Page 1
अितयंत गोपनीय -केवल आं त रक एवं सीिमत योग हे तू
मा िमक िवधालय परी ा, माच-2020
अंक-योजना SCIENCE
SUBJECT कोड सं ा : 086 PAPER कोड : 31/2/1
सामा िनदश :-
1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।
2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू यांकन करते समय नवीनतम सूचना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए पूरे अंक दए जाएँ। क ा दसव के प म दए गए द ता
आधा रत(competency based) दो का मू यांकन करने म कृ पया िव ा थय ारा दए गए उ र को
समझने का यास कर; उनके उ र चाहे अंक-योजना म दए गए उ र से मेल न खाते ह तब भी सही द ता क
प रगणना क गई हो तो अंक दए जाने चािहए।
3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।
4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती है।
5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।
6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।
7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।
Page 1 of 10
Page 2
8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदेखा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।
9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।
10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)
11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –
उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
कु ल अंक के योग म अशुि
उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।
12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।
13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता है।
14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।
15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।
16. क ीय मा यिमक िश ा बोड प रषद पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत
शु क भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित देती है।
Page 2 of 10
Page 3
TaF h</{qrfnd d
1,
(a) ac{a { rdf<ri w F M { FEd Tzn
(b) qfi6</ir,/.<titu{r/zd /ffi qar/trftroi,/*g€
(c) i{d sqdtq lq
rdrFFflmr^c)6c@ch{{ffh/
rhue6ni edakdBaqffii r
rb, qrqffii ri-r, 4rildr.<, d+n tr m <,q1@ n lrm
d.A i / E rrrlr 6 66r d sfld.4 € | I
, 'mikr
rcr 'rrr{ d m d {k4 it{ / *Frc re4 d
I
(d) qff{fer d ftqkd 6{i d fd! 4i-n q {rd<rr gd m
I
qF @ 6ll w
(b) / (B), (c),3n{ D 'r(F6
(O / o1rri, dq oaFef Etmi r
x = KCIOr 3fi KCI dr atf6 glM
<irT rd ? M (R) qfcoF nn E$ l'l@ i I
A = cao/F{ a{ 1a,/61ffi qitra<
B = ca(Ol.i): /1sl gq ailr:fFF{q daqi€..€
(ii) CaO + Hro+ Ca(oH)+iqFql I
Page 4
(iil
(t casor + <i .6rJ {, fi6 I
(i') I
(iii) CuSOJ.5H:O ) CUSOj + I
(i)
I
!
t/"
(b) D
(d) c
G)ffii L r {@ - {rq
(3@ 6X @ mnE E<r€rq)
(b) {rd @ c}4 R n @ 6i d ffi E qrrq, R 6rit
A6 nrrd/FEd d1 R + +< qqf{d EH fEA cM R d ff
at rnrssr { ffi 1fA ilrlt,/d*i" d rign QG qrin
G)
tqfa Eql it m d qftffi TE sqto q t .i ,r.io m qq l
(iii) !m6q/iffi
(iv)Eerffi tmFrn Qv)EEn- 6i mitu( nfr A
(b) q{i.rn fdf++r
t
Page 5
id,iirrmAffim.rmn
i tdfid r@ C /qin d @
(offidtu\qdctI@rffi
:@{ c,<ft6 @-6
*,l-aa".m.n=n4
rl rer r*+t ,m e wa mri -i-d;iiit
r
fgtd a r-i r"q ;+;; d;; i"H,;+#;; J,
:l-*-: 11g*,"ft?*a*
$Fir irft
. .i3i#*d q*"jii,.
d ,tu n ._q
Tr:* r-ry @
* c<r"."1r r** q" ;;-d- ; i&+;,ii;T #6 f;
",t,
'lrt] (Fid]n) qFr tra.r ni"rR"= ? Gi
i rh tua ,rlsFF qi:t
i,cr'&.d Ria oNA m I I
3qn / im 6tR@ .rA @ nqqri rn {@ ffi
. 6 c.qr snfr 4 {q{. d ll@
#"15H r.,*
(i) $tw i oft{nn Ad r+d-rtiG I
liilTq16+rir@m{.dB
(iii) Fi iaifdd W 1n![ m 6{d t I
l{E tu rf rd hr im i ii (!i 16 afi!)
)Ll)lt
Page 6
(0 ni+nt4 (G)aF6 radc <Ind ?
(i) r]arl+4 (crFFF Bqq ri d ? m R n{rh a
hH@ {.d h.rq an 4ffi { ffin fifl { Etu i I
JrrFd@, rdn !@n 6 hnr f,.f .q h{d m { qtui
i @ qrra / i 4.€ {{dis rr { oMi dr d !T cnffi 6
wI e--4, S tlin JiEn wiq.tff € fuF+ eN iffi.{
G) 0)i? rn@ d srg E @
(D ser}i d{ d sJn {{t /lm frq d neftro rt im
aflIqFaqeflTMdT4)61
r+lF'n fli d ii'6.i]/Edq,&.{jtdd
c@ Lm) 6t rdnFh 4. i I ct 6!d 6 llE rr? sB+
? nl rinFh q@ -6cfft ir ,I "
(b) a{ rrg .n itrd6 3llM { rafl Fffir a 6@)
(qatq t {in llm d sln n q@ i@ f.sm ol{)
' ,tuf6,rrrF !!,' tre ,B ofqfrqE1ld
Etn I n. ft ni 6 o, m f-i J- {FE rdRrEr) {
m rrff ftra n rr@ t, nFto.fqfsz&fiftr M d @ i ial
n Mq q.a ar+ F6Ed onr mlia ot fu
qffitu 6{d S{ 6r{r n
rF nrfrd f6q m i I
. r@ im 4d e 6 .r fi3n al dir ai qtfl #\-rr S !
. tuqi m rqiin 6rd slgr d rft r1'dn.aTlra<t
. d?iBw: Nai + e'> Na
s+<R :2Cl)CL+2e
i r/2 t
Page 7
(i)
Ahor +6HCr > 2A1Ch
I
(ii) I
(iii) 2K + 2HrO >2KOH + l
(i,) 2HAS+30:- 2HgO + 2SO1 l
,{1,O1+ 2NaOH > 2N&qlO, + HjO
.s{ir&{ ,!fi : € 6r{n 41ffi d tfl Ead i fs6
{t ffiEr d.ffirrrF{iEr l
{rr tim6 ffiT<d a qslr f, { cH)dffi
, cHroH,CHr-cH:oH
roEfe €{d: -Otl.1r1@ 1li: CrH,.oH
-rEiffi : n! Il,sol in 3ctu'fi i orilffie ffi an
ib) [sim
set@ + sft6{ Eil a \sm!t ?I
CHjCOOCiH, + Hro
-
ffi qfffaar( @ <.tG insqtuJldnEqrBqiq
qrd q q&6 qr{'r3rl oi otEI lm ?.
olq rtfiril i 2
riffi a'fdfta dFa.d t r
ffi * n** d a{/<r+ffi@6
.lm ri rrrF c.€ lm {q: cl e x {'< El_d
[email protected],Gdlm? l
6rd ; en" {n 3m i n{ s{+.n Rd di
B@ a{rl Fm G d E€E n !i r<'i6a
Page 8
(b)rr{{{ftanlmd$6{
(b) @ qq rtr n {ft/6Pj fe{ qR q rm I
(61_J v6)
mrrr@rwaR(( mqtmdsgnd1a I
G) d{!J ot{d > rnin-{
ftsfaq
AIDS
(al (i)3'!fu , mffidR6/ @dffi
(qtw/lrdr d ffi
(d'{ \'6)
(b)@nf6fl > finn d M
G) (i) Bi8 d qinR6 k d +d a lm
(ii) aqlw rn ftft o Edl-Ew rt{
(d) faifid cti Aq 6t qtq /O,/l@ .m/aq i oqRE {<ril
-1,30
".,\_".r,
-,x,xr0
&-4
I r/r/t
Page 9
I
rrr@ d cfirtq (Rr) = L0 o
tutd cRq d Ea qedq
L
Rnoo+
"" lii.*e",t
".u"
t_-i_-..1
_l
ftql0 03), 6 {ieit{ "-h1
lirmrff rrh mFtd
_. rl.1
)'t
fa< <{ rocmi @ dn R(
(b) f- t0cm r!=-loon
111 l
;-:',
;:,'
11
6l qIcM^n qn swn-d
(i) farfr dF in lIfu M
6-ial.m / arqnF64(fi6{d I
(iD {i 5@ qa R G Ii<? dii <{q li q..rn * q]zE
{*< !fr f5{!l qFFrnn Bia t l I
(tliaqdq + fd\ 1-1=
Page 10
(ii) td{ <{q d tu ,;+:=;
2
(srts n 1ftd r lYti R
5
3112