aglasem.com
Home Schools Admission Career Mock Test PDF Docs Playground
ClassChoose class
StateSelect state

CBSE Class 12 Sample Paper 2026 Solution for Hindi Core

Download CBSE Class 12 Sample Paper 2026 Solution for Hindi Core. Here at aglasem.com get answers to all CBSE Model Papers to prepare better for your upcoming board exam 2026. Answer Key / Marking Scheme of Class 12 Hindi Core Sample Question Paper 2026 is given below. More Detail
CBSE Class 12 Sample Paper 2026 Solution for Hindi Core - Page 1 of 11

Finished viewing? Save it for later —

Download CBSE Class 12 Sample Paper 2026 Solution for Hindi Core (PDF · 11 pages)
Downloaded 10 times

About CBSE Class 12 Sample Paper 2026 Solution for Hindi Core

CBSE Class 12 Sample Paper 2026 Solution for Hindi Core is available here for free download. Published by CBSE for Class 12, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (11 pages). Candidates preparing for Class 12 can use CBSE Class 12 Sample Paper 2026 Solution for Hindi Core to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download CBSE Class 12 Sample Paper 2026 Solution for Hindi Core?

Open this page and click the Download button to save CBSE Class 12 Sample Paper 2026 Solution for Hindi Core as a PDF. It is completely free on AglaSem Docs.

Is CBSE Class 12 Sample Paper 2026 Solution for Hindi Core free to download?

Yes. CBSE Class 12 Sample Paper 2026 Solution for Hindi Core can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does CBSE Class 12 Sample Paper 2026 Solution for Hindi Core have?

CBSE Class 12 Sample Paper 2026 Solution for Hindi Core contains 11 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

Where can I find more Class 12 study material?

You can find more Class 12 question papers, sample papers, syllabus, and answer keys on AglaSem Docs.

CBSE Class 12 Sample Paper 2026 Solution for Hindi Core – Text

Read the full text of this solution below — useful to quickly search, copy and reference the content online without downloading the PDF.

📄 View text version (11 pages)

Page 1

CBSE BOARD

SAMPLE
PAPER
2026
SOLUTIONS

DOWNLOAD

Page 2

अं क योजना
प्रतिदर्श प्रश्न पत्र 2025-26
तिषय - त ं दी (आधार)
तिषय कोड – (302)
कक्षा - बार िी ं

तनधाशररि समय: 03 घं टे अतधकिम अं क : 80 अं क

सामान्य तनदे र् :-
 अंक योजना का उद्दे श्य मू ल्ां कन को अधिकाधिक वस्तु धनष्ठ बनाना है ।
 वस्तु परक प्रश्ों के उत्तरों का मूल्ां कन धनधदि ष्ट अंक योजना के आिार पर ही धकया जाए।
 वर्िनात्मक प्रश्ों के अंक योजना में धदए गए उत्तर धबंदु अंधिम नहीं हैं । ये सुझावात्मक एवं सां केधिक हैं ।
 यधद परीक्षार्थी इन सां केधिक धबंदुओं से धिन्न, धकंिु उपयुक्त उत्तर दे िो उसे अंक धदए जाएँ ।
 मू ल्ां कन कायि धनजी व्याख्या के अनु सार नहीं, बल्कि अंक योजना में धनधदि ष्ट धनदे शानु सार ही धकया जाए।

प्रश्न खंड - क ( अपतिि बोध ) अंक
संख्या (18)

1. गद्ां श पर आिाररि प्रश् (10)

(क) ii धमट्टी और िरिी 1

(ख) iv बाल मनोधवज्ञान की समझ होिी है । 1

(ग) iii केवल कर्थन (I), (II) और (III) सही हैं । 1

(घ) समाज की संस्कृधि एवं जीवन की गुर्वत्ता। 1

(ङ) धशक्षक वह आिार है , धजससे मानव पीढ़ी-दर-पीढ़ी हर प्रकार से सहायिा पािा है िर्था 2
ज्ञान अधजिि कर काम करिा है ।

Page 3

(च) धशक्षक युवा मन को िैयार करिे हैं , मागिदशिन करिे हैं धक वे सफल हों और धवकास का 2
केंद्र बनें।

(छ) धमट्टी में सही अनुपाि में ित्त्व उपलब्ध होिे हैं और जो पौिे उसमें उग रहे हैं , धमट्टी उन्हें 2
पोषक ित्त्व उपलब्ध करािी है , धशक्षक अपने अं दर परं पराओं को संजोिे हैं । धशक्षक
धवद्ाधर्थियों के आवे ग को समेटिे हैं और जो नौजवान धवद्ार्थी शैिान होिे हैं , उन्हें रास्ते पर
लािे हैं ।

2. पद्ां श पर आिाररि प्रश् (08)

(क) ii बडे लोग 1

(ख) ii बडे लोग अपने गुर्ों के कारर् अकेले रह जािे हैं 1

(ग) iii मानव के एकाकी होने के कारर् का धवश्लेषर् 1

(घ) कधव के अनुसार आरोधहयों के धलए पहाड की ऊँचाई और उसका प्राकृधिक सौंदयि 1
आमंत्रर् का कारक है ।

(ङ) पहाड को अधिनंदन का अधिकारी उसकी िौगोधलक धवशेषिाओं के कारर् बिाया गया 2
है । पेड ना लगना, पौिे – घास ना जमना, बहिी नदी, अत्यधिक ऊँचाई इत्याधद।

(च) कधव को पहाड की ऊँचाई व उसकी अन्य धवशेषिाओं के समक्ष सिी कुछ लघु लगिा 2
है । पहाड की ये ऊँचाई िर्था धवशेषिाएँ दे खने के बाद व्यल्कक्त स्विः हीन िाव से िर जािा
है ।

प्रश्न खंड – ख ( अतिव्यक्ति और माध्यम पुस्तक पर आधाररि प्रश्न ) अंक
संख्या (22)
3. धदए गए धवषयों में से धकसी एक धवषय पर लगिग 120 शब्ों में रचनात्मक लेख :- 01x06
आरं ि -- 01 अंक =06

धवषयवस्तु -- 03 अंक
प्रस्तुधि -- 01 अंक

िाषा -- 01 अंक
4. धकन्हीं चार प्रश्ों के लगिग 40 शब्ों में उत्तर :- 04x02
= 08

Page 4

(क) अखबार 24 घंटे में एक बार या साप्ताधहक पधत्रका सप्ताह में एक बार प्रकाधशि होिी है । 2
अखबार या पधत्रका में समाचारों या ररपोटि को प्रकाशन के धलए स्वीकार करने की एक
धनधिि समय-सीमा होिी है , धजसे डे डलाइन कहिे हैं ।

(ख)  धजसमें आम बोलचाल के शब्ों का प्रयोग हो। 2
 जो समाचारवाचक आसानी से पढ़ सके।
 धजसमें आम बोलचाल की िाषा के सार्थ-सार्थ सटीक मुहावरों का इस्ते माल हो।
 धजसमें सामाधसक और ित्सम शब्ों की बहुलिा न हो।

(ग)  संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाधशि होने वाले संपादकीय को अखबार की आवाज़ मा 2
ना जािा है ।
 संपादकीय के ज़ररये अखबार धकसी घटना, समस्या या मुद्दे के प्रधि अपनी राय
प्रकट करिे हैं ।
 संपादकीय धकसी व्यल्कक्त धवशेष का धवचार नहीं होिा इसधलए उसे धकसी के ना
म के सार्थ नहीं छापा जािा।
 संपादकीय धलखने का दाधयत्व उस अखबार में काम करने वाले संपादक और
उनके सहयोधगयों पर होिा है ।
 आमिौर पर अखबारों में सहायक संपादक, संपादकीय धलखिे हैं ।
 कोई बाहर का लेखक या पत्रकार संपादकीय नहीं धलख सकिा है ।

उपररतिक्तखि तबंदु सांकेतिक ैं। अन्य तबंदु तिचारणीय ि स्वीकायश ो सकिे ैं।

(घ)  अखबारों में समाचारों के अलावा िी अन्य कई िरह का पत्रकारीय लेखन छप 2
िा है ।
 इनमें फीचर प्रमुख है ।
 फीचर एक सुव्यवल्कथर्थि, सृ जनात्मक और आत्मधनष्ठ लेखन है धजसका उद्दे श्य पा
ठकों को सूचना दे ने, धशधक्षि करने के सार्थ मुख्य रूप से उनका मनोरं जन कर
ना होिा है ।

(ङ) खबरें िी कई िरह की होिी हैं – 2
राजनीधिक, आधर्थिक, अपराि, खेल, धिल्म, कृधष, कानू न, धवज्ञान या धकसी िी और धवष
य से जुडी हुई।

संवाददािाओं के बीच काम का धविाजन आमिौर पर उनकी धदलचस्पी और ज्ञान को
ध्यान में रखिे हुए धकया जािा है ।

Page 5

मीधडया की िाषा में इसे बीट कहिे हैं ।

एक संवाददािा की बीट अगर अपराि है िो इसका अर्थि यह है धक उसका कायिक्षेत्र अप
ने शहर या क्षे त्र में घटनेवाली आपराधिक घटनाओं की ररपोधटिं ग करना है ।

अखबार की ओर से वह इनकी ररपोधटिं ग के धलए धजम्मे दार और जवाबदे ह िी है ।

उपररतिक्तखि तबंदु सांकेतिक ैं। अन्य तबंदु तिचारणीय ि स्वीकायश ो सकिे ैं।

5. धकन्हीं दो प्रश्ों के लगिग 80 शब्ों में उत्तर :- 02x04
= 08
(क)  जहाँ कहानी का संबंि लेखक और पाठक से जुडिा है वहीं नाटक लेखक, धनदे 4
शक, पात्र, दशिक, श्रोिा एवं अन्य लोगों को एक-दू सरे से जोडिा है ।
 चूँधक दृश्य का स्मृधियों से गहरा संबंि होिा है इसधलए नाटक एवं धिल्म को लो
ग दे र िक याद रखिे हैं ।
 यही कारर् है धक गोदान, दे वदास, उसने कहा र्था, सद्गधि आधद के नाट्य रूपां ि
रर् कई बार हुए हैं और कई िरह से हुए हैं ।

उपररतिक्तखि तबंदु सांकेतिक ैं। अन्य तबंदु तिचारणीय ि स्वीकायश ो सकिे ैं।

(ख)  रे धडयो नाटक में संवाद की धवशेषिाएँ – 4
 रे धडयो नाटक में पात्रों संबिी िमाम जानकारी हमें संवादों के माध्यम से ही धमलिी
हैं । उनके नाम, आपसी संबंि, चाररधत्रक धवशेषिाएँ , ये सिी हमें संवादों द्वारा ही
उजागर करना होिा है ।
 िाषा पर िी धवशेष ध्यान रखना होगा। वो पढ़ा-धलखा है धक अनपढ़, शहर का है
धक गाँ व का, क्या वो धकसी धवशेष प्रां ि का है , उसकी उम्र क्या है , वो क्या रोज़गार-
िंिा करिा है । इस िरह की िमाम जानकाररयाँ उस चररत्र की िाषा को धनिाि ररि
करें गी।
 धफर पात्रों का आपसी संबंि िी संवाद की बनावट पर असर डालिा है । एक ही
व्यल्कक्त अपनी पत्नी से अलग ढं ग से बाि करे गा, अपने नौकर से अलग ढं ग से ,
आपने बॉस के प्रधि सम्मानपूविक रवैया अपनाएगा, िो अपने धमत्र के प्रधि उसका
बराबरी और गरम-जोशी का व्यवहार होगा।
 रे धडयो क्योंधक मूलिः संवाद प्रिान माध्यम है , इसधलए यहाँ इसका खास ध्यान
रखना होिा है ।
 रे धडयो में कौन धकससे बाि कर रहा है , हम दे ख नहीं पािे इसधलए संवाद धजस
चररत्र को संबोधिि है , उसका नाम लेना ज़रूरी होिा है , खासिौर पर जब दृश्यों
में दो से अधिक पात्र हों। इसके अलावा रे धडयो नाटक में कई बार कोई पात्र धवशेष

Page 6

जब कोई हरकि, कोई एक्शन करिा है िो उसे िी संवाद का धहस्सा बनाना
पडिा है ।

(ग) अप्रत्याधशि धवषयों हम जो कुछ धलखेंगे, वह किी धनबंि बन पडे गा, किी संस्मरर्, किी 4
रे खाधचत्र की शक्ल लेगा, िो किी यात्रावृत्तां ि की।
इसीधलए हम उसे एक सामान्य नाम दें गे-
लेख, िाधक ऐसा न लगे धक धकसी धविा धवशेष के िीिर ही लेखन करने का दबाव बन र
हा है ।

उपररतिक्तखि तबंदु सांकेतिक ैं। अन्य तबंदु तिचारणीय ि स्वीकायश ो सकिे ैं।

प्रश्न खंड - ग ( पाठ्यपुस्तक आरो िथा तििान पर आधाररि प्रश्न ) अंक
संख्या (40)
6. काव्यां श - पर आिाररि प्रश्ों के उत्तर उत्तर :- 05x01
=05
(क) iv खेि 1

(ख) iv I-(3), II-(1), III-(2) 1

(ग) ii कधव कमि के चरर् 1

(घ) iv कर्थन िर्था कारर्, दोनों सही हैं , कारर् कर्थन की सही व्याख्या करिा है । 1

(ङ) i यह धचरकाल िक आनंद दे िा है 1

7. धकन्हीं दो प्रश्ों के लगिग 60 शब्ों में उत्तर :- 02x03
= 06
(क) कधविा में एक ओर जग-जीवन का िार धलए घूमने की बाि करिा है इसका आशय मनुष्य 3
की सामधजकिा से है | मनु ष्य एक सामाधजक प्रार्ी है इसधलए उसे सां साररक दाधयत्वों का
धनवाि ह करना पडिा है जैसे कधव कर रहे हैं | जीवन में दु ख-सुख दोनों ही आिे हैं । मनुष्य
को अनेक कष्टों का सामना करना पडिा है परन्तु वह इस जीवन से अलग नहीं हो
सकिा। दू सरी ओर मैं किी न जग का ध्यान धकया करिा हँ का आशय अन्य लोगों द्वारा
धकए गए आलोचना से है | कधव इसे हृदयहीन और स्वार्थी मानिे हैं | वह अपनी मस्ती में
रहिे हैं और जहाँ िक हो सके प्रेम बाँ टने की कोधशश करिे हैं ।

Page 7

(ख) सबसे िेज़ बौछारें िर्था िादों के जाने के बाद सवेरा हुआ जो अत्यंि लाधलमा और सुंदरिा 3
से पररपूर्ि र्था। वह सवेरा खरगोश की आँ खों के समान लाल रं ग का र्था। वािावरर् स्वच्छ
व िुला हुआ धदखाई दे िा है । िूप चमकीली होने लगी और फूलों पर धििधलयाँ मंडराने
लगीं। जब बच्चे के रं ग-धबरं गे पिंग आकाश में उडाने लगे िो चारों ओर सीधटयों और
धकलकाररयों की आवाज़ गूंज उठी िर्था धििधलयों ने मिुर गुंजार शुरू कर धदया।

(ग) कधव कहिा है धक फूल एक धनधिि समय पर ल्कखलिे हैं । उनका जीवन िी धनधिि होिा 3
है , परं िु कधविा के ल्कखलने का कोई धनधिि समय नहीं होिा है । उसकी जीवन अवधि
असीधमि है । वे किी नहीं मुरझािी। उनकी कधविाओं की महक सदै व फैलिी रहिी है ।

8. धकन्हीं दो प्रश्ों के लगिग 40 शब्ों में उत्तर :- 02x02
= 04
(क) ‘हम समर्थि शल्कक्तमान’ पंल्कक्त के माध्यम से मीधडया की िाकि व कायिक्रम संचालकों की 2
मानधसकिा का पिा चलिा है । मीधडया कमी या मीधडया-संचालक अपने प्रचार-प्रसार
की िाकि के कारर् धकसी का िी मजाक बना सकिे हैं िर्था धकसी को िी नीचे धगरा
सकिे हैं । चैनल के मुनािे के धलए संचालक धकसी की करुर्ा को िी बेच सकिे हैं ।
कायिक्रम का धनमाि र् व प्रस्तुधि संचालकों की मजी से होिा है ।

(ख) कधव कहिा है धक धजस प्रकार ज्यादा काली धसर अर्थाि ि् पत्थर पर र्थोडा-सा केसर डाल 2
दे ने से वह िुल जािी है अर्थाि ि् उसका कालापन खत्म हो जािा है , ठीक उसी प्रकार काली
धसर को धकरर् रूपी केसर िो दे िा है अर्थाि ि् सूयोदय होिे ही हर वस्तु चमकने लगिी है ।

(ग) हनुमान लक्ष्मर् के इलाज के धलए संजीवनी बूटी लाने धहमालय पविि गए र्थे। उन्हें आने में 2
दे र हो रही र्थी। लक्ष्मर्-मूछाि के बाद पूरा माहौल शोक-ग्रस्त हो गया र्था। समस्त िालू-
वानर सेना राम को दे ख अत्यंि दु खी र्थे। जैसे ही हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर शोक-
ग्रस्त माहौल में पहुँ चे िो वे पूरा का पूरा पविि ही अपने हार्थ पर उठा लाए र्थे। हनुमान को
दे ख राम िर्था समस्त जन र्थोडे खुश हुए िर्था शीघ्र ही वैद् जी ने लक्ष्मर् को संजीवनी बूटी
धपलाई िो लक्ष्मर् उठ खडे हुए। राम सधहि पूरी वानर-सेना खुश हो गई। इस प्रकार
शोक-ग्रस्त माहौल में हनुमान के अविरर् को वीर रस का आधविाि व कहा गया है ।

9. गद्ां श - पर आिाररि प्रश्ों के उत्तर :- 05x01
=05
(क) iv व्यवसाय का चयन 1

Page 8

(ख) i स्वािीनिा के सार्थ जीना 1

(ग) iii अपनी इच्छा से कायि करने की स्विं त्रिा 1

(घ) i इन अधिकारों को दे ने के बाद िी दासिा की प्रधक्रया बनी रहिी है 1

(ङ) ii जाधिगि िेदिाव को बढ़ावा दे ने वाले 1

10. धकन्हीं दो प्रश्ों के लगिग 60 शब्ों में उत्तर :- 02x03
= 06
जाधिप्रर्था को श्रम धविाजन का ही एक रूप न मानने के पीछे आं बेडकर के धनम्नधलल्कखि
(क) 3
िकि हैं –

 जाधि प्रर्था श्रम धविाजन के सार्थ-सार्थ श्रधमक धविाजन िी करािी है । सभ्य समाज
में श्रधमकों का धवधिन्न वगों में धविाजन अस्वािाधवक है ।

 जाधि प्रर्था में श्रम धविाजन मनुष्य की रुधच पर आिाररि नहीं है । इसमें मनुष्य के
प्रधशक्षर् अर्थवा धनजी क्षमिा का धवचार धकए धबना धकसी दू सरे के द्वारा उसके
धलए पेशा धनिाि ररि कर धदया जािा है । यह जन्म पर आिाररि होिा है ।

 िारि में जाधि प्रर्था मनुष्य को जीवन िर के धलए एक पेशे में बाँ ि दे िी है , िले ही
वह पेशा उसके धलए अनुपयुक्त या अपयाि प्त क्यों न हो। इससे उसके िूखों मरने
की नौबि आ जािी है ।

(ख) यह बाि धबलकुल सत्य है धक बाजारवाद ने किी धकसी को धलंग, जाधि, िमि या क्षेत्र के 3
आिार पर नहीं दे खा। उसने केवल व्यल्कक्त के खरीदने की शल्कक्त को दे खा है । जो व्यल्कक्त
सामान खरीद सकिा है वह बाजार में सविश्रेष्ठ है । कहने का आशय यही है धक
उपिोक्तावादी संस्कृधि ने सामाधजक समिा थर्थाधपि की है । यही आज का बाजारवाद है ।

(ग) महामारी की त्रासदी से जूझिे हुए ग्रामीर्ों को ढोलक की आवाज संजीवनी शल्कक्त की 3
िरह मौि से लडने की प्रेरर्ा दे िी र्थी। यह आवाज बूढ़े-बच्चों व जवानों की शल्कक्तहीन
आँ खों के आगे दं गल का दृश्य उपल्कथर्थि कर दे िी र्थी। उनकी स्पंदन शल्कक्त से शून्य स्नायुओं
में िी धबजली दौड जािी र्थी। ठीक है धक ढोलक की आवाज में बुखार को दू र करने की
िाकि न र्थी, पर उसे सुनकर मरिे हुए प्राधर्यों को अपनी आँ खें मूंदिे समय कोई

Page 9

िकलीि नहीं होिी र्थी। उस समय वे मृत्यु से नहीं डरिे र्थे। इस प्रकार ढोलक की आवाज
गाँ व वालों को मृत्यु से लडने की प्रेरर्ा दे िी र्थी।

11. धकन्हीं दो प्रश्ों के लगिग 40 शब्ों में उत्तर :- 02x02
= 04
(क) जीजी के अनुसार मनुष्य के पास जो चीज़ ना हो और वह उसका त्याग करके धकसी और 2
को दे िा है , िो उसका बहुि अच्छा फल धमलिा है । इं दर सेना ऐसे समय में पानी की माँ ग
करिी र्थी, जब लोगों के पास स्वयं पानी नहीं हुआ करिा र्था। लोग अपने घरों से धनकाल-
धनकालकर पानी दे िे र्थे। लेखक को पानी की यह बबाि दी पसंद नहीं र्थी।

उपररतिक्तखि तबंदु सांकेतिक ैं। अन्य तबंदु तिचारणीय ि स्वीकायश ो सकिे ैं।

(ख) िल्कक्तन के आ जाने के बाद महादे वी को दे हाि की सं स्कृधि, खान-पान, रहन-सहन, वेश- 2
िूषा आधद का ज्ञान हो गया क्योंधक िल्कक्तन के अंदर दू सरों को बदल दे ने के गुर् िरपूर
मात्रा में धवद्मान र्थे। िल्कक्तन िोजन में मीठा बनाना बंद कर धदया। वह गाढ़ी दाल, मोटी
रोटी, मकई की लपसी, ज्वार के िुने हुए, िुट्टे के हरे -हरे दाने की ल्कखचडी, बाजरे के धिल
वाले ठं ढे पुए आधद बनािी। महादे वी वमाि बार-बार प्रयास करके िी उसके स्विाव को
पररवधििि नहीं कर पायीं और िीरे -िीरे उनका स्वाद बदल गया। इसधलए िल्कक्तन के आ
जाने से महादे वी अधिक दे हािी हो गई।

(ग) ‘अविूि’ वह है जो सां साररक मोह माया से ऊपर होिा है । वह संन्यासी होिा है । लेखक 2
ने धशरीष को कालजयी अविूि कहा है क्योंधक वह कधठन पररल्कथर्थधियों में िी फलिा-
फूलिा रहिा है । ियं कर गमी, लू, उमस आधद में िी धशरीष का पेड फलों से लदा हुआ
धमलिा है ।

12. धकन्हीं दो प्रश्ों के लगिग 100 शब्ों में उत्तर :- 02x05
=10
(क) यशोिर बाबू के मािा धपिा का दे हां ि बचपन में ही हो गया र्था, इसधलए वह बचपन से ही 5
धज़म्मेदाररयों के बोझ िले दबे र्थे। वह बचपन में अपनी उम्र के बच्चों के सार्थ नहीं बल्कि
बडे बुज़ुगों के सार्थ रहिे र्थे ।पले बढ़े अि: वह उन परं पराओं को छोड नहीं सकिे र्थे।
यशोिर बाबू अपने आदशि धकशन दा से अधिक प्रिाधवि है और आिुधनक पररवे श में
बदलिे हुए जीवन मूल्ों और संस्कारों के धवरुद्ध है । जबधक उनकी पत्नी अपने बच्चों के
सार्थ खडी धदखाई दे िी है वह अपने बच्चों के आिुधनक दृधष्टकोर् से प्रिाधवि है । वे बेटी
के कहे अनुसार नए कपडे पहनिी है । वह अपने बेटों की जीवन में कोई िाँ क-झाँ क नहीं
करिी। यशोिर बाबू की पत्नी आज की आिुधनकिा के धहसाब से रहिी है और समय में

Page 10

पररवििन होिा दे ख खुद में िी पररवििन लाने का प्रयास करिी है परं िु यशोिर बाबू िी
पुराने रीधि ररवाज़ों में बंिकर रहिे हैं ।

उपररतिक्तखि तबंदु सांकेतिक ैं। अन्य तबंदु तिचारणीय ि स्वीकायश ो सकिे ैं।

(ख) इस पाठ के सन्दिि में हम अगर ले खक के धपिा जी और दत्ता जी राव का पढ़ाई-धलखाई के सम्बन्ध 5
में रवैया दे खें िो पिा चलिा है धक दत्ता जी राव का रवैया लेखक के धपिा जी से बेहिर र्था। वह
पढ़ाई-धलखाई के महत्त्व को िली-िां धि जानिे र्थे इसधलए जब दत्ता जी को पिा चला धक ले खक
के धपिा उसे पढ़ने के धलए पाठशाला नहीं जाने दे िे िो उन्होंने लेखक के धपिा को बहुि िला-
बुरा सुनाया और कहा की बेटे और पत्नी को खे िो में काम में लगा कर िू पूरा धदन क्या करिा हैं ,
िू कल से बेटे को पढ़ने िेजेगा अगर िेरे पास फीस के पैसे नहीं है िो मैं उसकी फीस दू ं गा। दत्ता
जी के सामने लेखक के धपिा ने ‘हां ’ िो के दी पपर बाद में वे आनं द को स्कूल िे जने के पक्ष में
नहीं र्थे । धजससे ज्ञाि होिा है धक धपिा जी का रवैया पढ़ाई-धलखाई के प्रधि ठीक नहीं र्था।

(ग) पुराित्ववेत्ताओं ने जो िी खु दाई की और खोज की। उसमें उन्हें धमट्टी के बििन, धसक्के, मू धिियाँ , 5
पत्थर और लकडी के उपकरर् धमले। इन धचत्रों के फलस्वरूप यही बाि सामने आई धक लोग
समय के अनु रूप इन वस्तु ओं का उपिोग करिे र्थे । दू सरा उनकी नगर योजना िी उनकी समझ
का पुख्ता प्रमार् है । आज की नगर योजना िी उनकी योजना के समकक्ष नहीं ठहरिी। जो कुछ
उन्होंने नगरों, गधलयों, सडकों को साि-सुर्थरा रखने की धवधि अपनाई, वह उनकी समझ को ही
दशाि िी है । यहाँ के अजायबघर में प्रदधशि ि चीज़ों में औजार िो हैं , ले धकन हधर्थयार नहीं।

उपररतिक्तखि तबंदु सांकेतिक ैं। अन्य तबंदु तिचारणीय ि स्वीकायश ो सकिे ैं।

--x----x----x----x--

Page 11

Study Materials
Notes

Model Papers Class 6 Notes

Sample Papers Class 7 Notes
Half Yearly Sample Papers Class 8 Notes

Class 9 Notes
Important Resources
Class 10 Notes
Periodic Table
Class 11 Notes
Writing Skills / Formats

Maps of India / World Class 12 Notes

Books and Solutions

NCERT Books
NCERT Book Solutions
HC Verma Chapter Wise Solutions
RD Sharma Solutions
CGBSE Solutions

Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 12
TypeSolution
Pages11
Updated24 Sep 2026