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NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 1 चिड़िया का गीत

कक्षा 4 Hindi Chapter 1 चिड़िया का गीत के सभी प्रश्नों के विस्तृत हल AglaSem Docs पर निःशुल्क डाउनलोड करें। नवीनतम एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (वीणा, 2026-27 एनईपी पाठ्यक्रम) पर आधारित, विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए चरण-दर-चरण समाधान। Download NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 1 चिड़िया का गीत PDF free at AglaSem Docs, with step-by-step answers based on the latest NCERT textbook (Veena, 2026-27 NEP syllabus).
NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 1 चिड़िया का गीत - Page 1 of 37

About NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 1 चिड़िया का गीत

NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 1 चिड़िया का गीत is available here for free download. Published by NCERT for Class 4, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (37 pages). Candidates preparing for Class 4 can use NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 1 चिड़िया का गीत to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 1 चिड़िया का गीत – Text

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Page 1

F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा4

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 1: च ड़या का गीत

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

1 – 16 16 48 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 29 pages

Page 2

कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

कक्षा 4 · हद · वीणा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 1: च ड़या का गीत
च ड़या का गीत नरंकार दे व ‘सेवक’ क क वता है। इसम एक च ड़या अपनी कहानी सुनाती है — पहले अंडा, फर घ सला, फर पेड़ क शाख और
अंत म खुला आकाश। इन्ह पृष्ठ म पुस्तक क आरं भक प्राथना ऐसा वर दो (पृष्ठ 1) और छोटा पाठ म त क उड़ान (पृष्ठ 16) भी छपे ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

वीणा (कक्षा 4) 1 – 16

खं ड प्रश्न

16 48

माध्यम
हन्द

ऐसा वर दो — पृष्ठ 1
पुस्तक क आरं भक प्राथना — त्रलोक सह ठकुरेला। इस प्राथना के साथ पुस्तक म कोई अभ्यास नह दया गया है; नीचे के प्रश्न अभ्यास के
लए जोड़े गए ह।

प्राथना

प्र.1 इस प्राथना म ब े भगवान से कौन-कौन से वर माँगते ह?

ब े भगवान से पाँच बात माँगते ह—

जग के सारे स ण हमारे भीतर भर द जए।
हम फूल जैसे मुस्कराएँ और सब पर प्रेम लुटाएँ।
हम द पक बनकर अँधेरे से लड़ और कभी दुख से न घबराएँ।
हमारा तन और मन दोन मजबूत हो जाएँ।
हम ऐसा ान और बु द्ध मले क हम सच के रास्ते पर चल।

क्य : ब े कोई चीज़ नह माँग रहे। वे केवल अ े गुण माँग रहे ह, क्य क अ े गुण ही जीवन भर काम आते ह।

प्र.2 ‘हम फूल जैसे मुस्काएँ, सब पर प्रेम-सुगंध लुटाएँ,’ — इन पं क्तय का सरल अथ बताइए।

सरल अथ: हम हमेशा फूल क तरह हँसते-मुस्कराते रह और सबसे प्रेम से मल।
क व जो चत्र बना रहे ह: क व हम एक खले हुए फूल जैसा बता रहे ह। फूल दो काम करता है — वह खलकर सबको अ ा
लगता है, और अपनी सुगंध चार ओर बाँट दे ता है। क व कहते ह क हमारा प्रेम भी उसी सुगंध जैसा हो, जो हर कसी तक पहुँचे।

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

क्य : फूल सुगंध दे ते समय यह नह दे खता क सामने कौन है। क व चाहते ह क हमारा प्रेम भी सबके लए एक-सा
हो।

प्र.3 ‘द पक बन, लड़ हम तम से,’ — इस पं क्त म क व क्या कहना चाहते ह?

‘तम’ का अथ है अँधेरा। क व कहते ह क हम द पक क तरह बन और अँधेरे से लड़।
यहाँ अँधेरा केवल रात का अँधेरा नह है। अँधेरे का अथ है — दुख, डर और अनजानपन। द पक छोटा-सा होता है, फर भी वह
अँधेरा भगा दे ता है। क व चाहते ह क हम भी छोटे होकर भी दूसर के जीवन म उजाला कर।

संकेत: अगली पं क्त ‘ज्यो तमय हो यह जग हमसे’ इसी बात को पूरा करती है — हमसे सारा जग रोशन हो जाए।

प्र.4 ‘सन्माग’ शब्द का अथ क्या है? इसे अपने एक वाक्य म प्रयोग क जए।

सन्माग = अ ा रास्ता, सही राह। यह ‘सत्’ और ‘माग’ से मलकर बना है।
प्राथना क पं क्त है — “सत्य-माग पर बढ़ते जाएँ, सबको ही सन्माग दखाएँ”। यानी हम खुद सच के रास्ते पर चल और दूसर को
भी वही रास्ता दखाएँ।
मेरा वाक्य: अ पुस्तक हम सन्माग पर चलना सखाती ह।

बातचीत के लए — पृष्ठ 3
क वता समाप्त होने के बाद दए गए बातचीत के प्रश्न

बातचीत के लए

प्र.1 पशु-प क्षय के लए घर आवश्यक है या नह ? कारण भी बताइए।

हाँ, पशु-प क्षय के लए घर बहुत आवश्यक है। इसके तीन कारण ह—

मौसम से बचाव: घर म वे तेज धूप, वषा और ठं ड से बच जाते ह।
ब क सुरक्षा: च ड़या घ सले म ही अंडे दे ती है। क वता क च ड़या भी पहले अंडे म थी, फर घ सले म। खुले म अंडे
सुर क्षत नह रहते।
शत्रु से बचाव: बल्ली, साँप और बाज जैसे जानवर उन्ह आसानी से नह पकड़ पाते।

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

क्य : घर का मतलब केवल रहने क जगह नह है। घर वह जगह है जहाँ कोई कमज़ोर और छोटा भी सुर क्षत रह
सके।

प्र.2 आपके प रवार के सदस्य घर से बाहर क्य जाते ह?

यह आपके अपने घर का प्रश्न है। उत्तर लखते समय यह सो चए क घर का हर सदस्य दन म कहाँ-कहाँ जाता है और कस काम से
जाता है।
अ े उत्तर म ये बात आनी चा हए —

कम-से-कम तीन सदस्य का नाम या रश्ता।
हर एक के बाहर जाने का कारण।

नमूना उत्तर: मेरे पताजी काम पर जाते ह। माँ बाज़ार से सब्जी और सामान लाती ह। द द और म व ालय जाते ह।
दादाजी सुबह टहलने और मं दर जाते ह। जैसे पक्षी भोजन क खोज म घ सले से नकलते ह, वैसे ही हमारे घर के
लोग भी अपने-अपने काम से बाहर जाते ह।

प्र.3 जब प रवार के सदस्य बाहर जाते ह या बाहर से आते ह तो आपको कैसा लगता है और क्य ?

इसम दो बात लखनी ह — कैसा लगता है और क्य लगता है।

नमूना उत्तर: जब मेरे पताजी सुबह काम पर जाते ह तो मुझे थोड़ा उदास लगता है, क्य क फर शाम तक उनसे
बात नह हो पाती। जब वे शाम को लौटते ह तो म दौड़कर दरवाज़े पर जाता हूँ। मुझे बहुत खुशी होती है, क्य क तब
पूरा प रवार साथ बैठकर बात करता है।

क्य : अपने लोग पास ह तो मन को सुरक्षा और खुशी मलती है। इसी लए जाने पर उदासी और लौटने पर खुशी
होती है।

प्र.4 जब कोई अ त थ आपके घर आता है या आप कसी संबंधी के यहाँ जाते ह तो आपको कैसा लगता है?

इस प्रश्न म अपना स ा अनुभव बताइए और एक कारण भी द जए।

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Page 5

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत
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नमूना उत्तर: जब कोई अ त थ हमारे घर आता है तो मुझे बहुत अ
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ा लगता है। घर म चहल-पहल हो जाती है, माँ
कुछ मीठा बनाती ह और हम सब दे र तक बात करते ह। जब म नानी के घर जाता हूँ तो और भी अemा लगता है,
c o m खेल, नए ब े और नई जगह दे खने को मलती ह। g l as
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क्य क वहाँ मु झ े नए

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a क्य : जैसे च ड़या घ सले से बाहर नकलकर नई दु नया दे खती है, वैसे ही हम भी कसी के घर जाकर नई बात

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सीखते ह।

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क्या आपको लगता है क प क्षय क तरह हम भी धीरे-धीरे बड़े होते ह और फर उनक तरह ही संसार दे खते ह?
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प्र.5

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अपने अनुभव साझा क जए।

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हाँ, बलकुल ऐसा ही होता है। क वता क च ड़या क तरह हमारी दु नया भी धीरे-धीरे बड़ी होती है।
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च ड़या क दु नया हमारी दु नया

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अंडा माँ की गोद
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घोंस ला agl अपना घर

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पेड़ की शाखें गली, मोहल्ला और िव ालय

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खुल ा आकाश दू स रे शहर , दू स रे राज्य, सारा संस ार

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agl नमूना उत्तर: छोटा था तब मुझे लगता था क मेरा घर और मेरी गली ही सारी दु नया है। फर म व ालय जाने लगा
और नए दोस्त बने। पछली ग मय म म पहली बार रेलगाड़ी से नानी के गाँव गया। रास्ते म इतने खेत, न दयाँ और
se m
com g l a
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गाँव दखे क मुझे भी च ड़या क तरह लगा — “बहुत बड़ा है यह संसार।”
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agl
क वता क बात — पृष्ठ 4
co m
m .
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प्रश्न 1 — नीचे दए गए प्रश्न म चार वकल्प दए गए ह। प्रश्न के उत्तर म एक से अ धक वकल्प सही हो सकते ह—

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क वता क बात

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a त क जए — • घ सला प क्षय का घर होता है। • घ सला सूखे
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.
प्र.1 (क) घ सले से संबं धत उपयुक्त वाक्य को च
तनक से बनाया जाता है। • प क्षय का घ सला केवल पेड़ पर होता है। • कुछ प क्षय का घ सला हमारे घर म
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भी होता है।

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सही वाक्य तीन ह —

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

✔ घ सला प क्षय का घर होता है।
✔ घ सला सूखे तनक से बनाया जाता है।
✘ प क्षय का घ सला केवल पेड़ पर होता है। — यह वाक्य गलत है।
✔ कुछ प क्षय का घ सला हमारे घर म भी होता है।

क वता से आधार: च ड़या खुद कहती है — “ फर मेरा घर बना घ सला, सूखे तनक से तैयार।” इसी एक पं क्त से पहले और
दूसरे वाक्य सही सद्ध हो जाते ह।

तीसरा वाक्य क्य गलत है: उसम ‘केवल’ शब्द है। गौरैया छ े और पंखे के पीछे घ सला बनाती है, बया घास के
झुरमुट म लटकाती है, कबूतर रोशनदान म बैठ जाता है। इस लए घ सला केवल पेड़ पर नह होता। इसी कारण
चौथा वाक्य सही है।

प्र.2 (ख) क वता म ‘अंडे जैसा था आकार’ का प्रयोग नम्न ल खत म से कसके लए कया गया है — • संसार •
आकाश • घर • घ सला

उत्तर — ‘घर’ और ‘संसार’।
क वता क पं क्तयाँ:
“सबसे पहले मेरे घर का
अंडे जैसा था आकार
तब म यही समझती थी
बस इतना-सा ही है संसार।”

घर — यह सीधा उत्तर है। ‘मेरे घर का आकार’ कहकर च ड़या अपने पहले घर, यानी अंडे क बात कर रही है।
संसार — यह भी सही है, क्य क उस समय च ड़या उसी छोटे -से घर को पूरा संसार मान रही थी।

बाक दो क्य नह : ‘आकाश’ का यहाँ कोई ज़क्र नह है। और ‘घ सला’ इस लए नह , क्य क घ सला तो बाद म
बना — अगली पं क्त ही कहती है “ फर मेरा घर बना घ सला”।

ध्यान द जए: प्रश्न स्वयं कहता है क एक से अ धक वकल्प सही हो सकते ह, इस लए यहाँ दो वकल्प पर नशान
लगाइए।

प्र.3 (ग) ‘तब म यही समझती थी / बस इतना-सा ही है संसार’ — इन पं क्तय म ‘इतना-सा’ का अथ है — • बहुत
छोटा • बहुत बड़ा • बहुत लंबा • रंग- बरंगा

उत्तर — बहुत छोटा।

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

‘इतना-सा’ म ‘सा’ जुड़ने से मात्रा घट जाती है। ‘इतना’ का अथ है इस मात्रा का, पर ‘इतना-सा’ का अथ हो जाता है बस इतना ही,
बहुत थोड़ा।

क्य : च ड़या अंडे के भीतर थी। उसने अंडे क द वार के अलावा कुछ दे खा ही नह था। इस लए उसे लगा क संसार
बस उतना ही छोटा है। आगे जब वह उड़ी तो वही संसार उसे ‘बहुत बड़ा’ लगने लगा — इसी उलट बात से सद्ध
होता है क ‘इतना-सा’ का अथ ‘बहुत छोटा’ है।

अपना वाक्य बनाइए: डब्बे म बस इतना-सा चावल बचा है।

क वता क बात — पृष्ठ 5
प्रश्न 2 — नीचे द गई क वता क पं क्तय का मलान उनके नीचे द गई उपयुक्त पं क्तय से क जए—

क वता क बात

प्र.1 नीचे द गई क वता क पं क्तय का मलान उनके नीचे द गई उपयुक्त पं क्तय से क जए—

क ख ग घ
िफर मेरा घर आिखर जब मै ं िफर मै ं िनकल सबसे पहले मेरे

बना घोसला
ं आसमान मे ं गई शाखो ं पर घर का

सूखे ितनको ं उड़ी दूर तक -
हरी भरी थी ं अंडे जैस ा

से तैय ार पंख पसार जो स क
ु ु मार था आकार

1 2

तब मै ं यही समझती थी तभी समझ मे ं मेरी आया

-
बस इतना सा ही है संस ार। बहुत बड़ा है यह संस ार।

ऊपर के चार खानों को नीचे के दो खानों से जोिड़ ए।

पुस्तक के पृष्ठ 5 का मलान-काय — ऊपर क वता के चार अंश (क, ख, ग, घ) और नीचे दो अंश (1, 2)।

मलान इस प्रकार होगा —

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

क वता का अंश इससे जुड़ेगा

क. िफर मेर ा घर बना घोंस ला / सूखे ितनकों से तैयार 1. तब मैं यही समझती थी / बस इतना-सा ही है संस ार।

ख. आिखर जब मैं आसमान में / उड़ी दू र तक पंख पसार 2. तभी समझ में मेर ी आया / बहुत बड़ा है यह संस ार।

ग. िफर मैं िनकल गई शाखों पर / हरी-भरी थी ं जो सुकु मार 1. तब मैं यही समझती थी / बस इतना-सा ही है संस ार।

घ. सबसे पहले मेरे घर का / अंडे जैस ा था आकार 1. तब मैं यही समझती थी / बस इतना-सा ही है संस ार।

क्य : क वता म च ड़या के तीन छोटे ठकाने ह — अंडा, घ सला और पेड़ क शाख। इन तीन के बाद वह हर बार
एक ही बात दोहराती है, “बस इतना-सा ही है संसार।” केवल चौथी बार, जब वह खुले आसमान म उड़ती है, तब
उसक बात बदल जाती है — “बहुत बड़ा है यह संसार।”

संकेत: क वता म सही क्रम यह है — घ ➜ क ➜ ग ➜ ख। इसी क्रम म च ड़या क दु नया बड़ी होती जाती है।

सो चए और ल खए — पृष्ठ 5
क वता को समझकर लखने वाले प्रश्न

सो चए और ल खए

प्र.1 च ड़या को यह संसार कब-कब छोटा लगा?

च ड़या को यह संसार तीन बार छोटा लगा—

1. जब वह अंडे के भीतर थी — “सबसे पहले मेरे घर का, अंडे जैसा था आकार”।
2. जब उसका घर घ सला बना — “ फर मेरा घर बना घ सला, सूखे तनक से तैयार”।
3. जब वह पेड़ क हरी शाख पर नकली — “ फर म नकल गई शाख पर, हरी-भरी थ जो सुकुमार”।

इन तीन बार वह एक ही बात कहती है — “तब म यही समझती थी, बस इतना-सा ही है संसार।”

क्य : हर बार उसने उतना ही दे खा था जतना उसके आस-पास था। जो हम नह दे खते, उसके बारे म हम सोच भी
नह पाते। इसी लए उसक दु नया उसे छोट लगती रही।

प्र.2 खुले आकाश म उड़ते समय च ड़या ने क्या-क्या दे खा होगा जससे उसे लगा क संसार बहुत बड़ा है?

ऊपर से उसे वे सब चीज़ दखी ह गी जो घ सले म बैठकर कभी नह दखती थ —

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

दूर-दूर तक फैले हरे खेत और उनम काम करते कसान।
लंबी घुमावदार नद और उसके कनारे बसे गाँव।
ऊँचे-ऊँचे पहाड़ और घना जंगल।
छोटे -छोटे दखते घर, सड़क और उन पर चलते लोग व गा ड़याँ।
हज़ार पेड़, और उन पेड़ पर अपने जैसे सैकड़ घ सले।

क्य उसे संसार बड़ा लगा: उसका अपना घ सला अब उन हज़ार घ सल म से बस एक था। जब अपनी दु नया
कसी बड़ी दु नया का छोटा-सा हस्सा दखने लगे, तभी समझ आता है क संसार कतना बड़ा है।

संकेत: पुस्तक के पृष्ठ 3 का चत्र दे खए — उसम पहाड़, खेत, रास्ता, घर और बैल के साथ चलता कसान दखाया
गया है। ऊपर उड़ती च ड़या को यही सब दख रहा है।

प्र.3 प्रायः सुबह-शाम प क्षय क चहचहाहट (कलरव) सुनाई दे ती है। ऐसा क्य होता है?

प क्षय का पूरा दन एक बँधी हुई दनचया म बीतता है। इसी कारण उनक आवाज़ भी दो ही समय सबसे अ धक सुनाई दे ती है—

सुबह: रात भर आराम करने के बाद सब पक्षी एक साथ जागते ह और भोजन-पानी क खोज म नकलते ह। नकलने से पहले
वे बोलकर एक-दूसरे को बुलाते ह और झुंड बनाते ह।
शाम: दन भर बाहर रहने के बाद सब लौटते ह। माता- पता अपने ब को और साथी एक-दूसरे को आवाज़ दे कर घ सले तक
पहुँचते ह।

क्य साफ सुनाई दे ती है: सुबह-शाम चार ओर शोर कम होता है, इस लए उनक आवाज़ हम दूर तक साफ सुनाई
दे ती है। दोपहर म वे भोजन क खोज म दूर बखर जाते ह, इस लए तब कम सुनाई दे ती है।

समझ और अनुभव — पृष्ठ 6
क वता को अपने जीवन से जोड़ने वाले प्रश्न

समझ और अनु भ व

प्र.1 जब कोई शशु च ड़या घ सले से बाहर आती है तो उसे लगता है क संसार बहुत बड़ा है। क्या आपको भी घर से
बाहर नकलते समय ऐसा ही अनुभव होता है और क्य ?

हाँ, ऐसा अनुभव होता है — और कारण भी वही है जो च ड़या का था।
घर म हम हर चीज़ पहले से पता होती है — कौन-सा कमरा कहाँ है, कौन क्या कहेगा। बाहर नकलते ही बहुत-सी नई चीज़ एक
साथ सामने आ जाती ह। तब पहले थोड़ा डर लगता है, फर अ ा लगने लगता है।

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत
a g l AglaSem · NCERT Solutions

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नमूना उत्तर: पहले दन जब म अकेले पड़ोस क दुकान तक गया, तो रास्ता मुझे बहुत लंबा लगा। इतनी गा ड़याँ,
m लगता है,
इतने लोग! घर लौटकर मुझे लगा क मेरे घर के बाहर तो बहुत बड़ी दु नया है। अब वही रास्ता मुझeे छोटा
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क्य : जो जगह हम जानते ह वह छोट लगती है और जो नह जानते वह बड़ी। जैसे-जैसे हम जानने लगते ह, डर कम

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होता जाता है।

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एक शशु पक्षी क तरह आप भी धीरे-धीरे बड़े हो रहे ह। अब तक आपम भी कई प रवतन आए ह। नीचे दए गए

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प्र.2

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शीषक के अनुसार अपने अंदर आए प रवतन को ल खए — • शारी रक प रवतन • रु चय म प रवतन • समझ
म प रवतन • खान-पान म प रवतन • चत्रकारी • खेल • गीत-संगीत • पढ़ना- लखना • नृm
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त्य और अ भनय

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उत्तर em

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a यह काम आपको स्वयं करना है। कैसे कर —
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1. अपनी लेखन-पु स्तका म एक ता लका बनाइए। एक तरफ शीषक, दूसरी तरफ ‘पहले’ और ‘अब’।

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2. हर शीषक के सामने बस एक छोटा वाक्य ल खए।

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3. घर पर माता- पता से पू छए और अपनी पुरानी तस्वीर दे खए — इससे बहुत-सी बात याद आ जाएँगी।
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शीषक पहले अब

मैं लंबा हो गया हू,ँ नए m . c o
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शारीिरक पिरवतन म बहुत छोटा था, दो दूध के दाँत गरे नह थे
a s e दाँत आ गए है ं

m . co agकीl िकताबे ं पढ़ ना अ छा लगता है
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रुिचयों में पिरवतन बस खलौन से खेलता था अब कहानी च्

agl समझ में पिरवतन घड़ी दे खना नह आता था अब समय दे खकर खुद तैयार हो जाता हू ँ

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केवल दूध और खचड़ी
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अब रोटी-स ब्जी, दाल और फल सब खाता हू ँ
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खान-पान में पिरवतन

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िचत्रकारी
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टे ढ़ -मेढ़ लक र ख चता था अब पेड़, घर और िचिड़या बना ले ता हू ँ

खेल
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केवल दौड़-भाग अब कब ी और खो-खो के िनयम भी जानता हू ँ

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गीत-संग ीत बस ताली बजाता था
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अब दो-तीन गीत पूरे याद है ं

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em नत्ृ य और अिभनय
पढ़ ना-िलखना केवल अक्षर पहचानता था अब पूर ा पाठ पढ़ और िलख ले ता हू ँ

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agl शरमाता था अब क ा के सामने अिभनय कर ले ता हू ँ

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याद र खए: ये केवल नमूने ह। अपने स े बदलाव ल खए और कक्षा म सुनाइए। य द कोई और बदलाव आपको

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याद आए तो उसे भी जो ड़ए।

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Page 11

कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 पहले च ड़या को लगता था क यह संसार बहुत छोटा है परंतु स ाई कुछ और ही थी। उस समय आपको कैसा
लगा जब आपने इनम से कसी एक को पहली बार दे खा — • रेलगाड़ी • मे ो े न • मॉल • समुद्र • पहाड़ •
वायुयान • जलयान • जंगल • चार या छह वी थय वाली सड़क • खेत • रे गस्तान या मरुस्थल • नद

सूची म से कोई एक चीज़ चु नए जसे आपने सचमुच पहली बार दे खा हो। फर तीन बात ल खए—

1. आपने उसे कब और कसके साथ दे खा।
2. वह दे खने म कैसी लगी — उसका आकार, रंग, आवाज़।
3. उस समय आपके मन म क्या आया।

नमूना उत्तर (समुद्र): पछली छु य म म पहली बार प रवार के साथ समुद्र दे खने गया। पानी इतनी दूर तक फैला
था क आ खर कह दखाई ही नह दे ता था। लहर आकर मेरे पैर को छू जात और वापस लौट जात । मने माँ से
पूछा क इसका दूसरा कनारा कहाँ है। तब मुझे भी च ड़या जैसा लगा — मने सोचा, यह संसार तो सचमुच बहुत
बड़ा है!

क्य ऐसा लगता है: हमारी आँख जतना दे ख चुक होती ह, उतने को ही हम ‘पूरा’ मान लेते ह। जब उससे बड़ी
कोई चीज़ सामने आती है, तो हमारी समझ एक साथ बड़ी हो जाती है।

संकेत: आपके और भी अनुभव हो सकते ह। उन्ह भी कक्षा म अवश्य साझा क जए।

चत्र क भाषा — पृष्ठ 7

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

नीचे दए गए चत्र को ध्यान से दे खए। चत्र से मेल खाती क वता क कुछ पं क्तयाँ उदाहरण के रूप म द गई ह। अब क वता क उपयुक्त
पं क्तय से रक्त स्थान क पू त क जए—

चत्र क भाषा

प्र.1 नीचे दए गए चत्र को ध्यान से दे खए। चत्र से मेल खाती क वता क कुछ पं क्तयाँ उदाहरण के रूप म द गई ह।
अब क वता क उपयुक्त पं क्तय से रक्त स्थान क पू त क जए—

आिखर जब मै ं आसमान मे ं
उड़ ी दूर तक पंख पसार
तभी समझ मे ं मेरी आया
बहुत बड़ ा है यह संसार।

त्र 1
िच िच त्र 2

पृष्ठ 7 — चत्र 1 म च ड़या पंख फैलाकर आकाश म उड़ रही है, चत्र 2 म घ सले के भीतर अंडे से नकलता शशु पक्षी
है। बीच के प े पर ऊपर क पं क्तयाँ द हुई ह, नीचे क चार पं क्तयाँ खाली ह।

रक्त स्थान म ये चार पं क्तयाँ आएँगी —
सबसे पहले मेरे घर का
अंडे जैसा था आकार
तब म यही समझती थी
बस इतना-सा ही है संसार।

आिखर जब मै ं आसमान में
उड़ी दूर तक पंख पसार
तभी समझ में मेरी आया
बहुत बड़ा है यह संसार।

सबसे पहले मेरे घर का
िचत्र 1 िचत्र 2
अंडे जैसा था आकार
तब मै ं यही समझती थी
बस इतना-सा ही है संसार।

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

भरा हुआ प ा — नारंगी रंग क चार पं क्तयाँ ही रक्त ान म आएँगी।

क्य यही पं क्तयाँ: दूसरे चत्र म घ सले के भीतर अंडे से नकलता शशु पक्षी दख रहा है — उसके चार ओर अभी
अंडे का छलका लगा है। क वता म अंडे क बात केवल पहले पद म आई है, इस लए वही पद इस चत्र से मेल खाता
है।

संकेत: पहला चत्र आकाश म पंख फैलाकर उड़ती च ड़या का है, इसी लए उसके साथ पुस्तक ने ‘आ खर जब म
आसमान म…’ वाला पद उदाहरण के रूप म पहले ही दे दया है।

अनुमान और कल्पना — पृष्ठ 7
सोचकर और कल्पना करके उत्तर दे ने वाले प्रश्न

अनु मान और कल्पना

प्र.1 क वता क पं क्त है— “आ खर जब म आसमान म, उड़ी दूर तक पंख पसार।” च ड़या ने अंतत: इतनी दूर तक
उड़ान क्य भरी होगी?

इसके एक से अ धक कारण हो सकते ह। सबसे मजबूत कारण ये तीन ह—

भोजन और पानी क खोज: घ सले के पास का दाना-पानी खत्म हो जाने पर पक्षी दूर तक जाते ह।
पंख मजबूत हो जाना: अब वह शशु नह रही। पंख मजबूत होते ही हर पक्षी लंबी उड़ान भरना चाहता है।
ज ासा: उसने शाख तक क दु नया दे ख ली थी। मन म सवाल उठा होगा — इससे आगे क्या है?

सबसे अ ा उत्तर: ज ासा। क वता का अंत यही कहता है — “तभी समझ म मेरी आया, बहुत बड़ा है यह
संसार।” यानी उड़ान का फल भोजन नह , नई समझ नकला।

प्र.2 पक्षी खुले आकाश म बहुत दूर तक उड़ते ह। लंबी दूरी, हजार पेड़ और सैकड़ घ सल के बीच पक्षी अपना
घ सला कैसे ढूँ ढ़ते ह गे?

पक्षी अपना रास्ता याद रखने के लए कई तरीके काम म लाते ह—

नशा नयाँ याद रखना: कौन-सी नद , कौन-सा पहाड़, कौन-सा बड़ा पेड़ — ये नशा नयाँ वे ऊपर से दे खकर पहचानते ह।
अपने पेड़ क पहचान: हर पेड़ क डाल, प त्तय का रंग और घ सले क जगह थोड़ी-थोड़ी अलग होती है।
आवाज़: घ सले म बैठे ब े या साथी बुलाते ह। पक्षी अपने साथी क आवाज़ पहचान लेते ह — इसी लए शाम को कलरव बढ़
जाता है।
सूरज क दशा: सूरज कहाँ है, इससे उन्ह दशा का अंदाज़ा रहता है।

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

क्य : जैसे हम अपने घर का रास्ता दुकान, मोड़ और पेड़ दे खकर याद रखते ह, वैसे ही पक्षी भी नशा नय और
आवाज़ से रास्ता याद रखते ह।

प्र.3 प क्षय ने आकाश म उड़कर जाना क संसार बहुत बड़ा है। हमारे पूवज को यह बात कैसे पता चली होगी?

हमारे पूवज के पास पंख नह थे, इस लए उन्ह ने यात्राएँ क ।

वे पैदल चले, फर बैलगाड़ी और घोड़ से दूर-दूर तक गए।
वे नाव और बड़े जहाज़ से न दयाँ और समुद्र पार करके नए दे श तक पहुँचे।
वे ऊँचे पहाड़ पर चढ़े और ऊपर से बहुत दूर तक फैली धरती दे खी।
रात म तार को दे खकर उन्ह ने दशा पहचानना सीखा।
लौटकर उन्ह ने अपनी बात दूसर को सुनाईं और लखकर भी रख ।

क्य : हर यात्रा से एक नई जगह जुड़ती गई। जब बहुत-सी जगह जुड़ गईं, तब समझ आया क धरती उनक सोच से
कह बड़ी है। यही काम च ड़या ने एक ही उड़ान म कर लया।

प्र.4 जब आप कह बाहर जाते ह तो घर के बड़े-बूढ़े आपको कुछ नदश दे कर भेजते ह। क्या प क्षय के माता- पता भी
उन्ह उड़ने के पूव कुछ नदश दे ते ह गे? य द हाँ, तो वे नदश क्या-क्या हो सकते ह?

हाँ, ज़रूर दे ते ह गे — पर हमारी भाषा म नह , अपनी बोली और अपनी आवाज़ म।
वे नदश कुछ ऐसे हो सकते ह—

बहुत दूर मत जाना, घ सला आँख से ओझल न हो।
बल्ली, बाज और साँप से बचकर रहना।
तेज़ हवा चले तो नीचे उतरकर कसी डाल पर बैठ जाना।
जो दाना दखे, वह सब मत खा लेना — पहले दे ख लेना।
मेरी आवाज़ सुनते ही तुरंत पास आ जाना।
अँधेरा होने से पहले घ सले म लौट आना।

क्य ऐसा लगता है: प क्षय के ब े पहली उड़ान म माँ-बाप के पास-पास ही उड़ते ह और वे लगातार बोलते रहते
ह। यह बोलना ही उनका सखाना है। हमारे घर म भी बड़े यही कहते ह — “सड़क पार ध्यान से करना, अँधेरा होने से
पहले लौट आना।”

कल्पना क उड़ान — पृष्ठ 8

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत
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कल्पना करके कक्षा के सामने बोलने क ग त व ध
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कल्पना क उड़ान

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a s em क जए क आप सभी खुले आकाश म पंख फैलाकर उड़ रहे ह। कोई पहाड़ के ऊपर उड़ रहा है, कोई
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कल्पना
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प्र.1
समुद्र के ऊपर, कोई क्रकेट मैच दे खते हुए उड़ रहा है तो कोई ववाह के भोज का आनंद लेते हुए उड़ रहा है।

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आपको कल्पना करके कक्षा को बताना है क आप ऊपर से नीचे क्या-क्या दे ख रहे ह।

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agहै क इसे उसी तरह सुनाइए जैसे खेल म आँख देखा हाल सुनाया जाता है।

यह बोलकर सुनाने क ग त व ध है। पुस्तक कहती

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कैसे तैयार कर —

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1. पहले एक जगह चु नए — पहाड़, समुद्र और उसका कनारा, जंगल, रे गस्तान, मैदान, गाँव, नगर, बरात, खेल प्र तयो गता,

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सो .चए क ऊपर से क्या दख रहा है, क्या सुनाई दे रहा है और कैसा लग रहा है।a
व ालय, मेला, बाज़ार, च कत्सालय, च ड़याघर या कोई ानीय त्योहार।
2. अब m
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gl3.aवाक्य वतमान काल म बो लए — “म देख रहा/रही हूँ…”, “मुझे अ ा लग रहा है…”।
a 4. बीच-बीच म ‘अरे वाह!’ जैसे शब्द लगाइए। इससे सुनने वाले को मज़ा आता है।
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5. छह-सात वाक्य काफ ह। धीरे और साफ बो लए।

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नमूना उत्तर (मेले के ऊपर उड़ते हुए): म मेले के ऊपर से उड़ रहा हूँ। नीचे झूला गोल-गोल घूम रहा है और ब े
खुशी से चल्ला रहे ह। एक तरफ गुब्बारे वाला खड़ा है — उसके लाल, पीले और हरे गुब्बारे ऊपर से बहुत सुंदर लग

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रहे ह। जलेबी क महक यहाँ तक आ रही है। अरे वाह! अब तो ढोल भी बजने लगा है। लोग च टय जैसे छोटे दख

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रहे ह। म इसका भरपूर आनंद ले रहा हूँ।

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a s eसंmकेत: पुस्तक ने पहाड़ वाला एक उदाहरण पहले ही दे रखा है — ऊँचे पेड़, झरने, सरोवर, ठं डी हवा और सफेद
agl चादर जैसी बफ़। आप उससे मदद ले सकते ह, पर अपनी जगह अलग चु नए ता क कक्षा म सबक बात नई लगे।
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आकार-प्रकार — पृष्ठ 9

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

क वता म ‘अंडे जैसा था आकार’ का उल्लेख है। नीचे कुछ और चत्र दए गए ह जो अलग-अलग आकृ तय के ह। चत्र के नीचे उनके नाम
ल खए। इस काय म आप अपने शक्षक क सहायता भी ले सकते ह।

आकार-प्रकार

प्र.1 नीचे द गई आकृ तय के नाम उनके नीचे ल खए—

1 2 3 4

पृष्ठ 9 पर ब े चार आकृ तयाँ पकड़े हुए ह। हर आकृ त के नीचे नाम लखने के लए खाली जगह है।

चार आकृ तय के नाम —

क्रम आकृ त नाम पहचान

1 हरी गोल आकृ त वृत्त (गोल ) न कोई भुजा, न कोई कोना

2 पीली आकृ त वग 4 बराबर भुजाएँ, 4 कोने

3 गुलाबी आकृ त आयत 4 भुजाएँ और 4 कोने, पर आमने-सामने क भुजाएँ ही बराबर

4 नीली आकृ त ित्र भुज 3 भुजाएँ और 3 कोने

वृत्त (गोल) वग आयत ित्रभुज

चार आकृ तय के नाम भरे हुए।

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

वग और आयत म अंतर कैसे पहचान: दोन के चार कोने होते ह। पर वग क चार भुजाएँ बराबर होती ह, जब क
आयत लंबाई म अ धक और चौड़ाई म कम होता है।

अंडे का आकार: अंडा इनम से कसी एक जैसा नह है। वह एक तरफ से थोड़ा नुक ला और दूसरी तरफ से गोल
होता है। इसी लए क वता ने अलग से कहा — ‘अंडे जैसा था आकार’।

भाषा क बात — पृष्ठ 9-11
शब्द बनाना, वपरीत अथ वाले शब्द और ‘इतना-सा, उतना-सा, जतना-सा, कतना-सा’ का प्रयोग

भाषा क बात

प्र.1 “ फर म नकल गई शाख पर, हरी-भरी थ जो सुकुमार”, क वता क इस पं क्त म ‘सुकुमार’ शब्द आया है। यह
‘सु’ और ‘कुमार’ के मेल से बना है जसका अथ है— कोमल या कोमल अंग वाला। आप भी इसी प्रकार कुछ नए
शब्द बनाइए और उनके अथ खो जए।

सु कुमार सुकुमार कोमल अंग वाला

सु योग्य ……… ………

सु यश ……… ………

सु ……… सुक म अच्छे कम

सु वास ……… ………

सु ……… सुद शन ………

भरी हुई ता लका —

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

सु दूसरा शब्द बना हुआ शब्द अथ

सु कु मार सुकु मार कोमल अंगों वाला

सु योग्य सुयोग्य बहुत योग्य, हर काम के लायक

सु यश सुयश अच्छा नाम , अच्छी कीित

सु कम सुक म अच्छे कम

सु वास सुवास अच्छी महक , सुगंध

सु दशन सुद शन दे खने में सुंद र

नयम: ‘सु’ शब्द के आगे जुड़कर उसे ‘अ ा’ बना दे ता है। इसी लए सु + यश = अ ा यश, सु + वास = अ
महक।

और शब्द बनाइए: सु + पुत्र = सुपुत्र (अ ा बेटा), सु + स्वागत = सुस्वागत, सु + पथ = सुपथ (अ ा रास्ता)।
मेरा वाक्य: बगीचे के फूल क सुवास पूरे आँगन म फैल गई।

प्र.2 नीचे दए गए वाक्य म कुछ रक्त स्थान ह और कुछ शब्द रेखां कत कए गए ह। उन शब्द से वाक्य को पूरा
क जए जो रेखां कत शब्द के वपरीत अथ रखते ह — (क) सूखा और ……………… कचरा अलग-अलग डब्ब
म डाल।

उत्तर — गीला।
पूरा वाक्य: सूखा और गीला कचरा अलग-अलग डब्ब म डाल।

नयम: जन शब्द का अथ एक-दूसरे के उलटा हो, उन्ह वपरीत अथ वाले शब्द कहते ह। ‘सूखा’ का उलटा ‘गीला’
है।

मेरा वाक्य: बा रश म मेरा बस्ता गीला हो गया, इस लए मने उसे धूप म सुखाया।

प्र.3 (ख) दल्ली मेरे घर से ……………… है ले कन गुवाहाट पास म है।

उत्तर — दूर।
पूरा वाक्य: दल्ली मेरे घर से दूर है ले कन गुवाहाट पास म है।

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

कैसे पहचान: वाक्य म ‘ले कन’ शब्द आया है। ‘ले कन’ दो उलट बात को जोड़ता है। इस लए ‘पास’ का उलटा
शब्द ‘दूर’ ही आएगा।

मेरा वाक्य: मेरा व ालय पास म है, पर मेरी मौसी का घर बहुत दूर है।

प्र.4 (ग) अनवर कब ……………… और कब गया, पता ही नह चला।

उत्तर — आया।
पूरा वाक्य: अनवर कब आया और कब गया, पता ही नह चला।

क्य : ‘गया’ का अथ है चला जाना, और उसका उलटा है ‘आया’। ‘आया’ और ‘गया’ साथ आने से वाक्य का अथ
बनता है क अनवर बहुत थोड़ी दे र रुका।

मेरा वाक्य: डा कया अभी-अभी आया और च दे कर चला गया।

प्र.5 (घ) कोई भी काम न तो बड़ा होता है और न ही ………………।

उत्तर — छोटा।
पूरा वाक्य: कोई भी काम न तो बड़ा होता है और न ही छोटा।

वाक्य का अथ: हर काम बराबर होता है। झाड़ू लगाना भी उतना ही ज़रूरी है जतना पढ़ना। ‘बड़ा’ का उलटा शब्द
‘छोटा’ है।

और वपरीत शब्द: दन–रात, ठं डा–गरम, हल्का–भारी, नया–पुराना।
मेरा वाक्य: मेरा भाई मुझसे छोटा है, पर बात बड़ जैसी करता है।

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत
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आइए, अब एक रोचक संवाद पढ़ते ह—
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प्र.6

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सलमा कहती है

a सलमा, तुम्ह कतने पैसे चा हए?
agl जतने पैसे राजू को मले।

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तुम्ह उतने नह मल सकते। तो मुझे कतने पैसे मल सकते ह?

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केवल पचास रुपये। नह , मुझे राजू जतने ही रुपये चा हए।

इतने पैसे तो ऐसे नह मल सकते। a तो फर कैसे मल सकते ह?

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इतना-सा, उतना-सा, जतना-सा और कतना-सा का वाक्य म प्रयोग क जए और उनके अथ भी समझाइए।

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a चार नए शब्द बनते ह। इनके अथ ये ह—
संवाद म सलमा और उसक सहेली बार-बार कतने, जतने, उतने, इतने शब्द का प्रयोग करती ह। इन्ह शब्द म ‘सा’ जोड़ने पर

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शब्द अथ
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कब बोलते ह
.co उदाहरण
agl
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इतना-सा बस इतना ही, बहुत थोड़ा
a gजोlचीज़ पास है और दख रही है मुझे बस इतना-सा दूध चा हए।

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उतना-सा उतना ही थोड़ा जो चीज़ दूर है या पहले बताई जा चुक है मुझे भी उतना-सा ही हलवा द जए।

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a s emमला था, मने पूरा कर लया।
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िजतना-सा िजस मात्र ा का दो चीज़ क तुलना करते समय जतना-सा काम

e m . agडब्बे
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िकतना-सा िकतनी मात्र ा का पूछते समय इस म कतना-सा चावल बचा है?

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ध्यान द जए: ‘सा’ लगते ही मात्रा कम हो जाती है। ‘इतना’ कहने पर मात्रा बड़ी भी हो सकती है, पर ‘इतना-सा’
se m
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कहने पर वह हमेशा थोड़ी ही रहती है। क वता म भी यही हुआ — “बस इतना-सा ही है संसार।”
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संवाद से जो ड़ए: सलमा कहती है “मुझे राजू जतने ही रुपये चा हए।” यहाँ ‘ जतने’ तुलना कर रहा है। सहेली

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कहती है “तुम्ह उतने नह मल सकते।” यहाँ ‘उतने’ उसी मात्रा क ओर इशारा कर रहा है।

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a s emप्र.7
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अब नीचे दए गए शब्द से वाक्य बनाकर सलमा क सहायता क जए — इतना-सा, उतना-सा, जतना-सा,

a कतना-सा।
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नमूना वाक्य —

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

शब्द वाक्य

इतना-सा नन्हा चूज़ा इतना-सा है िक हथेल ी पर आ जाता है।

उतना-सा मेर ा िटिफ़ न भी उतना-सा ही है िजतना तुम्हारा।

िजतना-सा िजतना-सा पानी बचा था, मैंने पौधे में डाल िदया।

िकतना-सा तुम्हे ं िकतना-सा समय और चािहए ?

याद र खए: ये नमूने ह। आप अपने घर, व ालय या खेल से जुड़े अपने वाक्य बनाइए और शक्षक को दखाइए।

क्य ज़रूरी है: पुस्तक कहती है — “ फर आपको राजू जतने रुपये मल जाएँगे।” यानी जब हम सही शब्द से
अपनी बात साफ-साफ कह दे ते ह, तभी सामने वाला हमारी बात ठ क से समझ पाता है।

पाठ से आगे — पृष्ठ 11
पक्षी भोजन क खोज म घ सले से बाहर उड़ते ह। यह जानना रोचक होगा क कौन-सा पक्षी क्या खाता है।

पाठ से आगे

प्र.1 नीचे कुछ प क्षय के नाम दए गए ह। पता क जए क वे क्या खाते ह—

प क्षय के नाम प क्षय का भोजन

बाज ………

हंस ………

तोता ………

बगुल ा ………

कबूतर ………

उ ल्लू ………

भरी हुई ता लका —

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पक्षी भोजन कहाँ से पाता है

बाज छोटे प ी, चूहे, िगलहरी, साँप, मछली ऊपर आकाश से दे खकर झप ा मारता है

हंस जल के पौधे , घास , अनाज के दाने, छोटे कीड़े तालाब और झील के पानी म

तोता फल , अम रूद , िमच, बीज और मेवे पेड़ पर बैठकर कुतर-कुतरकर

बग ल
ु ा मछली, मेंढक , कें चुए , जल के कीड़े पानी म चुपचाप खड़े होकर

कबूतर गेहू,ँ बाजरा, ज्वार जैसे अनाज के दाने और बीज ज़मीन पर चुगकर

उल्लू चूहे, कीड़े-मकोड़े, छोटे प ी रात म शकार करके

एक बड़ी बात: जो पक्षी दाना खाते ह (कबूतर, तोता) उनक च च मोट और मजबूत होती है। जो शकार करते ह
(बाज, उल्लू) उनक च च टे ढ़ और नुक ली होती है। जो पानी से भोजन लेते ह (बगुला, हंस) उनक च च लंबी होती
है। च च दे खकर ही पक्षी का भोजन पहचाना जा सकता है।

खोजबीन क जए: अपने आस-पास के कसी एक पक्षी को दस मनट दे खए और ल खए क उसने क्या खाया।
यही स ी जानकारी है।

कलाकारी — पृष्ठ 12
चत्र बनाना, नृत्य और समूह म गाने क ग त व ध

कलाकारी

प्र.1 अब आप भी नीले आकाश म उड़ते हुए प क्षय का चत्र बनाइए। जब चत्र तैयार हो जाए तो आप चत्र को
पकड़कर एकल या सामू हक नृत्य कर सकते ह या अपने मनभावन गीत पर भाव नृत्य कर सकते ह।

यह चत्र बनाकर करने वाला काम है। कैसे कर —

1. पूरे प े को हल्के नीले रंग से भ रए — यही आपका खुला आकाश है।
2. ऊपर एक कोने म सूरज और दो-तीन सफेद बादल बनाइए।
3. अब पक्षी बनाइए। दूर वाले पक्षी छोटे और अं ेज़ी के ‘v’ जैसे बनाइए। पास वाले एक-दो पक्षी बड़े बनाइए — उनम पंख, च च
और पूँछ साफ दखनी चा हए।
4. नीचे क प म हरे पेड़ और एक घ सला बनाइए, ता क क वता क पूरी बात चत्र म आ जाए।
5. चत्र पूरा होने पर उसे दोन हाथ से पकड़कर, पक्षी क तरह बाँह फैलाकर, अपने मनपसंद गीत पर भाव नृत्य क जए।

अ े चत्र म क्या होना चा हए: नीला आकाश, कम-से-कम चार-पाँच उड़ते पक्षी, और एक ऐसी चीज़ जो क वता
से जुड़ी हो — घ सला, पेड़ क शाख या अंडा।

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

संकेत: पुस्तक कहती है क आप सभी इन चत्र को कक्षा या ग लयारे म प्रद शत कर सकते ह। सबके चत्र एक
साथ लगाने पर पूरी द वार एक आकाश जैसी लगेगी।

प्र.2 अ भभावक / शक्षक / मत्र क सहायता से नीचे दए गए गीत को खो जए और समूह म गाइए— “सूरज एक,
चंदा एक, तारे अनेक, एक ततली, अनेक तत लयाँ, एक गलहरी, अनेक गलह रयाँ, एक च ड़या, अनेक
च ड़याँ...”

यह गाने वाला काम है। कैसे कर —

1. घर पर माता- पता या दादा-दाद से पू छए, या शक्षक से इसक धुन सी खए।
2. कक्षा को दो दल म बाँ टए। पहला दल गाए “एक ततली”, दूसरा दल उत्तर दे “अनेक तत लयाँ”।
3. हर बार ताली क एक ताल पर बो लए, ता क सबक आवाज़ एक साथ चले।

गीत क्या सखाता है: यह गीत एकवचन और बहुवचन सखाता है। एक चीज़ के लए अलग शब्द और अनेक चीज़ के लए अलग
रूप।

एक (एकवचन) अनेक (बहुवचन)

िततली िततिलयाँ

िगलहरी िगलहिरयाँ

िचिड़या िचिड़याँ

तारा तारे

नमूना उत्तर — गीत क नई पं क्तयाँ आप स्वयं जो ड़ए:
एक कली, अनेक क लयाँ,
एक नद , अनेक न दयाँ,
एक पत्ता, अनेक पत्ते,
एक ब ा, अनेक ब े…

आनंदमयी ग त व ध — पृष्ठ 13-14

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

अक्षर जाल, चहचहाने क ग त व ध और पहे लय का चत्र से मलान

आनं द मयी ग त व ध

प्र.1 नीचे दए गए अक्षर जाल म प क्षय के नाम खो जए और उनके बारे म जानकारी एक त्रत क जए। (‘नीलकंठ’
का उदाहरण पहले से घेरा हुआ है।)

नी ल कं ठ ती

मै ब त ख त

ना क बू त र

ची ल गौ रै या

बु ल बु ल बा

सा र स बा ज

इस जाल म कुल दस प क्षय के नाम छपे ह। एक (नीलकंठ) पुस्तक ने घेरकर दखा दया है, बाक नौ ये ह—

पक्षी कहाँ मला कैसे पढ़

नीलकं ठ पहली पंि त, खाने 1–4 बाएँ से दाएँ ( दया हुआ)

तीतर पाँचवाँ खाना, पंि त 1–3 ऊपर से नीचे

मैना पहला खाना, पंि त 2–3 ऊपर से नीचे

बतख दू स री पंि त, खाने 2–4 बाएँ से दाएँ

कबूतर तीसरी पंि त, खाने 2–5 बाएँ से दाएँ

चील चौथी पंि त, खाने 1–2 बाएँ से दाएँ

गौरै या चौथी पंि त, खाने 3–5 बाएँ से दाएँ

बुल बुल पाँचवी ं पंि त, खाने 1–4 बाएँ से दाएँ

सारस छठी पंि त, खाने 1–3 बाएँ से दाएँ

बाज छठी पंि त, खाने 4–5 बाएँ से दाएँ (पाँचव खाने म ऊपर से नीचे भी पढ़ा जा सकता है)

इन प क्षय के बारे म थोड़ी जानकारी —

नीलकंठ — गले और पंख पर सुंदर नीला रंग। खेत म क ड़े खाता है।

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत
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तीतर — ज़मीन पर रहने वाला पक्षी, कम उड़ता है, झा ड़य म छपता है।
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मैना — पीली च च और पीले पैर। बोलना सीख सकती है।
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बतख — पानी म तैरती है, पैर म जाली जैसी झल्ली होती है।

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कबूतर — पुराने ज़माने म च ले जाता था। दाने चुगता है।

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चील — बहुत ऊँचा उड़ती है और ऊपर से नीचे का शकार दे ख लेती है।
गौरैया — हमारे घर म, पंखे और छ े के पीछे घ सला बनाती है।

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बुलबुल — सर पर छोट कलगी होती है, मीठा गाती है।

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सारस — बहुत लंबे पैर और लंबी गदन। जोड़े म रहता है।
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बाज — बहुत तेज़ उड़ने वाला शकारी पक्षी, नज़र बहुत तेज़ होती है।

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संकेत: नाम खोजने के दो ही रास्ते आज़माइए — बाएँ से दाएँ और ऊपर से नीचे। पहले हर पं क्त प ढ़ए, फर हर
m
खाना ऊपर से नीचे प ढ़ए।
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a प्र.2 जब शशु पक्षी चहचहाते ह तो एक मधुर ध्व न सुनाई दे ती है। आइए, हम भी शशु प क्षय क तरह चहचहाएँ।

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सभी ब े अपनी एक हथेली अपने होठ पर रख। सभी मलकर च -च क ध्व न नकाल।
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यह पूरी कक्षा के साथ करने वाली ग त व धaहैg। कैसे कर —

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1. सब ब े अपनी एक हथेली होठ पर हल्के-से र खए।

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2. अब सब मलकर धीरे-धीरे च -च क ध्व न नका लए। हथेली के कारण आवाज़ काँपती हुई नकलेगी — ठ क शशु पक्षी

coधीमेm, फर थोड़ा तेज़, फर से धीमे — जैसे सुबह पक्षी जागते ह।
जैसी।
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3. पहले

g l a 4. अब रुककर सु नए। पूरी कक्षा पेड़ क शाखाओं जैसी लगेगी।
a 5. इसके बाद पुस्तक के सुझाव के अनुसार बारी-बारी से कसी भी पक्षी क ध्व न नका लए — कौआ, कोयल, मुगा, तोता, कबूतर
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— और ता लय क गड़गड़ाहट से उसका स्वागत क जए।

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इससे क्या सीखते ह: हर पक्षी क आवाज़ अलग होती है। इसी अलग आवाज़ से पक्षी एक-दूसरे को पहचानते ह
और बुलाते ह। इसी कारण सुबह-शाम कलरव सुनाई दे ता है।

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नमूना उत्तर (कौन-सा पक्षी कैसे बोलता है): कौआ — काँव-काँव, कोयल — कुहू-कुहू, मुगा — कुकड़ूँ-कूँ,
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च ड़या — च -च , कबूतर — गुटर-गूँ।

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 नीचे पशु-प क्षय से संबं धत कुछ पहे लयाँ द गई ह। पहे लय का उपयुक्त चत्र से मलान क जए — (1) पंख
म नाखून ँ रखता, रात अँधेरे म ही उड़ता। दन म न म भोजन पाऊँ, उलटा होकर के सो जाऊँ। (2) पत्त जैसा
उसका रंग, कुतर-कुतर खाने का ढं ग। घर म भी पाला जाता, नाम बताओ उसका ाता। (3) नीड़ नह वह कभी
बनाती, बाग क रानी कहलाती। काला रंग है उसका भैया, सबके दल को खूब लुभाती। (4) दनभर सूरत नह
दखाता, रात कुलाँचे भरता। और समझता ऐसा जैसे, सूरज उससे डरता।

त्र 1
िच त्र 2
िच िचत्र 3 िचत्र 4

पृष्ठ 14 पर दए गए चार चत्र — चत्र 1 काले रंग का लंबी पूँछ वाला पक्षी, चत्र 2 बड़ी-बड़ी आँख और सर पर दो
कल गय वाला भूरा पक्षी, चत्र 3 चमड़े जैसे चौड़े पंख से उड़ता जीव, चत्र 4 लाल टे ढ़ च च वाला हरा पक्षी।

सही मलान —

पहेली उत्तर चत्र पहचान क कुंजी

1. पंखों में नाखून हू ँ रखता… चमगादड़ िचत्र 3 उलटा लटककर सोता है और रात म उड़ता है

2. पत्तों जैस ा उसका रंग … तोता िचत्र 4 हरा रंग, कुतर-कुतरकर खाना, घर म पाला जाना

3. नीड़ नही ं वह कभी बनाती… कोयल िचत्र 1 काला रंग, मीठ कूक, अपना घ सला नह बनाती

4. िदनभर सूर त नही ं िदखाता… उ ल्लू िचत्र 2 दन म नह दखता, रात म जागता है

पहेली 1 उल्लू क्य नह : उल्लू भी रात म उड़ता है, पर उलटा लटककर सोना केवल चमगादड़ करता है। ‘पंख म
नाखून’ भी चमगादड़ क ही पहचान है — उसके पंख के कनारे पर छोटा नाखून होता है।

पहेली 3 का मज़ा: ‘नीड़’ का अथ है घ सला। कोयल अपना घ सला नह बनाती, वह कौए के घ सले म अंडे रख
दे ती है। इसी लए पहेली कहती है — “नीड़ नह वह कभी बनाती।”

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

पुस्तक क एक बात ध्यान द जए: पहेली 1 म ‘पंख म नाखून हूँ रखता’ और पहेली 4 म ‘सूरज उससे डरता’
लखा है। बोलचाल म हम ‘म रखता हूँ’ और ‘सूरज उससे डरता है’ कहते ह। पहे लय म तुक मलाने के लए शब्द
इसी तरह छोटे कर दए जाते ह।

बो लए फटाफट — पृष्ठ 15
नीचे कुछ रोचक और चुनौतीपूण पहे लयाँ द गई ह, शीघ्रता से उनका उत्तर द जए—

बो लए फटाफट

प्र.1 प रवार हरा, हम भी हरे, एक थैली म तीन-चार भरे।

उत्तर — मटर। (पुस्तक ने पृष्ठ 15 के नीचे यही उत्तर दया है।)

कैसे पहचान: मटर क फली हरी होती है — यही ‘हरी थैली’ है। उसके भीतर तीन-चार हरे दाने भरे रहते ह — यही
‘हम भी हरे’ वाला प रवार है।

प्र.2 एक लाठ क अजब कहानी उसके भीतर मीठा पानी।

उत्तर — ग ा।

कैसे पहचान: ग ा दे खने म लाठ जैसा लंबा और सीधा होता है, पर उसके भीतर मीठा रस भरा रहता है। इसी रस
से गुड़ और चीनी बनती है।

प्र.3 एक पक्षी ऐसा, जसक दुम पर पैसा।

उत्तर — मोर।

कैसे पहचान: मोर क लंबी पूँछ के हर पंख पर एक गोल चमक ला नशान होता है। वह नशान बलकुल सक्के
(पैसे) जैसा दखता है। इसी लए कहा गया — ‘ जसक दुम पर पैसा’।

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

जानने योग्य: मोर हमारा रा ीय पक्षी है।

प्र.4 लाल ड बया, पीले खाने, भीतर रखे मोती के दाने।

उत्तर — अनार।

कैसे पहचान: अनार का छलका लाल होता है — यही ‘लाल ड बया’ है। भीतर पीली-सी झल्ली दान को छोटे -
छोटे खान म बाँटती है, और हर खाने म चमकते लाल दाने मोती जैसे सजे रहते ह।

प्र.5 जाती ँ म हर जगह, पर हलती नह कसी भी तरह।

उत्तर — सड़क।

कैसे पहचान: सड़क गाँव से नगर तक, पहाड़ से मैदान तक — हर जगह ‘जाती’ है, यानी पहुँचती है। पर वह अपनी
जगह से हलती-डु लती नह । यही इस पहेली का मज़ा है।

संकेत: ये पाँच पहे लयाँ फटाफट बोलने के लए ह। कक्षा म दो दल बनाइए — एक दल पहेली बोले, दूसरा दल
तुरंत उत्तर दे ।

म त क उड़ान — पृष्ठ 16
पाठ के अंत म दया गया छोटा पाठ — भारत क पहली म हला पायलट सरला ठकराल का प रचय। पुस्तक ने इस अंश के साथ कोई प्रश्न नह
दया है; नीचे के प्रश्न अभ्यास के लए जोड़े गए ह।

म त क उड़ान

प्र.1 सरला ठकराल कौन थ ? उनका जन्म कब और कहाँ हुआ था?

सरला ठकराल भारत क पहली म हला पायलट थ । उन्ह प्यार से ‘म त’ कहा जाता था।

जन्म: सन् 1914 म, दल्ली म।
उपल : मात्र 21 वष क आयु म वे पायलट का लाइसस पाने वाली पहली भारतीय म हला बन ।

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत AglaSem · NCERT Solutions

यह बात बड़ी क्य है: उस समय बहुत कम लड़ कयाँ घर से बाहर नकलकर ऐसा काम करती थ । वमान उड़ाना तो
और भी क ठन माना जाता था। इसी लए उनका पहली होना बहुत बड़ी बात है।

प्र.2 सरला ठकराल ने पहली बार अकेले कौन-सा वमान उड़ाया था और कब?

उन्ह ने सन् 1936 म पहली बार लाहौर म जप्सी मॉथ नाम का वमान अकेले उड़ाया था। यह दो सीट वाला छोटा वमान था।

‘अकेले उड़ाया’ का अथ: उड़ान सीखते समय साथ म एक सखाने वाला बैठता है। जब कोई पहली बार बना
कसी क मदद के वमान उड़ा ले, तभी माना जाता है क उसने सचमुच उड़ना सीख लया।

प्र.3 सरला ठकराल क कौन-सी बात उन्ह सबसे अलग बनाती है?

वे साड़ी पहनकर वमान उड़ाने वाली पहली म हला थ । यही बात उन्ह सबसे अलग बनाती है।
साथ ही, लाइसस पाने के लए उन्ह ने 1,000 घंटे क उड़ान का क ठन अभ्यास कया था।

क्य यह खास है: इससे पता चलता है क अपना काम करने के लए अपनी पहचान छोड़नी नह पड़ती। उन्ह ने
अपनी साड़ी भी रखी और अपना सपना भी पूरा कया। और 1,000 घंटे का अभ्यास यह बताता है क बड़ी सफलता
के पीछे लंबी मेहनत होती है।

प्र.4 इस पाठ का नाम ‘म त क उड़ान’ क्य रखा गया होगा? इसका ‘ च ड़या का गीत’ क वता से क्या संबंध है?

नाम का कारण: सरला ठकराल को घर म प्यार से ‘म त’ कहा जाता था, और उन्ह ने वमान क उड़ान भरी। इस लए ‘म त क
उड़ान’ नाम रखा गया।
क वता से संबंध: दोन एक ही बात कहते ह।

च ड़या का गीत म त क उड़ान

िचिड़या पहले अंडे में, िफर घोंस ले में, िफर शाखों पर रही मित भी पहले घर में ही थी

िफर उसने पंख पसारकर उड़ान भरी िफर उ न्होंने िवमान ले क र आकाश में उड़ान भरी

तब उसे लगा — “बहुत बड़ा है यह संस ार” उ न्होंने भी िदखाया िक लड़िकयों के िलए आकाश खुल ा है

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कक्षा 4 हद अध्याय 1 च ड़या का गीत
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क्य दोन साथ रखे गए: क वता एक च ड़या क उड़ान क बात करती है और यह पाठ एक असली म हला क
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उड़ान क । पुस्तक यह बताना चाहती है क उड़ान केवल पंख से नह , हम्मत और मेहनत से भी भरी
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अध्याय — एक नज़र म
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क वता क च ड़या चार बार अपना ठकाना बदलती है — अंडा, घ सला, पेड़ क शाख और खुला आकाश।
पहले तीन ठकान पर वह हर बार कहती है — “तब म यही समझती थी, बस इतना-सा ही है संसार।”
जब वह पंख पसारकर दूर तक उड़ती है, तभी उसे समझ आता है — “बहुत बड़ा है यह संसार।”
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क वता का भाव यह है क जतना हम बाहर नकलते और दे खते ह, उतनी ही हमारी समझ बढ़ती जाती है।
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अभ्यास म वपरीत शब्द, ‘सु’ से बने शब्द, ‘इतना-सा/उतना-सा/ जतना-सा/ कतना-सा’, प क्षय का भोजन और पहे लयाँ
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sष्ठe 16 का पाठ ‘म त क उड़ान’ भारत क पहली म हला पायलट सरला ठकराल से हमारा प रचय कराता है।
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त्व रत पुनरावृ त्त
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शब्द अथ
a क वता/पाठ क पं क्त आपका अपना वाक्य

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घ सला प ी का घर, जो ितनकों से बनता है फर मेरा घर बना घ सला आँगन के पेड़ पर च ड़या ने घ सला बनाया है।

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m .co सूखी घास या डंठल का छोटा टुकड़ा सूखे तनक से तैयार
a g च ड़या च च म तनका लेकर उड़ी।

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ag शाख पेड़ की डाल फर म नकल गई शाख पर आम क शाख पर कोयल बैठ है।

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सुकुमार कोमल, कोमल अंग ों वाला हरी-भरी थ जो सुकुमार नन्ह पौधे क प त्तयाँ बहुत सुकुमार ह।

. दूर तक पंख पसार a g l
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पसारना फै लाना उड़ी मोर ने अपने पंख पसार दए।

संसार दुिनया, सारा जगत agl बहुत बड़ा है यह संसार। यह संसार बहुत सुंदर है।

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इतना-सा बहुत छोटा, इतनी-सी मात्रा का बस इतना-सा ही है संसार। मुझे बस इतना-सा दूध चा हए।

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कलरव पि यों की मीठी चहचहाहट प क्षय क चहचहाहट (कलरव)

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gl a घोंस ला नीड़ नह वह कभी बनाती कोयल अपना नीड़ नह बनाती।

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सन्माग अच्छा रास्ता, सही राह सबको ही सन्माग दखाएँ अ े मत्र हम सन्माग पर ले जाते ह।

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 4
TypeSolution
Pages37
Languagehindi
Updated13 Oct 2026