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सुझावात्मक अंक योजना
अभ्यास प्रश्न पत्र
कक्षा-10
सत्र-II
सामाजजक जवज्ञान (087)
सामान्य जनर्देश:
1. यह अंक योजना NCERT पाठयपुस्तकों पर आधाररत है |
2. यह अंक योजना के वल सुझावात्मक है |
3. र्दुजवधा की जस्िजत में NCERT पाठ्यपुस्तकों की सहायता लें |
4. जवद्यार्िियों की सृजनात्मकता को उजित स्िान र्दें |
1. सजवनय अवज्ञा आन्र्दोलन में मजहलाओं की भूजमका-
(i) मजहलाओं ने बड़े पैमाने पर आन्र्दोलन में जहस्सा जलया |
(ii) गांधीजी के नमक सत्याग्रह के र्दौरान मजहलायें उनकी बात सुनने के जलए घर से बाहर आ
जाती िीं |
(iii) मजहलाओं ने जुलस
ू ों में जहस्सा जलया, नमक बनाया, जवर्देशी कपड़ों व शराब की र्दुकानों की
जपके ट ंग की | बहुत सारी मजहलाएँ जेल भी गईं |
2. रसायन उद्योग का महत्व-
(i) सकल घरे लु उत्पार्द में लगभग 3 प्रजतशत की भागीर्दारी है |
(ii) अकाबिजनक रसायनों का उविरक, कृ जत्रम वस्त्र, प्लाजस् क, गोंर्द, रं ग-रोगन, डाई, काँि, साबुन
आदर्द में प्रयोग होता है |
(iii) काबिजनक रसायनों में पेट्रोरसायन शाजमल हैं जो कृ जत्रम वस्त्र, कृ जत्रम रबर, प्लाजस् क, र्दवाइयाँ
आदर्द में प्रयोग होता है |
3. भारत में राजनीजतक र्दलों में सुधार के उपाय-
(i) र्दल-बर्दल कानून को मजबूत करने की जरुरत है |
(ii) राजनीजतक र्दलों के आन्तररक कामकाज को व्यवजस्ित करने के जलए कानून बनाया जाना
िाजहए |
(iii) राजनीजतक र्दल मजहलाओं को एक खास अनुपात में जरुर र क र्दें |
(iv) िुनाव का खिि सरकार उठाए |
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4. (1) बैंकों द्वारा दर्दया गया ऋर् - (B) औपिाररक स्रोत
(2) वस्तु के बर्दले वस्तु का लेन-र्देन- (C) वस्तु जवजनमय
5. सीमांत सड़कों का महत्त्व-
(i) सीमांत सड़कों का उत्तर एवं उत्तरी-पूवी क्षेत्रों में सामररक महत्व है |
(ii)इन सड़कों के जवकास से र्दुगिम क्षेत्रों में अजभगम्यता बढ़ी है |
(iii)ये सड़कें इन क्षेत्रों के आर्ििक जवकास में सहायक हुई हैं |
6.वैश्वीकरर् के सकारात्मक प्रभाव-
(i) वैश्वीकरर् से उत्पार्दकों- स्िानीय और जवर्देशी र्दोनों, के बीि वृहतर प्रजतस्पधाि से उपभोक्ताओं,
जवशेषकर शहरी क्षेत्र में धनी वगि के उपभोक्ताओं को लाभ हुआ है | इन उपभोक्ताओं के समक्ष पहले से
अजधक जवकल्प हैं और वे अब अनेक उत्पार्दों की उत्कृ ष्ट गुर्वत्ता और कम कीमत से लाभाजन्वत हो रहे
हैं |
(ii) बहुराष्ट्रीय कम्पजनयों के जनवेश के कारर् नए रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए हैं |
(iii)अनेक भारतीय कम्पजनयाँ भी बहुराष्ट्रीय कं पजनयों के रूप में उभरी हैं | जैसे- ा ा मो सि,
इनफ़ोजसस, रै नबैक्सी इत्यादर्द |
(iv)वैजश्वकरर् ने सेवा प्रर्दाता कं पजनयों जवशेषकर सुिना और संिार प्रौद्योजगकी वाली कं पजनयों के जलए
नए अवसरों का सृजन दकया है |
(i) वैश्वीकरर्-जवजभन्न र्देशों के बीि परस्पर सम्बन्ध और तीव्र एकीकरर् की प्रदिया को वैजश्वकरर्
कहते हैं |
(ii) जवजभन्न र्देशों के बीि अजधक से अजधक वस्तुओं और सेवाओं, जनवेश और प्रौद्योजगकी का आर्दान-
प्रर्दान हो रहा है | इससे जवगत कु छ र्दशकों में जवश्व के अजधकांश भाग एक-र्दूसरे के अपेक्षाकृ त
अजधक संपकि में आ गए हैं |
(iii) बहुराष्ट्रीय कम्पजनयाँ वैश्वीकरर् की प्रदिया में मुख्य भूजमका जनभा रही हैं |
(iv) जपछले कु छ र्दशकों में लोगों का जवजभन्न र्देशों के बीि आवागमन बढ़ा है | इससे भी जवजभन्न र्देश
एक र्दूसरे के साि जुड़ गए हैं |
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7. असहयोग आन्र्दोलन के कारर्-
(i) प्रिम जवश्वयुद्ध के कारर् भारत में करों की वृजद्ध, कीमतों का तेज़ी से बढ़ना, जबरन भती , खाद्य
समस्या इत्यादर्द |
(ii) रॉल सत्याग्रह एवं जजलयाँवाला हत्याकांड के कारर् व्यापक गुस्सा |
(iii)तुकी पर कठोर संजध िोपे जाने की अफवाहें; इसके बार्द मोहम्मर्द अली और शौकत अली के साि साि
कई युवा मुजस्लम नेताओं ने संयुक्त जनकारि वाई की संभावना तलाशने पर गांधीजी के साि ििाि शुरू कर दर्दया
िा | (जखलाफत आन्र्दोलन)
8. लोकतंत्र और आर्ििक असमानता-
(i)1950 से 2000 के बीि सभी लोकताजन्त्रक शासनों और तानाशाजहयों के कामकाज की तुलना करने पर
आर्ििक संवृजद्ध के मामले में तानाशाजहयों का ररकॉडि िोड़ा बेहतर है |
(ii) लेदकन, के वल इसी आधार पर लोकतंत्र को ख़ाररज नहीं दकया जा सकता क्योंदक आर्ििक जवकास कई
कारकों जैस-े र्देश की जनसँख्या का आकार, वैजश्वक जस्िजत, अन्य र्देशों से सहयोग और र्देश द्वारा तय की गयी
आर्ििक प्रािजमकताओं पर भी जनभिर करता है |
(iii)हालाँदक, लोकताजन्त्रक व्यवस्िाएँ आर्ििक असमानताओं को कम करने में ज़्यार्दा सफल नहीं हुई हैं लेदकन
इसके बावजूर्द लोकताजन्त्रक व्यवस्िाएँ ही बेहतर हैं क्योंदक इसके अन्य कई सकारात्मक फायर्दे हैं |
(iv)भारत जैसे लोकताजन्त्रक र्देश में गरीबी लगातार घ ी है | मध्य वगि की आय बढ़ी है |
9. (i) बड़े समाजों के जलए प्रजतजनजधत्व आधाररत लोकतंत्र की जरुरत होती है |
(ii) जब समाज बड़े और जर ल हो जाते हैं तब उन्हें जवजभन्न मुद्दों पर अलग-अलग जविारों को समे ने और
सरकार की नज़र में लाने के जलए दकसी माध्यम या एजेंसी की जरुरत होती है |
(iii)जवजभन्न जगहों से आये प्रजतजनजधयों को साि करने की जरुरत होती है तादक एक जजम्मेवार सरकार का
गठन हो सके |
(iv)सरकार का समििन या उस पर अंकुश रखने, नीजतयाँ बनवाने और नीजतयों का समििन अिवा जवरोध
करने के जलए उपकरर्ों की जरुरत होती है |
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(v)प्रत्येक प्रजतजनजध-सरकार की ऐसी जो भी जरूरतें होती हैं, राजनीजतक र्दल उनको पूरा करते हैं |
(vi)राजनीजतक र्दल िुनाव लड़ने, सरकार बनाने, कानून जनमािर्, जनमत जनमािर् आदर्द में जनर्ाियक भूजमका
जनभाते हैं | राजनीजतक र्दल लोकतंत्र की एक अजनवायि शति हैं |
वतिमान में राजनीजतक र्दलों के समक्ष िुनौजतयाँ –
(i) पा ी के भीतर आन्तररक लोकतंत्र का न होना एक बड़ी िुनौती है I इससे सारी ताकत एक या
कु छेक नेताओं के हाि में जसम जाती है I
(ii) वंशवार्द की िुनौती- इसके कारर् अनेक र्दलों में शीषि पड़ हमेशा एक ही पररवार के लोग आते हैं I
(iii) पार् ियों में पैसा और अपराधी तत्वों की घुसपैठ भी बढती जा रही है |
(iv) पार् ियों के बीि बढ़ती जवकल्पहीनता की जस्िजत भी राजनीजतक र्दलों के समक्ष एक बड़ी िुनौती है
| हाल के वषों में र्दलों के बीि वैिाररक अंतर कम होता जा रहा है |
(v) कई बार लोगों के पास एकर्दम नया नेता िुनने का जवकल्प भी नहीं होता क्योंदक वही िोड़े से नेता
हर र्दल में आते-जाते रहते हैं |
10. बैंकों और सहकारी सजमजतयों द्वारा साख गजतजवजधयों को बढ़ाने की आवश्यकता है क्योंदक-
(i) अनौपिाररक क्षेत्रक के द्वारा दर्दया गया ऋर् की ब्याज र्दर अजधक होती है जबदक बैंक एवं सहकारी
सजमजतयों (औपिाररक क्षेत्रक) के द्वारा दर्दए गए ऋर् की ब्याज र्दर अपेक्षाकृ त काम होती है |
(ii)लोग कम ब्याज र्दर पर क़ज़ि लेकर उद्यम शुरू कर सकते हैं जजससे उनकी आय बढ़ेगी |
(iii) बहुत से लोग अपनी जवजभन्न जरूरतों के जलए सस्ता क़ज़ि ले सकें गे |
(iv)वे फ़सल उगा सकते हैं, कोई कारोबार कर सकते हैं, छो े उद्योग इत्यादर्द लगा सकते हैं |
(v) वे नया उद्योग लगा सकते हैं या वस्तुओं का व्यापार कर सकते हैं | सस्ता एवं सामर्थयि के अनुकूल
क़ज़ि र्देश के जवकास के जलए अजत आवश्यक है |
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भारत की जनता अभी भी ऋर् के जलए अनौपिाररक क्षेत्रक पर जनभिर है क्योंदक-
(i) भारत के सभी ग्रामीर् क्षेत्रों में ऋर् के औपिाररक क्षेत्रक ( बैंक एवं सहकारी सजमजतयाँ) मौजूर्द
नहीं हैं | जहाँ कहीं बैंक मौजूर्द भी हैं, बैंक से क़ज़ि लेना अनौपिाररक स्रोत से क़ज़ि लेने की तुलना में
ज़्यार्दा मुजश्कल है |
(ii) बैंक से क़ज़ि लेने के जलए ऋर्ाधार और जवशेष कागजातों की जरुरत पड़ती है |
(iii) ऋर्ाधार की अनुपलब्धता एक प्रमुख कारर् है, जजससे गरीब बैंकों से ऋर् नहीं ले पाते |
(iv) र्दूसरी ओर, अनौपिाररक ऋर्र्दाता जैसे साहूकार इन कजिर्दारों को व्यजक्तगत स्तर पर जानते हैं
और इस कारर् अक्सर जबना ऋर्ाधार के भी ऋर् र्देने के जलए तैयार हो जाते हैं |
(v) कजिर्दार जरुरत पड़ने पर पुराना ऋर् िुकाए जबना भी, नया क़ज़ि ले सकते हैं |
11.1 – डोजमजनयन स् े स का अिि िा जिर श शासन के अन्र्दर ही सवैंधाजनक व्यवस्िा |
11.2 –भारत के भावी संजवधान पर ििाि करने के जलए गोलमेज सम्मलेन का आयोजन दकया गया िा |
11.3- 1929 के कांग्रेस के लाहौर अजधवेशन में पूर्ि स्वराज की माँग को औपिाररक रूप से मान जलया गया |
इस अजधवेशन में यह तय दकया गया दक 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दर्दवस के रूप में मनाया जाएगा और
उस दर्दन लोग पूर्ि स्वराज के जलए संघषि की शपि लेंगे |
12.1-कांडला पत्तन का जवकास स्वतंत्रता के बार्द करांिी पत्तन की कमी को पूरा करने तिा मुंबई से होने वाले
व्यापाररक र्दवाब को काम करने के जलए दकया गया िा |
12.2- मुंबई पत्तन की अजधक पररवहन को ध्यान में रखते हुए इसके सामने जवाहरलाल नेहरु पत्तन जवकजसत
दकया गया जो इस पुरे क्षेत्र को एक समूह पत्तन की सुजवधा भी प्रर्दान कर सके |
12.3- पत्तन र्देश के व्यापार में महत्वपूर्ि भूजमका जनभाते हैं | भारत का 95 प्रजतशत जवर्देशी व्यापार पत्तन
द्वारा संिाजलत होता है |
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13. मानजित्र कायि-
के वल र्दृजष्टबाजधत जवद्यार्िियों के जलए
13.1- (A) खेड़ा (गुजरात)
13.2- (i)तजमलनाडु
(ii)पजिम बंगाल
(iii)के रल