aglasem.com
Schools Admission Mock Test Playground
ClassChoose class
StateSelect state

Edudel Syllabus 2025 Class 8 Hindi

Download the Edudel Syllabus 2025 Class 8 Hindi PDF for free at AglaSem. This official Delhi Class 8 syllabus lists the complete course structure, unit-wise topics and weightage, marking scheme and prescribed books, so you can plan your preparation and focus on high-scoring topics. More Detail
Edudel Syllabus 2025 Class 8 Hindi - Page 1 of 10

Finished viewing? Save it for later —

Download Edudel Syllabus 2025 Class 8 Hindi (PDF · 10 pages)
Downloaded 18 times

About Edudel Syllabus 2025 Class 8 Hindi

Edudel Syllabus 2025 Class 8 Hindi is available here for free download. Published by Delhi School Education for Class 8, this syllabus can be viewed online or downloaded as a PDF (10 pages). Candidates preparing for Class 8 can use Edudel Syllabus 2025 Class 8 Hindi to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download Edudel Syllabus 2025 Class 8 Hindi?

Open this page and click the Download button to save Edudel Syllabus 2025 Class 8 Hindi as a PDF. It is completely free on AglaSem Docs.

Is Edudel Syllabus 2025 Class 8 Hindi free to download?

Yes. Edudel Syllabus 2025 Class 8 Hindi can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does Edudel Syllabus 2025 Class 8 Hindi have?

Edudel Syllabus 2025 Class 8 Hindi contains 10 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

Where can I find more Class 8 study material?

You can find more Class 8 question papers, sample papers, syllabus, and answer keys on AglaSem Docs.

Edudel Syllabus 2025 Class 8 Hindi – Text

Read the full text of this syllabus below — useful to quickly search, copy and reference the content online without downloading the PDF.

📄 View text version (10 pages)

Page 1

वािषक पाठ्य म: 2024-25
क ा–8
िवषय – िहदं ी
. (वसतं भाग 3) िवधा / िवषय-व तु याकरण और रचना मक अिधगम उ े य अिधगम सं ाि सदं भ/सझ ु ावा म
स.ं पाठ सं या और नाम लेखन क ि याकलाप
1 पाठ 2 कहानी /  आंचिलक श द का ● कहानी िवधा से प रिचत ह गे,  िहदं ी भाषा म िविभ न कार क साम ी ● कायप क स.ं
औ ोिगक करण उ चारण, योग ● भावानक (समाचार, प -पि का, कहानी, 1-4
ु ू ल स वर वाचन क कोिशश
लाख क चिू ड़याँ परंपरागत ामीण लघु जानकारीपरक साम ी, इटं रनेट, लॉग पर ● कायप क स.
 उपसग एवं यय करगे, ं
(कामतानाथ) एवं कुटीर उ ोग के छपने वाली साम ी आिद) को समझकर
िदनानुिदन लु ाय होने  पयायवाची श द ● परंपरागत प रवेश, व तुओ के ित िज ासु 6-8
ह गे, पढ़ते ह और उसम अपनी पसंद-नापसंद,
के कारण पेशेवर  देशज श द से प रचय । िट पणी, राय, िन कष आिद को ● कायप क स.ं
कामगार क यथा का ● लोग के खान-पान, रहन-सहन प रवेश
मौिखक/सांकेितक भाषा म अिभ य 9-11
वणन आिद के बारे म जान सकगे,
करते ह। पढ़ी गई साम ी पर िचतं न करते
● िविभ न व तओ ु ं के नाम और व प को हए समझ के िलए पछू ते ह। ● वाद-िववाद :
गौर करगे,
● पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के िलए मशीनी यगु का
● अपनी परंपरा और लघु कुटीर उ ोग के वयं बनाते ह और पछू ते ह । अपने मानव जीवन
ित सवं ेदनशील ह गे, अनभु व को अपनी भाषा शैली म पर भाव ।
● परतं भारत के िनवािसय क पीड़ा और िलखते ह ।
ि िटश गल ु ामी से वतं ता क उ कट ● व तु िविनमय क प ित के बारे म समझ ● आिटिफिशयल
अिभलाषा को जान सकगे, िवकिसत होगी । इटं ेिलजस िवषय
● क पनाशीलता का िवकास होगा,
पर चचा।
● पाठा तगत यु नए श द एवं
याकरिणक िब दओ ु ं से प रिचत होते हए
उनका भािषक योग कर सकगे

1

Page 2

2 पाठ. 3 यं य / यं य पूववत क ाओ ं से िलए ● कहानी िवधा से प रिचत ह गे,  िविभ न कार क साम ी, जैसे कहानी, ● कायप क स.ं
गए िवषय व तु किवता, लेख, रपोताज, सं मरण, 5-6
बस क या ा क ा6 ● आदश वाचन म स म ह गे,
यं य के मा यम से िनबधं , यं य आिद को पढ़ते हए अथवा ● कायप क स.
(ह रशंकर परसाई) यव था एवं प रि थितय भाषा और िलिप: पहचान ● समाज म परंपरागत , व तुओ ं आिद के पाठ्यव तु क बारीक से जाँच करते हए

पर िट पणी क ा7 मह व को अपने सदं भ म अनभु व कर 13, 15
उसका अनमु ान लगाते ह, िव े षण करते
भाषा और िलिप: योग सकगे, ह, िवशेष िबदं ु को खोजते ह। यं य िवधा ● कायप क स.ं
क ा8 को समझ सकगे । 17, 19, 21,
● यव था म या किमय को यं य के
● भाषा और िलिप – मा यम से जान सकगे,  िविभ न पठन सामि य म यु श द , 23
यं या मक भाषा महु ावर , लोकोि य को समझते हए
● िवशेषण: पहचान, भेद, ● पारंप रक रहन-सहन पर परा,
उनक सराहना करते ह। िविभ न पठन ● ‘ यव था के
उदाहरण। ● भाव - िवचार के आपसी आदान- दान सामि य को पढ़ते हए उनके िश प क ित हमारा
● पाठा तागत याकरिणक म समथ होग, सराहना करते ह और अपने तरानक ु ूल कत य’ पर
िबंद-ु ● पाठा तगत यु नए श द से प रिचत मौिखक, िलिखत, ेल/ सांकेितक प म समहू चचा
● गणु वाचक िवशेषण होते हए उनका योग कर सकगे, उसके बारे म अपने िवचार य करते ह।
● िु तसम िभ नाथक श द  िकसी पाठ्यव तु को पढ़ने के दौरान
● पाठा तगत यु याकरिणक िब दओ ु ं के
● यं य पर आधा रत समझने के िलए ज़ रत पड़ने पर अपने
अवगत होते हए उनका भािषक योग करने िकसी सहपाठी या िश क क मदद
पिठत/अपिठत ग ांश
म समथ ह गे । लेकर उपयु सदं भ साम ी, जैस-े
का अ यास
श दकोश, िव कोश, मानिच ,इटं रनेट
या अ य पु तक क मदद लेते ह।
● भाषा क बारीिकय / यव था का
िलिखत योग करते ह, जैसे किवता के
श द को बदलकर अथ और लय को
समझना।

2

Page 3

3 पाठ. 6 किवता/ वतं ता पूववत क ाओ ं से िलए ● किवता िवधा से प रिचत ह गे,  अपने प रवेश म मौजदू लोककथाओ ं ● कायप क स.ं
भगवान के डािकए गए िवषय व तु ● भावानक और लोकगीत के बारे म बताते/सनु ाते 18
ु ू ल स वर वाचन करने का यास
(रामधारी िसहं कृ ित के मा यम से क ा6 करगे, ह।
िदनकर) वतं ता क इ छा को िलंग,वचन: पहचान ● डाक
● देश क सीमाओ ं से परे एकल-िव क  पढ़कर अप रिचत प रि थितय और िटकट,पो ट
दशाने वाली किवता क ा7
अवधारणा से प रिचत ह गे, घटनाओ ं क क पना करते ह और उन
िलंग,वचन: भेद काड,
● भगवान के डािकये के प म प ी और पर अपने मन म बनने वाली छिवय
क ा8 अंतदशीय
बादल के काय और िवशेषताओ ं से और िवचार के बारे म मौिखक
● िलंग और वचन के /सांकेितक भाषा म बताते ह । प , िलफ़ाफ़ा
प रिचत ह गे,
अनसु ार वा य म प रवतन आिद का
● पयावरण म प ी और बादल के मह व  िविभ न सवं ेदनशील मु /िवषय , जैस-े
का अ यास संकलन और
को जान सकगे, जाित, धम, रंग, जडर, रीित- रवाज़ के
● पाठा तागत याकरिणक बारे म अपने िम , अ यापक या उसम अपने
िबंद-ु ● पाठा तगत यु नए श द एवं
याकरिणक िब दओ ु ं से प रिचत होते हए प रवार से करते ह जैसे अपने सहपाठी को
● संचार के पारंप रक और मोह ले के लोग से योहार मनाने के
उनका भािषक योग कर सकगे, प लेखन ।
आधिु नक मा यम क तरीके और एकता/सामिू हकता पर
कृ ित और उपयोिगता पर बातचीत करना । ● वासी
अनु छे द लेखन/िनबंध पि य के
 पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के
लेखन/िच वणन िलए वयं बनाते ह और पछू ते ह । िवषय पर
● अपने अनभु व को अपनी भाषा शैली म चचा ।
िलखते ह अ यास हल करने म
स म ह गे

3

Page 4

4 पाठ- 7 िनबध ं ● काल पहचान एवं योग ● ‘िनबंध’ श द से प रिचत होते हए इस  िविभ न कार क साम ी, जैसे कहानी,  जीवन म
या िनराश हआ जीवन-सघं ष पाठा तगत याकरिणक िबंद-ु िवधा के बारे म जान सकगे, किवता, लेख, रपोताज, सं मरण, बहत कार क
जाए जीवन म बहत कार क ● भावानक िनबधं , यं य आिद को पढ़ते हए अथवा किठनाइयाँ आती
ु ू ल एवं आदश वाचन म स म
हजारी साद ि वेदी किठनाइयाँ आती रहती है। ● योजक िच का योग ह गे, पाठ्यव तु क बारीक से जाँच करते हए रहती है। उनसे
उनसे भागने के बजाय  पिठत/अपिठत ग ाश ं / उसका अनमु ान लगाते ह, िव े षण करते भागने के बजाय
● इस यवहार िवषयक पाठ के मा यम से
उनका मक ु ाबला करना प ांश का अ यास ह, िवशेष िबदं ु को खोजते ह। उनका मक ु ाबला
समय और उसक किठनाई को जान सकगे,
बेहतर िवक प है और यही  िव ािथय क िच, करना बेहतर
● समय क उपयोिगता और हमारे जीवन के  िविभ न पठन सामि य म यु श द ,
सफलता का मल ू मं है। अवसर, आव यकता एवं िवक प है और
िलए उसके मह व को जान सकगे, महु ावर , लोकोि य को समझते हए
जीवन के अनभु व से अिधगम के आधार पर यही सफलता का
● समय से जुड़े कई श द यथा- किठनाई, उनक सराहना करते ह।
सीखते हए िनराश होने के औपचा रक/ अनौपचा रक मलू मं है।
बजाय उससे जूझते हए संघष, मानवीय चेतना आिद से प रिचत  िविभ न पठन सामि य को पढ़ते हए
प लेखन का अ यास
आगे बढ़ने क वृित का ह गे, उनके िश प क सराहना करते ह और
 िव ािथय क िच, अपने तरानक ु ू ल मौिखक, िलिखत,
िवकास कराना। ● समय क कमी से होनेवाली किठनाइय एवं
अवसर, आव यकता एवं ेल/ सांकेितक प म उसके बारे म
उसके भाव से अवगत ह गे,
अिधगम के आधार पर अपने िवचार य करते ह।
अनु छे द/ िनबंध/ िच ● समय और संघष मे आने वाली किमय
को कै से परू ा िकया जा सकता है, इस त य  िकसी पाठ्यव तु को पढ़ने के दौरान
वणन का अ यास
को जान सकगे, समझने के िलए ज़ रत पड़ने पर अपने
िकसी सहपाठी या िश क क मदद
● पाठा तगत यु याकरिणक िब दओ ु ं के
लेकर उपयु सदं भ साम ी, जैस-े
अवगत होते हए उनका भािषक योग करने
श दकोश, िव कोश, मानिच ,इटं रनेट
म समथ ह गे,
या अ य पु तक क मदद लेते ह।
 भाषा क बारीिकय / यव था का
िलिखत योग करते ह, जैसे किवता के
श द को बदलकर अथ और लय को
समझना।
 उपयु पाठ्य म 13 िसत बर 2024 तक पूरा कर िलया जाए ।
 म याविध परी ा हेतु पुनराविृ त करवाई जाए।
 यात य है िक परू क पाठ्य-पु तक “भारत क खोज” क ा-8 अिधगम सवं िृ (Learning Enrichment) के उ े य मा से ह ।
म याविध परी ा

4

Page 5

. (वसतं भाग 3) िवधा / िवषय-व तु याकरण और रचना मक अिधगम उ े य अिधगम सं ाि सदं भ/सझ
ु ावा मक
स.ं पाठ सं या और नाम लेखन ि याकलाप
5 पाठ. 8 किवता/ जीवन-सघं ष पूववत क ाओ ं से िलए ● किवता’ श द से प रिचत होते हए इस िवधा  अपने प रवेश म मौजदू लोककथाओ ं  कायप क स.ं 20
यह सबसे किठन गए िवषय व तु के बारे म जान सकगे, और लोकगीत के बारे म बताते/सनु ाते ● संघष के मा यम
समय नह जीवन के अनभु वो को नए क ा6 ● भावानक ह।
ु ू ल एवं आदश वाचन म स म ह गे, से िवजय ा
(जया जादवानी) प रवेश म ढालकर महु ावरे : अथ
क ा7 ● इस यवहार िवषयक पाठ के मा यम से समय  पढ़कर अप रिचत प रि थितय और करनेवाले
िव ािथय को उससे
और उसक किठनाई को जान सकगे, घटनाओ ं क क पना करते ह और उन महापु ष का
प रिचत कराना महु ावरे : वा य योग
● व के योग ,उसक उपयोिगता और हमारे पर अपने मन म बनने वाली छिवय
का. स.ं 12, 24, 34 संि िववरण
जीवन के िलए उसके मह व को जान सकगे, और िवचार के बारे म
क ा8 देते हए सिच
● व से जुड़े कई श द यथा- किठनाई, संघष, मौिखक/सांकेितक भाषा म बताते ह ।
● महु ावरे : पाठ म आए सचू ी बनाएँl
मानवीय चेतना आिद से प रिचत ह गे,  पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के
महु ावर का अथ एवं उनका िलए वयं बनाते ह और पछू ते ह ।
● व क कमी से होनेवाली किठनाइय एवं ● ‘किठन समय म
वा य योग
उसके भाव से अवगत ह गे,  अपने अनभु व को अपनी भाषा शैली
● पाठा तगत याकरिणक िह मत न हार’
● समय और संघष मे आने वाली किमय को म िलखते ह अ यास हल करने म
िबंद-ु स म ह गे िवषय पर
कै से परू ा िकया जा सकता है, इस त य को
लोगन/ नारा
● योजक िच का योग जान सकगे,
लेखन
● पाठा तगत यु याकरिणक िब दओ ु ं के
अवगत होते हए उनका भािषक योग करने म ितयोिगता का
समथ ह गे, आयोजन ।

5

Page 6

6 पाठ.9 सािखयाँ / जीवन - मू य पूववत क ाओ ं से िलए ● सािखयाँ’ श द से प रिचत होते हए इस िवधा  अपने प रवेश म मौजदू लोककथाओ ं  कायप क स.ं 22
कबीर क सािखयाँ गए िवषय व तु के बारे म जान सकगे, और लोकगीत के बारे म बताते/सनु ाते  कायप क स.ं 24
(कबीर) जीवन के िविभ न अनभु व क ा 6 ● भावानक ह।
ु ू ल एवं आदश वाचन म स म ह गे, ● कबीर के दोह के
को लेकर कबीर दास ारा नए श द जोड़कर श द
● आम जन के ित सवं ेदनशील ह गे,  पढ़कर अप रिचत प रि थितय और आधार पर योग
य िकए गए िवचार क िनमाण
● आम जन के आ मिव ास और घटनाओ ं क क पना करते ह और उन
तिु त क ा7 िकए गए श द क
आ मिनभरता क भावना का स मान कर पर अपने मन म बनने वाली छिवय
उपसग और यय :पहचान सचू ी बनाना और
सकगे, और िवचार के बारे म
क ा8 उनके बारे म सिं
मौिखक/सांकेितक भाषा म बताते ह।
उपसग और यय ारा नए ● अपने िम एवं सहयोिगय के साथ िबना जानकारी एक
श द का िनमाण िकसी भेदभाव के समान प से यवहार  कबीर क ासिं गकता से प रिचत ह गे ।
करग,  पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के करना l
पाठा तागत याकरिणक िबंद-ु
● देशज अथवा बोलचाल ● अ य े और भाषाओ ं के सािह य और िलए वयं बनाते ह और पछू ते ह ।
● देशज श द का
क भाषा म उ चारण म श दाविलय से प रिचत ह गे,  अपने अनभु व को अपनी भाषा शैली
उनके िहदं ी मानक
अनु प वतनी प रवतन ● पाठा तगत यु याकरिणक िब दओ ु ं से म िलखते ह अ यास हल करने म
प के साथ सचू ी
अवगत होते हए उनका भािषक योग करने म स म ह गे
क समझ बनाएँl
समथ ह गे,
● जीवन-मू य पर आधा रत ● कबीर क साखी श द के अथ से प रिचत
पिठत/अपिठत प ांश का ह गे।
अ यास

6

Page 7

7 पाठ. 13 रपोताज/मिहला पूववत क ाओ ं से िलए ● ‘ रपोताज’ िवधा से प रिचत ह गे,  िविभ न कार क साम ी, जैसे कहानी, ● कायप क स.ं 30
सशि करण गए िवषय व तु ● भावानक किवता, लेख, रपोताज, सं मरण,
ु ू ल स वर वाचन क कोिशश करगे, ● कायप क स.ं 32,
जहाँ पिहया है क ा6 िनबधं , यं य आिद को पढ़ते हए अथवा
(पी साईनाथ) ● पाठ म िदए गए किठन श द का अथ समझ 34
मिहला सशि करण उपसग और यय क पाठ्यव तु क बारीक से जाँच करते हए
सकगे,
पर आधा रत कहानी िजसम पहचान उसका अनमु ान लगाते ह, िव े षण करते ● कायप क स.ं 36,
िवकास के म म पिहए क क ा 7 ● येक अनु छे द म सि निहत भाव एवं सीख
ह, िवशेष िबदं ु को खोजते ह। 39
उपयोिगता और उससे हए उपसग और यय का योग से प रिचत ह गे,
प रवतन का वणन। क ा8 ● यातायात के साधन के िवकास को जानने के  िविभ न पठन सामि य म यु श द , ● यातायात के
ित िज ासु ह गे। महु ावर , लोकोि य को समझते हए
उपसग और यय से श द िविभ न साधन के
उनक सराहना करते ह।
िनमाण ● पाठा तगत यु याकरिणक िब दओ ु ं से बारे म समूह चचा ।
अवगत होते हए उनका भािषक योग करने म  िविभ न पठन सामि य को पढ़ते हए
समथ ह गे। उनके िश प क सराहना करते ह और
अपने तरानक ● मिहला
ु ू ल मौिखक, िलिखत,
ेल/ सांकेितक प म उसके बारे म सश करण के
अपने िवचार य करते ह। िलए उठाये गए
● भाषा क बारीिकय / यव था का कदम व िनणय पर
िलिखत योग करते ह, जैसे किवता के समहू म चचा ।
श द को बदलकर अथ और लय को
समझना।

7

Page 8

8 पाठ.14 कहानी/ यं य पूववत क ाओ ं से िलए ● ‘कहानी,’ से प रिचत होते हए इस िवधा के  हा य िवधा का प रचत हो सकगे । ● कायप क स.ं 35
गए िवषय व तु बारे म जान सकगे, िहदं ी भाषा म िविभ न कार क साम ी
अकबरी लोटा कहानी म पा के मा यम क ा6 ● स वर आदश वाचन म स म ह गे, (समाचार, प -पि का, कहानी, ● कायप क स.ं 38
(अ नपूणा वमा) से परतं ता के समय म कारक िच : पहचान जानकारीपरक साम ी, इटं रनेट, लॉग पर
क ा7 ● सामािजक प रवेश, मानवीय िज ासाओ ं के
अं ेज के साथ हई छपने वाली साम ी आिद) को समझकर ● कायप क स.ं 42
ित िज ासु ह गे,
घटनाओ ं म से एक छोटी कारक िच : भेद पढ़ते ह और उसम अपनी पसदं -नापसदं ,
सी घटना को लेकर के उस क ा8 ● लोगो के अचार िवचार, रहन-सहन प रवेश ● िक ह दस
िट पणी, राय, िन कष आिद को मौिखक/
समय क वृि य का कारक िच का वा य म आिद के बारे म जान सकगे,
सांकेितक भाषा म अिभ य करते ह। ाचीन भारतीय
िच ण करना। योग का अ यास ● िविभ न आंचिलक व तुओ ं के नाम और पढ़ी गई साम ी पर िचतं न करते हए व तुओ ं का
पाठा तगत याकरिणक िबंद-ु व प को गौर करगे, समझ के िलए पछू ते ह। सिं िववरण
● महु ावरे अथ और योग ● मानवीयता के ित संवेदनशील ह गे, ● पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के देते हए सिच
● लोकोि अथ और योग ● रा ीय प रवेश के बारे म अिधक िज ासु िलए वयं बनाते ह और पछू ते ह । तुित ।
होकर उनसे स बंिधत जानका रयां एकि त अपने अनभु व को अपनी भाषा शैली
● देश क मल
ू भतू कर सकते ह, म िलखते ह । ● ‘सं हालय य
सम याओ ं पर आधा रत ● मनु य और प रि थितय के बीच के
पिठत/अपिठत ग ाश
ं का होते ह?’ िवषय
आपसी स ब ध को जान सकगे,
अ यास पर चचा ।
● क पनाशीलता का िवकास होगा,

8

Page 9

9 पाठ. 15 का य, पद/ वा स य ेम पूववत क ाओ ं से िलए ● पद का य’ श द से प रिचत होते हए इस  अपने प रवेश म मौजदू लोककथाओ ं ● कायप क स.ं 37
गए िवषय व तु िवधा के बारे म जान सकगे, और लोकगीत के बारे म बताते/सनु ाते ● कायप क स.ं 39
सरू के पद वा स य एवं ेम के क ा6 ● भावानक ह।
ु ू ल एवं आदश वाचन म स म ● सरू दास से
(सरू दास) िविभ न भाग , बाल सलु भ पयायवाची: पहचान ह गे,  पढ़कर अप रिचत प रि थितय और सबं िं धत
ि या-कलाप को िचि त क ा 7
● सरू के पद के आधार पर जीवन, यि व, घटनाओ ं क क पना करते ह और उन जानकारी एक
करती सरू दास जी के पयायवाची श द का योग
भि और वा स य के बारे म जान सकगे, पर अपने मन म बनने वाली छिवय करते हए समहू
पदावली के अश ं क का. स.ं 2 ,30
● पाठा तगत यु याकरिणक िब दओ ु ं के और िवचार के बारे म प रयोजना के
तुित क ा8
अवगत होते हए उनका भािषक योग करने मौिखक/सांकेितक भाषा म बताते ह। प म तिु त ।
पयायवाची श द क सचू ी
पाठा तागत याकरिणक िबंद-ु म समथ ह गे।  वा स य रस के िवषय म जान सकगे । ● सरू दास के पद
● सरू दास जी के वा स य वणन से प रिचत  पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के क क ा म
● पयायवाची श द का
ह गे व ज भाषा से प रिचत ह गे । िलए वयं बनाते ह और पछू ते ह । सगं ीता मक
अ यास तिु त ।
● अपने अनभु व को अपनी भाषा शैली
● वा स य ेम पर आधा रत
म िलखते ह अ यास हल करने म
पिठत/अपिठत प ांश का स म ह गे
अ यास

9

Page 10

10 पाठ- 16 िनबधं ● लोकोि : पहचान ● िनबंध’ श द से प रिचत होते हए इस ● ‘वैि क तापमान वृि ‘ और िहमनद  जल च एवं जल
पानी क कहानी कहानी म पा के मा यम और योग िवधा के बारे म जान सकगे, के िपघलने से उ प न खतर पर चचा सरं ण िवषय पर
रामचं ितवारी से परतं ता के समय म ● वा यांश के िलए एक ● भावानक करगे । िनबधं , वाद-
ु ू ल एवं आदश वाचन म स म
अं ेज के साथ हई शद ह गे, िववाद एवं सवं ाद
घटनाओ ं म से एक छोटी लेखन।
सी घटना को लेकर के उस  पिठत/अपिठत ग ाश ं / ● इस िव ान िवषयक पाठ के मा यम से
प ांश का अ यास पानी क उ पि और उसके योग के बारे  ‘जल का मह व’
समय क वृि य का
 िव ािथय क िच, म जान सकगे, िवषय पर नारा
िच ण करना।
अवसर, आव यकता एवं ● पानी क उपयोिगता और हमारे जीवन के लेखन ।
अिधगम के आधार पर िलए उसके मह व को जान सकगे,
औपचा रक/ अनौपचा रक ● पानी क कमी से होनेवाली किठनाइय एवं
प लेखन का अ यास उसके भाव से अवगत ह गे,
● िव ािथय क िच, ● आने वाले समय म पानी क कमी को कै से
अवसर, आव यकता परू ा िकया जा सकता है, इसके बारे म
एवं अिधगम के आधार सोचगे,
पर अनु छे द/ िनबंध/
िच वणन का अ यास
 उपयु पाठ्य म 31 जनवरी 2025 तक पूरा कर िलया जाए।
 वािषक परी ा म सम त पाठ्य म से पूछे जाएगं े ।
 वािषक परी ा हेतु सम त पाठ्य म क पनु राविृ त करवाई जाए।
 यात य है िक पूरक पाठ्य-पु तक “भारत क खोज” क ा-8 अिधगम सवं ृि (Learning Enrichment) के उ े य मा से है।
वािषक परी ा

10

Document Details

Board / OrgDelhi Board
ExamClass 8
TypeSyllabus
Pages10
Updated22 Jul 2026

More for Delhi Class 8

📘Syllabus