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वािषक पाठ्य म 2023-24
क ा–6
िवषय – िहंदी
. पाठ िवधा/ िवषय- याकरण और अिधगम उ े य अिधगम सं ाि सदं भ/
सं . सं या व तु रचना मक लेखन सुझावा मक
और नाम ि याकलाप
1 पाठ 1. किवता / कृ ित पूववत क ाओ ं से िलए किवता िवधा से प रिचत ह गे, अपने प रवेश म मौजदू लोककथाओ ं और कायप क स.ं
वह एक िचिड़या जो गए िवषय-व तु-
भावानक ु ू ल स वर वाचन म स म लोकगीत के बारे म बताते/सुनाते ह। 11-13 का
िचिड़या उ मु ाकृ ितक क ा 4 – का. स.ं 60A,
ह गे, पढ़कर अप रिचत प रि थितय और घटनाओ ं क अ यास
जो वातावरण/ 63A, 66A
ाकृ ितक प रवेश, जीव-जतं ु के ित क पना करते ह और उन पर अपने मन म बनने कृ ित एवं
के दारनाथ प रवेश म िवशेषण क पहचान
िज ासु ह गे, वाली छिवय और िवचार के बारे म पयावरण से
अ वाल स न/ संतु है I क ा 5 – का. सं. 39A
मौिखक/साक ं े ितक भाषा म बताते ह। स बिं धत
पाठा तगत याकरिणक िब दु पश-ु प ी के ित संवदे नशील ह गे,
ि या िवशेषण क पहचान ब चे िविभ न िवषय पर आधा रत िविवध िब दओ ु ं पर
क पनाशीलता का िवकास होगा, अनु छे द/ िनबंध
और योग कार क रचनाओ ं को पढ़कर चचा करते ह, जैस-े
पाठा तगत यु नए श द से पाठ्यपु तक म िकसी प ी के बारे म पढ़कर पि य लेखन/ िच
कृ ित एवं पयावरण से प रिचत होते हए उनका योग कर पर िलखी गई सािलम अली क िकताब पढ़कर चचा वणन/ नाट्य
स बिं धत िवषय पर सकगे । करते ह। पातं रण/ सवं ाद
आधा रत अपिठत प ांश का
अ यास सं ा और उसके भेद उदाहरण सिहत पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के िलए वयं
लेखन/फसी
जान सकगे प रधान
सं ा और उसके भेद उदहारण बनाते ह और पछू ते ह । अपने अनभु व को अपनी
पाठा तगत यु याकरिणक भाषा शैली म िलखते ह । ितयोिगता
सिहत ।
िब दओ का अ यास
ु ं से अवगत होते हए उनका भाषा क बारीिकय / यव था का िलिखत
भािषक योग कर सकगे । योग करते ह, जैसे किवता के श द को बदलकर
अथ और लय को समझना।
2 पाठ 2. सं मरण/ कृ णा क ा 4 – का. सं. 52A ‘सं मरण’ श द से प रिचत होते हए सं मरण िवधा को समझायाई जाय । अनभु व कथन
बचपन सोबती के जीवन सवनाम क पहचान इस िवधा के बारे म जान सकगे, िविभ न पठन सामि य म यु श द , स बंिधत
कृ णा से जड़ु ी याद । क ा 5 – का. सं. 10
आदश वाचन म स म ह गे महु ावर , लोकोि य को समझते हए उनक सराहना िब दओ ु ं पर
सोबती अपने बचपन के
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िदन को याद कर पाठा तगत सवनाम के भेद बचपन के कई सारे अनभु व क करते ह। अनु छे द /िनबंध
लेिखका समय एवं योग अनभु िू त नए संदभ म कर सकगे, िविभ न पठन सामि य को पढ़ते हए उनके िश प क लेखन का
के साथ आ रहे पाठा तगत याकरिणक िब दु अ यास
त कालीन प रि थितय के सराहना करते ह और अपने तरानक ु ू ल मौिखक,
सामािजक और पु षवाचक सवनाम क िलिखत, ेल/ सांकेितक प म उसके बारे म अपने
पा रवा रक एवं सामािजक प रवेश
सां कृ ितक पहचान और योग िवचार य करते ह। अपने बचपन
को जानने और समझने का यास
बदलाव क ि या िवशेषण क पहचान
करगे, िकसी पाठ्यव तु को पढ़ने के दौरान समझने क िकसी
चचा कर रही ह और योग नादानी पर
। भाषा और िलिप िशमला और वहाँ क िवशेषताओ ं के िलए ज़ रत पड़ने पर अपने िकसी सहपाठी या
िश क क मदद लेकर उपयु संदभ साम ी, जैसे- लघक ु था/
को जान सकगे,
श दकोश, िव कोश, मानिच ,इटं रनेट या अ य कहानी/
अपनी अनभु िू तय को िलखने का अनु छे द लेखन
पु तक क मदद लेते ह।
यास करगे, का अ यास/
भाषा क बारीिकय / यव था का िलिखत
पाठा तगत यु नए श द एवं मिहला
योग करते ह, जैस-े किवता के श द को बदलकर
याकरिणक िब दओ ु ं से प रिचत होते लेिखकाओ ं क
अथ और लय को समझना।
हए उनका भािषक योग कर सकगे, सचू ी व रचना
अ यास हल करने म स म ह गे। तैयार करना
3 पाठ .3 कहानी / बाल क ा 4 – का. सं. 60A, कहानी िवधा से प रिचत ह गे, ‘देखो कोयल काली है’ किवता का पाठ हो कायप क
नादान – सलु भ ि याओ ं 63A, 66A महान कथाकार ेमचंद एवं उनके सकता है । सं. 20-29 का
दो त का वणन । िवशेषण क पहचान
कुछ मख ु कृ ितय से प रिचत ह गे िहदं ी भाषा म िविभ न कार क साम ी अ यास
ेमचंद ब चे नादानी म क ा 5 – का. सं. 39A
और आदश वाचन म स म ह गे, (समाचार, प -पि का, कहानी, जानकारीपरक
गलती कर देते ह, पाठा तगत सं यावाची
हमारे आसपास रहने वाले पि य के साम ी, इटं रनेट, लॉग पर छपने वाली साम ी आिद) बचपन म क गई
जबिक उनका िवशेषण क पहचान और
बारे म जानगे, को समझकर पढ़ते ह और उसम अपनी पसंद,नापसंद, िकसी नादानी पर
उ े य अ छा योग
िट पणी, राय, िन कष आिद को मौिखक/सांकेितक लघक ु था/
होता है । पश-ु पाठा तगत याकरिणक पि य के अडं े एवं उनके रख-रखाव
भाषा म अिभ य करते ह। पढ़ी गई साम ी पर िचंतन कहानी वाचन/
पि य के ित िब दओ ु ं सं यावाची के बारे म समझ आ जाएगी,
करते हए समझ के िलए पछू ते ह। चचा का
संवदे ना मक भाव िवशेषण क पहचान और नादानी म क गई गलितय एवं उनके
रखगे योग पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के िलए वयं अ यास
प रणाम के बारे म सोचने का यास
उपसग क पहचान और बनाते ह और पछू ते ह । अपने अनभु व को अपनी
करगे और माता-िपता एवं
योग भाषा शैली म िलखते ह । उपसग व यय
अिभभावक ारा िदए गए िनदश का
का अ यास
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पिठत एवं अपिठत मह व समझगे
ग ांश/प ांश का अ यास पाठा तगत यु नए श द से
प रिचत होते हए उनका योग कर
सकगे,
पाठा तगत यु याकरिणक
िब दओ ु ं से अवगत होते हए उनका
भािषक योग करने म समथ ह गे ।
अ यास हल करने म स म
ह गे।
उपयु पाठ्य म 15 िसत बर 2023 तक परू ा कर िलया जाए ।
म याविध परी ा हेतु पाठ्य म क पुनरावृित करवाई जाए।
िदया गया पाठ्य म मू यांकन हेतु है , शेष पाठ्य-व तु अिधगम संवृि के उ े य मा है।
यात य है िक पूरक पाठ्य-पु तक “बाल रामकथा” क ा-6 अिधगम संवृि (Learning Enrichment) के उ े य मा से ह । गत परी ाओ ं म इन पूरक पु तक से
नह पछू े गए ह । अिधगम संवृि (Learning Enrichment) के उ े य क पिू त हेतु इनका उपयोग िकया जा सकता है।
म याविध परी ा
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. पाठ सं या िवधा/िवषय- याकरण और अिधगम उ े य संदभ/
सं . और नाम व तु रचना मक लेखन सुझावा मक
ि याकलाप
4 पाठ 7. गीत/ सामािजक पाठा तगत याकरिणक भावानक ु ू ल, स वर एवं आदश वाचन म अपने प रवेश म मौजदू लोककथाओ ं कायप क
साथी हाथ और सामदु ाियक िब दु िनजवाचक स म ह गे, और लोकगीत के बारे म बताते/सनु ाते सं. 35-38 का
बढ़ाना सहभािगता, सवनाम क पहचान और
किवता के मल ू भाव यथा सहका रता, सहयोग ह। अ यास
सािहर पर पर सहयोग क योग
एवं परोपकार क भावना से प रिचत ह गे एवं पढ़कर अप रिचत प रि थितय और
लिु धयानवी भावना पयायवाची और
अपने जीवन म भी आ मसात् कर सकगे, घटनाओ ं क क पना करते ह और उन महु ावरे के अथ
समानाथ श द क
पहचान और योग ‘एक और एक यारह’ महु ावरे के ारा पर पर पर अपने मन म बनने वाली छिवय को समझकर
सहयोग क भावना समझने का य न करगे और िवचार के बारे म वा य म योग
िलंग: योग और अ यास
मौिखक/सांकेितक भाषा म बताते ह । करने का
वचन: योग और अ यास पाठा तगत यु नए श द से प रिचत होते िविभ न संवेदनशील मु /िवषय , जैस-े अ यास
हए उनका योग कर सकगे, पाठा तगत यु
महु ावरे के अथ को समझना जाित, धम, रंग, जडर, रीित- रवाज़ के काल एवं उसके
याकरिणक िब दओ ु ं एवं महु ावर से अवगत
और वा य म योग करना बारे म अपने िम , अ यापक या भेद , िलंग, वचन
होते हए उनका भािषक योग करने म समथ
एक-एक यारह, महु ावरे के प रवार से करते ह जैसे अपने तथा महु ावर क
ह गे,
मा यम से सामािजक और मोह ले के लोग से योहार मनाने के पहचान, एवं
सामदु ाियक सहभािगता, अ यास हल करने म स म ह गे। तरीके और एकता/सामिू हकता पर उसका अ यास,
पर पर सहयोग क भावना कहावत और महु ावर का योग । त सम और बातचीत करना । ‘एकता म बल’
िवकिसत करने का यास त व श द का योग । कहानी कथन एवं
पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के
िकया जा सकता है। वण
िलए वयं बनाते ह और पछू ते ह ।
िव ािथय क िच, अपने अनभु व को अपनी भाषा शैली
अवसर, आव यकता म िलखते ह ।
एवं अिधगम के आधार
भाषा क बारीिकय / यव था का
पर औपचा रक/
िलिखत योग करते ह, जैसे किवता के
अनौपचा रक प लेखन
श द को बदलकर अथ और लय को
का अ यास
समझना ।
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िव ािथय क िच, अपने अनभु व को अपनी भाषा शैली म
अवसर, आव यकता िलखते ह। लेखन के िविवध तरीक और
एवं अिधगम के आधार शैिलय का योग करते ह, जैसे िविभ न
पर अनु छे द/ िनबंध/ तरीक से (कहानी, किवता, िनबंध
िच वणन का अ यास आिद) कोई अनुभव िलखना ।
5 पाठ 8 एकाकं / त सम और त व श द, ‘एकांक ’ श द से प रिचत होते हए इस िवधा िहदं ी भाषा म िविभ न कार क कायप क स.ं
ऐसे – ऐसे िव ालय न जाने िवलोम श द के बारे म जान सकगे, साम ी (समाचार, प -पि का, कहानी,
39-46 का
िव णु भाकर के बहाने बनाने के
भावानक ु ू ल एवं पा ानक
ु ू ल आदश वाचन म जानकारीपरक साम ी, इटं रनेट, लॉग
अ यास
िवषय को लेकर पर छपने वाली साम ी आिद) को
स म ह गे, िव ालय न
हा य एकांक समझकर पढ़ते ह और उसम अपनी
िव ाथ िव ालय जाने के िलए िकस- िकस जाने के बहाने
पसंदनापसंद, िट पणी, राय, िन कष
िवषय को लेकर
एकांक के िवषय- कार के बहाने बनाते ह इसे जान सकगे
आिद को मौिखक/सांकेितक भाषा म
िव ाथ अपने
व त,ु पा , घटना एका क
ं के िवषय-व त ु ंएव घटना म को अिभ य करते ह। अनभु व को
म आिद पर अपने िनजी जीवन से जोड़कर देखते है
पढ़ी गई साम ी पर िचंतन करते हए
साझा/ चचा
चचा एवं पा , घटना म, संवाद आिद श द से प रिचत समझ के िलए पछू ते ह। कर ।
घटना म को हो सकगे
अपने िनजी जीवन िव ालय न
पाठा तगत यु याकरिणक िब दओ ु ं से जाने के हािन ।
से जोड़कर देखने अवगत होते हए उनका भािषक योग करने म
का नज़ रया िव ालय न
समथ ह गे,
क पना मकता जाने के कौन से
का िवकास अ यास हल करने म स म ह गे। बहाने िवषय पर
संवाद लेखन, य लेखन का अ यास कर चचा व
सकगे। अनु छे द
लेखन।
6 पाठ 10 किवता/ भारत के संबंध कारक क पहचान भावानक ु ू ल, स वर एवं आदश वाचन म स म भाषा क बारीिकय / यव था का वतं ता
झाँसी क रानी थम वतं ता एवं योग । ह गे, िलिखत योग करते ह, जैसे किवता के आदं ोलन और
आदं ोलन 1857
भारत के थम वतं ता आदं ोलन 1857 क श द को बदलकर अथ और लय को उनसे जड़ु े
सभु ा कुमारी क ांित क समझना। नायक के ित
ांित के कणधार से प रिचत ह गे,
चौहान नाियका रानी िज ासा के
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ल मीबाई के झाँसी क रानी के जीवन क कहानी से अिभ यि क िविवध शैिलय / प को मा यम से
जीवन च रत को िव ािथय को अवगत ह गे, पहचानते ह, वयं िलखते ह, जैसे- उनके बारे म
लयब करती जानकारी
पाठा तगत यु नए श द से प रिचत होते किवता, कहानी, िनबधं आिद।
किवता संगहृ ीत करना
हए उनका योग कर सकगे, अपने अनभु व को अपनी भाषा शैली म
पाठा तगत यु याकरिणक िब दओ ु ं से िलखते ह। लेखन के िविवध तरीक और उनके यि व
शैिलय का योग करते ह, जैसे िविभ न पर िनबधं /
अवगत होते हए उनका भािषक योग करने म
तरीक से (कहानी, किवता, िनबंध अनु छे द आिद
समथ ह गे ।
आिद) कोई अनुभव िलखना। लेखन का
अ यास हल करने म स म ह गे। अ यास
िविवध कलाओ,ं जैसे- ह तकला,
वा तुकला, खेती-बाड़ी, नृ यकला और
इनम योग होने वाली भाषा (रिज टर)
का सृजना मक योग करते ह, जैसे-
कला के बीज बोना, मनमोहक मु ाएँ,
रस क अनभु िू त।
7 पाठ.12 प / प लेखन के - क ा 4 – का. सं. ‘प ’ िवधा से प रिचत ह गे, ब चे िविभ न िवषय पर आधा रत औपचा रक/
सस ं ार पु तक मह व 112A, 142A यय
आदश वाचन म स म ह गे, िविवध कार क रचनाओ ं को पढ़कर अनौपचा रक
है अनभु व अ य श द से प रचय चचा करते ह, जैस-े पाठ्यपु तक म प लेखन का
सीख और िचंतन योजक िच से प रचय जवाहरलाल नेह के नाम एवं उनके यि व
िकसी प ी के बारे म पढ़कर पि य पर अ यास।
जवाहर लाल क वृित का क ा 5 – का. सं. 55A से प रिचत ह गे,
िलखी गई सािलम अली क िकताब िस हि तय
नेह िवकास, यय श द क पहचान तक कौशल एवं वैचा रकता का िवकास होगा, पढ़कर चचा करते ह। व उनक सतं ान
महान एवं योजक िच क पहचान प -लेखन के मह व को समझ सकगे , िहदं ी भाषा म िविभ न कार क साम ी के म य प
ऐितहािसक पाठा तगत याकरिणक महान एवं ऐितहािसक यि व के ारा िलखे (समाचार, प -पि का, कहानी, यवहार व
यि व के ारा िब दु – गए प के ित िज ासु ह गे, जानकारीपरक साम ी, इटं रनेट, लॉग उनक सीख
िलखे गए प के यय श द का अ यास
ित िज ासा और पिठत एवं अपिठत पाठा तगत यु नए श द एवं याकरिणक पर छपने वाली साम ी आिद) को िवषय पर
िब दओु ं से प रिचत होते हए उनका भािषक समझकर पढ़ते ह और उसम अपनी लेखन ।
उनसे ली गई ेरणा ग ांश/प ांश का
योग कर सकगे, पसंदनापसंद, िट पणी, राय, िन कष
अथवा सीख अ यास
अ यास हल करने म स म ह गे। आिद को मौिखक/सांकेितक भाषा म
अिभ य करते ह।
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पढ़ी गई साम ी पर िचतं न करते हए
समझ के िलए पछू ते ह।
8 पाठ.13 बचपन के वा यांश के िलए एक भावानक पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के िलए का य रचना के
ु ू ल स वर वाचन म स म ह गे,
म सबसे छोटी अनभु व को याद शद बचपन क मृितय और माँ के अपनेपन के वयं बनाते ह और पछू ते ह । अपने िलए
होऊँ कर का य िवधा से
िव ािथय क िच, भाव से प रिचत ह गे अनभु व को अपनी भाषा शैली म िव ािथय को
सिु म ा नदं न पतं
अवगत करना िलखते ह । े रत करना
अवसर, आव यकता पा रवा रक मू य का िवकास होगा,
और का य िवधा
एवं अिधगम के आधार भाषा क बारीिकय / यव था का सं ा और
के ित भाव क पनाशीलता का िवकास होगा,
पर औपचा रक/ िलिखत योग करते ह, जैसे किवता के उसके भेद का
अनौपचा रक प लेखन पाठा तगत यु याकरिणक िब दओ
उ प न करना । ु ं से
श द को बदलकर अथ और लय को योग करना ।
का अ यास अवगत होते हए उनका भािषक योग करने म
समझना। किवता लेखन
समथ ह गे ।
िव ािथय क िच, अिभ यि क िविवध शैिलय / प को व पठन/ स वर
अवसर, आव यकता अ यास हल करने म स म ह गे। पहचानते ह, वयं िलखते ह, जैसे- वाचन ।
एवं अिधगम के आधार किवता, कहानी, िनबंध आिद।
पर अनु छे द/ िनबंध/
िच वणन का अ यास
उपयु पाठ्य म 31 जनवरी 2024 तक पूरा कर िलया जाए ।
वािषक परी ा हेतु पाठ्य म क पनु रावृित करवाई जाए।
वािषक परी ा म घटाए गए पाठ अथवा पाठ के अंश को छोड़कर सम त पाठ्य म से पछ ू े जाएँगे।
िदया गया पाठ्य म मू यांकन हेतु है , शेष पाठ्य-व तु अिधगम संवृि के उ े य मा है।
यात य है िक परू क पाठ्य-पु तक “बाल रामकथा” क ा-6 अिधगम सवं ृि (Learning Enrichment) के उ े य मा से है। गत परी ाओ ं म इन परू क पु तक से नह
पूछे गए ह । अिधगम संवृि (Learning Enrichment) के उ े य क पिू त हेतु इनका उपयोग िकया जा सकता है।
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