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NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 9 मिठाइयों का सम्मेलन

कक्षा 4 Hindi Chapter 9 मिठाइयों का सम्मेलन के सभी प्रश्नों के विस्तृत हल AglaSem Docs पर निःशुल्क डाउनलोड करें। नवीनतम एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (वीणा, 2026-27 एनईपी पाठ्यक्रम) पर आधारित, विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए चरण-दर-चरण समाधान। Download NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 9 मिठाइयों का सम्मेलन PDF free at AglaSem Docs, with step-by-step answers based on the latest NCERT textbook (Veena, 2026-27 NEP syllabus).
NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 9 मिठाइयों का सम्मेलन - Page 1 of 26

About NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 9 मिठाइयों का सम्मेलन

NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 9 मिठाइयों का सम्मेलन is available here for free download. Published by NCERT for Class 4, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (26 pages). Candidates preparing for Class 4 can use NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 9 मिठाइयों का सम्मेलन to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 9 मिठाइयों का सम्मेलन – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा4

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 9: मठाइय का सम्मेलन

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

105 – 115 9 27 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 21 pages

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कक्षा 4 हद अध्याय 9 मठाइय का सम्मेलन AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 4 · हद · वीणा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 9: मठाइय का सम्मेलन
‘ मठाइय का सम्मेलन’ संवाद-रूप म लखा गया पाठ है। छगनलाल हलवाई क बंद दुकान के भीतर मठाइयाँ अपनी सभा करती ह और तय करती
ह क मीठा कम हो, पर मन क मठास बढ़े । इसी पाठ के साथ पृष्ठ 115 पर ‘जलेबी’ क वता भी द गई है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

वीणा (कक्षा 4) 105 – 115

खं ड प्रश्न

9 27

माध्यम
हन्द

बातचीत के लए — पृष्ठ 107
पाठ पढ़ने के बाद कक्षा म बातचीत के प्रश्न

बातचीत के लए

प्र.1 आपको कौन-सी मठाई सबसे अ धक पसंद है और क्य ?

यह आपक अपनी पसंद का प्रश्न है। इसका उत्तर हर ब े का अलग होगा।
उत्तर दे ते समय दो बात क हए — मठाई का नाम और क्य पसंद है।

नमूना उत्तर: मुझे रसगुल्ला सबसे अ धक पसंद है। वह नरम और सफ़ेद होता है। उसे दबाने पर मीठा रस नकलता
है। उसे खाने म मुझे बहुत मजा आता है।

क्य : अपनी पसंद बताते समय कारण भी दे ना चा हए। कारण से सुनने वाले को आपक बात समझ आती है।

संकेत: आप पाठ म आई कोई भी मठाई चुन सकते ह — पेड़ा, जलेबी, बरफ़ , गु झया, काजूकतली या मैसूरपाक।

प्र.2 आपके घर म मठाई कब-कब बनाई और बाँट जाती है?

घर म मठाई प्रायः खुशी के अवसर पर बनाई और बाँट जाती है।

त्योहार पर — जैसे होली, द वाली, ईद या रक्षाबंधन।

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कक्षा 4 हद अध्याय 9 मठाइय का सम्मेलन AglaSem · NCERT Solutions

जन्म दन पर और घर म कसी के अ े अंक आने पर।
शुभ काय पर — नया घर, ववाह या कोई शुभ समाचार।
जब घर म कोई मेहमान आता है।

नमूना उत्तर: मेरे घर म द वाली पर लड्डू और बरफ़ बनती है। मेरे जन्म दन पर माँ पेड़े बाँटती ह।

क्य : पाठ म पेड़ा कहता है — “शुभ काय म मठाई बाँटने क प्रथा को भला कौन बंद कर सकता है?” इसका अथ
है क मठाई बाँटना खुशी बाँटना है।

प्र.3 घर से व ालय तक जाते हुए आपको कन- कन वस्तुओं क दुकान मलती ह?

रास्ते म मलने वाली दुकान के नाम गनाइए। हर ब े का रास्ता अलग होता है, इस लए उत्तर भी अलग होगा।

नमूना उत्तर: मेरे घर से व ालय जाते हुए रास्ते म मठाई क दुकान मलती है। उसके आगे साग-भाजी क दुकान
है। फर कताब-कॉपी क दुकान आती है। एक दूध क दुकान और एक कपड़े क दुकान भी पड़ती है।

संकेत: कल स्कूल जाते समय दुकान के नाम मन म गनते जाइए। घर आकर उन्ह अपनी लेखन-पु स्तका म लख
ली जए। इससे आपका उत्तर स ा होगा।

प्र.4 अगर आप अपनी कक्षा म बालसभा का आयोजन करते तो कन- कन बात पर चचा करते?

बालसभा म वे बात उठाई जाती ह जो पूरी कक्षा से जुड़ी ह ।

स्वस्थ खाना — क्या खाएँ और कतना खाएँ।
कक्षा और व ालय क सफ़ाई।
खेल और खेल के मैदान क बारी।
पेड़-पौधे लगाना और पानी बचाना।
क वता, कहानी और चुटकुले सुनाना।

नमूना उत्तर: हम अपनी बालसभा म सबसे पहले स्वस्थ खाने पर बात करते। फर कक्षा क सफ़ाई का काम बाँटते।
अंत म हर ब ा एक क वता सुनाता।

क्य : मठाइय ने भी अपने सम्मेलन म यही कया। उन्ह ने अपनी परेशानी बताई और फर मलकर हल नकाला।

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कक्षा 4 हद अध्याय 9 मठाइय का सम्मेलन AglaSem · NCERT Solutions

पाठ के भीतर — पृष्ठ 107–108
पाठ पढ़कर उत्तर द जए

पाठ के भीतर

प्र.1 रसगुल्ला भाई के अनुसार मठाइय क उपेक्षा का क्या कारण है?

रसगुल्ला भाई के अनुसार मठाइय क अ त मठास ही उनक उपेक्षा का कारण है।
पाठ म वे कहते ह — “आप यह नह जानते क हमारी अ त मठास ही हमारी उपेक्षा का कारण है।”

क्य : मठाइय म शक्कर बहुत अ धक होती है। अ धक शक्कर खाने से कुछ लोग का शरीर बगड़ जाता है।
इसी लए डॉक्टर उन्ह मठाई खाने से रोक दे ते ह।

संकेत: ‘उपेक्षा’ का अथ है — कसी को छोड़ दे ना या उस पर ध्यान न दे ना।

प्र.2 लड्डू दादा ने क्या-क्या सुझाव दए?

अध्यक्ष लड्डू दादा ने तीन सुझाव दए —

1. मठाइयाँ अपने म शक्कर क मात्रा कम कर। वे कहते ह — “इसके लए हम अपने म शक्कर क मात्रा कम करनी चा हए।”
2. लोग अपनी जीभ पर थोड़ा नयंत्रण रख। मठाई खाएँ, पर अ त न कर।
3. लोग शारी रक श्रम करते रह और स्वस्थ रह।

वे यह भी समझाते ह — “शक्कर कम होने से ही हम लोग के मन म मठास बढ़ा सकते ह।”

क्य : लड्डू दादा चाहते ह क मठाई भी बनी रहे और लोग भी बीमार न पड़। इस लए उन्ह ने दोन पक्ष को एक-एक
काम दया।

प्र.3 “ फर हम मठाई कौन कहेगा?” गुलाबजामुन ने ऐसा क्य कहा?

गुलाबजामुन ने यह बात डर के कारण कही।
अभी-अभी लड्डू दादा ने कहा था क मठाइय को अपने म शक्कर क मात्रा कम करनी चा हए। मठाई क पहचान ही उसका
मीठापन है। गुलाबजामुन को लगा क शक्कर कम हो गई तो वे मीठे ही नह रहगे। फर लोग उन्ह मठाई क्य कहगे?

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कक्षा 4 हद अध्याय 9 मठाइय का सम्मेलन
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क्य : हर चीज़ क एक पहचान होती है। गुलाबजामुन को अपनी पहचान खो जाने का डर था।

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संकेत: लड्डू दादा ने उनका डर दूर कर दया। उन्ह ने कहा क शक्कर कम होने पर लोग के मन क मठास बढ़े गी।

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प्र.4 इस पाठ म जीभ पर नयंत्रण रखने क बात क्य कही गई है?
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उत्तर a
क्य क लोग मठाई खाते समय अ त कर दे ते ह।
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रबड़ी जी कहती ह — “जहाँ अ त होती है, वहाँ क्ष त होती है। हमारा सेवन करते समय लोग अ त कर दे ते ह और बाद म भुगतते
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ह।” गु झया भी बताती है क कुछ लोग के शरीर म शक्कर क मात्रा बढ़ रही है।

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इस लए लड्डू दादा कहते ह क लोग अपनी जीभ पर थोड़ा नयंत्रण रख। मठाई खाएँ, पर अ त न कर।
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क्य : जीभ को केवल स्वाद पता होता है, शरीर क जरूरत नह । इस लए जीभ जतना माँगे, उतना खा लेना ठ क
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नह ।

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l है — “जीभ चटोरी न सुने, माँगे मीठा मोर।”
agकहता
संकेत: गुलाबजामुन का दोहा भी यही

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ag न – गुलाबजामुन मामा,
.cमठाइय को अपनी पसंद के नाम दे ते हुए उनके चत्र भी बनाइए — गुलाबजामु
प्र.5 इस पाठ म मठाइय को लड्डू दादा, बरफ़ बहन आ द नाम से पुकारा गया है। नीचे दए गए उदाहरण के अनुसार

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काजूकतली –, गु झया –, मैसूरपाक –

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यह काम आपको स्वयं करना है। पुस्तक ने केवल एक उदाहरण दया है — गुलाबजामुन – गुलाबजामुन मामा।

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मठाई आपक पसंद का नाम चत्र
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गुलाबजामुन गल
ु ाबजामुन मामा पुस्तक म गुलाबजामुन का चत्र बना हुआ है

m काजूकतली a
l a se ……………………… (खाली खाना — चत्र बनाइए)

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गु झया ……………………… (खाली खाना — चत्र बनाइए)

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मैसूरपाक ……………………… (खाली खाना — चत्र बनाइए)

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पृष्ठ 108 पर द गई सूची। पहली पं क्त पुस्तक ने उदाहरण के रूप म भरी है।

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कक्षा 4 हद अध्याय 9 मठाइय का सम्मेलन AglaSem · NCERT Solutions

कैसे क जए —

1. घर के कसी रश्ते का नाम चु नए — मामा, बुआ, चाचा, द द , नाना, मौसी।
2. उसे मठाई के नाम के आगे जोड़ द जए, जैसे पाठ म ‘लड्डू दादा’ और ‘बरफ़ बहन’ ह।
3. फर खाली खाने म उस मठाई का चत्र बनाइए और उसम आँख, हाथ-पैर भी जो ड़ए।

मठाई नमूना नाम चत्र म क्या बनाइए

गुलाबजामुन गल
ु ाबजामुन मामा गोल-गोल भूरा गुलाबजामुन, आँख और पैर

काजूकतली काजूक तली दीदी चाँद के वक वाली चपट बरफ़ जैसी आकृ त

गु झया गिु झया बुआ आधे चाँद जैसी गु झया, कनारे पर लहर

मैसूरपाक मैस ूर पाक चाचा चौकोर पीला टु कड़ा, ऊपर छोटे -छोटे छे द

एक नमूना। आप अपनी पसंद के दूसरे नाम भी रख सकते ह।

क्य : रश्ते का नाम जोड़ते ही मठाई एक पात्र बन जाती है। तभी वह पाठ म बोल पाती है।

हमारी मठास — पृष्ठ 109–110
खोजबीन, शब्द- ंखला और ता लका

खोजबीन

प्र.1 हमारे दे श के व भन्न प्रदे श म बनाई जाने वाली मठाइय के बारे म पता क जए और उनके नाम भी ल खए —
(प्रदे श/कद्रशा सत प्रदे श – मठाई)

यह खोजबीन का काम है। इसे आपको अपने अध्यापक या घर के बड़ से पूछकर भरना है।
पुस्तक ने दो पं क्तयाँ स्वयं भरकर दखा द ह —

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कक्षा 4 हद अध्याय 9 मठाइय का सम्मेलन AglaSem · NCERT Solutions

प्रदे श/कद्रशा सत प्रदे श मठाई

गोवा बेिबंक ा

ओ डशा छे ना पोड़ा

……………………… ………………………

……………………… ………………………

……………………… ………………………

बाक तीन पं क्तयाँ ऐसे भ रए —

1. अपने अध्यापक, माता- पता या दाद -नानी से पू छए क कस प्रदे श क कौन-सी मठाई प्र सद्ध है।
2. भारत का न ा दे खए और उसम से पाँच प्रदे श के नाम चु नए।
3. हर प्रदे श के सामने वहाँ क मठाई का नाम साफ़ अक्षर म ल खए।

संकेत: इस पाठ म जन मठाइय के नाम आए ह — रसगुल्ला, मैसूरपाक, रसमलाई, सोनपापड़ी, बालूशाही,
कलाकंद, काजूकतली, गु झया — उन्ह से शुरू क जए और पू छए क ये कस- कस प्रदे श म अ धक बनती ह। जो
नाम आपने स्वयं पता कया हो, वही ल खए।

क्य : ऐसे प्रश्न का उत्तर रटा नह जाता। पूछकर और खोजकर लखा गया उत्तर ही सही उत्तर है।

प्र.2 प ढ़ए, सम झए और ल खए — मीठा → मठास → रसगुल्ला; ख ा → …… → ……; …… → नमक न →
……; कड़वा → …… → ……

पहले ंखला का नयम सम झए।

मीठा िमठास रसगुल्ला

ख ा …………… ……………

…………… नमकीन ……………

कड़ वा …………… ……………

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पृष्ठ 109 क शब्द- ंखला। पहली पं क्त पुस्तक ने भरकर दखाई है; बाक खाने खाली ह।

पहला खाना स्वाद बताता है। दूसरे खाने म उसी से बना शब्द आता है। तीसरे खाने म उस स्वाद वाली चीज़ आती है।

मीठा िमठास रसगुल्ला

ख ा खटास नी ंबू

नमक नमकीन चाट

कड़ वा कड़ वाहट करेला

भरी हुई शब्द- ंखला। पहला खाना स्वाद, दूसरा उससे बना शब्द और तीसरा उस स्वाद वाली चीज़।

स्वाद उससे बना शब्द उस स्वाद वाली चीज़

मीठा मठास रसगुल्ला

ख ा खटास नी ंबू

नमक नमक न चाट

कड़वा कड़वाहट करे ल ा

क्य : मीठा से मठास बनी, वैसे ही ख ा से खटास और कड़वा से कड़वाहट बनती है। नमक से नमक न बनता है।

संकेत: तीसरे खाने म आप अपनी पसंद क दूसरी चीज़ भी लख सकते ह, जैसे ख ा के लए इमली और कड़वा के
लए नीम। ध्यान र खए क चीज़ का स्वाद वही हो।

प्र.3 व भन्न प्रकार क मठाइयाँ बनाने के लए अनाज, साग-भाजी, फल-फूल, पत्ते, दलहन, तलहन और सूखे मेवे
आ द का उपयोग होता है। अपने अध्यापक या अ भभावक क सहायता से द गई ता लका को पूरा क जए —

पुस्तक ने बरफ़ वाली पं क्त भरकर दखाई है। उसी तरह दो और मठाइयाँ चुनकर ता लका भ रए।

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कक्षा 4 हद अध्याय 9 मठाइय का सम्मेलन AglaSem · NCERT Solutions

मठाई अनाज फल/फूल सूखे मेवे दलहन तलहन साग-भाजी

बरफ़ गे ँ/चावल ना रयल/केसर काजू/बादाम/ पस्ता चना/मूँग तल लौक /क

……… ……… ……… ……… ……… ……… ………

……… ……… ……… ……… ……… ……… ………

पृष्ठ 110 क ता लका। बरफ़ वाली पं क्त पुस्तक ने भरकर द है।

भरी हुई ता लका (नमूना) —

मठाई अनाज फल/फूल सूखे मेवे दलहन तलहन साग-भाजी

बरफ़ गे ँ/चावल ना रयल/केसर काजू/बादाम/ पस्ता चना/मूँग तल लौक /क

ल ू गे ँ ना रयल काजू/बादाम चना तल —

गिु झया गे ँ ना रयल काजू/ पस्ता — — —

एक नमूना। हर मठाई म हर तरह क चीज़ नह पड़ती, इस लए कुछ खाने खाली रहते ह।

क्य : हर मठाई म हर तरह क चीज़ नह पड़ती। जो चीज़ न पड़े, उस खाने म रेखा (—) लगा द जए।

संकेत: घर म मठाई बनते समय दे खए क उसम क्या-क्या डाला जाता है। अपनी माँ या दाद से भी पू छए। तब
आपक ता लका स ी होगी।

भाषा क बात — पृष्ठ 110–111
मुहावरे, बहुवचन और शब्द का मेल

भाषा क बात

प्र.1 ‘मन म लड्डू फूटना’ का अथ है अत्य धक प्रसन्न होना, जैसे — जब ज्यो त को लाल कला जाने का अवसर मला
तो उसके मन म लड्डू फूटने लगे। इसी प्रकार फल , मसाल और साग-तरका रय पर आधा रत मुहावरे ढूँ ढ़कर
ल खए। (क) …… (ख) …… (ग) …… (घ) …… (ङ) …… अब इन मुहावर के अथ लखकर वाक्य भी बनाइए।

पुस्तक ने (क) म एक मुहावरा भर दया है — अंगूर ख े ह। बाक चार आपको लखने ह।

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मुहावरा अथ वाक्य

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अंगूर ख े है ं जो चीज़ न मले, उसे बुरा कह
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इनाम न मला तो राहुल बोला क अंगूर ख े ह।

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दे ना

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a(ख) दाल में काला होना कुछ गड़बड़ होना उसक बात सुनकर लगा क दाल म कुछ काला है।

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(ग) िमच लगना बात बुरी लग जाना स ी बात सुनते ही उसे मच लग गई।

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बुरे का और भी बुरsा e
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(घ) करे ल ा और नीम चढ़ ा जाना वह पहले ही गुस्से म था, ऊपर से खेल हार गया — करेला और
नीम चढ़ा।

(ङ) आम के आम गठु िलयों के एक ही काम से दो लाभ होना
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मेले म घूमना भी हुआ और खरीदारी भी — आम के आम

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दाम गुठ लय के दाम।

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a s मुहावरा शब्द के सीधे अथ म नह चलता। ‘मन म लड्डू फूटना’ म सचमुच कोई लड्डू नह फूटता, बस खुशी

a gl बहुत होती है।
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संकेत: ये पाँच नमूने ह। आप घर के बड़ से पूछकर और भी मुहावरे लख सकते ह, जैसे ‘गाजर-मूली समझना’।
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नीचे दए गए उदाहरण के अनुसार शब्द के बहुवचन ल खए — मठाई ( मठाइयाँ), जलेबी, रसगुल्ला, इमरती,
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प्र.2
पेड़ा
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agl पुस्तक ने पहला उदाहरण दे दया है — मठाई से मठाइयाँ।
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एक (एकवचन) अनेक (बहुवचन)

मठाई agl िमठाइयाँ

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जलेबी ………………………

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रसगु ………………………

se m इमरती
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पेड़ा ………………………

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पृष्ठ 111 क ता लका। पहली पं क्त उदाहरण के रूप म भरी हुई है।

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एक (एकवचन) अनेक (बहुवचन)

मठाई िमठाइयाँ

जलेबी जले िबयाँ

रसगुल्ला रसगल्ु ले

इमरती इमरितयाँ

पेड़ा पेड़े

भरी हुई ता लका।

क्य : जो स्त्री लग शब्द ‘ई’ पर खत्म होते ह, उनका बहुवचन ‘इयाँ’ से बनता है — जलेबी से जले बयाँ, इमरती से
इमर तयाँ। जो पु ल्लंग शब्द ‘आ’ पर खत्म होते ह, उनका बहुवचन ‘ए’ से बनता है — रसगुल्ला से रसगुल्ले, पेड़ा से
पेड़े।

संकेत: ‘एकवचन’ का अथ है एक, और ‘बहुवचन’ का अथ है एक से अ धक। अपने ही दो और शब्द ली जए —
लड़क से लड़ कयाँ, घोड़ा से घोड़े।

प्र.3 कुछ मठाइय के नाम दो शब्द के मेल से बनते ह। यहाँ कुछ नाम दए गए ह। इनक सहायता से मठाइय के पूरे
नाम ल खए — सोन, रस, कला, पेठा, जामुन, बालू, कतली, भोग

दए गए आठ शब्द को सही जगह जो ड़ए। हर शब्द एक ही बार काम आएगा।

दए गए शब्द — सोन, रस, कला, पेठा, जामुन, बालू, कतली, भोग

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पहला शब्द दूसरा शब्द पूरा नाम

(क) रस मलाई रसमलाई

(ख) गुलाब ……… ………………

(ग) ……… शाही ………………

(घ) मोहन ……… ………………

(ङ) ……… कंद ………………

(च) काजू ……… ………………

(छ) ……… पापड़ी ………………

(ज) अंगूरी ……… ………………

पृष्ठ 111 का प्रश्न 3। (क) पुस्तक ने उदाहरण के रूप म भरा है।

पहला शब्द दूसरा शब्द पूरा नाम

(क) रस मलाई रसमलाई

(ख) गुलाब जामुन गल
ु ाबजामुन

(ग) बालू शाही बालूशाही

(घ) मोहन भोग मोहनभोग

(ङ) कला कंद कलाकं द

(च) काजू कतली काजूक तली

(छ) सोन पापड़ी सोनपापड़ी

(ज) अंगूरी पेठा अंगूर ी पेठा

आठ नाम पूरे हो गए। दए गए आठ शब्द एक-एक बार काम म आए।

क्य : दो छोटे शब्द मलकर एक नया शब्द बना दे ते ह। ‘रस’ और ‘मलाई’ मलकर ‘रसमलाई’ बन गया। इसी तरह
‘काजू’ और ‘कतली’ मलकर ‘काजूकतली’ बना।

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संकेत: पाठ के पहले प े पर मठाइय क सूची द है। उसम से दे खकर आप अपने उत्तर जाँच सकते ह।

साग-भा जय का सम्मेलन — पृष्ठ 112
ऋषभ और गुरप्रीत एक दन घर म खेल रहे थे क अचानक उन्ह रसोईघर से कुछ आवाज आईं। वहाँ साग-भा जयाँ आपस म बात कर रही थ ।
उनक बातचीत को पूरा क जए।

कल्पना

प्र.1 साग-भा जय क बातचीत को पूरा क जए — आलू, बगन, टमाटर, प्याज, मच, भडी, गोभी, करेला, पालक,
लौक ।

यह कल्पना का काम है। पुस्तक ने आलू और बगन के संवाद लखकर दखा दए ह।

पात्र संवाद

आलू म साग-भा जय का राजा ँ। मेरे बना सारी साग-भा जयाँ अधूरी ह।

बगन तुम राजा हो तो क्या हुआ? म भी कम स्वा दष्ट नह !

टमाटर ………………………………………………

प्याज ………………………………………………

मच ………………………………………………

भडी ………………………………………………

गोभी ………………………………………………

करेला ………………………………………………

पालक ………………………………………………

लौक ………………………………………………

पृष्ठ 112 का संवाद। हर साग-भाजी का चत्र भी बना है। पहले दो संवाद पुस्तक ने लखे ह।

अ े उत्तर म क्या होना चा हए —

1. हर साग-भाजी अपने बारे म एक बात कहे — अपना रंग, आकार, स्वाद या गुण।
2. वाक्य छोटा और बोलचाल जैसा हो, जैसे पाठ क मठाइयाँ बोलती ह।

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3. अंत म कोई एक साग-भाजी झगड़ा मटा दे । तभी बात पूरी होती है।

नमूना उत्तर —

पात्र संवाद

आलू म साग-भा जय का राजा ँ। मेरे बना सारी साग-भा जयाँ अधूरी ह।

बगन तुम राजा हो तो क्या हुआ? म भी कम स्वा दष्ट नह !

टमाटर मेरे िबना तो स ब्ज़ी का रंग ही नही ं चढ़ ता। चाट में भी मैं ही हू।
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प्याज मुझे काटते ही आँखों में पानी आ जाता है, िफर भी सब मुझे डालते है।
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मच थोड़ी-सी मैं पड़ जाऊँ तो खाने में चटपटापन आ जाता है।

भडी ँ बच्चे मुझे बहुत चाव से खाते है।
मैं लंबी और हरी हू। ं

गोभी सिद यों में तो मैं ही सबकी पसंद बन जाती हू।
ँ

करेला मैं कड़वा जरूर हू,ँ पर शरीर के िलए सबसे अच्छा हू।
ँ

पालक मुझे खाने से शरीर में ताकत आती है। मैं हरी पि यों वाला हू।
ँ

लौक झगड़ो मत! सबका अपना-अपना स्वाद है, हम सब िमलकर थाली सजाते है।
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एक नमूना संवाद। आप इससे अलग वाक्य भी लख सकते ह।

क्य : ‘ मठाइय का सम्मेलन’ म भी हर मठाई ने पहले अपनी बात कही और अंत म अध्यक्ष ने नणय दया। यही
ढाँचा यहाँ भी काम आता है।

हम और हमारा स्वास्थ्य — पृष्ठ 113
अपनी बात क हए और ल खए

अपनी बात

प्र.1 स्वस्थ रहने के लए आप क्या-क्या करते ह? इससे संबं धत पाँच वाक्य अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए।

यह आपको अपनी लेखन-पु स्तका म स्वयं लखना है। पाँच अलग-अलग काम चु नए और हर काम का एक वाक्य बनाइए।

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कक्षा 4 हद अध्याय 9 मठाइय का सम्मेलन
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नमूना उत्तर:

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1. म रोज सुबह जल्द उठकर ायाम करता ँ।
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2. म दन म दो बार दाँत साफ़ करता ँ।

a g3.l म खाना खाने से पहले हाथ धोता ँ।
4. म फल और हरी साग-भाजी खाता ँ, मठाई कम खाता ँ।

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5. म शाम को मैदान म दौड़ता और खेलता ँ।

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क्य : लड्डू दादा ने भी यही कहा था — “शारी रक श्रम करते रह और स्वस्थ रह।” खेलना और काम करना ही
शारी रक श्रम है।
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m ‘म’ से शुरू क जए। इससे वाक्य बनाना आसान हो जाता है। glas
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संकेत: .हर
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comभी कुछ उदाहरण दे कर अपने अनुभव साझा कर सकते ह। agl
“जहाँ अ त होती है, वहाँ क्ष त होती है।” अगर आपके पास इस कथन से संबं धत कोई अनुभव है तो उसे कक्षा म
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प्र.2

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साझा क जए और उस पर चचा क जए। शक्षक
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पहले कथन का अथ सम झए। अ त यानी बहुत अ धक, और क्ष त यानी नुकसान। कसी भी काम म हद से आगे बढ़ जाओ तो
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नुकसान होता है।

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कक्षा म कैसे बताइए —

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1. अपना कोई एक स ा अनुभव याद क जए।
ag 2. बताइए क आपने क्या ज़्यादा कर दया था।
3. फर बताइए क उससे क्या नुकसान हुआ।
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4. अंत म क हए क अब आप क्या करते ह।
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नमूना उत्तर: पछली होली पर मने बहुत सारी गु झया खा ल । रात म मेरा पेट दद करने लगा और म सो नह सका।
अगले दन दवा लेनी पड़ी। तब से म मठाई थोड़ी-सी ही खाता ँ।

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क्य : रबड़ी जी ने पाठ म यही बात कही — “हमारा सेवन करते समय लोग अ त कर दे ते ह और बाद म भुगतते ह।”
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भूल-भुलय
ै ा — पृष्ठ 113
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भाई-बहन मठाइय के सम्मेलन म गए थे और लौटते समय घर का रास्ता भूल गए। इन्ह जलेबी भूल-भुलैया से बाहर नका लए —

भू ल -भु लै या

प्र.1 भाई-बहन को जलेबी भूल-भुलैया से बाहर नकालकर घर तक पहुँचाइए।

यह पहेली आपको प सल से हल करनी है। पुस्तक म जलेबी जैसी घुमावदार राह बनी है।

एक बीस
घर

पुस्तक के पृष्ठ 113 पर छपी जलेबी भूल-भुलैया का सरल चत्र। बाईं ओर भाई-बहन खड़े ह, दाईं ओर उनका घर है। पुस्तक म राह के मोड़
पर एक, दो, तीन … बीस लखा है।

कैसे हल क जए —

1. बाईं ओर बने भाई-बहन से शुरू क जए। वह राह पर एक लखा है।
2. अब गनती के क्रम से आगे ब ढ़ए — एक, दो, तीन, चार, पाँच, छह, सात, आठ।
3. फर दूसरी जलेबी म जाइए और चलते र हए — नौ, दस, ग्यारह, बारह, तेरह, चौदह, पंद्रह।
4. अंत तक ब ढ़ए — सोलह, सत्रह, अठारह, उ ीस, बीस। बीस पर ही घर बना है।

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एक बीस
घर

लाल बदुओं वाली राह बताती है क भाई-बहन को कस ओर चलना है — एक से चलकर सीधे बीस तक, जहाँ घर बना है।

क्य : राह के हर मोड़ पर संख्या लखी है। जो रास्ता एक से बीस तक क्रम म चलता है, वही सही रास्ता है। जहाँ
अगली संख्या न मले, वह रास्ता गलत है — वहाँ से लौट आइए।

संकेत: पहले उँ गली से रास्ता ना पए। रास्ता ठ क नकल आए, तभी प सल से रेखा ख चए।

चटपट चाट — पृष्ठ 114
पुस्तक इस पृष्ठ के साथ कोई अभ्यास नह दे ती; ये प्रश्न अभ्यास के लए जोड़े गए ह।

गतवध

प्र.1 चटपट चाट बनाने के लए कौन-कौन-सी साम ी चा हए?

पुस्तक के पृष्ठ 114 पर दस चीज़ गनाई गई ह —

अंकु रत चने, मूँग आ द
उबले आलू
टमाटर
हरी मच और हरा ध नया (इ ानुसार)
खीरा
प्याज
काला/सादा नमक (स्वादानुसार)
चाट मसाला
न बू

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भुना जीरा पाउडर

क्य : ‘इ ानुसार’ और ‘स्वादानुसार’ का अथ है — अपनी पसंद के अनुसार कम या ज़्यादा। इसी लए इनक मात्रा
नह लखी गई।

संकेत: पुस्तक अंत म कहती है क आपके पास जो भी साम ी हो, उससे भी आप अपनी मनपसंद चाट बना सकते
ह। ध्यान रहे — चाट बनाते समय कसी बड़े को साथ र खए।

प्र.2 चटपट चाट बनाने क व ध क्रम से ल खए।

पुस्तक चार चरण म व ध बताती है —

क्रम क्या करना है

1 अंकु रत कए हुए मूँग और चने को एक कटोरे म ली जए।

2 अब इसम बारीक कट प्याज, टमाटर, खीरा, उबले आलू, हरी मच और हरा ध नया डा लए।

3 इसके बाद इसम स्वादानुसार सादा नमक/काला नमक, चाट मसाला, न बू का रस और भुना जीरा पाउडर डालकर अ तरह
मला ली जए।

4 स्वा दष्ट चाट तैयार है। स्वाद के साथ-साथ पौ ष्टकता से भरपूर इस चाट का आनंद ली जए।

पृष्ठ 114 पर द गई ‘बनाने क व ध’ के चार चरण। पुस्तक म हर चरण के साथ कटोरे का चत्र भी बना है।

क्य : क्रम बहुत जरूरी है। पहले दाने लए जाते ह, फर कट हुई चीज़, और मसाला सबसे अंत म। मसाला पहले
डाल द तो वह नीचे बैठ जाएगा और सब जगह नह मलेगा।

प्र.3 पुस्तक के अनुसार यह चाट स्वाद के साथ-साथ और कस बात से भरपूर है?

यह चाट स्वाद के साथ-साथ पौ ष्टकता से भरपूर है।
पुस्तक लखती है — “स्वा दष्ट चाट तैयार है। स्वाद के साथ-साथ पौ ष्टकता से भरपूर इस चाट का आनंद ली जए।”

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क्य : इसम अंकु रत चने और मूँग, ताजा टमाटर, खीरा और न बू पड़ते ह। ये सब शरीर को ताकत दे ते ह। इसम
शक्कर बलकुल नह है, इस लए यह मठाई से हलक है।

संकेत: पुस्तक के इसी वाक्य म एक छोट चूक भी छपी है — “आपके पास जो भी साम ी उपलब्ध ह” म ‘साम ी’
एकवचन है, इस लए वहाँ ‘उपलब्ध है’ होना चा हए। पढ़ते समय इसे ध्यान म र खए।

जलेबी (क वता) — पृष्ठ 115
इसी पाठ के भीतर द गई छोट क वता, क व — नरद्र सह ‘नीहार’। पुस्तक इस रचना के साथ कोई अभ्यास नह दे ती; ये प्रश्न अभ्यास के लए
जोड़े गए ह।

क वता

प्र.1 क वता म जलेबी कौन बेच रहा है और कस दाम पर बेच रहा है?

क वता म चंदू चाचा जलेबी बेच रहे ह।
वे गरमागरम जलेबी बेचते ह और आवाज लगाते ह — “एक पाव बीस म ले लो, मीठ मस्त जलेबी।” क वता म केवल ‘बीस’ लखा
है, यानी एक पाव जलेबी का दाम बीस रुपए है।

क्य : दुकानदार आवाज लगाकर ाहक बुलाते ह। इसी लए चंदू चाचा दाम भी साथ-साथ बता दे ते ह।

संकेत: ‘पाव’ तौलने क एक माप है। एक कलो का चौथा भाग एक पाव होता है।

प्र.2 क व ने जलेबी का आकार कैसा बताया है?

क व कहता है — “टे ढ़ -मेढ़ अंदर से, बाहर गोल-गोल।”
इसका अथ है क जलेबी के भीतर के घुमाव टे ढ़े-मेढ़े होते ह, पर बाहर से वह गोल दखाई दे ती है।

क्य : जलेबी बनाते समय घोल को कड़ाही म गोल-गोल घुमाकर डाला जाता है। इसी से भीतर टे ढ़े-मेढ़े घुमाव बन
जाते ह।

संकेत: पाठ के पृष्ठ 113 क भूल-भुलैया भी इसी टे ढ़े-मेढ़े आकार से बनाई गई है।

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तन्नु ने दाद से क्या पूछा? क वता म इसका क्या उत्तर मलता है?
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a ने lदाद से पूछा — “इनम भरता कैसे रस?”
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यानी वह जानना चाहती है क जलेबी के भीतर मीठा रस कैसे भर जाता है।

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क वता क अगली पं क्तयाँ ही उत्तर दे ती ह —

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1. पहले जलेबी कड़क कड़ाही म तली जाती है।
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2. फर वह चाशनी म डू बती है और रस से भरaजाती है।

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3. तब वह ‘सरस’ और ‘मनभावन’ हो जाती है।

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क्य : तली हुई जलेबी के भीतर छोट -छोट खाली जगह रह जाती है। चाशनी म डू बते ही वह जगह मीठे रस से भर
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संकेत: ‘सरस’ का अथ है रस से भरी हुई। ‘मनभावन’ का अथ है जो मन को भा जाए।
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प्र.4 glगे बोल।” इन पं क्तय का क्या अथ है?
“खाओ, घर ले जाओ, मीठे होaजाएँ

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चंदू चाचा कहते ह — जलेबी यह खाओ और घर भी ले जाओ। जो मीठा खाएगा, उसके बोल भी मीठे हो जाएँगे।

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यहाँ ‘मीठे बोल’ का अथ है — प्यार से बोलना, मीठ बात करना।

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क्य : मीठा खाने से मन खुश हो जाता है। खुश मन से नकली बात अपने आप मीठ लगती है।
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संकेत: यही बात ‘ मठाइय का सम्मेलन’ म मैसूरपाक ने भी कही थी — “मीठा अपना स्वाद है, मीठे -मीठे बोल। बस
मठास फैलाइए, मन दरवाजे खोल।।”

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mक वता क अं तम पं क्तय से चंदू चाचा के बारे म क्या पता चलता है?glas e
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अं तम पं क्तयाँ ह — “चंदू बात बहुत बनाता, बकती जाती, बकती जाती।”
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इससे पता चलता है क चंदू चाचा बहुत बातूनी और हँसमुख दुकानदार ह। वे बात करते जाते ह और जलेबी बकती जाती है।
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क्य : मीठ और मजेदार बात सुनकर ाहक रुक जाते ह। रुके हुए ाहक खरीद भी लेते ह। इसी लए चंदू चाचा क
जलेबी जल्द बक जाती है।

संकेत: ‘ बकती जाती, बकती जाती’ एक ही बात दो बार कही गई है। इससे लगता है क बक्र लगातार चलती
रहती है।

अध्याय — एक नज़र म
छगनलाल हलवाई दुकान बंद करके घर चले गए। मौका मलते ही मठाइय ने सम्मेलन कया।
लड्डू दादा को सम्मेलन का अध्यक्ष बनाया गया। बाक मठाइयाँ श्रोता बनकर बैठ ।
कलाकंद भाई ने बात उठाई क डॉक्टर कुछ लोग को मठाई खाने से रोक रहे ह।
रसगुल्ला ने कारण बताया — मठाइय क अ त मठास ही उनक उपेक्षा का कारण है।
रबड़ी जी ने कहा — “जहाँ अ त होती है, वहाँ क्ष त होती है।” गु झया ने शक्कर बढ़ने क बात कही।
लड्डू दादा का नणय — मठाइयाँ अपनी शक्कर घटाएँ, लोग जीभ पर नयंत्रण रख, श्रम कर और स्वस्थ रह।
पाठ के अंत म ‘जलेबी’ क वता है, जसम चंदू चाचा गरमागरम जलेबी बेचते ह।

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त्व रत पुनरावृ त्त

पात्र सम्मेलन म भू मका उसने क्या कहा पृष्ठ

छगनलाल हलवाई िमठाई की दुक ान के मािलक दुकान बंद करके अपने घर चले गए 105

लड्डू दादा सम्मेल न के अध्यक्ष शक्कर क मात्रा कम करो; लोग जीभ पर नयंत्रण रख 105–106

कलाकंद भाई ोता आजकल डॉक्टर कुछ लोग को हमारा सेवन करने से रोक रहे ह 105

सोनपापड़ी ोता क्या आप जानते ह क डॉक्टर लोग ऐसा क्य कर रहे ह? 105

जलेबी बहन ोता बरफ़ बहन तुम ही बता दो न! 105

बरफ़ बहन ोता आप इस तरह मेरा मजाक मत उड़ाइए। 105

मैसूरपाक ोता मीठा अपना स्वाद है, मीठे -मीठे बोल। 105

रसगुल्ला ोता हमारी अ त मठास ही हमारी उपेक्षा का कारण है। 106

गुलाबजामुन ोता फर हम मठाई कौन कहेगा? 106

गु झया ोता कुछ लोग के शरीर म शक्कर क मात्रा बढ़ रही है। 106

रबड़ी जी ोता जहाँ अ त होती है, वहाँ क्ष त होती है। 106

पेड़ा ोता शुभ काय म मठाई बाँटने क प्रथा को भला कौन बंद कर सकता है? 106

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Board / OrgNCERT
ExamClass 4
TypeSolution
Pages26
Languagehindi
Updated13 Oct 2026