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Board Of School Education Haryana
मॉडल पेपर
उत्तर
2025
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ऄत्यंत गोपनीय के वल अंतररक एवं सीममत प्रयोग हेतु
ऄंक-योजना
मवषय हहदी (ऐमछिक)
कक्षा – बारहवीं
मवषय कोड संख्या -523
सामान्य मनदेश :-
1. परीक्षार्थथयों के सही और ईमित अकलन के मलए ईत्तर पुमततकाओं का मूलयांकन एक महत्वपूणण प्रक्रिया
है। मूलयांकन में एक िोटी-सी त्रुरट भी गंभीर समतया को जन्म दे सकती है, जो परीक्षार्थथयों के
भमवष्य, मशक्षा प्रणाली और ऄध्यापन-व्यवतथा को भी प्रभामवत कर सकती है। आससे बिने के मलए
ऄनुरोध क्रकया जाता है क्रक मूलयांकन प्रारं भ करने से पूवण ही अप मूलयांकन मनदेशों को पढ़ और समझ
लें।
2. योग्यता अधाररत प्रश्नों का मूलयांकन करते समय कृ पया क्रदए गए ईतरों को समझे, भले ही ईत्तर
मार्ककग तकीम में न हो, िात्रों को ईनकी योग्यता के अधार पर ऄंक क्रदए जाने िामहए।
3. ऄंक योजना में ईत्तरों के मलए के वल सुझाए गए मान हबदु होते हैं। ये के वल क्रदशा-मनदेशों की प्रकृ मत के
हैं और पूणण नहीं हैं। यक्रद परीक्षार्थथयों की ऄमभव्यमि सही है तो ईसके ऄनुसार मनयत ऄंक क्रदए जाने
िामहए।
4. परीक्षक सही ईत्तर पर सही का मिह्न () लगाएँ और गलत ईतर पर गलत का () मूलयांकनकताण
द्वारा ये मिह्न न लगाने से ऐसा समझ में अता है क्रक ईत्तर सही है, परं तु ईस पर ऄंक नहीं क्रदए गए।
5. यक्रद क्रकसी प्रश्न के ईपभाग हो तो कृ पया प्रश्नों के ईपभागों के ईत्तरों पर दायी ओर ऄंक क्रदए जाएँ। बाद
में आन ईपभागों के ऄंकों का योग बायाँ और के हामशये में मलखकर ईसे गोलाकृ त कर क्रदया जाए।
6. यक्रद क्रकसी प्रश्न के कोइ ईपभाग न हो तो बायीं ओर के हामशये में ऄंक क्रदए जाएँ और ईन्हें गोलाकृ त
क्रकया जाए।
7. यक्रद परीक्षाथी ने क्रकसी प्रश्न का ईत्तर दो तथानों पर मलख क्रदया है और क्रकसी को काटा नहीं है तो मजस
ईत्तर पर ऄमधक ऄंक प्राप्त हो रहे हो, ईस पर ऄंक दें और दूसरे को काट दें। यक्रद परीक्षाथी ने ऄमतररि
प्रश्न/प्रश्नों का ईत्तर दे क्रदया है तो मजन ईत्तरों पर ऄमधक ऄंक प्राप्त हो रहे हो, ईन्हें ही तवीकार करे ,
ईन्हीं पर ऄंक है।
8. एक ही प्रकार की ऄशुमि बार-बार हो तो ईसे ऄनदेखा करें और ईस पर हर बार ऄंक न काटे जाएँ।
9. यहाँ यह ध्यान रखना होगा क्रक मूलयांकन में पूणण ऄंक पैमाना 0-80 (ईदाहरण 0-80 ऄंक जैसा क्रक
प्रश्न में क्रदया गया है) का प्रयोग ऄभीष्ट है, ऄथाणत परीक्षाथी ने यक्रद सभी ऄपेमक्षत ईत्तर-हबदुओं का
ईललेख क्रकया है तो ईसे पूरे ऄंक देने में संकोि न करें ।
10.ये सुमनमित करें क्रक ईत्तर पुमततका के ऄंदर क्रदए गए ऄंकों का अवरण के ऄंकों के साथ ममलान हो।
11.अवरण पृष्ठ पर दो ततंभों के ऄंकों का योग जाँि लें ।
12.ईत्तर पुमततकाओं का मूलयांकन करते हुए यक्रद कोइ ईत्तर पूणण रूप से गलत हो तो ईस पर (x) मनशान
लगाएँ और शून्य (0) ऄंक दें।
13.ईत्तर पुमततका में क्रकसी प्रश्न का मबना जाँिे हुए िू ट जाना या योग में क्रकसी भूल का पता लगना,
मूलयांकन समममत के सभी लोगों की िमव को और बोडण की प्रमतष्ठा को धूममल करता है। परीक्षक
सुमनमित करें क्रक सभी ईत्तरों का मूलयांकन हुअ है। अवरण पृष्ठ पर तथा योग में कोइ ऄशुमि नहीं रह
गइ है तथा कु ल योग को शब्दों और ऄंकों में मलखा गया है।
ईपयुणि मूलयांकन मनदेश ईत्तर-पुमततकाओं की जाँि हेतु अदेश नहीं ऄमपतु के वल मनदेश हैं। यक्रद
आन मूलयांकन मनदेशों में क्रकसी प्रकार की त्रुरट हो, क्रकसी प्रश्न का ईत्तर तपष्ट न हो, ऄंक योजना में
क्रदए गए ईत्तर से ऄमतररि कोइ और भी ईत्तर सही हो, तो परीक्षक ऄपने मववेकानुसार ईस प्रश्न का
मूलयांकन करे । ऄंक-योजना
मवषय हहदी (ऐमछिक)
मवषय कोड संख्या -523
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कक्षा : बारहवीं ऄमधकतम ऄंक 80
सामान्य मनदेश :-
1. ऄंक योजना का ईद्देश्य मूलयांकनको ऄमधकामधक वततुमनष्ठ बनाना है।
2. वणणनात्मक प्रश्नों के ऄंक योजना में क्रदए गए ईत्तर हबदु ऄंमतम नहीं है बमलक ये सुझावात्मक एवम्
सांकेमतक हैं।
3. यक्रद परीक्षाथी आन सांकेमतक हबदुओं से मभन्न , क्रकन्तु ईपयुि ईत्तर है, तो ईन्हें ऄंक क्रदए जाएँ।
4. मूलयांकन कायण मनजी व्याख्या के ऄनुसार नहीं बमलक ऄंक योजना में क्रदए गए मनदेशानुसार ही
क्रकया जाए।
प्रश्न प्रश्न ईपभाग ईत्तर संकेत/ मुख्य हबदु मनधाणररत ऄंक
संख्या मवभाजन
1 1x5=5
ख) प्रकृ मत पर 1
ग) क और ख दोनों सही हैं 1
I.
ख) प्रकृ मत पहले 1
II.
ख) मवज्ञान के ईद्यमशीलता के बल पर
घ) ईपयुणि सभी
1
III. 1
IV. .
/
2 1x5=5
I. क)धीरज 1
II. क) राष्ट्र 1
III. घ) राष्ट्र भूमम 1
क) जीवन भर 1
IV.
1
V. . क) अकु ल
3 1x 5=5
I. (क) कपडा 1
(ख) ऄपना करतब क्रदखाया 1
II.
(क) व्यवतथा का
1
III. (घ) सृंगावली
IV. क) रामामगरी पर
1
V.
1
4 1x5=5
मन की ऄंतवृमत्तयां 1
परवश होने का ऄथण है खुशामद करना, दांत मनपोरना, िाटु काररता,
हां हजूरी। 1
I. वह वशी है वह बैरागी है
1
II. राजा जनक से
III. 1
IV. . पाठ का नाम -कु टज , लेखक – हजारी प्रसाद द्वववेदी 1
V.
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5 प्रश्नों के ईत्तर 3,3,2,2
क लेखक ने ऄपने मपता की मनम्नमलमखतमवशेषताओं का ईललेख क्रकया है : 3
– मपताजी फारसी के ऄछिे ज्ञाता थे।– वे पुरानी हहदी के बडे प्रेमी थे।
– ईन्हें फारसी कमवयों की ईमियों को हहदी कमवयों की ईमवतयों के
साथ ममलाने में बडा अनंद अता था।– वे रात के समय
‘रामिररतमानस’ और रामिंक्रिका’ ‘को घर के लोगों के सम्मुख
बडे मित्राकषणक ढंग से पढ़ा करते थे। – ईन्हें भारतेंद ु जी के नाटक बहुत
पसंद थे। – वे लेखक की पढ़ाइ को ध्यान में रखकर घर में अइ पुततकों
को मिपा देते थे।
प्रकृ मत के कारण मवतथापन ऄतथायी होता है। बाढ़ या भूकंप के कारण
लोग ऄपना घर-बार िोडकर कु ि समय के मलए जरूर बाहर जाकर
बस जाते हैं, पर मुसीबत के टलते ही वे दोबारा ऄपने पुराने पररवेश में
लौट अते हैं। औद्योगीकरण के कारण हुए मवतथापन में लोग क्रफर कभी
लौटकर ऄपने घर वापस नहीं अ पाते। ईनके घर टू ट िुके होते हैं,
जमीन पर कोइ ईद्योग तथामपत हो िुका होता है। ईसका पररवेश और
अवास-तथल हमेशा के मलए नष्ट हो जाते हैं।
बडी बहुररया ईस गाँव की लक्ष्मी थी। ऄपने गाँव की लक्ष्मी की दशा
दूसरे गाँव में जाकर सुनाना ईसे
ऄपमान लगा। ईसे यह सोिकर बहुत शमण अइ की ईसके गाँव की
लक्ष्मी आतने कष्ट झेल रही है और गाँव ऄब तक कु ि नहीं कर पाया।
ईनके रहते हुए ईनके गाँव की लक्ष्मी क्रकसी और गाँव से सहायता
माँग, े यह
तो गाँववालों के मलए डू ब मरने वाली बात है। ऄतः वह बडी बहुररया
का संवाद सुना नहीं सका।
‘कु टज’ हम सभी को ईपदेश देता है क्रक मवकट पररमतथमतयों में महम्मत
नहीं हारनी िामहए। हमें धीरज रखना िामहए और मवकट पररमतथमतयों
में ऄपने पररश्रम और शमि से काम लेना िामहए। यक्रद हम मनरं तर
प्रयास करते हैं, तो हम आन मवकट पररमतथमतयों को ऄपने अगे झुकने
के मलए मववश कर देते हैं। मवकट पररमतथमतयों से गुजरने वाला व्यमि
सोने के समान िमक कर मनकलता है। जो मवकट पररमतथमतयों को झेल
लेता है क्रफर ईसे कोइ मगरा नहीं सकता है।
ख 3
Page 5
ग
2
2
घ
6 1×5=5
I. घ) मालवा के राजा बंधु वमाण की बहन 1
क) सरोज
II. 1
ख) व्यमि का
III. क) सृजन के मलए 1
IV. ख) पुस 1
V. 1
7 सप्रसंग व्याख्या 5×1=5
प्रसंग 1
व्याख्या 3
काव्य -सौन्दयण 2
8 3,3,2,2
क सरोज के मववाह की ऄन्य मववाहों से मभन्नता- (i) सरोज का मववाह 3
ऄत्यंत सादगी से सम्पन्न हुअ। आसमें कोइ बडा समारोह अयोमजत नहीं
क्रकया गया।
) सरोज के मववाह में अर्थथक ऄभाव के कारण सगे -संबमधयों को
अमंमत्रत नहीं क्रकया गया था, जबक्रक ऄन्य मववाहों में सारे सगे-संबंधी
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बुलाए जाते हैं।
( मववाह में रात-क्रदन कभी मंगल गीत-गायन और राग-रं ग भरे
मनोरं जन कायणिम नहीं हुए। जबक्रक ऄन्य मववाहों में हातय-मवनोद भरे
ऄनेक मनोरं जक कायणिम होते हैं और मवमभन्न रतमों पर मंगल-गीत
गाए जाते हैं।) सरोज की माँ तवगण गइ थी, ऄतः मवदाइ के समय माँ के
द्वारा दी जाने वाली मशक्षाएँ ईसे मपता मनराला जी ने ही दी।
मववाह में पुष्प-सेज को सजाने का कायण ममहलाएँ करती हैं, परं तु
मातृमवहीन होने के कारण सरोज की पुष्प-सेज मपता द्वारा ही सजाइ
गइ।
माघ मास में शीत िरमसीमा पर होता है। ऄब पाला पडने लगता है।
क्रदरमहणी के मलए माघ मास के जाडे में मवरह को झेलना मृत्यु के समान
प्रतीत होता है। पमत के अए मबना माघ मास का जाडा ईसका पीिा
नहीं िोडेगा। ऄब मवरमहणी नामयका के मन में काम भाव ईत्पन्न हो रहा
है, ऄतः ईसे मप्रय-ममलन की आछिा हो रही है। माघ मास में वषाण भी
होती है। वषाण के कारण नामयका के कपडे गीले हो जाते हैं और वे बाण के
समान िुभते हैं। मवयोग के कारण न तो वह रे शमी वस्त्र पहन पा रही है
और न गले में हार पहन पाती है। मवरह में वह सूखकर मतनके की भाँमत
हो गइ है। मवरह ईसे जलाकर राख बनाकर ईडा देने पर तुला प्रतीत
होता है।
कमव के ऄनुसार ईसकी प्रेममका ईसकी ओर से
कठोर बनी हुइ है। वह न ईससे ममलने अती है और न ईसे कोइ संदश े ा
भेजती है। कमव कहता है क्रक वह मौन होकर देखना िाहता है क्रक
ईसकी प्रेममका कब
तक ईसकी ओर कठोर रहती है। वह बार-बार ईसे पुकार रहा है।
ईसकी पुकार को कब ईसकी प्रेममका ऄनसुना करती है, कमव यही
देखना िाहता है।
बनारस में वसंत का अगमन ऄिानक होता है। ईसके अगमन के समय
बनारस के मुहललों में धूल का बवंडर ईठता प्रतीत होता है। लोगों की
जीभ पर धूल की क्रकरक्रकराहट का ऄनुभव होने लगता है। यह वसंत ईस
वसंत से मभन्न प्रकार का होता है जैसा वसंत के बारे में माना जाता है।
यहाँ वह बहार नहीं अती है जो वसंत के साथ जुडी है। बनारस में तो
गंगा, गंगा के घाट तथा मंक्रदरों और घाटों के क्रकनारे बैठे मभखाररयों के
कटोरों में वसंत ईतरता प्रतीत होता है। आन तथानों पर भीड बढ़ जाती
है। मभखाररयों को ज्यादा भीख ममलने लगती है।
3
ख
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9 ऄंतराल भाग -2 के अधार पर प्रश्नों के ईत्तर 3,2,2
क धरती के तापमान में बढोत्तरी का सबसे प्रमुख कारण है – वातावरण
को गमण करने वाली गैसों का ऄमधक से ऄमधक ईत्सजणन | काबणन डाइ
ऑक्साआड , काबणन मोनो ऑक्साआड , क्लोरो-फ्लोरो काबणन अक्रद गैसे
पृथ्वी के तापमान को बढाती है | ये गैसें ऄमेररका और यूरूप के
मवकमसत देश सबसे ऄमधक मात्रा में ईत्सर्थजत करते हैं मजसके कारण
3
पृथ्वी के तापमान में तीन मडग्री सेमलसयस की बढोत्तरी हुइ है
भेरो सूरदास से बहुत नाराज है जब भेरो तथा ईसकी पत्नी के बीि में
लडाइ हुइ है तो नाराज सुभागी सूरदास के घर रहने िली गइ भेरो को
यह बात ऄछिी नही लगी थी सूरदास हताश सुभागी को बेसहरा नही
करना है ऄंत वह ईसे मना नही कर पाया था और ईसे ऄपने घर में रहने
क्रदया था भेरो के मलए यह बात ऄसहनीय है भेरो को सूरदास का यह
करना ऄपमान लगा था I
ईत्तरः गमी और लू से बिने के मलए मनम्नमलमखत ईपाय ऄपनाए जाते थे
:
(क) प्याज को धोती और कु ते में गाँठ लगाकर बांधा जाता था।
(ख) कच्चे अम को अग में पका कर ईसका शरबत बना कर मपया
जाता था।
ग)कच्चे अम को अग में पकाकर / तलकर या ईबालकर ईस से सर को
धोया जाता था।
घ)कच्चे अम को भुना जाता था और आसका शरबत गुड और िीनी के
साथ ममलाया जाता था।आसे शरीर पर लगाया जाला था और आससे स्नान
ख क्रकया जाता था।
2
प्याज बाँधने अम पन्ना पीने, भुने हुए अम से मसर धोने वाले ईपाय से
कहीं ना कहीं ऄमधक या कम लेक्रकन ऄवगत ती हँ पर शरीर पर लगाने
और नहाने वाला ईपाय मैंने ती न देखा है न सुना है।
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2
ग
10 क 1×5=5
I. 1556 , गोवा में 1
II. क्रकसी समािार संगठन के मलए एक मनमित मानदेय पर 1
मनमित काम करने वाला। 1
1
III.
IV.
V. ररपोटणर मजसकी रुमि क्रकसी मवशेष मुद्दे में होती है।
रीमडफ डाटकोम
ईलटा मपराममड शैली
11 3, 2
3
क्रकसी खास मवषय पर सामान्य लेखन से हटकर क्रकया गया लेखन मवशेष
लेखन कहलाता है. यह लेखन ऄखबारों, पमत्रकाओं, टीवी, और
रे मडयो िैनलों में होता है. मवशेष लेखन के मलए ऄलग डेतक और
पत्रकारों का समूह होता है.
मवशेष लेखन के ऄंतगणत ररपोर्टटग के ऄलावा मवशेष मवषय पर फीिर ,
रटप्पणी , साक्षात्कार , लेख , समीक्षा और ततंभ भी हैं।
भाषा, शैली, हबब, िंद, ऄलंकार, ऄनुप्रास, तवर-संगमत,
व्यंजन, अलंकाररक भाषा, तुकबंदी.
कमवता के बारे में कु ि और बातेंःः
कमवता, सामहत्य या कलात्मक लेखन का एक रूप है. 2
कमवता में लय, शब्द ियन, ध्वमन, तुकबंदी, और संरिना का
आततेमाल क्रकया जाता है.
कमवता का मकसद पाठक की भावनाओं को झकझोरना और सौंदयणभाव
को जागृत करना होता है.
कमवता में कमव ऄपनी वैयमिक सोि, दृमष्ट, और दुमनया को देखने के
नजररए को बयां करता है.
कमवता के कइ प्रकार हैं, मजन्हें तीन मुख्य शैमलयों में बांटा जा सकता
है. ये शैमलयां हैं – कथात्मक कमवता, नाटकीय कमवता, और
गीतात्मक कमवता.
12 ग मजस मवषय पर मलखना है लेखक को ईसकी संपूणण जानकारी होनी 5x1=5
िामहए। मवषय पर मलखने से पहले लेखक को ऄपने ममततष्क में ईसकी
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एक ईमित रूपरे खा बना लेनी िामहए। मवषय से जुडे तथ्यों से ईमित
तालमेल होना िामहए। मविार मवषय से सुसम्बि तथा संगत होने
िामहए। ऄप्रत्यामशत मवषयों के लेखन में 'मैं शैली का
प्रयोग करना िामहए। ऄप्रत्यामशत मवषयों पर मलखते समय लेखक को
मवषय से हटकर ऄपनी मवद्वता को प्रकट नहीं करना िामहए।
ऄथवा
नाटक और कहानी में ऄंतर-
कहानी में मित्रण होता है,नाटक मे मंिन होता है।
कहानी का संबंध मात्र लेखक और पाठक से होता है , जबक्रक नाटक का
संबंध पटकथा, पात्र, मनदेशक, दशणक, आमतहास से होता है।
कहानी कही व पढी जाती है, नाटक दशाणए जाते हैं, ईन्हें मित्रो व दृश्य मे
बांटा जाता है।
कहानी में मात्र पुततक या कथा कहने वालों की अवश्यकता होती है ,
ककतु नाटक में मंि, लाआट, पात्र, मेकऄप, ऄमभनेता, मनदेशक आत्याक्रद की
अवश्यकता होती है।
नाटक के दृश्यों की िाप ऄमधक समय तक दशणकों के ममततष्क पर रहती
है, कहानी ममततष्क पटल पर समय के साथ धुंधली पड जाती है।
13 क) 2x4=8
मदन लाल ढींगरा एक भारतीय िांमतकारी थे मजन्हें 17 ऄगतत 2
1909 को मात्र 24 वषण की अयु में मिरटश ऄमधकारी कजणन
वायली की हत्या के मलए फांसी पर लटका क्रदया गया था। वे एक
ऄमडग देशभि थे, ईनके पररवार ने ईनके मिरटश मवरोधी झुकाव
के कारण ईन्हें त्याग क्रदया था – आतना क्रक ईनकी मृत्यु के बाद भी
ईनके पररवार ने ईनका शव लेने से आनकार कर क्रदया।
ख)वह एक हहदू राजा था और ईसने पहले अक्रदल शाह सूरी (सूरी
वंश) के एक सामान्य और मुख्यमंत्री के रूप में कायण क्रकया था। ईसने
अक्रदल शाह सूरी के मलए ऄफगान मविोमहयों और हुमायूँ और ऄकबर
की मुगल सेना को हराकर 22 युि जीते थे। ईन्होंने क्रदलली पर
ऄमधकार करने के बाद ‘मविमाक्रदत्य’ की ईपामध धारण की।
2
ग) सरदार पटेल के जीवन से हमें यह सीख ममलती है क्रक ऄगर हम
दृढ़ता से क्रकसी ईद्देश्य की ओर प्रयास करें तो हम सफलता प्राप्त कर
सकते हैं।
गीता में अत्मा, परमात्मा, भमि, कमण, जीवन अक्रद का
वृहद रूप से वणणन क्रकया गया है. गीता से हमें यह ज्ञान ममलता है
क्रक व्यमि को के वल ऄपने काम और कमण पर ध्यान देना िामहए.
साथ ही कमण करते समय आस बात का ध्यान रखना िामहए क्रक हम
जो भी कमण कर रहे हैं, ईसका फल भी हमें मनमित ही प्राप्त
होगा.
.
2
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