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Board Of School Education Haryana
मॉडल पेपर
उत्तर
2025
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ह रयाणा व ालय श ा बोड , भवानी
अंक योजना
क ा - यारहव वषय - हद ऐ क
समय - 3 घंटे कु ल अंक - 80
सामा य नदश :-
1) अंक योजना का उ े य मू यांकन को अ धका धक व तु न बनाना है।
2) वणना मक के अंक योजना म दये गये उ र ब अं तम नह है,
ब क सुझावा मक एवम् सांके तक ह।
3) य द परी ाथ इन सांके तक ब से भ कतु उपयु उ र द तो उ ह अंक दए जाएँ।
4) मू यांकन काय नजी ा यानुसार नह ब क अंक योजना म दए गए नदशानुसार ही कया
जाए।
उ र संकेत / मू य ब अंक
सं या उपभाग वभाजन
खंड - क
1. (i) (घ) क और ख दोन 1
(ii) (घ) उपरो सभी 1
(iii) (ग) क और ख दोन 1
(iv) (क) यु वीरता 1
(v) (क) साहसपूण आन द क उमंग को 1
2. (i) (घ) च ांत कर अंट- संट बकने पर मजबूर कर सकते ह। 1
(ii) (घ) इंसान के गुण, तभा व वशेषताएँ आज क तम 1
गौण हो गये ह।
(iii) 1
(ख) शोषण के व ।
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(iv) (क) आंकड़े इतने अ धक थे क दमाग उ ह वीकार नह कर 1
रहा था।
(v) 1
(ख) तादाद ारा ज नत उ ज
े ना ाणनाशक हो सकती है।
खंड - ख
3. (i) (ख) सपाही। 1
(ii) (घ) कसी को भरपेट भोजन न मलने के ख के कारण। 1
(iii) (क) उसके हँसने के कारण। 1
(iv) (घ) उपरो सभी। 1
(v) (ख) लेखक थे। 1
4. (i) हा मद ने चमटे क उपयो गता को स करने के लए 2
न न ल खत तक दए-
(क) खलौने ज द न हो जाते ह मगर चमटे का कु छ नह
बगड़ेगा। यह चलता रहेगा।
(ख) दाद चमटा दे खकर उसको लाख आएँ दे ग । उसे नेह
से गले से लगा लेग और लोग के पास उसक तारीफ करेग ।
(ग) गम , सद , बा रश इ या द म इसका कु छ नह बगड़ेगा।
(घ) चमटे का योग कई प म हो सकता है। यह खलौने के
प म, रो टयाँ सेकने के लए तथा हाथ म मजीरे के समान
योग म लाया जा सकता है।
(ii) अ धकार अपन व से उपजता है। चमेली उसे दया करके अपने 2
पास रख लेती है ले कन गूगँ ा उसे अपन व समझता है। वह
उससे अ धकार चाहता है।
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(iii) मुंशी जी क त स े री समझती है। घर क आ थक 3
त खराब है। बड़ा लड़का नौकरी के लए मारा-मारा फरता
है। अतः मुंशी जी वयं घर क त पर बात करने से कतराते
ह। उन दोन के म य त को सामा य करने के लए
स े री असंबं बात करती है, जो कहानी से संबं बनाए
रखने म सहायता करती ह।
(iv) उसका सर हमालय, माथे क दोन गहरी रेखाएँ गंगा और 3
यमुना, नाक व याचल, ठोढ़ क याकु मारी, झु रयाँ-रेखाएँ पहाड़
और न दयाँ तथा बाएँ कं धे पर लहराते ए बाल बमा है।
5. (i) भारतवष क उ त कै से हो सकती है। भारत ह र ं । 1
(ii) जसम दे श काल के अनुसार शोधन और बदलाव कया जा 1
सके ।
(iii) 1
जो बात दे श और काल के अनुकूल और उपकारी ह , उनको
हण
(iv) हण कर लेना चा हए। 1
(v) अंध व ास, वधवा ववाह और बाल ववाह। 1
नए नए धम बनाकर शा म धर दए।
खंड- ग
6. (i) (घ) नगुण का धारा 1
(ii) (ग) गरीबी 1
(iii) (ग) वे वयं खेलना चाहते थे 1
(iv) (ग) आकाश 1
(v) (क) पतनशील और सामंती व ा पर 1
7. संग व संदभ : कबीर। कबीर के पद 5
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ा या : धा मक पथ ता, कु री तय , आडंबर और गुण
पर हार ।
का स दय : शांत रस, साद गुण, सधु कड़ी भाषा,
तुका तता और गेयता ।
अथवा
संग व संदभ : नागाजुन । बादल को घरते दे खा है।
ा या : ूल प से कृ त च ण करना है साथ ही दे श पर
छाए उन संकट के बादल से जनता को आगाह करना जो
तीय व यु के प म दे श को घेरने वाला है।
का स दय : खड़ी बोली, सं कृ त न त सम श दावली।
8 (i) नंद उनके पता है। अतः पता का नाम लेकर वह झूठ नह 2
बोलगे और सब उनक बात मान जाएँग।े
(ii) लाला अपनी छोट एवं संकु चत कान को दे खकर वह वयं 2
को दयनीय, खी और अपमा नत अनुभव करता है। वह
सोचता था क वह थोड़ी-सी आय के लए बात-बात म झूठ
बोलता है तथा अपने ही वग के साथ त धा के कारण अपने
जीवन को तबाह कर रहा है।
(iii) घर म गरीबी भरी है।सभी सद य एक- सरे का सामना करने से 3
बच रहे ह।
(iv) क तूरी मृग को इस स य का भान ही नह होता है क गंध 3
उसक ना भ म ा त क तूरी से आती है। जब वह ढूँ ढ़-ढूँ ढ़कर
थक जाता है, तो उसे अपने पर ही चढ़ हो जाती है। वह अपनी
असमथता के कारण परेशान हो उठता है।
खंड- घ
9. (i) प टग से उसका यार इतना अ धक है क हसाब क कताब म 2
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दस पये लखता है तो ाइंग क कॉपी म बीस च बना लेता
है I
(ii) कला के त लोग का नज़ रया अब ब त बदला है। अब लोग 2
कला क क अ धक करते ह। ऐसा नह है क पहले लोग कला
क क नह करते थे। ले कन पहले यह एक वग तक सी मत
था।
(iii) उ ह ने अपने जीवन म जो भोगा, जन लोग को पाया, जो 3
अनुभव ा त कया उसे अपनी रचना म उतार डाला। ये
ऐसा ववरण है, जनसे हम शरत् के जीवन का प रचय मल
जाता है।
खंड- ड़
10. (i) एनको डग' का अथ है कसी वचार को करने के लए 1
तीक का उपयोग करना ।
(ii) मी डया को लोकतं का चौथा तंभ कहा जाता है । 1
(iii) ऐसी कथा जो परदे पर दखाई जाए या जो परदे पर दखाने के 1
लए ही लखी जाए 'पटकथा' है ।
(iv) पूव म लखे गये कसी प क अनुपालना न होने पर प ा त 1
करने वाले को ेषक क ओर से पुनः मरण कराने के लए
अनु मारक प लखने क आव यकता पड़ती है।
(v) डायरी लेखन ग सा ह य क एक मुख वधा है। 1
11. (i) संचार के बु नयाद त व म ेषक, ा तकता,संदेश,मा यम और 3
संभा वत त या शा मल ह।
(ii) व ानकोश का अथ है व के सम त ान का भंडार। अत: 2
व ानकोश वह कृ त है जसम ान क सभी शाखा का
स वेश होता है।
12. येक य के साथ होने वाली घटना के समय का 5
संकेत भी दया जाना चा हए।
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पा क ग त व धय के संकेत येक य के ारंभ म
दे ने चा हए। जैसे-रजनी चपरासी को घूर रही है,
चपरासी मज़े से टू ल पर बैठा है। साहब मेज़ पर
पेपरवेट घुमा रहा है। फर घड़ी दे खता है।
कसी भी य का बँटवारा करते समय यह यान रखा
जाए क कन आधार पर हम य का बँटवारा कर रहे
ह।
येक य के साथ होने क सूचना दे नी चा हए।
येक य के साथ उस य के घटना ल का
उललेख अव य करना चा हए; जैसे-कमरा, बरामदा,
पाक, बस टड, हवाई अ ा, सड़क आ द।
पा के संवाद बोलने के ढं ग के नदश भी दए जाने
चा हए; जैसे-रजनी (अपने म ही भुनभुनाते ए)।
येक य के अंत म डज़ॉ व, फ़े ड आउट, कटटू जैसी
जानकारी आव य दे नी चा हए। इससे नदशक, अडीटर
आ द नमाण काय म लगे ए य को ब त
सहायता मलती है।
अथवा
ववृत क वशेषताएँ :
ववृ म ईमानदारी होनी चा हए।
कसी भी कार के झूठे दावे या अ तशयो से
बचना चा हए।
अपने व, ान और अनुभव के सबल
पहलु पर जोर दे ना तो कभी भी नह भूलना
चा हए।
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खंड- च
13. (i) अ ह याबाई होळकर ने अपने रा य क सीमा के 2
बाहर भारत-भर के स तीथ और ान म म दर
बनवाए, घाट बँधवाए, कु और बाव ड़य का नमाण
कया ।
(ii) अ हसा, स य, अ तेय, चय, अप र ह । 2
(iii) म दर के नमाण का उ े य एक ऐसा म दर बनाना था 2
जसम अछू त स हत सभी लोग पूजा-अचना कर सक।
(iv) व ान म च होने के कारण सी वी रमन रमन भाव 2
क खोज कर पाए। पारदश पदाथ से गुजरने पर
काश क करण म आने वाले बदलाव पर क गई इस
खोज के लए सी वी रमन को भौ तक के नोबेल
पुर कार से स मा नत कया गया।
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