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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 6: जयपुर से पत्र
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
62 – 76 16 58 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 40 pages
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 4 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 6: जयपुर से पत्र
जयपुर से पत्र पाठ एक पत्र के रूप म लखा गया है। अमर अपने पताजी को जयपुर से पत्र लखकर अपनी यात्रा का हाल सुनाता है। वह हवामहल,
जंतर-मंतर, राम नवास बाग का कला-संग्रहालय, आमेर का दुग, शीशमहल और शला दे वी का मं दर दे खता है। इन्ह पृष्ठ म दाल-बाट चूरमा, डाक
पेट , पनकोड, पत्र लखने का तरीका, पत्र क यात्रा और अंत म लायक राम मानव क क वता गोलगप्पा भी द गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 4) 62 – 76
खं ड प्रश्न
16 58
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 64
पाठ पढ़ने के बाद कक्षा म बातचीत करने के लए दए गए प्रश्न
बातचीत के लए
प्र.1 आपको घूमना कैसा लगता है?
यह आपके अपने मन क बात है। इसका उत्तर आपको स्वयं बताना है।
अ े उत्तर म ये तीन बात होनी चा हए—
1. आपको घूमना अ ा लगता है या नह , यह साफ-साफ क हए।
2. एक कारण बताइए क ऐसा क्य लगता है।
3. एक जगह का नाम ली जए जहाँ आप घूम चुके ह।
नमूना उत्तर: मुझे घूमना बहुत अ ा लगता है। घूमने से नई-नई जगह दे खने को मलती ह। वहाँ के लोग, उनका खाना और उनके
खेल भी नए होते ह। पछली छु म म अपने मामा के गाँव गया था। वहाँ मने खेत और नद दे खी। मुझे बहुत आनंद आया।
क्य : घूमने से हम कताब के बाहर क दु नया दे खते ह। अमर ने भी जयपुर जाकर ही हवामहल और जंतर-मंतर
दे खे।
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प्र.2 अगर आपके आस-पास कोई ऐसा स्थान है जहाँ बाहर से लोग घूमने आते ह तो उसके वषय म बताइए।
यह आपके अपने गाँव या नगर के बारे म है। पहले सो चए क आपके पास कोई बाग, झील, मं दर, कला, संग्रहालय या मेला है या
नह ।
बताते समय ये बात क हए—
उस स्थान का नाम।
वह आपके घर से कतनी दूर है।
वहाँ दे खने लायक क्या है।
लोग वहाँ क्य आते ह।
नमूना उत्तर: हमारे नगर के बीच म एक पुराना कला है। वह हमारे घर से लगभग दो कलोमीटर दूर है। कले क द वार बहुत ऊँची ह
और भीतर एक बड़ा आँगन है। बाहर से आने वाले लोग उसे दे खने आते ह और चत्र ख चते ह। स दय म वहाँ बहुत भीड़ रहती है।
संकेत: य द आपके आस-पास ऐसा कोई स्थान न हो तो यही क हए, और जस नकट के नगर म ऐसा स्थान है,
उसके बारे म बताइए।
प्र.3 अगर आपको कसी स्थान पर जाने का अवसर मले तो आप कहाँ जाना चाहगे और क्य ?
पहले जगह का नाम ली जए, फर एक साफ कारण बताइए। कारण ही इस प्रश्न का असली उत्तर है।
नमूना उत्तर: मुझे जयपुर जाना अ ा लगेगा। म वहाँ हवामहल दे खना चाहता ँ। जंतर-मंतर भी दे खना चाहता ँ, क्य क वहाँ ग्रह
और तार को दे खने के यंत्र रखे ह। मुझे दाल-बाट चूरमा भी चखना है, क्य क वह राजस्थान का वशेष व्यंजन है।
क्य : अमर का पत्र पढ़कर हम जयपुर क बहुत-सी बात पता चल । जस जगह के बारे म हम पढ़ते ह, उसे अपनी
आँख से दे खने का मन करता है।
संकेत: आप कोई भी जगह चुन सकते ह — पहाड़, समुद्र, गाँव या कोई बड़ा नगर। बस कारण अपना होना चा हए।
प्र.4 य द आप या आपके प रवार का कोई सदस्य कह पर घूमने गया हो तो उसके वषय म बताइए।
यह आपके घर क अपनी बात है। घर पर पू छए और फर कक्षा म सुनाइए।
बताने का क्रम इस तरह र खए—
1. कौन गया था और कहाँ गया था।
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2. वहाँ कैसे गए — रेल से, बस से या कसी और साधन से।
3. वहाँ क्या-क्या दे खा।
4. वहाँ क्या खाया और सबसे अ बात क्या लगी।
नमूना उत्तर: पछले वष मेरे बड़े भैया अपने व ालय के साथ घूमने गए थे। वे रेलगाड़ी से गए। उन्ह ने वहाँ एक बड़ा संग्रहालय
दे खा। संग्रहालय म पुराने कपड़े और चत्र रखे हुए थे। लौटकर उन्ह ने हम सारी बात सुनाईं। मुझे उनक बात सुनकर बहुत अ ा
लगा।
संकेत: अमर ने भी यही कया — जो दे खा, वही पत्र म लखकर घर भेज दया।
समझ क बात — पृष्ठ 64–65
नीचे कुछ बहु वकल्पीय प्रश्न दए गए ह। प्रश्न के उत्तर म एक से अ धक वकल्प सही हो सकते ह। सही वकल्प के आगे (☺) बनाइए—
समझ क बात
प्र.1 शीशमहल है— (क) शला दे वी मं दर के पास (ख) आमेर के दुग म (ग) हवामहल के पास (घ) राम नवास बाग म
सही वकल्प — (क) और (ख)।
(क) िशला दे वी मंिदर के पास — सही
(ख) आमेर के दुग में — सही
(ग) हवामहल के पास — गलत
(घ) रामिनवास बाग में — गलत
पत्र क पं क्तयाँ इसे सद्ध करती ह — “आमेर म शीशमहल दे खने योग्य है। शीशमहल के पास ही शला दे वी का मं दर है।”
क्य बाक दो गलत ह: हवामहल के पास जंतर-मंतर है, शीशमहल नह । राम नवास बाग म कला-संग्रहालय है,
शीशमहल नह ।
संकेत: इस प्रश्न म दो उत्तर सही ह, क्य क शीशमहल और शला दे वी का मं दर दोन आमेर म ह और एक-दूसरे के
पास ह।
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र
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पत्र— (क) जयपुर से लखा गया था। (ख) यात्रा के बाद लखा गया था। (ग) पता को लखा गया था। (घ) अमर
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प्र.2
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ने लखा था।
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सही वकल्प — (क), (ग) और (घ)।
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(क) जयपुर से िलखा गया था। — सही
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(ख) यात्रा के बाद िलखा गया था। — गलत
(ग) िपता को िलखा गया था। — सही
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(घ) अमर ने िलखा था। — सही
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gl पत्र का संबोधन है — “पूज्य पताजी,”
पाठ का शीषक ही है — जयपुर से पत्र।
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पत्र के अंत म लखा है — “आपका पुत्र — अमर”
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(ख) क्य गलत है: अमर क यात्रा अभी चलeरही
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m है। वह लखता है — “आज दोपहर प ात् हम झील के नगर agl
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l ँगा।” इसका अथ है क पत्र यात्रा के बीच म लखा गया, यात्रा के बाद
उदयपुर जाएँगे। अगला पत्र उदयपुर सेgलखू
नह ।
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ध्यान द जए: कुछ ब े (ख) को भी सही मान सकते ह, य द वे ‘यात्रा’ का अथ केवल जयपुर तक पहुँचने वाली
m .c ल। वह यात्रा तो पूरी हो चुक थी। पर पूरी सैर अभी चल रही थी, इसaलएg यहाँ (ख) को सही नह माना गया
seहै।
रेल-यात्रा
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प्र.3
बीमारी के उपचार के लए नगरla
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s (ग) पढ़ाई के लए शलांग जाना (घ) भारत दशन पर जाना
नम्न ल खत म से कसे सैर (भ्रमण) नह कहा जाएगा— (क) ताजमहल दे खने के लए आगरा जाना (ख)
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सही वकल्प — (ख) और (ग)।
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se m (क) ताजमहल दे खने के िलए आगरा जाना — यह सैर है
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(ख) बीमारी के उपचार के िलए नगर जाना — सैर नही ं है
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(ग) पढ़ ाई के िलए िशलांग जाना — सैर नही ं है
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(घ) भारत दशन पर जाना — यह सैर है
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क्य : सैर का अथ है घूमने- फरने और कुछ नया दे खने के लए जाना। (ख) म जाना पड़ता है दवा-इलाज के लए
और (ग) म पढ़ाई के लए। ये दोन काम ह, घूमना नह । इस लए इन्ह सैर नह कहगे।
संकेत: अमर जयपुर ‘सैर के लए’ नकला था — “कल सुबह जलपान करके हम सब लोग जयपुर क सैर के लए
नकले।”
अपनी बात — पृष्ठ 65
अमर के पत्र का एक अंश नीचे दया गया है। इसे ध्यान से प ढ़ए और नीचे दए गए प्रश्न के उत्तर अपनी समझ के अनुसार ल खए— “परस
रात को हम सकुशल जयपुर पहुँच गए। हमारी यात्रा बहुत अ रही। अध्यापक ने हमारा बहुत ध्यान रखा। यहाँ मौसम अ ा है।”
अपनी बात
प्र.1 यात्रा म ऐसा क्या-क्या हुआ होगा क अमर ने अपने पत्र म लखा— (क) परस रात को हम सकुशल जयपुर पहुँच
गए।
यह अनुमान का प्रश्न है। ‘सकुशल’ का अथ है — अ तरह, बना कसी कष्ट के। इसका मतलब है क रास्ते म कोई परेशानी नह
हुई।
नमूना उत्तर: रेलगाड़ी समय पर चली होगी। सब ब को बैठने क जगह मल गई होगी। रास्ते म कसी को चोट नह लगी होगी
और कोई बीमार भी नह पड़ा होगा। कसी का सामान भी नह खोया होगा। सब ब े रात को ठ क-ठाक जयपुर पहुँच गए ह गे।
इसी लए अमर ने लखा क हम सकुशल पहुँच गए।
क्य : घर से दूर गए ब े क सबसे पहली खबर यही होती है क वह ठ क है। पताजी क चता सबसे पहले इसी
बात से दूर होती है।
प्र.2 यात्रा म ऐसा क्या-क्या हुआ होगा क अमर ने अपने पत्र म लखा— (ख) हमारी यात्रा बहुत अ रही।
यात्रा तभी अ लगती है जब रास्ता आनंद से कटे ।
नमूना उत्तर: रास्ते म सब ब ने मलकर बात क ह गी। उन्ह ने खेल खेले ह गे और गीत गाए ह गे। खड़क से खेत, नद और गाँव
दखे ह गे। सबने साथ बैठकर खाना खाया होगा। कसी से झगड़ा नह हुआ होगा। इसी लए अमर को यात्रा बहुत अ लगी।
संकेत: आप अपनी कसी यात्रा क बात भी जोड़ सकते ह। उत्तर आपका अपना होना चा हए, पर वह पत्र क इस
पं क्त से जुड़ा रहे।
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प्र.3 यात्रा म ऐसा क्या-क्या हुआ होगा क अमर ने अपने पत्र म लखा— (ग) अध्यापक ने हमारा बहुत ध्यान रखा।
ब े अपने अध्यापक के साथ गए थे। अध्यापक ने हर बात का ध्यान रखा होगा।
नमूना उत्तर: अध्यापक ने सब ब को गनकर गाड़ी म बठाया होगा। उन्ह ने समय पर सबको खाना और पानी दया होगा।
स्टे शन पर कसी ब े को अकेला नह छोड़ा होगा। रात म वे जागकर ब का ध्यान रखते ह गे। सैर के समय उन्ह ने सबका हाथ
पकड़कर सड़क पार कराई होगी। इसी लए अमर ने लखा क अध्यापक ने हमारा बहुत ध्यान रखा।
क्य : घर से दूर ब के लए अध्यापक ही माता- पता का काम करते ह। यह जानकर पताजी को संतोष हुआ
होगा।
प्र.4 यात्रा म ऐसा क्या-क्या हुआ होगा क अमर ने अपने पत्र म लखा— (घ) यहाँ मौसम अ ा है।
मौसम अ ा होने का अथ है — न बहुत गम , न बहुत सद और न वषा।
नमूना उत्तर: जयपुर म दन म तेज़ धूप नह रही होगी। ठं डी हवा चल रही होगी। वषा भी नह हुई होगी, इस लए घूमने म कोई
रुकावट नह आई। मौसम अ ा था, तभी ब े पूरे दन हवामहल, जंतर-मंतर और राम नवास बाग घूम सके।
क्य : घूमने के लए मौसम का अ ा होना ज़रूरी है। तेज़ गम या वषा म बाहर घूमना क ठन हो जाता है।
सो चए और ल खए — पृष्ठ 66
पत्र को समझकर लखने वाले प्रश्न
सो चए और ल खए
प्र.1 अमर ने जयपुर म क्या-क्या दे खा?
अमर ने जयपुर क सैर म बहुत-सी चीज़ दे ख । पत्र के अनुसार उसने ये दे खा—
हवामहल — सैर म सबसे पहले यही दे खा।
जंतर-मंतर — यह हवामहल के पास ही है। यह एक वेधशाला है। इसका नमाण राजा सवाई जय सह ने कया था। अमर ने इसे
घूम-घूमकर दे खा।
राम नवास बाग और वहाँ का कला-संग्रहालय — संग्रहालय म जयपुर के राजा-महाराजाओं के कपड़े, अस्त्र-शस्त्र और उनके
चत्र रखे हुए ह।
आमेर का दुग — यह जयपुर से लगभग चौदह कलोमीटर क दूरी पर है। यह बहुत पुराना और बड़ा है।
शीशमहल — यह आमेर म है और दे खने योग्य है।
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शला दे वी का मं दर — यह शीशमहल के पास ही है। वहाँ अमर ने दशन कए।
रात को उसने राजस्थान के लोकनृत्य भी दे खे।
ध्यान द जए: हवामहल, जंतर-मंतर और राम नवास बाग जयपुर नगर म ह। आमेर का दुग, शीशमहल और शला
दे वी का मं दर आमेर म ह, जो जयपुर से लगभग चौदह कलोमीटर दूर है।
प्र.2 उसने कला-संग्रहालय को दशनीय क्य बताया?
क्य क वहाँ ऐसी चीज़ रखी ह जो और कह दे खने को नह मलत । पत्र म लखा है — “संग्रहालय म जयपुर के राजा-महाराजाओं
के कपड़े, अस्त्र-शस्त्र और उनके चत्र रखे हुए ह।”
राजा-महाराजाओं के कपड़े — जो बहुत पुराने समय के ह।
उनके अस्त्र-शस्त्र — लड़ाई म काम आने वाले ह थयार।
उनके चत्र — जनसे पता चलता है क वे कैसे दखते थे।
क्य : ‘दशनीय’ का अथ ही है — दे खने योग्य। जो चीज़ पुरानी, अनोखी और सुंदर हो, उसे दे खने का मन करता है।
ये सब चीज़ आज बनती नह , इस लए संग्रहालय म ही दे खी जा सकती ह।
जानने क बात: पुस्तक पृष्ठ 73 पर बताती है — संग्रहालय एक ऐसा सावज नक भवन है जहाँ सांस्कृ तक,
वै ा नक, ऐ तहा सक एवं कलात्मक महत्व क वस्तुओं को प्रद शत कया जाता है।
प्र.3 उसने आमेर के दुग को बहुत बड़ा और पुराना क्य कहा है?
क्य क उसने दुग को अपनी आँख से दे खा। पत्र म वह लखता है — “आमेर का दुग है। यह बहुत पुराना और बड़ा है।”
बड़ा क्य — दुग इतना फैला हुआ है क उसके भीतर ही शीशमहल भी बना है। पास ही शला दे वी का मं दर भी है। इतनी सारी
चीज़ कसी छोटे भवन म नह आ सकत ।
पुराना क्य — दुग राजा-महाराजाओं के समय म बना था। उस समय राजा अपनी रक्षा के लए ऐसे बड़े कले बनवाते थे। आज ऐसे
दुग नह बनाए जाते। उसक पुरानी द वार और पुरानी बनावट दे खकर ही यह पता चल जाता है।
क्य : जो चीज़ हमारे जन्म से भी बहुत पहले बनी हो, उसे हम पुराना कहते ह। दुग बनाने वाले राजा आज नह ह, पर
दुग आज भी खड़ा है।
अनुमान और कल्पना — पृष्ठ 66
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प्रश्न 1 — नम्न ल खत के बारे म अनुमान लगाइए क ये क्या और कैसे ह गे? तथा प्रश्न 2
अनु मान और कल्पना
प्र.1 (क) नम्न ल खत के बारे म अनुमान लगाइए क ये क्या और कैसे ह गे? — (क) जंतर-मंतर
यह क्या है — जंतर-मंतर एक वेधशाला है। पत्र म लखा है — “इस वेधशाला का नमाण राजा सवाई जय सह ने कया था।”
यह कैसा होगा — पुस्तक पृष्ठ 73 पर बताती है क वेधशाला वह स्थान है जहाँ ग्रह , तार और नक्षत्र को दे खने के लए यंत्र रखे
जाते ह। इस लए जंतर-मंतर म बड़े-बड़े यंत्र ह गे। ये यंत्र खुले म बने ह गे, ता क आकाश दखाई दे । अमर लखता है — “हमने घूम-
घूमकर जंतर-मंतर दे खा।” इससे लगता है क यह जगह बहुत बड़ी और खुली होगी, तभी वहाँ घूम-घूमकर दे खना पड़ा।
क्य : तार को दे खने वाले यंत्र छोटे कमरे म नह रखे जा सकते। उन्ह आकाश के सामने खुला रखना पड़ता है।
प्र.1 (ख) नम्न ल खत के बारे म अनुमान लगाइए क ये क्या और कैसे ह गे? — (ख) राम नवास बाग
यह क्या है — ‘बाग’ का अथ है बगीचा। तो राम नवास बाग जयपुर का एक बड़ा बगीचा होगा।
यह कैसा होगा — उसम पेड़, फूल और घास होगी। चलने के लए रास्ते बने ह गे और बैठने के लए जगह भी होगी। लोग वहाँ घूमने
और बैठने आते ह गे। इसी बाग म एक अ ा कला-संग्रहालय भी है, जैसा अमर ने लखा है। इसका मतलब है क बाग इतना बड़ा है
क उसम एक पूरा भवन भी बना हुआ है।
क्य : अमर ने लखा — “इसके बाद हम राम नवास बाग गए। यहाँ एक अ ा कला-संग्रहालय है।” छोटे बगीचे म
इतना बड़ा संग्रहालय नह समा सकता।
प्र.1 (ग) नम्न ल खत के बारे म अनुमान लगाइए क ये क्या और कैसे ह गे? — (ग) शीशमहल
यह क्या है — ‘शीश’ का अथ है काँच। तो शीशमहल वह महल होगा जसम काँच लगे ह ।
यह कैसा होगा — उसक द वार और छत पर छोटे -छोटे काँच जड़े ह गे। द या या रोशनी जलाने पर ये काँच चमक उठते ह गे। तब
पूरा महल जगमगाता दखता होगा। यह आमेर के दुग के भीतर है और अमर लखता है क यह “दे खने योग्य है”।
क्य : शब्द के नाम से ही उसका अथ पता चल जाता है — शीश + महल = काँच वाला महल। इसी तरह हवा + महल
= हवा वाला महल।
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र
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नम्न ल खत के बारे म अनुमान लगाइए क ये क्या और कैसे ह गे? — (घ) हवामहल
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a क्याl है — ‘हवा’ और ‘महल’ — दो शब्द मलकर बने ह। तो हवामहल वह महल होगा जसम खूब हवा आती हो।
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यह कैसा होगा — उसम बहुत-सी खड़ कयाँ और झरोखे ह गे। इन्ह से हवा आती-जाती होगी, इस लए भीतर ठं डक रहती होगी।
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यह जयपुर म है और अमर ने सैर म सबसे पहले इसी को दे खा।
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क्य : राजस्थान म गम बहुत पड़ती है। ऐसी जगह हवा आने-जाने वाला भवन बहुत काम का होता है।
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संकेत: ये सब अनुमान ह। अनुमान का अथ है — जो हम जानते ह, उससे सोचकर बताना। इसी लए यहाँ ‘होगा’,
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‘ह गी’ जैसे शब्द आते ह।
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अनुमान लगाकर बताइए क उदयपुर को झील का नगर क्य कहा जाता है।
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glअमर लखता है — “आज दोपहर प ात् हम झील के नगर उदयपुर जाएँगे।”
क्य क उदयपुर म बहुत-सी झील ह गी। पत्रaम
सोचने का तरीका: कसी जगह का नाम अकसर उसी चीज़ पर पड़ता है जो वहाँ सबसे अ धक हो। जस नगर म एक-दो नह , कई
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झील ह , उसे ही लोग ‘झील का नगर’ कहने लगते ह।
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क्य : य द वहाँ केवल एक झील होती, तो उसे ‘झील का नगर’ न कहते। ‘झील ’ बहुवचन है — इसका अथ है क
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ऐसे ही सो चए: जस नगर म मं दर बहुत ह , उसे मं दर का नगर कहते ह। जहाँ बाग बहुत ह , उसे बाग का नगर
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कहते ह।
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खान-पान — पृष्ठ 66–67
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m a s em के साथ कोई प्रश्न नह दे ती; ये प्रश्न
oे लए जोड़े गए ह। gl
अमर ने जयपुर म दाल-बाट चूरमा खाया। आइए, इस ंजन के बारे म जानते ह। — पुस्तक इस जानकारी
अभ्यासcक
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प्र.1 दाल-बाट चूरमा कस प्रदे श का ंजन है? इसम कौन-से तीन मुख्य ंजन होते ह?
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दाल-बाट चूरमा एक पारंप रक राजस्थानी ंजन है। इसम तीन मुख्य व्यंजन होते ह—
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र AglaSem · NCERT Solutions
ंजन कससे बनता है
दाल अरहर, मूँग, चने या मसूर की दाल से
बाटी गेहू ँ के आटे से
चूर मा थोड़ े मोटे आटे से
दाल को कई मसाल के साथ पकाकर बनाया जाता है, जससे उसका स्वाद बढ़ जाता है। हरा ध नया उसके स्वाद को और भी बढ़ा
दे ता है।
क्य तीन साथ खाए जाते ह: दाल गीली होती है, बाट सूखी और चूरमा मीठा। तीन मलकर एक पूरी थाली बन
जाती है।
प्र.2 बाट कैसे बनाई जाती है? वह खाने म कैसी लगती है?
बाट बनाने के चरण इस क्रम म ह—
1. गे ँ के आटे से गोल लोइयाँ बनाई जाती ह।
2. इन लोइय को उपले और लक ड़य क आग म सका जाता है।
3. तैयार गरम बा टय को घी म डु बोया जाता है।
4. उसके बाद इसे खाने के लए परोसा जाता है।
खाने म कैसी लगती है — ये बा टयाँ बाहर से कुरकुरी और अंदर से मुलायम होती ह।
जानने क बात: उपला, जसे ‘गोइठा’ अथवा ‘कंडा’ भी कहा जाता है, गाय या भस के गोबर से बना एक पारंप रक
ईंधन है। इसे गोबर को हाथ से आकार दे कर और धूप म सुखाकर बनाया जाता है।
प्र.3 चूरमा बनाने क व ध अपने शब्द म ल खए।
चूरमा थोड़े मोटे आटे से बनता है। बनाने का तरीका यह है—
1. पहले बाट अथवा मोट रोट बनाई जाती है।
2. फर इसे मूसल क सहायता से ओखली म कूटा जाता है।
3. जब यह बारीक हो जाता है, तब इसम घी, सूखे मेवे और बूरा मला दया जाता है।
बूरा क्या है — बूरा गुड़ अथवा चीनी से मलता-जुलता पदाथ है। इसी से चूरमा मीठा बनता है।
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क्य कूटा जाता है: बाट सख्त होती है। कूटने से वह बारीक चूरे जैसी हो जाती है, तभी उसम घी और बूरा अ
तरह मल पाता है। इसी ‘चूरे’ से नाम पड़ा — चूरमा।
पुस्तक क बात: आधु नक समय म इसे बनाने क व ध म कुछ प रवतन आ गए ह।
आपक रु च का ज
ं न — पृष्ठ 67
अपने घर के कसी वशेष ंजन के बारे म बताने क ग त व ध
आपक रु च का ंजन
प्र.1 अब आप अपने रु चकर ंजन म से कसी एक के वषय म बताइए जो आपके घर म वशेष अवसर पर बनाया
जाता है। संक्षेप म बताइए क यह कैसे तैयार कया जाता है और इसम क्या-क्या सामग्री डाली जाती है।
यह काम आपको स्वयं करना है। घर पर माँ, दाद या नानी से पू छए और फर ल खए।
लखने का क्रम इस तरह र खए—
1. व्यंजन का नाम और वह कस अवसर पर बनता है।
2. उसम क्या-क्या सामग्री डाली जाती है।
3. वह कैसे तैयार कया जाता है — एक-एक चरण क्रम से।
4. वह खाने म कैसा लगता है।
नमूना उत्तर: हमारे घर म त्योहार के दन खीर बनाई जाती है। इसम दूध, चावल, चीनी, इलायची और थोड़े सूखे मेवे डाले जाते ह।
पहले दूध को धीमी आँच पर गरम कया जाता है। फर उसम धुले हुए चावल डाल दए जाते ह। चावल गलने तक दूध को चलाते रहते
ह। जब खीर गाढ़ हो जाती है, तब चीनी और इलायची डाली जाती है। ऊपर से सूखे मेवे डालकर परोसा जाता है। खीर मीठ और
मुलायम लगती है। मुझे वह बहुत पसंद है।
संकेत: आप कोई भी व्यंजन चुन सकते ह — पूरी, हलवा, इडली, प गल, प ा, ठे कुआ, पोहा या कुछ और। बस
व ध अपने घर क ल खए, जैसे पुस्तक ने दाल-बाट चूरमा क व ध लखी है।
इन्ह भी जा नए — पृष्ठ 68
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डाक पेट (पोस्ट बॉक्स) और पनकोड — पुस्तक इस भाग के साथ कोई प्रश्न नह दे ती; ये प्रश्न अभ्यास के लए जोड़े गए ह।
इन्ह भी जा नए
प्र.1 डाक पेट कस काम आती है? वह कस रंग क होती है?
डाक पेट एक लाल रंग क पेट होती है। इसका प्रयोग भेजी जाने वाली च य का संग्रह करने के लए कया जाता है।
जब हम कसी को च भेजनी होती है, तो हम उस पर सही पता लखकर च डाक पेट म डाल दे ते ह।
क्य लाल रंग: लाल रंग दूर से ही दखाई दे जाता है। इससे च डालने वाले को डाक पेट ढूँ ढ़ने म आसानी होती
है।
प्र.2 डाक पेट म च डालने के बाद वह पते तक कैसे पहुँचती है? क्रम से ल खए।
च इस क्रम से पते तक पहुँचती है—
1. हम च पर सही पता लखकर उसे डाक पेट म डालते ह।
2. डाकघर (पोस्ट ऑ फस) वाले डा कया भैया/बहना डाक पेट से च याँ नकालकर डाकघर ले जाते ह।
3. डाकघर से च याँ पते पर लखे नगर के डाकघर को भेजी जाती ह।
4. उसके प ात् डा कया भैया/बहना उन्ह सही पते पर दे ने जाते ह।
क्य इतने चरण: एक डा कया पूरे दे श म नह जा सकता। इस लए च पहले पास वाले डाकघर जाती है, फर उस
नगर के डाकघर, और अंत म घर तक।
प्र.3 पनकोड क्या है? उसके अंक क्या-क्या बताते ह?
पनकोड (PIN Code) छह अंक क संख्या होती है। इसे कसी वशेष क्षेत्र क पहचान के लए प्रयोग कया जाता है। यह मुख्य
रूप से डाक ( च और पासल) भेजने और प्राप्त करने म सहायता करता है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र AglaSem · NCERT Solutions
कौन-सा अंक क्या बताता है
पहला अंक राज्य को
दू स रा और तीसरा अंक िज़ ले को
अंितम तीन अंक डाकघर की पहचान
क्य ज़रूरी है: एक ही नाम के गाँव कई ज़ल म हो सकते ह। पनकोड डालने से यह पक्का हो जाता है क च
सही पते पर ही पहुँचे।
च आई है — पृष्ठ 69
पत्र कैसे लख? — प्र.1 पुस्तक ने पाठ के भीतर ही पूछा है। प्र.2–प्र.4 अभ्यास के लए जोड़े गए ह; पुस्तक इस भाग के साथ अलग से प्रश्न नह
दे ती।
च आई है
प्र.1 तो क्या आप कसी को पत्र लखने का सोच रहे ह? इसे लख और दे ख क यह प्राप्तकता तक पहुँचता है या नह ।
हाँ, आप भी अमर क तरह पत्र लख सकते ह। पुस्तक ने पत्र लखने का पूरा तरीका बताया है। नीचे वही ढाँचा चत्र म दखाया गया
है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र
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पारंभ — िदनाक
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a संबोधन पूज्य िपताजी,
अिभवादन
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सादर पणाम!
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मै ं यहाँ ठीक हूँ। कल हम सब बाग की
आपकी बात सैर के िलए गए थे। बहुत आनंद आया।
मेरी पढ़ ाई भी अच्छी चल रही है।
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अंितमmपंिक्त
माताजी को मेरा पणाम और छोटी
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बहन को बहुत प्यार।
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आपका पुत्र
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अमर
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पत्र के छह भाग — जैसे पुस्तक के पृष्ठ 69 पर ‘पत्र कैसे लख?’ म बताए गए ह।
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पत्र लखने के चरण—
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c — सबसे पहले ऊपर दाईं ओर दनांक ल खए, ता क पत्र पाने वाले को पता aचलेg क यह कब लखा गया था।
1. प्रारं.भ
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s2.e संबोधन — जसे पत्र लख रहे ह, उसका नाम आदर के साथ ल खए, जैसे — पूज्य पताजी, आदरणीय माँ, मेरे प्रय मत्र।
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agl 3. अ भवादन — संबोधन के बाद अ भवादन अवश्य ल खए, जैसे — नमस्ते, प्रणाम, आशीवाद।
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4. आपक बात — अब जो कहना चाहते ह, वह ल खए। यही पत्र का असली भाग है।
5. अं तम पं क्त — घर के अन्य लोग का अ भवादनco
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जए, जैसे — बड़ को प्रणाम और छोट को प्यार।
6. समापन — अंत म ‘आपका/आपक प्यारा
l a seबेटा/प्यारी बेट ’ या ‘आपका प्रय मत्र’ लखकर अपना नाम ल खए।
फर पत्र भे जए — पत्र को लफ़ाफ़े a
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म डा लए। लफ़ाफ़े पर एक डाक टकट चपकाइए। साफ अक्षर म पूरा पता पनकोड स हत
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ल खए। अब लफ़ाफ़ा डाक पेट म डाल द जए और दे खए क वह पहुँचता है या नह ।
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seअपनी भावनाओं को कागज पर
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क्य पत्र लखना अ ा लगता है: पुस्तक कहती है — पत्र लखते समय आपको
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g है क आप उसके पास ही बैठे ह
.cउतारने का अवसर मलता है। जब दूसरा व्य क्त इसे पढ़ता है, तो उसे ऐसाaलगता
m और उससे बात कर रहे ह।
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प्र.2 पत्र के छह भाग के नाम ल खए और बताइए क हर भाग म क्या लखा जाता है।
पुस्तक के ‘पत्र कैसे लख?’ भाग के अनुसार पत्र के छह भाग ये ह—
भाग उसम क्या लखते ह उदाहरण
पारंभ ऊपर दाईं ओर दनांक 12 जुल ाई 2025
संबोधन जसे पत्र लख रहे ह, उसका आदर के साथ नाम पूज्य िपताजी,
अिभवादन संबोधन के बाद का अ भवादन सादर पणाम!
आपकी बात जो कहना चाहते ह, वह पूरी बात हम सकु शल जयपुर पहचु ँ गए…
अंितम पंिक्त घर के अन्य लोग का अ भवादन माताजी को मेरा पणाम…
समापन अपना संबंध और अपना नाम आपका पुत्र — अमर
मलाकर दे खए: उदाहरण के सारे वाक्य अमर के अपने पत्र से लए गए ह। यानी अमर ने ठ क इसी ढाँचे म पत्र
लखा है।
प्र.3 पत्र लखने के बाद उसे भेजने के लए क्या-क्या करना पड़ता है?
पत्र भेजने के लए चार काम करने पड़ते ह—
1. पत्र को लफ़ाफ़े म डा लए। पुस्तक कहती है — पत्र को लफ़ाफ़े म डालना न भूल।
2. लफ़ाफ़े पर एक डाक टकट चपकाइए।
3. साफ अक्षर म, जसे पत्र भेज रहे ह , उसका पूरा पता पनकोड स हत ल खए।
4. अब लफ़ाफ़ा डाक पेट म डाल द जए।
क्य साफ अक्षर म लखना ज़रूरी है: पता डा कया भैया/बहना पढ़ते ह। य द अक्षर साफ न ह , तो च गलत
घर पहुँच सकती है या लौट आ सकती है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 पाठ के अनुसार पत्र लखने से क्या लाभ है? आजकल पत्र कम क्य लखे जाते ह?
लाभ — पत्र लखते समय आपको अपनी भावनाओं को कागज पर उतारने का अवसर मलता है। जब दूसरा व्य क्त इसे पढ़ता है,
तो उसे ऐसा लगता है क आप उसके पास ही बैठे ह और उससे बात कर रहे ह।
आजकल कम क्य लखे जाते ह — क्य क अब मोबाइल फोन, ईमेल और व्हाट् सएप आ गए ह। इनसे संदेश तुरंत पहुँच जाता
है। इनके आने से पहले लोग पत्र लखकर ही एक-दूसरे से संवाद करते थे।
पुस्तक क बात: “आजकल ऐसे पत्र कम लखे जाते ह, फर भी वे बहुत वशेष होते ह।” पत्र वशेष इस लए होता
है, क्य क उसे सँभालकर रखा जा सकता है और बरस बाद भी पढ़ा जा सकता है।
अ भवादन — पृष्ठ 70
प्रश्न 1 — अमर ने अपने पता को पत्र म ‘सादर प्रणाम’ लखा है। सो चए वह क्या लखता य द वह— तथा प्रश्न 2
अ भवादन
प्र.1 (क) अमर ने अपने पता को पत्र म ‘सादर प्रणाम’ लखा है। सो चए वह क्या लखता य द वह— (क) अपने मत्र
को पत्र लखता
मत्र को वह लखता — नमस्ते (या ‘सप्रेम नमस्ते’)।
संबोधन भी बदल जाता — ‘मेरे प्रय मत्र,’
क्य : मत्र हमारी ही उम्र का होता है। उसके लए ‘प्रणाम’ नह लखते, क्य क प्रणाम अपने से बड़ के लए होता है।
मत्र के लए नमस्ते ठ क रहता है।
पुस्तक क बात: पृष्ठ 69 पर लखा है — संबोधन के बाद अ भवादन अवश्य लख, जैसे — नमस्ते, प्रणाम,
आशीवाद आ द।
प्र.1 (ख) अमर ने अपने पता को पत्र म ‘सादर प्रणाम’ लखा है। सो चए वह क्या लखता य द वह— (ख) अपनी
बहन को पत्र लखता
यह इस पर नभर है क बहन बड़ी है या छोट ।
छोट बहन को — ‘बहुत प्यार’ या ‘खूब सारा प्यार’। संबोधन होता — ‘ प्रय लता,’
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र AglaSem · NCERT Solutions
बड़ी बहन को — ‘सादर नमस्ते’ या ‘प्रणाम’। संबोधन होता — ‘आदरणीय द द ,’
क्य : अपने से छोट को प्यार दया जाता है और अपने से बड़ को प्रणाम कया जाता है। अमर ने अपने पत्र म भी
लखा — “लता बहन को बहुत प्यार।”
प्र.1 (ग) अमर ने अपने पता को पत्र म ‘सादर प्रणाम’ लखा है। सो चए वह क्या लखता य द वह— (ग) अपनी माँ
को पत्र लखता
माँ को वह लखता — सादर प्रणाम।
संबोधन होता — ‘पूज्य माँ,’ अथवा ‘आदरणीय माँ,’
क्य : माँ हमसे बड़ी ह और आदर के योग्य ह। पताजी क तरह ही माँ के लए भी प्रणाम ही लखा जाता है। पुस्तक
भी कहती है — संबोधन म पूज्य या आदरणीय माँ अथवा पताजी लख सकते ह।
ध्यान द जए: अमर ने अपने पत्र के अंत म लखा — “माताजी को मेरा प्रणाम”। यानी माँ के लए वह प्रणाम ही
भेजता है।
प्र.1 (घ) अमर ने अपने पता को पत्र म ‘सादर प्रणाम’ लखा है। सो चए वह क्या लखता य द वह— (घ) अपने
अध्यापक को पत्र लखता
अध्यापक को वह लखता — सादर प्रणाम (या ‘सादर नमस्कार’)।
संबोधन होता — ‘आदरणीय अध्यापक जी,’
क्य : अध्यापक हम पढ़ाते ह और वे हमारे गुरु ह। उनके लए भी वही आदर वाला अ भवादन लखा जाता है जो
माता- पता के लए लखते ह।
याद र खए: अ भवादन उम्र और संबंध से बदलता है — बड़ को प्रणाम, बराबर वाल को नमस्ते, छोट को प्यार या
आशीवाद।
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प्र.2 आप अपने मत्र को पत्र ल खए। पत्र म आस-पास के भ्रमण-स्थल और प्र सद्ध ंजन के बारे म बताइए।
यह पत्र आपको स्वयं लखना है। पहले सोच ली जए क आपके आस-पास कौन-से घूमने के स्थान ह और कौन-सा व्यंजन प्र सद्ध
है। फर छह भाग के क्रम से ल खए।
पारंभ — िदनाक
ं 12 जुल ाई 2025
संबोधन पूज्य िपताजी,
अिभवादन सादर पणाम!
मै ं यहाँ ठीक हूँ। कल हम सब बाग की
आपकी बात सैर के िलए गए थे। बहुत आनंद आया।
मेरी पढ़ ाई भी अच्छी चल रही है।
माताजी को मेरा पणाम और छोटी
अंितम पंिक्त
बहन को बहुत प्यार।
आपका पुत्र
समापन
अमर
पत्र के छह भाग — जैसे पुस्तक के पृष्ठ 69 पर ‘पत्र कैसे लख?’ म बताए गए ह।
नमूना उत्तर:
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15 जुलाई 2025
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िपय िमत्र रोहन,
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नमस्ते !
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मै ं यहाँ ठीक हूँ। आशा है त मु भी अच्छे होगे। िपछले रिववार को मै ं अपने पिरवार के साथ हमारे नगर के पुराने
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िकले को दे खने गया था। िकला बहुत बड़ ा और पुराना है। उसकी दीवारे ं ऊँ ची है।
ं िकले के पास ही एक बड़ ा
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बाग है। वहाँ बहुत -से पेड़ और फूल है।
ं शाम को लोग वहाँ घूमने आते है।
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a gl हमारे यहाँ का सबसे पिसद्ध व्यंजन खीर है। वह दू ध, चावल और चीनी से बनती है। त्योहार के िदन हर घर में
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खीर बनती है। त मु जब आओगे, तब हम दोनों िकला दे खने चलेगं े और खीर भी खाएँगे।
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aglऔर छोटी बहन को प्यार।
अपने माता-िपता को मेरा पणाम कहना
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संकेत: ऊपर के नमूने म जगह और व्यंजन के नाम बदलकर अपने गाँव या नगर के नाम ल खए। दनांक भी आज
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का ल खए और अंत म अपना नाम ल खए।
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क्य यह पत्र ठ क है: इसम पत्र के छह भाग क्रम से ह — दनांक, संबोधन, अ भवादन, अपनी बात, अं तम पं क्त
और समापन। साथ ही प्रश्न क दोन बात भी इसम आ गई ह — भ्रमण-स्थल और प्र सद्ध व्यंजन।
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s e m क बात — पृष्ठ 70–72
भाषा
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र AglaSem · NCERT Solutions
उपसग से नए शब्द, ‘घूम-घूमकर’ जैसे शब्द, समय के अनुसार वाक्य, वग पहेली और ‘आलय’ वाले शब्द
भाषा क बात
प्र.1 नीचे दए गए उदाहरण को ध्यान से प ढ़ए। अब आप भी उसी प्रकार नए शब्द बनाकर उनका वाक्य म प्रयोग
क जए— (उपसग / मूल शब्द / नया शब्द / वाक्य प्रयोग)
पुस्तक क ता लका इस तरह द गई है—
उपसग मूल शब्द नया शब्द वाक्य प्रयोग
िव शेष िवशेष आज का दन मेरे लए वशेष है।
भर पेट .......... ..........
.......... योग उपयोग ..........
प .......... .......... ..........
अनु शासन .......... ..........
अब इसे भरकर दे खए—
उपसग मूल शब्द नया शब्द वाक्य प्रयोग
िव शेष िवशेष आज का दन मेरे लए वशेष है।
भर पेट भरपेट मने भरपेट खाना खाया।
उप योग उपयोग हम पानी का उपयोग सोच-समझकर करना चा हए।
प काश पकाश सूरज से हम प्रकाश मलता है।
अनु शासन अनुशासन हमारे व ालय म अ ा अनुशासन है।
नयम: जो शब्दांश कसी शब्द के आरंभ म लगकर उसका अथ बदल दे ता है, उसे उपसग कहते ह। जैसे ‘शेष’ के
आगे ‘ व’ लगाने से ‘ वशेष’ बन गया।
आपका अपना उदाहरण: ‘हार’ के आगे ‘आ’ लगाइए — आहार। वाक्य: हम समय पर आहार लेना चा हए।
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 नीचे दए गए वाक्य को ध्यान से प ढ़ए— ‘हमने घूम-घूमकर जंतर-मंतर दे खा।’ अब इन्ह आगे बढ़ाइए— हमने
झूम-झूमकर …, हमने कूद-कूदकर …, हमने उछल-उछलकर …, हमने …
पुस्तक म ये पं क्तयाँ अधूरी छपी ह—
पुस्तक का वाक्य आगे बढ़ाइए
हमने झूम -झूम कर ..........
हमने कू द-कू दकर ..........
हमने उछल-उछलकर ..........
हमने .......... ..........
इन्ह इस तरह पूरा कर सकते ह—
पुस्तक का वाक्य पूरा वाक्य
हमने झूम -झूम कर हमने झूम-झूमकर गीत गाया।
हमने कू द-कू दकर हमने कू द -कू दकर खेल खेल ा।
हमने उछल-उछलकर हमने उछल -उछलकर तािलयाँ बजाईं।
हमने हँस -हँस कर हमने हँस -हँस कर बाते ं की ं।
नयम: ‘घूम-घूमकर’, ‘झूम-झूमकर’, ‘कूद-कूदकर’ — इन सबम एक ही शब्द दो बार आता है। दो बार आने से पता
चलता है क काम बार-बार हुआ या दे र तक हुआ। अमर ने एक बार घूमकर नह , बहुत दे र तक घूम-घूमकर जंतर-
मंतर दे खा।
आप भी बनाइए: हँस-हँसकर, दौड़-दौड़कर, गा-गाकर, खा-खाकर, रो-रोकर। जैसे — ब े दौड़-दौड़कर गद
पकड़ते ह।
प्र.3 ता लका को ध्यान से पढ़कर उपयुक्त वाक्य ल खए— (समय / वाक्य)
पुस्तक क ता लका ऐसी द गई है — हर खाने म एक वाक्य छपा है और आगे क पं क्तयाँ खाली ह।
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र AglaSem · NCERT Solutions
समय वाक्य
जो काय बीते समय में पूरे हो गए हों। हमारी यात्रा बहुत अ थी।
..........
..........
जो काय अभी हो रहे है।
ं म गीत गा रही/रहा ँ।
..........
..........
जो काय आगे आने वाले समय में होंग े। हम सप रवार कल घूमने जाएँगे।
..........
..........
खाली पं क्तयाँ इस तरह भरी जा सकती ह—
समय वाक्य
जो काय बीते समय में पूरे हो गए हों। हमारी यात्रा बहुत अच्छी थी।
हमने घूम-घूमकर जंतर-मंतर दे खा।
रात को हमने राजस्थान के लोकनत्ृ य दे खे।
जो काय अभी हो रहे है।
ं मैं गीत गा रही/रहा हू।ँ
अमर अपने िपताजी को पत्र िलख रहा है।
बच्चे मैद ान में खेल रहे है।ं
जो काय आगे आने वाले समय में होंग े। हम सपिरवार कल घूमने जाएँगे।
अगला पत्र मैं उदयपुर से िलखूँगा।
रिववार को हम संगहालय दे खेंगे।
पहचानने का तरीका: वाक्य के अंत का शब्द बता दे ता है क काम कब हुआ।
• ‘था/थी/थे’ और ‘दे खा/ लखा’ — काम बीत चुका है।
• ‘रहा ँ / रही है / रहे ह’ — काम अभी हो रहा है।
• ‘जाएँगे / लखूँगा / दे खगे’ — काम आगे होगा।
पाठ से मलाइए: तीन तरह के वाक्य अमर के पत्र म ही मल जाते ह — “हमारी यात्रा बहुत अ रही।” (बीता
समय), “यहाँ मौसम अ ा है।” (अभी), “अगला पत्र उदयपुर से लखूँगा।” (आगे)।
प्र.4 पत्र म आए शब्द को वग पहेली से खोजकर ल खए—
पहेली इस तरह छपी है। इसम ‘उदयपुर’ पहले से घेरकर दखाया गया है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र AglaSem · NCERT Solutions
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पृष्ठ 72 क वग पहेली — छह पं क्तयाँ और छह स्तंभ।
पत्र के बारह शब्द इसम छपे ह। कुछ पं क्त म बाईं से दाईं ओर ह और कुछ स्तंभ म ऊपर से नीचे।
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र
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वही वग पहेली — पत्र म आए बारह शब्द घेरकर दखाए गए ह।
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र AglaSem · NCERT Solutions
शब्द कहाँ मला पत्र म कहाँ आया है
कला पं क्त 1, बाएँ से कला-संग्रहालय
जल पं क्त 1, बाएँ से जलपान करके
उदयपुर पं क्त 2, बाएँ से झील के नगर उदयपुर
राजा पं क्त 3, बाएँ से राजा सवाई जय सह
जंतर-मंतर पं क्त 4, पूरी पं क्त हवामहल के पास ही जंतर-मंतर है
जयिसंह पं क्त 5, बाएँ से राजा सवाई जय सह
हवामहल पं क्त 6, बाएँ से सबसे पहले हमने हवामहल दे खा
जयपुर स्तंभ 3, ऊपर से नीचे हम सकुशल जयपुर पहुँच गए
चूरमा स्तंभ 5, ऊपर से नीचे दाल-बाट चूरमा
आमेर स्तंभ 6, ऊपर से नीचे आमेर का दुग
दाल स्तंभ 6, ऊपर से नीचे दाल-बाट चूरमा
बाटी स्तंभ 1, ऊपर से नीचे दाल-बाट चूरमा
संकेत: पुस्तक म नीचे बारह खाने बने ह और पहले खाने म ‘उदयपुर’ लखा हुआ है। इसका अथ है क खोजने के
लए कुल बारह शब्द ह।
प्र.5 पत्र म संग्रहालय शब्द आया है। ऐसे और भी शब्द पता क जए, जैसे– व ालय। उन्ह सम झए और अपनी
लेखन-पु स्तका म उनका वाक्य म प्रयोग क जए।
‘संग्रहालय’ और ‘ व ालय’ — दोन के अंत म आलय आता है। ‘आलय’ का अथ है — घर या स्थान। ऐसे कुछ और शब्द ये ह—
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ वाक्य प्रयोग
िव ालय व ा का स्थान हमारा िव ालय घर के पास है।
पुस्तकालय पुस्तक का स्थान पुस्तकालय से मैं हर स प्ताह एक पुस्तक लाता हू।ँ
िचिकत्सालय इलाज का स्थान दादी को िचिकत्सालय ले जाना है।
काय लय काम करने का स्थान िपताजी सुबह काय लय जाते है।ं
दे वालय दे वता का स्थान, मं दर गाँव के दे वालय में आरती होती है।
िहमालय हम (बरफ़) का घर िहमालय पर बरफ़ जमी रहती है।
नयम: जो शब्दांश शब्द के अंत म जुड़कर नया शब्द बनाता है, उसे प्रत्यय कहते ह। यहाँ ‘आलय’ हर शब्द के अंत
म जुड़ रहा है और हर बार ‘का स्थान’ का अथ दे रहा है।
संकेत ( शक्षण-संकेत से): अवसर मले तो अपने शक्षक के साथ कसी संग्रहालय म जाइए। वहाँ रखी साम ग्रय
के बारे म जा नए और दे श के अन्य संग्रहालय क जानकारी भी ली जए।
पता लगाइए — पृष्ठ 73
खोजबीन करके उत्तर दे ने वाले प्रश्न
पता लगाइए
प्र.1 जंतर-मंतर क्या है? भारत म यह जयपुर के अ त रक्त और कहाँ-कहाँ स्थत है?
जंतर-मंतर क्या है — यह एक वेधशाला है। पत्र म लखा है — “इस वेधशाला का नमाण राजा सवाई जय सह ने कया था।”
पुस्तक पृष्ठ 73 पर बताती है — “वह स्थान जहाँ ग्रह , तार और नक्षत्र को दे खने के लए यंत्र रखे जाते ह, उसे वेधशाला कहते ह।
इन यंत्र क सहायता से ग्रह क ग त- स्थ त का नरंतर अध्ययन कया जाता है।”
और कहाँ-कहाँ है — यह जानकारी पुस्तक म नह द गई है। यह खोजबीन का प्रश्न है। इसे अपने शक्षक से पू छए, पुस्तकालय क
कसी पुस्तक म दे खए या भारत के मान चत्र म खो जए।
नमूना उत्तर: राजा सवाई जय सह ने जयपुर के अ त रक्त दल्ली, उ ैन, मथुरा और वाराणसी म भी जंतर-मंतर बनवाए थे। इनम
से जयपुर और दल्ली के जंतर-मंतर आज भी दे खे जा सकते ह।
ध्यान द जए: यह नमूना उत्तर पुस्तक से नह लया गया है। इसे अपने शक्षक या कसी पुस्तक से मलाकर अवश्य
दे खए, फर अपनी पु स्तका म ल खए।
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 आपके राज्य म कौन-कौन से दशनीय स्थल ह? उनका सं क्षप्त प रचय द जए।
यह आपके अपने राज्य के बारे म है। आपको स्वयं पता करना है।
पता करने का तरीका—
1. घर के बड़ से पू छए क हमारे राज्य म घूमने के कौन-से स्थान प्र सद्ध ह।
2. अपने शक्षक से पू छए और राज्य का मान चत्र दे खए।
3. हर स्थान के बारे म दो-तीन वाक्य ल खए — वह कस नगर म है और वहाँ दे खने लायक क्या है।
नमूना उत्तर (राजस्थान के लए, इसी पाठ के आधार पर):
हवामहल — यह जयपुर म है। इसे दे खने बहुत लोग आते ह।
जंतर-मंतर — यह हवामहल के पास है। यह एक वेधशाला है, जसे राजा सवाई जय सह ने बनवाया था।
राम नवास बाग — जयपुर का बाग, जसम एक अ ा कला-संग्रहालय है। वहाँ राजा-महाराजाओं के कपड़े, अस्त्र-शस्त्र और
चत्र रखे ह।
आमेर का दुग — जयपुर से लगभग चौदह कलोमीटर दूर। यह बहुत पुराना और बड़ा है।
शीशमहल — आमेर म है और दे खने योग्य है। इसके पास ही शला दे वी का मं दर है।
उदयपुर — इसे झील का नगर कहा जाता है।
संकेत: ऊपर के सभी स्थान इसी पाठ से लए गए ह। य द आपका राज्य राजस्थान नह है, तो अपने राज्य के स्थान
के नाम पता करके इसी तरह ल खए।
कुछ क जए — पृष्ठ 73
कक्षा और घर के बाहर करने वाली ग त व धयाँ
कु छ क जए
प्र.1 अपने शक्षक या कसी बड़े सदस्य के साथ डाकघर जाइए। वहाँ क्या-क्या काम कए जाते ह, इसक जानकारी
एक त्रत क जए।
यह काम आपको स्वयं करना है। कसी बड़े के साथ ही जाइए।
जाने से पहले ये प्रश्न लख ली जए—
1. यहाँ दन भर म कतनी च याँ आती ह?
2. डाक टकट कहाँ से मलता है और उसका क्या दाम है?
3. च को दूसरे नगर पहुँचने म कतने दन लगते ह?
4. डा कया भैया/बहना कतने घर म च पहुँचाते ह?
नमूना उत्तर (डाकघर म ये काम होते ह):
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र AglaSem · NCERT Solutions
डाक पेट से च याँ नकालकर यहाँ लाई जाती ह।
च य को पते के अनुसार अलग-अलग कया जाता है।
च याँ पते पर लखे नगर के डाकघर को भेजी जाती ह।
यहाँ डाक टकट मलते ह।
च और पासल भेजे और प्राप्त कए जाते ह।
डा कया भैया/बहना यह से च याँ लेकर घर-घर पहुँचाने जाते ह।
आज ीड पोस्ट जैसी सु वधाएँ भी उपलब्ध ह।
संकेत: डाकघर जाकर अपने घर का पनकोड अवश्य पू छए और उसे अपनी पु स्तका म लख ली जए।
प्र.2 सभी व ाथ चार-चार के समूह म भारत के प्रमुख पयटन स्थल के चत्र का संग्रह कर कक्षा म प्रद शत क जए।
यह समूह म करने वाला काम है। इसे इस तरह क जए—
1. अपनी कक्षा के चार-चार ब का एक समूह बनाइए।
2. पुराने समाचार-पत्र, प त्रका या कैलडर से पयटन स्थल के चत्र का टए।
3. हर चत्र को एक बड़े चाट पर चपकाइए।
4. हर चत्र के नीचे उस स्थान का नाम और वह कस राज्य म है, यह साफ अक्षर म ल खए।
5. चाट को कक्षा क द वार पर लगाइए और सबको दखाकर उसके बारे म बताइए।
नमूना चाट-पं क्त:
चत्र स्थान का नाम राज्य
िचत्र 1 हवामहल राजस्थान
िचत्र 2 जंतर-मंतर राजस्थान
िचत्र 3 आमेर का दुग राजस्थान
संकेत: पृष्ठ 75 क ‘शब्द का फुहारा’ पहेली म भी छह प्र सद्ध स्थान के नाम मलते ह। उन्ह भी अपने चाट म जोड़
सकते ह।
पत्र क यात्रा — पृष्ठ 74
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पुराने समय म पत्र कैसे भेजे जाते थे — पुस्तक इस भाग के साथ कोई प्रश्न नह दे ती; ये प्रश्न अभ्यास के लए जोड़े गए ह।
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पत्र क यात्रा
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a s em काल म संदेश या पत्र भेजने के कौन-कौन से तरीके थे?
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प्राचीन
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पुस्तक के अनुसार चार तरीके थे—
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1. दूत — संदेश या पत्र भेजने के लए व्य क्त- वशे
पहुँचा दे ते थे।
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2. पक्षी — लंबी दूरी के लए प क्षय , वशेषकर कबूतर ारा पत्र भेजे जाते थे।
3. बारी-बारी दौड़ने वाले दूत — अ त आवश्यक पत्राचार के लए दूत बारी-बारी से दौड़कर पत्र पहुँचातेm
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a थे।
थे।
c mबी दूरी तक संदेश पहुँचाने के लए अश्वदूत अथात् घुड़सवार ारा भी पत्र भेaजgे lजाते
4. अश्वदूत —oलं
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agl क्य अलग-अलग तरीके: दूरी के हसाब से तरीका बदल जाता था। पास के गाँव के लए पैदल दूत काफ था। दूर
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के नगर के लए घोड़ा या कबूतर चा हए था, क्य क वे तेज़ होते ह।
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‘बारी-बारी से दौड़कर’ पत्र पहुँचाने का तरीका क्या था? वह जल्द क्य पहुँचता था?
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इस तरीके म एक दूत पत्र लेकर कुछ न त दूरी तक दौड़ता था। उसके बाद वह दूसरे संदेशवाहक को पत्र पकड़ा दे ता था। फर
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दूसरा दूत आगे दौड़ता था।
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क्य जल्द पहुँचता था: एक ही आदमी बहुत दूर तक नह दौड़ सकता, वह थक जाता है। पर जब हर दूत थोड़ी दूरी
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दौड़े, तो कोई नह थकता और सब पूरी तेज़ी से दौड़ते ह। इसी से पत्र बहुत जल्द पहुँच जाता था।
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ध्यान द जए: यह तरीका केवल अ त आवश्यक पत्राचार के लए काम म लाया जाता था, क्य क इसम कई दूत
लगते थे।
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g सु वधा उपलब्ध है?
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भारत म डाक वभाग क स्थापना सन् 1854 म हुई। इसके बाद दे शभर म डाकघर खोले गए।
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आज इस यात्रा म ीड पोस्ट जैसी सु वधाएँ भी उपलब्ध ह।
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क्य डाकघर खोले गए: जब हर नगर और गाँव म डाकघर खुल गया, तब हर व्य क्त च भेज सका। पहले तो
केवल राजा-महाराजा ही दूत भेज पाते थे।
जोड़कर दे खए: पुराने समय म दूत पैदल या घोड़े पर जाता था। आज च डाक पेट , डाकघर और डा कया भैया/
बहना के रास्ते से पते पर पहुँचती है।
शब्द का फुहारा — पृष्ठ 75
फुहारे म द गई शब्द पहेली को नदश क सहायता से हल क जए—
शब्द का फु हारा
प्र.1 फुहारे म द गई शब्द पहेली को नदश क सहायता से हल क जए— 1. राजस्थान का एक प्र सद्ध पयटन स्थल
उत्तर — हवामहल
3. 4.
चा हा
िब 5.
2. ला
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1. 6.
पृष्ठ 75 का ‘शब्द का फुहारा’ — हर धारा म एक शब्द है। कुछ अक्षर पहले से छपे ह, बाक गोले खाली ह।
पहली धारा म पहले दो गोले पहले से भरे ह — ह और वा। आगे के तीन गोल म म, ह, ल भरने से बनता है — ह + वा + म + ह +
ल = हवामहल।
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क्य यही उत्तर है: इसी पाठ म लखा है — “सबसे पहले हमने हवामहल दे खा।” हवामहल जयपुर म है और जयपुर
राजस्थान म है।
प्र.2 फुहारे म द गई शब्द पहेली को नदश क सहायता से हल क जए— 2. महाराष्ट्र क एक प्र सद्ध गुफा
उत्तर — अजंता
3. 4.
चा हा
िब 5.
2. ला
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1. 6.
पृष्ठ 75 का ‘शब्द का फुहारा’ — हर धारा म एक शब्द है। कुछ अक्षर पहले से छपे ह, बाक गोले खाली ह।
दूसरी धारा म केवल तीन गोले ह और पहला गोला पहले से भरा है — अ। बाक दो म जं और ता भरने से बनता है — अ + जं + ता
= अजंता।
कैसे पहचान: धारा म केवल तीन गोले ह, यानी उत्तर तीन अक्षर का है और वह ‘अ’ से शुरू होता है। अजंता क
गुफाएँ महाराष्ट्र म ह।
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 फुहारे म द गई शब्द पहेली को नदश क सहायता से हल क जए— 3. हैदराबाद म एक प्र सद्ध मीनार
उत्तर — चारमीनार
3. 4.
चा हा
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1. 6.
पृष्ठ 75 का ‘शब्द का फुहारा’ — हर धारा म एक शब्द है। कुछ अक्षर पहले से छपे ह, बाक गोले खाली ह।
तीसरी धारा का बाहरी गोला चा है और भीतर का अं तम गोला र है। बीच के तीन गोल म र, मी, ना भरने से बनता है — चा + र +
मी + ना + र = चारमीनार।
नाम का अथ: ‘चार’ और ‘मीनार’ — दो शब्द मलकर बने ह। इसम चार मीनार ह, इसी लए यह नाम पड़ा।
प्र.4 फुहारे म द गई शब्द पहेली को नदश क सहायता से हल क जए— 4. कोलकाता का एक प्र सद्ध पुल
उत्तर — हावड़ा ज
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1. 6.
पृष्ठ 75 का ‘शब्द का फुहारा’ — हर धारा म एक शब्द है। कुछ अक्षर पहले से छपे ह, बाक गोले खाली ह।
चौथी धारा म तीन गोले पहले से भरे ह — बाहर हा और भीतर तथा ज। बीच के दो गोल म व और ड़ा भरने से बनता है — हा +
व + ड़ा + + ज = हावड़ा ज।
संकेत से मलान: नदश म ‘पुल’ कहा गया है और धारा म ‘ ’ तथा ‘ज’ पहले से छपे ह। ‘ ज’ का अथ ही पुल
होता है।
प्र.5 फुहारे म द गई शब्द पहेली को नदश क सहायता से हल क जए— 5. दल्ली का एक प्र सद्ध कला
उत्तर — लाल कला
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पृष्ठ 75 का ‘शब्द का फुहारा’ — हर धारा म एक शब्द है। कुछ अक्षर पहले से छपे ह, बाक गोले खाली ह।
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पाँचव धारा म चार गोले ह। बाहर वाला ला और भीतर वाला ला पहले से भरे ह। बीच के दो गोल म ल और क भरने से बनता है
m .
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— ला + ल + क + ला = लाल कला।
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नाम.cका अथ: यह कला लाल रंग का है, इसी लए इसे लाल कला कहते ह। यह
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फुहारे म द गई शब्द पहेली को नदश क सहायता से हल क जए— 6. आगरा का एक प्र सद्ध पयटन स्थल
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उत्तर — ताजमहल
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3. 4.
चा हा
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1. 6.
पृष्ठ 75 का ‘शब्द का फुहारा’ — हर धारा म एक शब्द है। कुछ अक्षर पहले से छपे ह, बाक गोले खाली ह।
छठ धारा म बाहर ता और भीतर ल पहले से भरे ह। बीच के तीन गोल म ज, म, ह भरने से बनता है — ता + ज + म + ह + ल =
ताजमहल।
पूरी पहेली हल होने पर फुहारा इस तरह दखेगा—
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3. 4.
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1. 6.
फुहारे के सभी गोले भरने पर बनने वाले छह शब्द।
जोड़कर दे खए: ताजमहल का नाम इसी पाठ म पहले भी आ चुका है — पृष्ठ 65 के प्रश्न म “ताजमहल दे खने के
लए आगरा जाना”।
गोलगप्पा — पृष्ठ 76
इसी पाठ के पृष्ठ म द गई लायक राम मानव क क वता। पुस्तक इस रचना के साथ कोई अभ्यास नह दे ती; ये प्रश्न अभ्यास के लए जोड़े गए
ह।
गोलगप्पा
प्र.1 क व ने गोलगप्पे को ‘भरा मटर से एक बताशा’ क्य कहा है?
क वता क पहली दो पं क्तयाँ ह—
भरा मटर से एक बताशा,
मुँह में फूटे फक्क।
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गोलगप्पा बताशे जैसा गोल और पोला होता है। बताशा भी मुँह म रखते ही फूट जाता है। गोलगप्पे के भीतर मटर भरा जाता है।
इसी लए क व ने उसे ‘मटर से भरा हुआ बताशा’ कहा है।
क्य यह तुलना अ लगती है: बताशा हर ब े ने खाया होता है। जानी-पहचानी चीज़ से तुलना करने पर नई
चीज़ तुरंत समझ म आ जाती है।
प्र.2 क वता म गोलगप्पे के कौन-कौन से नाम आए ह? कौन-कौन इसे खाता है?
क वता म दो नाम आए ह — पचकू और गोलगप्पा।
कोई इसको िपचकू बोले,
कोई गोलगप्पा।
दादा-दादी खाएँ मजे से,
खाएँ अम्मा-बप्पा।
कौन खाता है — दादा-दाद और अम्मा-बप्पा। यानी घर के बड़े-बूढ़े भी इसे मजे से खाते ह।
क्य क व ने यह बताया: इससे पता चलता है क गोलगप्पा केवल ब का नह है। घर के हर सदस्य को यह पसंद
है।
जानने क बात: एक ही चीज़ के अलग-अलग जगह अलग नाम होते ह। अपने घर म पू छए क आपके यहाँ इसे
क्या कहते ह।
प्र.3 क वता के अनुसार गोलगप्पे का स्वाद कैसा होता है?
क वता कहती है—
ख ा, तीखा और चटपटा,
पानी िनकले भक्क।
गोलगप्पे का स्वाद ख ा, तीखा और चटपटा होता है। मुँह म रखते ही वह ‘फक्क’ करके फूटता है और उसका पानी ‘भक्क’ से
नकलता है।
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‘फक्क’ और ‘भक्क’ क्य : ये आवाज़ बताने वाले शब्द ह। इन्ह पढ़ते ही कान म वही आवाज़ सुनाई दे ती है और
खाने का दृश्य आँख के सामने आ जाता है।
प्र.4 क वता म गोलगप्पा खाने का कौन-सा तरीका बताया गया है?
तीसरे पद म तरीका बताया गया है—
मुँह फैलाओ खूब बड़ ा-सा,
झटपट अंद र रक्खो।
बड़ ी सावधानी से इसका,
स्वाद िनराला चक्खो।
तरीका तीन चरण म है—
1. मुँह खूब बड़ा फैलाइए।
2. गोलगप्पे को झटपट मुँह के अंदर रख ली जए।
3. फर बड़ी सावधानी से उसका नराला स्वाद च खए।
मुँह बड़ा क्य : गोलगप्पा गोल और बड़ा होता है और उसम पानी भरा रहता है। मुँह छोटा रखने पर वह टू ट जाएगा
और सारा पानी बाहर गर जाएगा।
प्र.5 ‘चूक गए थोड़ा-सा भी य द’ — तो क्या होता है? क वता के आधार पर बताइए।
अं तम पद इसका उत्तर दे ता है—
चूक गए थोड़ ा-सा भी यिद,
िबगड़ गया जो ढं ग।
खाँस-खाँस कर हाल बुरा हो,
कपड़ े हों बदरंग।
थोड़ी-सी चूक होने पर दो बात होती ह—
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कक्षा 4 हद अध्याय 6 जयपुर से पत्र
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खाँस-खाँसकर बुरा हाल हो जाता है।
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कपड़े बदरंग हो जाते ह।
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क्य ऐसा होता है: गोलगप्पे का पानी तीखा होता है। वह गले म चला जाए तो खाँसी आ जाती है। और य द
gl हाथ म ही फूट जाए, तो पानी कपड़ पर गरकर उन पर दाग छोड़ दे ता है।
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क वता क मज़ेदार बात: पूरी क वता म हर दूसरी पं क्त के अंत म मलते-जुलते शब्द आते ह — फक्क–भक्क,
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गोलगप्पा–बप्पा, रक्खो–चक्खो, ढं ग–बदरंग। इसी से क वता गाने म अ
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लगती है।
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अध्याय .— a
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अमर अपने पताजी को जयपुर से पत्र लखता है। वह बताता है क वे सकुशल जयपुर पहुँच गए और यात्रा बहुत अ रही।
जयपुर म उसने सबसे पहले हवामहल दे खा। हवामहल के पास ही जंतर-मंतर है, जो एक वेधशाला है। इसका नमाण राजा
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फर वह राम नवास बाग गया। वहाँ के कला-संग्रहालय.cमoराजा-महाराजाओं के कपड़े, अस्त्र-शस्त्र और उनके चत्र रखे हुए ह। agl
सवाई जय सह ने कया था।
जयपुर से लगभग चौदह कलोमीटर दूर आमेaरsका emदुग है। वहाँ शीशमहल देखने योग्य है और उसके पास ही शला देवी का
मं दर है। agl
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रात को अमर ने राजस्थान के लोकनृत्य दे खे और दाल-बाट चूरमा खाया। आगे वह झील के नगर उदयपुर जाएगा।
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पाठ के साथ पत्र लखने का तरीका, डाक पेट , पनकोड और पुराने समय म पत्र भेजने के तरीके भी बताए गए ह। अंत म
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‘गोलगप्पा’ क वता है।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ क पं क्त आपका अपना वाक्य
सकुशल अच्छी तरह, िबना िकसी कष्ट के परस रात को हम सकुशल जयपुर पहुँच गए। हम सब सकुशल घर लौट
आए।
जलपान हल्का नाश्ता कल सुबह जलपान करके हम सब लोग जयपुर माँ ने हम जलपान कराया।
क सैर के लए नकले।
सैर घूम ना, भमण …जयपुर क सैर के लए नकले। र ववार को हम बाग क सैर
करते ह।
वेधशाला वह स्थान जहाँ ग हों, तारों और नक्षत्रों को दे खने इस वेधशाला का नमाण राजा सवाई जय सह ने जंतर-मंतर एक पुरानी
के िलए यंत्र रखे जाते है ं कया था। वेधशाला है।
संग्रहालय सावजिनक भवन जहाँ महत्व की वस्तुए ँ पदिशत यहाँ एक अ ा कला-संग्रहालय है। हम कल संग्रहालय दे खने
की जाती है ं जाएँगे।
दशनीय दे खने योग्य यह दशनीय है। हमारे नगर का बाग बहुत
दशनीय है।
दुग िकला …आमेर का दुग है। यह बहुत पुराना और बड़ा दुग क द वार बहुत ऊँची ह।
है।
लोकनृत्य िकसी पदे श का अपना पारंपिरक नत्ृ य रात को हमने राजस्थान के लोकनृत्य दे खे। मेले म हमने लोकनृत्य दे खा।
व्यंजन पकाया हुआ स्वािदष्ट भोजन फर राजस्थान का वशेष व्यंजन दाल-बाट त्योहार पर घर म कई व्यंजन
चूरमा खाया। बनते ह।
उपला गाय या भैस
ं के गोबर से बना पारंपिरक ईंध न … जन्ह उपले और लक ड़य क आग म सका गाँव म उपले से चूल्हा
जाता है। जलाया जाता है।
पनकोड छह अंक ों की संख्या जो िकसी िवशेष क्षेत्र की पनकोड (PIN Code) छह अंक क संख्या लफ़ाफ़े पर पनकोड
पहचान बताती है होती है। अवश्य ल खए।
दूत संदे श या पत्र ले जाने वाला व्यिक्त …व्य क्त- वशेष होते थे जन्ह दूत कहा जाता राजा ने दूत के हाथ संदेश
था। भेजा।
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