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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T
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एनसीईआरट समाधान
अध्याय 13: हमारा आ दत्य
एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा
पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम
154 – 172 10 41 हन्द
Solutions, notes, sample papers & more at 46 pages
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कक्षा 4 हद अध्याय 13 हमारा आ दत्य AglaSem · NCERT Solutions
कक्षा 4 · हद · वीणा
एनसीईआरट समाधान — अध्याय 13: हमारा आ दत्य
यह पाठ एक संवाद है — कक्षा म अध्यापक और ब क बातचीत। बात सूय से शुरू होती है और भारत के सूय-यान आ दत्य-एल 1 तक पहुँचती
है। यह वीणा का अं तम पाठ है। इसके बाद क वता हम सब सुमन एक उपवन के द गई है।
पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ
वीणा (कक्षा 4) 154 – 172
खं ड प्रश्न
10 41
माध्यम
हन्द
बातचीत के लए — पृष्ठ 160–161
पाठ पढ़ने के बाद कक्षा म मलकर बातचीत करने वाले प्रश्न
बातचीत के लए
प्र.1 आपने आकाश म अनेक तारे दे खे ह गे। ऐसा कौन-सा तारा है जो हम सुबह-सुबह जगाने का काम करता है? हम
इस तारे से कौन-से लाभ होते ह?
वह तारा है — सूय। सुबह सूय नकलता है और उसक धूप से हम जाग जाते ह।
पाठ म अध्यापक जी ने यही बताया है — “उत्तम! सूय एक तारा है।” (पृष्ठ 154)
सूय से हम ये लाभ होते ह —
दन म उजाला मलता है। उसी उजाले म हम पढ़ते और खेलते ह।
गरमी मलती है। ज्यो त कहती है — “सूरज पृथ्वी से बहुत दूर है, फर भी कतनी गरमी दे ता है!”
स दय म धूप बहुत आराम दे ती है। सुमन क नानी पूरे दन धूप म बैठ रहती ह।
सूय क करण से हम वटा मन डी मलता है। (पृष्ठ 168)
सूय के प्रकाश से हम सौर ऊजा मलती है, जो कभी समाप्त नह होती। (पृष्ठ 169)
ऐसा क्य : सूय अपनी चमक स्वयं दे ता है, इस लए वह तारा है। चाँद अपनी चमक स्वयं नह दे ता, इसी लए
अध्यापक जी ने सुमन क बात नह मानी क सूरज एक ग्रह है।
संकेत: सूय क ओर कभी सीधे मत दे खए। अध्यापक जी कहते ह — “सूय को कभी भी प्रत्यक्ष दे खने का प्रयास
मत करना ब ो। यह आँख के लए ठ क भी नह है।” (पृष्ठ 159)
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प्र.2 भारत म मनाए जाने वाले ऐसे त्योहार या मेल के बारे म अपनी कक्षा म चचा क जए जनका संबंध सूय अथवा
चंद्रमा से है।
यह कक्षा म मलकर करने वाला काम है। इसका उत्तर हर ब े का अपना होगा, क्य क हर घर और हर प्रदे श के त्योहार अलग ह।
चचा इस तरह क जए —
1. पहले घर म पू छए क आपके यहाँ कौन-से त्योहार मनाए जाते ह।
2. हर त्योहार के आगे ल खए — यह सूय से जुड़ा है या चंद्रमा से।
3. कक्षा म एक-एक करके बताइए। एक ही त्योहार के अलग-अलग प्रदे श म अलग नाम भी सु नए।
नमूना उत्तर:
त्योहार या मेला कससे संबंध क्या होता है
छठ सूय लोग नद या तालाब के जल म खड़े होकर सूय को अ य दे ते ह।
मकर सं ांित सूय तल-गुड़ बाँटे जाते ह और पतंग उड़ाई जाती ह।
पोंग ल सूय नई फ़सल से बना प गल सूय को चढ़ाया जाता है।
करवा चौथ चंद मा चाँद दे खकर ही व्रत पूरा कया जाता है।
ईद चंद मा चाँद दखने पर ही ईद मनाई जाती है।
शरद पूिणमा चंद मा पूरे चाँद क रात म खीर रखी जाती है।
संकेत: पृष्ठ 169 के चत्र को फर से दे खए। उसम भी लोग जल म खड़े होकर सूय को जल चढ़ा रहे ह।
प्र.3 आपने कक्षा तीन क पाठ्यपुस्तक ‘वीणा, भाग 1’ म चंद्रयान पर पाठ पढ़ा है न! अपने सहपा ठय को चंद्रयान के
बारे म कुछ याद करके बताइए।
यह याद करके बोलने वाला काम है। जो आपने कक्षा तीन म पढ़ा था, वही अपने शब्द म सुनाइए।
बोलते समय ये बात र खए —
1. चंद्रयान क्या है — चाँद के बारे म जानने के लए भेजा गया यान।
2. वह कहाँ गया — चाँद तक।
3. उसने क्या कया — चाँद के चत्र और जानकारी भेजी।
4. आपको उसम सबसे अ बात कौन-सी लगी।
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नमूना उत्तर: “चंद्रयान हमारे दे श का भेजा हुआ अंत रक्ष यान है। वह चाँद के बारे म जानने के लए भेजा गया था। इसी पाठ म
अध्यापक जी बताते ह क चंद्रयान-3 सफल रहा। अब उसी तरह का एक यान सूय के लए भी भेजा गया है, जसका नाम आ दत्य-
एल 1 है।”
यह प्रश्न यहाँ क्य है: पाठ क शुरुआत म ही अध्यापक जी कहते ह — “ पछली कक्षा म हमने चाँद और चंद्रयान के
बारे म जाना था।” पुरानी जानी हुई बात से जोड़ने पर नई बात जल्द समझ आती है।
संकेत: इस पाठ म चंद्रयान के बारे म केवल इतना ही दया है — वह चाँद के लए भेजा गया यान है, चंद्रयान-3
सफल रहा, और आ दत्य-एल 1 उसी प्रकार का यान है। बाक बात अपनी कक्षा तीन क पुस्तक से याद क जए।
प्र.4 चंद्रयान-3 क सफलता के बाद सूय का अध्ययन करने वाले यान आ दत्य-एल 1 के वषय म आपने जो भी सुना,
पढ़ा या दे खा है, बताइए।
अपनी सुनी-दे खी बात बताइए। नीचे वे बात द ह जो इसी पाठ म पढ़ ह — इन्ह भी अपनी बात म जोड़ ली जए।
बात पाठ म कहाँ
आ दत्य-एल 1 चंद्रयान के प्रकार का ही एक यान है। प ृ ठ 156
ष्
इसका काम सूय के बारे म जानकारी जुटाना है। प ृ ठ 156
ष्
इसका प्रक्षेपण 2 सतंबर 2023 को इसरो ने कया था। प ृ ठ 158
ष्
यह लगभग 5 वष तक सूय के चार ओर घूमता हुआ चत्र ख चता रहेगा। प ृ ठ 158
ष्
इसने सूय के ग्यारह रंग वाले चत्र भेजे ह। प ृ ठ 159
ष्
सूय पर आने वाली आँ धय क जानकारी इसके उपकरण से मलेगी। प ृ ठ 160
ष्
नमूना उत्तर: “मने ट .वी. पर दे खा था क आ दत्य-एल 1 को रॉकेट से अंत रक्ष म भेजा गया। मुझे यह जानकर अ ा लगा क यह
सूय पर नह जाता, ब ल्क एक सुर क्षत दूरी पर रुककर उसके चत्र भेजता है। उसके भेजे हुए ग्यारह रंग वाले चत्र मुझे सबसे सुंदर
लगे।”
संकेत: जो बात आपने सुनी हो पर पक्का न हो, उसे “मने सुना है क…” कहकर बताइए — जैसे पाठ म वाणी
कहती है।
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नीचे दए गए चत्र को ध्यान से दे खए और बताइए क — (क) इसम क्या दखाया गया है?
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प्र.5 (क)
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पाठ के पृष्ठ 161 पर छपा चत्र — हरी पहाड़ी और फूल के ऊपर आकाश म बना एक बड़ा रंगीन धनुष। बाईं ओर
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सूरज चमक रहा है और दाईं ओर बादल से बूँद गर रही ह।
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इस चत्र म इंद्रधनुष दखाया गया है।
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चत्र म और क्या-क्या है —
बाईं.cओर चमकता हुआ सूरज। a g
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दाईं ओर बादल, जनसे बूँद गर रही ह।
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नीचे हरी पहा ड़याँ, रंग- बरंगे फूल और उड़ती हुई तत लयाँ।
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आकाश म धनुष जैसा मुड़ा हुआ रंग का एक चौड़ा प ा।
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पाठ के पृष्ठ 161 पर छपा चत्र — हरी पहाड़ी और फूल के ऊपर आकाश म बना एक बड़ा रंगीन धनुष। बाईं ओर सूरज चमक रहा है और
दाईं ओर बादल से बूँद गर रही ह।
इसे इंद्रधनुष क्य कहते ह: इसका आकार धनुष जैसा होता है और इसम कई रंग होते ह, इसी लए इसका नाम इंद्र-
धनुष पड़ा।
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प्र.5 (ख) क्या आपने इसे कभी दे खा है? इसम कतने रंग होते ह? अपनी लेखन-पु स्तका म उन रंग के नाम क्रम से
ल खए।
पाठ के पृष्ठ 161 पर छपा चत्र — हरी पहाड़ी और फूल के ऊपर आकाश म बना एक बड़ा रंगीन धनुष। बाईं ओर
सूरज चमक रहा है और दाईं ओर बादल से बूँद गर रही ह।
हाँ, बा रश रुकने के बाद आकाश म इंद्रधनुष दखाई दे ता है। यह उत्तर आपका अपना होगा — जसने दे खा हो, वह बताए क कब
और कहाँ दे खा।
इंद्रधनुष म सात रंग होते ह।
ऊपर से नीचे के क्रम म रंग के नाम —
1. लाल
2. नारंगी
3. पीला
4. हरा
5. नीला
6. जामुन ी
7. बैगं नी
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पाठ के पृष्ठ 161 पर छपा चत्र — हरी पहाड़ी और फूल के ऊपर आकाश म बना एक बड़ा रंगीन धनुष। बाईं ओर सूरज चमक रहा है और
दाईं ओर बादल से बूँद गर रही ह।
याद रखने क तरक ब: पहले अक्षर जोड़कर प ढ़ए — ला-ना-पी-ह-नी-जा-बै। सबसे ऊपर लाल रहता है और
सबसे नीचे बगनी।
नमूना उत्तर: “हाँ, पछली बरसात म स्कूल से लौटते समय मने इंद्रधनुष दे खा था। वह बहुत बड़ा और गोल-सा था।”
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प्र.5 (ग) आकाश म ऐसा कब और कैसे होता है?
पाठ के पृष्ठ 161 पर छपा चत्र — हरी पहाड़ी और फूल के ऊपर आकाश म बना एक बड़ा रंगीन धनुष। बाईं ओर
सूरज चमक रहा है और दाईं ओर बादल से बूँद गर रही ह।
कब: बा रश रुकने के तुरंत बाद, जब आकाश म हल्क बूँद बची ह और उसी समय सूरज भी नकल आया हो।
कैसे: सूरज क धूप हवा म लटक पानी क छोट -छोट बूँद पर पड़ती है। हर बूँद उस धूप को सात रंग म बाँट दे ती है। सारे रंग
मलकर आकाश म धनुष जैसा बड़ा प ा बना दे ते ह।
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पाठ के पृष्ठ 161 पर छपा चत्र — हरी पहाड़ी और फूल के ऊपर आकाश म बना एक बड़ा रंगीन धनुष। बाईं ओर सूरज चमक रहा है और
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दाईं ओर बादल से बूँद गर रही ह।
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ध्यान दे ने क बात: इंद्रधनुष दे खते समय सूरज हमारी पीठ क ओर रहता है और बा रश सामने क ओर। चत्र म भी
aसूरज एक ओर है और बूँद गराता बादल दूसरी ओर।
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संकेत: घर पर दे ख सकते ह — धूप म खड़े होकर पाइप से पानी क महीन फुहार छो ड़ए। पीठ सूरज क ओर
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र खए। फुहार म छोटा-सा इंद्रधनुष दखाई दे गा।
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पाठ के भीतर — पृष्ठ 161–162
नम्न ल खत प्रश्न.cक
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सही उत्तर पर सूय का चत्र बनाइए। यहाँ एक से अ धक वकल्प सही हो सकते ह।
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पाठlक
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प्र.1 सूरज मुख्य रूप से कन गैस का एक वशाल गोला है? (क) हाइ ोजन (ख) नाइ ोजन (ग) ऑक्सीजन (घ)
ही लयम
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सही उत्तर ह — (क) हाइ ोजन और (घ) ही लयम। इन दोन पर सूय का चत्र बनाइए।
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वकल्प सही या गलत क्य
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agl सही पाठ म अध्यापक जी ने इसी का नाम लया है।
(ख) नाइटोजन गलत पाठ म इसका नाम नह आया।
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(ग) ऑक्सीजन गलत पाठ म इसका नाम नह आया।
(घ) हीिलयम सही agl पाठ म इसका भी नाम लया गया है।
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पाठ का आधार: अध्यापक जी कहते ह — “सूय मुख्य रूप से हाइ ोजन और ही लयम नाम क गैस का एक
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वशाल गोला है।” (पृष्ठ 155)
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संकेत: सा हल को ये नाम बोलने म क ठनाई हुई थी। धीरे-धीरे तोड़कर बो लए — हा-इ- ो-जन, ही- ल-यम।
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पुस्तक म एक बात खटकती है: पृष्ठ 155 पर धरा कहती है — “सूय पर गरमी आग के जलने से नह होती ब ल्क
सूय ऐसी गैस से बना है जो बहुत गरम होती ह।” अध्यापक जी उसक बात पर कहते ह — “सही कहा!” पर पृष्ठ
156 पर वही अध्यापक जी कहते ह — “उसके भीतर हर समय आग जल रही है। वह कभी बुझती ही नह ।” दोन
बात आपस म मेल नह खात । इस प्रश्न का उत्तर दे ते समय धरा और अध्यापक जी क पहली बात ही सही मा नए
— सूय गैस का गोला है।
प्र.2 राहुल के अनुसार सूय एक गोला है — (क) रुई का (ख) ऊन का (ग) आग का (घ) बफ का
सही उत्तर है — (ग) आग का।
पाठ का आधार: पृष्ठ 154 पर राहुल कहता है — “नह , सूय तो आग का एक गोला है!”
बाक तीन वकल्प गलत ह। रुई, ऊन और बफ — तीन ठं डी चीज़ ह। सूय तो बहुत गरम है।
ध्यान द जए: प्रश्न पूछ रहा है क राहुल ने क्या कहा। अध्यापक जी ने आगे बताया क सूय असल म एक तारा है,
पर वह बहुत गरम है, इस लए लोग उसे आग का गोला भी कह दे ते ह।
प्र.3 आ दत्य-एल 1 ने सूय के कतने रंग के चत्र भेजे ह? (क) आठ (ख) सात (ग) दस (घ) ग्यारह
सही उत्तर है — (घ) ग्यारह।
पाठ का आधार: पृष्ठ 159 पर अध्यापक जी कहते ह — “इसने सूय के ग्यारह रंग के चत्र भेजे ह जो दे खने म
बहुत सुंदर ह।” उसी पृष्ठ पर चत्र के नीचे भी लखा है — “आ दत्य-एल 1 ारा भेजे गए सूय के ग्यारह रंग वाले
चत्र (इसरो से साभार)”।
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ग्यारह अलग-अलग रंगों वाले िचत्र
पाठ के पृष्ठ 159 पर छपे चत्र जैसा सरल रेखा चत्र — आ दत्य-एल 1 ारा भेजे गए सूय के ग्यारह अलग-अलग रंग वाले चत्र (इसरो से
साभार)।
संकेत: ‘सात’ वाला वकल्प इंद्रधनुष के कारण ठ क लग सकता है, पर यहाँ बात इंद्रधनुष क नह , आ दत्य-एल 1
के भेजे चत्र क हो रही है।
प्र.4 आ दत्य-एल 1 मशन का काय कौन-सी जानकारी जुटाना है? (क) सूय कस समय कैसा होता है (ख) सूय के
भीतर जलने वाली आग का ताप कैसा है (ग) चाँद के रहस्य जुटाना (घ) सूय के ताप का प्रभाव कैसा होता है
सही उत्तर ह — (क), (ख) और (घ)। तीन पर सूय का चत्र बनाइए।
वकल्प सही या गलत क्य
(क) सूय िकस समय कै सा होता है सही पाठ म यही शब्द आए ह।
(ख) आग का ताप कै सा है सही पाठ म यही शब्द आए ह।
(ग) चाँद के रहस्य जुटाना गलत यह काम चंद्रयान का था, आ दत्य-एल 1 का नह ।
(घ) ताप का पभाव कै सा होता है सही पाठ म यही शब्द आए ह।
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पाठ का आधार: पृष्ठ 156 पर अध्यापक जी बताते ह — “इसका काय सूय के बारे म जानकारी जुटाना है, जैसे —
यह कस समय कैसा होता है, इसके भीतर जलने वाली आग का ताप कतना है, इस ताप का प्रभाव आस-पास कैसा
होता है या इसका प्रभाव हमारी पृथ्वी पर भी पड़ता है अथवा नह …।”
संकेत: नाम पर ध्यान द जए — ‘आ दत्य’ का अथ ही सूय है। इस लए यह यान सूय का काम करेगा, चाँद का नह ।
सो चए और ल खए — पृष्ठ 162–163
पाठ से बनी समझ के आधार पर नम्न ल खत प्रश्न के उत्तर ल खए —
सो चए और ल खए
प्र.1 (क) हमारे वै ा नक ने आ दत्य-एल 1 का नमाण क्य कया?
हमारे वैज्ञा नक ने आ दत्य-एल 1 का नमाण सूय के रहस्य का पता लगाने के लए कया।
अध्यापक जी कहते ह — “जैसे चंद्रमा के रहस्य ह, ठ क उसी प्रकार सूय के भी रहस्य ह। इन्ह रहस्य का उ ाटन करने के लए
हमारे वैज्ञा नक ने आ दत्य-एल 1 का नमाण कया है।” (पृष्ठ 156)
यह यान ये काम करता है —
सूय कस समय कैसा होता है, यह दे खता है।
सूय के भीतर जलने वाली आग का ताप कतना है, यह पता करता है।
उस ताप का प्रभाव आस-पास और हमारी पृथ्वी पर पड़ता है या नह , यह जानता है।
सूय पर आने वाली आँ धय क जानकारी भेजता है। (पृष्ठ 160)
यह ज़रूरी क्य है: सूय तक कोई व्य क्त जा नह सकता, क्य क वह बहुत दूर और बहुत गरम है। इस लए उसक
जानकारी लाने के लए यान भेजा गया। यान वह से चत्र ख चकर भेजता है और वैज्ञा नक उन चत्र का अध्ययन
करते ह।
प्र.1 (ख) “आ दत्य-एल 1 चंद्रयान के प्रकार का ही एक यान है।” अध्यापक ने ऐसा अपने व ा थय से क्य कहा?
अध्यापक जी ने ऐसा इस लए कहा ता क ब े जानी हुई बात से जोड़कर नई बात जल्द समझ जाएँ।
कारण —
1. ब े पछली कक्षा म चाँद और चंद्रयान पढ़ चुके थे। अध्यापक जी ने शुरू म ही यह कहा था।
2. वाणी ने स्वयं पूछा — “क्या यह चंद्रयान के प्रकार का ही तो नह है?” अध्यापक जी ने उसक बात ठ क ठहराई।
3. दोन अंत रक्ष यान ह। अंतर बस इतना है — चंद्रयान चाँद के लए भेजा गया, आ दत्य-एल 1 सूय के लए।
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चंद्रयान आ दत्य-एल 1
िकसके बारे में चाँद सूय
क्या करता है चाँद क जानकारी भेजता है सूय के िच और जानकारी भेजता है
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पढ़ाने क यह तरक ब क्य काम करती है: जो चीज़ हम पहले से जानते ह, उससे मलाकर बताई गई नई चीज़
मन म तुरंत बैठ जाती है।
प्र.1 (ग) आ दत्य-एल 1 म ‘एल 1’ क्या है और उसका क्या काय है?
‘एल 1’ का अथ है — लगरांज 1। यह अंत रक्ष का एक व शष्ट ान यानी एक बदु है।
यह बदु कहाँ है: सूय और पृथ्वी के कद्र को जोड़ने वाली रेखा पर। चत्र म यह सूय और पृथ्वी के बीच दखाया गया है।
इसका काय: इस बदु पर सूय और पृथ्वी क आकषण श क्तयाँ इस तरह संतु लत रहती ह क वहाँ रखी कोई भी वस्तु पृथ्वी के
साथ-साथ ही सूय क प रक्रमा करती जाती है। इसी लए आ दत्य यान वह टका रहता है और अपने ान से सूय के चत्र ख चता
रहता है।
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सूय आिदत्य-एल 1
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पथ्ृ वी
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पाठ के पृष्ठ 170 पर छपा चत्र — बीच म सूय, उसके चार ओर एक बड़ा गोल पथ और उस पथ पर पृथ्वी। एल 1 से एल 5 तक पाँच बदु
और आ दत्य-एल 1 क जगह दखाई गई है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 13 हमारा आ दत्य
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नाम कैसे पड़ा: ‘लगरांज’ 18व सद म इटली का एक ग णतज्ञ था। उसी ने इस बदु के बारे म बताया था, इस लए
बदु उसी के नाम से जाना जाता है। उसने ऐसे चार और बदुओं का पता लगाया, इस लए इन पाँचem
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बदुओं को एल 1,
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संकेत: ‘संतु लत’ का अथ है — दोन ओर से बराबर खचाव। जैसे रस्साकशी म दोन टो लयाँ बराबर ताकत से
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ख च तो रस्सी अपनी जगह पर ही रहती है।
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“अध्यापक जी! मने सुना है क सूय सात घोड़ के रथ पर आकाश म यात्रा करने वाला एक राजा है।” वाणी
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ने अध्यापक से ऐसा क्य कहा होगा?
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वाणी ने ऐसा इस लए कहा होगा क्य क उसने यह बात घर-प रवार या कथा-कहा नय म सुनी होगी।
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2. हमारे यहाँ कथाओं और चत्र म सूय को सात घोड़ के.c agl
1. वाणी स्वयं कहती है — “मने सुना है।” वह इसे अपनी जानी हुई बात नह बता रही।
seहीmसुना है।” यानी यह बात बहुत घर म कही-सुनी जाती है।
रथ पर बैठा दे वता दखाया जाता है। वही चत्र वाणी के मन म था।
3. गौरव ने भी तुरंत कहा — “हाँ, मने भी कुछla
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ऐसा
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अध्यापक जी ने क्या बताया: उन्ह ने कसी ब े को डाँटा नह । सबक बात सुनकर उन्ह ने बताया — “सूय एक
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तारा है।” कहानी अपनी जगह ठ क है, पर पढ़ाई म हम वही मानते ह जो जाँचकर पता चला हो।
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a s eसंmकेत: सुनी-सुनाई बात कहते समय “मने सुना है क…” कहना अ
gl क यह पक्क जानकारी नह है।
आदत है। इससे सुनने वाले को पता रहता है
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नम्न ल खत वाक्य म नीचेas
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ही, और, बहुत) i. हमa…… बड़े होकर वै ा नक बनगे। ii. र व अध्यापक क …… अचरज से दे खता है। iii.
प्र.1 (ङ) दए गए शब्द का प्रयोग करते हुए रक्त ान क पू त क जए — (ओर, भी,
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आ दत्य-एल 1 ने सूय के कुछ अ त चत्र भेजे ह, उन्ह य द आप लोग दे खगे तो दे खते …… रह जाएँगे। iv.
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भारत के ओ डशा के पुरी जले म सूय दे वता का एक …… सुंदर मं दर बना हुआ है। v. अध्यापक ने भास्कर
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से कहा क इस कक्षा म दो …… आ दत्य ह।
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पाँच शब्द एक-एक बार प्रयोग ह गे।
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कक्षा 4 हद अध्याय 13 हमारा आ दत्य AglaSem · NCERT Solutions
क्रम पूरा वाक्य भरा गया शब्द
i. हम भी बड़े होकर वैज्ञा नक बनगे। भी
ii. र व अध्यापक क ओर अचरज से दे खता है। ओर
iii. …उन्ह य द आप लोग दे खगे तो दे खते ही रह जाएँगे। ही
iv. …सूय दे वता का एक बहुत सुंदर मं दर बना हुआ है। बहतु
v. …इस कक्षा म दो और आ दत्य ह। और
‘ओर’ और ‘और’ का अंतर: ओर का अथ है दशा — कसी क तरफ़। और का अथ है — तथा, एक से ज़्यादा।
दोन क आवाज़ मलती-जुलती है, पर अथ अलग है।
मेरा अपना वाक्य — “म व ालय क ओर चला और रास्ते म मुझे मेरा मत्र मला।”
जाँच कर ली जए: ये वाक्य पाठ से ही लए गए ह। पृष्ठ 155 पर “(अध्यापक क ओर अचरज से दे खते हुए)”, पृष्ठ
156 पर “दे खते ही रह जाएँगे” और “इस कक्षा म दो और आ दत्य ह” छपा है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 13 हमारा आ दत्य AglaSem · NCERT Solutions
प्र.2 ‘आ दत्य’ का अथ सूय होता है। इसी प्रकार आ दत्य के कुछ नाम आप भी खोजकर ल खए। नीचे एक नाम दया
गया है, शेष नाम आप ल खए —
…………
िदनेश …………
………… सूय …………
………… …………
…………
पाठ के पृष्ठ 163 पर छपा चत्र — बीच म सूय और उसके चार ओर आठ खाली खाने। एक खाने म ‘ दनेश’ पहले से
लखा है।
चत्र म एक नाम पहले से लखा है — दनेश। बाक सात खान म सूय के दूसरे नाम भरने ह।
…………
िदनेश …………
………… सूय …………
………… …………
…………
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कक्षा 4 हद अध्याय 13 हमारा आ दत्य AglaSem · NCERT Solutions
पाठ के पृष्ठ 163 पर छपा चत्र — बीच म सूय और उसके चार ओर आठ खाली खाने। एक खाने म ‘ दनेश’ पहले से लखा है।
पूरा कया हुआ उत्तर —
भास्कर
िदनेश रिव
अंश मु ाली सूय सूरज
मातडं िदवाकर
प भाकर
पूरा कया हुआ चत्र — सूय के आठ नाम।
नाम पाठ म आया है या नह
िदनेश हाँ — क ा के एक िव ाथ का नाम
क्ष
भास्कर हाँ — अ यापक जी ने वयं बताया (प ृ ठ 156)
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रिव हाँ — क ा के एक िव ाथ का नाम
क्ष
सूर ज हाँ — सुमन और रफ़ त इसी श द का पयोग करते है ं
ब्
िदवाकर, पभाकर, मात ंड, अंशमु ाली नह — ये आपको खोजकर लखने ह
मज़े क बात: इसी कक्षा म तीन ब के नाम का अथ सूय ही है — भास्कर, दनेश और र व। इसी लए अध्यापक
जी ने भास्कर से कहा — “आ दत्य तुम ही तो हो।”
संकेत: इनम से कोई भी सात नाम लख सकते ह। घर म या शब्दकोश म और नाम भी खो जए, जैसे — स वता,
अक, पतंग।
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अनुमान और कल्पना — पृष्ठ 164
पाठ से आगे बढ़कर सोचने और कल्पना करने वाले प्रश्न
अनु मान और कल्पना
प्र.1 (क) कल्पना क जए क आप वै ा नक बन गए ह और आपको सूय के रहस्य जानने के लए भेजा जा रहा है,
आप सूय क गरमी से बचने के लए कस तरह क व्यव ा करगे?
यह कल्पना का प्रश्न है, इस लए हर ब े का उत्तर अलग हो सकता है। पर एक बात सबके उत्तर म होनी चा हए — सूय के पास
जाना नह है, दूर रहकर काम करना है।
अ े उत्तर म ये बात आनी चा हए —
1. सुर क्षत दूरी पर रुकने क व्यव ा।
2. गरमी रोकने वाला मोटा आवरण या ढाल।
3. आँख और शरीर को बचाने का उपाय।
4. दूर से चत्र लेने और जानकारी भेजने क व्यव ा।
नमूना उत्तर: “म सूय के बलकुल पास नह जाऊँगा। म एल 1 जैसे कसी सुर क्षत ान पर रुक जाऊँगा। मेरे यान के ऊपर गरमी
रोकने वाली मोट परत लगी होगी। म गहरे रंग का सुरक्षा-चश्मा पहनूँगा, ता क सूय क तेज़ रोशनी से आँख बच जाएँ। वह से म
दूरबीन और कैमरे क सहायता से सूय के चत्र लूँगा और पृथ्वी पर भेजूँगा।”
पाठ से सीख: सुमन ने भी यही चता क थी — “वहाँ कैसे जाएँगे? जो जाएगा, वह जल नह जाएगा!” अध्यापक
जी ने बताया क आ दत्य-एल 1 को कोई हा न नह पहुँचती, क्य क यह एक सुर क्षत दूरी पर त है। (पृष्ठ 156)
प्र.1 (ख) सूय से जुड़े कौन-से रहस्य को खोजने का प्रयास करगे?
पाठ म जो प्रश्न ब और अध्यापक जी के मन म उठे , वही सूय के रहस्य ह। उन्ह को खोजने का प्रयास करगे।
खोजने वाली बात पाठ म कहाँ
सूय कस समय कैसा दखता है? प ृ ठ 156
ष्
उसके भीतर जलने वाली आग का ताप कतना है? प ृ ठ 156
ष्
उस ताप का प्रभाव आस-पास कैसा होता है? प ृ ठ 156
ष्
क्या उसका प्रभाव हमारी पृथ्वी पर भी पड़ता है? प ृ ठ 156
ष्
सूय पर आँ धयाँ कैसे आती ह और उनसे पृथ्वी पर क्या असर पड़ता है? प ृ ठ 159–160
ष्
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नमूना उत्तर: “म सबसे पहले यह खोजूँगा क सूय के भीतर क आग कभी बुझती क्य नह । फर म यह दे खूँगा क सूय पर आने
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वाली आँ धय का हमारी पृथ्वी पर क्या असर पड़ता है।”
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‘रहस्य’ का अथ: वह बात जो अभी पता नह है। वैज्ञा नक का काम यही है — रहस्य पर सोचना, जाँचना और उत्तर
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य द आपको व ालय म आ दत्य-एल 1 के वैem
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ा नक से मलने का एक अवसर मलता है तो आप उनसे कौन-से
प्रश्न पूछना चाहगे? कोई चार प्रश्न ल g
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चार प्रश्न आपको स्वयं सोचने ह। ध्यान र खए — प्रश्न ऐसा हो जसका उत्तर ‘हाँ’ या ‘नह ’ म न हो, ब ल्क
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(क) आिदत्य-एल 1 को एल 1 िबंद ु तक पहुँच ने में िकतना समय लगा?
(ख) इतनी दू र से खी ंचे गए िचत्र इतने साफ़ eकm . c
la s ै से आते है?ं
(ग) सूय की गरमी से यान को बचानेag के िलए आपने क्या लगाया है?
(घ) हम बच्चे बड़ े होकर अंत िरक्ष वैज्ञािनक बनना चाहे ं तो अभी से क्या करे?ं
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अ .cा प्रश्न कैसा होता है: जो सचमुच क जज्ञासा से नकले। पाठ म स ल्वया
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aseआ दत्य-एल 1 और क्या-क्या करेगा?” अध्यापक जी ने उसे कहा — “बहुत अ ा प्रश्न पूछा।”
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संकेत: प्रश्न लखते समय अंत म प्रश्नवाचक चह्न (?) लगाना मत भू लए।
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भाषा क बात — पृष्ठ 164–168
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वराम चह्न, शब्द-भेद, उपसग, लग, वपरीत शब्द और अनेकाथ शब्द
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भाषा क बात
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प्र.1 नम्न ल खत वाक्य म उ चत वराम चह्न लगाइए — ( , ! ? । ) (क) य द ऐसा है तो वहाँ आग कसने जलाई
होगी …… (ख) अध्यापक जी …… लगरांज 1 क्या होता है …… (ग) अ ा …… तभी इसका नाम आ दत्य-एल 1
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रखा गया है …… (घ) जी अध्यापक जी …… यह बहुत गरम है ……
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पूरे वाक्य वराम चह्न लगाकर इस तरह बनगे —
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(क) यिद ऐसा है तो वहाँ आग िकसने जलाई होगी?
(ख) अध्यापक जी! लगरांज 1 क्या होता है?
(ग) अच्छा, तभी इसका नाम आिदत्य-एल 1 रखा गया है।
(घ) जी अध्यापक जी, यह बहुत गरम है!
चह्न नाम कब लगता है
, अ प िवराम
ल् वाक्य के भीतर ज़रा-सा ठहरना हो।
। पूण िवराम बात पूरी हो जाए।
? प नवाचक िचह्न
श् कुछ पूछा जा रहा हो।
! िव मयािदबोधक िचह्न
स् आश्चय, खुशी या ज़ोर से पुकारना हो।
कैसे पहचान: (क) और (ख) म कुछ पूछा जा रहा है, इस लए ? लगा। (ख) म “अध्यापक जी” पुकार है, इस लए
वहाँ ! लगा। (ग) और (घ) म “अ ा” और “जी अध्यापक जी” के बाद ज़रा-सा ठहराव है, इस लए वहाँ , लगा।
संकेत: ये वाक्य पाठ से ही लए गए ह। पृष्ठ 155 पर र व पूछता है — “अगर ऐसा है तो वहाँ आग कसने जलाई
होगी?” और पृष्ठ 154 पर सभी व ाथ कहते ह — “जी अध्यापक जी, यह बहुत गरम होगा!” इसी कारण (घ) के
अंत म ! सबसे ठ क बैठता है। अंत म । लगाना भी गलत नह है, पर तब आश्चय वाला भाव नह रहेगा।
प्र.2 शब्द- पटारा म दए गए शब्द को नीचे दए गए उनके संबं धत प रवार म ल खए — (सं ा / सवनाम / वशेषण)
शब्द- पटारा
सात अ ा सूय सुमन एक आप ग्यारह
बहुत मुझे यह रव दनेश वाणी गरम
व ाथ आ दत्य दो म हम मने कुछ
पाठ के पृष्ठ 165 पर छपा शब्द- पटारा — एक खुले संदूक म रखे इक्क स शब्द।
शब्द- पटारा म इक्क स शब्द ह। हर शब्द को उसके प रवार म रखना है।
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शब्द- पटारा
सात अ ा सूय सुमन एक आप ग्यारह
बहुत मुझे यह रव दनेश वाणी गरम
व ाथ आ दत्य दो म हम मने कुछ
पाठ के पृष्ठ 165 पर छपा शब्द- पटारा — एक खुले संदूक म रखे इक्क स शब्द।
पूरा कया हुआ उत्तर —
सं ा सवनाम वशेषण
आिद य त् मुझे गरम
सूय म सात
सुमन मने ग्यारह
रव हम एक
दनेश आप दो
वाणी यह अ ा
व ाथ — बहुत
— — कुछ
तीन म अंतर —
सं ा कसी के नाम को कहते ह — व्य क्त, वस्तु या जगह का नाम। जैसे — सुमन, सूय।
सवनाम वह शब्द है जो संज्ञा क जगह आता है। जैसे — सुमन क जगह ‘वह’, अपने लए ‘म’।
वशेषण संज्ञा क वशेषता बताता है — कैसा है, कतना है। जैसे — गरम सूय, दो आ दत्य।
संकेत: ‘कुछ’ और ‘यह’ दो ऐसे शब्द ह जो वाक्य के अनुसार बदल जाते ह। “कुछ व ाथ हँसते ह” म ‘कुछ’
वशेषण है, पर “मुझे कुछ नह चा हए” म वह सवनाम बन जाता है। यहाँ पटारे म ‘ व ाथ ’ भी है, इस लए ‘कुछ’
को वशेषण म रखना ठ क है।
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प्र.3 पाठ म आए ‘प्रभाव’, ‘अ भयान’, ‘ वशाल’, ‘सुप्रभात’ शब्द म ‘प्र’, ‘अ भ’, ‘ व’ और ‘सु’ शब्दांश उपसग का
काय कर रहे ह तथा ‘भाव’, ‘यान’, ‘शाल’ एवं ‘प्रभात’ मूल शब्द ह। उपयुक्त उदाहरण म ‘स’ उपसग का प्रयोग
करते हुए दो नवीन शब्द बनाए गए ह। आप इसी प्रकार नम्न ल खत उपसग क सहायता से दो-दो शब्द बनाइए
—
उपसग वह शब्दांश है जो कसी शब्द के आगे जुड़कर नया शब्द बना दे ता है।
पुस्तक का उदाहरण — स + रस = सरस, स + चत्र = स चत्र।
उपसग पहला शब्द दूसरा शब्द
स (उदाहरण) सरस स चत्र
प पयोग (प + योग) पचार (प + चार)
िव िवदे श (िव + दे श) िव ान (िव + ान)
ज्ञ ज्ञ
अिभ अिभवादन (अिभ + वादन) अिभनय (अिभ + नय)
सु सुगंध (सु + गंध) सुले ख (सु + ले ख)
पाठ के पृष्ठ 166 पर छपे चत्र जैसा — सूरज के आकार म एक-एक उपसग और उसके आगे दो-दो खाली खाने, जन्ह यहाँ ता लका के
रूप म दया गया है।
उपसग शब्द को बदल कैसे दे ता है: ‘भात’ अलग है और ‘प्रभात’ अलग। ‘सु’ लगते ही ‘गंध’ अ गंध हो गई —
‘सुगंध’। यही उपसग का काम है।
पुस्तक म एक चूक: प्रश्न कहता है क ‘अ भयान’ शब्द पाठ म आया है, पर पूरे पाठ म यह शब्द कह नह छपा।
पाठ म ‘अ भ’ उपसग वाला शब्द ‘अ भवादन’ है, जो पृष्ठ 154 क पहली पं क्त म आया है। बाक तीन शब्द —
प्रभाव (पृष्ठ 156), वशाल (पृष्ठ 155) और सुप्रभात (पृष्ठ 154) — पाठ म सचमुच आए ह।
प्र.4 पाठ म आया ‘अध्यापक’ शब्द पु ल्लंग है तथा ‘नानी’ शब्द स्त्री लग है। इसके अ त रक्त पाठ म आए अन्य कोई
दो-दो पु ल्लंग और स्त्री लग शब्द खोजकर नीचे ल खए —
पाठ से चुने हुए शब्द —
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पु ल्लंग शब्द स्त्री लग शब्द
सूय धूप
चंद मा प ृ वी
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और भी शब्द चुन सकते ह —
पु ल्लंग स्त्री लग
तारा, रथ, यान, गोला, चत्र, मं दर, व ाथ कक्षा, गरमी, आग, गैस, करण, आँधी, मौसी
लग कैसे पहचान: वाक्य म क्रया के रूप से पता चलता है। कहते ह — “सूय गरम है… वह चमकता रहता है”
(पु ल्लंग), और “धूप अ लगती है”, “पृथ्वी घूमती है” (स्त्री लग)।
संकेत: पाठ के वाक्य पढ़कर जाँ चए — “मुझे गरमी के मौसम म सूय बलकुल भी अ ा नह लगता।” यहाँ
‘गरमी’ स्त्री लग है और ‘सूय’ पु ल्लंग।
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नीचे दए गए शब्द के वपरीत अथ वाले शब्द वग पहेली म से ढूँ ढ़कर उनका वाक्य म प्रयोग क जए — (क)
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बहुत (ख) पुराना (ग) प्रकाश (घ) दूर (ङ) बड़ा
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पाठ के पृष्ठ 167 पर छपी वग पहेली — चार पं क्तय और चार खान वाला खाना-खाना जाल। चार खाने खाली छोड़े
गए ह।
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पाठ के पृष्ठ 167 पर छपी वग पहेली — चार पं क्तय और चार खान वाला खाना-खाना जाल। चार खाने खाली छोड़े गए ह।
पाँच शब्द इस तरह मलते ह —
शब्द वपरीत शब्द पहेली म कहाँ वाक्य
बहुत कम दूसरी पं क्त म बाएँ से दाएँ — क + म आज बाज़ार म भीड़ बहुत कम थी।
पुर ाना नया तीसरी पं क्त म बाएँ से दाएँ — न + या मेरा नया बस्ता बहुत सुंदर है।
पकाश अंधकार पहले खाने म ऊपर से नीचे — अं + ध + का + र बजली जाते ही कमरे म अंधकार छा गया।
दू र पास पहली पं क्त म बाएँ से दाएँ — पा + स मेरा व ालय घर के पास ही है।
बड़ा छोटा चौथी पं क्त म बाएँ से दाएँ — छो + टा यह छोटा पौधा एक दन बड़ा पेड़ बनेगा।
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रंग म दखाई गई पहेली —
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वही पहेली, जसम पाँच शब्द अलग-अलग रंग म दखाए गए ह — बगनी म अंधकार (ऊपर से नीचे), नीले म पास, हरे म कम, पीले म
नया और लाल म छोटा।
ध्यान द जए: ‘अंधकार’ अकेला ऐसा शब्द है जो ऊपर से नीचे बना है। बाक चार बाएँ से दाएँ ह। पहेली म चार
खाने खाली ह — वे कसी शब्द म काम नह आते।
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प्र.6 पाठ म ‘सूय’ शब्द का प्रयोग हुआ है। इस शब्द के अनेक नाम आपने पढ़े और सुने ह गे। इस शब्द का प्रयोग
अलग-अलग प्रकार से होता है, जैसे — ‘सूय’ क करण से हम वटा मन डी मलता है। (इस वाक्य म ‘सूय’ एक
तारा है।) ‘सूय’ हमारी कक्षा म पढ़ता है। (इस वाक्य म ‘सूय’ एक व ाथ है।) अब ‘जल’ तथा ‘कर’ शब्द से
जुड़े अलग-अलग अथ वाले वाक्य अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए।
कुछ शब्द ऐसे होते ह जो एक ही तरह लखे जाते ह, पर वाक्य के अनुसार उनका अथ बदल जाता है।
‘जल’ शब्द —
वाक्य इस वाक्य म ‘जल’ का अथ
खेत के पौधे जल से स चे जाते ह। पानी
चूल्हे म लकड़ी जल रही है। जलना (आग पकड़ ना)
द पक जल उठा और कमरा उजला हो गया। रोशनी दे ना
‘कर’ शब्द —
वाक्य इस वाक्य म ‘कर’ का अथ
अपना काम समय पर कर लो। करना (ि या)
दाद ने अपने कर से मेरे सर पर आशीवाद दया। हाथ
दुकानदार हर महीने सरकार को कर दे ता है। टै स
क्
अथ कैसे पहचान: शब्द को अकेला मत दे खए, पूरा वाक्य प ढ़ए। “पौधे जल से स चे जाते ह” म आगे-पीछे खेत
और स चने क बात है, इस लए ‘जल’ का अथ पानी ही होगा।
संकेत: ऐसे शब्द को अनेकाथ शब्द कहते ह। क वता “हम सब सुमन एक उपवन के” म भी यही ‘जल’ पानी के
अथ म आया है — “स चे गए एक जल से हम।”
आ दत्य-एल 1 और सूय क भट — पृष्ठ 168
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यहाँ पर आ दत्य-एल 1 और सूय के बीच बातचीत हो रही है। आप इस बातचीत को आगे बढ़ाइए —
आ दत्य-एल 1 और सू य क भट
प्र.1 यहाँ पर आ दत्य-एल 1 और सूय के बीच बातचीत हो रही है। आप इस बातचीत को आगे बढ़ाइए —
अरे, आप कौन है?ं …………
आपको पहले कभी …………
नही ं देखा! …………
मै ं आिदत्य-एल 1 ह।ू ँ मै ं आपको …………
जानने और समझने आया ह।ू ँ …………
पाठ के पृष्ठ 168 पर छपे दो चत्र — अंत रक्ष म सूय और आ दत्य-एल 1 यान आमने-सामने। पहले चत्र के दोन संवाद
छपे ह; दूसरे चत्र के दोन गुब्बारे खाली ह।
पहले चत्र क बातचीत पुस्तक ने दे द है। दूसरे चत्र के दोन गुब्बारे आपको भरने ह।
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जानने और समझने आया हूँ। …………
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पाठ के पृष्ठ 168 पर छपे दो चत्र — अंत रक्ष म सूय और आ दत्य-एल 1 यान आमने-सामने। पहले चत्र के दोन संवाद छपे ह; दूसरे चत्र
के दोन गुब्बारे खाली ह।
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बातचीत आगे बढ़ाने के लए —
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1. पहले सूय से कुछ कहलवाइए, क्य क उसने अभी-अभी यान का प रचय सुना है।
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la 3. दोन क बात पाठ म पढ़ हुई बात से मलती-जुलती र खए।
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नमूना उत्तर —
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अरे, आप कौन है?ं अच्छा! तो तुम
आपको पहले कभी इतनी दूर से मेरे
नही ं देखा! िचत्र लेने आए हो?
मै ं आिदत्य-एल 1 हूँ। मै ं आपको जी हाँ! मै ं आपके िचत्र लेकर
जानने और समझने आया हूँ। पृथ्वी पर भेजता रहूँगा।
नमूना उत्तर के साथ पूरी क गई बातचीत।
और आगे बढ़ाना चाह तो —
सूय: पर मै ं तो बहुत गरम हूँ। त मु जल नही ं जाओगे?
आिद त् य-एल 1: नही ं, मै ं एल 1 िबंद ु पर हूँ। यह सुरिक्षत दू री है।
सूय: त मु कब तक यहाँ रहोगे?
आिद त् य-एल 1: लगभग पाँच वष। तब तक मै ं आपके िचत्र भे जता रहूँगा।
सूय: तो मेरे रहस्य अब खुल ही जाएँगे!
आिद त् य-एल 1: जी हाँ, और उनसे बच्चे बहुत कु छ सीखेगं े।
संवाद लखने का नयम: पहले बोलने वाले का नाम, फर डैश या कोलन, फर उसक बात। हर बात छोट र खए
— जैसे इसी पाठ म अध्यापक और ब क बात लखी गई ह।
संकेत: यह उत्तर आपका अपना होगा। जो बात पाठ म ह — सुर क्षत दूरी, चत्र भेजना, पाँच वष, ग्यारह रंग वाले
चत्र — उनम से कोई भी बात अपने संवाद म डाल सकते ह।
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पाठ से आगे — पृष्ठ 169–170
पाठ क बात को अपने आस-पास क दु नया से जोड़ने वाले काम
पाठ से आगे
प्र.1 इस चत्र म क्या दखाया गया है? अपने घर या आस-पड़ोस म आपने कभी कसी को ऐसा करते दे खा है? कक्षा म
अपने-अपने अनुभव साझा क जए।
चत्र म क्या-क्या दखता है
एक नद या तालाब, जसम दो लोग कमर तक पानी म खड़े ह।
दाईं ओर लाल चुनरी ओढ़े एक स्त्री है। उसने दोन हाथ ऊपर उठाकर एक लोटा पकड़ा है और उसम से पानी क धार
गर रही है।
बाईं ओर सफ़ेद कुरता पहने एक पुरुष है। उसके हाथ म बाँस का एक सूप है, जसम फल और स ब्ज़याँ रखी ह।
दोन के बीच, पानी के उस पार क्ष तज पर एक लाल-सा गोल सूरज दख रहा है। पानी म उसक लाल परछाईं पड़
रही है।
पाठ के पृष्ठ 169 पर छपा रंगीन चत्र — इसे यहाँ शब्द म बताया गया है।
इस चत्र म लोग नद के जल म खड़े होकर सूय को जल चढ़ा रहे ह। इसे सूय को अ य दे ना कहते ह।
चत्र म क्या-क्या दखता है
एक नद या तालाब, जसम दो लोग कमर तक पानी म खड़े ह।
दाईं ओर लाल चुनरी ओढ़े एक स्त्री है। उसने दोन हाथ ऊपर उठाकर एक लोटा पकड़ा है और उसम से पानी क धार गर रही है।
बाईं ओर सफ़ेद कुरता पहने एक पुरुष है। उसके हाथ म बाँस का एक सूप है, जसम फल और स ब्ज़याँ रखी ह।
दोन के बीच, पानी के उस पार क्ष तज पर एक लाल-सा गोल सूरज दख रहा है। पानी म उसक लाल परछाईं पड़ रही है।
पाठ के पृष्ठ 169 पर छपा रंगीन चत्र — इसे यहाँ शब्द म बताया गया है।
चत्र से जो बात पक्क दखती ह —
दोन लोग पानी म खड़े ह, कनारे पर नह ।
स्त्री ने लोटे से पानी क धार सूय क ओर गराई है।
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पुरुष के हाथ म फल और स ब्ज़य से भरा सूप है।
सामने डू बता या उगता हुआ लाल सूरज दख रहा है।
नमूना उत्तर: “हाँ, मने यह दे खा है। हमारे मोहल्ले म छठ पव मनाया जाता है। शाम को सब लोग तालाब के कनारे जाते ह। मेरी
मौसी पानी म खड़ी होकर सूरज को अ य दे ती ह। सूप म केला, ना रयल और ग ा रखा जाता है। सुबह उगते सूरज को फर से अ य
दया जाता है।”
यह चत्र यहाँ क्य है: पूरा पाठ बताता है क सूय से हम प्रकाश और गरमी मलती है। इसी लए हमारे दे श म लोग
सूय के प्र त आभार भी प्रकट करते ह। यह चत्र उसी का एक रूप दखाता है।
संकेत: अपना अनुभव बताते समय यह भी बताइए क वह कस त्योहार पर था, कस समय था और वहाँ क्या-क्या
रखा गया था।
प्र.2 सूय के प्रकाश के संपक म आने से शरीर को कौन-से लाभ होते ह? सहपा ठय के साथ चचा क जए।
यह कक्षा म मलकर बात करने का काम है। चचा म ये बात आनी चा हए —
लाभ आधार
सूय क करण से हम वटा मन डी मलता है। प ृ ठ 168 का वा य
ष् क्
स दय म धूप से शरीर को गरमाहट और आराम मलता है। प ृ ठ 154 — सुमन की नानी िदन भर धूप में रहती है ं
ष्
दन का उजाला मलता है, जसम हम पढ़ते और खेलते ह। पाठ की बातचीत
सूय के प्रकाश से हम सौर ऊजा मलती है। प ृ ठ 169
ष्
नमूना उत्तर: “स दय म हम छत पर धूप म बैठते ह। धूप से शरीर गरम रहता है और अ ा लगता है। पाठ म पढ़ा क सूय क
करण से हम वटा मन डी मलता है।”
पर एक सावधानी: धूप अ है, पर सूय क ओर सीधे दे खना नह चा हए। अध्यापक जी ने कहा है — “यह
आँख के लए ठ क भी नह है।” (पृष्ठ 159) दनेश के पताजी ने भी उसे यही मना कया था।
संकेत: बहुत तेज़ दोपहर क धूप म दे र तक खड़े मत र हए। सुबह क हल्क धूप सबसे अ मानी जाती है।
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प्र.3 दए गए चत्र को ध्यान से दे खए। यह चत्र सौर ऊजा का है। सौर ऊजा, सूय के प्रकाश से प्राप्त अक्षय (जो
समाप्त नह होती) ऊजा है। शक्षक के दशा- नदश म कक्षा को चार समूह म वभा जत क जए। सौर ऊजा के
बारे म जानकारी प्राप्त कर कक्षा म चाट पेपर पर प्रस्तुत क जए।
सूय की धूप छत पर लगी पि यों पर पड़ रही है
पाठ के पृष्ठ 169 पर छपा चत्र — एक घर, जसक ढलवाँ छत पर गहरे नीले रंग क चौकोर प याँ लगी ह। ऊपर सूरज
चमक रहा है और उसक करण छत पर पड़ रही ह।
यह समूह म करने वाला काम है। चत्र म एक घर दखाया गया है, जसक छत पर धूप से बजली बनाने वाली प याँ लगी ह।
सूय की धूप छत पर लगी पि यों पर पड़ रही है
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कक्षा 4 हद अध्याय 13 हमारा आ दत्य
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पाठ के पृष्ठ 169 पर छपा चत्र — एक घर, जसक ढलवाँ छत पर गहरे नीले रंग क चौकोर प याँ लगी ह। ऊपर सूरज चमक रहा है और
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उसक करण छत पर पड़ रही ह।
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mक जए — a
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काम इस तरह
la क सहायता से कक्षा को चार समूह म बाँट ली जए।
agशक्षक
1.
2. हर समूह एक-एक बात पर जानकारी जुटाए —
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समूह 1 — सौर ऊजा क्या है।
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ag-कहाँ ऐसी प याँ लगी दखती ह।
समूह 2 — यह कहाँ-कहाँ काम आती है (सौर लालटे न, सौर चूल्हा, सड़क क बत्ती, पानी गरम करना)।
समूह 3 — हमारे व ालय या गाँव म कहाँ
समूह 4 — इसका सबसे बड़ा लाभ क्या है।
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em.
3. चाट पेपर पर बड़े अक्षर म ल खए, एक चत्र बनाइए और कक्षा म सुनाइए।
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चाट म ये बात ज़रूर ह (नमूना उत्तर) —
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a g सौर ऊज
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• सूय के पकाश से िमलने वाली ऊज को सौर ऊज कहते है।
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• यह अक्षय है — यानी कभी समाप्त नही ं होती।
gl है।ं
• छत पर लगी पि याँ धूप से िबजलीaबनाती
• इससे ब ी जलती है, पंखा चलता है और पानी गरम होता है।
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• इसमें न धुआ ँ िनकलता है, न ईंधन खच होता है।
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agl ‘अक्षय’ का अथ: पुस्तक ने स्वयं कोष्ठक म बता दया है — “जो समाप्त नह होती”। कोयला और तेल एक दन
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खत्म हो सकते ह, पर धूप रोज़ मलती रहती है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 13 हमारा आ दत्य AglaSem · NCERT Solutions
प्र.4 (क) दए गए चत्र को ध्यान से दे खकर उत्तर द जए — इस चत्र म पाँच लगरांज बदु दखाए गए ह। आपके
वचार से हमारे वै ा नक ने आ दत्य यान के ापन के लए एल 1 बदु को क्य चुना होगा?
एल 4
सूय आिद त्य-एल 1
एल 1
एल 3 एल 2
पथ्ृ वी
एल 5
पाठ के पृष्ठ 170 पर छपा चत्र — बीच म सूय, उसके चार ओर एक बड़ा गोल पथ और उस पथ पर पृथ्वी। एल 1
से एल 5 तक पाँच बदु और आ दत्य-एल 1 क जगह दखाई गई है।
पहले चत्र दे खए। एल 1 वह बदु है जो सूय और पृथ्वी के ठ क बीच म पड़ता है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 13 हमारा आ दत्य AglaSem · NCERT Solutions
एल 4
सूय आिदत्य-एल 1
एल 1
एल 3 एल 2
पथ्ृ वी
एल 5
पाठ के पृष्ठ 170 पर छपा चत्र — बीच म सूय, उसके चार ओर एक बड़ा गोल पथ और उस पथ पर पृथ्वी। एल 1 से एल 5 तक पाँच बदु
और आ दत्य-एल 1 क जगह दखाई गई है।
एल 1 चुनने के कारण —
1. एल 1 सूय और पृथ्वी के बीच है। वहाँ से सूय हर समय सामने दखता रहता है। बीच म कोई रुकावट नह आती।
2. यह सूय से पयाप्त और सुर क्षत दूरी पर है, इस लए यान सूय क गरमी से जलता नह ।
3. इस बदु पर सूय और पृथ्वी क आकषण श क्तयाँ संतु लत रहती ह। इस लए यान अपनी जगह से हटता नह , ब ल्क पृथ्वी के
साथ-साथ सूय क प रक्रमा करता रहता है।
4. वह ठहरे रहने के कारण वह समय-समय पर सूय के अलग-अलग चत्र ले पाता है।
बाक बदु क्य नह : चत्र दे खए — एल 3, एल 4 और एल 5 पृथ्वी क कक्षा पर बहुत दूर-दूर ह, और एल 2 तो
पृथ्वी के पीछे पड़ता है। सूय पर नज़र रखने के लए सबसे सीधा और पास का रास्ता एल 1 ही है।
संकेत: प्रश्न म लखा है “आपके वचार से”। इसका अथ है क आपको चत्र दे खकर अपना कारण बताना है। कारण
चत्र और पाठ से मेल खाना चा हए।
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प्र.4 (ख) चत्र दे खकर बताइए क कौन-कौन से लगरांज बदु पृथ्वी क कक्षा (ऑ बट) पर ह?
एल 4
सूय आिद त्य-एल 1
एल 1
एल 3 एल 2
पथ्ृ वी
एल 5
पाठ के पृष्ठ 170 पर छपा चत्र — बीच म सूय, उसके चार ओर एक बड़ा गोल पथ और उस पथ पर पृथ्वी। एल 1
से एल 5 तक पाँच बदु और आ दत्य-एल 1 क जगह दखाई गई है।
पृथ्वी क कक्षा पर तीन बदु ह — एल 3, एल 4 और एल 5।
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एल 4
सूय आिदत्य-एल 1
एल 1
एल 3 एल 2
पथ्ृ वी
एल 5
पाठ के पृष्ठ 170 पर छपा चत्र — बीच म सूय, उसके चार ओर एक बड़ा गोल पथ और उस पथ पर पृथ्वी। एल 1 से एल 5 तक पाँच बदु
और आ दत्य-एल 1 क जगह दखाई गई है।
बदु चत्र म कहाँ है पृथ्वी क कक्षा पर?
एल 1 सूय और पृथ्वी के बीच नह
एल 2 पृथ्वी के पीछे , कक्षा के बाहर नह
एल 3 सूय के दूसरी ओर, कक्षा पर हाँ
एल 4 कक्षा पर, पृथ्वी से आगे ऊपर क ओर हाँ
एल 5 कक्षा पर, पृथ्वी से पीछे नीचे क ओर हाँ
कैसे पहचाना: चत्र म पृथ्वी जस बड़े गोल पथ पर है, वही उसक कक्षा है। उँ गली उस गोले पर घुमाइए — वह एल
3, एल 4 और एल 5 तीन से होकर गुज़रती है। एल 1 उस गोले के भीतर है और एल 2 उससे बाहर।
संकेत: ‘कक्षा’ शब्द के यहाँ दो अथ ह। पढ़ाई वाली कक्षा अलग है; यहाँ कक्षा का अथ है — वह गोल रास्ता जस
पर पृथ्वी सूय के चार ओर घूमती है। पुस्तक ने कोष्ठक म ‘ऑ बट’ लखकर यही स्पष्ट कया है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 13 हमारा आ दत्य
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पुस्तकालय या अन्य ोत से — पृष्ठ 170
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पुस्तकालय, अ भभावक और अन्य ोत से जानकारी जुटाने वाले काम
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s e m ोत से
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पु स्तकालय या अन्य
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व ालय के पुस्तकालय से सूय के वषय म और अ धक जानकारी प्राप्त क जए।
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प्र.1
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यह आपको स्वयं करना है। नीचे तरीका दया है। a
कैसे खोज —
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1. पुस्तकालय म वज्ञान और अंत रक्ष वाली अलमारी दे खए।
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2. बाल-प त्रकाओं म “सूय”, “तारे”, “अंत रक्ष” शीषक वाले लेख दे खए।
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gl4. जो नई बात मले, उसे अपनी लेखन-पु स्तका म ल खए और नीचे पुस्तक का नाम भी ल खए।
3. पुस्तकालय अध्यापक से क हए क सूय पर कोई सरल चत्र-पुस्तक दखा द।
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अपनी पु स्तका म ऐसा प ा बनाइए (नमूना उत्तर) —
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मने क्या जाना
l a se कहाँ से
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सूय एक तारा है और बहुत गरम है। वीणा, पाठ 13, प ृ ठ 154
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वीणा, पाठ 13, प ृ ठ 155 com
सूय हाइ ोजन और ही लयम गैस का वशाल गोला है।
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co m g l aकीsपु तक का नाम)
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……………………………… (पु तकालय
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a g l ोत लखना क्य ज़रूरी है: इससे पता रहता है क बात कहाँ से ली गई। पुस्तक ने भी पृष्ठ 159 पर चत्र के नीचे
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लखा है — “इसरो से साभार”।
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प्र.2
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सूयग्रहण क्य लगता है? इस अवसर पर कहाँ-कहाँ मेले लगते ह? इस वषय म अपने व ालय के पुस्तकालय,
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अ भभावक और अन्य ोत से जानकारी प्राप्त कर सहपा ठय से साझा क जए।
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s e mइसके दो भाग ह। पहला भाग पुस्तकालय से मलेगा, दूसरा भाग घर के बड़ से।
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1. सूयग्रहण क्य लगता है — चलते-चलते कभी चंद्रमा सूय और पृथ्वी के ठ क बीच म आ जाता है। तब वह सूय को हमारी आँख
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से ढक लेता है। कुछ दे र के लए दन म ही अँधेरा-सा हो जाता है। इसी को सूयग्रहण कहते ह।
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2. मेले कहाँ-कहाँ लगते ह — यह आपको पता करना है। पाठ म कसी जगह का नाम नह दया गया है, इस लए इसका उत्तर
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अपने बड़ या पुस्तकालय से पूछकर ही ल खए।
agl ना उत्तर) —
पूछने के लए प्रश्न बना ली जए (नमू
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1. “क्या आपने कभी सूयग्रहण दे खा है? कब दे खा था?”
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2. “हमारे यहाँ ग्रहण के दन लोग क्या करते ह?”
3. “ग्रहण के अवसर पर कस नद या तीथ पर मेला लगता है?”
बहुत ज़रूरी सावधानी: सूयग्रहण को भी खुली आँख से मत दे खए। अध्यापक जी क बात याद र खए — “सूय
को कभी भी प्रत्यक्ष दे खने का प्रयास मत करना ब ो।” (पृष्ठ 159) ग्रहण दे खना ही हो तो बड़ के साथ और वशेष
चश्मे से ही दे खए।
यह प्रश्न इस पाठ म क्य : पूरा पाठ बताता है क सूय से जुड़ी बात रहस्य जैसी लगती ह। पर जाँचने और पूछने पर
हर रहस्य का कारण मल जाता है। यही वैज्ञा नक का काम है।
मेरी चत्रकारी — पृष्ठ 171
कल्पना से चत्र बनाकर रंग भरने का काम
मे री चत्रकारी
प्र.1 भ वष्य म जब आप वै ा नक बनकर कसी ग्रह क यात्रा करगे तो आपका यान कैसा होगा? उसका एक चत्र
अपनी कल्पना से तैयार क जए और उसम रंग भ रए —
यह चत्र आपको स्वयं बनाना है। पुस्तक म इसके लए एक खाली चौखट द गई है।
चत्र बनाने के चरण —
1. पहले प सल से यान का बड़ा-सा ढाँचा बनाइए।
2. उसम खड़ कयाँ बनाइए, जनसे आप बाहर दे ख सक।
3. दोन ओर धूप लेने वाले पंख बनाइए — जैसे पृष्ठ 168 के चत्र म आ दत्य-एल 1 के ह।
4. नीचे आग क लपट बनाइए, जनसे यान ऊपर जाता है।
5. पीछे का आकाश गहरा नीला या काला रं गए और उसम छोटे -छोटे तारे बनाइए।
6. अंत म यान पर अपना नाम ल खए।
नमूना चत्र —
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मेरा अंतिरक्ष यान
नमूना चत्र — कल्पना से बनाया गया एक अंत रक्ष यान, जसम दो खड़ कयाँ, दोन ओर धूप लेने वाले पंख और नीचे आग क लपट ह।
यह काम यहाँ क्य है: पाठ के अंत म द पक और सुमन दोन कहते ह क वे बड़े होकर अंत रक्ष वैज्ञा नक बनगे और
अपना यान बनाएँगे। अध्यापक जी कहते ह — “आप बहुत अ े वैज्ञा नक बनगे, मुझे पूरा व ास है।” यह चत्र
उसी सपने को कागज़ पर उतारना है।
संकेत: चत्र के नीचे दो पं क्तयाँ भी ल खए — आपका यान कस ग्रह पर जाएगा और वहाँ आप क्या दे खना
चाहगे।
हम सब सुमन एक उपवन के — पृष्ठ 172
पाठ 13 के बाद द गई क वता (क व — ा रका प्रसाद माहेश्वरी)। पुस्तक इस क वता के साथ कोई अभ्यास नह दे ती; ये प्रश्न अभ्यास के लए
जोड़े गए ह।
क वता
प्र.1 क वता म क व हम सबको क्या कहता है? ‘सुमन’ और ‘उपवन’ का अथ भी ल खए।
क व हम सबको एक ही बगीचे के फूल कहता है।
“हम सब सुमन एक उपवन के ।”
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कक्षा 4 हद अध्याय 13 हमारा आ दत्य AglaSem · NCERT Solutions
शब्द अथ
सुम न फू ल
उपवन बगीचा, बाग़
क व का भाव: उपवन का अथ यहाँ हमारा दे श है और सुमन का अथ है हम सब लोग। जैसे एक ही बगीचे म अलग-
अलग रंग के फूल खलते ह, वैसे ही एक ही दे श म अलग-अलग तरह के लोग रहते ह।
संकेत: ‘सुमन’ पाठ 13 म एक व ाथ का नाम भी है। यहाँ उसी शब्द का दूसरा अथ — फूल — काम म आया है।
पृष्ठ संख्या क एक गड़बड़ी: पुस्तक क वषय-सूची म इस क वता के आगे 173 लखा है। पर पाठ 13 पृष्ठ 154
से शुरू होकर पृष्ठ 171 (मेरी चत्रकारी) पर समाप्त होता है, और उसके ठ क अगले प े पर यह क वता छपी है।
क वता वाले प े पर पृष्ठ संख्या छपी ही नह है, इस लए वह असल म पृष्ठ 172 बनता है।
प्र.2 “एक हमारी धरती सबक / जसक म म जन्मे हम, / मली एक ही धूप हम है / स चे गए एक जल से हम।”
इन पं क्तय का अथ अपने शब्द म ल खए।
सरल अथ: हम सबक धरती एक ही है। हम सब इसी म म जन्मे ह। हम सब पर एक ही सूरज क धूप पड़ती है। हम सब एक ही
जल से स चे गए ह।
क व क्या चत्र बना रहा है: क व हम बगीचे के पौधे मान रहा है। एक ही क्यारी क म , एक ही धूप और एक ही पानी — फर
भेद कैसा?
क वता क बात उसका अथ
एक धरती हम सबका दे श एक है
एक धूप सूरज सबको बराबर िमलता है
एक जल निदयों का पानी सबके िलए है
सीख: जब सब कुछ एक ही है, तो हम आपस म मलकर रहना चा हए।
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कक्षा 4 हद अध्याय 13 हमारा आ दत्य AglaSem · NCERT Solutions
प्र.3 “रंग-रंग के रूप हमारे / अलग-अलग है क्यारी-क्यारी, / ले कन हम सबसे मलकर ही / है उपवन क शोभा
सारी।” क व यहाँ क्या समझाना चाहता है?
क व समझाना चाहता है क हमारा अलग-अलग होना ही हमारी सुंदरता है।
सरल अथ: हम सबके रंग और रूप अलग-अलग ह। हम अलग-अलग क्या रय म खले ह। फर भी बगीचे क सारी शोभा हम
सबके मलने से ही बनती है।
कैसे समझ: एक ही रंग के फूल वाला बगीचा जल्द बोर कर दे ता है। लाल, पीले, सफ़ेद — सब रंग साथ ह तो
बगीचा सुंदर लगता है। हमारे दे श म भी भाषा, पहनावा और खान-पान अलग-अलग है, पर सब मलकर ही दे श सुंदर
बनता है।
संकेत: क वता के साथ छपे चत्र को दे खए। उसम अलग-अलग पहनावे वाले छह ब े हाथ म हाथ डालकर चल रहे
ह। चत्र भी यही बात कह रहा है।
प्र.4 “सूरज एक हमारा, जसक / करण उर क कली खलात ” — इस क वता का पाठ ‘हमारा आ दत्य’ से क्या
संबंध है?
दोन म सूरज क बात है, पर तरीका अलग है।
पाठ ‘हमारा आ दत्य’ क वता ‘हम सब सुमन एक उपवन के’
सूर ज क्या है एक तारा, जो बहुत गरम है सबका साझा सूरज, जो सबके मन िखलाता है
बात कै से कही गई बातचीत (संवाद) के रूप म किवता के प में
रू
मुख्य बात सूय के रहस्य और आ दत्य-एल 1 आपस में िमलकर रहना
पं क्त का सरल अथ: सूरज हम सबका एक ही है। उसक करण हमारे हृदय (उर) क कली को खला दे ती ह, यानी मन को खुश
कर दे ती ह।
संबंध: पाठ बताता है क सूरज सबको प्रकाश और गरमी दे ता है। क वता उसी बात को आगे बढ़ाती है — सूरज
कसी एक का नह , सबका है। वह कसी म भेद नह करता, इस लए हम भी भेद नह करना चा हए।
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“काँट म खलकर हम सबने / हँस-हँसकर है जीना सीखा” — इससे हम क्या सीख मलती है?
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a l है क क ठनाइय के बीच भी हँसते हुए जीना चा हए।
सीखgयह
सरल अथ: फूल काँट के बीच खलता है, फर भी मुरझाता नह । वह हँसता हुआ खला रहता है। हम भी वैसे ही रहना चा हए।
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आगे क व कहता है —
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“एक सूत्र में बँधकर हमने a
हार गले का बनना सीखा।”
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इसका अथ है — अलग-अलग फूल एक धागे म बँधकर सुंदर माला बन जाते ह। इसी तरह हम सब मलकर रह तो दे श क शोभा
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बनते ह।
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दो सीख एक साथ: पहली — दुख म भी हम्मत मत हारो। दूसरी — अकेले रहने से अ ा है मलकर रहना।
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अकेला फूल केवल फूल है; बहुत फूल मल तो माला बन जाती है।
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संकेत: ‘सूत्र’ का अथ है धागा। मालाag l के लए धागा चा हए ही होता है।
बनाने
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इस क वता के क व कौन ह? क वता म से तुक मलने वाले (तुकांत) शब्द के कोई तीन जोड़े छाँटकर ल खए।
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इस क वता के क व ह — ा रका प्रसाद माहेश्वरी। उनका नाम क वता के अंत म छपा है।
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तुक मलने वाले शब्द के जोड़े —
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यारी – सारी “अलग-अलग है क्यारी-क्यारी” / “है उपवन क शोभा सारी”
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िखलाती ं – नहलाती
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“ करण उर क कली खलात ” / “ जसक हम सबको नहलाती”
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e m सीखा – सीखा
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“हँस-हँसकर है जीना सीखा” / “हार गले का बनना सीखा”
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पवन के – गगन के – गुंजन के
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हर अंतरा इन्ह जैसे शब्द पर समाप्त होता है
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तुक क्या होती है: जब दो पं क्तय के अं तम शब्द क आवाज़ मलती-जुलती हो, तो उसे तुक कहते ह। तुक के
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कारण क वता गाने जैसी लगती है और जल्द याद हो जाती है।
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कक्षा 4 हद अध्याय 13 हमारा आ दत्य AglaSem · NCERT Solutions
ध्यान द जए: हर अंतरा “…एक पवन के”, “…एक गगन के”, “…मीठे गुंजन के”, “…धनी- नधन के” पर खत्म
होता है। ये सब क वता क पहली पं क्त “हम सब सुमन एक उपवन के” से तुक मलाते ह।
अध्याय — एक नज़र म
पछली कक्षा म ब ने चाँद और चंद्रयान के बारे म पढ़ा था। आज अध्यापक सूय क बात छे ड़ते ह।
ब े अलग-अलग बात कहते ह। अध्यापक बताते ह क सूय एक तारा है और बहुत अ धक गरम है।
सूय मुख्य रूप से हाइ ोजन और ही लयम नाम क गैस का एक वशाल गोला है।
‘आ दत्य’ का अथ है सूय। कक्षा के भास्कर, दनेश और र व — तीन नाम का अथ भी सूय ही है।
आ दत्य-एल 1 का प्रक्षेपण 2 सतंबर 2023 को इसरो ने कया। यह एल 1 (लगरांज 1) बदु पर रुककर सूय के चत्र भेजता
है।
इस यान ने सूय के ग्यारह रंग वाले चत्र भेजे ह। ब े बड़े होकर अंत रक्ष वैज्ञा नक बनना चाहते ह।
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कक्षा 4 हद अध्याय 13 हमारा आ दत्य AglaSem · NCERT Solutions
त्व रत पुनरावृ त्त
शब्द अथ पाठ म कहाँ आया पृष्ठ
आ दत्य सूय “आ दत्य का अथ है — सूय।” 156
भास्कर सूय का एक और नाम “इसका एक अन्य नाम ‘भास्कर’ भी है।” 156
तारा आकाश में अपनी चमक से िदखने वाला िपंड “उत्तम! सूय एक तारा है।” 154
हाइ ोजन, दो गैसे ं, िजनसे सूय बना है “सूय मुख्य रूप से हाइ ोजन और ही लयम नाम क 155
ही लयम गैस का एक वशाल गोला है।”
रहस्य िछपी हुई बात, जो अभी पता नही ं “जैसे चंद्रमा के रहस्य ह, ठ क उसी प्रकार सूय के भी 156
रहस्य ह।”
आ दत्य-एल 1 सूय का अध्ययन करने वाला भारत का अंतिरक्ष यान “हमारे वैज्ञा नक ने आ दत्य-एल 1 का नमाण कया 156
है।”
एल 1 (लगरांज अंतिरक्ष का वह िविशष्ट स्थान, जहाँ सूय और पथ्ृ वी की “एल 1 अथात् लगरांज 1 बदु अंत रक्ष का एक व शष्ट 157
1) आकषण शिक्तयाँ संतिु लत होती है ं ान होता है…”
लगरांज 18वी ं सदी में इटली का एक गिणतज्ञ “‘लगरांज’ 18व सद म इटली का एक ग णतज्ञ था…” 158
इसरो हमारे दे श का अंतिरक्ष अनुस ंध ान संग ठन “…अंत रक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने कया था।” 158
प्रक्षेपण अंतिरक्ष में छोड़ना या भेजना “आ दत्य-एल 1 का प्रक्षेपण 2 सतंबर 2023 को…” 158
कौतूहल जानने की तेज़ इच्छा “(एक साथ कौतूहल से) आ दत्य-एल 1!” 156
अक्षय जो कभी समाप्त नही ं होती “सौर ऊजा, सूय के प्रकाश से प्राप्त अक्षय (जो समाप्त 169
नह होती) ऊजा है।”
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