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वािषक पाठ्य म: 2023-24
क ा–8
िवषय – िहंदी
. (वसतं भाग 3) िवधा / िवषय-व तु याकरण और रचना मक अिधगम उ े य अिधगम सं ाि सदं भ/सझ
ु ावा म
स.ं पाठ सं या और नाम लेखन क ि याकलाप
1 पाठ 2 कहानी / आचं िलक श द का ● कहानी िवधा से प रिचत ह गे, िहदं ी भाषा म िविभ न कार क ● कायप क
औ ोिगक करण उ चारण, योग। ● भावानक साम ी (समाचार, प -पि का, कहानी, सं. 1-4
ु ू ल स वर वाचन क कोिशश
लाख क चूिड़याँ परंपरागत ामीण
उपसग एवं यय करगे, जानकारीपरक साम ी, इटं रनेट, लॉग पर ● कायप क
(कामतानाथ) लघु एवं कुटीर उ ोग छपने वाली साम ी आिद) को समझकर
के िदनानुिदन लु ाय पयायवाची श द ● परंपरागत प रवेश, व तुओ के ित सं. 6-8
िज ासु ह गे, पढ़ते ह और उसम अपनी पसदं नापसदं ,
होने के कारण पेशेवर देशज श द से िट पणी, राय, िन कष आिद को ● कायप क
कामगार क यथा प रचय । ● लोग के खान-पान, रहन-सहन प रवेश
मौिखक/सांकेितक भाषा म अिभ य करते सं. 9-11
का वणन आिद के बारे म जान सकगे,
ह। पढ़ी गई साम ी पर िचंतन करते हए
● िविभ न व तुओ ं के नाम और व प समझ के िलए पछू ते ह। ● वाद-िववाद :
को गौर करगे,
● पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के मशीनी युग
● अपनी परंपरा और लघु कुटीर उ ोग िलए वयं बनाते ह और पछू ते ह । का मानव
के ित संवदे नशील ह गे, अपने अनभु व को अपनी भाषा शैली जीवन पर
● परतं भारत के िनवािसय क पीड़ा म िलखते ह । भाव ।
और ि िटश गल ु ामी से वतं ता क ● व तु िविनमय क प ित के बारे म
उ कट अिभलाषा को जान सकगे, समझ िवकिसत होगी । ● आिटिफिशय
● क पनाशीलता का िवकास होगा, ल इटं ेिलजस
● पाठा तगत यु नए श द एवं िवषय पर
याकरिणक िब दओ ु ं से प रिचत होते चचा ।
हए उनका भािषक योग कर सकगे
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2 पाठ. 3 यं य / यं य पवू वत क ाओ ं से ● कहानी िवधा से प रिचत ह गे, िविभ न कार क साम ी, जैसे ● कायप क
िलए गए िवषय व तु कहानी, किवता, लेख, रपोताज, सं मरण, सं. 5-6
बस क या ा क ा6 ● आदश वाचन म स म ह गे,
यं य के मा यम से िनबंध, यं य आिद को पढ़ते हए अथवा
(ह रशंकर परसाई) यव था एवं भाषा और िलिप: पहचान ● समाज म परंपरागत , व तुओ ं आिद ● कायप क
पाठ्यव तु क बारीक से जाँच करते हए
प रि थितय पर िट पणी क ा 7 के मह व को अपने संदभ म अनभु व उसका अनमु ान लगाते ह, िव ेषण करते ह, सं. 13,
भाषा और िलिप: योग कर सकगे, िवशेष िबंदु को खोजते ह। यं य िवधा को 15
क ा8 ● कायप क
● यं य और यव था के प म या ा समझ सकगे ।
● भाषा और िलिप के मा यम से ब च के िलए िकस िविभ न पठन सामि य म यु सं. 17,
– यं या मक भाषा
कार से जानकारी एवं बोध क ोत श द , महु ावर , लोकोि य को समझते हए 19, 21,
● िवशेषण:
होती ह, इस त य से अवगत हो सकगे, उनक सराहना करते ह। िविभ न पठन 23
पहचान, भेद, उदाहरण। सामि य को पढ़ते हए उनके िश प क
● पाठा तागत ● पारंप रक रहन-सहन पर परा, सराहना करते ह और अपने तरानक ु ूल ● ‘ यव था के
याकरिणक िबदं -ु ● भाव - िवचार के आपसी आदान- मौिखक, िलिखत, ेल/ सांकेितक प म ित हमारा
● गणु वाचक दान म समथ होग, उसके बारे म अपने िवचार य करते ह। कत य’ पर
िवशेषण ● पाठा तगत यु नए श द से प रिचत िकसी पाठ्यव तु को पढ़ने के दौरान समहू चचा
● िु तसम समझने के िलए ज़ रत पड़ने पर अपने
होते हए उनका योग कर सकगे,
िभ नाथक श द िकसी सहपाठी या िश क क मदद लेकर
● पाठा तगत यु याकरिणक िब दओ ु ं उपयु सदं भ साम ी, जैस-े श दकोश,
● यं य पर
आधा रत के अवगत होते हए उनका भािषक िव कोश, मानिच ,इटं रनेट या अ य
पिठत/अपिठत ग ांश योग करने म समथ ह गे I पु तक क मदद लेते ह।
का अ यास ● भाषा क बारीिकय / यव था का
िलिखत योग करते ह, जैसेकिवता के
श द को बदलकर अथ और लय को
समझना।
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3 पाठ. 6 किवता/ वतं ता पवू वत क ाओ ं से ● किवता िवधा से प रिचत ह गे, अपने प रवेश म मौजदू लोककथाओ ं ● कायप क
भगवान के डािकए िलए गए िवषय व तु ● भावानक और लोकगीत के बारे म बताते/सनु ाते सं. 18
ु ू ल स वर वाचन करने का
(रामधारी िसंह कृ ित के मा यम से क ा6 यास करगे, ह।
िदनकर) वतं ता क इ छा को िलंग,वचन: पहचान ● डाक
● देश क सीमाओ ं से परे एकल-िव क पढ़कर अप रिचत प रि थितय और िटकट,पो ट
दशाने वाली किवता क ा7
अवधारणा से प रिचत ह गे, घटनाओ ं क क पना करते ह और उन
िलंग,वचन: भेद काड,
● भगवान के डािकये के प म प ी और पर अपने मन म बनने वाली छिवय
क ा8 अतं दशीय
बादल के काय और िवशेषताओ ं से और िवचार के बारे म मौिखक
● िलंग और वचन /सांकेितक भाषा म बताते ह । प,
प रिचत ह गे,
के अनसु ार वा य म िलफ़ाफ़ा
● पयावरण म प ी और बादल के िविभ न संवेदनशील मु /िवषय , जैस-े
प रवतन का अ यास आिद का
मह व को जान सकगे, जाित, धम, रंग, जडर, रीित- रवाज़ के
● पाठा तागत बारे म अपने िम , अ यापक या संकलन
याकरिणक िबंद-ु ● पाठा तगत यु नए श द एवं
याकरिणक िब दओ ु ं से प रिचत होते प रवार से करते ह जैसे अपने और उसम
● सचं ार के मोह ले के लोग से योहार मनाने के
हए उनका भािषक योग कर सकगे, अपने
पारंप रक और तरीके और एकता/सामिू हकता पर
आधिु नक मा यम क सहपाठी
बातचीत करना ।
कृ ित और उपयोिगता को प
पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के
पर अनु छे द लेखन ।
िलए वयं बनाते ह और पछू ते ह ।
लेखन/िनबधं
लेखन/िच वणन ● अपने अनभु व को अपनी भाषा शैली ● वासी
म िलखते ह अ यास हल करने म पि य के
स म ह गे िवषय पर
चचा ।
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4 पाठ- 7 िनबधं ● काल पहचान एवं ● िनबधं ’ श द से प रिचत होते हए इस िविभ न कार क साम ी, जैसे जीवन म
या िनराश हआ जीवन-संघष योग िवधा के बारे म जान सकगे, कहानी, किवता, लेख, रपोताज, सं मरण, बहत कार क
जाए जीवन म बहत कार ● भावानक िनबंध, यं य आिद को पढ़ते हए अथवा किठनाइयाँ
पाठा तगत याकरिणक ु ू ल एवं आदश वाचन म स म
हजारी साद क किठनाइयाँ आती ह गे, पाठ्यव तु क बारीक से जाँच करते हए आती रहती है।
ि वेदी रहती है। उनसे भागने के िबदं -ु उसका अनमु ान लगाते ह, िव ेषण करते ह, उनसे भागने के
● इस यवहार िवषयक पाठ के मा यम
बजाय उनका मक ु ाबला ● योजक िच का िवशेष िबंदु को खोजते ह। बजाय उनका
से समय और उसक किठनाई को जान
करना बेहतर िवक प है योग सकगे, िविभ न पठन सामि य म यु मकु ाबला करना
और यही सफलता का बेहतर िवक प
पिठत/अपिठत ग ांश ● व के योग ,उसक उपयोिगता और श द , महु ावर , लोकोि य को समझते हए
मलू मं है। जीवन के है और यही
/ प ांश का अ यास हमारे जीवन के िलए उसके मह व को उनक सराहना करते ह।
अनभु वो से सीखते हए सफलता का
िनराश होने के बजाय िव ािथय क िच, जान सकगे, िविभ न पठन सामि य को पढ़ते हए उनके
मल ू मं है।
उससे जझू ते हए आगे अवसर, आव यकता ● व से जड़ु े कई श द यथा- किठनाई, िश प क सराहना करते ह और अपने
बढ़ने क वृित का एवं अिधगम के आधार सघं ष, मानवीय चेतना आिद से तरानक ु ू ल मौिखक, िलिखत, ेल/
िवकास कराना। पर औपचा रक/ प रिचत ह गे, साकं े ितक प म उसके बारे म अपने िवचार
अनौपचा रक प ● व क कमी से होनेवाली किठनाइय य करते ह।
लेखन का अ यास एवं उसके भाव से अवगत ह गे, िकसी पाठ्यव तु को पढ़ने के दौरान
िव ािथय क िच, ● समय और सघं ष मे आने वाली समझने के िलए ज़ रत पड़ने पर अपने
अवसर, आव यकता किमय को कै से परू ा िकया जा सकता िकसी सहपाठी या िश क क मदद लेकर
एवं अिधगम के आधार है, इस त य को जान सकगे, उपयु सदं भ साम ी, जैस-े श दकोश,
पर अनु छे द/ िनबंध/ िव कोश, मानिच ,इटं रनेट या अ य
● पाठा तगत यु याकरिणक िब दओ ु ं
िच वणन का अ यास पु तक क मदद लेते ह।
के अवगत होते हए उनका भािषक
भाषा क बारीिकय / यव था का िलिखत
योग करने म समथ ह गे,
योग करते ह, जैसेकिवता के श द को
बदलकर अथ और लय को समझना।
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उपरो पाठ्य म 15 िसत बर 2023 तक पूरा कर िलया जाए ।
म याविध परी ा हेतु पाठ्य म क पुनरावृित करवाई जाए।
िदया गया पाठ्य म मू यांकन हेतु है, शेष पाठ्य-व तु अिधगम संवृि के उ े य मा है।
यात य है िक पूरक पाठ्य-पु तक “भारत क खोज” क ा-8 अिधगम संवृि (Learning Enrichment) के उ े य मा से है । गत परी ाओ ं म इन पूरक पु तक से
नह पछू े गए ह । अिधगम सवं ृि (Learning Enrichment) के उ े य क पिू त हेतु इनका उपयोग िकया जा सकता है।
म याविध परी ा
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. (वसतं भाग 3) िवधा / िवषय-व तु याकरण और रचना मक अिधगम उ े य अिधगम सं ाि सदं भ/सझ
ु ावा मक
स.ं पाठ सं या और नाम लेखन ि याकलाप
5 पाठ. 8 किवता/ जीवन-सघं ष पवू वत क ाओ ं से िलए ● किवता’ श द से प रिचत होते हए अपने प रवेश म मौजदू लोककथाओ ं कायप क स.ं 20
यह सबसे किठन गए िवषय व तु इस िवधा के बारे म जान सकगे, और लोकगीत के बारे म ● सघं ष के मा यम
समय नह जीवन के अनभु वो को क ा 6 ● भावानक बताते/सनु ाते ह ।
ु ू ल एवं आदश वाचन म से िवजय ा
(जया जादवानी) नए प रवेश म ढालकर महु ावरे : अथ स म ह गे, पढ़कर अप रिचत प रि थितय और करनेवाले
िव ािथय को उससे क ा7
● इस यवहार िवषयक पाठ के घटनाओ ं क क पना करते ह और महापु ष का
प रिचत कराना महु ावरे : वा य योग
मा यम से समय और उसक उन पर अपने मन म बनने वाली
का. सं. 12, 24, 34 संि िववरण
किठनाई को जान सकगे, छिवय और िवचार के बारे म
क ा8 देते हए सिच
● व के योग ,उसक उपयोिगता मौिखक/साक ं े ितक भाषा म बताते ह
● महु ावरे : पाठ म आए । सचू ी बनाएँl
और हमारे जीवन के िलए उसके
महु ावर का अथ एवं मह व को जान सकगे, पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के
उनका वा य योग ● ‘किठन समय म
● व से जड़ु े कई श द यथा- िलए वयं बनाते ह और पछू ते ह
िह मत न हार’
● पाठा तगत याकरिणक किठनाई, संघष, मानवीय चेतना ।
िवषय पर
िबंद-ु आिद से प रिचत ह गे, अपने अनभु व को अपनी भाषा शैली
● व क कमी से होनेवाली म िलखते ह अ यास हल करने म लोगन/ नारा
योजक िच का योग
किठनाइय एवं उसके भाव से स म ह गे लेखन
● जीवन म आनेवाली
अवगत ह गे, ितयोिगता का
चनु ौितय का सामना करने
● समय और सघं ष मे आने वाली आयोजन ।
का उपाय बताते हए िम /
किमय को कै से परू ा िकया जा
छोटे भाई/ बहन को प सकता है, इस त य को जान सकगे,
● पाठा तगत यु याकरिणक
िब दओ
ु ं के अवगत होते हए उनका
भािषक योग करने म समथ ह गे,
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6 पाठ.9 सािखयाँ / जीवन - पवू वत क ाओ ं से िलए
● सािखयाँ’ श द से प रिचत होते अपने प रवेश म मौजदू लोककथाओ ं कायप क स.ं 22
कबीर क मू य गए िवषय व तु हए इस िवधा के बारे म जान और लोकगीत के बारे म कायप क स.ं 24
सािखयाँ क ा6 सकगे, बताते/सनु ाते ह ।
(कबीर) जीवन के िविभ न नए श द जोड़कर श द ● कबीर के दोह के
● भावानक ु ू ल एवं आदश वाचन म पढ़कर अप रिचत प रि थितय और
अनभु व को लेकर कबीर िनमाण आधार पर योग
स म ह गे, घटनाओ ं क क पना करते ह और
दास ारा य िकए क ा7 िकए गए श द
● आम जन के ित संवदे नशील उन पर अपने मन म बनने वाली
गए िवचार क तिु त उपसग और यय :पहचान क सचू ी बनाना
ह गे, छिवय और िवचार के बारे म
क ा8 और उनके बारे म
● आम जन के आ मिव ास और मौिखक/सांकेितक भाषा म बताते ह।
उपसग और यय ारा नए सिं जानकारी
श द का िनमाण आ मिनभरता क भावना का कबीर क ासंिगकता से प रिचत
स मान कर सकगे, ह गे । एक करना l
पाठा तागत याकरिणक
िबदं -ु ● अपने िम एवं सहयोिगय के पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के
● देशज श द का
● देशज अथवा साथ िबना िकसी भेदभाव के िलए वयं बनाते ह और पछू ते ह
समान प से यवहार करग, । उनके िहदं ी मानक
बोलचाल क भाषा म प के साथ सचू ी
● अ य े और भाषाओ ं के अपने अनभु व को अपनी भाषा शैली
उ चारण म अनु प बनाएँl
सािह य और श दाविलय से म िलखते ह अ यास हल करने म
वतनी प रवतन क समझप रिचत ह गे, स म ह गे
● जीवन-मू य पर ● पाठा तगत यु याकरिणक
आधा रत पिठत/अपिठत िब दओ ु ं से अवगत होते हए
उनका भािषक योग करने म
प ांश का अ यास समथ ह गे,
● कबीर क साखी श द के अथ से
प रिचत ह गे।
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7 पाठ. 13 रपोताज/मिहला पवू वत क ाओ ं से िलए ● रपोताज िवधा से प रिचत ह गे, िविभ न कार क साम ी, जैसे ● कायप क स.ं 30
सशि करण गए िवषय व तु ● भावानक कहानी, किवता, लेख, रपोताज,
ु ू ल स वर वाचन क ● कायप क स.ं 32,
जहाँ पिहया है क ा6 कोिशश करगे, सं मरण, िनबंध, यं य आिद को पढ़ते
(पी साईनाथ) मिहला सशि करण उपसग और यय क 34
● पाठ म िदए गए किठन श द का हए अथवा पाठ्यव तु क बारीक से
पर आधा रत कहानी पहचान जाँच करते हए उसका अनमु ान लगाते ह, ● कायप क स.ं 36,
अथ समझ सकगे,
िजसम िवकास के म क ा 7 िव े षण करते ह, िवशेष िबंदु को खोजते 39
म पिहए क उपयोिगता उपसग और यय का ● येक अनु छे द म सि निहत
ह।
और उससे हए प रवतन योग भाव एवं सीख से प रिचत ह गे, ● यातायात के
● यातायात के साधन के िवकास िविभ न पठन सामि य म यु
का वणन l क ा8 िविभ न साधन
को जानने के ित िज ासु ह गे l श द , महु ावर , लोकोि य को समझते
उपसग और यय से के बारे म समहू
पाठा तगत यु याकरिणक हए उनक सराहना करते ह।
श द िनमाण चचा ।
िब दओ
ु ं से अवगत होते हए उनका िविभ न पठन सामि य को पढ़ते हए
● आपने साईिकल चलाना भािषक योग करने म समथ ह गे। उनके िश प क सराहना करते ह और
कै से सीखा ? का वणन अपने तरानक ● मिहला
ु ू ल मौिखक, िलिखत, ेल/
करते हए िम को प सांकेितक प म उसके बारे म अपने सश करण के
िवचार य करते ह। िलए उठाये गए
● मिहला सशि करण जैसे
िवषय पर अनु छे द ● भाषा क बारीिकय / यव था का कदम व िनणय
िलिखत योग करते ह, जैसेकिवता के पर समहू म चचा
लेखन / िनबंध लेखन/
श द को बदलकर अथ और लय को ।
िच वणन समझना।
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8 पाठ.14 कहानी/ यं य पवू वत क ाओ ं से िलए● ‘कहानी,’ से प रिचत होते हए हा य िवधा का प रचत हो सकगे ● कायप क स.ं
गए िवषय व तु इस िवधा के बारे म जान सकगे, । 35
अकबरी लोटा कहानी म पा के क ा 6 ● स वर आदश वाचन म स म िहदं ी भाषा म िविभ न कार क साम ी
(अ नपूणा वमा) मा यम से परतं ता के कारक िच : पहचान ह गे, (समाचार, प -पि का, कहानी, ● कायप क स.ं
समय म अं ेज के साथ क ा 7 जानकारीपरक साम ी, इटं रनेट, लॉग पर 38
● सामािजक प रवेश, मानवीय
हई घटनाओ ं म से एक कारक िच : भेद छपने वाली साम ी आिद) को समझकर
िज ासाओ ं के ित िज ासु ह गे,
छोटी सी घटना को क ा 8 पढ़ते ह और उसम अपनी पसदं नापसदं , ● कायप क स.ं
लेकर के उस समय क कारक िच का वा य म ● लोगो के अचार िवचार, रहन-
िट पणी, राय, िन कष आिद को मौिखक/ 42
वृि य का िच ण योग का अ यास सहन प रवेश आिद के बारे म
सांकेितक भाषा म अिभ य करते ह।
करना। पाठा तगत याकरिणक जान सकगे,
पढ़ी गई साम ी पर िचतं न करते हए समझ ● िक ह दस
िबंद-ु ● िविभ न आचं िलक व तुओ ं के के िलए पछू ते ह। ाचीन भारतीय
● महु ावरे अथ और योग नाम और व प को गौर करगे,
● पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के व तुओ ं का
● मानवीयता के ित संवदे नशील
● लोकोि अथ और िलए वयं बनाते ह और पछू ते ह संि िववरण
ह गे, । अपने अनभु व को अपनी भाषा
योग देते हए सिच
● रा ीय प रवेश के बारे म शैली म िलखते ह ।
● देश क मल
ू भतू अिधक िज ासु होकर उनसे तुित ।
सम याओ ं पर आधा रत स बिं धत जानका रयां एकि त
कर सकते ह, ● सं हालय य
पिठत/अपिठत ग ाश
ं का
● मनु य और प रि थितय के बीच होते ह िवषय पर
अ यास
के आपसी स ब ध को जान चचा ।
सकगे,
● क पनाशीलता का िवकास
होगा,
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9 पाठ. 15 का य, पद/ वा स य पवू वत क ाओ ं से िलए ● पद का य’ श द से प रिचत होते अपने प रवेश म मौजदू लोककथाओ ं ● कायप क स.ं
ेम गए िवषय व तु हए इस िवधा के बारे म जान और लोकगीत के बारे म 37
सूर के पद क ा6 सकगे, बताते/सनु ाते ह । ● कायप क स.ं
(सूरदास) वा स य एवं ेम के पयायवाची: पहचान ● भावानक ु ू ल एवं आदश वाचन म पढ़कर अप रिचत प रि थितय और 39
िविभ न भाग , बाल क ा7 स म ह गे, घटनाओ ं क क पना करते ह और ● सरू दास से
सल ु भ ि या-कलाप पयायवाची श द का योग
का. सं. 2 ,30 ● सरू के पद के आधार पर जीवन, उन पर अपने मन म बनने वाली संबंिधत
को िचि त करती
यि व, भि और वा स य के छिवय और िवचार के बारे म जानकारी एक
सरू दास जी के पदावली क ा 8
बारे म जान सकगे, मौिखक/सांकेितक भाषा म बताते ह। करते हए समहू
के अश ं क तुित पयायवाची श द क सचू ी
पाठा तागत याकरिणक ● पाठा तगत यु याकरिणक वा स य रस के िवषय म जान सकगे प रयोजना के
िब दओ ु ं के अवगत होते हए । प म तुित ।
िबंद-ु
उनका भािषक योग करने म पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के ● सरू दास के पद
● पयायवाची श द का
समथ ह गे। िलए वयं बनाते ह और पछू ते ह क क ा म
अ यास संगीता मक
● सरू दास जी के वा स य वणन से ।
● वा स य ेम पर प रिचत ह गे व ज भाषा से तुित ।
● अपने अनभु व को अपनी भाषा
आधा रत पिठत/अपिठत प रिचत ह गे । शैली म िलखते ह अ यास हल
प ाश
ं का अ यास करने म स म ह गे
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10 पाठ- 16 िनबध
ं ● लोकोि : पहचान ● िनबधं ’ श द से प रिचत होते हए ● ‘वैि क तापमान वृि ‘ और जय च एवं जल
पानी क कहानी कहानी म पा के और योग इस िवधा के बारे म जान सकगे, िहमनद के िपघलने से उ प न खतर सरं ण िवषय पर
रामचं ितवारी मा यम से परतं ता के ● वा यांश के िलए एक ● भावानक पर चचा करगे । िनबंध, वाद-
ु ू ल एवं आदश वाचन म
समय म अं ेज के साथ शद स म ह गे, िववाद एवं संवाद
हई घटनाओ ं म से एक लेखन।
छोटी सी घटना को पिठत/अपिठत ग ा श
ं / ● इस िव ान िवषयक पाठ के
प ाशं का अ यास मा यम से पानी क उ पि और ‘जल का मह व’
लेकर के उस समय क
िव ािथय क िच, उसके योग के बारे म जान िवषय पर नारा
वृि य का िच ण
अवसर, आव यकता एवं सकगे, लेखन ।
करना।
अिधगम के आधार पर ● पानी क उपयोिगता और हमारे
औपचा रक/ जीवन के िलए उसके मह व को
अनौपचा रक प लेखन जान सकगे,
का अ यास ● पानी क कमी से होनेवाली
● िव ािथय क िच, किठनाइय एवं उसके भाव से
अवसर, आव यकता अवगत ह गे,
एवं अिधगम के ● आने वाले समय म पानी क
आधार पर अनु छे द/ कमी को कै से परू ा िकया जा
िनबंध/ िच वणन का सकता है, इसके बारे म सोचगे,
अ यास
उपयु पाठ्य म 31 जनवरी 2024 तक पूरा कर िलया जाए ।
वािषक परी ा हेतु पाठ्य म क पुनरावृित करवाई जाए।
िदया गया पाठ्य म मू यांकन हेतु है , शेष पाठ्य-व तु अिधगम संवृि के उ े य मा है।
यात य है िक परू क पाठ्य-पु तक “भारत क खोज” क ा-8 अिधगम सवं ृि (Learning Enrichment) के उ े य मा से ह | गत परी ाओ ं म इन परू क पु तक से
नह पूछे गए ह । अिधगम संवृि (Learning Enrichment) के उ े य क पूित हेतु इनका उपयोग िकया जा सकता है।
वािषक परी ा
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