Class 10 Sample Paper 2022 Solution Hindi Term 2 – Text
Read the full text of this sample paper below — useful to quickly search, copy and reference the content online without downloading the PDF.
📄 View text version (3 pages)
Page 1
अ यास प्र नपत्र
सुझावा मक उ र संकेत
ि�तीय स� (2021-22)
2021-22 ( िवतीय सत्र) (सेट-1)
कक्षा - 10 िवषय- िहंदी ‘अ’ (कोड 002)
िनधार्िरत समय – 2 घंटे अिधकतम अंक – 40
सामा य िनदश:-
1. अंक योजना का उ दे य मू यांकन को अिधकािधक व तिु न ठ बनाना है I वणर्ना मक प्र न के अंक
योजना म िदए गए उ र-िबंद ु अंितम नहीं ह। ये सझ
ु ावा मक एवं सांकेितक हI
2. यिद परीक्षाथीर् इन सांकेितक िब दओ
ु ं से िभ न, िक तु उपयुक्त उ र दे तो उसे अंक िदए जाएँ।
3. सामान त्रिु टय के िलए थान- थान पर अंक न काटा जाए।
4. गुणव ापण
ू ,र् सटीक उ र पर शत प्रितशत अंक दे ने म िकसी प्रकार का संकोच न िकया जाए।
5. मू यांकन म 0 से 100 प्रितशत अंक का पैमाना वीकायर् है ।
6. मू यांकन कायर् िनजी याख्या के अनुसार नहीं, बि क अंक-योजना म िनिदर् ट िनदशानुसार ही िकया
जाए ।
प्र न संख्या खंड ‘क’ अंक
पा य-पु तक एवं परू क पु तक (20)
प्र न 1. सभी चार प्र न के उ र लगभग 25 -30 श द म अपेिक्षत – 2x4=8
(श द सीमा का यान रखते हुए उ र म िक हीं दो िब दओ
ु ं का उ लेख
अपेिक्षत)
(क) फ़ादर ‘पिरमल के सद य से अ यंत घिन ठ एवं पािरवािरक संबंध रखते थे। वे
उम्र म बड़े होने के कारण आशीवर्चन कहते, दख
ु ी मन को सां वना दे ते िजससे
मन को उसी तरह की शांित और सक
ु ू न िमलता जैसे थके हारे यात्री को दे वदार
की शीतल छाया म िमलता है । इसिलए उनकी उपि थित दे वदार की छाया-सी
लगती है ।
(ख) फ़ादर कािमल बु के की छिव संक प से सं यासी जैसे यिक्त की उभरती है ।
उनका लंबा शरीर ईसाइय के सफ़ेद च गे म ढँ का रहता था। उनका रं ग गोरा था
तथा चेहरे पर सफ़ेद भरू ी दाढ़ी थी। उनकी आँख नीली थीं। वे इतने िमलनसार थे
िक एक बार संबंध बन जाने पर साल -साल िनभाया करते थे। वे पािरवािरक
जलस म परु ोिहत या बड़े भाई की तरह उपि थत होकर आशीवार्द से भर दे ते थे,
िजससे मन को अ भत
ु शांित िमलती थी। उस समय उनकी छिव दे वदार के
िवशाल वक्ष
ृ जैसी होती थी।
Page 2
(ग) नवाब साहब के िचंतन म यवधान पड़ा, िजससे उनके चेहरे पर यवधान
के भाव उभर आए।
नवाब साहब की आँख म असंतोष का भाव उभर आया।
उ ह ने लेखक से बातचीत करने की पहल नहीं की।
लेखक की ओर दे खने के बजाए वे िखड़की से बाहर दे खते रहे ।
कुछ दे र बाद वे िड बे की ि थित को दे खने लगे।
इन हाव-भाव को दे खकर लेखक ने जान िलया िक नवाब साहब उनसे बातचीत
करने के इ छुक नहीं ह।
(घ) उिचत तकर् पर उपयुक्त अंक िदए जाएँ।
प्र न 2. िक हीं तीन प्र न के उ र लगभग 25 - 30 श द म अपेिक्षत - 2x3=6
(क) किव बादल के मा यम से क्रांित और बदलाव लाना चाहता है । वह बादल से
गरजने के िलए कहता है । क्य िक, एक ओर बादल के गजर्न म उ साह समाया
है तो दस
ू री ओर उसका उ दे य लोग म उ साह का संचार करके क्रांित के िलए
तैयार करना है ।
(ख) जब तक आसमान म बादल का आगमन नहीं हुआ था, गरमी अपने चरम सीमा
पर थी। इससे लोग बेचन
ै , परे शान और उदास थे। उ ह कहीं भी चैन नहीं था।
गरमी ने उनका जीना दभ
ू र कर िदया था। उनका मन कहीं भी नहीं लग रहा था।
(ग) फागुन का स दयर् अ य ऋतओ
ु ं और महीन से बढ़कर होता है । इस समय चार
ओर हिरयाली छा जाती है । खेत म कुछ फसल पकने को तैयार होती ह। सरस
के पीले फूल की चादर िबछ जाती है । लताएँ और डािलयाँ रं ग-िबरं गे फूल से
सज जाती ह। प्रािणय का मन उ लासमय हुआ जाता है । ऐसा लगता है िक इस
महीने म प्राकृितक स दयर् छलक उठा है ।
(घ) उिचत तकर् पर उपयुक्त अंक िदए जाएँ।
प्र न 3. िक हीं दो प्र न के उ र लगभग 50 - 60 श द म अपेिक्षत - 3x2=6
(क) िशशु अपनी वाभािवक आदत के अनस
ु ार अपनी उम्र के ब च के साथ खेलने म
िच लेता है । उनके साथ खेलना अ छा लगता है । अपनी उम्र के साथ िजस िच
से खेलता है वह िच बड़ के साथ नहीं होती है । दस
ू रा कारण मनोवैज्ञािनक
कारण भी है िक ब चे को अपने सािथय के बीच िससकने या रोने म हीनता का
अनुभव होता है । यही कारण है िक भोलानाथ अपने सािथय को दे खकर िससकना
भल
ू जाता है ।
(ख) सरकारी तंत्र म जॉजर् पंचम की नाक लगाने को लेकर जो िचंता और बदहवासी
िदखाई दे ती है , उससे उनकी गुलाम मानिसकता का बोध होता है । इससे पता
चलता है िक वे आज़ाद होकर भी अंग्रेज के गुलाम ह। उ ह अपने उस अितिथ
की नाक बहुत मू यवान प्रतीत होती है िजसने भारत को गुलाम बनाया और
अपमािनत िकया। वे नहीं चाहते िक वे जॉजर् पंचम जैसे लोग के कारनाम को
उजागर करके अपनी नाराजगी प्रकट कर। वे उ ह अब भी स मान दे कर अपनी
Page 3
गुलामी पर मोहर लगाए रखना चाहते ह।
इस पाठ म ‘अितिथ दे वो भव’ की परं परा पर भी प्र निच न लगाया गया है ।
लेखक कहना चाहता है िक अितिथ का स मान करना ठीक है , िकंतु वह अपने
स मान की कीमत पर नहीं होना चािहए।
(ग) लेिखका ने महसस
ू िकया िक गंतोक शहर के लोग बहुत ही मेहनती हI चाहे पु ष
हो या त्री, वे खूब मेहनत करते हI दग
ु म
र् पहािड़य के बीच उ ह ने सद
ुं र शहर
बनाया है , बसाया है , िजसका प्रमाण है गंतोक शहर की भ यताI लेिखका उनके
म-शिक्त को दे खकर मग्ु ध थीI
खंड – ख अंक
(रचना मक लेखन) (20)
प्र न 4. (1x5) =5
अनु छे द लेखन
भिू मका- 1 अंक
िवषय व त-ु 3 अंक
भाषा – 1 अंक
प्र न 5. पत्र लेखन (1x5)=5
आर भ और अंत की औपचािरकताएँ – 1 अंक
िवषय व त-ु 3 अंक
भाषा – 1 अंक
प्र न 6. िवज्ञापन लेखन 2.5x2=5
िवषय व त-ु 1 अंक
प्र तिु त- 1 अंक
भाषा- 1/2 अंक
प्र न 7. संदेश लेखन 2.5x2=5
रचना मक प्र तिु त- 1 अंक
िवषय व त-ु 1 अंक
भाषा- 1/2 अंक