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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 5: आसमान गरा
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
51 – 61 8 29 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 21 pages
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कक्षा 4 हद अध्याय 5 आसमान गरा AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 4 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 5: आसमान गरा
पाठ 5 आसमान गरा एक मजेदार जंगल-कहानी है। एक खरगोश ‘धम्म’ क आवाज सुनकर समझ बैठता है क आसमान गर रहा है, और पूरा जंगल
बना दे खे उसके पीछे भागने लगता है। इन्ह पृष्ठ म एक छोट रचना चेरापूँजी के मेहमान भी द गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 4) 51 – 61
खं ड प्रश्न
8 29
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 53
कहानी पढ़ने के बाद कक्षा म बातचीत के प्रश्न
बातचीत के लए
प्र.1 खरगोश को ऐसा क्य लगा क आसमान गर रहा है? य द आप खरगोश के ान पर होते तो क्या करते?
खरगोश पेड़ के नीचे सो रहा था। तभी जोर क आवाज हुई — धम्म! वह च ककर उठ गया।
पाठ म लखा है — “खरगोश ने इधर-उधर दे खा। उसे कुछ दखाई नह दया।” आवाज तो हुई, पर उसका कारण नह दखा। इसी
से उसे लगा क आसमान गर रहा है।
ऐसा क्य हुआ: जब आवाज क वजह दखाई न दे , तब मन अपने आप कोई डरावनी बात सोच लेता है।
य द म खरगोश के ान पर होता —
म पहले रुक जाता। भागता नह ।
म ऊपर पेड़ क ओर दे खता।
फर जमीन पर दे खता क गरा क्या है।
मुझे वहाँ बड़ा-सा फल दख जाता। मेरा डर खत्म हो जाता।
संकेत: कहानी के अंत म शेर ने यही कया। उसने पहले दे खा, फर माना।
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प्र.2 क्या आपने कभी आसमान से कसी वस्तु को गरते हुए दे खा है? अपने-अपने अनुभव साझा क जए।
यह आपका अपना अनुभव है। इस लए उत्तर हर ब े का अलग होगा। बताते समय तीन बात जरूर क हए —
1. वह चीज क्या थी?
2. वह कहाँ और कब गरी?
3. उस समय आपको कैसा लगा?
नमूना उत्तर: हाँ, मने दे खा है। पछली ग मय म हमारे आँगन म आम का पेड़ था। एक दन तेज हवा चली। एक पका आम धम्म से
नीचे गरा। पहले तो म डर गया। फर ऊपर दे खा तो समझ आया क आम गरा है। मने वह आम उठा लया।
संकेत: ओले, बा रश क बूँद, पतंग, पत्ते और पक्षी का पंख — ये भी ‘आसमान से गरने वाली’ चीज ह। इनम से
कसी के बारे म भी बताया जा सकता है।
प्र.3 य द आप शेर के ान पर होते तो खरगोश को कस प्रकार समझाते? कक्षा म चचा क जए।
समझाने का सबसे अ ा तरीका है — डाँटना नह , ब ल्क साथ ले जाकर सच दखा दे ना। कहानी म शेर ने भी यही कया। उसने
कहा, “चलो, चलकर दे ख।”
अ े उत्तर म ये बात होनी चा हए —
पहले खरगोश को शांत क जए।
फर उससे प्रश्न पू छए — क्या गरा, कहाँ गरा।
फर उसे उसी जगह ले जाइए।
अंत म नयम बताइए — पहले दे खो, फर मानो।
नमूना उत्तर: “खरगोश भाई, डरो मत। रुको और गहरी साँस लो। अब बताओ, तुमने क्या दे खा था? कुछ नह दे खा? केवल आवाज
सुनी थी? चलो, हम दोन उसी पेड़ के नीचे चलते ह। दे खो, यह रहा बड़ा-सा फल! यही धम्म से गरा था। आसमान नह गरा। अगली
बार पहले दे ख लेना, फर भागना।”
क्य : डर केवल बात से नह जाता। जब आँख से सच दख जाता है, तब डर अपने आप चला जाता है।
प्र.4 इस कहानी से मलती-जुलती कोई दूसरी घटना या कहानी कक्षा म सुनाइए।
ऐसी कहानी चु नए जसम कोई बना दे खे डर जाता हो और फर सच पता चलने पर सब हँस पड़ते ह ।
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सुनाते समय यह क्रम र खए — (1) कौन डरा, (2) कस बात से डरा, (3) सबने क्या कया, (4) सच क्या नकला, (5) क्या सीख
मली।
नमूना उत्तर: हमारे गाँव म रात को एक बार बहुत शोर हुआ। सबने कहा क खेत म भूत आ गया है। लोग घर म छप गए। सुबह
कसान चाचा खेत म गए। वहाँ एक बछड़ा रस्सी तोड़कर टन के डब्ब से टकरा रहा था। वही आवाज रात को आ रही थी। यह
सुनकर सब खूब हँसे।
संकेत: ‘आसमान गरा’ क तरह यहाँ भी सीख वही है — बना दे खे कसी बात पर यक न मत क जए।
पाठ के भीतर — पृष्ठ 54
✓
नम्न ल खत प्रश्न के उ चत उत्तर पर सही का चह्न ( ) लगाइए —
पाठ के भीतर
प्र.1 (क) डरकर भागते हुए खरगोश को सबसे पहले कौन मला?
i. लोमड़ी ii. शेर iii. भालू iv. हाथी
सही उत्तर — i. लोमड़ी ✓
पाठ म लखा है — “भागते-भागते उसे एक लोमड़ी मली। उसने पूछा, ‘खरगोश भाई, कहाँ भागे जा रहे हो?’”
क्य : कहानी म मलने का क्रम यही है — खरगोश → लोमड़ी → भालू → हाथी → शेर। लोमड़ी सबसे पहले मली।
प्र.2 (ख) हाथी ने जब शेर से कहा क आसमान गर रहा है, तब शेर ने क्या कया?
i. बात सुनकर चला गया। ii. वह मुस्कुराने लगा। iii. वह भी सबके साथ भागने लगा। iv. उसने सबको
रोककर प्रश्न पूछा।
सही उत्तर — iv. उसने सबको रोककर प्रश्न पूछा। ✓
पाठ क पं क्त है — “शेर ने दहाड़कर कहा, ‘आसमान गर रहा है! कहाँ गर रहा है? रुको।’ यह सुनकर सभी जानवर रुक गए।”
क्य : शेर ने सुनी हुई बात मान नह ली। उसने पहले पूछा क आसमान कहाँ गर रहा है। इसी प्रश्न से सच सामने
आया।
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(ग) “तो यही तुम्हारा आसमान था। लो फर आसमान गरा। भागो!” यह कथन कसके ारा कहा गया है?
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i. हाथी ii. लोमड़ी iii. भालू iv. शेर
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सही — iv. शेर ✓
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सब जानवर पेड़ के नीचे गए। वहाँ एक बड़ा-सा फल गरा पड़ा था। तभी वैसा ही एक और फल गरा — धम्म! तब शेर ने यह बात
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कही।
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क्य : शेर मजाक म यह कह रहा है। वह खरगोश को दखा रहा है क आसमान नह , फल गरा था। इसी लए आगे
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लखा है — “और सभी हँसने लगे।”
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gl i. क ii. कटहल iii. तरबूज iv. पपीता
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सही उत्तर — ii. कटहल ✓
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पाठ के पहले पृष्ठ के चत्र म पेड़ क टह नयag
औरl तने से बड़े, हरे और खुरदरे फल लटके ह। यही कटहल ह। पाठ म भी लखा है —
“वहाँ एक बड़ा-सा फल गरा पड़ा था।”
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पेड़ पर लगे बड़ े-बड़ g la se
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पाठ के पहले पृष्ठ का चत्र — पेड़ क टह नय और तने से बड़े, हरे, खुरदरी छाल वाले फल लटके ह और नीचे खरगोश बैठा है।
क्य बाक वकल्प ठ क नह : कद्द और तरबूज जमीन पर बेल म लगते ह। वे पेड़ से गर ही नह सकते। पपीता
हल्का और नरम होता है। उसके गरने से ‘धम्म’ जैसी जोर क आवाज नह आती। कटहल बहुत भारी होता है और
पेड़ पर ऊँचा लगता है।
संकेत: प्रश्न म ‘आपके अनुसार’ लखा है, पर पुस्तक का अपना चत्र कटहल ही दखाता है। इस लए यही सबसे
सही उत्तर है।
पुस्तक म छपाई क एक बात: पृष्ठ 54 पर वकल्प (i) म ‘कद्द’ शब्द जुड़े हुए ‘द्द’ क जगह ‘कद् दू’ क तरह छपा
है — बीच म हलंत साफ दखाई दे ता है। सही रूप क ही है।
सो चए और ल खए — पृष्ठ 54–55
प्रश्न 1 और 2 पृष्ठ 54 पर, प्रश्न 3 और 4 पृष्ठ 55 पर दए गए ह।
सो चए और ल खए
प्र.1 इस कहानी म कन- कन पात्र का उल्लेख हुआ है? उनके नाम क्रम से ल खए।
इस कहानी म पाँच पात्र ह। कहानी म आने के क्रम से उनके नाम ये ह —
खरगोश, लोमड़ी, भालू, हाथी और शेर।
क्रम पात्र कहानी म वह कब आया
1 खरगोश पेड़ के नीचे सो रहा था, ‘धम्म’ सुनकर भागा
2 लोमड़ ी “भागते-भागते उसे एक लोमड़ी मली।”
3 भालू “आगे जाकर उन्ह एक भालू मला।”
4 हाथी “एक हाथी के पास से नकले।”
5 शेर “भागते-भागते उन्ह शेर मला।”
क्य यही क्रम है: कहानी म लखा है — “आगे-आगे खरगोश, उसके पीछे लोमड़ी, उसके पीछे भालू और सबसे
पीछे हाथी।” सबसे अंत म शेर मला।
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प्र.2 “आसमान गर रहा है, भागो! भागो! जल्द भागो!” खरगोश क यह बात सुनकर आपके अनुसार पशुओं को क्या
करना चा हए था?
पशुओं को भागना नह चा हए था। उन्ह पहले रुककर पूछना चा हए था।
उन्ह यह करना चा हए था —
1. खरगोश को रोककर शांत करते।
2. पूछते — “तुमने क्या दे खा? आसमान कहाँ गरा?”
3. उसके साथ उसी पेड़ के नीचे जाते।
4. अपनी आँख से दे खते क सच क्या है।
क्य : खरगोश ने खुद कुछ दे खा ही नह था। जो बात कसी ने दे खी न हो, उस पर भरोसा करके भागना ठ क नह ।
शेर ने यही कया और सच सामने आ गया।
प्र.3 कहानी म आपको कौन-सा पात्र सबसे अ ा लगा और क्य ?
यह आपक अपनी पसंद का प्रश्न है। कोई भी पात्र चुन सकते ह, पर कारण जरूर बताइए।
नमूना उत्तर: मुझे शेर सबसे अ ा लगा। सबसे पहला कारण — उसने सुनी हुई बात पर तुरंत यक न नह कया। उसने पूछा, “कहाँ
गर रहा है आसमान?” दूसरा कारण — उसने डाँटा नह , ब ल्क कहा, “चलो, चलकर दे ख।” तीसरा कारण — उसने सबको सच
दखा दया और सब हँस पड़े।
दूसरा ठ क उत्तर भी हो सकता है: कोई ब ा खरगोश चुन सकता है, क्य क उसी से कहानी शुरू होती है और
वह सबसे मजेदार पात्र है। जो पात्र चुन, उसका कारण कहानी म से द जए।
प्र.4 य द शेर भी भगदड़ म शा मल हो जाता और प्रश्न न पूछता तो क्या होता?
तब सच कभी पता नह चलता। पाँच जानवर बेकार म भागते रहते।
क्या-क्या होता —
सब थक जाते और घबरा जाते।
रास्ते म जो भी मलता, वह भी डरकर भागने लगता। भगदड़ बढ़ती जाती।
कोई जानवर गरकर चोट भी खा सकता था।
सब अपना घर और जंगल छोड़ दे ते, जब क कोई खतरा था ही नह ।
कहानी हँसी पर खत्म न होती।
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क्य : शेर अकेला था जसने प्रश्न पूछा। एक सही प्रश्न ने पूरी भगदड़ रोक द । इसी लए कहानी सखाती है क पहले
पूछो और दे खो, फर मानो।
भाषा क बात — पृष्ठ 55–57
प्रश्न 1–3 पृष्ठ 55 पर, प्रश्न 3 का बाक भाग तथा 4–5 पृष्ठ 56 पर और प्रश्न 6 पृष्ठ 57 पर है।
भाषा क बात
प्र.1 नम्न ल खत पं क्तय को नीचे दए गए उ चत वराम चह्न क सहायता से पूरा क जए —
, ? ! ।
पुस्तक म दए गए चार वराम चह्न।
(क) अरे इतना बड़ा हाथी
(ख) मने खरगोश लोमड़ी भालू हाथी और शेर जंगल म दे खे ह
(ग) ये पुस्तक कसक ह
(घ) वाह कतने सुंदर फूल ह
चह्न लगाने के बाद वाक्य ऐसे बनगे —
पूरा वाक्य कौन-सा चह्न और क्य
(क) अरे ! इतना बड़ ा हाथी! ‘अरे’ म अचरज है, इस लए !
(ख) मैंने खरगोश, लोमड़ ी, भालू, हाथी और शेर जंगल में दे खे है।ं नाम क सूची है, इस लए बीच म , और अंत म ।
(ग) ये पुस्तके ं िकसकी है?ं कुछ पूछा जा रहा है, इस लए ?
(घ) वाह! िकतने सुंद र फू ल है!ं ‘वाह’ म खुशी है, इस लए !
नयम एक पं क्त म: पूण वराम (।) बात खत्म करता है, प्रश्नवाचक चह्न (?) कुछ पूछता है, वस्मया दबोधक चह्न
(!) अचरज या खुशी दखाता है और अल्प वराम (,) सूची म थोड़ा रुकाता है।
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संकेत: (क) और (घ) म अंत म पूण वराम भी लगाया जा सकता है — “अरे! इतना बड़ा हाथी।” दोन रूप ठ क
ह।
प्र.2 कहानी म एक कथन आया है — “भागते-भागते उसे एक लोमड़ी मली।” इस वाक्य म ‘भागते-भागते’ शब्द-युग्म
का प्रयोग हुआ है। अब नम्न ल खत शब्द-युग्म क सहायता से एक-एक वाक्य ल खए — (क) इधर-उधर (ख)
कभी-कभी (ग) टे ढ़ -मेढ़ (घ) लंबे-चौड़े
शब्द-युग्म अथ वाक्य
(क) इधर-उधर चार ओर खरगोश ने इधर-उधर दे खा, पर उसे कु छ नही ं िदखा।
(ख) कभी-कभी बीच-बीच म, रोज नह दादी कभी-कभी हमें कहानी सुनाती है।ं
(ग) टे ढ़ -मेढ़ जो सीधी न हो खेत की टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडी गाँव तक जाती है।
(घ) लंबे-चौड़े बहुत बड़े इस घर के कमरे लंबे-चौड़ े है।ं
नयम: जब एक ही तरह के दो शब्द जोड़कर लखे जाते ह, तो उसे शब्द-युग्म कहते ह। इससे बात म जोर आ जाता
है — ‘भागते-भागते’ का मतलब है लगातार भागते हुए।
अपना उदाहरण: धीरे-धीरे, जल्द -जल्द , आस-पास — इन शब्द-युग्म से भी वाक्य बनाकर दे खए।
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प्र.3 नम्न ल खत वाक्य को ध्यान से प ढ़ए और दए गए उदाहरण के अनुसार प्रश्न बनाइए —
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उदाहरण – भागते-भागते उन्ह शेर मला। यहाँ ‘कौन’ का प्रयोग करते हुए प्रश्न बनेगा — भागते
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(क) खरगोश पेड़ के नीचे सो रहा था। कहाँ
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(ख) खरगोश भागते-भागते बोला। कब
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वाक्य प्रश्नवाचक बना हुआ प्रश्न
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(क) खरगोश पेड़ के नीचे सो रहा था। कहाँ
(ख) खरगोश भागते-भागते बोला। कब खरगोश कब बोला?
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(ग) वह धम्म से आसमान गरा। कैसे
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(घ) खरगोश खरगोश ने लोमड़ ी से क्या
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कहा?
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om “कहाँ” रखा।
तरीका: वाक्य म से उस भाग को हटाइए जसके बारे म पूछना है। उसक जगह प्रश्नवाचक शब्द रख द जए और
अंत म ? लगा द जए। जैसे — “पेड़ के नीचे”.c g l a
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याद र खए: कहाँ = जगह पूछता है, कब = समय, कैसे = तरीका, क्या = बात या चीज।
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प्र.4 नीचे दए गए शब्द म मात्रा लगाकर और हटाकर नए-नए शब्द बनाइए। उदाहरण के अनुसार इन शब्द से वाक्य
बनाकर अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए।
उदाहरण – बस ⟶ बीस तथा चला ⟶ चल
मात्रा लगाकर नया शब्द मात्रा हटाकर नया शब्द
(क) यह कही
(ख) भर पढ़
(ग) रह केला
(घ) फल सेब
शब्द मात्रा लगाकर वाक्य
(क) यह यही यही मेरी पुस्तक है।
(ख) भर भार इस बोरी का भार बहुत है।
(ग) रह राह यह राह बाजार तक जाती है।
(घ) फल फू ल बगीचे म लाल फूल खला है।
शब्द मात्रा हटाकर वाक्य
(क) कही कह सच-सच कह दो।
(ख) पढ़ पढ़ रोज एक प ा पढ़ लया करो।
(ग) केला कला चत्र बनाना एक सुंदर कला है।
(घ) सेब सब सब ब े मैदान म खेल रहे ह।
क्य बदल जाता है: मात्रा शब्द क आवाज बदल दे ती है। ‘बस’ म ‘ब’ के साथ ◌ी लगाते ही ‘बीस’ बन गया। इसी
तरह ‘चला’ से ◌ा हटाते ही ‘चल’ बन गया।
खुद क जए: कम ⟶ काम, दल ⟶ दाल, नाक ⟶ नक — ऐसे और जोड़े बनाइए।
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प्र.5 आसमान पर आधा रत कुछ मुहावरे नीचे दए गए ह। इन मुहावर का अथ लखकर वाक्य म प्रयोग क जए।
(क) आसमान छू ना (ख) आसमान गरना (ग) आसमान सर पर उठाना (घ) जमीन-आसमान एक करना
मुहावरा अथ वाक्य म प्रयोग
(क) आसमान छू ना बहुत आगे बढ़ जाना, बहुत नाम कमाना मेहनत करके सुमन ने खेल म आसमान छू लया।
(ख) आसमान गरना अचानक बहुत बड़ ी मुसीबत आ जाना खबर सुनते ही मोहन पर तो आसमान ही गर पड़ा।
(ग) आसमान सर पर उठाना बहुत शोर मचाना खेलते-खेलते ब ने आसमान सर पर उठा लया।
(घ) जमीन-आसमान एक बहतु ज्यादा मेहनत करना, हर तरह की कोिशश पताजी ने मुझे पढ़ाने के लए जमीन-आसमान एक कर
करना करना दया।
मुहावरा क्या है: वह छोटा वाक्यांश जसका अथ शब्द के सीधे अथ से अलग होता है। ‘आसमान गरना’ म सचमुच
आसमान नह गरता — बस बड़ी मुसीबत आती है। हमारी कहानी म खरगोश ने इसी बात को सचमुच का मान लया
था!
प्र.6 चत्र दे खकर वाक्य ल खए —
1
खरगोश डर गया और भागने लगा।
2
3
4
पृष्ठ 57 के चार चत्र — पहला वाक्य पुस्तक म दया गया है।
हर चत्र म दे खए क खरगोश का भाव क्या है — डर, खुशी, उदासी या च कना। फर उसी भाव का एक छोटा वाक्य ल खए।
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खरगोश डर गया और भागने लगा।
2
खरगोश गाजर पाकर बहुत खुश हुआ।
3
खरगोश उदास होकर चुपचाप बैठ गया।
4
खरगोश आवाज सुनकर चौंक गया।
लखे हुए वाक्य (हरे रंग म) स हत चार चत्र।
वाक्य इस प्रकार बनगे —
1. खरगोश डर गया और भागने लगा। (यह पुस्तक ने पहले ही दे दया है)
2. खरगोश गाजर पाकर बहुत खुश हुआ।
3. खरगोश उदास होकर चुपचाप बैठ गया।
4. खरगोश आवाज सुनकर च क गया।
संकेत: आपके वाक्य इनसे थोड़े अलग हो सकते ह। बस भाव वही रहना चा हए। जैसे तीसरे चत्र के लए “खरगोश
का मन उदास था।” भी ठ क है।
अनुमान और कल्पना — पृष्ठ 57
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कल्पना करके अपनी कहानी बनाइए और कक्षा म सुनाइए।
अनु मान और कल्पना
प्र.1 कल्पना क जए क य द खरगोश के ान पर शेर और शेर के ान पर खरगोश होता तो क्या होता। अपनी
कहानी बनाइए और कक्षा म सहपा ठय को सुनाइए।
यह कहानी आपको खुद बनानी है। बनाते समय यह क्रम र खए — (1) कौन डरा, (2) उसने क्या कहा, (3) रास्ते म कौन-कौन
मला, (4) सच कसने दखाया, (5) अंत म सब क्या करते ह।
नमूना उत्तर: एक शेर पेड़ के नीचे सो रहा था। अचानक धम्म क आवाज हुई। शेर च ककर उठा और बोला, “आसमान गर रहा है!
भागो!” शेर को भागता दे खकर हाथी भी भागा। फर भालू और लोमड़ी भी पीछे -पीछे भागे। रास्ते म उन्ह एक छोटा-सा खरगोश
मला। उसने पूछा, “ठह रए! आसमान कहाँ गर रहा है? क्या आपने दे खा?” शेर चुप हो गया। खरगोश सबको उसी पेड़ के नीचे ले
गया। वहाँ एक बड़ा कटहल गरा पड़ा था। शेर बोला, “अरे! छोटे से खरगोश ने बड़ी बात सखा द ।” और सब हँस पड़े।
कहानी क सीख वही रहती है: बु बड़े-छोटे से नह आती। जो पहले दे खता और पूछता है, वही सही नकलता
है।
प्र.2 कहानी म खरगोश कुछ गरने क ध्व न सुनकर घबरा गया। य द ऐसी ही ध्व न हाथी ने सुनी होती तो क्या वह भी
इतना घबराता? सो चए और अपनी बात सहपा ठय को सुनाइए।
नह , हाथी शायद इतना नह घबराता।
कारण —
हाथी बहुत बड़ा और ताकतवर होता है। उसे जंगल म कम डर लगता है।
फल गरने क आवाज उसके लए नई नह होती। वह रोज पेड़ के पास रहता है।
खरगोश छोटा है और सोते समय अचानक आवाज से च क गया था।
क्य : डर केवल आवाज से नह आता। डर इस बात से आता है क हम उस आवाज को समझ पाते ह या नह ।
खरगोश ने आवाज दे खी-समझी नह , इस लए डर गया।
दूसरी बात भी कही जा सकती है: कहानी म हाथी भी बना दे खे भागने लगा था। इससे पता चलता है क बड़ा होने
पर भी बना सोचे डर लग सकता है।
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य द खरगोश के ान पर कौआ च क जाता और उड़ने लगता तो उसे रास्ते म कौन-कौन मलता और उससे क्या-
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क्या पूछता? कल्पना क जए और एक कहानी सुनाइए।
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कौआ उड़ता है, इस लए उसे आसमान और पेड़ पर रहने वाले साथी मलगे — तोता, कबूतर, गलहरी, मोर, चील।
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नमूना उत्तर: एक कौआ पेड़ क डाल पर बैठा था। तभी धम्म क आवाज हुई। वह च ककर उड़ने लगा। रास्ते म उसे तोता मला।
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तोते ने पूछा, “कौआ भाई, इतनी तेज क्य उड़ रहे हो?” कौआ बोला, “आसमान गर रहा है, उड़ो!” तोता भी उड़ने लगा। आगे
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कबूतर मला। उसने पूछा, “क्या हुआ? कहाँ जा रहे हो?” फर गलहरी मली। उसने पूछा, “ कसने दे खा क आसमान गर रहा है?”
अंत म चील मली। चील ने ऊपर से दे खा और बोली,
बड़ा कटहल गरा पड़ा था। सब हँसने लगे।
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संकेत: ध्यान र खए — पात्र वही चु नए जो उड़ सकते ह या पेड़ पर रहते ह । तभी कहानी सemी लगेगी।
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ढूँ ढ़ए और ग नए — पृष्ठ 58
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कक्षा 4 हद अध्याय 5 आसमान गरा AglaSem · NCERT Solutions
नीचे दखाए गए चत्र म पात्र क संख्या गनकर रक्त ान पर ल खए —
ढूँ ढ़ए और ग नए
प्र.1 नीचे दखाए गए चत्र म पात्र क संख्या गनकर रक्त ान पर ल खए —
झा ड़य म छपे जानवर — लोमड़ी, बल्ली, भेड़ और भालू।
कौन कतनी बार आया?
लोमड़ी तीन
बल्ली
भेड़
भालू
झा ड़य क एक-एक पं क्त को बाएँ से दाएँ दे खए। हर जानवर पर उँ गली रखकर ग नए। इससे कोई छू टे गा नह ।
कौन कतनी बार आया?
लोमड़ी तीन
बल्ली चार
भेड़ दो
भालू दो
गनती इस तरह हुई —
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कक्षा 4 हद अध्याय 5 आसमान गरा AglaSem · NCERT Solutions
लोमड़ी – तीन: सबसे ऊपर बीच म एक, बीच क पं क्त म बाईं ओर एक और दाईं ओर एक। (यह उत्तर पुस्तक ने पहले ही दे
रखा है)
बल्ली – चार: ऊपर दाईं ओर एक, बीच म एक, नीचे बाईं ओर एक और नीचे दाईं ओर एक।
भेड़ – दो: ऊपर क झाड़ी म एक और सबसे नीचे दाईं ओर एक।
भालू – दो: ऊपर बाईं ओर एक और नीचे बीच म एक।
क्य पं क्त-पं क्त गनना अ ा है: चत्र म जानवर झा ड़य के पीछे छपे ह। इधर-उधर दे खने से एक ही जानवर
दो बार गना जा सकता है। पं क्त से गनने पर ऐसा नह होता।
संकेत: पहचानने का आसान तरीका — लोमड़ी नारंगी है, बल्ली भूरी-स्लेट , भेड़ सफेद ऊन वाली और भालू काला-
स्लेट ।
कलाकारी — पृष्ठ 58–59
प्रश्न 1 पृष्ठ 58 पर तथा प्रश्न 2 और 3 पृष्ठ 59 पर दए गए ह।
कलाकारी
प्र.1 दए गए चत्र म रंग भ रए —
पृष्ठ 58 का रेखा चत्र — पेड़, सूरज, बादल और पाँच जानवर।
यह काम आपको स्वयं करना है। रंग भरते समय यह ध्यान र खए क रंग जानवर के असली रंग जैसा हो और वह लक र से बाहर न
जाए।
नमूना उत्तर — कौन-सा रंग कहाँ:
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चत्र का भाग रंग
शेर पीला–नारंगी, अयाल गहरा भूरा
हाथी ले टी (गे), दाँत सफे द
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भालू गहरा भूरा या काला
खरगोश सफे द , कान अंद र से गुल ाबी
लोमड़ी नारंगी, पूँछ का िसरा सफे द
पेड़ और घास हरा, तना भूरा
आसमान और बादल हल्का नीला, बादल सफे द
सूरज और फूल पीला, फू ल लाल -पीले
संकेत: पहले हल्के रंग भ रए, फर गहरे। कनारे पर हल्के हाथ से रंग भरने पर चत्र साफ दखता है।
प्र.2 नीचे दए गए चत्र के अनुसार शक्षक क सहायता से कागज क पुत लयाँ बनाकर इस कहानी का अ भनय
कक्षा म क जए।
भालू शेर हाथी लोमड़ ी खरगोश
पृष्ठ 59 पर दखाई गईं पाँच उँगली-पुत लयाँ।
यह करके सीखने वाला काम है। शक्षक क मदद ली जए।
पुतली बनाने का तरीका —
1. रंगीन कागज पर जानवर का सर और गोल-सा शरीर बनाइए।
2. उसे काट ली जए। आँख, नाक और मूँछ चपकाइए या बनाइए।
3. शरीर को मोड़कर एक नली ( ूब) बनाइए, जसम उँ गली आ जाए। कनारे पर ग द लगाइए।
4. पाँच पुत लयाँ बनाइए — भालू, शेर, हाथी, लोमड़ी और खरगोश।
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अ भनय कैसे क जए —
पाँच ब े एक-एक पुतली उँ गली पर पहन।
मेज के पीछे बैठकर केवल हाथ ऊपर रख।
कहानी के क्रम से पुत लयाँ आगे आएँ — पहले खरगोश, फर लोमड़ी, भालू, हाथी और अंत म शेर।
हर पुतली अपनी पं क्त बोले, जैसे शेर — “कहाँ गर रहा है आसमान? रुको।”
संकेत: एक ब ा कहानी सुनाने वाला (सूत्रधार) बन सकता है। वह बीच क बात बोलेगा और बाक ब े संवाद
बोलगे।
प्र.3 नीचे दए गए चत्र के अनुसार शक्षक/अ भभावक क सहायता से कागज क छतरी बनाइए।
1 2 3 4
कागज पर गोला बनाइए गोला काट लीिजए आधा मोिड़ ए िफर मोिड़ ए
5 6 7 8
एक बार और मोिड़ ए िकनारा कािटए खोिलए और मोड़ बनाइए डं ठी लगाइए — छतरी तैयार
पृष्ठ 59 पर दए गए चत्र के क्रम से कागज क छतरी।
यह भी करके सीखने वाला काम है। कची चलाते समय बड़ क मदद जरूर ली जए।
बनाने के चरण —
1. रंगीन कागज पर कटोरी या ढक्कन रखकर एक गोला बनाइए।
2. गोले को काट ली जए।
3. गोले को आधा मो ड़ए।
4. फर आधा मो ड़ए। अब चौथाई बन गया।
5. एक बार और मो ड़ए। अब एक पतला तकोना टु कड़ा बना।
6. उसका बाहरी कनारा हल्का-सा काटकर लहरदार बनाइए।
7. कागज खो लए। मोड़ क लक र पर दबाकर पंखे जैसे मोड़ बनाइए — छतरी का ऊपरी भाग तैयार।
8. बीच म एक तनका या तार लगाइए और उसका सरा मोड़कर मूठ (हडल) बनाइए। ग द से चपकाइए।
यह काम क्य : कहानी म खरगोश को लगा क ऊपर से कुछ गर रहा है। छतरी वही चीज है जो ऊपर से गरने वाली
बा रश से हम बचाती है। इसी से पाठ का यह मजेदार जोड़ बनता है।
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संकेत: मोड़ बराबर रखने के लए हर बार मोड़ को नाखून से दबा द जए। तभी छतरी अ खुलेगी।
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aँglी के मेहमान — पृष्ठ 60–61
चेरापूज
पाठ 5 के भीतर द गई छोट रचना (लघुकथा), ले खका — मताली अहीर। पुस्तक इस रचना के साथ कोई अभ्यास नह दे ती; ये प्रश्न अभ्यास
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के लए जोड़े गए ह।
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लघु क था
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लेखक का घर पानी से क्य भर गया था?
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प्र.1
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लेखक का घर बादल के कारण पानी-पानी हो गया था।
a gघरl क खड़क खुली रह गई थी। बरसात के दन म बादल बहुत नीचे तैर रहे थे। वे खुली खड़क से घर के अंदर आ गए और सब
कुछ गीला कर गए।
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रचना म कांग क पं क्त है — “ खड़क खुली रखेगा तो बादल तो घर म आएगा ही न।”
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a glहै और वहाँ सबसे ज्यादा बा रश होती है। वहाँ बादल जमीन के पास तक आ
क्य : चेरापूँजी (सोहरा) बहुत ऊँचाई पर
जाते ह। इस लए खुली खड़क से बादल घर म आ सकता है।
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प्र.2 .cलेखक और सगमा ने पहले क्या-क्या सोचा था? उनक बात गलत क्य नकली?
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ag उत्तर
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पहले दोन ने दो बात सोच —
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1. लेखक ने सोचा क सगमा से कोई नल खुला रह गया होगा।
2. सगमा ने कहा — “सर, कह पानी क टं क तो लीक नह कर रही?”
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दोन बात गलत नकल । रचना म लखा है — “मने सारे नल दे खे। सभी अ तरह से बंद थे।” टं क भी दे खी गई, पर कुछ समझ
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नह आया।
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ag था — खुली खड़क और नीचे तैरते
.cक्य गलत नकल : दोन ने घर के भीतर ही कारण ढूँ ढ़ा। असली कारण बाहर
m बादल। जब तक कांग ने खड़क के बारे म नह पूछा, तब तक बात समझ नह आई।
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प्र.3 कांग ने घर दे खकर क्या पूछा और उन्ह ने क्या बताया?
कांग लेखक का ट फन लेकर आई थ । उन्ह ने पहले घर को दे खा, फर मुस्कुराते हुए पूछा — “ खड़क खुली थी क्या बाबा?”
लेखक ने कहा, “हाँ।”
तब वे हँस और बोल , “ खड़क खुली रखेगा तो बादल तो घर म आएगा ही न।” उन्ह ने आगे बताया — “बरसाती दन म बादल
बहुत नीचे तैरते ह। ऐसे म खड़क -दरवाजे खुले मल जाएँ तो वे घर को अपना समझकर चले आते ह और सब कुछ गीला कर जाते
ह।”
कांग को पता कैसे था: वे उसी जगह क रहने वाली थ । अपने आस-पास को रोज दे खने वाला व्य क्त उसक बात
अ तरह जानता है।
संकेत: रचना का शीषक ‘चेरापूँजी के मेहमान’ इसी लए है — यहाँ बादल ही बन बुलाए मेहमान बनकर घर आ
गए।
प्र.4 ‘आसमान गरा’ कहानी और ‘चेरापूँजी के मेहमान’ रचना म क्या बात एक जैसी है?
दोन म एक ही बात एक जैसी है — पहले सबने गलत कारण सोच लया, बाद म सच पता चला।
आसमान गरा चेरापूँजी के मेहमान
पहले क्या सोचा आसमान गर रहा है नल खुला रह गया या टं क लीक है
सच क्या था पेड़ से बड़ ा फल िगरा था खुल ी िखड़ की से बादल घर में आ गए
सच कसने बताया शेर ने — “चलो, चलकर दे ख।” कांग ने — “ खड़क खुली थी क्या बाबा?”
अंत म सभी हँसने लगे कांग हँस और बात समझाई
दोन क सीख: जब कुछ समझ न आए तो घबराइए मत। रुककर दे खए और सही प्रश्न पू छए। सच अक्सर बहुत
सीधा-सा नकलता है।
अध्याय — एक नज़र म
खरगोश पेड़ के नीचे सो रहा था। अचानक ‘धम्म’ क आवाज हुई। उसे कुछ दखाई नह दया।
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खरगोश ने सोच लया क आसमान गर रहा है। वह डरकर भागने लगा।
उसक बात सुनकर लोमड़ी, भालू और हाथी भी बना दे खे भागने लगे।
शेर ने सबको रोका और पूछा — “कहाँ गर रहा है आसमान?” फर सब पेड़ के नीचे गए।
वहाँ एक बड़ा-सा फल गरा पड़ा था। तभी वैसा ही एक और फल गरा — धम्म! सब हँसने लगे।
सीख — सुनी-सुनाई बात पर तुरंत यक न मत क जए। पहले खुद दे खए और पू छए।
इसी पाठ म ‘चेरापूँजी के मेहमान’ रचना है। वहाँ खुली खड़क से बादल घर के अंदर आ जाते ह।
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त अपना नया वाक्य
धम्म िकसी भारी चीज के िगरने की आवाज “अचानक जोर क आवाज हुई — धम्म!” बोरी धम्म से जमीन पर गरी।
च कना अचानक डरकर जाग जाना या िठठक “खरगोश च ककर उठ गया।” घंट बजते ही म च क गया।
जाना
इधर-उधर चारों ओर “खरगोश ने इधर-उधर दे खा।” बंदर इधर-उधर कूद रहा था।
भागते- दौड़ते हएु “भागते-भागते उसे एक लोमड़ी मली।” भागते-भागते वह गर पड़ा।
भागते
ठहरो रुको “ठहरो, ठहरो! कहाँ भागे जा रहे हो?” ठहरो, म भी साथ चलूँगा।
दहाड़ना शेर का बहुत जोर से बोलना “शेर ने दहाड़कर कहा” शेर दहाड़ा तो सब डर गए।
पात्र कहानी में आने वाले लोग या जानवर “इस कहानी म कन- कन पात्र का उल्लेख हुआ इस नाटक म पाँच पात्र ह।
है?”
भगदड़ डर के मारे सबका एक साथ भागना “य द शेर भी भगदड़ म शा मल हो जाता” शोर सुनकर मेले म भगदड़ मच
गई।
मेहमान जो घर आए, अितिथ “चेरापूँजी के मेहमान” आज हमारे घर मेहमान आए ह।
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