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Board Of School Education Haryana
मॉडल पेपर
उत्तर
2025
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Answer key
कक्षा: 11
विषय: लोक प्रशासन
Ans1. प्रबंधकीय दृष्टिकोण 1
Ans2. एकाधधकार 1
Ans3. 153 1
Ans4. िी. एन. पुरी 1
Ans5. पुललस अधीक्षक 1
Ans6. हेनरी फेयोल 1
Ans.7 पद- सोपान 1
Ans.8 6 महीने 1
Ans.9 पंचायत सलमतत 1
Ans.10 लोकसभा का अध्यक्ष 1
Ans.11 लोकसभा अध्यक्ष के मार्गदशगन में कायग करती है 1
Ans.12 ककसी संर्ठन एिं जनता के बीच संपकग 1
Ans.13 राजनीततक विज्ञान से 1
Ans.14 दो प्रकार के होते हैं – 1)औपचाररक संर्ठन
2) अनौपचाररक संर्ठन 1
Ans.15 लोकसभा 1
Ans.16 तीन स्तर. 1
Ans.17 14 1
Ans 18 वित्त मंत्रालय 1
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Ans.19 (B) A और R दोनों सही हैं तथा A की सही व्याख्या R नहीं है।
1
Ans. 20 ( C) A सही है ,लेककन R र्लत है। 1
अतत लघु उत्तरात्मक उत्तर
Ans 21 1.प्रशासन ककसी विशेष उद्दे श्य की पूततग के ललए ककया जाने िाला कायग है।
2. प्रशासन में एक से अधधक व्यष्ततयों के सहयोर् की भािना से काम करना तनहहत है।
3. प्रशासन सामूहहक प्रयत्नों का बुद्धधमत्ता से उपयोर् करके उद्दे श्य की प्राष्तत करता है।
2
Ans. 22 1.यह तनजी लाभ कमाने पर बल दे ता है। 2
2. यह व्यापाररक तथा िाणणज्य का क्षेत्र में उपयोर्ी है ।
अथिा
प्रशासन का िह स्िरूप ष्जसमें सािगजतनक जनता का कल्याण तनहहत हो लोक प्रशासन कहलाता है।
Ans.23 1.राज्यपाल और मंत्री पररषद के बीच मुख्य कडी का काम करना 2
2. मंत्रत्रमंडल की बैठकों के अध्यक्षता करना
3.राज्यपाल का मुख्य सलाहकार
4.मंत्री पररषद में विभार्ों का बंििारा करना
5.विलभन्न विभार्ों में समन्िय स्थावपत करना
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Ans.24 1. संर्ठन के सभी कमगचाररयों का उत्तरदातयत्ि तनष्श्चत कर हदया जाता है ।
2
2.इस पद्धतत में आदे श की एकता के लसद्धांत को पण
ू ग मान्यता दी जाती है।
Ans.25 ककसी उच्च अधधकारी द्िारा तनम्न अधधकारी के कायों का अिलोकन पयगिेक्षण कहलाता है।
पयगिेक्षण के अंतर्गत उच्च अधधकाररयों द्िारा अधीनस्थों का मार्गदशगन करना तथा उनके पररणामों की जांच
करना भी आता है। 2
अथिा
1.कायग की विषय िस्तु का विशेष ज्ञान
2.जनसंपकग व्यिहार में प्रलशक्षक्षत, कायग से प्रेम, साहस और सहनशीलता
3.प्रशासकीय योग्यताएं, तनटपक्षता एिं ईमानदारी। इत्याहद।
Ans26. 1) समन्िय करना कहठन. 2
2) प्रशासन में एकरूपता का अभाि
अथिा
1)तनणगय लेने में शीघ्रता
2)धन की बचत, समय की बचत।
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Ans27. लोक लेखा सलमतत के अध्यक्ष का चुनाि सदस्यों द्िारा ककया. जाता है। परं परा के अनुसार
लोकसभा में विपक्ष के नेता को सलमतत का अध्यक्ष बनाया जाता है । 2
Ans28. वित्त पर तनयंत्रण करने के ललए संसद की तीन सलमततयां होती हैं : 2
1)लोक लेखा सलमतत 2)आकलन सलमतत 3) सरकारी उद्यम सलमतत
Ans29. 1) प्रेस तथा प्रशासन विभार्
2) रे डडयो एिं िे लीविजन
भार् स
लघु उत्तरात्मक उत्तर
Ans30. 1)लोक प्रशासन की व्यष्ततर्त जीिन में भूलमका - लोक प्रशासन. व्यष्तत के जीिन में पूिग से
लेकर अंत तक साथ रहता है। बालक जन्म से पूिग सरकार द्िारा संचाललत प्रसूतत र्ह
ृ ,र्भगिती महहला की
दे खभाल, राज्य संचाललत विद्यालय में लशक्षा ग्रहण करना, लशक्षा समाष्तत पर रोजर्ार कायागलय में नाम दजग
करिाना, राज्य पररिहन की बस या रे ल मंत्रालय द्िारा संचाललत रे लर्ाडी में यात्रा करना, कर दाता के रूप में
आयकर विभार् के कमगचाररयों से संपकग करना ,स्थानीय स्तर पर लशक्षा ,स्िास््य ,त्रबजली ,पानी, सफाई
आहद जीिन की सभी र्ततविधधयों में लोक प्रशासन प्रत्यक्ष रूप से हहस्सेदारी तनभाता है ।
2)लोक प्रशासन का प्रशासकों के ललए महत्ि- प्रशासक प्रशासन के विविध कायों को तभी सफलतापूिगक
संपन्न करिा सकते हैं जब उन्हें प्रशासन का पयागतत ज्ञान हो। प्रशासतनक कहठनाइयों का सामना करना
प्रशासन में समन्िय कैसे स्थावपत करें , अधीनस्थ कमगचाररयों को अनुशालसत कैसे रखें, एक अच्छा प्रशासक
कैसे बने, इन सभी प्रश्नों का जिाब केिल लोक प्रशासन के समुधचत ज्ञान के द्िारा ही प्रातत ककया जा
सकता है।
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3)लोक नीतत को व्यिहाररक जामा पहनाने िाला यंत्र. - लोक प्रशासन बदलती हुई सामाष्जक आिश्यकताओं
में पररष्स्थततयों को ध्यान में रखकर नीततयों को लार्ू करता है । यहद लोक प्रशासन ना हो तो यह नीततयां
तनयम कायगक्रम तथा तनयोजन केिल कार्ज के पन्नों में ही लसमि कर रह जाएंर्े।
4)सामाष्जक व्यिस्था बनाए रखना - समाज के सभी िर्ों के मध्य जीिन के आधारभूत सुविधाएं रोिी,
कपडा और मकान व्यिष्स्थत और समान रूप से वितररत करने का कहठन कायग लोक प्रशासन द्िारा ककया
जाता है। सामाष्जक पररितगन से होने िाली उथल-पथ
ु ल ,जातीय धालमगक ि सांप्रदातयक दं र्े यद्
ु ध के कारण
उत्पन्न बधाओ का सामना करके एक ष्स्थर समाज का तनमागण केिल लोक प्रशासन के द्िारा ही ककया
जाता है। 4
अथिा
Ans.
1) प्रशासन में एक से अधधक व्यष्ततयों के सहयोर् की भािना से काम होता है।
2) प्रशासन ककसी विशेष उद्दे श्य की पूततग के ललए ककया जाने िाला कायग है।
3) प्रशासन सामूहहक प्रयत्नों का बुद्धधमत्ता से उपयोर् करके उद्दे श्य की प्राष्तत करता है।
4) यह उद्दे श्य इस कक्रया में भार् लेने िाले व्यष्ततयों के उद्दे श्य से लभन्न है।
5) प्रशासन एक प्रकक्रया है जो अनेक उप प्रकक्रयाओं से लमलकर बनी है जैसे योजना, संर्ठन ,कालमगक
प्रशासन,तनदे शन ,समन्िय, तनयंत्रण ,
Ans 31.लोक प्रशासन तनजी प्रशासन से कई तरीकों से विलभन्न असमानताएं रखता है । जो कक तनम्न है -
4
1) कानून पालन की दृष्टि से
2) क्षेत्र की लभन्नता
3) कायों के स्िरूप के आधार पर अंतर
4) लाभ की दृष्टि से लोक प्रशासन में तनजी प्रशासन में लभन्नता
5) सामान्य व्यिहार में दोनों प्रशासन में लभन्नता
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6)उत्तरदातयत्ि का अंतर
7)लोक प्रशासन ि तनजी प्रशासन को लेकर जनता के दृष्टिकोण में अंतर।
इत्याहद
Ans 32.
1) संविधान के द्िारा राज्य प्रशासन का स्ितंत्र अष्स्तत्ि कायम ककया र्या है।
2) राज्य प्रशासन वित्तीय दृष्टि से केंद्र पर तनभगर रहते हैं। अपनी विलभन्न विकास योजनाओं के ललए
पूणगतया केंद्रीय सहायता पर तनभगर होते हैं।
3) दे श में संकिकाल की ष्स्थतत उत्पन्न होने पर राज्य प्रशासन केंद्र प्रशासन के हदन आ जाता है ।
4) भारत में पंचायती राज एति लार्ू होने के पश्चात स्थानीय संस्थाओं को राज्य प्रशासन के अधीन कर
हदया र्या है।
5) भारत में राज्यों के ललए अलर् संविधान नहीं है।
6) राज्य प्रशासन में अणखल भारतीय सेिाओं का प्रिेश होने से राज्य प्रशासन की स्िायत्तता पर प्रभाि
पडा है।
Ans 33 अनुच्छे द 157 के अंतर्गत राज्यपाल के पद के ललए तनम्नललणखत योग्यताएं तनष्श्चत की र्ई हैं -
4
1) िह भारत का नार्ररक हो
2) उसकी आयु 35 िषग से कम ना हो
3) िह संसद अथिा ककसी राज्य के विधान मंडल का सदस्य ना हो
4) सरकार के अधीन ककसी लाभ के पद पर ना हो
5) िह पार्ल या हदिाललया ना हो।
अथिा
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1) विधानसभा का कायगकाल 5 िषग होता है परं तु राज्यपाल उसे 5 िषग से पूिग भी भंर् कर सकता है।
2) राज्यपाल को यह अधधकार होता है कक िह आम चुनाि के बाद विधान पाललका का अधधिेशन बुलाए
और उसके सामने नीतत तथा भाभी कायगक्रम का िणगन करें।
3) राज्य विधान मंडल जो त्रबल पास करता है िह र्िनगर के पास स्िीकृतत के ललए भेजा जाता है कक
अनुमतत के पश्चात िह एति बनता है तथा कानून के रूप में लार्ू होता है।
4) ष्जन राज्यों में दवि सदनात्मक विधान पाललका है िहां ऊपरी सदन विधान पररषद के कुछ सदस्यों
को र्िनगर सामाष्जक सेिाओं और योग्यताओं के आधार पर मनोनीत करता है ।
5) जब राज्य के विधान मंडल का अधधिेशन में हो रहा हो तो र्िनगर अध्यादे श जारी कर सकता है ।
6) राज्यपाल को अनुच्छे द 166 के अंतर्गत राज्य सरकार के काम को कुशलता पूिगक चलाने के ललए
और उसे काम को मंत्रत्रयों में बांिने के ललए तनयमों का तनमागण करने का अधधकार प्रातत है।
Ans 34 संविधान के अनुच्छे द 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की तनयुष्तत. राज्यपाल द्िारा की जाती
है।राज्य विधानसभा में ष्जस राजनीततक दल अथिा दलीय र्ठबंधन का बहुमत होता है उसे दल के नेता को
राज्यपाल ,मुख्यमंत्री तनयुतत करता है। 1+3
मुख्यमंत्री के कायग
1) मंत्रत्रमंडल की बैठकों की अध्यक्षता करना
2) विलभन्न विभार्ों में समन्िय करना
3) राज्यपाल और मंत्री पररषद के बीच कडी का कायग करना
4) मंत्रत्रयों में विभार्ों का बंििारा करना
5) मंत्रत्रयों को पद से हिाना
6) मंत्री पररषद का पुनर्गठन करना
7)महत्िपूणग पदों पर तनयुष्ततयां
8)राज्यपाल के मुख्य सलाहकार के रूप में कायग करना
इत्याहद ।
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Ans 35.
1) विकास योजनाओं को लार्ू करना, उत्पादन में िद्
ृ धध करने के. 4 प्रयास करना और लोर्ों के ललए
रोजर्ार पैदा करना।
2) क्षेत्र में लघु लसंचाई योजनाएं बढाना, भूलम को उपजाऊ बनाने की नीतत बनाना, फसल की बीमारी से
बचाि के प्रबंध करना ,अच्छे बीज और खाद का वितरण करना, पशुओं की नस्ल सुधारना ,पशु
धचककत्सालय की व्यिस्था करना।
3) कुिीर उद्योर्ों ग्रामीण कला तथा कारीर्री का विकास ,प्रलशक्षण केंद्रों की स्थापना करना।
4) स्िास््य केंद्रों की स्थापना, संक्रामक रोर्ों को रोकने के ललए िीके लर्िाने की व्यिस्था करना, पीने
के पानी की व्यिस्था, सडकों तथा नाललयों का तनमागण, सफाई करिाना।
5) वपछडी जाततयों के विकास की योजनाएं बनाना, अल्प बचत ि बीमा द्िारा धन जमा करने को
प्रोत्साहन दे ना पंचायत के कायों का तनरीक्षण करना।
अथिा
Ans.प्रत्येक ग्राम पंचायत के ललए एक ग्राम तनधध होर्ी ष्जसमें से ग्राम. पंचायत खचग कर सकेर्ी। ग्राम
पंचायत की आय के साधन तनम्न हैं
1) सरकारी अन्य संस्थाओं द्िारा प्रातत अनद
ु ान
2) जनता से प्रातत अनद
ु ान अथिा ऋण
3) पशु मेला या अन्य मेलों में दक
ु ानदारों से प्रातत आय
4) र्ह
ृ कर द्िारा आय
5) िसूल ककए र्ए कर शुल्क, दान, उपहार आहद
6) पंचायत द्िारा ककए र्ए जुमागने से प्रातत आए
भार् -द
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Ans.36 कानून का अथग मनुटय के बाहरी व्यिहार के ऐसे तनयमों से है जो राजनीततक प्रभु सत्ता से स्िीकृत
होते हैं। कानून ि प्रशासन में घतनटठ संबंध को स्पटि करते हुए विल्सन ने ललखा है - “लोक प्रशासन
सािगजतनक कानून का व्यापक अधधशासी स्िरूप बन जाता है ।’’अथागत कानून को विस्तत
ृ एिं क्रमबद्ध रूप में
लार्ू करने का नाम ही लोक प्रशासन है और कानून को लार्ू करने की प्रत्येक कक्रया एक प्रशासकीय कक्रया
होती है लोक प्रशासन ि कानून के मध्य परस्पर संबंध तनम्नललणखत प्रकार से स्पटि ककया जा सकता है -
1) कानून द्िारा प्रशासन की सीमा तनधागररत करना- लोक प्रशासन दे श के कानून के अंतर्गत ही कायग
करता है प्रशासक कानून द्िारा स्िीकृत कायग ही करते हैं प्रशंसकों की शष्ततयों ि अधधकार कानून
द्िारा तनष्श्चत ककए जाते हैं।
2) लोक प्रशासन कानून की एक शाखा या उप- भार् के रूप में- कानून को लोक प्रशासन का उद्दे श्य
और लोक प्रशासन को उसका माध्यम माना जाता है ।
3) कानून -तनमागण में लोक प्रशासन की भूलमका- कानून तनमागण से पूिग अधधकांश विधायक प्रशासकीय
विभार्ों में तैयार ककए जाते हैं इन विभार्ों में कानून का प्रारूप तैयार ककया जाता है । विधान मंडलों
के पास समय का अभाि होता है अतः िे प्रशासन को कानून बनाने की शष्तत हस्तांतररत कर दे ते हैं
और प्रशासन विधानमंडल की सीमा मापदं ड विसिों के अनुसार कानून का तनमागण करता है । प्रशासन
द्िारा इस प्रकार बनाए र्ए कानून को अधीनस्थ विधान या प्रत्यधधकृत विधान कहते हैं।
4) कानून के द्िारा प्रशासन को उत्तरदायी बनाया जाता है।
5) प्रशासन की सब वििेक शष्तत का दरु
ु पयोर् कानून द्िारा काम करना
6) सामाष्जक एिं आधथगक कानून तनमागण में प्रशासन की प्रमुख भूलमका होती है।
7) संिैधातनक कानून ि लोक प्रशासन में घतनटठ संबंध होता है
8) कानून द्िारा प्रशासतनक शष्ततयों ि नार्ररकों के अधधकारों के बीच संतुलन बनाए रखा जाता है।
9) कानन
ू द्िारा नार्ररकों की स्ितंत्रता एिं अधधकारों की प्रशासकीय अत्याचारों से रक्षा की जाती है।
तनटकषग- 5+1
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अथिा
Ans राजनीतत विज्ञान और लोक प्रशासन में आती घतनटठ संबंध है। ष्जतना र्हरा संबंध लोक प्रशासन का
राजनीतत विज्ञान से है उतना ककसी अन्य सामाष्जक विज्ञान से नहीं। राजनीतत विज्ञान लोक प्रशासन का
पैत्रक अनुशासन है तयोंकक लोक प्रशासन का जन्म राजनीतत शास्त्र की कोख से हुआ है । सभी विद्िान इस
बात पर सहमत हैं की राजनीतत और प्रशासन का चोली दामन का साथ है दोनों एक दस
ू रे से पथ
ृ क नहीं रह
सकते एक दस
ू रे से अलर् रहने पर दोनों ही अपूणग ि तनष्टक्रय हो जाएंर्े।
इन दोनों के बीच संबंधों का अिलोकन करते समय हमारे सामने दो प्रकार के विचार आते हैं-
प्रथम दृष्टिकोण- लोक प्रशासन में राजनीततक विज्ञान में मौललक अंतर है और दोनों अलर्-अलर् विषय हैं।
यह परं परार्त दृष्टिकोण है । इस दृष्टिकोण के समथगकों में िुड्रो विल्सन ब्लंि शैली तथा र्ुडनों का नाम आता
है। इस विचार के अनुसार राजनीतत का कायग लोकनीतत का तनमागण करना तथा प्रशासन का काम लोक नीतत
को लार्ू करना है।
राजनीतत विधान पाललका राजनीततक दल तथा दबाि समूह तक सीलमत है जबकक लोक प्रशासन सरकार की
कायगपाललका से संबंधधत है दोनों व्यिसाय के रूप में भी अलर्-अलर् है। राजनीतत राजनेताओं का कायग क्षेत्र है
,जबकक प्रशासन में प्रशासक कायागलीन रहते हैं।
द्वितीय दृष्टिकोण- यह आधुतनक दृष्टिकोण है इस दृष्टिकोण के अनुसार यह मान ललया जाता है की
राजनीतत और प्रशासन को एक दस
ू रे से पथ
ृ क नहीं ककया जा सकता। लोक प्रशासन और राजनीतत में संबंध
हम इस प्रकार कर सकते हैं-
1) सामान्य उद्दे श्य- लोक प्रशासन और राजनीतत दोनों का उद्दे श्य जनता की भलाई करना है।
2) राजनीतत की सफलता प्रशासन के सहयोर् पर तनभगर करती है। साथ ही शासन व्यिस्था में मंत्रत्रमंडल
के सहयोर् के त्रबना प्रशासन का चलना संभि हो जाता है ।
3) मंत्रत्रयों को प्रशासक प्रभावित करते हैं नीतत तनधागरण से संबंधधत त्य तथा आंकडे प्रशंसकों द्िारा ही
जुिाए जाते हैं।
4) मंत्रत्रयों को परामशग दे ने तथा त्रुहि पूणग नीतत को ने चुनने की चेतािनी दे ने का कायग प्रशंसकों द्िारा
ककया जाता है। मंत्री प्रशंसकों द्िारा दी र्ई सलाह या चेतािनी को मानने के ललए बाध्य नहीं है
अंततम तनणगय उनके हाथों में होता है कफर भी मंत्री उनकी सलाह को अनदे खा नहीं कर सकते।
5) स्थानीय प्रशासन तथा अंतरराटरीय राजनीतत दोनों के मध्य घतनटठ संबंध स्थावपत करते हैं ।
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तनटकषग- लोक प्रशासन और राजनीततक के मध्य संबंधों के वििेचन में हमें अततिादी दृष्टिकोण के स्थान पर
संतुललत दृष्टिकोण विकलसत करना चाहहए। िास्ति में राजनीतत लोक प्रशासन को तनयंत्रत्रत करती है और
लोक प्रशासन राजनीतत को हदशा तनदे श दे ता है ।
Ans. 37 ष्जला स्तर पर पुललस अधीक्षक का पद अतत महत्िपूणग पद माना जाता है। िह ष्जले में कानून
व्यिस्था बनाए रखने तथा शांतत कायम रखने के ललए मख्
ु य रूप से उत्तरदायी होता है। िह भारतीय पलु लस
सेिा का अधधकारी होता है । राटरीय स्तर पर एक अणखल भारतीय परीक्षा पास करने के बाद मेररि के आधार
पर इस अधधकारी की तनयुष्तत होती है । 1+5
पुललस अधधतनयम ,1861 के अनुसार पुललस अधीक्षक के मख्
ु य कायग तनम्न है-
1) कानून व्यिस्था बनाए रखने के ललए आिश्यक तनणगय लेना
2) चौकसी के माध्यम से अपराधों पर तनयंत्रण रखना
3) आपराधधक जांच विभार् का तनरीक्षण करना
4) थानों का तनरीक्षण करना
5) पुललस प्रशासन की प्रर्तत का मूल्यांकन करना
6) पुललस प्रशासन के कल्याण के ललए प्रयास करना
7) जनता से अच्छे संबंध बनाए रखना
8) अधीनस्थ पुललस से संर्ठनों को आिश्यक सेिाएं ि िस्तुएं प्रदान करिाना
ं ी मामलों जैसे भती ,प्रलशक्षण ,पदोन्नतत तथा अनुशासनात्मक कारगिाइयों
9) पुललस कालमगक प्रशासन संबध
के बारे में महत्िपूणग तनणगय लेना
10) समय-समय पर अप पुललस महातनरीक्षक को उपयुतत के माध्यम से ष्जला पुललस प्रशासन की
र्ततविधधयों पर ररपोिग भेजते रहना
तनटकषग- उपयुगतत आधार पर स्पटि होता है कक पुललस अधीक्षक का पद ष्जला प्रशासन की सफलता में
महत्िपूणग भूलमका तनभाता है और ष्जले में ष्जलाधीश के बाद उसका स्थान दस
ू रे स्थान पर आता है। तनःसंदेह
िह ष्जले में शांतत एिं व्यिस्था बनाए रखने के चन
ु ौती पण
ू ग कायग को तनभाने के ललए उत्तरदायी होता है।
अथिा
Page 13
Ans.ष्जला प्रशासन के लशखर पर एक अधधकारी होता है ष्जसे उपायुतत या ष्जला कलेतिर कहते हैं। इसे
ष्जला प्रशासन की धुरी कहा जाता है। उसे सरकार की आंख ि कान, ष्जला प्रशासन की चाप का केंद्र ,ष्जले
का प्रथम नार्ररक, ष्जले का प्रशासन या सिोच्च अध्यक्ष, प्रजातंत्र का लमत्र और पंचायती राज व्यिस्था का
अध्यक्ष भी कहा जाता है । भारतीय प्रशासन में उसे विशेष दजाग प्रातत है ।
न्याय प्रशासन को छोडकर ष्जले के बाकी सभी कायगक्रम उपायुतत के अधधकार क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।
ु त के कायग तनम्नललणखत हैं –
उपायत
1) ष्जले में कानून व्यिस्था बनाए रखना
2) ष्जलाधीश का दस
ू रा महत्िपूणग कायग राजस्ि एकत्रत्रत करना है इसी कारण से कलेतिर भी कहते हैं।
3) ष्जलाधीश ष्जला स्तर पर मुख्य कायगकारी अधधकारी होता है राज्य सरकार ि केंद्र सरकार के द्िारा
बनाई र्ई सभी नीततयों ि कायगक्रमों को लार्ू करने का उत्तरदातयत्ि उसी का है।
4) ष्जले के तकनीकी विभार्ों के संबंध में उसकी सलाहकार भूलमका होती है इन तकनीकी विभार्ों के
अंतर्गत कृवष विभार् लसंचाई विभार् तथा उद्योर् विभार् आते हैं। प्रत्येक विभार् का अध्यक्ष अपने
विभार् के मामले में स्ितंत्र होता है , परं तु व्यिहार में ष्जलाधीश के प्रभाि की अपेक्षा नहीं की जा
सकती।
5) विकास और कल्याणकारी कायों में ष्जलाधीश की भलू मका
6) स्थानीय स्िशासन की संस्थाओं से ष्जलाधीश का र्हरा संबध
ं है । इन संस्थाओं द्िारा लार्ू की र्ई
विकास तथा कल्याणकारी योजनाओं के तनरीक्षण में , स्थानीय शासन द्िारा राज्य सरकार के मध्य
कडी के रूप में ,इन संस्थानों पर सामान्य तनयंत्रण रखना ष्जलाधीश के प्रमुख कायग हैं।
7) विधानसभा में लोकसभा के चुनाि में तनिागचन अधधकारी के रूप में कायग करता है ।
8) ष्जलाधीश ष्जला जनर्णना अधधकारी के रूप में कायग करता है ।
9) महत्िपण
ू ग स्मतृ तयों के अध्यक्ष के रूप में ष्जलाधीश की भलू मका होती है ।
Ans. 38 सरकार की नीततयों और कायगक्रमों के बारे में जनता को जानकारी दे ना और उसके बारे में जनता
की प्रततकक्रया जानना ही लोक संपकग का मख्
ु य उद्दे श्य है। विलभन्न विद्िानों ने लोक संपकग की अनेक
पररभाषाएं दी हैं, ष्जनमें से कुछ तनम्न हैं – 1+5
Page 14
लमलेि के अनुसार- “लोक संपकग ककसी तनष्श्चत लक्ष्य को प्रातत करने के ललए तथा जनता में आिश्यक प्रभाि
के प्रसार के ललए कलात्मक प्रचार है।’’
जे.एल. मैकेनी के अनुसार- “प्रशासन में लोक संपकग अधधकारी िर्ग तथा नार्ररकों के बीच पाए जाने िाले
प्रधान एिं र्ौण संबंधों तथा इन संबंधों द्िारा स्थावपत प्रभाि एिं दृष्टिकोण की परस्पर कक्रयाओं का लमश्रण
।’’
लोक संपकग के कायग तनम्न हैं –
1) सरकार की उपलष्ब्धयां की जानकारी दे ना
2) जनता की इच्छा और आिश्यकताओं की जानकारी प्रातत करना
3) कानून ि तनयमों की व्याख्या करना
4) प्रशासन के प्रतत जनमत का पता लर्ाना
5) जनता द्िारा आलोचना का स्पटिीकरण दे ना
6) लोक प्रलशक्षण दे ना
7) विज्ञापन द्िारा सरकारी िेबसाइि संस्थाओं का प्रचार प्रसार करना
8) दे श भष्तत एिं राटरीय एकता की लशक्षा दे ना
अथिा
Ans.सरकार की नीततयों और कायगक्रमों के बारे में जनता को जानकारी दे ना और उसके बारे में जनता की
प्रततकक्रया जानना ही लोक संपकग का मुख्य उद्दे श्य है। लोक संपकग की पररभाषाएं-
लमलेि के अनुसार- “लोक संपकग ककसी तनष्श्चत लक्ष्य को प्रातत करने के ललए तथा जनता में आिश्यक प्रभाि
के प्रसार के ललए कलात्मक प्रचार है।’’
1) जनता में उदासीनता के प्रिवृ त्त का होना
2) अधधकारी िर्ग में लापरिाही तथा उपेक्षा की प्रिवृ त्त का होना
3) धन का अभाि
4) तनटपक्ष दृष्टिकोण का अभाि
5) अधधकारी िर्ग में संकुधचत हहत साधने का भाि
6) भ्रटिाचार को विकलसत करने की प्रिवृ त्त का पाया जाना
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7) पूिागग्रह का पाया जाना
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