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वािषक पाठ्य म 2024-25
क ा–6
िवषय – िहंदी
.सं पाठ का नाम, िवषय-व तु याकरण और रचना मक अिधगम उ े य सझ
ु ावा क गितिविध/
रचियता, िवधा लेखन ि याकलाप
1 पाठ 1. कृ ित एक िचिड़या पाठा तगत याकरिणक िबंदु किवता िवधा से प रिचत ह गे, कृ ित एवं पयावरण से स बंिधत
वह िचिड़या जो जो उ मु ाकृ ितक िवशेषण क पहचान और योग िबंदओ
ु ं पर अनु छे द/ िनबंध लेखन/
भावानकु ू ल स वर वाचन म स म ह गे,
के दारनाथ अ वाल वातावरण/ प रवेश म ि या िवशेषण क पहचान और िच वणन/ नाट्य पातं रण/ सवं ाद
किवता िवचरण करती है योग ाकृ ितक प रवेश, जीव-जंतु के ित िज ासु ह गे,
लेखन/फसी प रधान ितयोिगता
िजससे वह स न और कृ ित एवं पयावरण से स बंिधत पश-ु प ी के ित संवेदनशील ह गे,
संतु है । िवषय पर आधा रत अपिठत प ांश क पनाशीलता का िवकास होगा,
का अ यास पाठा तगत यु नए श द से प रिचत होते हए उनका योग कर सकगे ।
सं ा और उसके भेद उदाहरण सिहत ।
सं ा और उसके भेद उदाहरण सिहत जान सकगे
पाठा तगत यु याकरिणक िबदं ओ ु ं से अवगत होते हए उनका भािषक
योग कर सकगे ।
2 पाठ 2. सं मरण/ कृ णा पाठा तगत याकरिणक िबंदु : ‘सं मरण’ श द से प रिचत होते हए इस िवधा के बारे म जान सकगे, अनभु व कथन स बंिधत िबंदओ ु ं
बचपन सोबती के जीवन से भाववाचक सं ा क पहचान और पर अनु छे द /िनबंध लेखन का
आदश वाचन म स म ह गे
कृ णा सोबती जुड़ी याद। अपने योग अ यास
सं मरण बचपन के िदन को िवशेषण प रमाणवाचक क पहचान बचपन के कई सारे अनभु व क अनभु ूित नए संदभ म कर सकगे,
अपने बचपन क िकसी नादानी पर
याद कर लेिखका और योग त कालीन प रि थितय के पा रवा रक एवं सामािजक प रवेश को जानने और
लघक ु था/ कहानी/ अनु छे द लेखन
समय के साथ आ रहे सावनािमक िवशेषण क पहचान समझने का यास करगे,
का अ यास/ मिहला लेिखकाओ ं
सामािजक और और योग िशमला और वहाँ क िवशेषताओ ं को जान सकगे, क सचू ी व रचना तैयार करना ।
सां कृ ितक बदलाव सवनाम क पहचान और योग
अपनी अनभु िू तय को िलखने का यास करगे, भारत क िविवधता यथा – खान-
क चचा कर रही ह। पु षवाचक सवनाम क पहचान
और योग पाठा तगत यु नए श द एवं याकरिणक िबंदओ ु ं से प रिचत होते हए पान, वेश-भषू ा, पव- योहार आिद
उनका भािषक योग कर सकगे, के संदभ मे चचा
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3 नादान – दो त बाल सल ु भ ि याओ ं पाठा तगत याकरिणक िबंदु : कहानी िवधा से प रिचत ह गे, िहदं ी भाषा म िविभ न कार क
ेमचदं का वणन । सवनाम क पहचान और योग साम ी (समाचार, प -पि का,
महान कथाकार ेमचंद एवं उनके कुछ मख ु कृ ितय से प रिचत ह गे और
कहानी ब चे नादानी म गलती कहानी, जानकारीपरक साम ी,
आदश वाचन म स म ह गे,
कर देते ह, जबिक िवशेषण गणु वाचक क पहचान इटं रनेट, लॉग पर छपने वाली
उनका उ े य अ छा और योग हमारे आसपास रहने वाले पि य के बारे म जानगे,
होता है । पश-ु पि य िवराम िच क पहचान और योग पि य के अंडे एवं उनके रख-रखाव के बारे म समझ आ जाएगी, और उसपर अपनी पसंद,नापसदं ,
के ित संवेदना मक नादानी म क गई गलितय एवं उनके प रणाम के बारे म सोचने का यास िट पणी, राय, िन कष आिद को
भाव पिठत एवं अपिठत ग ांश/प ांश करगे और माता-िपता एवं अिभभावक ारा िदए गए िनदश का मह व समझगे मौिखक/सांकेितक भाषा म
का अ यास
पाठा तगत यु याकरिणक िबंदओ ु ं से अवगत होते हए उनका भािषक अिभ य करना ।
पाठा तगत यु नए श द से योग करने म समथ ह गे । अपने अनभु व को अपनी भाषा
प रिचत होते हए उनका योग अ यास हल करने म स म ह गे। शैली म िलखना।
बचपन म क गई िकसी नादानी पर
लघक ु था/कहानी वाचन/ चचा का
4 साथी हाथ बढ़ाना सामािजक और पाठा तगत याकरिणक िबदं ु : भावानक ु ू ल, स वर एवं आदश वाचन म स म ह गे, अपने प रवेश म चिलत
सािहर लिु धयानवी सामदु ाियक त सम और त व श द क लोककथाओ ं और लोकगीत के
किवता के मल ू भाव यथा सहका रता, सहयोग एवं परोपकार क भावना से
गीत सहभािगता, पर पर पहचान और योग बारे म बात करना।
प रिचत ह गे एवं अपने जीवन म भी आ मसात् कर सकगे,
सहयोग क भावना
आगत / िवदेशज श द क ‘एक और एक यारह’ महु ावरे के ारा पर पर सहयोग क भावना समझने का िविभ न सवं ेदनशील मु /िवषय ,
पहचान और योग य न करगे जैस-े जाित, धम, रंग, िलंगभेद ,
सवनाम िनजवाचक क पहचान रीित- रवाज़ के बारे म अपने िम ,
पाठा तगत यु नए श द से प रिचत होते हए उनका योग कर सकगे,
और योग अ यापक या प रवार से करना
पाठा तगत यु याकरिणक िबदं ओ ु ं एवं महु ावर से अवगत होते हए उनका
पयायवाची और समानाथ भािषक योग करने म समथ ह गे, भाषा क बारीिकय / यव था का
श द क पहचान और योग िलिखत योग करना, जैसे किवता
के श द को बदलकर अथ और
महु ावरे के अथ को समझना और कहावत और महु ावर का योग करने म स म ह गे । लय को समझना ।
वा य म योग करना
त सम और त व श द का योग करने म स म ह गे । अपने अनभु व को अपनी भाषा
शैली म िलखना। लेखन के िविवध
तरीक और शैिलय का योग
करते हए िविभ न तरीक से
(कहानी, किवता, िनबंध आिद)
कोई अनभु व िलखना ।
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उपयु पाठ्य म 13 िसत बर 2024 तक पूरा कर िलया जाए ।
म याविध परी ा हेतु पुनराविृ त करवाई जाए।
यात य है िक पूरक पाठ्य-पु तक “बाल रामकथा ” क ा-6 अिधगम सवं ृि (Learning Enrichment) के उ े य मा से है ।
म याविध परी ा
5 पाठ 8 िव ालय न जाने के पाठा तगत याकरिणक िबंदु : ‘एकांक ’ श द से प रिचत होते हए इस िवधा के बारे म जान सकगे, िहदं ी भाषा म िविभ न कार क
ऐसे – ऐसे बहाने बनाने के िवषय अथ के आधार पर वा य रचना क साम ी (समाचार, प -पि का,
भावानकु ू ल एवं पा ानक
ु ू ल आदश वाचन म स म ह गे,
िव णु भाकर को लेकर हा य पहचान एवं योग यथा – कहानी, जानकारी परक साम ी,
एकांक एकांक िव ाथ िव ालय जाने के िलए िकस- िकस कार के बहाने बनाते ह इसे
िवधानवाचक इटं रनेट, लॉग पर छपने वाली
जान सकगे।
िनषेधवाचक एकांक के िवषय-व तु एवं घटना म को अपने िनजी जीवन से जोड़कर और उसम अपनी पसदं -नापसंद,
वाचक देखते है। िट पणी, राय, िन कष आिद को
आ यवाचक / िव मयवाचक पा , घटना म, संवाद आिद श द से प रिचत हो सकगे। मौिखक/सांकेितक भाषा म
पाठा तगत यु याकरिणक िबदं ओ ु ं से अवगत होते हए उनका भािषक अिभ य करना।
योग करने म समथ ह गे। पढ़ी गई साम ी पर िचतं न करते हए
अ यास हल करने म स म ह गे। समझ के िलए पछू ना।
संवाद लेखन, य लेखन का अ यास कर सकगे।
6 पाठ 10 भारत के थम पाठा तगत याकरिणक िबंदु : भावानक ु ू ल, स वर एवं आदश वाचन म स म ह गे, वतं ता आदं ोलन और उनसे जड़ु े
झाँसी क रानी वतं ता आदं ोलन कारक के िच क पहचान एवं नायक के ित िज ासा के मा यम
भारत के थम वतं ता आदं ोलन 1857 क वाधीनता सेनािनय से प रिचत
सभु ा कुमारी चौहान 1857 क ांित क योग से उनके बारे म जानकारी सगं हृ ीत
ह गे,
किवता नाियका वीरांगना रानी सबध कारक क पहचान एव करना
ं ं ं झाँसी क रानी ल मीबाई के जीवन क कहानी से अवगत ह गे,
ल मीबाई के जीवन योग। यथा – का,के क , रा, रे , री उनके यि व पर िनबंध/
को लयब करती पाठा तगत यु नए श द से प रिचत होते हए उनका योग कर सकगे,
आिद अनु छे द आिद लेखन का
किवता पाठा तगत यु याकरिणक िबंदओ ु ं से अवगत होते हए उनका भािषक अ यास।
योग कर सकगे।
7 पाठ.12 भारत के थम पाठा तगत याकरिणक िबंदु : ‘प -लेखन’ िवधा से प रिचत ह गे, ‘पु तक का मह व’ िवषय पर
ससं ार पु तक है धानमं ी श द के संदभगत उिचत अथ क बातचीत/ अनु छे द /िनबंध लेखन
आदश वाचन म स म ह गे,
जवाहर लाल नेह जवाहरलाल नेह ारा पहचान एवं योग का अ यास
प पु ी इिं दरा गाधं ी को जवाहरलाल नेह के नाम एवं उनके यि व से प रिचत ह गे,
यय क पहचान एवं योग ‘जवाहरलाल नेह एवं उनके
पु तक के मह व को तक कौशल एवं वैचा रकता का िवकास होगा,
योजक िच क पहचान एवं योग यि व’ िवषय पर बातचीत/
दशाता हआ िलखा प -लेखन के मह व को समझ सकगे,
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गया प उपसग व यय का अ यास िचतं न क वृित का िवकास कर सकगे, अनु छे द /िनबंध लेखन का
महान एवं ऐितहािसक यि व के ारा िलखे गए प के ित िज ासु ह गे,
प लेखन का अ यास
पाठा तगत यु नए श द एवं याकरिणक िबंदओ ु ं से प रिचत होते हए
उनका भािषक योग कर सकगे, पढ़ी गई साम ी पर िचंतन करते
हए समझ के िलए पछू ते ह।
श द के संदभगत उिचत अथ के मह व को जान सकगे
महान एवं ऐितहािसक यि व के
ारा िलखे गए प के ित
िज ासा और उनसे ली गई ेरणा
अथवा सीख पर चचा
8 पाठ.13 बचपन क मृितय पाठा तगत याकरिणक िबंदु : भावानकु ू ल स वर वाचन म स म ह गे, ‘माँ के अपनेपन के भाव’ िवषय पर
म सबसे छोटी होऊँ और माँ के अपनेपन श द-यु म क पहचान एवं योग चचा
बचपन क मृितय और माँ के अपनेपन के भाव से प रिचत ह गे
सिु म ा नंदन पंत के भाव को कट
िवलोम श द क पहचान एवं पा रवा रक मू य का िवकास होगा, बचपन क मृितय पर चचा
किवता करती हई किवता ।
योग भाषा क बारीिकय / यव था का
क पनाशीलता का िवकास होगा,
वा यांश के िलए एक श द िलिखत योग करते ह, जैसे किवता के
पाठा तगत यु याकरिणक िबंदओ ु ं से अवगत होते हए उनका भािषक
श द को बदलकर अथ और लय को
योग करने म समथ ह गे ।
समझना।
अिभ यि क िविवध शैिलय / प
को पहचानते ह, वयं िलखते ह, जैस-े
किवता, कहानी, िनबंध आिद।
का य रचना के िलए िव ािथय को
े रत करना
किवता लेखन व पठन/ स वर वाचन ।
उपयु पाठ्य म 31 जनवरी 2025 तक पूरा कर िलया जाए।
वािषक परी ा म सम त पाठ्य म से पूछे जाएगं े ।
वािषक परी ा हेतु सम त पाठ्य म क पुनरावृित करवाई जाए।
यात य है िक परू क पाठ्य-पु तक “बाल रामकथा ” क ा-6 अिधगम सवं िृ (Learning Enrichment) के उ े य मा से है।
वािषक परी ा
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