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NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 12 शतरंज में मात

कक्षा 4 Hindi Chapter 12 शतरंज में मात के सभी प्रश्नों के विस्तृत हल AglaSem Docs पर निःशुल्क डाउनलोड करें। नवीनतम एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक (वीणा, 2026-27 एनईपी पाठ्यक्रम) पर आधारित, विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए चरण-दर-चरण समाधान। Download NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 12 शतरंज में मात PDF free at AglaSem Docs, with step-by-step answers based on the latest NCERT textbook (Veena, 2026-27 NEP syllabus).
NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 12 शतरंज में मात - Page 1 of 33

About NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 12 शतरंज में मात

NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 12 शतरंज में मात is available here for free download. Published by NCERT for Class 4, this solution can be viewed online or downloaded as a PDF (33 pages). Candidates preparing for Class 4 can use NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 12 शतरंज में मात to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

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NCERT Solutions Class 4 Hindi Chapter 12 शतरंज में मात – Text

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F R E E S T U D Y M AT E R I A L F O R E V E R Y S T U D E N T

क ा4

एनसीईआरट समाधान

अध्याय 12: शतरंज म मात

एनसीईआरट पाठ्यपुस्तक — वीणा

पुस्तक पृष्ठ खंड प्रश्न माध्यम

139 – 153 12 32 हन्द

Solutions, notes, sample papers & more at 28 pages

Page 2

कक्षा 4 हद अध्याय 12 शतरंज म मात AglaSem · NCERT Solutions

क ा 4 · हद · वीणा

एनसीईआरट समाधान — अध्याय 12: शतरंज म मात
यह पाठ एक नाटक (एकांक ) है। इसे पढ़ने के लए नह , मंच पर खेलने के लए लखा गया है। जलन से भरे दरबारी तेनालीरामन को शतरंज के
मुकाबले म फँसा दे ते ह। तेनाली हर बाजी हार जाते ह, पर अपनी बु द्ध से मुंडन के दं ड से भी बच नकलते ह।

पाठ्यपु स्तक पु स्तक पृ ष्ठ

वीणा (क ा 4) 139 – 153

खं ड प्रश्न

12 32

माध्यम
हन्द

पाठ के भीतर — पृष्ठ 139–148
पुस्तक इन पृष्ठ पर कोई अभ्यास नह दे ती; ये प्रश्न नाटक को समझने के लए जोड़े गए ह।

पाठ के भीतर

प्र.1 इस नाटक म कौन-कौन पात्र ह? पात्र क सूची बनाइए।

इस नाटक म नौ तरह के पात्र बोलते ह। पुस्तक ने अलग से पात्र-सूची नह छापी है। हर संवाद के पहले बाईं ओर पात्र का नाम
लखा है। उन्ह नाम से यह सूची बनती है —

पात्र यह कौन है नाटक म क्या करता है

राजा (कृ ष्णदे व राय) वजयनगर के महाराज तेनाली से शतरंज खेल ते है ं और ोध में मुंडन का दंड दे ते है ं

तेनालीरामन (तेनाली) दरबार के वदूषक और राज परामशदाता हर बाजी हारते है,ं पर बुि से दंड से बच जाते है ं

पहला दरबारी दरबार का एक दरबारी तेनाली को फँ साने का उपाय िनकालता है

दू स रा दरबारी दरबार का एक दरबारी राजा को भड़ काता है

तीसरा दरबारी दरबार का एक दरबारी तेनाली को िचढ़ ाता है — “जरा बचके खेिलएगा, महाराज। ”

चौथा दरबारी दरबार का एक दरबारी शतरंज के मुक ाबले का सुझाव दे ता है

सब दरबारी / दरबारीगण सब दरबारी एक साथ एक ही बात िमलकर बोलते है ं

एक से वक दरबार का सेवक राजा और तेनाली के आने की सूचना दे ता है

नाई बाल बनाने वाला मुंडन करने के िलए बुल ाया जाता है

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कक्षा 4 हद अध्याय 12 शतरंज म मात AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य : नाटक म लेखक कुछ नह बताता। सारी बात पात्र ही बोलते ह। इस लए हर संवाद से पहले बोलने वाले
का नाम लखना ज़रूरी होता है।

प्र.2 यह नाटक कतने दृश्य म बँटा है? हर दृश्य म क्या होता है?

यह नाटक तीन दृश्य म बँटा है — पहला दृश्य, दूसरा दृश्य और तीसरा दृश्य।

दृश्य जगह क्या होता है पृष्ठ

पहला राजा का दरबार दरबारी तेनाली से जलकर उपाय सोचते है। ं वे राजा से कहते है ं िक तेनाली शतरंज 139–
दृ श्य के बड़ े िखलाड़ ी है।
ं राजा मुक ाबले की आ ा दे दे ते है।
ं 142

दू स रा दरबार भवन, बीच म खेल होता है। तेनाली हर चाल गलत चलते है।
ं राजा ोध में शतरंज उलट दे ते है ं 142–
दृ श्य शतरंज क चादर और मुंडन का दंड सुनाते है।
ं 145

तीसरा दरबार भवन, बीच म नाई उ स्तरा ले क र आता है। तेनाली दो चाले ं चलकर दंड से बच जाते है।
ं राजा 146–
दृ श्य ऊँचा मंच पस न्न होकर उ न्हे ं बाग ले जाते है।
ं 148

दृश्य कैसे पहचान: हर दृश्य के अंत म कोष्ठक म लखा है — (पदा गरता है)। इसका अथ है क मंच का पदा गर
गया और वह हस्सा पूरा हो गया। फर अगले दृश्य का नाम मोटे अक्षर म छपा है।

संकेत: दृश्य बदलने पर जगह भी बदल जाती है। पहले दरबार, फर खेल क चौक , फर ऊँचा मंच।

प्र.3 नाटक म कोष्ठक ( ) के भीतर लखी पं क्तयाँ कसके लए होती ह? पाठ से तीन उदाहरण द जए।

कोष्ठक के भीतर लखी पं क्तय को मंच- नदश कहते ह। ये पात्र के बोलने के लए नह होत । ये अ भनय करने वाल को बताती ह
क मंच पर क्या करना है।
पाठ से उदाहरण —

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कक्षा 4 हद अध्याय 12 शतरंज म मात AglaSem · NCERT Solutions

मंच- नदश यह क्या बताता है

(राजा का दरबार। दरबारी अपने-अपने आसन पर बैठे है।
ं ) मंच पर कौन-सी जगह िदखानी है और कौन कहाँ बैठा है

( ोिधत) तेनाली, तुम ने बताया नही ं… यह संवाद िकस भाव से बोलना है — यहाँ गुस्से से

(मोहरा उठाकर रखते है।
ं ) बोलते समय पात्र को क्या काम करना है

(पद िगरता है) दृ श्य यही ं समाप्त हो गया

ऐसा क्य : नाटक मंच पर खेला जाता है। दशक को अ भनय दखता है, लखी बात नह । इस लए भाव और काम
अलग से कोष्ठक म लखने पड़ते ह।

ध्यान द जए: पुस्तक म ये पं क्तयाँ तरछे अक्षर म छपी ह। इससे पता चलता है क इन्ह बोलना नह है।

प्र.4 नाटक और कहानी के लखने के ढं ग म क्या अंतर है?

दोन म कहानी तो होती ही है। पर लखने का ढं ग अलग होता है।

बात नाटक कहानी

पंिक्त कै से शुरू होती है पहले पात्र का नाम , िफर डै श, िफर उसकी बात सीधे पैरा ाफ़ म लखी जाती है

कौन बताता है सब कु छ पात्र स्वयं बोलकर बताते है ं लेखक बीच-बीच म आकर बताता है

कोष्ठक कोष्ठक में मंच-िनद श होते है ं ऐसे मंच- नदश नह होते

बँटवारा दृ श्यों में बँटा होता है पैरा ाफ़ म बँट होती है

िकसिलए िलखा जाता है मंच पर खेल ने के िलए पढ़ने या सुनाने के लए

एक ही बात दोन ढं ग से दे खए —

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कक्षा 4 हद अध्याय 12 शतरंज म मात
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नाटक की तरह:
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राजा – ( ोिधत) ते न ाली, त मु ने बताया नही ं िक त मु शतरंज में मािहर हो?
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ते न ाली – (चिकत) शतरंज और मै!ं
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कहानी की तरह:
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राजा ने गुस्से में ते न ाली से पूछा िक उसने शतरंज का हन
ु र िछपाकर क्यों रखा। ते न ाली चौंक गया।
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ऐसा क्य : कहानी म लेखक हम “गुस्से म” बता सकता है। नाटक म लेखक मंच पर नह होता। इस लए वह भाव
कोष्ठक म लखकर अ भनय करने वाले को स प दे ता है।
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a प्र.5 नाटक क घटनाओं को क्रम से ल खए।

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घटनाएँ इस क्रम म होती ह —
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1. दरबारी आपस म कहते ह क राजा तेनाली को बहुत सर चढ़ाते ह।

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2. पहला दरबारी एक उपाय नकालता है। सब उसे घेरकर खुसुर-फुसुर करते ह।

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3. राजा आते ह। दरबारी कहते ह क तेनाली शतरंज के अ त खलाड़ी ह।

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4. राजा शतरंज के मुकाबले क आज्ञा दे दे ते ह। तेनाली मना करते ह, पर कोई सुनता नह ।

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5. खेल होता है। तेनाली क हर चाल अनाड़ी नकलती है। उनका प्यादा, मंत्री और राजा एक-एक कर पट जाते ह।
a 6. राजा क्रोध म शतरंज उलट दे ते ह। वे भरी सभा म मुंडन का दं ड सुना दे ते ह।

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com ह। राजा कोष से वह रकम भजवा देते ह। a
7. तीसरे दृश्य म नाई उस्तरा लेकर आता है।

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9. फर तेनाली कहते ह क मुंडन माता- पता कeे m
8. तेनाली कहते ह क बाल पर पाँच हजार अश फयाँ उधार

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ह।gवेlप्रसन्न होकर तेनाली को बाग ले जाते ह।
स्वग सधारने पर होता है, और अब राजा ही उनके माता- पता ह।
10. राजा घबराकर दं ड वापस ले लेते a

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ध्यान द जए: तेनाली ने दो चाल चल — पहली अश फय वाली, दूसरी माता- पता वाली। पहली चाल से उन्ह धन
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मला, दूसरी से दं ड टल गया।

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बातचीत के लए — पृष्ठ 149
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कक्षा 4 हद अध्याय 12 शतरंज म मात AglaSem · NCERT Solutions

नाटक पढ़ने के बाद क ा म बातचीत के लए दए गए प्रश्न

बातचीत के लए

प्र.1 आपको यह नाटक कैसा लगा और क्य ?

यह आपक अपनी राय का प्रश्न है। पहले साफ़-साफ़ बताइए क नाटक अ ा लगा या नह । फर एक-दो वाक्य म कारण द जए।
अ े उत्तर म ये बात आनी चा हए —

नाटक का कौन-सा हस्सा आपको सबसे अ ा लगा।
वह क्य अ ा लगा — हँसी आई, तेनाली क बु द्ध पसंद आई, या अंत च काने वाला था।
नाटक पढ़ने म कहानी से अलग क्या लगा।

नमूना उत्तर: मुझे यह नाटक बहुत अ ा लगा। सबसे मज़ेदार हस्सा वह है जब तेनाली कहते ह क अब राजा ही
मेरे माता- पता ह। राजा तुरंत घबरा गए और दं ड वापस ले लया। मुझे यह भी अ ा लगा क नाटक म हर पात्र स्वयं
बोलता है। पढ़ते समय लगता है क सब सामने खड़े होकर बात कर रहे ह।

ऐसा क्य : नाटक म लेखक बीच म नह आता। इसी लए यह कहानी से अ धक जीवंत लगता है।

प्र.2 आपने तेनालीरामन के कस्स क तरह और कसके बु मानी के कस्से सुने ह? उनम से कोई एक सुनाइए।

यह सुनाने का काम है। पहले नाम बताइए, फर छोटा-सा कस्सा सुनाइए।
अ े उत्तर म ये बात आनी चा हए —

उस बु द्धमान व्य क्त का नाम।
उसके सामने कौन-सी क ठन बात आई।
उसने बु द्ध से उसे कैसे हल कया।

नमूना उत्तर: मने बीरबल के कस्से सुने ह। एक बार बादशाह ने दरबार म एक लक र ख च द । उन्ह ने कहा क इसे
छु ए बना छोटा कर दो। सब चुप रहे। बीरबल ने उसके पास एक बड़ी लक र ख च द । अब पहली लक र अपने आप
छोट दखने लगी।

संकेत: आप गोनू झा, मुल्ला नसीरु न या अपने गाँव-घर का कोई कस्सा भी सुना सकते ह। बस अंत म यह ज़रूर
बताइए क बु द्ध कहाँ लगी।

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कक्षा 4 हद अध्याय 12 शतरंज म मात AglaSem · NCERT Solutions

प्र.3 तेनालीरामन क तरह क्या आपने भी कभी कसी क ठन प र त को संभाला है? य द संभाला है तो कैसे?

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। पहले हाँ या नह क हए। फर अपनी बात बताइए।
अ े उत्तर म ये बात आनी चा हए —

क ठनाई क्या थी।
उस समय आपने क्या सोचा।
आपने क्या कया और आ खर म क्या हुआ।

नमूना उत्तर: हाँ, एक बार मने ऐसा कया था। खेलते समय मेरी छोट बहन का गुब्बारा पेड़ क डाल म अटक गया।
वह रोने लगी। म डाल तक नह पहुँच सकता था। मने एक लंबी छड़ी ली और उसम कपड़ा बाँध दया। फर धीरे से
गुब्बारा नीचे गरा लया।

ऐसा क्य : तेनाली ने भी ताकत से नह , सोच से काम नकाला। क ठनाई म घबराने क जगह सोचना ही असली
चतुराई है।

प्र.4 य द तेनालीरामन शतरंज का खेल जानते तो नाटक का अंत क्या होता?

य द तेनाली शतरंज जानते, तो नाटक का अंत बहुत सीधा और कम मज़ेदार होता।

वे राजा से बराबरी का खेल खेलते। राजा को खेल का आनंद आता।
राजा को यह न लगता क तेनाली जान-बूझकर हार रहे ह। इस लए उन्ह क्रोध ही न आता।
मुंडन का दं ड सुनाया ही नह जाता। अश फय वाली और माता- पता वाली चाल चलने क ज़रूरत ही न पड़ती।
दरबा रय क चाल भी नाकाम रहती, क्य क उन्ह ने तो तेनाली को अनाड़ी सद्ध करके फँसाना चाहा था।

ऐसा क्य : नाटक का सारा मज़ा इसी बात पर टका है क तेनाली को खेल आता ही नह । शतरंज म वे हारे, पर बु द्ध
क चाल म जीत गए। पाठ का नाम भी इसी लए “शतरंज म मात” है।

संकेत: इसका एक और उत्तर भी ठ क है — य द तेनाली जीत जाते तो राजा का अपमान होता और दरबारी और
खुश होते। बस अपना कारण ज़रूर ल खए।

सो चए और ल खए — पृष्ठ 149

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1. नम्न ल खत प्रश्न के उत्तर पाठ के आधार पर द जए —

सो चए और ल खए

प्र.1 (क) सभी दरबारी तेनालीरामन से ई या क्य करते थे?

सभी दरबारी तेनालीरामन से ईष्या करते थे, क्य क राजा उन्ह क बात सुनते और उन्ह क प्रशंसा करते थे।

तीसरा दरबारी कहता है — “महाराज ने भी बहुत सर चढ़ाया है तेनाली को!”
चौथा दरबारी राजा क नकल करके चढ़ाता है — “हाँ तेनाली! वाह तेनाली! क्या पते क बात कही तेनाली ने…”
वही दरबारी कहता है — “कान पक गए ह प्रशंसा सुनते-सुनते।”
दूसरा दरबारी कहता है क महाराज तो तेनाली क मु म ह, इस लए वे हम जैस को क्य पूछगे।

ऐसा क्य : दरबारी कई बार तेनाली को नीचा दखाने का प्रयत्न कर चुके थे। हर बार तेनाली क चतुराई के आगे
उनक एक नह चली। इसी हार से उनक जलन और बढ़ गई।

प्र.2 (ख) दरबा रय ने राजा से तेनालीरामन के बारे म क्या कहा?

दरबा रय ने राजा से झूठ कहा क तेनालीरामन शतरंज के बहुत बड़े खलाड़ी ह। उन्ह ने ये बात कह —

पहला दरबारी — “अभी नह आए। लगता है शतरंज का खेल जमा है कह ।”
दूसरा दरबारी — “हाँ महाराज, वे तो अ त खलाड़ी ह।”
तीसरा दरबारी — “पर महाराज क बराबरी नह कर सकते।”
चौथा दरबारी — “महाराज, आज्ञा हो तो मुकाबला आयो जत कया जाए।”
पहला दरबारी — “वह आपक हार नह दे खना चाहता महाराज, इस लए छपाए रखा। पर वास्तव म बड़ा घाघ है तेनाली। एक
से एक खला ड़य को मात दे चुका है।”
बाद म सब दरबारी बोले — “हमने महाराज अपनी आँख से इन्ह बाजी पर बाजी जीतते हुए दे खा है।”

ऐसा क्य : यह सब उनक चाल थी। वे चाहते थे क तेनाली राजा से हार और भरी सभा म उनका अपमान हो जाए।

प्र.3 (ग) शतरंज खेलते समय राजा को तेनालीरामन पर क्रोध क्य आ रहा था?

राजा को क्रोध इस लए आ रहा था, क्य क उन्ह लगा क तेनाली जान-बूझकर हार रहे ह। राजा ने इसे अपना अपमान समझा।

तेनाली क हर चाल अनाड़ी नकल रही थी। राजा बोले — “अरे, यह तो सरासर मूखता है। अवश्य जान-बूझकर हार रहा है।”
वे गरजकर बोले — “तेनाली मन से खेलो!” और फर — “अपना सही रंग दखाओ, खेल जमाओ!”

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कक्षा 4 हद अध्याय 12 शतरंज म मात AglaSem · NCERT Solutions

तेनाली का प्यादा पटा तो राजा बोले — “उड़ गया न तुम्हारा प्यादा! फर जानकर हारे तुम।”

ऐसा क्य : दरबा रय ने राजा के मन म यह बात बठा द थी क तेनाली बहुत बड़े खलाड़ी ह। इस लए स ी हार भी
राजा को नाटक लगी। राजा चाहते थे क बराबरी का खेल हो, क्य क “बराबर का खलाड़ी मले तभी खेल का
आनंद आता है।”

प्र.4 (घ) तेनालीरामन ने मुंडन से बचने के लए क्या चाल चली?

तेनालीरामन ने दो चाल चल । दोन चाल से वे दं ड से बच गए।

चाल तेनाली ने क्या कहा क्या हुआ

पहली “महाराज, इन बाल पर मने पाँच हजार अश फयाँ उधार ली ह। जब तक ऋण न राजा ने कोष से पाँच हजार अशिफ याँ तेनाली
चाल चुका दूँ , केश कटवाने का कोई अ धकार नह मुझे।” के घर िभजवा दी ं

दू स री “हमारे यहाँ माता- पता के स्वग सधारने पर ही मुंडन होता है। महाराज अब राजा घबरा गए और बोले — “रोक दो हाथ,
चाल आप ही मेरे माता- पता ह… इधर मेरा मुंडन हो, उधर आप स्वग सधार तो?” नाई! तेनाली, दंड वापस िलया मैंने। ”

बीच म तेनाली ने आँख मूँदकर, हाथ जोड़कर मंत्र भी पढ़े — “ओऽम् नमो शवाय।” उन्ह ने कहा क वे राजा क भलाई के लए
प्राथना कर रहे ह।

ऐसा क्य : तेनाली ने राजा से लड़ाई नह क । उन्ह ने ऐसी बात कही जससे राजा को अपनी ही चता हो गई। इसी
से दं ड अपने आप टल गया।

प्र.5 (ङ) घर म खेले जाने वाले खेल म आपको सबसे अ ा खेल कौन-सा लगता है? वह खेल कैसे खेला जाता है?

यह आपक पसंद का प्रश्न है। पहले खेल का नाम ल खए। फर तीन-चार वाक्य म बताइए क वह कैसे खेला जाता है।
अ े उत्तर म ये बात आनी चा हए —

खेल का नाम।
कतने खलाड़ी चा हए और क्या सामान चा हए।
खेल शुरू कैसे होता है और जीत कैसे होती है।

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कक्षा 4 हद अध्याय 12 शतरंज म मात
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नमूना उत्तर: मुझे साँप-सीढ़ सबसे अ
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ा लगता है। इसे दो या उससे अ धक खलाड़ी खेल सकते ह। एक बोड और

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l खाने पर पहुँचता है,
एक पासा चा हए। हर खलाड़ी बारी-बारी से पासा फकता है और अपनी गोट उतने खाने आगे बढ़ाता
. coऊपर चढ़ जाती है। साँप मलने पर नीचे उतर आती है। जो सबसे पहले आ
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emहै।
मलने पर गोट

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वही जीतता

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संकेत: आप लूडो, गु े , कैरम, अ ा-चक्कन या शतरंज के बारे म भी लख सकते ह। खेल के नयम अपने शब्द म,

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क्रम से ल खए।

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सो चए और ल खए — पृष्ठ 149

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2. कसने, कससे कहा?

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सो चए और ल खए

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(क) “शतरंज? क्या तेनालीरामन शतरंज के शौक न ह?”
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कसने कससे

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राजा (कृ ष्णदे व राय) ने दरबािरयों से

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m .c ने कहा था क तेनाली अभी नह आए, लगता है कह शतरंज का खेल जमाaहैg। यह सुनकर राजा ने च ककर दरबा रय
seयह प्रश्न पूछा। उत्तर दूसरे दरबारी ने दया — “हाँ महाराज, वे तो अ त खलाड़ी ह।”
पहले दरबारी

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ध्यान द जए (पुस्तक म अंतर): पृष्ठ 140 पर यह संवाद इस क्रम म छपा है — “शतरंज? तेनालीरामन क्या
शतरंज के शौक न ह?” अभ्यास म इसे “शतरं.जc?oक्या तेनालीरामन शतरंज के शौक न ह?” लखा गया है। शब्द g
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का क्रम बदला है, अथ वही है।

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(ख) “और यह है मेरा दाँव।”
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तेनालीरामन ने राजा से

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ag राजा ने कहा था — “सँभल जाओ। यह हुई मेरी अगली चाल।” उसी के उत्तर म तेनाली ने
यह दूसरे दृश्य क बात है (पृष्ठ 145)।
अपना मोहरा चलते हुए यह कहा। इसके तुरंत बाद राजा बोले — “फँसाया न? मंत्री क्य चले?”

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कक्षा 4 हद अध्याय 12 शतरंज म मात AglaSem · NCERT Solutions

ऐसा क्य : तेनाली को खेल आता ही नह था। वे बस कोई भी मोहरा उठाकर चला रहे थे।

प्र.3 (ग) “अरे, इतने महान आदमी का मुंडन!”

कसने कससे

नाई ने राजा से

यह तीसरे दृश्य क बात है (पृष्ठ 146)। राजा क आज्ञा पर तेनाली मंच पर चढ़ गए। जब नाई ने दे खा क मुंडन तेनालीरामन जैसे बड़े
आदमी का करना है, तो वह च ककर यह बोला। राजा ने उत्तर दया — “डरो मत, नाई। तुम आज्ञा का पालन करो।”

ऐसा क्य : नाई भी तेनाली का आदर करता था। उसे इतने बड़े आदमी का मुंडन करते हुए डर लग रहा था।

प्र.4 (घ) “हाँ महाराज, बड़े-बड़ को मात द है तेनाली ने।”

कसने कससे

पहले दरबारी ने राजा से

यह पहले दृश्य क बात है (पृष्ठ 141)। तेनाली ने कहा था क उन्ह शतरंज के वषय म कुछ नह आता। तब राजा ने दरबा रय से
पूछा — “क्य ?” उसी पर पहले दरबारी ने यह झूठ कह दया।

ऐसा क्य : दरबारी चाहते थे क राजा तेनाली क बात पर व ास न कर। इसी लए सबने मलकर एक-सी बात कही।

प्र.5 (ङ) “उठो, उठो! तुम्ह कोई दं ड नह मल रहा है।”

कसने कससे

राजा (कृ ष्णदे व राय) ने नाई से

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कक्षा 4 हद अध्याय 12 शतरंज म मात AglaSem · NCERT Solutions

यह तीसरे दृश्य क बात है (पृष्ठ 146)। सेवक नाई को ख चकर दरबार म लाया। नाई डर के मारे राजा के सामने गरकर बोला —
“मने कुछ नह कया महाराज। म नद ष ँ।” तब राजा ने उसे यह कहकर उठाया।

ऐसा क्य : नाई को लगा क उसे कोई सज़ा मलने वाली है। राजा ने उसका डर तुरंत दूर कर दया और बताया क
उसे तो मुंडन करना है।

भाषा क बात — पृष्ठ 150
1. दए गए शब्द का मलान उनके समान अथ वाले शब्द से क जए —

भाषा क बात

प्र.1 दए गए शब्द का मलान उनके समान अथ वाले शब्द से क जए —

शब्द अथ

प्रशंसा हार

यु क्त आमंत्रण

मात कुशल

घाघ बड़ाई

मा हर चालाक

न्योता उपाय

पुस्तक ने एक जोड़ी पहले से मलाकर दखा द है — प्रशंसा — बड़ाई। बाक जो ड़याँ इस प्रकार बनगी —

शब्द समान अथ वाला शब्द पाठ म यह शब्द कहाँ आया

पशंस ा बड़ ाई “कान पक गए ह प्रशंसा सुनते-सुनते।”

युिक्त उपाय “कुछ यु क्त नकाली जाए!”

मात हार “एक से एक खला ड़य को मात दे चुका है।”

घाघ चालाक “पर वास्तव म बड़ा घाघ है तेनाली।”

मािहर कु शल “तुमने बताया नह क तुम शतरंज म मा हर हो?”

न्योता आमंत्रण “जब महाराज ने स्वयं न्योता दया है।”

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कक्षा 4 हद अध्याय 12 शतरंज म मात AglaSem · NCERT Solutions

नयम: जन शब्द का अथ एक-जैसा होता है, उन्ह समानाथ शब्द कहते ह। वाक्य म एक क जगह दूसरा रख दे ने
पर भी अथ वही रहता है।

अपना वाक्य बनाइए: “दाद ने मेरी प्रशंसा क ।” — इसे “दाद ने मेरी बड़ाई क ।” भी कह सकते ह। दोन का
अथ एक ही है।

भाषा क बात — पृष्ठ 150

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2. मटके म से उपयुक्त वशेषण चुनकर रक्त ान क पू त क जए —

भाषा क बात

प्र.1 मटके म से उपयुक्त वशेषण चुनकर रक्त ान क पू त क जए — …………… खलाड़ी, …………… चाल,
…………… चाल, …………… तेनाली, …………… आदमी, …………… अश फयाँ।

मटका

महान नई

पाँच हजार चतुर

गूढ़ कु शल

पृष्ठ 150 पर छपा मटका। इसी म से वशेषण चुनकर रक्त ान भरने ह।

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कक्षा 4 हद अध्याय 12 शतरंज म मात
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महान नई

पाँच हजार चतुर co m
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m गूढ़ कु शल agla
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पृष्ठ 150 पर छपा मटका। इसी म से वशेषण चुनकर रक्त ान भरने ह।

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सही वशेषण इस प्रकार लगगे —

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रक्त ान सही वशेषण पाठ का आधार

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कु शल िखलाड़ ी “आप कुशल खलाड़ी ह, जानकर मत हा रए।”

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…… िखलाड़ी

m .चाल “अवश्य कोई गूढ़ चाल है।a
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…… गूढ़ चाल ”

agl …… चाल नई चाल “अवश्य कोई नई चाल है।”

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…… तेनाली चतुर तेनाली “यह तेनाली भी बड़ा चतुर नकला।”

महान आदमी ase
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…… आदमी “अरे, इतने महान आदमी का मुंडन!”

…… अशिफ याँ पाँच हजार अशिफ याँ “पाँच हजार अश फयाँ उधार ली ह।”

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.cकुoशल उसक वशेषता बता रहा है। l
नयम: जो शब्द संज्ञा क वशेषता बताता है, उसे वशेषण कहते ह। “कुशल खलाड़ी” म खलाड़ी संज्ञा है और
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संकेत: “चाल” वाले दोन रक्त ान म गूढ़ और नई आपस म बदले भी जा सकते ह। दोन ही शब्द पाठ म
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“चाल” के साथ आए ह।

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अपना वाक्य बनाइए: मेरa
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g कुशल तैराक है।
ी बहन

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भाषा क बात — पृष्ठ 150–151
3. हर संवाद कसी-न- कसी मनोभाव को अ भव्यक्त करता है। आप भी नम्न ल खत मनोभाव को संवाद के रूप म ल खए —

भाषा क बात

प्र.1 नम्न ल खत मनोभाव को संवाद के रूप म ल खए — प्रसन्न, च कत, शांत, दुखी। (पुस्तक ने ‘प्रसन्न’ का
उदाहरण दे दया है — “मेरी खोई हुई पुस्तक मल गई है!”)

मनोभाव का अथ है — मन का भाव। संवाद ऐसा ल खए क पढ़ते ही वह भाव समझ म आ जाए।

मनोभाव संवाद

पसन्न मेर ी खोई हुई पुस्तक िमल गई है! (यह उदाहरण पुस्तक में छपा है)

चिकत अरे ! यह पौधा एक ही रात में इतना बड़ ा कै से हो गया!

शात
ं कोई बात नही,ं धीरे -धीरे सब ठीक हो जाएगा।

दुखी मेर ा प्यारा िपल्ला आज सुबह से कही ं नही ं िमल रहा।

ऐसा क्य : भाव शब्द से भी झलकता है और च से भी। च कत और प्रसन्न वाक्य के अंत म ! लगता है। शांत
वाक्य धीमा और छोटा होता है। दुखी वाक्य म मन क कमी दखती है।

पाठ से दे खए: तेनाली – (च कत) शतरंज और म! · राजा – (क्रो धत) मुझे सब पता है तेनाली। · तेनाली –
(घबराकर) पर…पर… मुझे वास्तव म शतरंज का ज्ञान नह महाराज।

संकेत: आपके संवाद इनसे अलग हो सकते ह। बस भाव साफ़ झलकना चा हए।

भाषा क बात — पृष्ठ 151

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4. नीचे द गई सूचना के आधार पर नए शब्द का नमाण क जए —

भाषा क बात

प्र.1 (क) कसी को आने के लए कहना — खाने भरकर शब्द बनाइए।

(क)
आ
पहला खाना पहले से भरा है।

उत्तर — आ

(क)
आ
एक ही खाना है, इस लए शब्द एक ही अक्षर का बनेगा।

“आ” का अथ है — यहाँ आओ। कसी को पास बुलाने के लए यही शब्द कहते ह।

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अपना वाक्य: “अरे भाई, इधर आ!”

ध्यान द जए: यह पूरा अभ्यास एक सीढ़ क तरह है। हर शब्द “आ” से शुरू होता है और हर बार एक अक्षर बढ़
जाता है।

प्र.2 (ख) ‘जाना’ का वपरीत अथ वाला शब्द — खाने भरकर शब्द बनाइए।

(ख)
आ
पहला खाना भरा है, दूसरा आपको भरना है।

उत्तर — आना

(ख)
आ ना

आ + ना = आना

“जाना” का अथ है — यहाँ से कह और चले जाना। इसका उल्टा है आना, यानी कह से यहाँ पहुँचना।

नयम: जन दो शब्द का अथ एक-दूसरे का उल्टा हो, उन्ह वपरीत अथ वाले शब्द कहते ह।

अपना वाक्य: मेरे मामा कल गाँव से आना चाहते ह।

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प्र.3 (ग) कसी के प्र त कृतज्ञता व्यक्त करना — खाने भरकर शब्द बनाइए।

(ग)
आ र
पहला और तीसरा खाना भरा है, बीच का आपको भरना है।

उत्तर — आभार

(ग)
आ भा र

आ + भा + र = आभार

कृतज्ञता का अथ है — कसी क भलाई के लए मन से धन्यवाद कहना। इसी को आभार कहते ह।

अपना वाक्य: मदद करने के लए म आपका आभार मानता ँ।

पाठ से जो ड़ए: पुस्तक क शुरुआत म भी लखा है क प रषद् कई लोग के प्र त आभारी है।

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(घ) कसी व्य क्त या वस्तु का आना या पहुँचना — खाने भरकर शब्द बनाइए।
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प्र.4

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gl आ म
(घ)
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पहला और तीसरा खाना भरा है, दो खाने आपको भरने ह।

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उत्तर — आगमन

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a gl (घ)
आ ग म न
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eआm+ ग + म + न = आगमन agl
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आगमन का अथ है — कसी का आ पहुँचना। जैसे अ त थ का आगमन, वषा का आगमन।
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अपना वाक्य: महाराज के आगमन पर नगाड़े बजने लगे।
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a ध्यान द जए: “आना” और “आगमन” का अथ एक-सा है। पर “आगमन” अ धक आदर वाला शब्द है।

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प्र.5 (ङ) जो बहुत जरूरी हो — खाने भरकर शब्द बनाइए।

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(ङ)
आ श क
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m पहला, तीसरा और पाँचवाँ खाना भरा है; दो खाने आपको भरने ह। glas e
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उत्तर — आवश्यक

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(ङ)
आ व श य क

आ + व + श + य + क = आवश्यक

आवश्यक का अथ है — जो बहुत जरूरी हो, जसके बना काम न चले।

अपना वाक्य: पौध के लए पानी आवश्यक है।

पूरी सीढ़ एक साथ: आ → आना → आभार → आगमन → आवश्यक। हर बार एक अक्षर बढ़ता गया।

पाठ से आगे — पृष्ठ 151

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1. शतरंज के प्रत्येक मोहरे क चाल अलग-अलग होती है। शतरंज के मोहर क चाल पता क जए और ल खए —

पाठ से आगे

प्र.1 शतरंज के मोहर क चाल पता क जए और ल खए — घोड़े क चाल, हाथी क चाल, मंत्री क चाल, राजा क
चाल, ऊँट क चाल, प्यादे ( सपाही) क चाल।

नाटक के चत्र म छपी शतरंज क बसात (पृष्ठ 143, 144)।

यह ‘पता क जए’ वाला काम है। पुस्तक इस पाठ म कसी मोहरे क चाल नह बताती। इस लए यहाँ चाल लखकर नह द गई ह
— यह खोज आपको स्वयं करनी है। नीचे बताया गया है क खोज कैसे करनी है और उत्तर कैसा दखना चा हए।
पहले दे खए, नाटक स्वयं शतरंज के बारे म क्या-क्या बताता है —

शतरंज एक चादर या बसात पर खेला जाता है — “बीच म शतरंज क चादर बछ है।”
खेल क गोट को मोहरा कहते ह — “(मोहरा उठाकर रखते ह।)”

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दोन खलाड़ी बारी-बारी से एक-एक चाल चलते ह — “यह चला म पहली चाल।” … “यह हुई मेरी अगली चाल।”
मोहर के नाम ह — राजा, मंत्री, घोड़ा, हाथी, ऊँट और प्यादा ( सपाही)।
दूसरे का मोहरा मारा जा सकता है — “उड़ गया न तुम्हारा प्यादा!”, “और यह गया तुम्हारा मंत्री।”
राजा को बचाना पड़ता है — “राजा के बचाव के लए मंत्री बढ़ाया।”
हार को मात कहते ह — “एक से एक खला ड़य को मात दे चुका है।”

अब चाल पता करने का तरीका —

1. घर या मोहल्ले म जो शतरंज खेलता हो, उससे पू छए। एक-एक मोहरा उठाकर पू छए क यह कैसे चलता है।
2. व ालय के पुस्तकालय से शतरंज क कोई पुस्तक ली जए। खेल शक्षक से भी पूछ सकते ह।
3. असली बसात पर मोहरा रखकर दे खए क वह कन- कन खान तक जा सकता है। उन खान पर उँ गली रखकर ग नए।
4. हर मोहरे के लए दो बात ल खए — कस दशा म चलता है और कतने खाने चलता है।

अपनी खोज इस ता लका म भ रए —

मोहरा कस दशा म चलता है कतने खाने चलता है

घोड़ा ……………………… ………………………

हाथी ……………………… ………………………

मंत्र ी ……………………… ………………………

राजा ……………………… ………………………

ऊँट ……………………… ………………………

प्यादा (िसपाही) ……………………… ………………………

ऐसा क्य : हर मोहरे क चाल अलग रखी गई है। इसी से खेल म सोचना पड़ता है। य द सब एक जैसा चलते, तो खेल
म कोई मज़ा न रहता।

संकेत: चाल पता करने के बाद एक बार तेनाली और राजा का खेल फर प ढ़ए। तब समझ म आएगा क तेनाली क
चाल अनाड़ी क्य कही गईं।

पाठ से आगे — पृष्ठ 152

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2. चत्र के साथ खेल के नाम का मलान क जए। साथ ही यह भी ल खए क आपक ानीय भाषा म इस खेल को क्या कहते ह —

पाठ से आगे

प्र.1 चत्र के साथ खेल के नाम का मलान क जए। साथ ही यह भी ल खए क आपक ानीय भाषा म इस खेल को
क्या कहते ह —

खेल का नाम खेल का चत्र आपक भाषा म नाम

लट्टू ………………………
राज ा मंत्र ी
1000 800

चोर िसपाही

00 500

साँप-सीढ़ ………………………

राजा-मंत्री-चोर- सपाही ………………………

गु े ………………………

अ ा-चक्कन ………………………

पुस्तक म नाम और चत्र जान-बूझकर आगे-पीछे छापे गए ह। सही मलान इस प्रकार है —

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चत्र चत्र म क्या दख रहा है खेल का सही नाम

m l a s-मंeत्री-चोर-िसपाही
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रा जा म ंत्र ी
चार मुड़ी हुई प चयाँ — राजा 1000, मंत्री 800, चोर 00, सपाही 500 राजा

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1000 800

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चो र ि सपा ही
00 500

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gl लकड़ी के े म वाला चौकोर बोड, बीच म कौ ड़याँ
a अष्टा-चक्कन

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नुक ला घूमने वाला खलौना और लपेट हुई डोरी
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ag
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रंग- बरंगे खान वाला बोड, उस पर साँप और सीढ़ साँप-सीढ़ ी

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गु m
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खुली हथेली पर पाँच छोटे गोल टु कड़े

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e m . ag
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तीसरा खाना आपको स्वयं भरना है। अपने घर या गाँव म लोग इन खेल को जस नाम से पुकारते ह, वही ल खए। बड़ से पूछ
ली जए।

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नमूना उत्तर: लट्टू — भ रा · साँप-सीढ़ — मोक्षपट · राजा-मंत्री-चोर- सपाही — राजा-चोर · गु े — ग े · अ ा- agl
l a se
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चक्कन — अ ा-चम्मा।
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ये केवल नमूने ह। आपके क्षेत्र म नाम अलग हो सकते ह, और वही सही ह गे।

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ऐसा क्य : एक ही खेल भारत के अलग-अलग हस्स म अलग नाम से खेला जाता है। नाम बदलता है, खेल वही
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रहता है।

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पुस्तकालय या अन्य ोत से — पृष्ठ 153
. a g l
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पुस्तकालय जाकर और मत्र के साथ मलकर करने वाले काम

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पु स्तकालय या अन्य ोत से

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(क) तेनालीरामन के कस्स क पुस्तक अपने पुस्तकालय या कसी अन्य ोत से लेकर प ढ़ए।
m
प्र.1

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a
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यह पढ़ने का काम है। इसका उत्तर बनाकर नह दया जा सकता। इसे इस तरह क जए —

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1. व ालय के पुस्तकालय म जाइए। पुस्तकालय अध्यापक से “तेनालीरामन के कस्से” माँ गए।
s e m
. c o m
2. पुस्तक न मले तो घर के बड़ से, मोहल्ले के पुस्तकालय से या कसी मत्र से ली जए।
a g la
s e m अपनी कॉपी म तीन बात ल खए — कस्से का नाम, क ठनाई क्या थी, तेनाली ने
3. एक बार म एक कस्सा प ढ़ए। पढ़ने के बाद
a
agl
क्या चाल चली।
4. जो नए शब्द मल, उन्ह अलग पन्ने पर अथ के साथ लखते जाइए।

co m
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नमूना उत्तर: मने “तेनालीरामन के कस्से” पुस्तक से “ बल्ली और दूध” कस्सा पढ़ा। राजा ने हर घर को एक-एक
बल्ली पालने क आज्ञा द थी। तेनाली क बल्ली दूध से डरने लगी थी, इस लए वह दूध नह पीती थी। इससे तेनाली
ने सद्ध कर दया क जबरदस्ती क आज्ञा से काम नह चलता।

ऐसा क्य : एक कस्सा पढ़कर मज़ा आता है, पर कई कस्से पढ़ने पर तेनाली के सोचने का ढं ग समझ आने लगता
है।

प्र.2 (ख) ‘तेनालीरामन के कस्से’ नाम से मत्र-मंडली क एक बैठक आयो जत कर तेनालीरामन क बु मत्ता के
कस्से सुनाइए।

यह मलकर करने वाला काम है। बैठक इस तरह क जए —

1. पाँच-छह मत्र क एक मंडली बनाइए। दन, समय और जगह तय क जए।
2. हर मत्र एक कस्सा पहले से पढ़कर आए। एक ही कस्सा दो लोग न चुन, इस लए नाम पहले बाँट ली जए।
3. एक बड़ा कागज़ लेकर उस पर ल खए — तेनालीरामन के कस्से। उसे द वार पर लगा द जए।
4. बारी-बारी से सब खड़े होकर अपना कस्सा सुनाएँ। तीन से चार मनट काफ़ ह।
5. हर कस्से के बाद एक प्रश्न पू छए — “तेनाली ने यहाँ कौन-सी चाल चली?”
6. अंत म सब मलकर तय क जए क सबसे मज़ेदार कस्सा कौन-सा रहा।

नमूना उत्तर (सुनाने का ढं ग): “नमस्ते सा थयो! आज म ‘शतरंज म मात’ का कस्सा सुनाऊँगा। दरबारी तेनाली से
जलते थे। उन्ह ने राजा से कहा क तेनाली शतरंज के बड़े खलाड़ी ह। सच तो यह था क तेनाली को खेल आता ही
नह था… और अंत म तेनाली ने कहा क अब महाराज ही मेरे माता- पता ह! राजा घबरा गए और दं ड वापस ले
लया। धन्यवाद!”

संकेत: सुनाते समय आवाज़ बदल-बदलकर बो लए। राजा क आवाज़ भारी, तेनाली क आवाज़ शरारती। सुनने
वाल को और मज़ा आएगा।

शतरंज क भूल-भुलय
ै ा — पृष्ठ 153

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केवल नाम वाले शब्द (संज्ञा) को एक-दूसरे से मलाते हुए मंत्री को राजा तक पहुँचाइए।

शतरं ज क भू ल -भु लै या

प्र.1 केवल नाम वाले शब्द (संज्ञा) को एक-दूसरे से मलाते हुए मंत्री को राजा तक पहुँचाइए। ध्यान रहे क आपको
संज्ञा, सवनाम, वशेषण तथा क्रया को आपस म नह मलाना है।

▲ यहाँ से — मंत्री राजा तक ▼

मंत्री केरल दस वे पभु घोड़ ा उस

पहला
कृ णदे व
ष्
मीठा दूसरा वीणा शेर हाथी
राय

माता
तेनाली हम जहाज महल इस बंदर
-रामन

घर पुस्तक तुम यमुना मेरा एक िसपाही

मै ं आदमी यह नमदा पीला पढ़ ना िपता

आप दरबार पढ़ ना गंगा नीला िलखना ऊँट

इस अशफ भवन नदी हमारा मुझे राजा

पृष्ठ 153 क भूल-भुलैया। ऊपर बाएँ खाने म ‘मंत्री’ है और नीचे दाएँ खाने म ‘राजा’।

पहले हर शब्द को पहचान ली जए। तभी रास्ता दखने लगेगा।

संज्ञा — कसी व्य क्त, जगह, वस्तु या भाव का नाम। ये ह — मंत्री, केरल, प्रभु, घोड़ा, कृष्णदे व राय, वीणा, शेर, हाथी, माता,
तेनालीरामन, जहाज, महल, बंदर, घर, पुस्तक, यमुना, सपाही, आदमी, नमदा, पता, दरबार, गंगा, ऊँट, अशफ , भवन, नद ,
राजा।
सवनाम — संज्ञा क जगह आने वाला शब्द। ये ह — वे, उस, हम, इस, तुम, मेरा, म, यह, आप, हमारा, मुझे।
वशेषण — संज्ञा क वशेषता बताने वाला शब्द। ये ह — दस, पहला, मीठा, दूसरा, एक, पीला, नीला।
क्रया — काम बताने वाला शब्द। ये ह — पढ़ना, लखना।

अब केवल संज्ञा वाले खान से होकर रास्ता बनाइए। एक सही रास्ता यह है —

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▲ यहाँ से — मंत्री राजा तक ▼

मंत्री केरल दस वे पभ ु घोड़ ा उस

कृष्णदेव
पहला मीठा दूसरा वीणा शेर हाथी
राय

तेन ाली
माता हम जहाज महल इस बंदर
-रामन

घर पुस्तक त ुम यमुना मेरा एक िसपाही

मै ं आदमी यह नमदा पीला पढ़ ना िपता

आप दरबार पढ़ ना गंगा नीला िलखना ऊँट

इस अशफ भवन नदी हमारा मुझे राजा

मंत्री से राजा तक का रास्ता — बीच के सब खाने संज्ञा ह।

मंत्री → के रल → कृ ष्णदे व राय → ते न ालीरामन → पुस्तक → आदमी → दरबार → अशफ → भवन → नदी

→

गंगा → नमदा → यमुन ा → जहाज → महल → वीणा → शेर → हाथी → बंद र → िसपाही → िपता → ऊँ ट

→ राजा

रास्ता ऐसा ही क्य : ‘केरल’ के आगे ‘दस’ है, जो वशेषण है। इस लए ऊपर क पं क्त म सीधे आगे नह बढ़ सकते
— नीचे उतरना पड़ता है। इसी तरह ‘नद ’ के आगे ‘हमारा’ सवनाम है, इस लए वहाँ से फर ऊपर चढ़ना पड़ता है।

संकेत: संज्ञा वाले और भी रास्ते बन सकते ह। जैसे ‘वीणा’ से ऊपर ‘प्रभु’ और ‘घोड़ा’ होकर ‘हाथी’ तक। आपका
रास्ता अलग हो तो भी ठ क है — बस हर खाना संज्ञा का होना चा हए।

अध्याय — एक नज़र म
यह पाठ नाटक है। यह तीन दृश्य म बँटा है। हर दृश्य के अंत म लखा है — (पदा गरता है)।

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दरबारी तेनालीरामन से जलते थे। उन्ह ने राजा से झूठ कहा क तेनाली शतरंज के बहुत बड़े खलाड़ी ह।
राजा ने तेनाली को शतरंज खेलने पर मजबूर कर दया। सच यह था क तेनाली को खेल आता ही नह था।
तेनाली हर चाल गलत चलते रहे। राजा को लगा क वे जान-बूझकर हार रहे ह। क्रोध म राजा ने भरी सभा म मुंडन का दं ड सुना
दया।
तेनाली ने पहली चाल चली — इन बाल पर पाँच हजार अश फयाँ उधार ह। राजा ने कोष से वह रकम उनके घर भजवा द ।
फर तेनाली ने दूसरी चाल चली — मुंडन तो माता- पता के स्वग सधारने पर होता है, और अब राजा ही मेरे माता- पता ह।
राजा घबरा गए और दं ड वापस ले लया।

त्व रत पुनरावृ त्त

शब्द अथ पाठ म कहाँ आया पृष्ठ

वदूषक दरबार में हँस ी-मज़ाक करने वाला “ वदूषक एवं राज परामशदाता के रूप म जाने जाते थे।” 139

यु क्त उपाय, तरकीब “कुछ यु क्त नकाली जाए!” 140

घाघ बहुत चालाक “पर वास्तव म बड़ा घाघ है तेनाली।” 140

मात हार “एक से एक खला ड़य को मात दे चुका है।” 140

मा हर कु शल, िजसे काम खूब आता हो “तुमने बताया नह क तुम शतरंज म मा हर हो?” 141

अनाड़ी िजसे काम न आता हो “इस अनाड़ी के संग खेलकर आप पछताएँगे।” 141

न्योता आमंत्र ण, बुल ावा “जब महाराज ने स्वयं न्योता दया है।” 142

मोहरा शतरंज की गोट, िजसे चाल में चला जाता है “(मोहरा उठाकर रखते ह।)” 142

गूढ़ गहरा, जो आसानी से समझ में न आए “अवश्य कोई गूढ़ चाल है।” 143

प्यादा शतरंज का िसपाही मोहरा “उड़ गया न तुम्हारा प्यादा!” 144

बाजी खेल की एक पारी “बाजी पर बाजी जीतते हुए दे खा है।” 144

मुंडन िसर के सारे बाल उतरवाना “भरी सभा म मुंडन?” 145

उस्तरा बाल बनाने का धारदार औज़ार “अपना उस्तरा नकालो।” 146

अशफ सोने का िसक्का “पाँच हजार अश फयाँ उधार ली ह।” 146

धूतता चालाकी “दे खा, क न धूतता!” 146

द घायु लंबी उम वाला “महाराज, आप द घायु ह ” 148

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Document Details

Board / OrgNCERT
ExamClass 4
TypeSolution
Pages33
Languagehindi
Updated13 Oct 2026