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NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 7 नकली हीरे

कक्षा 4 Hindi Chapter 7 नकली हीरे के सभी प्रश्नों के विस्तृत हल AglaSem Docs पर निःशुल्क डाउनलोड करें। नवीनतम एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (वीणा, 2026-27 एनईपी पाठ्यक्रम) पर आधारित, विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए चरण-दर-चरण समाधान। Download NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 7 नकली हीरे PDF free at AglaSem Docs, with step-by-step answers based on the latest NCERT textbook (Veena, 2026-27 NEP syllabus).
NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 7 नकली हीरे - Page 1 of 28

About NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 7 नकली हीरे

NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 7 नकली हीरे is available here for free download. Published by NCERT for Class 4, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (28 pages). Candidates preparing for Class 4 can use NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 7 नकली हीरे to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 7 नकली हीरे?

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NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 7 नकली हीरे – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

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एनसीईआरट समाधान

अध्याय 7: नकली हीरे

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

77 – 89 10 32 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 23 pages

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कक्षा 4 हद अध्याय 7 नकली हीरे AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 4 · हद · वीणा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 7: नकली हीरे
नकली हीरे एक चत्रकथा है। काननपुर का वृद्ध राजा अपने बेटे के लए सलाहकार ढूँ ढ़ता है। वह दरबा रय से एक ऐसा प्रश्न पूछता है, जसका उत्तर
उनका असली च रत्र खोल दे ता है। इन्ह पृष्ठ के अंत म हवा और धूल नाम क छोट -सी शरारती क वता भी द गई है।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

वीणा (कक्षा 4) 77 – 89

खं ड प्रश्न

10 32

माध्यम
हन्द

बातचीत के लए — पृष्ठ 81
पाठ — नकली हीरे

बातचीत के लए

प्र.1 राजा ने अपने पुत्र का सलाहकार कसे और क्य चुना?

राजा ने उस नवयुवक दरबारी को अपने पुत्र का सलाहकार चुना, जसने सबसे अलग और स ा उत्तर दया था।
बाक सब दरबा रय ने कहा — “ नस्संदेह महाराज, संसार म आप-सा बु द्धमान और ईमानदार राजा और कोई नह है।” पर यह
नवयुवक चुप रहा। पूछने पर उसने कहा — “आपसे भी ेष्ठ राजा हो चुके ह जो बु द्धमत्ता और ईमानदारी म आपसे बढ़-चढ़कर
थे।”

क्य चुना: क्य क वह सच बोलता था और वनम्र भी था। राजा के बेटे को ऐसा ही सलाहकार चा हए, जो मुँह पर
सच कहे। खुशामद करने वाला सलाहकार कभी सही रास्ता नह दखाता।

राजा ने स्वयं कहा — “…और मेरे बाद यही मेरे बेटे का वश्वस्त सलाहकार रहेगा।”

प्र.2 दरबा रय ने राजा के उपहार क जौहरी से तुरंत जाँच करवाई। इससे उनके बारे म कौन-कौन सी बात पता चलती
ह?

इससे दरबा रय के बारे म तीन बात पता चलती ह।

उन्ह राजा पर पूरा भरोसा नह था। भरोसा होता तो वे उपहार क जाँच न करवाते।
वे लालची थे। उन्ह उपहार क भावना से नह , हीरे के मोल से मतलब था।

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कक्षा 4 हद अध्याय 7 नकली हीरे AglaSem · NCERT Solutions

वे सच बोलने वाले नह थे। जो स्वयं झूठ बोलते ह, वे दूसर पर भी शक करते ह।

पाठ से आधार: अगली सुबह वे दरबार म आकर बोले — “महाराज, हमने इन हीर क जाँच जौहरी से करवाई।
पता चला क सारे हीरे तो नकली ह!” यानी उन्ह ने एक रात भी नह रुक ।

प्र.3 नवयुवक दरबारी राजा का प्रश्न सुनकर भी चुपचाप क्य खड़ा था?

वह चुप था क्य क वह झूठ नह बोलना चाहता था।
राजा का प्रश्न था — “क्या म बु द्धमान और ईमानदार राजा ँ?” बाक दरबारी राजा को खुश करने वाला उत्तर दे चुके थे। नवयुवक
का उत्तर उनसे अलग था। उसे डर था क सच सुनकर राजा नाराज़ हो जाएगा।

क्य : वह वनम्र था, इस लए बना पूछे बोलना नह चाहता था। जब राजा ने स्वयं पूछा — “आप चुप क्य ह?” —
तभी उसने क्षमा माँगकर अपनी बात कही।

प्र.4 चत्रकथा के अनुसार काननपुर का राजा बहुत बु द्धमान था। क्या आप इस बात से सहमत ह? आपको ऐसा क्य
लगता है?

हाँ, म इस बात से सहमत ँ। काननपुर का राजा सचमुच बु द्धमान था।

उसने सलाहकार चुनने के लए कोई परीक्षा का पचा नह बनाया। उसने बस एक प्रश्न पूछा।
उस एक प्रश्न से ही सच बोलने वाला अपने-आप अलग दख गया।
उसने इनाम को ही परख बना दया — झूठ बोलने वाल को नकली हीरे, सच बोलने वाले को असली हीरा।

असली चतुराई यहाँ है: राजा ने कसी को डाँटा नह । नकली हीरे ने दरबा रय को स्वयं अपनी गलती दखा द ।

संकेत: इस प्रश्न म आपका अपना मत भी चलेगा। कोई कह सकता है क राजा को दरबा रय को धोखा नह दे ना
चा हए था। ऐसा उत्तर भी ठ क है, बस कारण साफ़ ल खए।

प्र.5 जब राजा ने अपने पुत्र के सलाहकार क घोषणा क , तब सभी दरबा रय को कैसा लगा होगा? उन्ह ने क्या-क्या
सोचा होगा?

उस समय सभी दरबा रय को बहुत शम और पछतावा हुआ होगा।

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कक्षा 4 हद अध्याय 7 नकली हीरे AglaSem · NCERT Solutions

पुस्तक के अं तम चत्र-खंड म उनके चेहरे उतरे हुए ह। कोई मुँह पर हाथ रखे है, कसी क आँख झुक ह।
उन्ह ने यह सोचा होगा —

“काश! हमने भी सच कह दया होता।”
“हमने खुशामद करके अपना ही नुकसान कर लया।”
“राजा ने हम पहचान लया, अब उनक नज़र म हमारा मान नह रहा।”

क्य : उन्ह अपनी गलती का प्रमाण हाथ म ही मल गया था — वह नकली हीरा। इसी लए वे कुछ कह भी नह सके।

सो चए और ल खए — पृष्ठ 81-82
प्र.1 — चत्रकथा के दए गए अंश को ध्यान से दे खए

सो चए और ल खए

प्र.1 (क) चत्रकथा के इस अंश म कुल कतने चत्र-खंड ह?

हर दरबारी को राजा ने एक-एक हीरा िदया। सब दरबारी पसन्न होकर चले गए। पर एक
दरबारी चुपचाप एक कोने में खड़ ा रहा।

आपके उत्तर के आप चुप क्यों है?ं
िलए धन्यवाद। आपका उत्तर क्या है?

‘सो चए और ल खए’ म दया गया चत्रकथा का वही अंश, जैसा पुस्तक के पृष्ठ 81 पर छपा है।

इस अंश म कुल तीन चत्र-खंड ह।

पहला — राजा का हाथ एक दरबारी को हीरा दे रहा है।
दूसरा — वह दरबारी हीरा उठाकर खुशी से दे ख रहा है।
तीसरा — राजा सहासन पर बैठा है और चुप खड़े दरबारी से पूछ रहा है।

संकेत: ऊपर क पीली प याँ चत्र-खंड नह ह। वे कथन-प ह, जनम कहानी बताई जाती है। जसके चार ओर
चौखट ( े म) बनी हो, वही एक चत्र-खंड है।

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कक्षा 4 हद अध्याय 7 नकली हीरे
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यहाँ मुख्य पात्र कौन-कौन ह?
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प्र.1 (ख)

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हर दरबारी को राजा ने एक-एक हीरा िदया।

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दरबारी चुपचाप एक कोने में खड़ ा रहा।

आपके उत्तर के आप चुप क्यों है?ं
िलए धन्यवाद।

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आपका उत्तर क्या है?

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‘सो चए और ल खए’ म दया गया चत्रकथा का वही अंश, जैसा पुस्तक के पृष्ठ 81 पर छपा है।

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इस अंश म दो मुख्य पात्र ह — राजा और एक दरबारी।

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l वक, जो हाथ जोड़े खड़ा है।
राजा — सर पर नीली पगड़ी और कलगी है। वह सहासन पर बैठा है और हीरे बाँट रहा है।

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चुप खड़ा दरबारी — नारंगी पगड़ी वाला

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बीच के चत्र-खंड म गुलाबी पगड़ी वाला एक और दरबारी है, पर वह मुख्य पात्र नह है।

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क्य : मुख्य पात्र वही होता है, जसके बना कहानी आगे नह बढ़ती। यहाँ राजा पूछता है और वही दरबारी उत्तर दे ता

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कक्षा 4 हद अध्याय 7 नकली हीरे AglaSem · NCERT Solutions

प्र.1 (ग) बीच वाले चत्र-खंड म क्या हो रहा है?

हर दरबारी को राजा ने एक-एक हीरा िदया। सब दरबारी पसन्न होकर चले गए। पर एक
दरबारी चुपचाप एक कोने में खड़ ा रहा।

आपके उत्तर के आप चुप क्यों है?ं
िलए धन्यवाद। आपका उत्तर क्या है?

‘सो चए और ल खए’ म दया गया चत्रकथा का वही अंश, जैसा पुस्तक के पृष्ठ 81 पर छपा है।

बीच वाले चत्र-खंड म एक दरबारी अपना हीरा उठाकर बड़े चाव से दे ख रहा है।
वह गुलाबी पगड़ी पहने है। हीरा उसक उँ ग लय म चमक रहा है। उसका चेहरा हँसता हुआ है।

यह खंड क्य रखा गया: यह दखाने के लए क दरबारी उपहार पाकर कतने प्रसन्न थे। इसी खुशी के कारण आगे
क बात और च काने वाली लगती है — वह हीरा तो नकली नकला।

प्र.1 (घ) यहाँ केवल चत्र को दे खकर कौन-कौन सी बात पता चल रही ह?

हर दरबारी को राजा ने एक-एक हीरा िदया। सब दरबारी पसन्न होकर चले गए। पर एक
दरबारी चुपचाप एक कोने में खड़ ा रहा।

आपके उत्तर के आप चुप क्यों है?ं
िलए धन्यवाद। आपका उत्तर क्या है?

‘सो चए और ल खए’ म दया गया चत्रकथा का वही अंश, जैसा पुस्तक के पृष्ठ 81 पर छपा है।

बना एक भी शब्द पढ़े , केवल चत्र दे खकर इतनी बात पता चल जाती ह —

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कक्षा 4 हद अध्याय 7 नकली हीरे AglaSem · NCERT Solutions

यह दृश्य कसी राजा के दरबार का है। परदे , खंभे और सहासन दख रहे ह।
सहासन पर बैठा, कलगी वाली पगड़ी पहने आदमी राजा है।
पगड़ी पहने बाक लोग दरबारी ह।
राजा हर दरबारी को कोई चमकती हुई चीज़ दे रहा है।
जसे मली, वह बहुत खुश है।
एक दरबारी हाथ जोड़े, आँख झुकाए चुपचाप खड़ा है। राजा उसक ओर हाथ करके कुछ पूछ रहा है।

संकेत: चत्रकथा क यही खूबी है। चत्र आधी कहानी अपने-आप कह दे ते ह, संवाद केवल उसे पूरा करते ह।

प्र.2 इस चत्रकथा का नाम ‘नकली हीरे’ क्य रखा गया है? आप भी इस चत्रकथा का कोई उपयुक्त शीषक द जए।

नाम ‘नकली हीरे’ इस लए रखा गया है, क्य क पूरी कहानी का मोड़ इन्ह नकली हीर पर घूमता है।
राजा ने हर दरबारी को एक-एक हीरा दया। जन्ह ने झूठा उत्तर दया, उन्ह नकली हीरे मले। जसने सच कहा, उसे असली हीरा
मला। राजा के शब्द म — “आप सबने मेरे प्रश्न का झूठा उत्तर दया… इस लए हीरे भी आपको नकली दए गए।”

असली बात: नकली हीरा यहाँ केवल एक पत्थर नह है। वह झूठ का चह्न है। झूठे उत्तर का इनाम भी झूठा ही होता
है।

नमूना उत्तर (दूसरे उपयुक्त शीषक):

स ा उत्तर, असली हीरा
राजा क परीक्षा
एक स ा दरबारी
सच का इनाम

संकेत: अ ा शीषक छोटा होता है और कहानी क सबसे बड़ी बात पकड़ लेता है। आप अपना कोई और शीषक भी
सोच सकते ह।

प्र.3 राजा ने नकली हीर का पुरस्कार कन्ह और क्य दया?

राजा ने नकली हीर का पुरस्कार उन सभी दरबा रय को दया, जन्ह ने उसे खुश करने के लए झूठा उत्तर दया था।
उन सबने बारी-बारी से यही कहा था — “ नस्संदेह महाराज, संसार म आप-सा बु द्धमान और ईमानदार राजा और कोई नह है।”

क्य दया: क्य क राजा उन्ह उन्ह क भाषा म उत्तर दे ना चाहता था। उनका उत्तर सच नह था, इस लए उनका
इनाम भी स ा नह था।

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कक्षा 4 हद अध्याय 7 नकली हीरे AglaSem · NCERT Solutions

राजा ने स्वयं समझाया — “आप सबने मेरे प्रश्न का झूठा उत्तर दया… इस लए हीरे भी आपको नकली दए गए।”

प्र.4 राजा ने एक को छोड़कर अन्य सभी दरबा रय को नकली हीरे क्य दए? अपने उत्तर का कारण भी ल खए।

राजा ने ऐसा इस लए कया, क्य क केवल एक दरबारी ने सच कहा था। बाक सबने झूठ बोला था।
दोन तरफ़ का हसाब —

कसने क्या उत्तर दया कैसा उत्तर था कैसा इनाम मला

सब दरबारी — ‘आप-सा राजा और कोई नही ं’ झूठा, खुशामद वाला नकली हीरा

नवयुवक दरबारी — ‘आपसे ेष्ठ राजा भी हो चुके है’ं सीधा-सादा, सच्चा असली हीरा

कारण: राजा दरबा रय को शब्द से नह समझाना चाहता था। उसने उन्ह उनक गलती हाथ म पकड़ा द । नकली
हीरा दे खकर वे स्वयं समझ गए क झूठ का मोल कुछ नह होता।

याद रखने क बात: राजा को ऐसा सलाहकार चा हए था, जो उसके बेटे से भी सच कहे। यह परीक्षा उसी के लए
थी।

शब्द से मत्रता — पृष्ठ 82

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कक्षा 4 हद अध्याय 7 नकली हीरे AglaSem · NCERT Solutions

नीचे दए गए शब्द को उनके उपयुक्त अथ के साथ रेखाएँ ख चकर मलाइए

शब्द से मत्रता

प्र.1 नीचे दए गए शब्द को उनके उपयुक्त अथ के साथ रेखाएँ ख चकर मलाइए —

शब्द अथ (क्रम बदला हुआ)

वृद्ध सव त्त म

िनस्संदे ह रुकना

बुिद्धमान बूढ़ा

ेष्ठ संदे ह न होना

ठहरना िववेक वान

पृष्ठ 82 पर द गई दोन सू चयाँ, उसी क्रम म। पुस्तक म एक रेखा पहले से खची हुई है।

सही जो ड़याँ इस प्रकार ह —

शब्द अथ पाठ क पं क्त

वृद्ध बूढ़ा ‘काननपुर के बु द्धमान और वृद्ध राजा…’

िनस्संदे ह संदे ह न होना ‘ नस्संदेह महाराज…’

बुिद्धमान िववेक वान ‘क्या म बु द्धमान और ईमानदार राजा ँ?’

ेष्ठ सव म त्त ‘आपसे भी ेष्ठ राजा हो चुके ह’

ठहरना रु कना ‘ठह रए… म समझाता ँ।’

संकेत: पुस्तक ने पहली रेखा (वृद्ध — बूढ़ा) पहले ही ख च द है, ता क आप समझ जाएँ क करना क्या है। बाक
चार रेखाएँ आपको ख चनी ह।

आसान तरीका: हर शब्द को पाठ क उसी पं क्त म रखकर प ढ़ए, जहाँ वह आया है। अथ अपने-आप समझ आ
जाएगा।

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हमारी समझ — पृष्ठ 83
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इन प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर पर सूरज का चत्र बनाइए
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हमारी समझ

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नवयुवक दरबारी का उत्तर सुनकर राजा — (i) प्रसन्न हो गया। (ii) अप्रसन्न हो गया। (iii) भयभीत हो गया।
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(iv) च तत हो गया।
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सही उत्तर — (i) प्रसन्न हो गया। इसी पर सूरज का चत्र बनाइए।

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पाठ से आधार: अगले ही चत्र-खंड म राजा कहता है — “हम आपका उत्तर सुनकर बहुत प्रसन्नता
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आपका .हीरा।”
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a बाक तीन वकल्प गलत क्य ह —
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अप्रसन्न — य द राजा नाराज़ होता तो उसे इनाम न दे ता।

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भयभीत — राजा को कसी से डरने क कोई बात नह थी।

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च तत — राजा क चता तो इसी उत्तर से दूर हुई। उसे सलाहकार मल गया।
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सबसे अलग उत्तर दे ने वाले दरबारी के लए नम्न ल खत म से कौन-सा वाक्य सही है? (i) वह सदै व झूठ

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बोलता था। (ii) वह राजा के पुत्र का सलाहकार बनना चाहता था। (iii) वह अन्य दरबा रय से अलग दखना

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सही उत्तर — (iv) वह एक वनम्र नवयुवक था। इसी पर सूरज का चत्र बनाइए।
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s रहा। बोलने से पहले उसने कहा — “पर क्षमा क जएगा, मेरा उत्तर वैसा
पाठ से आधार: वह चुपचाप कोने मaखड़ा
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नह है।” चत्र म वह हाथ जोड़े a
और आँख झुकाए खड़ा है। यही वनम्रता है।

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बाक तीन वकल्प गलत क्य ह —
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सदै व झूठ बोलता था — उलट बात है। उसी ने तो अकेले सच कहा।
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a s em सलाहकार बनना चाहता था — उसे तो पता ही नह था क राजा सलाहकार ढूँ ढ़ रहा है।

agl अलग दखना चाहता था — वह तो चुप ही रहना चाहता था। राजा के पूछने पर बोला।
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भाषा क बात — पृष्ठ 83-85
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कक्षा 4 हद अध्याय 7 नकली हीरे AglaSem · NCERT Solutions

‘ही’, दो बार आने वाले शब्द और वनम्रता के शब्द

भाषा क बात

प्र.1 (क) ‘काननपुर के बु द्धमान और वृद्ध राजा का एक बेटा था।’ / ‘काननपुर के बु द्धमान और वृद्ध राजा का एक ही
बेटा था।’ इन दोन पं क्तय को ध्यान से दे खए। दोन म क्या अंतर है?

दोन पं क्तय म केवल एक छोटा-सा शब्द का अंतर है — ‘ही’।

पं क्त इसका अथ

‘राजा का एक बेटा था।’ राजा का एक बेटा था। और भी हो सकते है,ं यह बात साफ़ नही ं।

‘राजा का एक ही बेटा था।’ राजा का िसफ़ एक बेटा था, दू स रा कोई नही ं।

नयम: ‘ही’ अपने पहले वाले शब्द पर ज़ोर डालता है। वह बताता है क बस इतना, इससे ज़्यादा नह ।

मेरा अपना उदाहरण: “मेरे पास एक प सल है।” और “मेरे पास एक ही प सल है।” — दूसरी बात सुनकर पता चलता है क दूसरी
प सल है ही नह ।

संकेत: पुस्तक के पृष्ठ 77 पर छपी असली पं क्त ‘ही’ वाली है — ‘काननपुर के बु द्धमान और वृद्ध राजा का एक ही
बेटा था।’ इसी लए राजा को बेटे क इतनी चता थी।

प्र.1 (ख) आप भी कक्षा म पाँच-पाँच के समूह बनाकर ‘ही’ शब्द वाले चार वाक्य अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए।

यह काम आपको अपने समूह म करना है। करने का तरीका यह है —

1. पाँच-पाँच ब का समूह बनाइए।
2. हर ब ा अपने आस-पास क एक बात सोचे, जसम ‘बस इतना ही’ वाला भाव हो।
3. उसे वाक्य म ल खए और ‘ही’ उसी शब्द के बाद र खए, जस पर ज़ोर दे ना है।
4. समूह म एक-दूसरे को वाक्य सुनाइए। जाँ चए क ‘ही’ हटाने पर अथ बदलता है या नह ।

नमूना उत्तर:

आज कक्षा म एक ही ब ा अनुप त है।
मुझे मठाई म जलेबी ही पसंद है।
दाद ने कहानी सुनाई, वही कहानी मने भी सुनाई।
बा रश होते ही हम बाहर भाग गए।

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कक्षा 4 हद अध्याय 7 नकली हीरे AglaSem · NCERT Solutions

जाँचने का तरीका: वाक्य म से ‘ही’ हटाकर प ढ़ए। य द अथ हल्का पड़ जाए, तो आपका वाक्य सही बना है।

प्र.2 नीचे दए गए वाक्य म से जो आपको अपने लए सबसे उपयुक्त लगते ह, उनके सामने सही का चह्न (✓)
लगाइए — मुझे कहा नयाँ और क वताएँ पढ़ना पसंद है। / मुझे रोचक कहा नयाँ सुनाना या लखना पसंद है। /
मुझे पहे लयाँ हल करना पसंद है। / मुझे ग णत के खेल और प्रश्न हल करना रु चकर लगता है। / मुझे चत्रकारी
करना पसंद है। / मुझे घूमने- फरने और खेलने म आनंद आता है। / मुझे अ भनय या नृत्य करना पसंद है। / मुझे
गीत गाना या वाद्ययंत्र बजाना अच्छा लगता है। / मुझे संगीत सुनना पसंद है। / मुझे दूसर के साथ काम करना
और मत्र बनाना पसंद है। / मुझे अपने सहपा ठय क सहायता करना अच्छा लगता है। / मुझे प्रकृ त और
जानवर के बारे म जानना पसंद है। / मुझे बागवानी पसंद है।

यह प्रश्न आपके अपने बारे म है। इसका कोई एक सही उत्तर नह होता। हर ब े का उत्तर अलग होगा।
कैसे भर —

1. एक-एक वाक्य धीरे-धीरे प ढ़ए।
2. सो चए — क्या म सचमुच यह काम करके खुश होता ँ?
3. य द हाँ, तो उसके सामने बने कोष्ठक म सही का चह्न (✓) लगाइए।
4. जो काम आपको पसंद नह , उसे खाली छोड़ द जए। कोई बात नह ।

नमूना उत्तर (एक ब े क पसंद):

वाक्य चह्न

मुझे कहािनयाँ और किवताएँ पढ़ ना पसंद है। ✓

मुझे पहेिलयाँ हल करना पसंद है। ✓
मुझे िचत्रकारी करना पसंद है। ✓

मुझे अपने सहपािठयों की सहायता करना अच्छा लगता है। ✓

मुझे पकृ ित और जानवरों के बारे में जानना पसंद है। ✓

संकेत: आप एक से अ धक वाक्य चुन सकते ह। सच-सच चु नए, वही आपके काम आएगा।

प्र.3 अब ऊपर द गई सूची म से अपनी मनभावन ग त व ध को चुनकर उस पर एक अनुच्छेद ल खए। आप एक से
अ धक ग त व धयाँ भी चुन सकते ह।

यह अनु े द आपको स्वयं लखना है।

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कक्षा 4 हद अध्याय 7 नकली हीरे AglaSem · NCERT Solutions

अच्छे अनुच्छेद म ये बात होनी चा हए —

1. पहला वाक्य — आपको कौन-सी ग त व ध सबसे अ लगती है।
2. दूसरा-तीसरा वाक्य — आप उसे कब और कहाँ करते ह।
3. चौथा वाक्य — वह आपको अ क्य लगती है।
4. अं तम वाक्य — उससे आपको क्या मलता है।

नमूना उत्तर:
मुझे चत्रकारी करना सबसे अ धक पसंद है। छु के दन म अपनी रंग क ड बया लेकर बैठ जाता ँ। म ज़्यादातर पेड़, च ड़याँ
और अपने घर के आँगन का चत्र बनाता ँ। मुझे चत्रकारी इस लए अ लगती है, क्य क उसम मन क बात बना बोले कही जा
सकती है। चत्र बनाते समय मेरा मन शांत रहता है और समय का पता ही नह चलता। मेरी दाद मेरे चत्र द वार पर लगाती ह, इससे
मुझे और उत्साह मलता है।

संकेत: नमूना उत्तर को ज्य -का-त्य मत उता रए। अपनी पसंद क ग त व ध का नाम रखकर अपने शब्द म
ल खए।

प्र.4 “सब दरबा रय ने बारी-बारी से यही उत्तर दया।” उपयुक्त पं क्त म ‘बारी’ शब्द का दो बार प्रयोग हुआ है। आप
भी नीचे दए ऐसे शब्द से वाक्य बनाइए — धीरे-धीरे, भन्न- भन्न, साथ-साथ, बार-बार

ये सब दोहराए गए शब्द ह। एक ही शब्द दो बार आता है और बीच म छोट रेखा (-) लगती है।

शब्द अथ वाक्य

धीरे -धीरे बहुत धीमे, थोड़ ा-थोड़ ा करके दाद धीरे-धीरे सी ढ़याँ चढ़ रही थ ।

िभन्न-िभन्न अलग-अलग तरह के मेले म भन्न- भन्न रंग के गुब्बारे बक रहे थे।

साथ-साथ एक ही समय पर , िमलकर म और मेरी बहन साथ-साथ व ालय जाते ह।

बार-बार कई बार , िफर -िफर श क्षका ने बार-बार समझाया, तब मुझे प्रश्न समझ आया।

नयम: शब्द को दोहराने से उसका भाव बढ़ जाता है। ‘बारी’ का अथ है क्रम; ‘बारी-बारी’ का अथ है एक के बाद
एक, क्रम से।

और उदाहरण: पीछे -पीछे , दाएँ-बाएँ, नीचे-नीचे। ये तीन ‘हवा और धूल’ क वता म आए ह।

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कक्षा 4 हद अध्याय 7 नकली हीरे AglaSem · NCERT Solutions

प्र.5 “कृपा करके स्पष्ट उत्तर द जएगा।” कृपा जैसे शब्द का प्रयोग वनम्रता दशाने के लए कया जाता है। नीचे दए
गए ऐसे ही शब्द का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए और अपने समूह म एक-दूसरे से बातचीत करते हुए उनका
प्रयोग क जए — कृपया, धन्यवाद, क्षमा क जए, आपका आभार

ये चार वनम्रता के शब्द ह। इनसे बात मीठ और सुंदर बन जाती है।

शब्द कब बोलते ह वाक्य

कृ पया कु छ माँगते या कहते समय कृपया मुझे अपनी रबड़ दे द जए।

धन्यवाद कोई काम हो जाने पर मेरी सहायता करने के लए धन्यवाद।

क्षमा कीिजए गलती हो जाने पर क्षमा क जए, म आज दे र से आया।

आपका आभार िकसी बड़ े उपकार पर आपने मुझे रास्ता बताया, आपका आभार।

पाठ से जो ड़ए: इसी पाठ म राजा कहता है — “कृपा करके स्पष्ट उत्तर द जएगा।” दरबारी कहता है — “क्षमा
क जएगा, मेरा उत्तर वैसा नह है।” और राजा कहता है — “आपके उत्तर के लए धन्यवाद।” राजा होकर भी वह
वनम्र भाषा बोलता है।

करके दे खए: अपने समूह म एक छोटा-सा खेल खे लए। एक ब ा कुछ माँगे, दूसरा दे । दोन इन्ह शब्द का प्रयोग
कर।

पाठ क वशेषताएँ — पृष्ठ 85

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कक्षा 4 हद अध्याय 7 नकली हीरे
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नीचे इस चत्रकथा क कुछ वशेषताएँ द गई ह
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पाठ क वशे ष ताएँ

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a s emइस चत्रकथा क कुछ वशेषताएँ द गई ह। आप भी इस पाठ्यपुस्तक म से कसी कहानी अथवा क वता क
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नीचे
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प्र.1
वशेषताएँ ल खए —

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e m . ag
बदु
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‘नकली हीरे’ (पुस्तक ने भरा हुआ) मेरी रु च का पाठ
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पाठ का नाम नकली हीरे ...................

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िचत्र

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सुंद र , रंग-िबरंगे, प ट
स् ष् ...................

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m .coरचनाकार नीरा बेनेगल
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ag रोचकता आनंद दायक ...................

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सकारा मक ...................

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अंत त्

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पृष्ठ 85 क ता लका — बाईं ओर पुस्तक का भरा हुआ नमूना, दाईं ओर आपको भरना है।

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पहले सम झए क पुस्तक ने ‘नकली हीरे’ के बारे म क्या-क्या लखा है और क्य —

e mचत्र — सुंदर, रंग- बरंगे, स्पष्ट: क्य क यह चत्रकथा है। यहाँ चत्र ही आधी कहानी कहते ह। a
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la रचनाकार — नीरा बेनेगल: यह चत्रकथा ‘ टकल’ प त्रका से साभार ली गई है।
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रोचकता — आनंददायक: अंत तक पता ही नह चलता क हीरे नकली ह। यही मोड़ मज़ा दे ता है।

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अंत — सकारात्मक: सच बोलने वाले को असली हीरा और बड़ा पद मलता है।

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नमूना उत्तर (अपनी रु च के पाठ के लए) —

बदु
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मेरी रु च का पाठ

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पाठ का नाम हवा और धूल

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िचत्र ह के रंगों वाले , उड़ ती धूल और प ों से भरे

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a रचनाकार याम सुशील
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हँस ी आने वाली; हवा और धूल ब चों की तरह खेल ती है ं

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रोचकता

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शरारती — हवाm .
अंत
a s e धूल की आँख में धूल झोंक कर भाग जाती है

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संकेत: आप इस पाठ्यपुस्तक का कोई भी पाठ चुन सकते ह। बस उसका नाम, रचनाकार और अपनी राय स ी
ल खए।

आपक चत्रकथा — पृष्ठ 86
चत्रकार — रामबाबू माथुर (स्वच्छता काटू न)

आपक चत्रकथा

प्र.1 नीचे द गई चत्रकथा के संवाद ल खए। इसके लए आप अपनी मातृभाषा का प्रयोग भी कर सकते ह।

ताज़ ा फल

भौं... भौं!
zzz...

सॉरी

कचरा पात्र

‘आपक चत्रकथा’ (पृष्ठ 86) का छह चत्र-खंड वाला काटू न — बदुओं वाले खाली संवाद-बुलबुले आपको भरने ह।

पहले चत्र को क्रम से प ढ़ए, फर खाली बुलबुले भ रए।
चत्र म क्या हो रहा है —

1. एक लड़का फल क दुकान (‘ताज़ा फल’) पर केले ख़रीद रहा है।
2. वह चलते-चलते केला छ ल रहा है।
3. वह केला खाकर छलका सड़क पर फक दे ता है। पास ही एक कुत्ता सो रहा है।
4. कुत्ता उसी छलके पर फसल जाता है।
5. लड़का मुड़कर दे खता है — उसे समझ नह आता क हुआ क्या।
6. वह ‘सॉरी’ कहता है और कुत्ता छलका उठाकर कचरा पात्र म डाल दे ता है।

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नमूना उत्तर (खाली बुलबुल के संवाद) —

बुलबुला कौन बोल रहा है संवाद

पहला लड़ का भैया, ये केले कतने के ह?

दू स रा फलवाला बलकुल ताज़े ह। ले ली जए, मीठे नकलगे।

तीसरा लड़ का ठ क है, एक दजन दे द जए।

चौथा लड़ का (के ला खाते हुए ) वाह, बहुत मीठा है! छलका यह फक दे ता ँ।

पाँचवाँ लड़ का (पीछे मुड़कर ) अरे! यह आवाज़ कैसी थी? कुत्ता गर कैसे गया?

चत्रकथा जो सखाती है: केले का छलका सड़क पर फकना खतरनाक है। कोई भी फसल सकता है। छलका
हमेशा कचरा पात्र म ही डा लए।

संकेत: संवाद छोटे र खए, ता क बुलबुले म आ जाएँ। आप ये संवाद अपनी मातृभाषा म भी लख सकते ह —
पुस्तक ने इसक छू ट द है।

खो जए और आनंद ली जए — पृष्ठ 87-88

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अंतर खो जए और छपे शब्द खो जए

खो जए और आनं द ली जए

प्र.1 नीचे दए गए एक जैसे चत्र म पाँच अंतर खो जए —

पृष्ठ 87 पर दए गए दोन चत्र — ऊपर वाला और नीचे वाला। दोन को ध्यान से मलाकर दे खए।

दोन चत्र म ये पाँच अंतर ह —

क्रम ऊपर वाले चत्र म नीचे वाले चत्र म

1 बाईं ओर दो पेड़ है ं — एक नुक ीला और एक गोल। के वल एक गोल पेड़ है।

2 िबल्ली के गले में नीली िततली (बो) बँध ी है। िब ली के गले में कु छ नही ं है।
ल्

3 ु ाबी और पीले के बीच सफ़े द प ी है।
लड़की की कमीज़ में ग ल सफ़े द प ी नही ं है; गुल ाबी के नीचे सीधे पीला है।

4 घर की छत के नीचे वाले भाग में गोल िखड़की (रोशनदान) है। वहाँ कोई गोल िखड़ की नही ं है।

5 बैगं नी पत्थरों के पास हल्के पीले पत्ते है।
ं प थरों के पास कोई प ा नही ं है।
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खोजने का आसान तरीका: चत्र को मन म चार हस्स म बाँट ली जए — ऊपर-बाएँ, ऊपर-दाएँ, नीचे-बाएँ, नीचे-
दाएँ। एक बार म एक ही हस्सा मलाकर दे खए। ऐसे करने पर कोई अंतर छू टता नह ।

प्र.2 नीचे दए गए चत्र म पाठ म आए पाँच शब्द छपे ह। खोजकर ल खए —

चत्र म क्या-क्या है: एक बैठक का रंगीन चत्र। बाईं द वार पर एक े म है, जसम एक हाथ
आवधक लस (magnifying glass) पकड़े है। बीच क द वार पर कताब क अलमारी है,
जसम रंग- बरंगी कताब खड़ी ह। दाईं द वार पर एक और े म है, जसम नीली पृष्ठभू म पर
एक चमकता हुआ रत्न बना है। नीचे एक कुस पर दादाजी अख़बार पढ़ रहे ह, उनके पैर के
पास बल्ली बैठ है। दाईं ओर सोफ़े के पास एक लड़का गुलाबी पुस्तक और एक लड़क नीली
पुस्तक पढ़ रही है। बाईं ओर तपाई पर मेज़-लप है और फ़श पर एक दरी बछ है।

पृष्ठ 88 का चत्र — इसी चत्र क रेखाओं म पाठ के पाँच शब्द छपाकर बनाए गए ह।

शब्द चत्र क रेखाओं म ही छपाकर लखे गए ह। जहाँ-जहाँ टे ढ़ -मेढ़ रेखाएँ दख, वहाँ ध्यान से दे खए।
जो शब्द साफ़ पढ़े जा सकते ह —

कहाँ छपा है शब्द पाठ म कहाँ आया

बाईं दीवार के फ़े म में, आवधक ले ंस पकड़े हाथ पर जाँच ‘हमने इन हीर क जाँच जौहरी से करवाई।’

िकताबों की अलमारी में, ऊपर वाली पंिक्त की िकताबों पर दरबार ‘उसने सब दरबा रय को दरबार म बुलवाया।’

दाईं दीवार के फ़े म में, चमकते रत्न के भीतर हीरा ‘यह लो आपका हीरा।’

एक स ी बात: पुस्तक का यह चत्र बहुत बारीक छपा है। बाक दो शब्द हम साफ़ नह पढ़े जा सके। अपनी
पुस्तक के पृष्ठ 88 पर इन जगह को ध्यान से दे खए — ब क पुस्तक के आवरण, सोफ़े क ग , फ़श क दरी
और बल्ली क धा रयाँ। पाठ के जो शब्द वहाँ मल सकते ह, वे ह — राजा, दरबारी, जौहरी, सलाहकार, नकली,
ईमानदार।

ऐसी पहेली कैसे हल कर: पहले पाठ के दस-बारह मुख्य शब्द एक कागज़ पर लख ली जए। फर चत्र म उन्ह
अक्षर के आकार ढूँ ढ़ए। इससे खोज बहुत आसान हो जाती है।

पुस्तकालय से — पृष्ठ 88

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चत्रकथा प ढ़ए और सा थय को सुनाइए
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पु स्तकालय से

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a s emआपने कोई चत्रकथा पढ़ है? य द हाँ तो अपने सहपा ठय को उसके वषय म बताइए।
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क्या
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प्र.1

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यह बताने वाला काम है। इसका उत्तर आपका अपना होगा।m.c ag

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बताते समय ये चार बात ज़रूर क हए —

1. चत्रकथा का नाम क्या है।

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2. उसम मुख्य पात्र कौन-कौन ह।

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3. कहानी म सबसे मज़ेदार या च काने वाली बात क्या हुई।
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4. आपको वह क्य अ लगी।

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a मने ‘नकली हीरे’ नाम क चत्रकथा पढ़ है। इसम काननपुर का एक वृद्ध राजा है और उसके दरबारी ह। राजा ने सबसे पूछा क क्या
नमूना उत्तर:

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वह बु द्धमान और ईमानदार है। सबने खुश करने वाला उत्तर दया, पर एक नवयुवक ने सच कहा। सबसे मज़ेदार बात यह हुई क

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झूठ बोलने वाल के हीरे नकली नकले। मुझे यह चत्रकथा इस लए अ लगी, क्य क इसके चत्र बोलते हुए लगते ह और अंत म
स ाई जीत जाती है।
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संकेत: बोलते समय ज़ोर से और रुक-रुककर बो लए। कहानी का अंत पहले मत बता द जए, वरना सुनने का मज़ा

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चला जाएगा।
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a s em
a gl प्र.2 अपने वद्यालय के पुस्तकालय म से कोई अन्य चत्रकथा ढूँ ढ़ए और अपने सहपा ठय के साथ प ढ़ए।
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m . a

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यह काम आपको पुस्तकालय जाकर करना है।
करने का तरीका —

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1. पुस्तकालय म बाल-पुस्तक वाली अलमारी दे खए।

m .
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2. ऐसी पुस्तक चु नए जसम चत्र बड़े ह और संवाद बुलबुल म लखे ह । वही चत्रकथा होती है।

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4.. पढ़ने के बाद आपस म बात क जए — कहानी म सबसे अ ा क्या लगा।
3. दो-तीन साथी मलकर बै ठए। हर ब ा एक पात्र क आवाज़ बनकर पढ़े ।

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agl नमूना उत्तर:
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m .
हमने पुस्तकालय से एक पंचतंत्र क चत्रकथा ली। उसम एक चतुर खरगोश और एक घमंडी शेर क कहानी थी। मने खरगोश क
m a s e
. co agl
और मेरे मत्र ने शेर क आवाज़ बनाकर पढ़ा। हम सबसे अ ा वह भाग लगा, जहाँ खरगोश अपनी चतुराई से शेर को कुएँ तक ले

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जाता है।

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संकेत: पुस्तक को साफ़ हाथ से पक ड़ए और पढ़ने के बाद उसी जगह वापस र खए।

हवा और धूल — पृष्ठ 89
क व — श्याम सुशील। पुस्तक इस क वता के साथ कोई अभ्यास नह दे ती; ये प्रश्न अभ्यास के लए जोड़े गए ह।

क वता

प्र.1 ‘हवा धूल को छे ड़के भागी / सोती धूल अचानक जागी / उड़ी हवा के पीछे -पीछे / हवा हो गई धूल के नीचे’ — इन
पं क्तय म क्या हो रहा है?

इन पं क्तय म हवा और धूल का पकड़म-पकड़ाई वाला खेल शुरू होता है।
सरल अथ —

हवा आई और धूल को छे ड़कर भाग गई।
धूल सो रही थी। छे ड़ने से वह अचानक जाग गई।
वह हवा के पीछे -पीछे उड़ चली।
पर हवा चालाक नकली — वह धूल के नीचे जाकर छप गई।

क व क्या चत्र बना रहे ह: क व ने हवा और धूल को दो शरारती ब जैसा बना दया है। एक छे ड़कर भागता है,
दूसरा पीछे दौड़ता है। इसी लए क वता पढ़ते ही हँसी आती है।

प्र.2 ‘धूल खोजती आँख म चे / दाएँ-बाएँ आगे-पीछे ’ — इन पं क्तय का अथ अपने शब्द म ल खए।

इसका अथ है — धूल आँख बंद कए हवा को हर तरफ़ ढूँ ढ़ रही है।
वह दाईं ओर दे खती है, बाईं ओर दे खती है, आगे भी और पीछे भी। पर हवा उसे कह नह मलती।

क्य आँख म चे: धूल उड़ती है तो आँख म चली जाती है और आँख अपने-आप बंद हो जाती ह। क व ने इसी स ी
बात को खेल बना दया — जैसे धूल आँख- मचौली खेल रही हो।

याद र खए: ‘म चना’ का अथ है आँख कसकर बंद करना।

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प्र.3 क वता के अंत म हवा ने क्या कया? ‘हवा-हवाई’ का यहाँ क्या अथ है?

अंत म हवा ने धूल क आँख म धूल झ क द और स्वयं गायब हो गई।
क वता क पं क्तयाँ ह — ‘धूल क आँख म धूल झ ककर / हवा हो गई हवा-हवाई!’
‘हवा-हवाई’ का अथ है — पल भर म गायब, जैसे थी ही नह । यहाँ इसका मज़ा दुगुना है, क्य क गायब होने वाली स्वयं हवा है।

चतुराई कहाँ है: ‘आँख म धूल झ कना’ का अथ है कसी को चकमा दे ना। क व ने इसी मुहावरे को सचमुच क धूल
के साथ जोड़ दया। इसी लए अं तम पं क्त पढ़कर हँसी आ जाती है।

प्र.4 इस क वता म कई शब्द दो बार आए ह, जैसे — पीछे -पीछे । ऐसे चार शब्द छाँटकर ल खए।

क वता म दोहराए गए ये शब्द आए ह —

शब्द क वता क पं क्त

पीछे -पीछे उड़ ी हवा के पीछे -पीछे

दाएँ-बाएँ दाएँ-बाएँ आगे-पीछे

आगे-पीछे दाएँ-बाएँ आगे-पीछे

नीचे-नीचे नीचे-नीचे धूल के नीचे

ऐसे शब्द क्य आते ह: दोहराने से क वता म लय बन जाती है और गाते हुए पढ़ना अ ा लगता है। साथ ही भाव
भी बढ़ जाता है — ‘नीचे-नीचे’ कहने से लगता है क हवा बहुत ही नीचे छपी है।

जो ड़ए: ‘नकली हीरे’ पाठ म भी ऐसा एक शब्द आया है — बारी-बारी।

प्र.5 क व ने हवा और धूल को दो ब क तरह दखाया है। क वता से उदाहरण दे कर बताइए।

हाँ, क व श्याम सुशील ने हवा और धूल को दो शरारती ब क तरह दखाया है।

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क वता क बात ब जैसा काम

‘हवा धूल को छे ड़के भागी’ छे ड़कर भाग जाना

‘सोती धूल अचानक जागी’ नी ंद से चौंक कर उठ जाना

‘उड़ी हवा के पीछे -पीछे ’ पकड़ ने के िलए पीछे दौड़ ना

‘धूल खोजती आँखें मी ंचे’ आँख-िमचौली खेल ना

‘हवा हो गई हवा-हवाई!’ चकमा दे क र िछप जाना

यह तरीका क्य अच्छा लगता है: हवा और धूल तो नज व ह। पर जब वे छे ड़ती, दौड़ती और छपती ह, तो हम
अपना ही खेल याद आ जाता है। इसी लए क वता अपनी-सी लगती है।

अध्याय — एक नज़र म
काननपुर के बु द्धमान और वृद्ध राजा का एक ही बेटा था। राजा अपने पुत्र के लए एक सलाहकार ढूँ ढ़ना चाहता था।
उसने सब दरबा रय से पूछा — ‘क्या म बु द्धमान और ईमानदार राजा ँ?’ सबने बारी-बारी से यही कहा क आप-सा राजा
और कोई नह है।
एक नवयुवक दरबारी चुप रहा। उसने वनम्रता से सच कहा क राजा से भी ेष्ठ राजा पहले हो चुके ह।
राजा ने हर दरबारी को एक-एक हीरा दया। अगली सुबह दरबा रय ने बताया क जौहरी क जाँच म सारे हीरे नकली नकले।
कहानी का मोड़ यह है — झूठे उत्तर का इनाम नकली हीरा, और स े उत्तर का इनाम असली हीरा। राजा ने उसी
नवयुवक को अपने बेटे का वश्वस्त सलाहकार चुना।
पाठ के अंत म श्याम सुशील क क वता हवा और धूल है, जसम हवा और धूल दो शरारती ब क तरह एक-दूसरे से
खेलती ह।

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त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द / पात्र अथ या प रचय पाठ म कहाँ पृष्ठ

वृद्ध बूढ़ा ‘काननपुर के बु द्धमान और वृद्ध राजा…’ 77

नस्संदेह संदे ह न होना ‘ नस्संदेह महाराज, संसार म आप-सा…’ 77

बु द्धमान िववेक वान राजा का अपना प्रश्न 77

ेष्ठ सव त्तम ‘आपसे भी ेष्ठ राजा हो चुके ह’ 78

ठहरना रुकना ‘ठह रए… म समझाता ँ।’ 80

दरबारी राजा के दरबार में रहने वाले लोग ‘सब दरबा रय ने बारी-बारी से…’ 77

सलाहकार सलाह दे ने वाला ‘मुझे अपने पुत्र के लए कोई सलाहकार…’ 77

जौहरी हीरे -मोती परखने वाला ‘हीर क जाँच जौहरी से करवाई’ 79

वश्वस्त िजस पर पूर ा भरोसा हो ‘मेरे बेटे का वश्वस्त सलाहकार रहेगा’ 80

बु द्धमत्ता बुिद्ध होने का ग ण
ु ‘बु द्धमत्ता और ईमानदारी म…’ 78

नवयुवक / नौजवान जवान आदमी; यहाँ सच बोलने वाला दरबारी ‘पर इस नौजवान ने सीधा-सादा उत्तर दया।’ 80

चत्रकथा िचत्रों के साथ कही गई कहानी इस पाठ क अपनी वधा 77

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 4
TypeSolution
Pages28
Languagehindi
Updated13 Oct 2026