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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 11: क वता का कमाल
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
127 – 138 13 39 हन्द
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कक्षा 4 हद अध्याय 11 क वता का कमाल AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 4 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 11: क वता का कमाल
यह एक लोककथा है। मदन नाम का एक गरीब लड़का राजदरबार जाते-जाते रास्ते क आवाज़ से एक अनोखी क वता बना लेता है। उसी क वता से
आगे चलकर राजा का खजाना लुटने से बच जाता है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 4) 127 – 138
खं ड प्रश्न
13 39
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 132
पाठ पढ़ने के बाद कक्षा म बातचीत के लए दए गए प्रश्न
बातचीत के लए
प्र.1 क्या आपको कथा-कहानी सुनना-सुनाना पसंद है? अपने उत्तर का कारण बताइए।
यह आपक अपनी पसंद का प्रश्न है। पहले साफ़-साफ़ हाँ या नह क हए। फर एक-दो वाक्य म कारण बताइए।
अ े उत्तर म ये बात आनी चा हए —
आपको कहानी सुनना पसंद है या सुनाना, या दोन ।
कौन-सी कहानी आपको सबसे अ लगी थी।
वह आपको क्य अ लगी — मज़ा आया, कुछ नया सीखा, या हँसी आई।
नमूना उत्तर: हाँ, मुझे कहानी सुनना बहुत पसंद है। रात म दाद मुझे कहानी सुनाती ह। कहानी सुनते समय मेरे मन
म चत्र-से बनने लगते ह। मुझे कहानी सुनाना भी अ ा लगता है, क्य क तब सब ब े ध्यान से मेरी बात सुनते ह।
प्र.2 इस लोककथा का सबसे रोचक हस्सा कौन-सा है और क्य ?
सबसे रोचक हस्सा वह है जब रात म राजा छ े पर खड़े होकर मदन क क वता ज़ोर-ज़ोर से दोहरा रहे थे और नीचे चोर
खजाने म सध लगा रहे थे।
यह हस्सा इस लए सबसे रोचक है —
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राजा तो बस क वता का अथ समझने क को शश कर रहे थे। उन्ह चोर का पता ही नह था।
पर चोर को हर पं क्त अपने ऊपर लगी। “खुदुर-खुदुर का खोदत है?” सुनकर वे रुक गए, “सुरुर-सुरुर का पीबत है?” सुनकर
घूँट अटक गया।
आ खर म जब राजा ने “ध ू शाह, भाई ध ू शाह!” कहा, तो चोर क साँस ही रुक गई।
ऐसा क्य : यहाँ पढ़ने वाले को सब पता है, पर कहानी के पात्र को नह । इसी कारण यह हस्सा सबसे मज़ेदार बन
जाता है।
संकेत: आपको कोई और हस्सा अ ा लग सकता है, जैसे मदन का रास्ते म क वता बनाना। बस अपना कारण
ज़रूर ल खए।
प्र.3 राजा का खजाना मदन क क वता के कारण बचा या राजा के कारण जो क वता को जोर-जोर से बोल रहे थे?
खजाना दोन के कारण बचा। अकेले कसी एक से काम नह बनता।
मदन क क वता के कारण — क वता क पं क्तयाँ ठ क वही काम बता रही थ जो चोर उस समय कर रहे थे — खोदना,
पानी पीना, ताक-झाँक करना, सरककर भागना। और आ खरी पं क्त म तो चोर का नाम ही था — “ध ू शाह”।
राजा के कारण — राजा ने क वता को मन म नह , ऊँची आवाज़ म छ े पर खड़े होकर दोहराया। इसी से नीचे खड़े चोर तक
उसक आवाज़ पहुँची।
क्य : अगर राजा चुपचाप सोचते रहते, तो चोर कुछ सुन ही नह पाते। और अगर क वता म चोर के काम और नाम न
होते, तो चोर डरते ही नह ।
प्र.4 राजमहल म जब मदन ने अपनी क वता सुनाई तो सुनने वाले एक-दूसरे का मुँह क्य ताकने लगे?
क्य क कसी को भी मदन क क वता समझ म नह आई।
पाठ म लखा है — “क्या अथ था इस व चत्र क वता का?” क वता म खुदुर-खुदुर, सुरुर-सुरुर, सरक-सरक जैसे आवाज़ वाले शब्द
थे। उनका कोई सीधा अथ नह नकल रहा था।
फर भी कसी ने यह नह कहा क उसे क वता समझ नह आई। पाठ के अनुसार — “राजा के सामने वे मूख नह दखना चाहते
थे।”
इस लए: जब कोई बात समझ न आए और पूछने म भी शरम लगे, तब लोग चुपचाप एक-दूसरे का मुँह ताकने लगते
ह। यही सुनने वाल ने कया।
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प्र.5 आप इस कहानी का कोई और शीषक सुझाइए तथा बताइए क यह शीषक क्य दे ना चाहते ह।
पहले एक शीषक चु नए। फर एक वाक्य म बताइए क वही क्य चुना।
अ ा शीषक वह है जो पूरी कहानी क मुख्य बात एक साथ कह दे । कुछ सुझाव —
शीषक यह शीषक क्य
मदन की अनोखी किवता पूरी कहानी उसी एक क वता के इद- गद घूमती है।
पकड़े गए चोर कहानी का सबसे बड़ा मोड़ चोर का पकड़ा जाना ही है।
रास्ते में बनी किवता मदन ने क वता घर बैठकर नह , चलते-चलते रास्ते म बनाई।
बच गया खजाना कहानी का अंत यही है — राजा का खजाना लुटते-लुटते बच गया।
नमूना उत्तर: म इस कहानी को “मदन क अनोखी क वता” नाम दे ना चा ँगा। कारण यह है क कहानी क हर घटना
उसी क वता से जुड़ी है — क वता बनी, क वता सुनाई गई, और उसी क वता से खजाना बचा।
क वता क बात — पृष्ठ 132
उपयुक्त शब्द का चयन कर वाक्य पूरा क जए —
क वता क बात
प्र.1 सुरुर-सुरुर का ............ है? (क) पीयत (ख) खोजत (ग) पीबत (घ) चलत
सही उत्तर — (ग) पीबत
पूरी पं क्त बनती है — “सुरुर-सुरुर का पीबत है?”
क्य : यह पं क्त मदन ने तालाब पर पानी पीती भस को दे खकर बनाई थी। “सुरुर-सुरुर” पानी पीने क आवाज़ है,
इस लए उसके साथ पीबत (पीना) ही आएगा। “खोजत” और “चलत” का पानी पीने से कोई मेल नह है।
संकेत: “पीयत” नह , पुस्तक म छपा शब्द पीबत है। लोकभाषा म पीना के लए यही रूप आया है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 11 क वता का कमाल
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............ का खोदत है? (क) सरक-सरक (ख) हम जानत (ग) ताक-झाँक (घ) खुदुर-खुदुर
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a l — (घ) खुदुर-खुदुर
सहीgउत्तर
पूरी पं क्त बनती है — “खुदुर-खुदुर का खोदत है?”
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क्य : मदन ने यह पं क्त उस कुत्ते को दे खकर बनाई m
a s e थी जो पंज से ज़मीन खोद रहा था। “खुदुर-खुदुर” खोदने क
आवाज़ है। “सरक-सरक” रगने के लए है g
a औरl “ताक-झाँक” झाँकने के लए, इस लए वे यहाँ नह आएँगे।
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“आप कौन ह, साहब?” उत्तर मला — ............ (क) धनु शाह (ख) धन्नु शाह (ग) धनी शाह (घ) धन्नू शाह
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a सही उत्तर — (घ) धन्नू शाह
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पाठ म लखा है — “उत्तर मला, ध ू शाह।”
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क्य : यही नाम सुनकर मदन के दमागgमl बजली क धी और उसने क वता क आ खरी पं क्त बना ली — “ध ू
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शाह, भाई ध ू शाह!” बाद म पता चला क यही आदमी चोर था।
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मात्रा.cहैo— ध + न्नू। l
संकेत: चार वकल्प सुनने म लगभग एक जैसे ह। ध्यान से दे खए — सही शब्द म न्न है और अंत म बड़ी ऊ क
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मलान क जए — पृष्ठ 133
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कक्षा 4 हद अध्याय 11 क वता का कमाल AglaSem · NCERT Solutions
क वता क पं क्तय को क्रम से और चत्र से मलाने के दो काम
मलान क जए
प्र.1 नीचे द गई क वता क पं क्तय को उनके क्रम से मलाएँ —
क वता क पं क्त (पुस्तक म दए क्रम म) दए गए क्रमांक (पुस्तक म दए क्रम म)
हमसे न बच सकत है। 6
खुद ुर -खुद ुर का खोदत है? 2
जानत हो हम दे खत है।
ं 1
सुरुर -सुरुर का पीबत है? 7
ताक -झाँक का खोजत है? 8
हम जानत का ढू ँढ़त है! 3
ध ू शाह, भाई ध ू शाह! 4
सरक -सरक कहाँ भागत है? 5
दोन सू चयाँ अलग-अलग क्रम म ह। हर पं क्त को उसके सही क्रमांक से जो ड़ए। पुस्तक म पहली जोड़ी क रेखा
बनाकर दखा द गई है।
पुस्तक म एक जोड़ी पहले से मलाकर दखाई गई है — “हमसे न बच सकत है।” का क्रमांक 7 है। बाक जो ड़याँ इस प्रकार बनगी
—
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कक्षा 4 हद अध्याय 11 क वता का कमाल AglaSem · NCERT Solutions
क वता क पं क्त सही क्रमांक
हमसे न बच सकत है। 7
खुद ुर -खुद ुर का खोदत है? 1
जानत हो हम दे खत है।
ं 6
सुरुर-सुरुर का पीबत है? 2
ताक-झाँक का खोजत है? 3
हम जानत का ढू ँढ़त है! 4
ध ू शाह, भाई ध ू शाह! 8
सरक-सरक कहाँ भागत है? 5
अब क्रम से लगाने पर पूरी क वता ऐसी बनती है —
1. खुद ुर-खुद ुर का खोदत है?
2. सुरु र-सुरु र का पीबत है?
3. ताक-झाँक का खोजत है?
4. हम जानत का ढू ँढ़त है!
5. सरक-सरक कहाँ भागत है?
6. जानत हो हम दे खत है।
ं
7. हमसे न बच सकत है।
8. ध ू शाह, भाई ध ू शाह!
क्रम ऐसा ही क्य : मदन ने ये पं क्तयाँ उसी क्रम म बनाई थ जस क्रम म रास्ते म चीज़ मल — पहले कुत्ता
(खोदना), फर भस (पानी पीना), फर च ड़या (ताक-झाँक), फर साँप (सरकना), और सबसे अंत म रास्ता बताने
वाला धन्नू शाह। पाठ के पृष्ठ 129 पर पूरी क वता इसी क्रम म छपी है।
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प्र.2 रक्त ान म उपयुक्त पं क्त ल खए और चत्र बनाकर उनका मलान क जए —
खुदुर-खुदुर का खोदत है?
सुरुर-सुरुर का पीबत है?
....................
सरक-सरक कहाँ भागत है?
पुस्तक के पृष्ठ 133 का अभ्यास — बाईं ओर चार पं क्त-खाने (तीसरा खाली है) और दाईं ओर चार चत्र-खाने (पहला
खाली है)।
खाली पं क्त-खाने म ल खए — “ताक-झाँक का खोजत है?” और खाली चत्र-खाने म च ड़या का चत्र बनाइए।
अब मलान इस प्रकार होगा —
क वता क पं क्त चत्र क्य
खुद ुर -खुद ुर का खोदत है? कु ा कुत्ता पंज से ज़मीन खोद रहा था।
सुरुर-सुरुर का पीबत है? भैसं तालाब पर भस पानी पी रही थी।
ताक-झाँक का खोजत है? िचिड़ या च ड़या प त्तय के बीच से सर नकालकर इधर-उधर झाँक रही थी।
सरक-सरक कहाँ भागत है? साँप साँप रगता हुआ जा रहा था।
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िचिड़ या
खुदुर-खुदुर का खोदत है?
कु ा
सुरुर-सुरुर का पीबत है?
साँप
ताक-झाँक का खोजत है?
भैस
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सरक-सरक कहाँ भागत है?
मलान का उत्तर — खाली पं क्त-खाने म “ताक-झाँक का खोजत है?” लखा गया और खाली चत्र-खाने म च ड़या बनाई गई।
क्य : मदन ने हर पं क्त उसी जीव को दे खकर बनाई थी। इस लए हर पं क्त क आवाज़ उसी जीव के काम से मेल
खाती है — खोदना, पीना, झाँकना, सरकना।
संकेत: च ड़या बनाने के लए एक अंडे जैसा शरीर, ऊपर छोटा गोल सर, एक नुक ली च च और पीछे पूँछ बना
द जए। नीचे एक डाल ख चकर उस पर बैठा द जए।
सो चए और ल खए — पृष्ठ 134
पाठ क घटनाओं पर सोचकर लखने वाले प्रश्न
सो चए और ल खए
प्र.1 “अब म तुझे और बठाकर नह खला सकती।” मदन क माँ ने ऐसा क्य कहा?
मदन क माँ ने ऐसा इस लए कहा क्य क घर म कमाई का कोई साधन नह था और मदन कुछ भी काम नह करता था।
पाठ म लखा है — “माँ-बेटा बहुत गरीब थे। उनके पास कमाई का कोई साधन नह था।”
इतनी गरीबी म भी “मदन दनभर खेल-कूद म ही समय बता दे ता था।”
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कक्षा 4 हद अध्याय 11 क वता का कमाल
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यह दे खकर माँ परेशान हो गई और बोली — “जा, कुछ पैसे कमाकर ला।”
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क्य : माँ अकेली थी और उसके पास आमदनी नह थी। इस लए वह अब बड़े होते बेटे को बना काम के खाना नह
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खला सकती थी।
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संकेत: पुस्तक म यह पं क्त पृष्ठ 127 पर “अब म तुझे बठाकर नह खला सकती।” छपी है, पर पृष्ठ 134 के प्रश्न म
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इसे “अब म तुझे और बठाकर…” लखा गया है। दोन का अथ एक ही है। पाठ वाली पं क्त ही मूल है।
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जब मदन ने महल का रास्ता पूछा तो धन्नू शाह ने ऐसा क्य कहा क अगर वह नह तो और कौन जानेगा?
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ध ू शाह ने ऐसा इस लए कहा क्य क वह स्वयं चोर था और उसी रात राजमहल के खजाने म सध लगाने क तैयारी कर चुका
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राजमहल का चप्पा-चप्पा वह पहले से दे ख चुका था। इस लए रास्ता उसे सबसे अ तरह मालूम था।
यह बात उसके मुँह से घमंड म नकल गई — “मुझे नहco
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em क “अवश्य यह राजमहल का ही कोई कमचारी होगा।”
और कसे मालूम होगा?”
मदन को उसक अस लयत पता नह थी। उसनेsसोचा
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क्य : कहानी म यही बात आगे बड़ा मोड़ लाती है। उसी आदमी का नाम मदन क क वता म आ गया, और उसी नाम
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से वह पकड़ा गया।
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agl प्र.3 कहानी म मदन क क वता को व चत्र कहा गया है। क्या आपको भी ऐसा ही लगता है? कारण स हत ल खए।
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हाँ, क वता सचमुच व चत्र है — पर व चत्र होने के साथ-साथ बहुत मज़ेदार भी है।
व चत्र क्य लगती है —
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इसम खुदुर-खुदुर, सुरुर-सुरुर, सरक-सरक जैसे आवाज़ वाले शब्द ह। इनका कोई सीधा अथ नह होता।
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क्रया के रूप रोज़ क बोली से अलग ह — खोदत, पीबत, खोजत, ढूँ ढ़त, भागत।
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क वता कसी का नाम नह लेती। बस “का” कहकर पूछती रहती है क कौन खोद रहा है, कौन पी रहा है।
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l a se क्य लगती है —
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हर पं क्त का अंत मलता-जुलता है, इस लए गाने म मज़ा आता है।
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हर पं क्त के पीछे एक स ा दृश्य है — खोदता कुत्ता, पानी पीती भस, झाँकती च ड़या, सरकता साँप।
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असली कमाल: जो क वता सबकोse m
l a बेमतलब लगी, वही चोर को अपनी चोरी का पूरा हाल लगी। इसी लए कहानी
agहै।
का नाम “क वता का कमाल”
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प्र.4 राजा को मदन क क वता पहेली जैसी लगी। आपको यह कैसी लगी?
यह आपक अपनी राय का प्रश्न है। पहले एक शब्द म राय द जए, फर कारण ल खए।
अ े उत्तर म ये बात आ सकती ह —
क वता आपको मज़ेदार लगी, पहेली जैसी लगी, या क ठन लगी।
कौन-सी पं क्त सबसे अ लगी और क्य ।
गाते समय कैसा लगा — क्या लय अपने आप बन जाती है?
नमूना उत्तर: मुझे यह क वता बहुत मज़ेदार लगी। इसे पढ़ते ही मन म चत्र बनने लगते ह। “सुरुर-सुरुर का पीबत
है?” सुनते ही पानी पीती भस दखाई दे ने लगती है। राजा को यह पहेली लगी, क्य क उन्ह ने वे दृश्य नह दे खे थे जो
मदन ने रास्ते म दे खे थे।
समझ और अनुभव — पृष्ठ 134
क वता के शब्द और पात्र क सोच को समझने वाले प्रश्न
समझ और अनु भ व
प्र.1 “सुरुर-सुरुर का पीबत है” पं क्त म पीने के साथ ‘सुरुर-सुरुर’ शब्द का ही प्रयोग क्य कया गया है?
क्य क ‘सुरुर-सुरुर’ पानी पीने क आवाज़ है। यह शब्द उसी आवाज़ से बना है।
पं क्त का सरल अथ — “सुरुर-सुरुर करके कौन पानी पी रहा है?”
क व जो चत्र बना रहा है — एक तालाब है। उसके कनारे भस खड़ी है। वह मुँह पानी म डालकर लंबे-लंबे घूँट भर रही है और
उससे सुरुर-सुरुर क आवाज़ आ रही है। मदन ने यही दृश्य दे खा और वही आवाज़ क वता म रख द ।
क्य ऐसा शब्द: आवाज़ वाला शब्द सुनते ही कान म वही आवाज़ गूँज जाती है। “पानी पी रहा है” कहने से केवल
बात पता चलती है, पर “सुरुर-सुरुर” कहने से दृश्य सुनाई भी दे ने लगता है।
संकेत: क वता के बाक शब्द भी ऐसे ही बने ह — खोदने क आवाज़ खुदुर-खुदुर और रगने क आवाज़ सरक-
सरक।
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प्र.2 राजदरबार म क व-सम्मेलन हो रहा है। सबसे अ क वता सुनाने वाले को सौ अश फयाँ पुरस्कार म मलगी। सौ
अश फय से आप क्या समझते ह?
अशफ पुराने ज़माने का सोने का सक्का था। उन दन यही सबसे बड़ा सक्का चलता था।
इस लए सौ अश फयाँ का अथ है — बहुत बड़ी रकम, बहुत बड़ा इनाम।
इतने धन से एक गरीब प रवार साल आराम से रह सकता था।
तभी तो सुनते ही “मदन चौक ा हो गया” और सोचा — “यह तो बना-बनाया अवसर है।”
वह बना क वता जाने ही सीधे राजमहल क ओर चल पड़ा।
क्य ज़रूरी: यही सौ अश फयाँ पूरी कहानी शुरू करती ह। इनाम इतना बड़ा न होता, तो मदन राजमहल जाता ही
नह और क वता कभी बनती ही नह ।
क्या आप जानते ह: आजकल अशफ नह चलती। आज इनाम रुपय म दया जाता है।
प्र.3 “सरक-सरक कहाँ भागत है” पं क्त म ‘सरक-सरक’ कसके लए प्रयुक्त हुआ है? यहाँ ‘सरक-सरक’ का ही
प्रयोग क्य कया गया है?
‘सरक-सरक’ साँप के लए आया है।
पं क्त का सरल अथ — “सरकता हुआ कौन भाग रहा है?”
क व जो चत्र बना रहा है — मदन को ‘सर’ क आवाज़ सुनाई द । उसने च ककर दे खा तो एक साँप ज़मीन पर रगता जा रहा था।
साँप के पैर नह होते। वह अपने पूरे शरीर को ज़मीन से रगड़ता हुआ आगे खसकता है। इसी खसकने को ‘सरकना’ कहते ह।
यही शब्द क्य : ‘सरक-सरक’ शब्द बोलने म ही साँप के रगने जैसी आवाज़ बनती है। ‘भागना’ या ‘चलना’ कहने से
वह चकनी, फसलती चाल सामने नह आती।
संकेत: कहानी म यही पं क्त आगे काम आती है। जब चोर “दबे पाँव बाहर सरकने लगे”, तभी राजा ने कहा —
“सरक-सरक कहाँ भागत है?” चोर को लगा क उन्ह दे ख लया गया।
प्र.4 “अब कोई चारा नह । बस राजा साहब से दया क भीख माँग सकता ँ।” ऐसा धन्नू शाह ने क्य सोचा?
ध ू शाह ने ऐसा इस लए सोचा क्य क राजा ने क वता म उसका नाम लेकर पुकार दया था — “ध ू शाह, भाई ध ू शाह!”
उसे लगा क अब बचने का कोई रास्ता नह बचा, क्य क —
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कक्षा 4 हद अध्याय 11 क वता का कमाल AglaSem · NCERT Solutions
राजा ने पहले कहा “खुदुर-खुदुर का खोदत है?” — और वे सध के लए ज़मीन खोद ही रहे थे।
फर कहा “सुरुर-सुरुर का पीबत है?” — और उसी समय ध ू शाह पानी का घूँट नगल रहा था।
फर “ताक-झाँक का खोजत है?” और “सरक-सरक कहाँ भागत है?” — वे ठ क यही कर रहे थे।
आ खर म अपना नाम सुनकर उसे पक्का यक न हो गया क राजा सब दे ख रहे ह।
यहाँ ‘चारा’ का अथ है उपाय या बचने का रास्ता।
क्य : उसे नह पता था क यह तो बस एक क वता है। संयोग से हर पं क्त उसी के काम पर बैठ रही थी, इस लए
उसने भागने क जगह पैर पकड़कर माफ़ माँग ली।
अनुमान और कल्पना — पृष्ठ 134–135
कहानी से आगे बढ़कर अनुमान और कल्पना करने वाले प्रश्न
अनु मान और कल्पना
प्र.1 य द मदन रोजगार क खोज म घर से बाहर नह नकलता तो क्या होता?
अगर मदन घर से बाहर न नकलता, तो कहानी क कोई भी घटना होती ही नह ।
उसे क व-सम्मेलन का ढढोरा सुनाई ही नह दे ता।
रास्ते म कुत्ता, भस, च ड़या और साँप न दखते, इस लए क वता क पं क्तयाँ भी न बनत ।
ध ू शाह से भट न होती और क वता क आ खरी पं क्त कभी पूरी न होती।
राजा रात म वह क वता न दोहराते, और चोर खजाना लूट ले जाते।
मदन और उसक माँ पहले जैसे ही गरीब रहते।
इससे क्या सीखा: घर से नकलकर काम खोजने पर ही नया रास्ता मलता है। मदन को क वता कसी कताब से
नह , रास्ते म आँख खोलकर दे खने से मली।
संकेत: यह कल्पना का प्रश्न है। आप अपने शब्द म और भी बात जोड़ सकते ह, पर हर बात कहानी से जुड़ी होनी
चा हए।
प्र.2 अपनी कल्पना और अनुमान से बताइए क राजमहल कैसा होता होगा।
यह कल्पना का प्रश्न है। कहानी म जो थोड़े संकेत मले ह, उनसे शुरू क जए — राजमहल म दरबार था, छ ा था, खजाना था
और सपाही रहते थे।
अ े उत्तर म ये बात आ सकती ह —
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कक्षा 4 हद अध्याय 11 क वता का कमाल AglaSem · NCERT Solutions
बाहर — ऊँची द वार, बड़ा फाटक, पहरे पर खड़े सपाही, चार ओर बाग।
भीतर — बड़ा दरबार, ऊँचा सहासन, झूमर, गलीचे, द वार पर चत्रकारी।
ऊपर — छ ा और बुज, जहाँ से राजा नीचे का सब दे ख सकते थे।
एक ओर — खजाने का कमरा, जसक द वार तोड़कर चोर भीतर घुसे थे।
नमूना उत्तर: राजमहल बहुत बड़ा और सुंदर रहा होगा। उसके चार ओर ऊँची द वार और बड़ा फाटक रहा होगा।
फाटक पर सपाही पहरा दे ते ह गे। भीतर एक बड़ा दरबार होगा, जहाँ बीच म राजा का सहासन रखा होगा। ऊपर
एक छ ा होगा, जहाँ खड़े होकर राजा ने रात म क वता दोहराई थी। एक ओर खजाने का कमरा रहा होगा, जसम
सोना-चाँद रखा जाता था।
प्र.3 राजा के खजाने म क्या-क्या होता होगा और कतना- कतना होता होगा?
यह भी अनुमान का प्रश्न है। कहानी से दो पक्के संकेत मलते ह — इनाम म सौ अश फयाँ द जा रही थ , और बाद म मदन को
सोने-चाँद से मालामाल कर दया गया।
इससे अनुमान लगाया जा सकता है क खजाने म यह सब रहा होगा —
खजाने म क्या कतना (अनुमान)
सोने की अशिफ याँ हज़ ारों की िगनती में, बड़ े-बड़ े थैल ों में भरी हुई
चाँद ी के िसक्के अशिफ यों से भी अिधक, बड़ े संदू कों में
सोने-चाँद ी के गहने कई िपटारे भरे हएु
हीरे -मोती और रत्न छोटी िडिबयों में, िगनती में कम पर मूल्य में सबसे अिधक
सोने-चाँद ी के बतन कु छ अलमािरयाँ भरी हुई
ऐसा क्य लगता है: जो राजा एक क वता पर सौ अश फयाँ इनाम म दे सकते थे, उनका खजाना बहुत बड़ा ही रहा
होगा। तभी तो चोर ने उसी खजाने म सध लगाई।
संकेत: संख्या पक्क नह बताई जा सकती। कहानी म गनती नह द गई है, इस लए अपने उत्तर म “लगभग” या
“रहा होगा” ल खए।
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कक्षा 4 हद अध्याय 11 क वता का कमाल
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मदन क क वता से प्रसन्न होकर राजा ने उसे वदा करते समय क्या-क्या उपहार दए ह गे?
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प्र.4
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aglम केवल इतना लखा है — “मदन को सोने-चाँद से मालामाल कर दया गया।” बाक हम कल्पना से बताना है।
कहानी
राजा ने वदा करते समय ये उपहार दए ह गे —
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वादे के अनुसार सौ अश फयाँ का पुरस्कार।
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सोने-चाँद के सक्क से भरी एक थैली।
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माँ के लए कपड़े और गहने। a
गले म पहनाने के लए मो तय क माला और सर पर बाँधने के लए पगड़ी।
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गाँव तक लौटने के लए घोड़ा या बैलगाड़ी।
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शाबाशी के साथ एक प्रशंसा-पत्र, ता क गाँव म सब जान जाएँ।
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a s eनmा उत्तर: राजा ने मदन को वादे क सौ अश फयाँ द ह गी। साथ म सोने-चाँद से भरी एक थैली भी द होगी।
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नमू
a उन्ह ने माँ के लए अ े कपड़े भजवाए ह गे और मदन को गाँव तक पहुँचाने के लए गाड़ी द होगी।
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राजा ने मदन को बहुत सारा धन दया होगा। उसे यह सब कहाँ-कहाँ खच करना चा हए?
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क्रम संख्या खच करने हेतु प्रस्ता वत सुझाव आपक राय य द कोई हो
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1. माँ के िलए कपड़े खरीदना
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कु छ रुपये बैक
ं में जमा करना
agl 3. ....................
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पुस्तक म पहले दो सुझाव भरे हुए ह। बाक तीन खाने आपको भरने ह और हर सुझाव पर अपनी राय लखनी है।
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अ . ा उत्तर वही है जसम खच के तीन तरह के काम आएँ — ज़रूरत का खच, भaवष्य के लए बचत और दूसर क मदद।
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क्रम संख्या खच करने हेतु प्रस्ता वत सुझाव आपक राय य द कोई हो
1. माँ के िलए कपड़े खरीदना िबलकु ल ठीक है। माँ ने बहुत िदन गरीबी में काटे है।ं
2. कु छ रुपये बैक
ं में जमा करना बहुत अच्छा है। किठन समय में यही पैसा काम आएगा।
3. घर की मरम्मत कराना ज़ रूरी है, तािक बािरश और ठं ड में परे शानी न हो।
4. पढ़ ाई के िलए िकताबे ं खरीदना सबसे अच्छा खच है। पढ़ ाई से आगे कमाई का रास्ता खुले गा।
5. गाँव के ज़रूरतमंद लोगों की मदद करना करना चािहए। मदन खुद गरीब रह चुका है, वह उनका दुख समझता है।
यही सुझाव क्य : सारा धन एक साथ खच कर दे ने पर कल फर वही गरीबी लौट आएगी। इस लए कुछ आज क
ज़रूरत पर, कुछ बचत म और कुछ दूसर क मदद म लगाना समझदारी है।
संकेत: आप अपने सुझाव भी लख सकते ह, जैसे — खेत या दुकान खरीदना, माँ के इलाज के लए पैसे रखना, या
गाँव के कुएँ क मरम्मत कराना।
कहो कहानी, सुनो कहानी — पृष्ठ 135
कहा नयाँ सुनना और सुनाना सभी को पसंद होता है। नीचे दए गए नदश के अनुसार कक्षा म ‘क वता का कमाल’ कहानी सुनाइए —
कहो कहानी, सु नो कहानी
प्र.1 स्वयं को मदन क जगह रखकर यह कहानी अपनी मातृभाषा या अपनी पसंद क भाषा म सुनाइए।
यह कक्षा म करने वाला काम है। इसे आपको स्वयं बोलकर करना है।
कैसे कर —
1. कहानी को दो-तीन बार ध्यान से पढ़ ली जए, ता क घटनाओं का क्रम याद हो जाए।
2. अब हर जगह “मदन” क जगह “म” क हए। जैसे — “म गाँव म अपनी माँ के साथ रहता था।”
3. बीच म अपने मन क बात भी जो ड़ए — मुझे डर लगा, म खुश हो गया, मेरा मन घबरा गया।
4. क वता क पं क्तयाँ आवाज़ बदलकर बो लए, ता क सुनने वाल को मज़ा आए।
5. अपनी मातृभाषा म सुनाइए। जो शब्द अपनी भाषा म न मले, उसे हद म ही रहने द जए।
अ े सुनाने म ये बात होनी चा हए — घटनाओं का सही क्रम, बीच-बीच म रुककर बोलना, और चेहरे तथा हाथ के हाव-भाव।
नमूना उत्तर (शुरुआत इस तरह क जा सकती है): “म मदन ँ। म अपनी माँ के साथ एक गाँव म रहता था। हम
बहुत गरीब थे, फर भी म दनभर खेलता रहता था। एक दन माँ ने कहा क अब म तुझे बठाकर नह खला सकती,
जा कुछ कमाकर ला। म घर से नकल पड़ा। रास्ते म मुझे ढढोरे क आवाज़ सुनाई द …”
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प्र.2 मदन आपका मत्र है। मदन ने कुछ समय पहले आपको यह कहानी सुनाई थी। अब आप यह कहानी अपनी कक्षा
म सुनाइए।
यह भी बोलकर करने वाला काम है। इस बार आप मदन नह , ब ल्क मदन के मत्र ह।
कैसे कर —
1. कहानी “मेरा दोस्त मदन…” से शुरू क जए। मदन के लए “वह” क हए, “म” नह ।
2. बीच-बीच म बताइए क यह बात आपको कसने बताई — “मदन ने मुझे बताया था क उस समय उसका दल ज़ोर-ज़ोर से
धड़क रहा था।”
3. क वता क पं क्तयाँ जस क तस बो लए। ये कहानी क जान ह।
4. अंत म अपनी राय जो ड़ए — आपको कहानी कैसी लगी।
दोन म अंतर क्या है: पहले काम म आप कहानी के भीतर ह, इस लए “म” आएगा। दूसरे काम म आप बाहर से
बता रहे ह, इस लए “वह” आएगा। यही सुनाने का ढं ग बदल दे ता है।
नमूना उत्तर (शुरुआत): “मेरा एक दोस्त है, मदन। एक दन उसने मुझे अपनी अनोखी कहानी सुनाई। वह अपनी
माँ के साथ गाँव म रहता था। एक दन उसक माँ ने उससे कहा क कुछ कमाकर लाओ। रास्ते म उसे एक ढढोरा
सुनाई दया…”
पाठ से आगे — पृष्ठ 136
पाठ क बात को अपने आसपास क दु नया से जोड़ने वाले काम
पाठ से आगे
प्र.1 साँप रगकर चलते ह। रगकर चलने वाले जीव-जंतुओं क सूची बनाइए और कक्षा म प्रद शत क जए।
रगने का अथ है — शरीर को ज़मीन से रगड़ते हुए आगे खसकना।
रगकर चलने वाले कुछ जीव-जंतु —
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जीव कैसे रगता है
साँप पैर नह होते; पूरा शरीर लहराकर आगे सरकता है।
कें चुआ शरीर को सकोड़कर और फैलाकर म म आगे बढ़ता है।
घोंघ ा अपने चप चपे पैर से धीरे-धीरे खसकता है।
िछपकली पेट ज़मीन या द वार से सटाकर चलती है।
िगरिगट पेट ज़मीन से लगाकर धीरे-धीरे आगे बढ़ता है।
मगरमच्छ पानी के कनारे पेट के बल घसटकर चलता है।
कनखजूर ा बहुत सारे छोटे पैर से ज़मीन पर रगता है।
जोंक शरीर को मोड़-मोड़कर आगे खसकती है।
कक्षा म कैसे प्रद शत कर —
1. एक चाट-पेपर ली जए। ऊपर बड़े अक्षर म ल खए — “रगकर चलने वाले जीव-जंतु”।
2. हर जीव का नाम लखकर उसके सामने छोटा-सा चत्र बनाइए या चपकाइए।
3. चाट को कक्षा क द वार पर लगा द जए।
संकेत: ध्यान र खए — च ट , ततली और च ड़या रगती नह ह। च ट चलती है, ततली और च ड़या उड़ती ह।
प्र.2 राजमहल म क व-सम्मेलन क सूचना दे ने के लए ढढोरा पीटा जा रहा था। आजकल ऐसी सूचनाएँ कैसे द जाती
ह?
पुराने समय म ढोल पीटकर गली-गली घूमा जाता था। इसी को ढढोरा पीटना कहते ह। आज सूचना दे ने के बहुत तेज़ साधन आ
गए ह।
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साधन कस तरह सूचना पहुँचती है
समाचार-पत्र छपी हुई सूचना या व ापन घर-घर पहुँचता है।
रे िडयो घोषणा सुनकर लोग जान जाते ह।
टी.वी. चत्र के साथ सूचना दखाई जाती है।
मोबाइल संदे श एक साथ बहुत से लोग तक तुरंत पहुँच जाता है।
इंटरनेट और समाज-माध्यम दूर बैठे लोग भी पल भर म जान जाते ह।
पोस्टर और बैनर चौराह और द वार पर लगाकर।
लाउडस्पीकर गाँव-मोहल्ले म घोषणा करके — यह आज का ढढोरा ही है।
सूचना-प ी व ालय या दफ़्तर म नो टस लगाकर।
अंतर क्या आया: ढढोरा केवल उन्ह तक पहुँचता था जो पास खड़े थे। आज का संदेश एक ही पल म दूर-दूर तक
हज़ार लोग तक पहुँच जाता है।
प्र.3 आपके वद्यालय म क व-सम्मेलन का आयोजन कया जा रहा है। आप इसक सूचना कैसे दगे?
पहले तय क जए क सूचना कसे दे नी है — सब ब को, शक्षक को और घर वाल को। फर उसी के अनुसार साधन चु नए।
सूचना दे ने के तरीके —
1. कक्षा-कक्ष म जाकर बोलकर बताना।
2. व ालय क सूचना-प पर नो टस लगाना।
3. प्राथना-सभा म घोषणा करवाना।
4. रंगीन पोस्टर बनाकर ग लयारे और ार पर लगाना।
5. घर वाल के लए डायरी म या मोबाइल संदेश से सूचना भेजना।
अ सूचना म ये पाँच बात ज़रूर होनी चा हए — क्या हो रहा है, कब, कहाँ, कौन भाग ले सकता है, और कससे नाम
लखवाना है।
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नमूना उत्तर (सूचना-प के लए):
सूचना
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दनांकse
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सभी व ा थय
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g 3 से 5 तक के सभी ब े अपनी क वता सुना सकते ह।
— 20 अगस्त, समय — प्रातः 10 बजे, ान — व ालय का सभागार।
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भाग लेने के लए 18 अगस्त तक अपना नाम कक्षा- शक्षक के पास लखवाइए।
— सांस्कृ तक स म त
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मी डया और आप — पृष्ठ 136
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वजेता बनने के बाद मदन को मी डया के प्रश्न के उत्तर दे ने पड़े। अपने को मदन मानते हुए इन प्रश्न के उत्तर द जए.—
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मी डया और आपco
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ag प्र.1 मी डया – क व-सम्मेलन म पुरस्कार पाकर आपको कैसा लग रहा है?
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a लएl “म” लगाकर ल खए। उत्तर म अपनी खुशी और थोड़ा आश्चय दोन दखाइए।
यहाँ आपको मदन बनकर उत्तर दे ना है, इस g
नमूना उत्तर:
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मदन — मेरे तो मन म लड्डू फूट रहे ह! म तो कभी क व ही नह था। घर से नकला था पैसे कमाने और लौट रहा ँ
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इनाम लेकर। मुझे अब भी व ास नह हो रहा क यह सच है।
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a यही क्य : मदन बहुत गरीब था और उसने कभी क वता नह रची थी। इस लए उसक खुशी म हैरानी भी मली
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होगी।
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प्र.2 मी डया – आप इस उपल
a का ेय कसे दे ना चाहगे?
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‘ ेय दे ना’ का अथ है — यह कहना क इस सफलता म कसका हाथ है। मदन के उत्तर म एक से अ धक नाम आ सकते ह।
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नमूना उत्तर:
मदन — सबसे पहले म अपनी माँ को ेय दे ना चा ँगा। उन्ह ने ही मुझे घर से नकलकर काम खोजने को कहा था।
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फर उन सबको, जो मुझे रास्ते म मले — खोदता कुत्ता, पानी पीती भस, झाँकती च ड़या और सरकता साँप। मेरी
m जी को भी, जनके नाम से मेरी क वता पूरी हुई।
हर पं क्त उन्ह को दे खकर बनी। ध eू शाह
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क्य : क वता मदन ने बैठकर नह बनाई थी। उसने रास्ते म जो दे खा, वही पं क्तय म उतर आया। इस लए ेय भी
उन्ह दृश्य और माँ को जाता है।
प्र.3 मी डया – आपको राजदरबार म क वता सुनाकर कैसा लगा?
यहाँ उस समय का स ा मन बताइए। पाठ के अनुसार सुनने वाले “एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे”, इस लए मदन को थोड़ा घबराहट
भी हुई होगी।
नमूना उत्तर:
मदन — सच क ँ तो पहले मेरे हाथ-पाँव काँप रहे थे। इतने बड़े क व एक-एक करके अपनी क वता सुना रहे थे। जब
मेरी बारी आई तो मने आँख बंद करके अपनी क वता बोल द । सब लोग चुपचाप एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे। तब
मुझे लगा क शायद मेरी क वता कसी को पसंद नह आई। पर बाद म जो हुआ, उसने सब बदल दया।
प्र.4 मी डया – आगे आपक क्या योजनाएँ ह?
योजना का अथ है — आगे क्या करने का इरादा है। उत्तर म अपने और अपनी माँ के लए, और कुछ दूसर के लए भी सो चए।
नमूना उत्तर:
मदन — सबसे पहले म गाँव लौटकर माँ के पैर छू ऊँगा। फर उनके लए अ े कपड़े लाऊँगा और घर क मरम्मत
कराऊँगा। कुछ धन बक म जमा कर दूँ गा, ता क क ठन समय म काम आए। अब म खेल-कूद म सारा दन नह
गँवाऊँगा। म प ँ गा और नई-नई क वताएँ लखना सीखूँगा। गाँव के ब को भी क वता बनाना सखाऊँगा।
क्य : कहानी क शुरुआत म मदन दनभर खेलता था। अंत म वह मेहनत का महत्त्व जान चुका है। इस लए उसक
योजनाएँ अब बदल गई ह गी।
प्र.5 मी डया – बहुत-बहुत धन्यवाद मदन जी। (मदन –)
यह बातचीत का अंत है। यहाँ बस वनम्र होकर धन्यवाद लौटाना है। एक-दो वाक्य ही काफ़ ह।
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नमूना उत्तर:
मदन — आपका भी बहुत-बहुत धन्यवाद। आपने मेरी बात ध्यान से सुनी, इसके लए म आभारी ँ। मेरी ओर से
सभी ब को नमस्ते।
संकेत: बातचीत खत्म करते समय हमेशा धन्यवाद कहना चा हए। यह अ े व्यवहार क पहचान है।
आपक क वता — पृष्ठ 137
रजनी को बंदर दखे और फर एक सयार दखा। अब सयार को आधार बनाकर आप क वता को पूरा करने म रजनी क सहायता क जए।
आपक क वता
प्र.1 रजनी, मदन क क वता को गाते हुए वद्यालय जा रही थी। उसे बहुत आनंद आ रहा था। चलते-चलते अचानक
उसे एक पेड़ पर कुछ बंदर दखाई दए। वे एक डाल से दूसरी डाल पर कूद रहे थे। जब वह थोड़ा आगे बढ़ तो उसे
एक सयार दखाई दया। सयार ‘हुआँ-हुआँ’ कर रहा था। अब सयार को आधार बनाकर आप क वता को पूरा
करने म रजनी क सहायता क जए।
डाल-डाल क्यों कू द रहा?
खों-खों-खों क्यों बोल रहा?
बंदर जी, भाई बंदर जी!
..........................
..........................
..........................
..........................
पुस्तक के पृष्ठ 137 का पट — ऊपर बंदर वाली तीन पं क्तयाँ छपी ह, नीचे क खाली पं क्तयाँ आपको भरनी ह।
पुस्तक म बंदर वाला हस्सा पहले से छपा है। उसी ढाँचे पर सयार वाला हस्सा बनाना है।
पहले ढाँचा सम झए — बंदर वाली तीन पं क्तय म यह क्रम है —
1. पहली पं क्त — बंदर क्या कर रहा है (डाल-डाल कूदना)।
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कक्षा 4 हद अध्याय 11 क वता का कमाल AglaSem · NCERT Solutions
2. दूसरी पं क्त — बंदर कैसी आवाज़ नकाल रहा है (ख -ख -ख )।
3. तीसरी पं क्त — उसे नाम लेकर पुकारना (बंदर जी, भाई बंदर जी!)।
पहली दोन पं क्तय का अंत “रहा?” पर होता है। यही तुक है, और इसी से गाने म लय बनती है।
अब सयार के लए यही तीन बात चा हए — वह क्या कर रहा है, कैसी आवाज़ नकाल रहा है (हुआँ-हुआँ), और उसे पुकारना।
डाल-डाल क्यों कूद रहा?
खों-खों-खों क्यों बोल रहा?
बंदर जी, भाई बंदर जी!
झाड़ ी-झाड़ ी क्यों डोल रहा?
हुआँ-हुआँ क्यों बोल रहा?
िसयार जी, भाई िसयार जी!
पूरी हुई क वता — ऊपर पुस्तक क छपी पं क्तयाँ, नीचे सयार पर जोड़ी गई पं क्तयाँ।
डाल-डाल क्यों कू द रहा?
खों-खों-खों क्यों बोल रहा?
बंद र जी, भाई बंद र जी!
झाड़ ी-झाड़ ी क्यों डोल रहा?
हुआ ँ-हुआ ँ क्यों बोल रहा?
िसयार जी, भाई िसयार जी!
यही पं क्तयाँ क्य : सयार झा ड़य म छपकर घूमता है, इस लए पहली पं क्त म “झाड़ी-झाड़ी” आया। उसक
अपनी आवाज़ “हुआँ-हुआँ” है, जो पाठ म ही द गई है। और अंत म उसे वैसे ही पुकारा गया जैसे बंदर को पुकारा
गया था।
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संकेत: आप अपनी पं क्तयाँ भी बना सकते ह। बस दो बात ध्यान र खए — पहली दो पं क्तय का अंत “रहा?” पर
हो, और आवाज़ वाली पं क्त म “हुआँ-हुआँ” ज़रूर आए। जैसे — “गली-गली क्य घूम रहा? हुआँ-हुआँ क्य बोल
रहा? सयार जी, भाई सयार जी!”
भाषा क बात — पृष्ठ 137–138
मुहावरे और वराम चह्न
भाषा क बात
प्र.1 मुहावरे हमेशा एक वशेष अथ दे ते ह जो उनके शा ब्दक अथ से भन्न होता है। जैसे– ‘फूला न समाना’ मुहावरे का
अथ है — अत्य धक प्रसन्न होना। वाक्य प्रयोग – वद्यालय क खेल प्र तयो गता म पुरस्कृत होकर राजू फूला न
समा रहा था। अब आप अपनी लेखन-पु स्तका म नम्न ल खत मुहावर का अथ लखते हुए उनका वाक्य म
प्रयोग क जए। (क) मन म लड्डू फूटना (ख) मुँह ताकना
दोन मुहावरे इसी पाठ से लए गए ह।
मुहावरा अथ पाठ म कहाँ आया वाक्य प्रयोग
मन में ल ू मन ही मन बहुत खुश होना “अब तो सचमुच उसके मन म लड्डू परीक्षा म पहला ान पाने क खबर सुनते
फू टना फूटने लगे।” (पृष्ठ 129) ही मीना के मन म लड्डू फूटने लगे।
मुँह ताकना कु छ समझ में न आने पर चुपचाप “सुनने वाले एक-दूसरे का मुँह क ठन सवाल सुनते ही सारे ब े एक-दूसरे
दू सरे की ओर दे खते रह जाना ताकने लगे।” (पृष्ठ 130) का मुँह ताकने लगे।
मुहावरा क्या होता है: मुहावरे का अथ उसके शब्द से नह नकलता। “मन म लड्डू फूटना” म सचमुच कोई लड्डू नह
फूटता। इसका अथ है — बहुत खुश होना। इसी तरह “मुँह ताकना” का अथ कसी का चेहरा दे खना नह , ब ल्क
चुपचाप हैरान रह जाना है।
संकेत: मुहावरा वाक्य म अकेला नह बैठता। वह क्रया के साथ रूप बदलता है — लड्डू फूटने लगे, मुँह ताकने लगे।
प्र.2 नम्न ल खत गद्यांश म कह -कह वराम चह्न का प्रयोग हुआ है। इस गद्यांश को उ चत ठहराव के साथ प ढ़ए।
— “उसे दे खते ही मदन के मुँह से नकल पड़ा, “ताक-झाँक का खोजत है?” तीन पं क्तय को रटते हुए वह
चलता गया। रटते-रटते उसे अपने आप एक और पं क्त सूझ गई, “हम जानत का ढूँ ढ़त है।””
यह बोलकर पढ़ने का अभ्यास है। हर वराम चह्न बताता है क कहाँ रुकना है और कतनी दे र रुकना है।
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चह्न नाम पढ़ते समय क्या कर
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अल्प वराम ज़रा-सा रु कए — एक पल भर।
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? प्रश्नवाचक चह्न आवाज़ ऊपर उठाइए, जैसे सचमुच पूछ रहे ह ।
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“” उद्धरण चह्न भीतर क बात कसी और क है — आवाज़ बदलकर बो लए।
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g // का अथ है बड़ा ठहराव) —
ठहराव के साथ ऐसे प ढ़ए (/ का अथ है छोटाaठहराव,
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उसे दे खते ही मदन के मुँह से िनकल पड़ ा / “ताक-झाँक का खोजत है?” //
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तीनों पंिक्तयों को रटते हुए वह चलता गया। //
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रटते -रटते उसे अपने आप एक और पंिक्त सूझ गई / “हम जानत का ढू ँढ़त है।”
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ठहराव क्य ज़रूरी है: बना रुके पढ़ने पर सारे शब्द आपस म मल जाते ह और अथ बगड़ जाता है। रुक-रुककर
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पढ़ने से सुनने वाले को हर बात साफ़ समझ आतीemहै।
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संकेत: इस ग ांश म अं तम पं क्त “हम जानत का ढूँ ढ़त है।” पूण वराम के साथ छपी है, जब क पाठ म पृष्ठ 128
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और 129 पर यही पं क्त “हम जानत का ढूँ ढ़त है!” वस्मया दबोधक चह्न के साथ छपी है। पाठ वाला रूप ही मूल
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है। वहाँ मदन खुशी म यह पं क्त बोलता है, इस लए वहाँ ! लगा है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 11 क वता का कमाल AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 नीचे लखे वाक्य म उपयुक्त वराम चह्न लगाकर वाक्य पूरा क जए — (क) क्या ताक झाँक कर रहे हो (ख) अरे
वाह क्या चौका मारा है (ग) आइए राजा से मलवाता ँ (घ) दाद दे खते ही बोली कहाँ जा रहे हो
दया गया वाक्य वराम चह्न लगाकर कौन-सा चह्न और क्य
(क) क्या ताक झाँक कर क्या ताक -झाँक कर रहे हो? यह प्रश्न है, इस लए अंत म ? लगा। ‘ताक-झाँक’ जुड़ा हुआ शब्द है, इस लए
रहे हो बीच म - (योजक चह्न) लगा।
(ख) अरे वाह क्या चौका अरे वाह! क्या चौका मारा ‘अरे वाह’ खुशी का उ ार है, इस लए उसके बाद ! लगा। आगे का वाक्य पूरा
मारा है है। होता है, इस लए अंत म । लगा।
(ग) आइए राजा से आइए, राजा से िमलवाता ‘आइए’ के बाद ज़रा-सा ठहराव है, इस लए , लगा। वाक्य खत्म होने पर ।
िमलवाता हू ँ हू।ँ लगा।
(घ) दादी दे खते ही बोली दादी दे खते ही बोली, “कहाँ ‘बोली’ के बाद , लगा। दाद क अपनी कही बात है, इस लए वह “ ” के
कहाँ जा रहे हो जा रहे हो?” भीतर आई और प्रश्न होने के कारण भीतर ? लगा।
नयम एक पं क्त म: जहाँ कुछ पूछा जाए वहाँ ?, जहाँ खुशी या आश्चय हो वहाँ !, जहाँ ज़रा-सा ठहरना हो वहाँ ,,
और जहाँ वाक्य पूरा हो वहाँ । लगता है। कसी के अपने कहे शब्द हमेशा “ ” के भीतर रखे जाते ह।
अपना उदाहरण: माँ ने मुझसे पूछा, “क्या तुमने खाना खा लया?” मने कहा, “हाँ, खा लया।” अरे वाह! खाना
आज बहुत स्वा दष्ट था।
कलाकारी — पृष्ठ 138
वाद्ययंत्र बजाते हुए ढढोरे का संवाद बोलने का अभ्यास
कलाकारी
प्र.1 ढोल, नगाड़ा या अन्य कोई वाद्ययंत्र बजाते हुए बो लए, “सुनो, सुनो, सुनो! राजदरबार म क व-सम्मेलन हो रहा है।
सबसे अ क वता सुनाने वाले को सौ अश फयाँ इनाम म मलगी।” अब इस संवाद को अपनी मातृभाषा म
हाव-भाव के साथ बो लए।
यह कक्षा म करने वाला काम है। यह लखकर नह , बोलकर और अ भनय करके पूरा होगा।
कैसे कर —
1. ढोल या नगाड़ा न हो तो कोई खाली डब्बा, बाल्ट या थाली ले ली जए। यही आपका ढोल है।
2. पहले तीन बार ढोल बजाइए — ढम! ढम! ढम! इससे सब लोग आपक ओर दे खगे।
3. अब ऊँची आवाज़ म बो लए — “सुनो, सुनो, सुनो!” तीन बार आवाज़ और ऊँची क जए।
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कक्षा 4 हद अध्याय 11 क वता का कमाल AglaSem · NCERT Solutions
4. ‘सौ अश फयाँ’ बोलते समय ज़रा रु कए और हाथ फैलाकर दखाइए क इनाम बहुत बड़ा है।
5. बोलते-बोलते कक्षा म घू मए, जैसे ढढोरा पीटने वाला गली-गली घूमता है।
6. अब यही बात अपनी मातृभाषा म बो लए। शब्द बदल जाएँगे, पर जोश वही रहना चा हए।
अ े प्रदशन म ये बात होनी चा हए — ऊँची और साफ़ आवाज़, बीच-बीच म ठहराव, चेहरे पर जोश, और ढोल क थाप के साथ
ताल-मेल।
संकेत: पुस्तक म कलाकारी वाले इस अभ्यास म लखा है “सौ अश फयाँ इनाम म मलगी”, जब क पाठ म पृष्ठ
127 पर यही बात “सौ अश फयाँ पुरस्कार म मलगी” छपी है। इनाम और पुरस्कार एक ही अथ के दो शब्द ह,
इस लए दोन ठ क ह।
आपक सूझ-बूझ — पृष्ठ 138
बंदर और खजूर के पेड़ क पहेली
आपक सू झ -बू झ
प्र.1 एक व्य क्त के घर के बाहर दस मीटर ऊँचा एक खजूर का पेड़ था। एक बंदर उस पर चढ़ने लगा। वह पेड़ क चोट
पर पहुँचना चाहता था। समस्या यह थी क वह दन के समय तो 5 मीटर चढ़ जाता था परंतु जब रात होती तो वह
4 मीटर नीचे फसल जाता था। क्या आप बता सकते ह क बंदर पेड़ क चोट पर पहुँचने म कतने दन म सफल
होगा?
उत्तर — बंदर छठव दन पेड़ क चोट पर पहुँच जाएगा।
ऐसे ग नए — दन म वह 5 मीटर ऊपर जाता है, रात म 4 मीटर नीचे फसल जाता है। मतलब एक पूरे दन-रात म वह केवल 1
मीटर ही ऊपर बढ़ पाता है।
दन दन म चढ़कर कहाँ रात म फसलकर कहाँ
पहला दन 0 + 5 = 5 मीटर 5 – 4 = 1 मीटर
दूसरा दन 1 + 5 = 6 मीटर 6 – 4 = 2 मीटर
तीसरा दन 2 + 5 = 7 मीटर 7 – 4 = 3 मीटर
चौथा दन 3 + 5 = 8 मीटर 8 – 4 = 4 मीटर
पाँचवाँ दन 4 + 5 = 9 मीटर 9 – 4 = 5 मीटर
छठवाँ दन 5 + 5 = 10 मीटर — चोटी पर! अब िफसलने की बारी ही नही ं आई
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असली पेच यहाँ है: हर रात वह 4 मीटर फसलता है। पर छठव दन वह चढ़ते-चढ़ते सीधे 10 मीटर पर, यानी चोट
पर पहुँच जाता है। चोट पर पहुँचने के बाद वह वह से उतर जाएगा, इस लए उस रात फसलने का सवाल ही नह
उठता।
संकेत: य द केवल “1 मीटर रोज़” गनते रह तो 10 दन का गलत उत्तर आ जाएगा। इस लए अं तम दन को अलग
से दे खना ज़रूरी है। पुस्तक ने भी पृष्ठ 138 पर उलटे अक्षर म यही उत्तर छापा है — छठव दन।
अध्याय — एक नज़र म
मदन अपनी माँ के साथ गाँव म रहता था। दोन बहुत गरीब थे।
माँ के कहने पर मदन पैसे कमाने घर से नकला। रास्ते म उसे क व-सम्मेलन का ढढोरा सुनाई दया।
रास्ते म उसने कुत्ता, भस, च ड़या और साँप दे खे। हर एक को दे खकर उसने क वता क एक पं क्त बना ली।
राजमहल का रास्ता बताने वाले आदमी का नाम ध ू शाह था। यही नाम क वता क आ खरी पं क्त बन गया।
रात म राजा छ े पर खड़े होकर यही क वता ज़ोर-ज़ोर से दोहरा रहे थे। खजाने म सध लगा रहे चोर ने समझा क वे पकड़े
गए।
चोर ध ू शाह ने डरकर माफ़ माँग ली। खजाना बच गया और राजा ने मदन को सोने-चाँद से मालामाल कर दया।
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त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ म कहाँ आया पृष्ठ
ढढोरा ढोल पीटकर सबको ज़ोर से सूचना दे ना “मदन को ढढोरा पीटने क आवाज सुनाई द ।” 127
अशफ पुर ाने समय का सोने का िसक्का “सौ अश फयाँ पुरस्कार म मलगी।” 127
क व-सम्मेलन जहाँ कई किव िमलकर अपनी किवता सुनाते है ं “राजदरबार म क व-सम्मेलन हो रहा है।” 127
चौक ा सजग, कान खड़े कर ले ना “मदन चौक ा हो गया।” 127
खुदुर-खुदुर खोदने की आवाज़ “खुदुर-खुदुर का खोदत है?” 128
सुरुर-सुरुर पानी पीने की आवाज़ “सुरुर-सुरुर का पीबत है?” 128
सरक-सरक रे ंग कर िखसकने की आवाज़ “सरक-सरक कहाँ भागत है?” 129
मन म लड्डू मन ही मन बहुत खुश होना (मुहावरा) “उसके मन म लड्डू फूटने लगे।” 129
फूटना
व चत्र अजीब, अनोखा “क्या अथ था इस व चत्र क वता का?” 130
मुँह ताकना कु छ समझ में न आने पर दू स रे की ओर दे खते रह जाना “सुनने वाले एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे।” 130
(मुहावरा)
सध लगाना दीवार तोड़कर चोरी के िलए भीतर घुस ना “चोर राजा के खजाने म सध लगा रहे थे।” 130
छ ा छत के बाहर िनकला हुआ िहस्सा “छ े पर खड़े होकर वे क वता दोहराने लगे।” 130
चारा उपाय, रास्ता “अब कोई चारा नह ।” 131
हक्के-बक्के हैर ान रह जाना “राजा साहब हक्के-बक्के रह गए।” 131
मालामाल धन से भर दे ना, बहुत धनी बना दे ना “मदन को सोने-चाँद से मालामाल कर दया 131
गया।”
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