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2025
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अभ्यास प्रश्न-पत्र
सत्र: 2024-25
कक्षा: दसवीं
शिषय: ह दिं ी (कोड-002)
अिशध: 3 घटिं े अशधकतम अंक: 80 अक
िं
सामान्य शिदेि:
निम्िलिखित निर्दे शों को ध्यािपर्
ू कव पढ़िए और उिका सख्ती से अिप
ु ािि कीजिए :
• इस प्रश्िपत्र में कुि 15 प्रश्ि हैं। सभी प्रश्ि अनिर्ायव हैं
• इस प्रश्िपत्र में कुि चार िंड हैं- क, ि, ग, घ ।
• िंड-क में कुि 2 प्रश्ि हैं, जििमें उप-प्रश्िों की संख्या 10 है ।
• िंड-ि में कुि 4 प्रश्ि हैं, जििमें उप-प्रश्िों की संख्या 20 है ।
ढर्दए गए निर्दे शों का पािि करते हुए 16 उप-प्रश्िों के उत्तर र्दे िा अनिर्ायव है ।
• िंड-ग में कुि 5 प्रश्ि हैं, जििमें उप-प्रश्िों की संख्या 20 है ।
• िंड-घ में कुि 4 प्रश्ि हैं, सभी प्रश्िों के साथ उिके वर्कल्प भी ढर्दए गए हैं ।
• प्रश्िों के उत्तर ढर्दए गए निर्दे शों का पािि करते हुए लिखिए।
• यथासंभर् चारों िंडों के प्रश्िों के उत्तर क्रमश: लिखिए।
प्रश्ि खंड-क अंक
संख्या (अपठित बोध) (14)
1. निम्िलिखित गदयांश को ध्यािपूर्क
व प़िकर पछ
ू े गए प्रश्िों के उत्तर लिखिए-
िािंर्दा वर्श्र्वर्दयािय भौगोलिक रूप से र्दक्षिण बिहार जथथत रािगीर के समीप है । इसके
ध्र्ंसार्शेष आि भी िडागााँर् तक फैिे हुए हैं। ऐसा मािा िाता है कक िािंर्दा वर्श्र्वर्दयािय की
थथापिा िौदध संन्यालसयों दर्ारा की गई थी, जििका मूि उदर्दे श्य एक ऐसे वर्श्र्वर्दयािय की
थथापिा करिा था िो ध्याि र् अध्यात्म के लिए उपयुक्त हो । ऐसा मािा िाता है कक महात्मा
िुदध िे िािंर्दा की कई िार यात्रा की थी। िहरहाि, इस वर्श्र्वर्दयािय का निमावण कि हुआ था
इसे िेकर वर्दर्ािों में एक राय िहीं है । िेककि ऐनतहालसक र्दथतार्ेजों से िािकारी लमिती है कक
इस वर्श्र्प्रलसदध वर्श्र्वर्दयािय की थथापिा गुप्तर्ंशी शासक कुमारगप्ु त िे की थी।
िािंर्दा वर्श्र्वर्दयािय के अधधकतर छात्र नतब्ितीय िौदध संथकृनतयों िज्रयाि और महायाि से
संिदध थे। वर्श्र्वर्दयािय प्रशासि अिुशासि के प्रनत जितिा कठोर था, लशिा को िेकर उतिा ही
िागरूक, संर्र्द
े िशीि और सतकव था । यह इसी से समझा िा सकता है कक प्रर्ेश के इच्छुक
वर्दयाधथवयों को पहिे दर्ारपाि से र्ार्द-वर्र्ार्द करिा पडता था और कफर उसमें उत्तीणव होिे पर ही
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उन्हें प्रर्ेश लमिता था। छात्रों को रहिे के लिए छात्रार्ास की सुवर्धा उपिब्ध थी । इजत्संग के
िेिि के अिुसार यहााँ होिे र्ािी चचावओं में सभी की भागीर्दारी आर्श्यक थी । सभा में मौिूर्द
सभी िोगों के फैसिे पर संयुक्त रूप से आम सहमनत की आर्श्यकता होती थी । वर्श्र्वर्दयािय
के संचािि के लिए रािाओं दर्ारा वर्शेष अिुर्दाि ढर्दया िाता था िेककि वर्श्र्वर्दयािय के संचािि
में उिका ककसी तरह का हथतिेप िहीं था। आश्चयव यह कक िौदध धमव को ि माििे र्ािे शासक
भी इस वर्श्र्वर्दयािय को भरपूर अिुर्दाि र्दे ते थे। यह लशिा के प्रनत उिकी अिुरजक्त को ही
रे िांककत करता है और लशिा के प्रनत उिकी गहरी रुधच ढर्दिाता है ।
(क) गदयांश के अिुसार िािंर्दा वर्श्र्वर्दयािय की थथापिा ककसके दर्ारा की गई थी? 1
i) िौदध संन्यालसयों दर्ारा
ii) महात्मा िुदध दर्ारा
iii) गप्ु तर्ंशी शासक कुमारगप्ु त दर्ारा
iv) नतब्िती िौदधों दर्ारा
(ि) कथि (A) और कारण (R) को प़िकर उपयक्
ु त वर्कल्प का चयि कीजिए- 1
कथि(A): िौदध धमव को माििे/ ि माििे र्ािे शासक भी वर्श्र्वर्दयािय को भरपरू
अिुर्दाि र्दे ते थे।
कारण (R): उस समय के शासक धालमवक संकीणवताओं से ऊपर उठकर लशिा को महत्त्र् र्दे ते थे।
i) कथि (A) और कारण (R) र्दोिों सही हैं, कारण(R), कथि (A) की सही व्याख्या है ।
ii) कथि (A) और कारण (R) र्दोिों सही हैं, कारण(R), कथि (A) की सही व्याख्या
िहीं है ।
iii) कथि (A) सही है , िेककि कारण (R) ग़ित है ।
iv) कथि (A) ग़ित है , िेककि कारण (R) सही है ।
(ग) कॉिम 1 को कॉिम 2 के साथ सम
ु ेलित कीजिए और सही वर्कल्प चि
ु कर लिखिए- 1
कॉिम A कॉिम B
1 . महायाि और िज्रयाि क) सभी की भागीर्दारी आर्श्यक थी
2 . दर्ारपाि के साथ र्ार्द-वर्र्ार्द ि) थथापिा के उदर्दे श्य
3 . ध्याि र् अध्यात्म ग) िौदध धमव की शािाएाँ
4 . इजत्संग के िेिि में चचावएाँ घ) वर्श्र्वर्दयािय में प्रर्ेश की शतव
i) 1-ि, 2-घ, 3-ग, 4-क
ii) 1-ग, 2-ि, 3-घ, 4-क
iii) 1-ि, 2-क, 3-ग, 4-घ
iv) 1-ग, 2-घ, 3-ि, 4-क
(घ) िािंर्दा वर्श्र्वर्दयािय में दर्ारपाि से र्ार्द-वर्र्ार्द की अनिर्ायवता को आप लशिा में उत्कृष्टता 2
सुनिजश्चत करिे के संर्दभव में कैसे आाँकते हैं? तकव सढहत उत्तर र्दीजिए।
(ड.) गदयांश के आधार पर िताइए कक तत्कािीि शासकों का लशिा के प्रनत कैसा रर्ैया था? 2
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2. निम्िलिखित काव्यांश को ध्यािपूर्क
व प़िकर पूछे गए प्रश्िों के उत्तर लिखिए-
सच है , वर्पवत्त िि आती है, कायर को ही र्दहिाती है ,
सूरमा िहीं वर्चलित होते, िण एक िहीं धीरि िोते,
वर्घ्िों को गिे िगाते हैं, कााँटों में राह ििाते हैं।
मुि से ि कभी उफ़ कहते हैं, संकट का चरण ि गहते हैं,
िो आ पडता सि सहते हैं, उदयोग-निरत नित रहते हैं,
शूिों का मूि िसािे को, ि़ि िुर्द वर्पवत्त पर छािे को।
है कौि वर्घ्ि ऐसा िग में , ढटक सके र्ीर िर के मग में
ख़म ठोंक ठे िता है िि िर, पर्वत के िाते पााँर् उिड
मािर् िि जोर िगाता है , पत्थर पािी िि िाता है ।
गण
ु िडे एक से एक प्रिर, हैं नछपे मािर्ों के भीतर,
में हर्दी में िैसे िािी हो, र्नतवका-िीच उजियािी हो।
ित्ती िो िहीं ििाता है रोशिी िहीं र्ह पाता है ।
- रामधारी लसंह ढर्दिकर (रजश्मरथी तत
ृ ीय सगव भाग-१)
(क) काव्यांश का मूि भार् निम्िलिखित में से ककस ओर इशारा करता है - 1
i. सूरमाओं के वर्चलित होिे के कारण
ii. र्ीर मिष्ु यों की वर्शेषता उिागर करिा
iii. व्यर्धािों का मढहमा मंडि करिा
iv. पत्थर से पािी ििािे की ओर
(ि) काव्यांश में र्ीरों के संर्दभव में निम्िलिखित में से ककसका उल्िेि िहीं हुआ है - उधचत वर्कल्प का 1
चयि कीजिए-
i. र्े कायर सा घिराते हैं
ii. र्े उदयोग में निरत रहते हैं
iii. र्े वर्पवत्त पर छा िाते हैं
iv. र्े वर्चलित हो िाते हैं
वर्कल्प-
i. कथि I और II सही हैंI
ii. केर्ि कथि II सही है I
iii. कथि I और IV सही हैं I
iv. कथि II और III सही हैं I
(ग) कथि (A) और कारण (R) को प़िकर उपयक्
ु त वर्कल्प का चयि कीजिए- 1
कथि (A) : मािर् िीर्ि के वर्कास के लिए वर्पवत्तयााँ आर्श्यक हैं, र्े उसे आत्मनिभवर और
आत्मवर्श्र्ासी ििाती हैं।
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कारण (R) : मािर् की अंतनिवढहत शजक्त तभी िागत
ृ होती है िि र्ह वर्पवत्तयों से संघषव करता
है ।
i. कथि (A) और कारण (R) र्दोिों सही हैं, कारण(R), कथि (A) की सही व्याख्या है ।
ii. कथि (A) और कारण (R) र्दोिों सही हैं, कारण(R), कथि (A) की सही व्याख्या िहीं
है ।
iii. कथि (A) सही है , िेककि कारण (R) ग़ित है ।
iv. कथि (A) ग़ित है , िेककि कारण (R) सही है ।
(घ) ‘ित्ती िो िहीं ििाता है रोशिी िहीं र्ह पाता है ।‘- इस पंजक्त दर्ारा कवर् ककस गुण को अपिािे 2
की प्रेरणा र्दे रहे हैं?
(ड.) काव्यांश के अिुसार ‘मेहंर्दी-िािी’ और ‘र्नतवका-उियािी’ िैसे प्रतीक ककस प्रकार मािर्ीय संर्दभव से 2
मेि िाते हैं ? थपष्ट कीजिए
खंड- ख
(व्यावहारिक व्याकिण) 16
3. निर्दे शािुसार ‘रचिा के आधार पर र्ाक्य भेर्द’ से संिंधधत पााँच प्रश्िों में से ककन्हीं चार प्रश्िों के 4x1=4
उत्तर लिखिए :
क) ‘िािूिी के रामायण का पाठ करते समय हम उिकी िगि में िैठे रहते। (र्ाक्य भेर्द लिखिए)
ि) िाि गोबिि भगत के आर्दे श पर ही पतोहु का पुिवर्वर्ाह संभर् हुआ। (लमधित र्ाक्य में रूपांतररत
कीजिए)
ग) िेिक िे सेकंड क्िास की ढटकट िी क्योंकक उन्हें अपिी िई कहािी के वर्षय में सोचिा था।
(संयुक्त र्ाक्य में रूपांतररत कीजिए)
घ) वपतािी का आग्रह रहता था कक मैं रसोई से र्दरू ही रहूाँ। -रे िांककत भाग में प्रयक्
ु त उपर्ाक्य भेर्द
लिखिए।
ड.) कक्रया की वर्शेषता ितािे र्ािे उपर्ाक्य क्या कहिाते हैं?
4. निर्दे शािुसार ‘र्ाच्य’ से संिंधधत पााँच प्रश्िों में से ककन्हीं चार प्रश्िों के उत्तर लिखिए : 4x1=4
(क) िच्चों दर्ारा िेतािी की मूनतव पर सरकंडे का चश्मा िगाया गया। (कतर्
व ृ ाच्य में रूपांतररत कीजिए)
(ि) िर्ाि साहि िे चाकू से िीरे छीििे का कायव ककया। (कमवर्ाच्य में रूपांतररत कीजिए)
(ग) लशशु ख़ूि खििखििाया। (भार् र्ाच्य में रूपांतररत कीजिए)
(घ) ‘िििर्ी अंर्दाज’ िामक रचिा िेिक यशपाि दर्ारा लििी गई है । (कतर्
व ृ ाच्य में रूपांतररत
कीजिए)
(ड.) भार् की प्रधािता र्ािे र्ाक्य में कौि-सा र्ाच्य होता है ?
5. निर्दे शािुसार, 'पर्द-पररचय' पर आधाररत पााँच प्रश्िों में से ककन्हीं चार प्रश्िों के रे िांककत पर्दों का 4x1=4
पररचय लिखिए :
(क) िििऊ की िर्ािी िथि के एक सफ़ेर्दपोश सज्िि पािथी मारकर िैठे थे।
(ि) धत ्! पगिी ई भारत रत्ि हमको शहिईया पे लमिा है, िुंधगया पे िाहीं।
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(ग) उसिे हािर्दार साहि को ध्याि से र्दे िा।
(घ) र्े तो आग िगाकर चिे गए और वपतािी सारा ढर्दि भभकते रहे ।
(ड.) एक संथकृत व्यजक्त ककसी िई चीज की िोि करता है।
6. निम्िलिखित प्रश्िों में से ककन्हीं चार रे िांककत पंजक्तयों में प्रयक्
ु त अिंकार पहचाि कर लिखिए : 4x1=4
(क) ज्यों िि माहाँ तेि की गागरर, िूाँर्द ि ताकौं िागी।
(ि) कोढट कुलिस सम र्चि तम्
ु हारा।
(ग) अभी समय भी िहीं, थकी सोयी है मेरी मौि व्यथा।
(घ) तुम्हारी यह र्दं तुररत मथ
ु काि, मत
ृ क में भी डाि र्दे गी िाि।
(ड.) प्रीनत-िर्दी मैं पाऊाँ ि िोरयौ।
खंड-ग 30
(पाठ्य पस्
ु तक एवं पिू क पस्
ु तक)
7. निम्िलिखित पढठत गदयांश को ध्यािपूर्क
व प़िकर पछ
ू े गए प्रश्िों के उत्तर र्दीजिए- 5x1=5
ू रे के मुाँह में कौर
भौनतक प्रेरणा, ज्ञािेप्सा, क्या ये र्दो ही मािर् संथकृनत के माता-वपता हैं? र्दस
डाििे के लिए िो अपिे माँह
ु का कौर छोड र्दे ता है , उसको यह िात क्यों और कैसे सझ
ू ती है ? रोगी
िच्चे को सारी रात गोर्द में लिए िो माता िैठी रहती है , र्ह आखिर ऐसा क्यों करती है ? सुिते हैं
कक रूस का भाग्यवर्धाता िेनिि अपिी डैथक में रिे हुए डिि रोटी के सूिे टुकडे थर्यं ि िाकर
र्दस
ू रों को खििा ढर्दया करता था। र्ह आखख़र ऐसा क्यों करता था? संसार के मजर्दरू ों को सुिी
र्दे ििे का थर्प्ि र्दे िते हुए कािव माक्सव िे अपिा सारा िीर्ि र्दुःु ि में बिता ढर्दया और इि सि से
ि़िकर आि िहीं, आि से ढाई हजार र्षव पर्
ू व लसदधाथव िे अपिा घर केर्ि इसलिए त्याग ढर्दया
कक ककसी तरह तष्ृ णा के र्शीभूत िडती - कटती मािर्ता सुि से रह सके।
(क) िेिक के अिुसार, एक व्यजक्त र्दस
ू रे की पीडा र् र्दुःु ि को समझ पाता है -
i) संर्ेर्दिा के कारण
ii) ज्ञािेप्सा के कारण
iii) थर्ाथव के कारण
iv) भौनतक प्रेरणा के कारण
(ि) िेनिि िे अपिी डैथक में रिे डििरोटी के सूिे टुकडे थर्यं ि िाकर र्दस
ू रों को खििा ढर्दए
क्योंकक-
i) र्ह भौनतक प्रेरणा से प्रेररत थे
ii) र्ह र्दस
ू रों के सि
ु को प्राथलमकता र्दे ते थे
iii) उिके पास अन्य भोिि था
iv) र्ह अपिी भूि को नियंबत्रत कर सकते थे
(ग) िेिक िे कािव माक्सव के िीर्ि को ककस तरह से धचबत्रत ककया है ?
i) एक साधारण और सि
ु ी िीर्ि
ii) एक िीर्ि िो र्दुःु ि में बिताया गया
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iii) संघषव और क्रांनत का िीर्ि
iv) ज्ञािेप्सा से प्रेररत िीर्ि
(घ) लसदधाथव िे अपिा घर क्यों त्याग ढर्दया, िैसा कक िेिक िे िताया है -
i) तष्ृ णा के र्शीभूत मािर्ता को सुिी र्दे ििे के लिए
ii) भौनतक प्रेरणा की िोि में
iii) अपिा ज्ञाि ि़िािे के लिए
iv) अपिे िीर्ि में शांनत प्राप्त करिे के लिए
(ड.) िेिक के अिुसार, मााँ अपिे रोगी िच्चे को सारी रात गोर्द में लिए क्यों िैठी रहती है ?
i) ज्ञािेप्सा के कारण
ii) करुणा और प्रेम के कारण
iii) भौनतक प्रेरणा के कारण
iv) सामाजिक र्दिार् के कारण
8. निधावररत गदय पाठों के आधार पर निम्िलिखित चार प्रश्िों में से ककन्हीं तीि प्रश्िों के उत्तर 3x2=6
िगभग 25-30 शब्र्दों में लिखिए :
(क) ‘आधुनिकता िाहरी रूप िहीं, आंतररक वर्चारों का वर्षय है ’- िाि गोबिि भगत के पात्र को ध्याि
में रिकर इस कथि की समीिा कीजिए।
(ि) िर्ाि साहि के ढर्दिार्े की सिक के आधार पर िताइए ककि पररजथथनतयों में सिक सकारात्मक
र् िकारात्मक पररणाम र्दे सकती है ?
(ग) पाठ ‘एक कहािी यह भी’ की मढहिा पात्रों के संघषव और िीर्ि-यात्रा के कौि से पहिू आपको
मढहिा सशजक्तकरण की ढर्दशा में प्रेररत करते हैं?
(घ) ‘बिजथमिाह ख़ााँ किा र् मािर्ीय सरोकारों के र्ाथतवर्क उपासक थे।’-पाठ ‘िौितिािे में इिार्दत’
के आधार पर थपष्ट कीजिए।
9. निम्िलिखित पढठत पदयांश पर आधाररत िहुवर्कल्पीय प्रश्िों के सर्ावधधक उपयुक्त उत्तर र्ािे 5x1=5
वर्कल्प चि
ु कर लिखिए-
बिहलस िििु िोिे मर्द
ृ ु िािी । अहो मुिीसु महाभट मािी ।।
पुनि पुनि मोढह र्दे िार् कुठारु । चहत उडार्ि फाँू कक पहारू।।
इहााँ कुम्हडिनतया कोउ िाहीं । िे तरििी र्दे खि मरर िाहीं ।।
र्दे खि कुठारु सरासि िािा। मैं कछु कहा सढहत अलभमािा।।
भग
ृ स
ु त
ु समखु झ ििेउ बििोकी । िो कछु कहहु सहौं ररस रोकी ।।
सुर मढहसुर हररिि अरु गाई । हमरे कुि इन्ह पर ि सुराई ।।
िधें पापु अपकीरनत हारें । मारतहू पा पररअ तम्
ु हारें ।।
कोढट कुलिस सम िचिु तम्
ु हारा । ब्यथव धरहु धिु िाि कुठारा।।
िो बििोकक अिुधचत कहेउाँ छमहु महामुनि धीर ।
सुनि सरोष भग
ृ ुिंसमनि िोिे धगरा गंभीर।।
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(क) ‘इहााँ कुम्हडिनतया कोउ िाहीं’-पंजक्त से आशय है ―
i. यहााँ मूिों की तरह िातें करिे र्ािा कोई िहीं है ।
ii. यहााँ कोई भी कुम्हडे की िनतया के समाि ( नििवि) िहीं है |
iii. यहााँ कोई भी कुम्हार के घडे के समाि कोमि िहीं है |
iv. यहााँ कोई भी मेरे िैसा शूरर्ीर िहीं है |
(ि) िक्ष्मण दर्ारा प्रत्युत्तर में प्रयोग की गई भाषा में शालमि था-
i) संकोच
ii) व्यंग्य
iii) आिोचिा
iv) अिुमोर्दि
वर्कल्प-
i. केर्ि I और IV सही हैंI
ii. केर्ि कथि I सही है I
iii. केर्ि III और IV सही हैं I
iv. केर्ि II और III सही हैं I
(ग) कथि (A) और कारण (R) को प़िकर उपयक्
ु त वर्कल्प का चयि कीजिए-
कथि (A) : परशुराम और िक्ष्मण का संर्ार्द शजक्त और आत्सम्माि के िीच दर्ंदर् को र्दशावता
है ।
कारण (R) : शजक्त का अहंकार और आत्मसम्माि रिा में पररहास भार्िा ही इसका प्रमि
ु कारण
रहा।
i. कथि (A) सही है , िेककि कारण (R) ग़ित है ।
ii. कथि (A) ग़ित है , िेककि कारण (R) सही है ।
iii. कथि (A) और कारण (R) र्दोिों सही हैं, कारण(R), कथि (A) की सही व्याख्या है ।
iv. कथि (A) और कारण (R) र्दोिों सही हैं, कारण(R), कथि (A) की सही व्याख्या िहीं
है ।
(घ) िक्ष्मण िे परशुराम को अपिे कुि की ककस परं परा का िोध कराया?
i. शत्रु को हराकर युदध में वर्िय पािे की परं परा
ii. र्दे र्ताओं र् ब्राह्मणों पर प्रहार ि करिे की परं परा
iii. क्रोध में आकर शत्रु को मारिे की परं परा
iv. ककसी भी अपमाि का िर्दिा िेिे की परं परा
(ड.) ‘क्रोध की अपेिा वर्िम्रता अधधक प्रभार्ी होती है ’, क्योंकक—
i. वर्िम्रता शांनत और समझ का प्रतीक, ििकक क्रोध से वर्िाश निजश्चत
ii. क्रोध व्यजक्त को अधधक शजक्तशािी ििाता है और वर्िम्रता कम
iii. केर्ि क्रोध से ही र्ीरों को प्रत्येक युदध में वर्िय प्राप्त होती है
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iv. वर्िम्रता और क्रोध र्दोिों ही समाि रूप से प्रभार्ी होते हैं
10. निधावररत कवर्ताओं के आधार पर निम्िलिखित चार प्रश्िों में से ककन्हीं तीि प्रश्िों के उत्तर िगभग 3x2=6
25-30 शब्र्दों में लिखिए I
(क) सूर के पर्दों में र्खणवत गोवपयों के र्ाकचातुयव की ककि वर्शेषताओं िे आपको प्रभावर्त ककया?
(ि) थमनृ त को ‘पाथेय’ ििािे से कवर् का क्या आशय है I क्या आप कभी ककसी थमनृ त को पाथेय
ििाकर आगे ि़िे हैं? उर्दाहरण सढहत लिखिए
(ग) कवर् ‘सूयक
व ांत बत्रपाठी निरािा’ िार्दि के गिवि में िर्चेतिा र् सि
ृ िात्मक उत्साह का थर्र सुिते
हैं—उधचत तकों दर्ारा कथि की पुजष्ट कीजिएI
(घ) र्दं तुररत मुथकाि का क्या अथव हैं? कवर् के मि पर उस मुथकाि का क्या प्रभार् पडा?
11. पूरक पाठ्य-पुथतक के निधावररत पाठों पर आधाररत निम्िलिखित तीि प्रश्िों में से ककन्हीं र्दो प्रश्िों 2x4=8
के उत्तर िगभग 50-60 शब्र्दों में लिखिए :
(क) आधनु िक िीर्ि शैिी में हम भोिािाथ के समाि प्रकृनत का आिंर्द क्यों िहीं उठा पा रहे हैं?
र्तवमाि में आप ककि उपायों दर्ारा प्राकृनतक आिंर्द प्राप्त कर सकते हैं?
(ि) ‘कटाओ’ पर ककसी भी र्दक
ु ाि का ि होिा उसके लिए र्रर्दाि है ’- पाठ के आधार पर इस कथि के
संर्दभव में अपिी राय व्यक्त कीजिए I
(ग) ‘ढहरोलशमा की घटिा वर्ज्ञाि का भयािकतम र्दरु
ु पयोग हैंI’ क्यों? आपकी दृजष्ट में वर्ज्ञाि का
सर्दप
ु योग कहााँ-कहााँ ककस तरह से हो रहा है ?
खंड-घ 20
(िचनात्मक लेखन)
12. निम्िलिखित में से ककसी एक वर्षय पर संकेत बिन्र्दओ
ु ं के आधार पर 120 शब्र्दों में एक अिुच्छे र्द 1x6=6
लिखिए-
क) कृत्रिम बद्
ु धधमत्ता – विदान या अभिशाप
संकेत बिंर्द-ु
• सवु र्धाििक िीर्ि
• िौकरी संकट
• िैनतक धचंताएाँ
ि) खेलों में बढती िाितीय मठहलाओं की िागीदािी
संकेत बिंर्द-ु
• अंतरराष्रीय सफिता
• सरकारी प्रोत्साहि
• सामाजिक िर्दिार्
ग) िाष्ट्र ननमााण में यव
ु ाओं का योगदान
संकेत बिंर्द-ु
• िर्ाचार और उदयलमता
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• सामाजिक िागरूकता
• िेतत्ृ र् िमता र् उर्दाहरण
13. क) आप रािि/ रं िीता हैं I आपके िेत्र में ि़िते ििभरार् की समथया ि़ि गई है , जिससे आए 1x5=5
ढर्दि र्दघ
ु ट
व िाएाँ हो रही हैं I इस ओर ध्याि आकवषवत कराते हुए ‘प्रभात ख़िर’ के संपार्दक को पत्र
लिखिए I
अथर्ा
ि) आप रािि/ रं िीता हैं I आपके वर्दयािय िे िेत्रीय र्ार्द-वर्र्ार्द प्रनतयोधगता में प्रथम थथाि
प्राप्त ककया है I छात्रार्ास में रह रहे अपिे िडे भाई को इस प्रनतयोधगता की संपण
ू व िािकारी र्दे ते
हुए िगभग 100 शब्र्दों में एक पत्र लिखिए I
14. क) आप आयव/आयाव हैं, आपिे िी.एड, की डडग्री प्राप्त करिे के िार्द लशिक पात्रता परीिा उत्तीणव 1x5=5
की है I र्दै निक समाचार पत्र के वर्ज्ञापि दर्ारा आपको ज्ञात हुआ कक आपके िेत्र के एक प्रनतजष्ठत
वर्दयािय में ढहंर्दी लशिक का पर्द ररक्त है I आप उक्त पर्द की योग्यता रिते हैं I इस पर्द हे तु
वर्दयािय प्रमि
ु को आर्ेर्दि भेििे के लिए िगभग 80 शब्र्दों में अपिा एक थर्र्त
ृ तैयार कीजिए
I
अथर्ा
ि) आप आयव/आयाव हैंI आपकी चेकिक
ु और डेबिट काडव डाक दर्ारा आपके निर्ास थथाि पर
शीघ्र लभिर्ािे का अिुरोध करते हुए अपिे िैंक शािा प्रिंधक को ई -मेि लिखिए I
15. थर्च्छता के प्रनत िोगों को िागरूक करिे हे तु ढर्दल्िी सरकार दर्ारा आयोजित ‘थर्च्छता 1x4=4
पिर्ाडे’ के वर्षय पर आधाररत एक आकषवक वर्ज्ञापि िगभग 40 शब्र्दों में तैयार कीजिएI
अथर्ा
संघ िोक सेर्ा आयोग की प्रशासनिक परीिा में उत्तीणव हुई अपिी चचेरी िहि को िधाई र्दे ते हुए
िगभग 40 शब्र्दों में संर्देश लिखिएI
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