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अितयंत गोपनीय -केवल आं त रक एवं सीिमत योग हे तू
मा िमक िवधालय परी ा, माच-2020
अक-योजना : सामामिक मिज्ञान
SUBJECT कोड सं ा : 087 PAPER कोड : 32/3/3
सामा िनदश :-
1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।
2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू यांकन करते समय नवीनतम सूचना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए पूरे अंक दए जाएँ। क ा दसव के प म दए गए द ता
आधा रत(competency based) दो का मू यांकन करने म कृ पया िव ा थय ारा दए गए उ र को
समझने का यास कर; उनके उ र चाहे अंक-योजना म दए गए उ र से मेल न खाते ह तब भी सही द ता क
प रगणना क गई हो तो अंक दए जाने चािहए।
3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।
4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती है।
5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।
6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।
7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।
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8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदेखा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।
9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।
10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)
11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –
उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
कु ल अंक के योग म अशुि
उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।
12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।
13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता है।
14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।
15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।
16. क ीय मा यिमक िश ा बोड प रषद पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत
शु क भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित देती है।
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माध्यममक मिद्यालय परीक्षा (मार्च- 2020)
सामामिक मिज्ञान (087)
अंकन योिना 32/3/3
MM-80
QNO. अपेमक्षत उत्तर / मूल्य अंक PAGE MARKS
अनुभाग - क NO.
1. संघ का अधिधियम (The Act of Union) PG-22 1
H
2. b) भारतीय ररििच बैंक। PG-40 1
E
3. PG-64 1
सरकार द्वारा बािाओं या प्रधिबंि ं क हटािा उदारीकरण के रूप में जािा E
जािा है।
अथवा
धवश्व व्यापार संगठि (WTO) एक ऐसा संगठि है धजसका उद्दे श्य अंिराा ष्ट्रीय
PG-65 1
व्यापार क उदार बिािा है। E
4. प्रमत व्यक्ति आय- PG-8 1
दे श की कुल आय इसकी कुल जिसंख्या से धवभाधजि है।
अथिा
PG-10 1
साक्षरता दर-
7 और उससे अधिक आयु वगा में साक्षर जिसंख्या के अिुपाि क मापिा है ।
5. PG-92 1
DP
a)/ द ि ं (A) और (R) सत्य हैं और (R) A सही स्पष्ट्ीकरण है I
6. PG-20 1
E
ग) बढ़ई (3) प्राथधमक क्षेत्र।
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7. रािनीमतक दलों को लोगों की िरूरतों और मांगों के प्रमत अमिक PG-74 1
संिेदनशील बनाने का तरीका- DP
केवल उि राजिीधिक दल ं का चुिाव करके ज ल ग ं के कल्याण के
i.
धलए काम करिे हैं।
ii. मिभेद ं क सुलझािे के धलए िंत्र धवकधसि करिा।
iii. क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु।
धकसी एक का उल्लेख
अथिा
रािनीमतक दलों में िन भागीदारी को बढािा दे ने का तरीका-
राजिीधिक दल ं क धवधभन्न समूह ं क समाय धजि करिे के धलए
i. PG86 1
प्रधिधिधित्व दे िा चाधहए। DP
ii. ल ग ं के कल्याण के धलए कािूि ं और िीधिय ं की रूपरे खा िैयार
करिा।
iii. क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु।
धकसी एक का उल्लेख
8. PG-20 1
d) /1,2, और 3 DP
9. . PG-76 1
सूचिा प्रौद्य धगकी के धियााि क बढ़ािे का िरीका- G
i. सॉफ्टवेयर एप बिाएं ।
ii. क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु।
10. A- पाइपलाइि। PG-81 1
B- - समुद्री पररवहि G
11. शुष्क मृदा PG-10 1
G
12. b) / बंधकम चंद्र चट्ट पाध्याय। PG-71 1
H
13. d) पारं पररक अधभजाि वगों िे इसका समथाि धकया। PG-164 1
H
14. मितीय मिश्व युद्ध के दो खेमे - िुरी शक्तियां और धमत्र राष्ट्र । PG-98 1
अथिा
बॉम्बे के उद्योगपमत धजन् ि
ं े 19 वीं शिाब्दी में धवशाल औद्य धगक साम्राज्य
PG-118 1
बिाए थे- धदिशॉ मािेक जी पेधटट और जमशेदजी िुसरवािजी टाटा।
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15. c) व्यक्ति के धलए अज़्ज़ादी और कािूि के समक्ष सबकी बराबरी PG-9 1
H
16. b) मैटरधिख PG-13 1
H
17. d)/ 4-3-1-2 PG-56 1
H
18. आईटी उद्य ग PG-75 1
G
अथवा
PG-76 1
सीमेंट उद्य ग
G
19. PG-48-49 1
िमाधिरपेक्षिा DP
20. मक्का की फसल के धलए िापमाि की आवश्यकिा- 21º से 23 PG-38 1
अथवा G
गेहं के धलए वाधषाक वषाा की आवश्यकिा- 50 से 75 से.मी.
PG-38 1
G
21. अनुभाग-ख
अंग्रेिों के मलए फायदे मंद भारतीय व्यापार:
PG-91
H 3
i. व्यापार अधिशेष - धिटे ि में भारिीय के साथ एक व्यापार अधिशेष
धकया था। धिटे ि िे अन्य दे श ं के साथ अपिे व्यापार घाटे क संिुधलि
करिे के धलए इस अधिशेष का उपय ग धकया।
ii. ह म चाजा - भारि में धिटे ि के व्यापार अधिशेष िे िथाकधथि घरे लू
शुल्क का भुगिाि करिे में भी मदद की, धजसमें धिधटश अधिकाररय ं
और व्यापाररय ं द्वारा धिजी प्रेषण घर, भारि के बाहरी ऋण पर ब्याज
भुगिाि और भारि में धिधटश अधिकाररय ं के पेंशि शाधमल थे।
iii. कपास का प्रमुख आपूधिाकिाा - भारि धिधटश ं क कच्चे कपास का
एक प्रमुख आपूधिाकिाा बिा रहा, धजसे धिटे ि के सूिी वस्त्र उद्य ग क
क्तखलािा आवश्यक था।
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iv. इं डेंट्य र श्रधमक ं के आपूधिाकिाा - धबहार, यूपी, मध्य भारि के कई
इं डेंट्य र श्रधमक खाि ं और बागाि ं में काम करिे के धलए दू सरे दे श ं
में चले गए।
v. क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु
धकन्ी िीि धबंदुओं की व्याख्या
#(नोट-कृपया शताब्दी पर ध्यान न दे ते हुए उत्तर को िांर् कीमिये)
अथिा
उन्नीसिी ं सदी के मध्य में कुलीन िगच के पसंदीदा हाथ से बने सामान:
i. बहुि सारे उत्पाद केवल हाथ से ही िैयार धकये जा सकिे थे I
ii. मशीि ं से ि एक जैसे धकस्म के उत्पाद ही बड़ी संख्या में बिाये जा PG-109- 3
सकिे थे I 110
iii. बाजार की मांग अक्सर बारीक धडजाइि और ख़ास आकार ं वाले H
सामाि ं के धलए थी ज केवल हाथ श्रम का उत्पादि कर सकिे थे।
iv. धवक्ट ररयि धिटे ि में, उच्च वगों िे हाथ से उत्पाधदि चीज ं क
प्राथधमकिा दी। वे
v. हाथ ं से बिी चीज़ क पररष्कार और सुरुधच का प्रिीकमािा जIिा था
vi. उिकी धफधिश और धडज़ाइि अच्छे ह िे थी । वे बेहिर रूप से िैयार
थे, व्यक्तिगि रूप से धिधमाि और साविािीपूवाक धडजाइि धकए गए।
vii. मशीि-धिधमाि सामाि कॉल धिय ं क धियााि के धलए थे।
viii. बहुि सारे उत्पाद केवल हाथे से ही िैयार धकये जा सकिे थे
धकन्ी िीि धबंदुओं की व्याख्या
22. तृतीयक क्षेत्र का महत्व: PG-24 3
E
i. धकसी भी दे श में कई सेवाओं जैसे धक अस्पिाल ,ं शैक्षधणक
संस्थाि ,ं प स्ट और टे लीग्राफ सेवाओं, पुधलस स्टे शि ,ं अदालि ,ं
आधद की आवश्यकिा ह िी है। इन्ें मूलभूि सेवाओं के रूप में
मािा जा सकिा है।
ii. कृधष और उद्य ग के धवकास से पररवहि, व्यापार, भंडारण जैसी
सेवाओं का धवकास ह िा है।
iii. जैसे-जैसे आय का स्तर बढ़िा है , कुछ धिधिि ल ग कई और
सेवाओं की मांग करिे लगिे हैं जैसे बाहर खािा, पयाटि, खरीदारी,
धिजी अस्पिाल, धिजी स्कूल, व्यावसाधयक क्षेत्र आधद।
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समग्र रूप में मूल्यांकि
अथिा
एक अथचव्यिस्था का संगमित क्षेत्र:
PG-31 3
संगधठि क्षेत्र उि उद्यम ं या काम के स्थाि ं क शाधमल करिा है जहां E
र जगार की शिें धियधमि हैं और इसधलए, काम का आश्वासि धदया है।
i. उन्ें सरकार द्वारा पंजीकृि धकया जािा है और इसके धियम ं और
धवधियम ं का पालि करिा ह िा है जैसे धक फैक्टर ीज एक्ट, न्यूििम
मजदू री अधिधियम, ग्रेच्युटी अधिधियम का भुगिाि, दु कािें और
प्रधिष्ठाि अधिधियम आधद।
ii. इस क संगधठि कहा जािा है क् धं क इसमें कुछ औपचाररक
प्रधियाएँ और प्रधियाएँ हैं।
iii. इिमें से कुछ ल ग ं क धकसी के द्वारा धिय धजि िहीं धकया जा
सकिा है, लेधकि वे स्वयं काम कर सकिे हैं , लेधकि उन्ें भी
सरकार के साथ खुद क पंजीकृि करिा ह गा और धियम ं और
धवधियम ं का पालि धकया जािा है I
iv. संगधठि क्षेत्र के श्रधमक ं क र जगार की सुरक्षा प्राप्त है ।
v. उिसे केवल कुछ घंट ं के धलए काम करिे की उम्मीद की जािी
है। यधद वे अधिक काम करिे हैं , ि उन्ें धिय िा द्वारा
ओवरटाइम का भुगिाि करिा ह गा।
vi. उन्ें अवकाश, भधवष्य धिधि, ग्रेच्युटी आधद के दौराि भुगिाि
धकया जािा है।
vii. उन्ें धचधकत्सा लाभ धमलिा चाधहए और कािूि ं के िहि, कारखािे
के प्रबंिक क पीिे के पािी और सुरधक्षि कामकाजी वािावरण
जैसी सुधविाओं क सुधिधिि करिा है।
viii. क ई अन्य प्रसांधगक धबंदु
धकन्ी िीि धबंदुओं की व्याख्या
23. पेटरोल के उपयोग को कम करने के तरीके- PG- 63 3
G.
i. सीधमि ऊजाा संसािि ं का धववेकपूणा और धिय धजि उपय ग।
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ii. सीएिजी का उपय ग या ऊजाा के वैकक्तिक गैर-पारं पररक
संसािि
iii. सावाजधिक पररवहि प्रणाली
iv. धबजली बचि उपकरण ं का उपय ग
v. उपय ग में ि ह िे पर धबजली बंद करिा।
vi. क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु।
धकन्ी िीि धबंदुओं की व्याख्या
24.
भारत की आमथचक और रािनीमतक क्तस्थमत पर प्रथम मिश्व युद्ध के PG-54 3
मनमहताथच: H
i. इसके कारण रक्षा व्यय में भारी वृक्ति की गयी धजसके कारण युि
ऋण और बढ़िे हुए कर ं का धवत्तप षण धकया गया।
ii. सीमा शुल्क क उठाया गया और आयकर पेश धकया गया।
iii. मूल्य में वृक्ति हुई और आम ल ग ं के धलए अत्यधिक कधठिाई हुई।
iv. ग्रामीण क्षेत्र ं में जबरि भिी से व्यापक स्तर पर र ष फैल गया।
v. भारि के कई धहस् ं में फसलें खराब ह गईं, धजससे भ जि की भारी
कमी ह गई।
vi. यह एक फ्लू की महामारी फ़ैल गयी
vii. अकाल और महामारी के कारण लाख ं ल ग मारे गए।
धकन्ी िीि धबंदुओं की व्याख्या
अथिा
समिनय अिज्ञा आं दोलन ’में गरीब मकसानों की भूममका
i. गरीब धकसाि केवल लगाि में कमी िहीं चाहिे थे उिमे से बहुि सरे
धकसाि ज़मींदार से पत्ते पर ज़मीं ले कर खेिी कर रहे थे PG-65. 3
ii. वे ज़मींदार वाला भाड़ा माफ़ करवािा चाहिे थे I
iii. वे कई िरह के कट्टरपंथी आं द लि ं में शाधमल हुए, धजिका िेिृत्व
अक्सर समाजवादी और कम्युधिस्ट करिे थे।
iv. कांग्रेस ज्यादािर जगह ं पर 'भाड़ा धवर िी ' अधभयाि ं का समथाि करिे
के धलए िैयार िहीं थी।
v. क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु।
धकन्ी िीि धबंदुओं की व्याख्या
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25. भारत में संघिाद की मिशेषताएं - PG-16-17 3
DP
i. एक धत्रस्तरीय सरकार, राज्य, और स्थािीय स्थाधपि धकया
गया है।
ii. भारि एक ह क्तडंग फेडरे शि है।
iii. केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच धविायी शक्तिय ं का
िीि गुिा धविरण है
(a) संघ सूची-संघ सरकार अकेले इस पर कािूि बिा सकिी है। पूवा -
धवदे शी मामले,
बैंधकंग, मुद्रा आधद।
(b) राज्य सूची - राज्य सरकार अकेले इस पर कािूि बिा सकिी है।
पूवा पुधलस, व्यापार, वाधणज्य,
धसंचाई आधद।
(c) समविी सूची - केंद्र और राज्य सरकारें द ि ं इस पर कािूि बिा
सकिी हैं। Ex.- धशक्षा, वि, धववाह आधद।
iv। भारिीय संधविाि की मूल संरचिा क केवल संसद द्वारा एकिरफा
िहीं बदला जा सकिा है।
v। संघ सरकार के पास अवधशष्ट् धवषय पर कािूि बिािे की शक्ति है।
vi। संघषा से बचिे के धलए सरकार के धवधभन्न स्तर ं की आय के स्र ि ं
क स्पष्ट् रूप से संधविाि में पररभाधषि धकया गया है।
vii। केंद्र सरकार केंद्र शाधसि प्रदे श ं का प्रशासि करिी है।
viii। भारि में न्यायपाधलका संघ और राज्य और भारि के धवधभन्न
राज्य ं के बीच धववाद ं क धिपटािे के धलए धजम्मेदार है ।
IX. क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु।
धकन्ी िीि धबंदुओं की व्याख्या
26. आिुमनक समय में संर्ार क्षेत्र में बदलाि की गमत तेि है।" PG-90. 3
G
i. संचारक या ररसीवर के भौधिक आं द लि लंबी दू री की संचार बहुि
आसाि है।
ii. दे श में संचार, रे धडय , प्रेस, धफल् ं आधद सधहि व्यक्तिगि संचार
और जि संचार प्रमुख संचार माध्यम हैं।
iii. भारिीय डाक िेटवका दु धिया में सबसे बड़ा है। यह पासाल के
साथ-साथ व्यक्तिगि धलक्तखि संचार भी संभालिा है।
iv. काडा और धलफाफे क प्रथम श्रेणी का मेल मािा जािा है और
जमीि और हवा द ि ं क कवर करिे वाले स्टे शि ं के बीच
एयरधलफ्ट धकया जािा है । धद्विीय श्रेणी के मेल में बुक पैकेट
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शाधमल हैं, सिह मेल द्वारा धकए जािे हैं , भूधम और जल पररवहि
क कवर करिे हैं।
v. बड़े कस् ं और शहर ं में मेल की त्वररि धडलीवरी की सुधविा के
धलए, छह मेल चैिल शुरू धकए गए हैं। उन्ें राजिािी चैिल, मेटर
चैिल, ग्रीि चैिल, धबजिेस चैिल, बल्क मेल चैिल और आवधिक
चैिल कहा जािा है।
vi. भारि में एधशया का सबसे बड़ा दू रसंचार िेटवका है।
vi। भारि में गांव ं क पहले से ही सब्सिाइबर टर ं क डायधलंग (एसटीडी)
टे लीफ ि सुधविा के साथ कवर धकया गया है।
vii। क ई अन्य प्रसांधगक धबंदु
धकन्ी िीि धबंदुओं की व्याख्या
अथिा
"रे ल पररिहन की अपेक्षा सड़क पररिहन की महत्ता अमिक है " PG-82 3
G
i. सड़क ं की धिमााण लागि रे लवे लाइि ं की िुलिा में बहुि कम है।
ii. सड़कें िुलिात्मक रूप से अधिक धवच्छे धदि भूभाग ं पर बिाई जा
सकिी हैं
iii. अधिक ढाल प्रवणिा िथा पहाड़ी क्षेत्र में भी सड़के धिधमाि की
जा सकिी है और इस िरह से धहमालय जैसे पहाड़ ं क पार कर
सकिी हैं।
iv. अपेक्षा कृि काम व्यक्तिय ं , कम दु री व् कम वस्तुओं के पररवहि
में सड़के धमिव्ययी है
v. यह घर घर सेवा भी प्रदाि करिी है ; इस प्रकार, चढ़ािे और
उिरिे की लागि बहुि कम है।
vi. सड़क पररवहि क पररवहि के अन्य सािि ं के धलए कड़ी के
रूप में भी उपय ग धकया जािा है जैसे धक वे रे लवे स्टे शि, हवाई
और समुद्री बंदरगाह ं के बीच एक धलंक प्रदाि करिे हैं ।
vii. क ई अन्य प्रसांधगक धबंदु
धकन्ी िीि धबंदुओं की व्याख्या
27. स्रोत:
Page 11
26.1. मिमभन्न दे शों के बीर् लोकतंत्र के मलए आकषचण को पहर्ानें। 1
ल किंत्र ल ग ं की आवश्यकिा के धलए पारदशी, जवाबदे ह और
उत्तरदायी है / ल किंत्र सभी सामाधजक-आधथाक और राजिीधिक
समस्याओं का समािाि कर सकिा है।/ क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु
PG-90 1+2=3
DP
26.2. अपेमक्षत और िास्तमिक पररणामों के आिार पर लोकतंत्र । 2
अपेधक्षि सरकार की गुणवत्ता है ,--आधथाक भलाई, असमाििा क कम
करिा, सामाधजक मिभेद ं क दू र करिा और व्यक्ति की गररमा।
ल किंत्र धसफा सरकार का एक रूप है। यह केवल उपयुाि पररणाम ं
क प्राप्त करिे के धलए क्तस्थधियां बिा सकिा है।/क ई अन्य प्रासंधगक
धबंदु/
धकन्ी द धबंदुओं का उल्लेख
28. . आमथचक मिकास के मलए ऋण की भूममका- PG-43. 3
i. अथाव्यवस्था के िीि ं क्षेत्र ं में ऋण की आवश्यकिा E
ह िी है।
ii. ऋण उत्पादि की कायाशील पूंजी की जरूरि क
पूरा करिे में मदद करिा है ।
iii. यह उत्पादि के चल रहे खचों क पूरा करिे में मदद
करिा है।
iv. यह कमाई बढ़ािे में मदद करिा है।
v. क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु
धकन्ी िीि मबंदुओ ं की व्याख्या
29. अनुभाग- ग
लोकतांमत्रक दे शों में रािनीमतक दलों की आिश्यकता: PG-75 5
DP
i. धिवााधचि प्रधिधिधि अपिे धिवााचि क्षेत्र के धलए जवाबदे ह ह गा धक
वे स्थािीय स्तर पर क्ा करिे हैं।
ii. राजिीधिक दल ं का उदय प्रत्यक्ष रूप से प्रधिधिधि ल किंत्र ं के
उद्भव से जुड़ा हुआ है।
iii. बड़े पैमािे पर समाज ं क प्रधिधिधि ल किंत्र की आवश्यकिा है।
Page 12
iv. जैसे-जैसे समाज बड़े और जधटल ह िे गए, उन्ें धवधभन्न मुद्द ं पर
धवधभन्न धवचार ं क एकत्र करिे और सरकार के समक्ष प्रस्तुि करिे
के धलए कुछ एजेंसी की भी आवश्यकिा ह िी है।
v. उन्ें धवधभन्न प्रधिधिधिय ं क एक साथ लािे के धलएक धशश करिे
है िाधक एक धजम्मेदार सरकार बिाई जा सके।
vi. राजिीधिक दल इि जरूरि ं क पूरा करिे हैं ज प्रत्येक प्रधिधिधि
सरकार के पास है।
vii। क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु
धकन्ी पांच धबंदुओं की व्याख्या ।
अथिा
भारत में रािनीमतक दलों और उसके नेताओं में सुिार के मलए हाल
के प्रयास:
PG-83 5
i. धिवााधचि धविायक ं और सांसद ं क दल बदलिे से र किे के धलए DP
संधविाि में संश िि धकया गया।
ii. सांसद ं और धविायक ं क पाटी के िेिाओं क ज भी िय करिा
है उसे स्वीकार करिा ह गा।
iii. यह हर उस उम्मीदवार के धलए अधिवाया है ज अपिी संपधत्त और
उसके क्तखलाफ लंधबि आपराधिक मामल ं का धववरण दे िे हुए
AFFIDAVIT दाक्तखल करिे के धलए चुिाव लड़िा है।
iv. िई प्रणाली िे बहुि सी जािकारी जििा के धलए उपलब्ध कराई
है।
v. इसके कारण अमीर ं और अपराधिय ं के प्रभाव में कमी आई है।
vi. चुिाव आय ग िे एक आदे श पाररि कर राजिीधिक दल ं के धलए
यह आवश्यक कर धदया धक वे अपिे संगठिात्मक चुिाव
आय धजि करें और अपिे आयकर ररटिा दाक्तखल करें ।
vii. राजिीधिक दल ं के आं िररक मामल ं क धवधियधमि करिे के
धलए एक कािूि बिाया जािा चाधहए। राजिीधिक दल ं क अपिे
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सदस्य ं के एक रधजस्टर क बिाए रखिे, अपिे स्वयं के संधविाि
का पालि करिे, एक स्विंत्र अधिकार रखिे, पाटी धववाद ं के
मामले में न्यायािीश के रूप में काया करिे, सवोच्च पद ं पर खुले
चुिाव करािे के धलए अधिवाया धकया जािा चाधहए।
viii. राजिीधिक दल ं क मधहला उम्मीदवार ं क न्यूििम संख्या में
एक धिहाई धटकट दे िा अधिवाया धकया जािा चाधहए।
ix. ।चुिाव ं का राज्य धवत्त प षण ह िा चाधहए।
x. क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु
धकन्ी पांच धबंदुओं की व्याख्या ।
30.
िीचे धदए गए स्र ि ं क पढ़ें और धिम्न प्रश् ं के उत्तर दें :
PG-169- 1+2+2=5
स्त्रोत 1- िाममचक सुिार और सािचिमनक बहस।
172.
29.1। इस बाि का मूल्यांकि करें धक भारि में उन्नीसवीं शिाब्दी की शुरुआि
H
में धप्रंट िे बहस की प्रकृधि कैसे बिाई। (1)
सामाधजक और िाधमाक सुिारक ं और धविवाओं के अलगाव, एकेश्वरवाद,
िाह्मणवादी पुर धहिवाद और मूधिापूजा जैसे मामल ं पर धहंदू और कट्टरपंधथय ं
के बीच गहि धववाद। बंगाल में, जैसा धक बहस धवकधसि हुई, टर ै क्स और
अखबार ं िे कई िरह के िका प्रसाररि धकए।
स्त्रोत 2- प्रकाशन के नए रूप।
29.2। आप धकस हद िक सहमि हैं धक धप्रंट िे अिुभव की िई दु धिया क
ख ला, और मािव जीवि की धवधवििा का एक ज्वलंि अथा धदया? (2)
अन्य िए साधहक्तत्यक रूप ं िे भी पढ़िे-पढ़िे की दु धिया में प्रवेश धकया, लघु
कथाएँ , सामाधजक और राजिीधिक मामल ं के बारे में धिबंि। अलग-अलग
िरीक ं से, उन् ि
ं े मािव जीवि और अंिरं ग भाविाओं पर िए ज र क मजबूि
धकया, राजिीधिक और सामाधजक धियम ं के बारे में धजन् ि
ं े इस िरह की
चीज ं क आकार धदया।
स्त्रोत 3- ममहलाएं और मुद्रण
29.3। धप्रंट संस्कृधि िे मधहलाओं के जीवि और भाविाओं में धकस हद िक
रुधच धदखाई? (2)
i. मधहलाओं के जीवि और भाविाओं में बहुि रुधच पैदा की,
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ii. मध्यम वगा के घर ं में मधहलाओं की रीधडं ग बहुि बढ़ गई।
iii. मधहला धशक्षा में वृक्ति,
धकसी भी द का आकलि धकया जािा है
31. भारत में ममहलाएं आि भी पुरुषों के मुकाबले मपछड़ी हुई हैं क् धं क उिके PG-42-44 5
ऊपर अत्याचार ह िे हैं - DP
i. कम धलंगािुपाि।
ii. िौकररय ं में मधहलाओं की संख्या कम है।
iii. मधहलाओं क कम मजदू री (असमाि मजदू री) समाि मजदू री
अधिधियम के धलए प्रेररि करिी है।
iv. मधहलाओं क घरे लू धहंसा का सामिा करिा पड़िा है।
v. मधहलाओं का दमि और श षण।
vi. पुरुष बच्चे के धलए वरीयिा।
vii. उच्च वेिि और मूल्यवाि िौकररय ं में कम मधहलाए
VII.मधहलाओं में साक्षरिा दर पुरुष ं की िुलिा में कम है।
क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु।
धकन्ी पाँच धबंदुओं की व्याख्या
32. िैश्वीकरण का प्रभाि एक समान नही ं र ”: PG-66 – 5
69
G
i. उत्पादक ं और श्रधमक ं के बीच, वैश्वीकरण का प्रभाव एक समाि िहीं
रहा है। बहुराष्ट्रीय कंपधिय ं क सेल फ ि, ऑट म बाइल,
इलेक्टरॉधिक्स, सॉफ्ट धडर ं क, फास्ट फूड या शहरी क्षेत्र ं में बैंधकंग जैसी
सेवाओं में धदलचस्पी रही है। इि उत्पाद ं में बड़ी संख्या में अच्छी िरह
से खरीदार हैं।
ii. इि उद्य ग ं और सेवाओं में, िई िौकररयां पैदा हुई हैं।
iii. इि उद्य ग ं क कच्चे माल आधद की आपूधिा करिे वाली स्थािीय
कंपधियां समृि हुई हैं।
iv. शीषा भारिीय कंपधिय ं में से कई बढ़ी हुई प्रधिस्पिाा से लाभ उठािे में
सक्षम हैं।
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v. वैश्वीकरण िे कुछ बड़ी भारिीय कंपधिय ं क स्वयं बहुराष्ट्रीय कंपधिय ं
के रूप में उभरिे में सक्षम बिाया है -टाटा म टसा (ऑट म बाइल),
इं फ धसस (आईटी)।
vi. वैश्वीकरण िे सेवा प्रदाि करिे वाली कंपधिय ं के धलए भी िए अवसर
पैदा धकए हैं , धवशेष रूप से आईटी से जुड़े ल ग ं के धलए
नकारात्मक प्रभाि -
vii. छ टे धिमाािाओं क प्रधिस्पिाा के कारण कड़ी टक्कर धमली है।
viii. कई इकाइय ं िे कई श्रधमक ं क र जगार दे िे के धलए बंद कर धदया है।
ix. प्रधिस्पिाा और अधिधिि र जगार वैश्वीकरण और प्रधिस्पिाा के दबाव िे
श्रधमक ं के जीवि क काफी हद िक बदल धदया है।
पूरे के रूप में मूल्यांकि धकया जािा है।
33. उद्योगों को प्रभामित करने िाले भौमतक करक PG- 66 5
G
i. कच्चे माल की उपलब्धिा
ii. धबजली संसािि ं की उपलब्धिा
iii. पािी की उपलब्धिा
iv. अिुकूल जलवायु
मानिीय कारक:
v. कुशल और अकुशल श्रम की श्रम-उपलब्धिा अधिक उद्य ग ं
क प्रेररि करिी है
vi। बाजार - बाजार में धिकटिा आवश्यक है क् धं क पररवहि में ि
केवल व्यय शाधमल है , बक्तल्क धवलंब भी शाधमल है
vii। सरकारी िीधि --इि सभी भौधिक और मािवीय कारक ं से ऊपर,
सबसे महत्वपूणा कारक सरकारी िीधि है।
viii। पररवहि सुधविा - एक कुशल पररवहि िेटवका कारखाि ं िक
पहुंचिे के धलए कच्चे माल और बाजार ं िक पहुंचिे के धलए िैयार माल
की मदद करिा है।
झ। पूंजी - प्रत्येक उद्य ग क िय मशीि ,ं धबजली और कच्चे माल के
धलए पूंजी की आवश्यकिा ह िी है , और मजदू री का भुगिाि करिे
और पररवहि लागि ं क पूरा करिे के धलए भी।
vi। क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु।
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धकन्ी पाँच धबंदुओं की व्याख्या
अथिा
औद्योमगक प्रदू षण:
i. पुि: उपय ग करके प्
ii. पािी का उपय ग कम से कम करके और इसे द या अधिक PG-78 5
िधमक चरण ं में पुिचािण करके। G
iii. पािी की आवश्यकिाओं क पूरा करिे के धलए वषाा जल का
संचयि।
iv. िधदय ं और िालाब ं में छ ड़िे से पहले गमा पािी और
अपधशष्ट् ं का उपचार करिा।
v. औद्य धगक अपधशष्ट् ं का उपचार िीि चरण ं में धकया जा
सकिा है।
(ए) यांधत्रक िरीक ,ं स्क्रीधिंग, पीस, flocculation और
अवसादि द्वारा प्राथधमक उपचार।
(b) जैधवक प्रधिया द्वारा धद्विीयक उपचार
c) जैधवक, रासायधिक और भौधिक प्रधियाओं द्वारा िृिीयक
उपचार, अपधशष्ट् जल का पुिचािण।
vi. भूजल की अधिकिा क कािूिी रूप से धवधियधमि करिे की
आवश्यकिा है।
vii. क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु।
धकन्ी पाँच धबंदुओं की व्याख्या
34. मानि मिकास- PG-13-14 5
i. धवकास के प्रधि मािव-केंधद्रि दृधष्ट्क ण का संदभा दे िा है।
ii. यह ल ग ं और मािव जीवि में गुणात्मक सुिार पर केंधद्रि है।
संकेिक
iii. धशक्षा का महत्व
iv. दीघाायु या स्वास्थ्य सुधविाएं ।
v. प्रधि व्यक्ति आय
vi. जीवि स्तर।
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क ई अन्य प्रासंधगक धबंदु
धकन्ी पाँच धबंदुओं की व्याख्या
35. OnMap: 35A & 35 B- संलग्न मानमर्त्र दे खे 2+4=6
नोट: मनम्नमलक्तखत प्रश्न (केिल प्रश्न संख्या 35 ) दृमिबामित
परीक्षामथचयों के मलए हैं ,।
1X6=6
35.1 धबहार
35.2 कलकत्ता (क लकािा)
35.3 अमृिसर
35.4 केरला
35.5 महाराष्ट्र
35.6 गाँिी िगर
35.7 ग वा
35.8 िधमल िाडु