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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
क ा 3 · हद
एनसीईआरट समाधान
अ
अध्याय 18: हम अनेक
कतु एक
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
147 – 153 10 27 हन्द
हर प्रश्न चरण-दर-चरण परी ा के अनुरूप
ग त व धयाँ, पाठ के प्रश्न और सभी केवल उत्तर नह , पूरी हल- व ध के अंक-योजना को ध्यान म रखकर लखे
अभ्यास। साथ। गए।
Solutions, notes, sample papers & more at 17 pages
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कक्षा 3 हद अध्याय 18 हम अनेक कतु एक AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 3 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 18: हम अनेक कतु एक
हम अनेक कतु एक इकाई पाँच ‘हमारा दे श’ का पाठ है और वीणा का अं तम पाठ भी। यह ा रका प्रसाद माहेश्वरी क क वता है। क वता कहती है
क भारत म प्रदे श कई ह, बो लयाँ हजार ह और राग अनेक ह, फर भी दे श एक है। पाठ के आगे छह ब े अपने प्रदे श, भाषा और खाने के बारे म
बताते ह। पाठ के बाद पृष्ठ 154 पर ‘ हद दे श के नवासी’ गीत केवल पढ़ने और मलकर गाने के लए दया गया है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 3) 147 – 153
खं ड प्रश्न
10 27
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 148
क वता पढ़ने के बाद कक्षा म बातचीत के लए दए गए चार प्रश्न
बातचीत के लए
प्र.1 आप कस दे श म रहते ह? आपका प्रदे श कौन-सा है?
नमूना उत्तर: म भारत दे श म रहता ँ। मेरा प्रदे श महाराष्ट्र है।
दे श का नाम सबका एक ही होगा — भारत। प्रदे श का नाम आप अपना ल खए।
ऐसा क्य : क वता कहती है — “ह कई प्रदे श के, कतु एक दे श के,”।
प्र.2 आपके घर म कौन-सी भाषा बोली जाती है?
नमूना उत्तर: मेरे घर म हद बोली जाती है। दाद कभी-कभी अपनी बोली म भी बात करती ह।
आप अपने घर क भाषा ल खए। दो भाषाएँ बोली जाती ह , तो दोन ल खए।
संकेत: पाठ म पूवा मराठ बोलती है और वकट त मल (पृष्ठ 151)।
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कक्षा 3 हद अध्याय 18 हम अनेक कतु एक AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 आपके घर के आस-पास के लोग कौन-सी भाषा बोलते ह?
नमूना उत्तर: मेरे आस-पास ज़्यादातर लोग हद बोलते ह। कुछ लोग मराठ भी बोलते ह।
दुकान पर, मैदान म और स्कूल म जो भाषाएँ सुनाई दे ती ह, उनके नाम ल खए।
प्र.4 सभी प्रदे श अलग ह, ले कन सबका दे श एक है। आपके मत्र क टोली म कौन-कौन ह?
नमूना उत्तर: मेरी टोली म रीना, अमन, सलमा, जॉन और पूजा ह। सबक भाषा और पसंद अलग है। फर भी हम सब मलकर
खेलते ह।
आप अपने मत्र के नाम ल खए।
सो चए और ल खए — पृष्ठ 148
क वता को समझकर उत्तर दे ने वाले तीन प्रश्न
सो चए और ल खए
प्र.1 ‘हम अनेक ह कतु एक ह’, उदाहरण दे कर इस बात को समझाइए।
हम बहुत सारे और अलग-अलग ह, फर भी हम सब भारतीय ह। जैसे—
अथोइबी म णपुर म रहती है, वकट त मलनाडु म। प्रदे श अलग ह, दे श एक है।
पूवा मराठ बोलती है, वकट त मल। भाषा अलग है, पर दोन भारतीय ह।
प्र.2 क वता म भारत के व वध रूप-रंग के बारे म बताया गया है। व वध रूप-रंग का क्या अथ है?
‘ व वध रूप-रंग’ का अथ है — कई तरह के रूप और कई तरह के रंग।
भारत म लोग का पहनावा, खाना, भाषा और नृत्य कई तरह के ह। ये सब भारत के ही अंग ह।
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प्र.3 ‘चल रहे मला कदम’ इस पं क्त म कनके कदम मलाकर चलने क बात कही गई है?
हम सब भारतीय के कदम मलाकर चलने क बात कही गई है।
इससे पहले क पं क्त है — “एक भारतीय हम”। हम सब मलकर एक ही लक्ष्य क ओर चलते ह।
शब्द का खेल — पृष्ठ 148
प्रश्न 1 और 2 — समान ध्व न वाले शब्द छाँटना और अपने मन से लखना
शब्द का खे ल
प्र.1 क वता से समान ध्व न वाले शब्द छाँटकर ल खए—
क वता का शब्द समान ध्व न वाला शब्द समान ध्व न वाला शब्द
प्रदे श …………………… ……………………
हम …………………… ……………………
रंग …………………… ……………………
बो लयाँ …………………… ……………………
पृष्ठ 148 का प्रश्न 1। हर शब्द के आगे दो खाली जगह द गई ह।
क वता से मलने वाले शब्द: प्रदे श — दे श, वेश; हम — कदम; रंग — अंग; बो लयाँ — टो लयाँ।
क वता का शब्द समान ध्व न वाला शब्द समान ध्व न वाला शब्द
प्रदे श देश वेश
हम कदम दम (अपने मन से)
रंग अंग संग (अपने मन से)
बो लयाँ टोिलयाँ झोिलयाँ (अपने मन से)
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कक्षा 3 हद अध्याय 18 हम अनेक कतु एक
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भरी हुई ता लका। नारंगी शब्द आपको लखने थे।
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g अपने मन से ल खए।
m .c म ‘हम’, ‘रंग’ और ‘बो लयाँ’ के साथ एक-एक शब्द ही मलता है। दूसराaशब्द
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संकेत: क वता
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प्र.2 समान ध्व न वाले कुछ शब्द अपने मन से ल खए—
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शब्द 1
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बोली ………………… ………………… ………………… …………………
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a g राग ………………… ………………… ………………… …………………
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पृष्ठ 148 का प्रश्न 2। हर शब्द के आगे चार खाली जगह द गई ह।
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नमूना उत्तर:
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बोली टोली गोली झोली होली
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एक अनेक नेक टे क केक
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राग आग बाग नाग भाग
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भरी हुई ता लका। ये केवल नमूना शब्द ह — आप अपने मन से दूसरे शब्द भी लख सकते ह।
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g चा हए।
.cसंकेत: आपके शब्द इनसे अलग हो सकते ह। बस शब्द के अंत क ध्व न aमलनी
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शब्द का खेल — पृष्ठ 149
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प्रश्न 3 — भू म शब्द जोड़कर नए शब्द बनाइए—
शब्द का खे ल
प्र.1 भू म शब्द जोड़कर नए शब्द बनाइए—
रण
भूिम िपत ृ
मात ृ
पृष्ठ 149 का शब्द-फूल। बीच म ‘भू म’ है। तीन पंखु ड़य म शब्द छपे ह (रण, पतृ, मातृ) और दो खाली ह। दाईं ओर पाँच खाली
रेखाएँ ह।
रण + भू म = रणभू म (लड़ाई का मैदान)
पतृ + भू म = पतृभू म (पुरख क भू म)
मातृ + भू म = मातृभू म (अपनी माँ जैसी भू म)
खाली पंखु ड़य म जन्म और कम ल खए — जन्मभू म, कमभू म।
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रणभूिम
रण
जन्म ृ िू म
िपतभ
ृ िू म
मातभ
भूिम िपत ृ
जन्मभूिम
कम
कमभूिम
मात ृ
भरा हुआ शब्द-फूल। नारंगी शब्द आपको लखने थे।
सम झए और ल खए — पृष्ठ 149
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प्रश्न 1 — क वता क पं क्तयाँ पूरी क जए— (पुस्तक म तीन बक्से दए गए ह)
सम झए और ल खए
प्र.1 पहला बक्सा — क वता क पं क्तयाँ पूरी क जए—
है ं कई पदेश के,
,
िविवध रूप-रंग है,ं
,
,
हम अनेक िकंतु एक।
पृष्ठ 149 का पहला बक्सा। छपी हुई पं क्तय के बीच क जगह भरनी है।
खाली जगह म मोट पं क्तयाँ ल खए—
ह कई प्रदे श के,
कतु एक दे श के,
व वध रूप-रंग ह,
भारत के अंग ह।
भारतीय वेश एक
हम अनेक कतु एक।
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प्र.2 दूसरा बक्सा — क वता क पं क्तयाँ पूरी क जए—
बोिलयाँ हजार है,ं
,
,
ं
राग भी अनेक है।
,
हम अनेक िकंतु एक।
पृष्ठ 149 का दूसरा बक्सा। छपी हुई पं क्तय के बीच क जगह भरनी है।
खाली जगह म मोट पं क्तयाँ ल खए—
बो लयाँ हजार ह,
टो लयाँ हजार ह,
कंठ भी अनेक ह,
राग भी अनेक ह,
कतु गीत-बोल एक
हम अनेक कतु एक।
पुस्तक के बारे म: बक्से म ‘राग भी अनेक ह’ के बाद ‘।’ छपा है, पर क वता (पृष्ठ 147) म वहाँ ‘,’ है।
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तीसरा बक्सा — क वता क पं क्तयाँ पूरी क जए—
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प्र.3
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ृ िू म है,
एक मातभ
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m चल रहे िमला कदम,
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लक्ष्य के समक्ष एक
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पृष्ठ 149 का तीसरा बक्सा। छपी हुई पं क्तय के बीच क जगह भरनी है।
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agl उत्तर
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खाली जगह म मोट पं क्तयाँ ल खए—
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एक मातृभू म है,
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एक पतृभू म है,
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एक भारतीय हम
चल रहे मला कदम,
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लक्ष्य के समक्ष एक
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हम अनेक कतु एक।
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agl सम झए और ल खए — पृष्ठ 150
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प्रश्न 2 — सही अथ क जोड़ी बनाकर ल खए—
सम झए और ल खए
प्र.1 सही अथ क जोड़ी बनाकर ल खए—
शब्द दए गए अथ सही जोड़ी
कंठ वेश-भूषा ……………………………
पहनावा सामने ……………………………
व वध गला ……………………………
समक्ष कई प्रकार के ……………………………
पृष्ठ 150 का प्रश्न 2। बाईं ओर शब्द ह, बीच म अथ ह पर क्रम आगे-पीछे है।
कंठ — गला, पहनावा — वेश-भूषा, व वध — कई प्रकार के, समक्ष — सामने।
शब्द दए गए अथ सही जोड़ी
कंठ वेश-भूषा कंठ — गला
पहनावा सामने पहनावा — वेश-भूषा
व वध गला िविवध — कई पकार के
समक्ष कई प्रकार के समक्ष — सामने
भरी हुई ता लका। नारंगी खाने आपको भरने थे।
सम झए और ल खए — पृष्ठ 150
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प्रश्न 3 — सही अथ वाले वाक्य पर सही ( ) का चह्न लगाइए—
सम झए और ल खए
प्र.1 (क) ‘भारतीय वेश एक’ का अथ है —
(क) ‘भारतीय वेश एक’ का अथ है — ✓
सही ( )
सभी भारतीय का एक ही पहनावा है।
भारत म अनेक प्रकार क वेश-भूषा है, ले कन सभी भारतीय एक ह।
पृष्ठ 150 का प्रश्न 3 (क)। दोन वाक्य के आगे एक-एक खाली खाना बना है।
✓
सही ( ) दूसरा वाक्य है — “भारत म अनेक प्रकार क वेश-भूषा है, ले कन सभी भारतीय एक ह।”
(क) ‘भारतीय वेश एक’ का अथ है — ✓
सही ( )
सभी भारतीय का एक ही पहनावा है। —
भारत म अनेक प्रकार क वेश-भूषा है, ले कन सभी भारतीय एक ह। ✓
भरा हुआ खाना। दूसरे वाक्य पर सही का चह्न लगेगा।
ऐसा क्य : पाठ के चत्र म हर ब े का पहनावा अलग है (पृष्ठ 151–152)। इस लए पहला वाक्य ठ क नह है।
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प्र.2 (ख) ‘बो लयाँ हजार ह’ म हजार का अथ है —
(ख) ‘बो लयाँ हजार ह’ म हजार का अथ है — ✓
सही ( )
बहुत सारी बो लयाँ ह।
हजार बो लयाँ ह।
पृष्ठ 150 का प्रश्न 3 (ख)। दोन वाक्य के आगे एक-एक खाली खाना बना है।
✓
सही ( ) पहला वाक्य है — “बहुत सारी बो लयाँ ह।”
(ख) ‘बो लयाँ हजार ह’ म हजार का अथ है — सही ( ) ✓
बहुत सारी बो लयाँ ह। ✓
हजार बो लयाँ ह। —
भरा हुआ खाना। पहले वाक्य पर सही का चह्न लगेगा।
ऐसा क्य : यहाँ ‘हजार’ गनती नह है। इसका अथ है — बहुत सारी। जैसे ‘माँ ने हजार बार समझाया’ म हजार का
अथ है बहुत बार।
चत्र आधा रत प्रश्न — पृष्ठ 152
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‘प ढ़ए और जा नए’ (पृष्ठ 151–152) के ब के बुलबुले पढ़कर उत्तर दे ने वाले चार प्रश्न
चत्र आधा रत प्रश्न
प्र.1 म णपुर क अथोइबी को खाने म क्या पसंद है?
मेरा नाम अथोइबी है। मै ं मिणपुर मे ं रहती हू।
ँ
मुझे खाने मे ं एरोम्बा बहुत पसंद है।
पृष्ठ 151 — अथोइबी का बुलबुला। चत्र म उसके पास केले के पत्ते पर चावल और कई तरह का भोजन रखा है।
अथोइबी को खाने म एरोम्बा बहुत पसंद है।
वह म णपुर म रहती है। चत्र म वह केले के पत्ते पर रखा भोजन दखा रही है।
प्र.2 महाराष्ट्र क पूवा कौन-सी भाषा बोलती है?
मेरा नाम पूव है। मै ं महारा की रहने वाली हू।
ँ
मै ं मराठी भाषा बोलती हू।
ँ खाने मे ं मुझे पूरणपोली पसंद है।
पृष्ठ 151 — पूवा का बुलबुला। चत्र म वह लाल साड़ी पहने है और थाली म पूरणपोली रखी है।
पूवा मराठ भाषा बोलती है।
वह महाराष्ट्र क रहने वाली है। खाने म उसे पूरणपोली पसंद है।
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त मलनाडु के वकट को खाने म क्या पसंद है?
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a g ं ट है। मै ं तिमलनाडु का रहने वाला हू।
मेरा नाम वेक
मै ं तिमल भाषा बोलता हू।
ँ
ँ खाने मे ं मुझे इडली सांभर पसंद है।
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m पहने है और केले के पत्ते पर इडली और कटोरी म सांभर रखा है। ag
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पृष्ठ 151 — वकट का बुलबुला। चत्र म वह धोती
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omरहने वाला है और त मल भाषा बोलता है। l
वकट को खाने म इडली सांभर पसंद है।
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वह त मलनाडु
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प्र.4 गुजरात क हंसा को कौन-सा नृत्य पसंद है?
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नाम मेरा हंसा है। मै ं गुजरात की रहने वाली हू।
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मुझे गरबा-डांिडया नृत्य बहुत पसंद है।
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मुझे खाने मे ं ढोकला-खांडवी पंसद है।
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पृष्ठ 152 — हंसा का बुलबुला। चत्र म वह लहंगा-चोली पहने है और थाली म ढोकला-खांडवी रखा है।
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हंसा को गरबा-डां डया नृत्य बहुत पसंद है।
चत्र म उसके हाथ म डां डया क छ ड़याँ ह।
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पुस्तक के बारे म: पृष्ठ 152 पर हंसा और यास्मीन के बुलबुल म ‘पसंद’ क जगह ‘पंसद’ छपा है। सही शब्द
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‘पसंद’ है।
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पता क जए — पृष्ठ 153
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पाठ के अंत म दया गया खोजबीन का काम
पता क जए
प्र.1 आप अपने प्रदे श के आस-पास के तीन-चार प्रदे श क भाषा, खान-पान, वेश-भूषा, तीज-त्योहार के बारे म पता
क जए और सा थय के साथ चचा क जए।
नमूना उत्तर: म महाराष्ट्र म रहता ँ। मेरे पास के तीन प्रदे श के बारे म मने यह पता कया—
प्रदे श भाषा खान-पान वेश-भूषा तीज-त्योहार
गुजरात गुजराती ढोकला, खांडवी च नया-चोली, धोती नवरा त्र (गरबा), उत्तरायण
कनाटक कन्नड़ इडली, बसी बेले भात साड़ी, धोती दशहरा, उगा द
मध्य प्रदे श हद पोहा, दाल-बाफला साड़ी, धोती-कुता द वाली, होली
यह केवल नमूना है। आप अपने प्रदे श के पास वाले प्रदे श चु नए।
− वस्तार से सम झए
माता- पता और शक्षक के लए: ब ा न े म अपना प्रदे श और उसके पास के तीन-चार प्रदे श ढूँ ढ़े। हर प्रदे श के लए
चार बात पूछे — भाषा, खाना, पहनावा और त्योहार। घर के बड़ , पड़ो सय या दूसरे प्रदे श के सा थय से पूछकर छोट
ता लका बनाए और कक्षा म सुनाए। जो बात पक्क न मालूम हो, उसे न लखे।
इस काम से क वता क बात समझ आती है — “ व वध रूप-रंग ह, भारत के अंग ह।”
हद दे श के नवासी — पृष्ठ 154
यह तारां कत पाठ केवल पढ़ने के लए है; पुस्तक इसके साथ कोई अभ्यास नह दे ती। ये प्रश्न अभ्यास के लए जोड़े गए ह।
पढ़ने के लए
प्र.1 गीत के अनुसार हद दे श के नवासी कैसे ह?
हद दे श के सभी नवासी एक ह।
उनके रंग, रूप, वेश और भाषा चाहे अनेक ह, फर भी सब जन एक ह।
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प्र.2 गीत म कन- कन फूल के नाम आए ह? वे माला म कैसे एक हो जाते ह?
बेला, गुलाब, जूही, चंपा और चमेली।
ये अलग-अलग फूल एक माला म गूँथे जाते ह, तो एक हो जाते ह। वैसे ही हम अलग होकर भी एक ह।
प्र.3 गीत म कौन-कौन से पक्षी आए ह? वे क्या करते ह?
कोयल, पपीहा और बुलबुल।
कोयल कूकती है, पपीहा टे र लगाता है और बुलबुल तराना गाती है। आवाज़ अलग ह, पर “राग मगर एक है।”
प्र.4 गीत म कौन-कौन सी न दय के नाम आए ह? सागर म मलकर उनका क्या होता है?
गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, कृष्णा और कावेरी।
ये सब सागर म जाकर मलती ह और एक हो जाती ह। वैसे ही सब लोग मलकर एक दे श बनाते ह।
प्र.5 ‘रंग, रूप, वेश, भाषा चाहे अनेक ह।’ — इस पं क्त का अथ सरल शब्द म ल खए।
हमारे रंग, रूप, पहनावा और भाषा भले ही कई तरह के ह ।
‘वेश’ का अथ है पहनावा और ‘अनेक’ का अथ है बहुत सारे। इससे पहले क पं क्त बताती है क फर भी “सभी जन एक ह”।
प्र.6 इस गीत और पाठ 18 क क वता ‘हम अनेक कतु एक’ म क्या समानता है?
दोन कहते ह — हम अनेक ह, फर भी एक ह।
दोन म वेश और भाषा अलग होने क बात है। क वता ‘अंग’ का उदाहरण दे ती है; गीत फूल क ‘माला’, प क्षय के ‘राग’ और
न दय के ‘सागर’ का।
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अध्याय — एक नज़र म
क वता का नाम ‘हम अनेक कतु एक’ है। इसे ा रका प्रसाद माहेश्वरी ने लखा है।
पहला बंद कहता है — प्रदे श कई ह पर दे श एक है। रूप-रंग व वध ह, पर सब भारत के अंग ह।
दूसरा बंद कहता है — बो लयाँ और टो लयाँ हजार ह, कंठ और राग अनेक ह, पर गीत-बोल एक है।
तीसरा बंद कहता है — मातृभू म एक है, पतृभू म एक है। सब मलाकर कदम रखते ह और लक्ष्य एक है।
‘प ढ़ए और जा नए’ म छह ब े अपने प्रदे श, भाषा, खाने और नृत्य के बारे म बताते ह।
‘पता क जए’ म अपने आस-पास के तीन-चार प्रदे श के बारे म पता करके कक्षा म बताना है।
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ म कहाँ आया है पृष्ठ
प्रदे श देश का एक भाग, राज्य “ह कई प्रदे श के,” 147
व वध कई पकार के “ व वध रूप-रंग ह,” 147
वेश पहनावा “भारतीय वेश एक” 147
अनेक बहुत सारे “हम अनेक कतु एक।” 147
बोली बोलने का अपना ढंग “बो लयाँ हजार ह,” 147
टोली सािथयों का समूह “टो लयाँ हजार ह,” 147
कंठ गला “कंठ भी अनेक ह,” 147
राग गाने की धुन “राग भी अनेक ह,” 147
मातृभू म माँ के समान अपनी भूिम “एक मातृभू म है,” 147
कदम डग, पग “चल रहे मला कदम,” 147
समक्ष सामने “लक्ष्य के समक्ष एक” 147
संकेत भाषा इशारों से बात करने की भाषा “म संकेत भाषा म बात करता ँ।” 151
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