भाित य दृजष्ट से इसे ब्रिमचया आश्रम किते िैं। यिााँ पााँच वषा तक बालक माता के ननदे शन में ि वन की
प्रािीं जम्भक बातें स खता िै। पााँच से पच्च स वषा उसके मलए गुरू के यिााँ मशक्षा पाने के मलए ननजश्चत ककए
गए िैं। यि ववधर्वत ् मशक्षा का स्वरूप िै। ववदर्ानों का यि मानना िै कक मशक्षा तो िब भ , ििााँ भ ममले,
उसे िाथ बिाकि स्व काि किना चाहिए। लेककन यिााँ िमािा उदे श्य प्रौि मशक्षा की आश्वयकता औि मित्व
को बतलाना िै। प्रौि से अमभप्राय िै- गि
ृ स्थ आश्रम का व्यजक्त। दस
ू िे शब्दों में जिसकी उम्र पच्च स वषा से
अधर्क िो। यहद अधर्क उम्र में कोई अनपि व्यजक्त अमशक्षा के कलींक को ममटाना चािे तो वि अपने काया
के क्षणों से कुछ अवकाश ननकाल किके साक्षि (मशक्षक्षत) िो सकता िै। इससे वि अपने दै ननक कायों को
भली भााँनत औि आकषाक ढीं ग से पूिा कि सकता िै।िाष्ट्र की अनेक ववकासश ल न नतयों में प्रौि मशक्षा न नत
का मशक्षा उदे श्य यिी िै कक वे लोग िो अपने ववदयाथी ि वन में ववधर्वत ् मशक्षा निीीं पा सके। अक्षि ज्ञान
तक निीीं प्रा्त कि सके, वे अपना दैनहदन ि वन सुचारू रूप से चला सकें औि सामान्य मलखने पिने के
योग्य िो िायें। इस उदेश्य को सामने िखकि पकी आयु वाले प्रौि व्यजक्तयों के मलए मशक्षा योिना लागू की
गई िै। क्योंकक आि के प्रगनतश ल यग
ु में कोई भ व्यजक्त अमशक्षक्षत ििकि समय के साथ निीीं चल
सकता। कफि चािे गाींव िो या शिि, वि अपने दे श, समाि औि अन्तिााष्ट्रीय स्ति पि मशक्षा के बल पि िी
िड़
ु सकता िै। दे श ववदे श में िो अनेक प्रकाि की प्रगनत िो ििी िै, उन्ननत ववकास की योिनाएीं चल ििी िैं
औि सार्न औि उपकिण सामने आ ििे िैं। अमशक्षक्षत व्यजक्त या तो उनसे अपरिधचत ििता िुआ समुधचत
लाभ निीीं उिा पाएगा या कफि अमशक्षा के कािण िगा िा सकता िै। ऐसे मेंंीं यि वगा स्वयीं को मशक्षक्षत
बनाकि िी िीक से ि वन योग्य िो सकता िै। प्रौि मशक्षा का उपयोग की दृजष्ट से एक उदेश्य यि भ िै कक
अब तक िो लोग अनपि औि वपछड़े िि गए िैं, वे मशक्षा के मित्व को समझ निीीं सके औि कम से कम
अपन सींतान को तो आगे ववकास किने का अवसि प्रदान कि सकें। चािे कोई व्यजक्त मिदिू िै अथवा
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ककसान या ककस भ वगा से सींबींधर्त िैं, कोई भ काया किता िो, ननश्चय िी एक ववशेष स्ति की मशक्षा पाकि
वि न केवल अपन योग्यता बिा सकता िै, अवपतु अपने में समझ बूझ पैदा कि सकता िै
(i) मशक्षा मनुष्य को ककस की पिचान किात िै?
(क) सत्य की।
(ख) अहिींसा की।
(ग) अपरिग्रि की।
(घ) झूि की।
(ii) प्रौि से क्या अमभप्राय िै?
(क)जिनकी आयु 20 वषा से अधर्क िो।
(ख)जिनकी आयु 21 वषा से अधर्क िो।
(ग)जिनकी आयु 22 वषा से अधर्क िो।
(घ) जिनकी आयु 25 वषा से अधर्क िो।
(iii) पकी आयु वाले व्यजक्तयों को दी िाने वाली मशक्षा को ककस नाम से िानते िैं?
(क) मशशु मशक्षा।
(ख) प्रौि मशक्षा।
(ग) बाल मशक्षा।
(घ) बामलका मशक्षा।
(iv) आि के प्रगनतश ल युग में समय के साथ कौन निीीं चल सकता िै?
(क) अमशक्षक्षत।
(ख) मशक्षक्षत।
(ग) ववदवान।
(घ) लेखक।
(v) योग्यता के साथ-साथ समझ पूछ व्यजक्त ककस की सिायता से पैदा कि सकता िै?
(क) सत्य की।
(ख) सियोग की।
(ग) मशक्षा की।
(घ) ननदे श की।
2. न चे दो काव्याींश हदए गए िैं। ककस एक काव्याींश को ध्यानपूवाक पहिए औि उस पि आर्ारित प्रश्नों के
उत्ति सिी ववकल्प चुनकि मलखखए- 1x5=5
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शैशव के सुन्दि प्रभात का
मैंने नव ववकास दे खा।
यौवन की मादक लाली में
ि वन का िुलास दे खा।।
िग-झींझा-झकोि में
आशा-लनतका का ववलास दे खा।
आकाींक्षा, उत्साि, प्रेम का
क्रम-क्रम से प्रकाश दे खा।।
ि वन में न ननिाशा मुझको
कभ रुलाने को आय ।
िग झूिा िै यि वविजक्त भ
निीीं मसखाने को आय ।।
अरिदल की पहिचान किाने
निीीं घण
ृ ा आने पाय ।
निीीं अशाजन्त हृदय तक अपन
भ षणता लाने पाय ।।
(i) कवव को कौन स वविजक्त मसखाने के मलए निीीं आई?
(क) िींग सच्चा िै।
(ख) िग झूिा िै।
(ग) सियोग।
(घ) सफलता।
(ii) दश्ु मनों की पिचान किाने के मलए कौन निीीं आने पाई?
(क) सत्यता।
(ख) सींबींर्।
(ग) घण
ृ ा।
(घ) सियोग।
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(iii) कभ को ि वन में रुलाने के मलए कौन निीीं आई?
(क) प्रत्याशा।
(ख) आशा।
(ग) िताशा।
(घ) ननिाशा।
(iv) आकाींक्षा, उत्साि औि प्रेम का
क्रम-क्रम से कवव ने क्या दे खा।।
(क) प्रकाश।
(ख) अींर्काि।
(ग) रूपक।
(घ) बदलाव।
(v) यौवन की मादक लाली में कवव ने िुलास दे खा?
(क) मत्ृ यु का।
(ख) ममलन का।
(ग) ि वन का।
(घ) ववक्षोभ का।
अथवा
ििी घास पि बबखेि दी िैं
ये ककसने मोत की लडड़यााँ?
कौन िात में गूाँथ गया िै
ये उज्ज्वल िीिों की करियााँ?
िग
ु नू से िगमग िगमग ये
कौन चमकते िैं यों चमचम?
नभ के नन्िें तािों से ये
कौन दमकते िैं यों दमदम?
लुटा गया िै कौन िौििी
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अपने घि का भिा खिाना?
ा़
पत्तों पि, फूलों पि, पगपग
बबखिे िुए ितन िैं नाना।
बड़े सवेिे मना ििा िै
कौन खुश में यि दीवाली?
वन उपवन में िला दी िै
ककसने दीपावली ननिाली?
ि िोता, इन ओस कणों को
अींिली में भि घि ले आऊाँ?
इनकी शोभा ननिख ननिख कि
इन पि कववता एक बनाऊाँ।
(i) पोस्ट किो को अींिमल में भिकि कवव किाीं लाना चािता िै?
(क) ववदयालय।
(ख) घि।
(ग) बािाि।
(घ) उपवन।
(ii) कवव ककनकी शोभा दे खकि कववता बनाने की बात कि ििा िै?
(क) फूलों की।
(ख) खेतों की।
(ग) ओस कणों की।
(घ) कमलयों की।
(iii) सब
ु ि-सब
ु ि खश
ु में क्या मनाने की बात किी िा ििी िै?
(क) ईद।
(ख) वैशाख ।
(ग) िोली।
(घ) दीपावली।
(iv) पत्तों पि औि फूलों पि पगपग
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कौन बबखिे िुए िैं
(क) ओस।
(ख) पान ।
(ग) ितन।
(घ) मर्ु।
(v) मोत कक लडड़याीं ककस ने किाीं बबखेि दी िैं?
(क) पौर्ों पि।
(ख) फूलों पि।
(ग) सूख घास पि।
(घ) ििी घास पि।
खींड-ख
. (व्याविारिक व्याकिण) अींक-16
3. ननदे शानुसाि ककन्िीीं चाि प्रश्नों के उत्ति मलखखए- 1x4=4
(i) "अपमान" शब्द में उपसगा िै-
(क) अप।
(ख) अ।
(ग) अपम।
(घ) अपमा।
(ii) "अधर्" उपसगा वाला शब्द िै-
(क) अधर्वक्ता।
(ख) अधर्क।
(ग) अर् ि।
(घ) अधर्क।
(iii)"सनसनािट" शब्द में प्रयक्
ु त प्रत्यय िै-
(क) िट।
(ख) सनािट।
(ग) आिट।
(घ) सन।
(iv) "इक" प्रत्यय वाला शब्द िै-
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(क) प्रत्यामशत।
(ख) सामाजिक।
(ग) सम्माननत।
(घ) बाधर्त।
(v) "ननिपिार्" शब्द में मूल शब्द िै-
(क) ननि।
(ख) पिार्।
(ग) िार्।
(घ) अपिार्।
4. ननदे शानुसाि ककन्िीीं चाि प्रश्नों के उत्ति मलखखए- 1x4=4
(i) "र्निीन" शब्द में समास िोगा-
(क) दववगु।
(ख) दवींदव।
(ग) तत्पुरुष।
(घ) कमार्ािय।
(ii) "न लाींबि" समस्त पद का सिी ववग्रि िोगा-
(क) न ला नभ।
(ख) न ला िै िो अींबि।
(ग) न लाकाश।
(घ) न लगगन।
(iii) "दो पििों का समािाि" का समस्त पद िोगा-
(क) दो शिि।
(ख) दो प्रिाि।
(ग) दो पििे ।
(घ) दोपिि।
(iv) "दवींदव समास" का सिी उदाििण िै-
(क) उलटा-स र्ा।
(ख) उलटा।
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(ग) स र्ा।
(घ) समान।
(v) "गि िैसे आनन वाला (गणेश)" यि समास ववग्रि ककस समास का उदाििण िै-
(क) अव्यय भाव।
(ख) दववगु।
(ग) तत्परु
ु ष।
(घ) बिुब्र हि।
5. ननदे शानस
ु ाि ककन्िीीं चाि प्रश्नों के उत्ति मलखखए- 1x4=4
(i) "मनोि ववदयालय निीीं िाता िै" अथा की दृजष्ट से वाक्य िोगा-
(क) ववर्ानवाचक।
(ख) ननषेर्वाचक।
(ग) प्रश्नवाचक।
(घ) आज्ञावाचक।
(ii) "काश! वविाट पत्र मलखता" अथा की दृजष्ट से वाक्य िोगा-
(क) इच्छावाचक।
(ख) सींदेिवाचक।
(ग) ववस्मय वाचक।
(घ) आज्ञावाचक।
(iii) प्रश्नवाचक वाक्य का सिी उदाििण िोगा-
(क) मनोि बािाि गया।
(ख) मनोि बािाि निीीं गया।
(ग) क्या मनोि बािाि गया?
(घ) काश! मनोि बािाि िाता।
(iv) "मैं कल पाका गया था" वाक्य का प्रश्नवाचक वाक्य में सिी रूपाींतिण िोगा-
(क) काश! मैं कल पाका िाता।
(ख) मैं कल पाका निीीं गया था।
(ग) मैं कल पाका क्यों गया था?
(घ) मैं कल पाका िाऊींगा।
(v) आज्ञावाचक वाक्य का सिी उदाििण िोगा -
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(क) आप यिाीं से चले िाइए।
(ख) क्या आप िाना चािते िैं?
(ग) आप क्यों िाना चािते िैं?
(घ) आप किाीं िाना चािते िैं?
6. ननदे शानुसाि ककन्िीीं चाि प्रश्नों के उत्ति मलखखए- 1x4=4
(i) ननम्नमलखखत पींजक्तयों में से अनप्र
ु ास अलींकाि पिचाननए
(क) दे ख लो साकेतदे ख लो साकेत नगिी िै सुबिन को ढूींढत कफित, कवव व्यमभचािी चोि।
(ग चमचम चपला चमकी।
(घ) आए मिींत वसींत।
(ii) उत्प्रेक्षा अलींकाि का सिी उदाििण िै-
(क) पािुन ज्यों आए िो गाींव में शिि के।,
(ख) दे ख लो साकेत नगिी िै यिाीं।
(ग) सत्य स ल दृि ध्विा पताका।
(घ) मन का मनका फेि।
(iii) ननम्नमलखखत मैं रूपक अलींकाि िोगा-
(क) फूलों के आस पास ििते िैं।
कफि भ काींटे उदास ििते िैं।
(ख) प पि पात सरिस मन डोला।
(ग) मैया मैं तो चींद्र खखलौना लैिों।
(घ) मेघ आए बड़े बनिन के सींवि के।
(iv) यमक अलींकाि का सिी उदाििण िै-
(क) कुहटल, कुचाल, कुकमा छोड़ दें ।
(ख) नाथ सकल सुख साथ तुम्िािे ।
(ग) बिसत बारिद बद
ींू ।
(घ) त न बेि खात थ वे त न बेि खात िै।
(v) ििाीं एक शब्द के एक से अधर्क अथा ननकले विाीं कौन सा अलींकाि िोगा-
(क) यमक।
(ख) श्लेष।
(ग) उपमा।
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(घ) अनप्र
ु ास।
खींड – ग
(पाठ्य पस्
ु तक) अींक-14
7. ननम्नमलखखत गदयाींश को पिकि पछ
ू े गए प्रश्नों के उत्ति सिी ववकल्प चुनकि
मलखखए- 1x5=5
झिू ी प्रात:काल सोकि उिा, तो दे खा दोनों बैल चिन पि खड़े िैं। दोनों की गिदनों में आर्ा-आर्ा गाँिाव
लटक ििा िै। घट
ु ने तक पााँव कीचड़ में सने िैं औि दोनों की आाँखों में ववद्रोिमय स्नेि झलक ििा िै। झूिी
बैलों को दे खकि स्नेि से गदगद िो गया।दौड़कि उन्िें गले लगा मलया। प्रेमामलींगन औि चब
ींु न का वि दृश्य
बड़ा िी मनोिि था। घि औि गााँव के लड़के िमा िो गए औि तामलयााँ बिा- बिाकि उनका स्वागत किने
लगे। गााँव के इनतिास में यि घटना अभूतपूवा न िोने पि भ मित्त्वपूणा थ । बाल-सभा ने ननश्चय ककया,
दोनों पशु व िों को अमभनींदन पत्र देना चाहिए। कोई अपने घि से िोहटयााँ लाया, कोई गुड, कोई चोकि कोई
भूस । दोनों ममत्रों का ि वन में पिली बाि ऐसा साबबका पड़ा कक सािा हदन ब त िाने पि भ उन्िें खाने के
मलए एक नतनका भ न ममला था। उन्िें समझ िी निीीं आता था कक यि कैसा स्वाम िै, इससे तो गया िी
अच्छा था। कम से कम रूखा-सूखा तो दे ता िी था। यिााँ कई भैसें थ ीं, कई बकरियााँ, कई घोड़े, कई गर्े पि
ककस के सामने चािा न था। सभ िम न पि मद
ु ों की तिि पड़े थे।इनमें कई तो इतने कमिोि िो थे कक खड़े
भ निीीं िो सकते थे। सािा हदन दोनों ममत्र फाटक पि टकटकी लगाए ताकते ििे पि कोई चािा लेकि निीीं
आया। थक-िाि कि दोनों ने दीवाि की नमकीन ममट्टी चाटन शुरू की। पि इससे उन्िें क्या तजृ ्त ममलत ।
(i) गाींव के लड़के वालों का स्वागत ककस तिि कि ििे थे?
(क) उछल कूद कि।
(ख) झूम झूम कि।
(ग) नाच गाकि।
(घ) तामलयाीं बिा बिाकि।
(ii) सािा हदन फाटक पि टकटकी लगाए कौन दे खते ििे ?
(क) दोनों ममत्र।
(ख) दोनों भाई।
(ग) गया।
(घ) झूिी।
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(iii) थक-िािकि दोनों ने ककस की नमकीन ममट्टी चटन शरू
ु कि दी?
(क) छत की।
(ख) आींगन की।
(ग) दीवाि की।
(घ) दिवािे की।
(iv) झिू ी ने प्रातः काल दोनों बैलों को किाीं खड़े दे खा?
(क) तालाब पि।
(ख) बाग में।
(ग) चिन पि।
(घ) खेत पि।
(v) बैलों को दे खकि झूिी की क्या दशा िुई?
(क) वि स्नेि से गदगद िोगया।
(ख) वि गुस्से से लाल िो गया।
(ग) वि पिे शान िो गया।
(घ) वि नािाज़। िो गया।
8. ननम्नमलखखत प्रश्नों के उत्ति सिी ववकल्प चुनकि मलखखए- 1x2=2
(i) ल्िासा की ओि पाि में सवोच्च स्थान पि क्या था?
(क) डााँडे के दे वता का स्थान था।
(ख) च न ककला।
(ग) पिाड़।
(घ) सुनसान िगि।
(ii) ल्िासा की ओि पाि में लेखक के घोड़े की क्या दशा थ ?
(क) बिुत र् िे -र् िे चल ििा था।
(ख) तेि तेि चल ििा था।
(ग) भाग ििा था।
(घ) बैि गया था।
9. ननम्नमलखखत पदयाींश को पिकि पूछे गए प्रश्नों के उत्ति सिी ववकल्प चुनकि मलखखए - 1x5=5
मानसिोवि सुभि िल।
िींसा केमल किाहिीं ।
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मक
ु ताफल मक
ु ता चग
ु ैं,
अब उडड़ अनत न िाहिीं।।
प्रेम ढूींढत मैं कफिौं,
प्रेम ममले न कोइ ।
प्रेम कौं प्रेम ममलै,
सब ववष अमत
ृ िोइ।।
काबा कफि काश भया,
िामहि भए ििीम।
मोट चन
ू मैदा भया ,
बैहि कब िा ि म।।
ऊॅंचे कुल का िनममया,
िे किन ऊॅंच न िोइ।
सब
ु िन कलश सिु ा भिा ,
सार्ू ननींदा सोई।।
(i) मनुष्य कब मिान किलाता िै? (क) िब वि ऊींचे कुल में िन्म लेता िै ।
(ख) िब उसके माीं बाप र्न िोते िैं। (ग) िब वि अपने र्मा सम्प्रदाय को बिावा दे ता िै।
(घ) िब उसके काम ऊींचे िोते िैं।
(ii) कब ि दास ि ने सार्ु ननींदा को ककसके समान बताया िै?
(क) स्वणा कलश में सिु ा के समान।
(ख) स्वणा कलश में िल के समान।
(ग) स्वणा कलश में अमत
ृ के समान।
(घ) स्वणा कलश में ववष के समान।
(iii) कब ि दास ि काबा को ककसके समान बता ििे िैं?
(क) प्रयाग।
(ख) गया।
(ग) काश ।
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(घ) सािनाथ।
(iv) कब ि दास ि ककस को ढूींढते िुए कफि ििे िैं?
(क) शत्रु।
(ख) साथ ।
(ग) दोस्त।
(घ) प्रेम ।
(v) िींस किाीं के िल में ककलोल कि ििे िैं?
(क) गींगा।
(ख) यमन
ु ा।
(ग) मानसिोवि।
(घ) सियू।
10. ननम्नमलखखत प्रश्नों के उत्ति सिी ववकल्प चन
ु कि मलखखये 1x2=2
(i) वाख कववता में कच्चे र्ागे की िस्स की तुलना ककससे की गई िै?
(क) घोडे की िस्स से।
(ख) साींसो से।
(ग) कुएीं की िस्स से।
(घ) ि वन से।
(ii) वाख कववता में नाव ककसे माना गया िै?
(क) पान के ििाि को।
(ख) पान के ककस ि व को।
(ग) ि वन को।
(घ) शिीि को।