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अभ्यास प्रश्नपत्र (2021-22 प्रथम सत्र)
कक्षा 10 ह द
िं ी अ (002)
सामान्य निर्दे श-
• इस प्रश्िपत्र में तीि खंड हैं- खंड-क, खंड-ख और खंड-ग ।
• इस प्रश्िपत्र में कुल र्दस वस्तुपरक प्रश्ि पूछे गए हैं। सभी प्रश्िों में उपप्रश्ि दर्दए गए हैं।
दर्दए गए निर्दे शों का पालि करते हुए प्रश्िों के उत्तर र्दीजिए।
• खंड-क में कुल 20 प्रश्ि पूछे गए हैं, दर्दए गए निर्दे शों का पालि करते हुए केवल 10
प्रश्िों के उत्तर र्दीजिए।
• खंड-ख में कुल 20 प्रश्ि पछ
ू े गए हैं, दर्दए गए निर्दे शों का पालि करते हुए केवल 16
प्रश्िों के उत्तर र्दीजिए।
• खंड-ग में कुल 14 प्रश्ि पछ
ू े गए हैं। सभी प्रश्ि अनिवायय हैं।
• सही उत्तर वाले गोले को भली प्रकार से केवल िीली या काली स्याही वाले बॉल पॉइंट पेि
से ही ओ.एम.आर. शीट में भरें ।
खिंड – क
(अपहित अिंश) अिंक-10
I. िीचे र्दो अपदित गदयांश दर्दए गए हैं। ककसी एक गदयांश को ध्यािपव
ू क
य पदिए और उस पर
आधाररत प्रश्िों के उत्तर सही ववकल्प चि
ु कर ललखखए- 1x5=5
मौसम में बर्दलाव व भीषण बीमाररयों के फैलिे से चचंनतत होकर वैज्ञानिकों िे खोि की तो
उन्होंिे प्रर्दष
ू ण को इसका एकमात्र कारण पायाI यह समस्या ववश्व-व्यापी है I कल-कारखािों, बिते
वाहिों की संख्या, पेड़-पौधों की अंधाधुंध कटाई और ववकास के िाम पर प्रकृनत से छे ड़छाड़ के
कारण प्रर्दष
ू ण की समस्या ववकराल हो गई है I अंतरायष्ट्रीय समुर्दाय प्रर्दष
ू ण को रोकिे के ललए
प्रयासरत है , परन्तु इसका अर्य यह िहीं कक सारे काल-कारखािे बंर्द कर दर्दए िाए, या सभी
वाहिों को रोक दर्दया िाए और हम पुि: पाषाण काल में लौट िाएँ और ववज्ञाि की प्रगनत को
ताक पर रख र्दें I समस्या का हल ववकास को रोकिे में िहीं बजल्क युजततसंगत उपाय खोििे में
है I प्रकृनत से तालमेल बिाकर धरा को हरा-भरा रखें, प्रकृनत के भंडार का समचु चत उपयोग करें
और पयायवरण का संरक्षण करें I पयायवरण हमारा पालिकताय और िीविहार है I पेड़-पौधे और पशु-
पक्षी हमारे सहायक हैंI पाकय, बाग-बगीचे शहर के ह्रर्दय स्वरूप हैंI प्रर्दष
ू ण रोकिे में सभी लोगों
के सहयोग की आवश्यकता है I गंर्दगी ि फैलाएं, िहाँ गंर्दगी हो वहाँ साफ-सफ़ाई करें ,
अचधकाचधक वक्ष
ृ लगाएँ और अिलभज्ञ लोगों को िागरूक करें I हमारे सामदू हक प्रयास से ही
समस्या सल
ु झ सकती है I
प्र. 1 वैज्ञानिकों की चचंता का कारण है –
(क) प्रर्दष
ू ण (ख) मौसम में बर्दलाव (ग) भीषण बीमाररयों का फैलिा (घ) उपरोतत सभी
प्र. 2 प्रर्दष
ू ण के बििे का कारण आप तया मािते हैं?
(क) बिते वाहिों की संख्या (ग) बिते कल-कारखािे
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(ख) पेड़-पौधों की अंधाधुंध कटाई (घ) उपरोतत सभी
प्र. 3 प्रर्दष
ू ण को कम करिे या रोकिे में हम तया सहयोग र्दे सकते हैं?
(क) सभी वाहिों को रोक दर्दया िाए (ग) अचधकाचधक वक्ष
ृ लगाएँ
(ख) सारे काल-कारखािे बंर्द कर दर्दए िाए (घ) ववज्ञाि की प्रगनत को िकार र्दें
प्र. 4 सामदू हक प्रयास का तया आशय है ?
(क) एक समूह का प्रयास (ग) कुछ समूहों का प्रयास
(ख) सभी लोगों का सजममललत प्रयास (घ) इिमे से कोई िहीं
प्र. 5 ‘अिलभज्ञ’ शब्र्द में प्रयत
ु त उपसगय और मल
ू शब्र्द है -
(क) अ + िलभज्ञ (ख) अि + लभज्ञ (ग) अिलभ + ज्ञ (घ) अिा + लभज्ञ
अथवा
सच्चा उत्साह वही होता है िो मिुष्ट्य को कायय करिे की प्रेरणा र्दे ता है I मिुष्ट्य ककसी भी
कारणवश िब ककसी के कष्ट्ट को र्दरू करिे का संकल्प करता है तब जिस सुख को वह अिुभव
करता है वह सुख ववशेष रूप से प्रेरणा र्दे िे वाला होता है । जिस भी कायय को करिे के ललए
मिुष्ट्य में कष्ट्ट, र्दुःु ख या हानि को सहि करिे की ताकत आती है , उि सबसे उत्पन्ि आिंर्द ही
‘उत्साह’ कहलाता है I उर्दाहरण के ललए र्दाि र्दे िे वाला व्यजतत निश्चय ही अपिे भीतर एक
ववशेष साहस रखता है और वह है धि त्याग का साहस I यही त्याग यदर्द मिुष्ट्य प्रसन्िता के
सार् करता है तो उसे उत्साह से ककया गया गया र्दाि कहा िाएगाI उत्साह, आिंर्द और साहस
का लमला-िुला रूप है I उत्साह में ककसी ि ककसी वस्तु पर ध्याि अवश्य केजन्ित होता है I वह चाहे
कमय पर, चाहे कमय के फल पर चाहे व्यजतत या वस्तु पर होI इन्ही के आधार पर कमय करिे में
आिंर्द लमलता है I कमय भाविा से उत्पन्ि आिंर्द का अिुभव केवल सच्चे वीर ही कर सकते हैं
तयोंकक उिमे साहस की अचधकता होती है I सामान्य व्यजतत कायय पूरा हो िािे पर जिस आिंर्द
को अिभ
ु व करता है सच्चा वीर कायय प्रारं भ होिे पर ही उसका अिभ
ु व कर लेता है I ‘आलस्य’
उत्साह का सबसे बड़ा शत्रु है I िो व्यजतत आलस्य से भरा होगा उसमे कायय करिे के प्रनत उत्साह
कभी उत्पन्ि िहीं हो सकताI उत्साही व्यजतत असफल होिे पर भी कायय करता रहता है I उत्साही
व्यजतत सर्दा दृढ-निश्चयी होता है I यही कारण है की एक ववदयार्ी को सर्दै व उत्साही होिा चादहए
तयोंकक उत्साही होिे पर वह अपिे अपेक्षक्षत र्दानयत्व का दृढ-निश्चय से निवयहि करें गे और िब
र्दानयत्व का निवायह करें गे तो सफलता उिके कर्दम चम
ू ेगी और उन्हें आिंर्द की अिभ
ु नू त होगीI
प्र. 6 सच्चा उत्साह होता है –
(क) िो मिुष्ट्य को कायय करिे की प्रेरणा र्दे ता है (ग) िो ककसी कायय का संकल्प लेता है
(ख) िो ककसी का कष्ट्ट को र्दरू करता है (घ) उपरोतत सभी
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प्र. 7 र्दाि र्दे िे वाला व्यजतत अपिे भीतर रखता है -
(क) एक ववशेष आिंर्द (ग) एक ववशेष साहस
(ख) एक ववशेष निश्चय (घ) उपरोतत सभी
प्र. 8 कमय भाविा से उत्पन्ि आिंर्द का अिुभव
(क) सच्चे उत्साही (ग) सच्चे कमयि
(ख) सच्चे वीर (घ) सच्चे अिुभवी
प्र. 9 उत्साह का सबसे बड़ा शत्रु है -
(क) साहस (ग) कमयिता
(ख) आलस्य (घ) वीरता
प्र. 10 एक ववदयार्ी को सर्दै व होिा चादहए -
(क) उत्साही (ख) दृढ-निश्चयी (ग) साहसी (घ) उपरोतत
सभी
II. िीचे र्दो काव्यांश दर्दए गए हैं। ककसी एक काव्यांश को ध्यािपव
ू क
य पदिए और उस पर
आधाररत प्रश्िों के उत्तर सही ववकल्प चि
ु कर ललखखए- 1x5=5
कर िहीं सकते हैं कभी मँह
ु से कहो ि यार,
तयों िहीं कर सकते उसे, सोचो यह एक बार
कर सकते हैं र्दस
ू रे पाँच ििे िो कार,
उसके करिे में भला तुम हो तयों लाचार?
हो, मत हो, पर र्दीजिए कभी ि दहममत हार,
िहीं बिे एक बार तो कीिे सौ-सौ बार
‘कर िहीं सकते’ कह के अपिा मँुह ि फुलाओ
ऐसी हलकी बात कभी िी पर मत लाओI
सस्
ु त नितकमे पड़े रहें आलस के मारे ,
वही लोग ऐसा कहते हैं, समझो प्यारे ,
र्दे खो उिके लच्छि िो ऐसा बकते हैं,
कफर कैसे कहते हो, कुछ िहीं कर सकते हैं I
िो िल में िहीं घस
ु े तैरिा उसको कैसे आवे?
िो चगरिे से दहचके, उसको चलिा कौि लसखावे?
िल में उतर तैरिा सीखो, र्दौड़ो, सीखो चाल
‘निश्चय कर सकते हैं, कहकर सर्दा रहो खुशहालI
प्र. 11 कवव बार-बार तया सोचिे को कहते हैं ?
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(क) तयों िहीं कर सकते ? (ग) मैं तयों करूँ?
(ख) मैं िहीं कर सकता (घ) कोई और करे , मैं तयों?
प्र. 12 कवव तया कहकर मँह
ु िहीं फुलािे को कहते हैं ?
(क) कर सकता हूँ (ग) िहीं कर सकता
(ख) र्ोड़ा ही कर सकता (घ) इिमें से कोई िहीं
प्र. 13 िल में िहीं घुसिे वाले तया िहीं सीख सकते ?
(क) पािी पीिा (ग) पािी साफ करिा
(ख) तैरिा (घ) र्दौड़िा
प्र. 14 “मुझसे िहीं होगा” ऐसी सोच वाले कहलाते हैं -
(क) कंिूस (ग) कमयि
(ख) निकममे (घ) वीर
प्र. 15 खश
ु हाल होिे के ललए तया कहिा चादहए ?
(क) ‘निश्चय कर सकते हैं’ (ख) प्रयास कर सकते हैं (ग) कुछ िहीं कर सकते (घ)
उपरोतत सभी
अथवा
हैं िन्म लेते िगह में एक ही
एक ही पौधा उन्हें है पालता
रात में उिपर चमकता चाँर्द भी
एक ही सी चाँर्दिी है डालता I
मेह उि पर है बरसता एक सा
एक ही उिपर हवाएँ है बही
पर सर्दा ही यह दर्दखाता है हमें
ढं ग उिके एक से होते िहीं
छे र्द कर कांटा ककसी की अंगुललयाँ
फाड़ र्दे ता है ककसी का वर-वसि,
प्यार डूबी नततललयों का पर क़तर
भँवर का है भेर्द र्दे ता श्याम ति,
फूल लेकर नततललयों को गोर्द में
भंवर को अपिा अिूिा रस वपला
निि सुगंधों और निराले ढं ग से
है सर्दा र्दे ती कली का िी खखला
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है खटकता एक सबकी आँख में
र्दस
ू रा है सोहता सरु शीश पर
ककस तरह कुल की बड़ाई काम र्दे
िो ककसी में हो बड़प्पि की कसर I
प्र. 16 कांटा ककसका प्रतीक है ?
(क) साधु (ग) र्दि
ु ि
य
(ख) सज्िि (घ) इिमें से कोई िहीं
प्र. 17 फूल ककसका प्रतीक है ?
(क) सज्िि (ग) र्दयालु
(ख) र्दि
ु ि
य (घ) इिमें से कोई िहीं
प्र. 18 भंवर को अपिा अिूिा रस कौि वपलाता है ?
(क) फूल (ग) कांटा
(ख) पेड़ (घ) टहिी
प्र. 19 नततललयों का पर कौि कतरता है ?
(क) मकड़ी (ग) फूल
(ख) कांटा (घ) नछपकली
प्र. 20 इस काव्यांश का उपयुतत शीषयक चुनिए -
(क) फूल और टहिी (ख) फूल और पत्ते (ग) फूल और टहिी (घ) फूल और कांटे
खिंड-ख
(व्याव ारिक व्याकिण) अिंक-16
III. निर्दे शािस
ु ार ककन्हीं चार प्रश्िों के उत्तर ललखखए- 1x4=4
प्र. 21 ‘र्दयाहीि व्यजतत पशुओं से भी बर्दतर है ।’, रचिा के आधार पर वातय भेर्द है –
क. सरल वातय
ख. संयत
ु त वातय
ग. लमश्र वातय
घ. साधारण वातय
प्र. 22 ‘यदर्द अकाल पड़ेगा तो िि-धि की हानि होगी।‘, रचिा के आधार पर वातय भेर्द है –
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क. सरल वातय
ख. संयुतत वातय
ग. लमश्र वातय
घ. साधारण वातय
प्र. 23 ‘चाँर्द आया और चाँर्दिी छा गई।‘ रचिा के आधार पर वातय भेर्द है –
क. सरल वातय
ख. संयुतत वातय
ग. लमश्र वातय
घ. आश्चयय बोधक वातय
प्र. 24 ‘चोर िे अपिे बचाव का कोई उपाय िहीं र्दे खा।‘, वातय का लमश्र वातय रूपांतरण होगा -
क. चोर िे अपिे बचाव का कोई उपाय िहीं र्दे खा।
ख. चोर िे र्दे खा कक उसके बचाव का कोई उपाय िहीं है ।
ग. चोर िे उसके बचाव का कोई उपाय िहीं र्दे खा।
घ. चोर िे र्दे खा कक अब उसके बचाव का कोई उपाय िहीं है ।
प्र. 25 ‘वह हमारा लमत्र है िो भाषण कर रहा है ।‘, रे खांककत उपवातय का भेर्द ललखखए-
क. संज्ञा उपवातय
ख. ववशेषण उपवातय
ग. किया ववशेषण उपवातय
घ. सामालसक उपवातय
IV. निर्दे शािस
ु ार ककन्हीं चार प्रश्िों के उत्तर ललखखए- 1x4=4
प्र. 26 ‘भगवाि महावीर िे अदहंसा पर िोर दर्दया।‘, इस वातय का वाच्य ललखखए-
क. कमय वाच्य
ख. भाव वाच्य
ग. कतय ृ वाच्य
घ. करण वाच्य
प्र. 27 ‘मुझसे र्दौड़ा िहीं िाता।‘, इस वातय का वाच्य ललखखए-
क. कमय वाच्य
ख. भाव वाच्य
ग. कतय ृ वाच्य
घ. करण वाच्य
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प्र. 28 ‘लशक्षक दवारा पिाया िा रहा है ।‘, इस वातय का वाच्य ललखखए-
क. कमय वाच्य
ख. भाव वाच्य
ग. कतय ृ वाच्य
घ. करण वाच्य
प्र. 29 ‘वे यह दृश्य िहीं र्दे ख सकते।‘, इस वातय को कमय वाच्य में बर्दलकर ललखखए-
क. यह दृश्य वे िहीं र्दे ख सकते।
ख. यह दृश्य उिसे र्दे खा िहीं िाएगा।
ग. वे यह दृश्य िहीं र्दे ख सकते।
घ. उिसे यह दृश्य र्दे खा िहीं िाता।
प्र. 30 ‘रोगी से रात भर सोया िहीं गया।‘, इस वातय को कतय ृ वाच्य में बर्दलकर ललखखए-
क. रोगी रात भर सो िहीं सका
ख. रात भर रोगी से सोया िहीं िाएगा
ग. रोगी से रात भर सोया िहीं गया
घ. रोगी दवारा रात भर सोया िहीं िा सकेगा
V. निर्दे शािस
ु ार ककन्हीं चार प्रश्िों के उत्तर ललखखए- 1x4=4
प्र. 31 ‘श्याम ववदयालय िा रहा है ।‘, वातय में रे खांककत पर्द का पररचय है –
क. संज्ञा, व्यजततवाचक, एकवचि, पजु ल्लंग, कताय कारक
ख. संज्ञा, िानतवाचक, एकवचि, पजु ल्लंग, कताय कारक
ग. संज्ञा, व्यजततवाचक, एकवचि पुजल्लंग, कमय कारक
घ. संज्ञा, व्यजततवाचक, एकवचि, पुजल्लंग, कताय कारक
प्र. 32 ‘हमलोग पिाई कर रहे र्े।‘, वातय में रे खांककत पर्द का पररचय है –
क. सवयिाम, अन्य पुरुष, परु
ु षवाचक, बहुवचि, पजु ल्लंग, कताय कारक
ख. संज्ञा, अन्य पुरुष, िानतवाचक, बहुवचि, पजु ल्लंग, कताय कारक
ग. सवयिाम, गुणवाचक, मध्यम पुरुष, बहुवचि पजु ल्लंग, कमय कारक
घ. सवयिाम, पुरुषवाचक, उत्तम पुरुष बहुवचि, पजु ल्लंग, कताय कारक
प्र. 33 ‘बच्चे किकेट खेल रहे हैं।‘, वातय में रे खांककत पर्द का पररचय है –
क. किया, अकमयक, एकवचि, पुजल्लंग, वतयमाि काल
ख. किया, सकमयक, बहुवचि, पुजल्लंग, वतयमाि काल
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ग. किया, सकमयक, एकवचि पुजल्लंग, भत
ू काल
घ. किया, अकमयक, बहुवचि, पुजल्लंग, भत
ू काल
प्र. 34 ‘मैं गें र्द से खेलता हूँ।‘, वातय में रे खांककत पर्द का पररचय है –
क. संज्ञा, िानतवाचक, एकवचि, पजु ल्लंग, कमय कारक
ख. संज्ञा, िानतवाचक, एकवचि, पजु ल्लंग, समप्रर्दाि कारक
ग. संज्ञा, िानतवाचक, एकवचि स्त्रीललंग, करण कारक
घ. संज्ञा, व्यजततवाचक, एकवचि, पुजल्लंग, कताय कारक
प्र. 35 ‘वाणी की लमिास प्रसंशिीय है ।‘, वातय में रे खांककत पर्द का पररचय है –
क. ववशेषण, गण
ु वाचक, एकवचि, पुजल्लंग
ख. संज्ञा, भाववाचक, एकवचि, पजु ल्लंग
ग. ववशेषण, संख्यावाचक, एकवचि स्त्रीललंग
घ. सवयिाम, पुरुषवाचक, एकवचि, पजु ल्लंग
VI. निर्दे शािस
ु ार ककन्हीं चार प्रश्िों के उत्तर ललखखए- 1x4=4
प्र. 36 ‘शोक’ ककस रस का स्र्ायी भाव है ?
क. करुण रस
ख. हास्य रस
ग. वीर रस,
घ. रौि रस
प्र. 37 ‘शांत रस’ का स्र्ायी भाव है –
क. निवेर्द
ख. घण
ृ ा
ग. िोध
घ. भय
प्र. 38 ‘रसराि’ कहा िाता है –
क. करुण रस को
ख. श्रंग
ृ ार रस को
ग. वीर रस को
घ. हास्य रस को
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प्र. 39 ‘हा! हा! भारत र्दर्द
ु य शा र्दे खख ि िाई’ – में रस है –
क. करुण रस
ख. हास्य रस
ग. श्रंग
ृ ार रस
घ. वात्सल्य रस
प्र. 40 ‘रे िप
ृ बालक! कालबस, बोलत तोदहं ि सँभार’, में प्रयुतत रस है –
क. रौि रस
ख. हास्य रस
ग. वात्सल्य रस
घ. वीभत्स रस
खिंड – ग
(पाठ्य पुस्तक) अिंक-14
VII. निमिललखखत गदयांश को पिकर पूछे गए प्रश्िों के उत्तर सही ववकल्प चुिकर ललखखए-
1x5=5
मूनतय संगमरमर की र्ीIi। टोपी की िोंक से कोट के र्दस
ू रे बटि तक कोई र्दो फूट ऊँची। जिसे
कहते हैं ‘बस्ट। और सुंर्दर र्ी। िेतािी सुंर्दर लग रहे र्े। कुछ-कुछ मासूम और कमलसि। फौज़ी
वर्दी में। मूनतय को र्दे खते ही ‘दर्दल्ली चलो’ और ‘तुम मुझे खूि र्दो ....’ वगैरह यार्द आिे लगते
र्े। इस दृजष्ट्ट से यह सफल और सराहिीय प्रयास र्ा। केवल एक चीि की कसर र्ी िो र्दे खते
ही खटकती र्ी। िेतािी की आँखों पर चश्मा िहीं र्ा। चश्मा तो र्ा लेककि संगमरमर का िहीं
र्ा। एक सामान्य और सचमुच के चश्मे का चौड़ा काला फ्रेम मूनतय को पहिा दर्दया गया र्ा।
हालर्दार साहब िब पहली बार इस कसबे से गुिरे और चौराहे पर पाि खािे रुके तभी उन्होंिे
इसे लक्षक्षत ककया और उिके चेहरे पर एक कौतुक भरी मुस्काि फ़ैल गई। वाह भई! यह
आइडडया भी िीक है । मूनतय पत्र्र की लेककि चश्मा ररयल !
प्र. 41 मूनतय की ऊँचाई र्ी –
क. एक फूट
ख. र्दो फीट
ग. तीि फीट
घ. चार फीट
प्र. 42 मूनतय िेतािी की र्ी। ‘िेतािी’ से आशय है -
क. महात्मा गांधी
ख. सरर्दार पटे ल
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ग. सुभाष चन्ि बोस
घ. भीमराव अमबेर्दकर
प्र. 43 हालर्दार साहब को मनू तय के ललए कौि-सी बात खटकती र्ी?
क. मूनतय पर चश्मा िहीं होिा
ख. मनू तय पत्र्र की लेककि चश्मा ररयल
ग. मूनतय पर संगमरमर का चश्मा होिा
घ. मूनतय पर संगमरमर का चश्मा िहीं होिा
प्र. 44 मनू तय को र्दे खते ही हालर्दार साहब को तया यार्द आिे लगता र्ा?
क. स्वाधीिता संग्राम के दर्दि
ख. ‘दर्दल्ली चलो’ और ‘तम
ु मझ
ु े खि
ू र्दो ....’ आदर्द
ग. सुभाष चन्ि बोस
घ. महात्मा गांधी
प्र. 45 मूनतय पत्र्र की लेककि चश्मा ररयल ! इसपर हालर्दार साहब की तया प्रनतकिया र्ी?
क. परे शाि र्े
ख. उर्दास र्े
ग. अचंलभत र्े
घ. इिमें से कोई िहीं
VIII. निमिललखखत प्रश्िों के उत्तर सही ववकल्प चुिकर ललखखए- 1x2=2
प्र. 46 बालगोबबि भगत िे अपिे बेटे का अंनतम संस्कार ककससे करवाया ?
क. बहू से
ख. बेटी से
ग. लमत्र से
घ. पडोसी से
प्र. 47 बालगोबबि भगत स्वाभाव से र्े-
क. साधू
ख. गह
ृ स्र्
ग. मज़र्दरू
घ. िमींर्दार
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IX. निमिललखखत पदयांश को पिकर पूछे गए प्रश्िों के उत्तर सही ववकल्प चुिकर ललखखए -
1x5=5
िार् संभध
ु िु भंिनिहारा। होइदह केउ र्दास तम
ु हारा ।।
आयेसु काह कदहअ ककि मोही। सनु ि ररसाइ बोले मनु ि कोही ।।
सेवकु सो िो करै सेवकाई। अररकरिी करर कररअ लराई।।
सि
ु हु राम िेदह लसवधिु तोरा। सहसबाहु सम सो ररपु मोरा।।
सो बबलगाउ बबहाइ समािा । ि त मारे िैहदहं सब रािा।।
प्र. 48 सहस्त्रबाहु ककिका शत्रु र्ा?
क. राम का
ख. परशुराम का
ग. लक्ष्मण का
घ. ववश्वालमत्र का
प्र. 49 ‘सो बबलगाउ बबहाइ समािा’ ककसकी उजतत है ?
क. ववश्वालमत्र मनु ि की
ख. वलशष्ट्ि ऋवष की
ग. परशुराम ऋवष की
घ. भग
ृ ु ऋवष की
प्र. 50 लशव का धिुष ककसके दवारा तोड़ा गया ?
क. परशरु ाम के दवारा
ख. लक्ष्मण के दवारा
ग. राम के दवारा
घ. ववश्वालमत्र के दवारा
प्र. 51 लशवधिुष के टूटिे पर परशरु ाम की तया प्रनतकिया र्ी?
क. वे शांत हो गए।
ख. वे िोचधत हो गए।
ग. वे हँसिे लगे।
घ. वे मुस्कुरािे लगे।
प्र. 52 ‘अरर’ शब्र्द का अर्य है –
क. शत्रु
ख. पुत्र
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ग. भाई
घ. लमत्र
X. निमिललखखत प्रश्िों के उत्तर सही ववकल्प चि
ु कर ललखखए- 1x2=2
प्र. 53 हाररल की तुलिा ककससे की गई है ?
क. गोवपयों से
ख. लकड़ी से
ग. उदधव से
घ. श्री कृष्ट्ण से
प्र. 54 उदधव ककसका संर्देश लेकर आए र्े?
क. िंर्द का
ख. कंस का
ग. बलराम का
घ. कृष्ट्ण का
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