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अितयंत गोपनीय -केवल आं त रक एवं सीिमत योग हे तू
मा िमक िवधालय परी ा, माच-2020
अक-योजना : सामामिक मिज्ञान
SUBJECT कोड सं ा : 087 PAPER कोड : 32/3/1
सामा िनदश :-
1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।
2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू यांकन करते समय नवीनतम सूचना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए पूरे अंक दए जाएँ। क ा दसव के प म दए गए द ता
आधा रत(competency based) दो का मू यांकन करने म कृ पया िव ा थय ारा दए गए उ र को
समझने का यास कर; उनके उ र चाहे अंक-योजना म दए गए उ र से मेल न खाते ह तब भी सही द ता क
प रगणना क गई हो तो अंक दए जाने चािहए।
3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।
4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती है।
5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।
6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।
7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।
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8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदेखा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।
9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।
10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)
11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –
उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
कु ल अंक के योग म अशुि
उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।
12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।
13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता है।
14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।
15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।
16. क ीय मा यिमक िश ा बोड प रषद पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत
शु क भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित देती है।
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माध्यममक मिद्यालय परीक्षा (मार्च- 2020)
सामामिक मिज्ञान (087)
अंकन योिना 32/3/1
MM-80
QNO. अपेमक्षत उत्तर / मूल्य अंक PAGE MARKS
अनुभाग - क NO.
1. नेपोलियन कोड PG-6 1
H
2. b) बंलकम चंद्र चट्टोपाध्याय। PG-71 1
H
3. d) पारं पररक अलिजात वर्गों ने इसका समर्थन लकया। PG-164 1
H
4. मितीय मिश्व युद्ध के दो खेमे - धुरी शक्तियां और लमत्र राष्ट्र । PG-98 1
H
अथिा
1
बॉम्बे के उद्योगपमत लजन्ोंने 19 वीं शताब्दी में लवशाि औद्योलर्गक साम्राज्य
PG-118
बनाए र्े- लिनशॉ मानेक जी पेलिि और जमशेिजी नुसरवानजी िािा। H
5. c) /व्यक्ति के लिए अज़्ज़ािी और कानून के समक्ष सबकी बराबरी PG-9 1
H
6. b)/ मैिरलनख PG-13 1
H
7. d) /4-3-1-2 PG-56 1
H
8. A- पाइपिाइन PG-81 ½+1/2=
B- - समुद्री पररवहन G =1
9. सूर्ना प्रौद्योमगकी के मनयाचत को बढाने का तरीका- PG-76 1
i. सॉफ्टवेयर एप बनाएं । G
ii. कोई अन्य प्रासंलर्गक लबंिु।
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10. आईिी उद्योर्ग PG-75 1
अथिा G
सीमेंि उद्योर्ग
PG-76G 1
11. िेिराइि मृिा PG-10 1
G
12. मक्का की फसि के लिए तापमान की आवश्यकता- 21º से 23 PG-38 1
अथिा G
र्गेहं के लिए वालषथक वषाथ की आवश्यकता- 50 से 75 से.मी.
PG-38 1
G
13. धमथलनरपेक्षता PG-48-49 1
DP
14. PG-20 1
d) /1,2, और 3 DP
15. a)/ िोनों (A) और (R) सत्य हैं और (R),A का सही स्पष्ट्ीकरण है PG-92 1
DP
16.
रािनीमतक दलों को लोगों की िरूरतों और मांगों के प्रमत अमिक PG-74 1
DP
संिेदनशील बनाने का तरीका-
i. केवि उन राजनीलतक ििों का चुनाव करके जो िोर्गों के कल्याण के
लिए काम करते हैं।
ii. मतिेिों को सुिझाने के लिए तंत्र लवकलसत करना।
iii. कोई अन्य प्रासंलर्गक लबंिु।
लकसी एक का उल्लेख
अथिा
रािनीमतक दलों में िन भागीदारी को बढािा दे ने का तरीका-
PG-86 1
i. राजनीलतक ििों को लवलिन्न समूहों को समायोलजत करने के लिए
DP
प्रलतलनलधत्व िे ना चालहए।
ii. िोर्गों के कल्याण के लिए कानूनों और नीलतयों की रूपरे खा तैयार
करना।
iii. कोई अन्य प्रासंलर्गक लबंिु।
लकसी एक का उल्लेख
Page 5
17.
सरकार द्वारा बाधाओं या प्रलतबंधों को हिाना उदारीकरण के रूप में जाना PG-64 1
जाता है। E
अथिा
मिश्व व्यापार संगठन (WTO) एक ऐसा संर्गठन है लजसका उद्दे श्य अंतराथ ष्ट्रीय PG-65 1
व्यापार को उिार बनाना है। E
18. b) िारतीय ररजवथ बैंक। PG-40 1
E
19. C) / बढ़ई (3) प्रार्लमक क्षेत्र। PG-20 1
E
20. प्रमत व्यक्ति आय- PG-8 1
िे श की कुि आय इसकी कुि जनसंख्या से लविालजत है। E
अथिा
PG-10 1
साक्षरता दर- E
7 और उससे अलधक आयु वर्गथ में साक्षर जनसंख्या के अनुपात को मापता है ।
21. अनुभाग -ख
भारत की आमथचक और रािनीमतक क्तथथमत पर प्रथम मिश्व युद्ध के
PG-54 3
मनमिताथच:
H
i. इसके कारण रक्षा व्यय में िारी वृक्ति की र्गयी लजसके कारण युि ऋण
और बढ़ते हुए करों का लवत्तपोषण लकया र्गया।
ii. सीमा शुल्क को उठाया र्गया और आयकर पेश लकया र्गया।
iii. मूल्य में वृक्ति हुई और आम िोर्गों के लिए अत्यलधक कलठनाई हुई।
iv. ग्रामीण क्षेत्रों में जबरन िती से व्यापक स्तर पर रोष फैि र्गया।
v. िारत के कई लहस्ों में फसिें खराब हो र्गईं, लजससे िोजन की िारी
कमी हो र्गई।
vi. यह एक फ्लू की महामारी फ़ैि र्गयी
vii. अकाि और महामारी के कारण िाखों िोर्ग मारे र्गए।
लकन्ी तीन लबंिुओं की व्याख्या
अथिा
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समिनय अिज्ञा आं दोलन ’में गरीब मकसानों की भूममका
i. र्गरीब लकसान केवि िर्गान में कमी नहीं चाहते र्े उनमे से बहुत सरे PG-65 3
लकसान ज़मींिारो से पत्ते पर ज़मीं िे कर खेती कर रहे र्े H.
ii. वे ज़मींिारो वािा िाड़ा माफ़ करवाना चाहते र्े I
iii. वे कई तरह के कट्टरपंर्ी आं िोिनों में शालमि हुए, लजनका नेतृत्व
अक्सर समाजवािी और कम्युलनस्ट करते र्े।
iv. कांग्रेस ज्यािातर जर्गहों पर 'िाड़ा लवरोधी ' अलियानों का समर्थन करने
के लिए तैयार नहीं र्ी।
v. कोई अन्य प्रासंलर्गक लबंिु।
लकन्ी तीन लबंिुओं की व्याख्या
22. अंग्रेिों के मलए फायदे मंद भारतीय व्यापार: PG-91 3
H
i. व्यापार अलधशेष - लििे न में िारतीय के सार् एक व्यापार अलधशेष
लकया र्ा। लििे न ने अन्य िे शों के सार् अपने व्यापार घािे को संतुलित
करने के लिए इस अलधशेष का उपयोर्ग लकया।
ii. होम चाजथ - िारत में लििे न के व्यापार अलधशेष ने तर्ाकलर्त घरे िू
शुल्क का िुर्गतान करने में िी मिि की, लजसमें लिलिश अलधकाररयों
और व्यापाररयों द्वारा लनजी प्रेषण घर, िारत के बाहरी ऋण पर ब्याज
िुर्गतान और िारत में लिलिश अलधकाररयों के पेंशन शालमि र्े।
iii. कपास का प्रमुख आपूलतथकताथ - िारत लिलिशों को कच्चे कपास का
एक प्रमुख आपूलतथकताथ बना रहा, लजसे लििे न के सूती वस्त्र उद्योर्ग को
क्तखिाना आवश्यक र्ा।
iv. इं डेंट्योर श्रलमकों के आपूलतथकताथ - लबहार, यूपी, मध्य िारत के कई
इं डेंट्योर श्रलमक खानों और बार्गानों में काम करने के लिए िू सरे िे शों में
चिे र्गए।
v. कोई अन्य प्रासंलर्गक लबंिु
लकन्ी तीन लबंिुओं की व्याख्या
#(नोट-कृपया शताब्दी पर ध्यान न दे ते हुए उत्तर को िांर् कीमिये)
अथिा
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उन्नीसिी ं सदी के मध्य में कुलीन िगच के पसंदीदा िाथ से बने सामान: PG-109- 3
110
i. बहुत सारे उत्पाि केवि हार् से ही तैयार लकये जा सकते र्े ीी मशीनों
H
से तो एक जैसे लकस्म के उत्पाि ही बड़ी संख्या में बनाये जा सकएते र्े
ii. बाजार की मांर्ग अक्सर बारीक लडजाइन और ख़ास आकारों वािे
सामानों के लिए र्ी जो केवि हार् श्रम का उत्पािन कर सकते र्े।
iii. लवक्टोररयन लििे न में, उच्च वर्गों ने हार् से उत्पालित चीजों को
प्रार्लमकता िी। वे
iv. हार्ों से बनी चीज़ो को पररष्कार और सुरुलच का प्रतीकमाना जIता र्ा
v. उनकी लफलनश और लडज़ाइन अच्छे होते र्ी । वे बेहतर रूप से तैयार
र्े, व्यक्तिर्गत रूप से लनलमथत और सावधानीपूवथक लडजाइन लकए र्गए।
vi. मशीन-लनलमथत सामान कॉिोलनयों को लनयाथत के लिए र्े।
vii. बहुत सारे उत्पाि केवि हार्े से ही तैयार लकये जा सकते र्े
लकन्ी तीन लबंिुओं की व्याख्या
23. खमनि ससािनो को सुमनयोमित एिं सत् पोषणीय िनाग से प्रयोग PG- 58. 3
करने के मलए एक तालमेल युि प्रयास करना िोगा G
i. बेहतर तकनीकों को िर्गातार लवकलसत करने की आवश्यकता है
तालक कम िार्गत पर लनम्न कोलि के अयस्ों का उपयोर्ग लकया जा
सके।
ii. धातुओं का पुनचथक्रण।
iii. रद्दी धातुओं का प्रयोर्ग और अन्य लवकल्प का उपयोर्ग िलवष्य के
लिए हमारे खलनज संसाधनों के संरक्षण में सहायक हैं ।
iv. सतत पोषणीय मार्गथ को लवकलसत करने की आवशयकता
v. खलनज की र्गहन खोज िी आवश्यक है।
vi. खनन सुरक्षा लनयमों और पयाथवरण कानूनों का कायाथ न्वयन
vii. कोई अन्य प्रासंलर्गक लबंिु
लकन्ी तीन लबंिुओं की व्याख्या
24. आिुमनक समय में संर्ार क्षेत्र में बदलाि की गमत तेि िै।" PG-90. 3
G
i. संचारक या ररसीवर के िौलतक आं िोिन िंबी िू री की संचार बहुत
आसान है।
ii. िे श में संचार, रे लडयो, प्रेस, लफल्ों आलि सलहत व्यक्तिर्गत संचार
और जन संचार प्रमुख संचार माध्यम हैं।
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iii. िारतीय डाक नेिवकथ िु लनया में सबसे बड़ा है। यह पासथि के सार्-
सार् व्यक्तिर्गत लिक्तखत संचार िी संिािता है।
iv. काडथ और लिफाफे को प्रर्म श्रेणी का मेि माना जाता है और
जमीन और हवा िोनों को कवर करने वािे स्टे शनों के बीच
एयरलिफ्ट लकया जाता है । लद्वतीय श्रेणी के मेि में बुक पैकेि
शालमि हैं, सतह मेि द्वारा लकए जाते हैं , िूलम और जि पररवहन
को कवर करते हैं।
v. बड़े कस्ों और शहरों में मेि की त्वररत लडिीवरी की सुलवधा के
लिए, छह मेि चैनि शुरू लकए र्गए हैं। उन्ें राजधानी चैनि, मेिरो
चैनि, ग्रीन चैनि, लबजनेस चैनि, बल्क मेि चैनि और आवलधक
चैनि कहा जाता है।
vi. िारत में एलशया का सबसे बड़ा िू रसंचार नेिवकथ है।
vi। िारत में र्गांवों को पहिे से ही सब्सक्राइबर िर ं क डायलिंर्ग (एसिीडी)
िे िीफोन सुलवधा के सार् कवर लकया र्गया है।
vii। कोई अन्य प्रसांलर्गक लबंिु
लकन्ी तीन लबंिुओं की व्याख्या
अथिा
"रे ल पररििन की अपेक्षा सड़क पररििन की मित्ता अमिक िै " PG-82 3
G
i. सड़कों की लनमाथण िार्गत रे िवे िाइनों की तुिना में बहुत कम है।
ii. सड़कें तुिनात्मक रूप से अलधक लवच्छे लित िूिार्गों पर बनाई जा
सकती हैं
iii. अलधक ढाि प्रवणता तर्ा पहाड़ी क्षेत्रो में िी सड़के लनलमथत की जा
सकती है और इस तरह से लहमािय जैसे पहाड़ों को पार कर
सकती हैं।
iv. अपेक्षा कृत काम व्यक्तियों , कम िु री व् कम वस्तुओं के पररवहन
में सड़के लमतव्ययी है
v. यह घर घर सेवा िी प्रिान करती है ; इस प्रकार, चढ़ाने और
उतरने की िार्गत बहुत कम है।
vi. सड़क पररवहन को पररवहन के अन्य साधनों के लिए कड़ी के रूप
में िी उपयोर्ग लकया जाता है जैसे लक वे रे िवे स्टे शन, हवाई और
समुद्री बंिरर्गाहों के बीच एक लिंक प्रिान करते हैं।
vii. कोई अन्य प्रसांलर्गक लबंिु
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लकन्ी तीन लबंिुओं की व्याख्या
25. सत्ता के मिकेंद्रीकरण के औमर्त्य: PG-24 3
DP
i. बड़ी संख्या में समस्याएं और मुद्दे जो स्र्ानीय स्तर पर सबसे अच्छे ढं र्ग
से सुिझाए जाते हैं।
ii. िोर्गों को अपने इिाकों में समस्याओं का बेहतर ज्ञान है।
iii. उनके पास बेहतर सोच है लक पैसे कहााँ खचथ करें और चीजों को
अलधक कुशिता से कैसे प्रबंलधत करें ।
iv. िोर्गों के लिए लनणथय िेने में िार्ग िेना संिव है।
v. यह िोकतांलत्रक िार्गीिारी को लवकलसत करने में मिि करता है।
vi. कोई अन्य प्रासंलर्गक लबंिु
लकन्ी तीन की व्याख्या
26. स्रोत: PG-90 1+2=3
DP
26.1. मिमभन्न दे शों के बीर् लोकतंत्र के मलए आकषचण को पिर्ानें। 1
िोकतंत्र िोर्गों की आवश्यकता के लिए पारिशी, जवाबिे ह और
उत्तरिायी है / िोकतंत्र सिी सामालजक-आलर्थक और राजनीलतक
समस्याओं का समाधान कर सकता है।/ कोई अन्य प्रासंलर्गक लबंिु
26.2. अपेमक्षत और िास्तमिक पररणामों के आिार पर लोकतंत्र । 2
अपेलक्षत सरकार की र्गुणवत्ता है ,--आलर्थक ििाई, असमानता को कम
करना, सामालजक मतिेिों को िू र करना और व्यक्ति की र्गररमा।
िोकतंत्र लसफथ सरकार का एक रूप है। यह केवि उपयुथि पररणामों
को प्राप्त करने के लिए क्तस्र्लतयां बना सकता है।/कोई अन्य प्रासंलर्गक
लबंिु/
लकन्ी िो लबंिुओं का उल्लेख
27. तृतीयक क्षेत्र का मित्व: PG-24 3
E
i. लकसी िी िे श में कई सेवाओं जैसे लक अस्पतािों, शैक्षलणक
संस्र्ानों, पोस्ट और िे िीग्राफ सेवाओं, पुलिस स्टे शनों, अिाितों,
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आलि की आवश्यकता होती है। इन्ें मूििूत सेवाओं के रूप में
माना जा सकता है।
ii. कृलष और उद्योर्ग के लवकास से पररवहन, व्यापार, िंडारण जैसी
सेवाओं का लवकास होता है।
iii. जैसे-जैसे आय का स्तर बढ़ता है , कुछ लनलित िोर्ग कई और
सेवाओं की मांर्ग करने िर्गते हैं जैसे बाहर खाना, पयथिन, खरीिारी,
लनजी अस्पताि, लनजी स्ूि, व्यावसालयक क्षेत्र आलि।
समग्र रूप में मूल्यांकन
अथिा
एक अथचव्यिथथा का संगमठत क्षेत्र:
संर्गलठत क्षेत्र उन उद्यमों या काम के स्र्ानों को शालमि करता है जहां
रोजर्गार की शतें लनयलमत हैं और इसलिए, काम का आश्वासन लिया है।
PG-31
i. उन्ें सरकार द्वारा पंजीकृत लकया जाता है और इसके लनयमों और E 3
लवलनयमों का पािन करना होता है जैसे लक फैक्टर ीज एक्ट, न्यूनतम
मजिू री अलधलनयम, ग्रेच्युिी अलधलनयम का िुर्गतान, िु कानें और
प्रलतष्ठान अलधलनयम आलि।
ii. इस को संर्गलठत कहा जाता है क्ोंलक इसमें कुछ औपचाररक
प्रलक्रयाएाँ और प्रलक्रयाएाँ हैं।
iii. इनमें से कुछ िोर्गों को लकसी के द्वारा लनयोलजत नहीं लकया जा
सकता है, िेलकन वे स्वयं काम कर सकते हैं , िेलकन उन्ें िी
सरकार के सार् खुि को पंजीकृत करना होर्गा और लनयमों और
लवलनयमों का पािन लकया जाता है I
iv. संर्गलठत क्षेत्र के श्रलमकों को रोजर्गार की सुरक्षा प्राप्त है ।
v. उनसे केवि कुछ घंिों के लिए काम करने की उम्मीि की जाती है।
यलि वे अलधक काम करते हैं , तो उन्ें लनयोिा द्वारा ओवरिाइम
का िुर्गतान करना होर्गा।
vi. उन्ें अवकाश, िलवष्य लनलध, ग्रेच्युिी आलि के िौरान िुर्गतान लकया
जाता है।
vii. उन्ें लचलकत्सा िाि लमिना चालहए और कानूनों के तहत, कारखाने
के प्रबंधक को पीने के पानी और सुरलक्षत कामकाजी वातावरण
जैसी सुलवधाओं को सुलनलित करना है।
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viii. कोई अन्य प्रसांलर्गक लबंिु
लकन्ी तीन लबंिुओं की व्याख्या
28. भारतीय अथचव्यिथथा में भारतीय ररििच बैंक का मित्व:
PG-48. 3
i. आरबीआई केंद्र सरकार की ओर से मुद्रा नोि जारी करता है। E
ii. यह ऋण के औपचाररक स्रोतों के कामकाज की लनर्गरानी करता
है।
iii. RBI इस बात की लनर्गरानी करता है लक बैंक वास्तव में नकिी
संतुिन बनाए रखें।
iv. RBI िे खता है लक बैंक न केवि िाि कमाने वािे व्यवसायों और
व्यापाररयों को, बक्तल्क छोिे कृषकों, िघु उद्योर्गों, छोिे उधारकताथओं
आलि को िी ऋण िे ते हैं।
v. समय-समय पर, बैंकों को आरबीआई को जानकारी िे नी होती है।
vi. कोई अन्य प्रसांलर्गक लबंिु
लकन्ी तीन लबंिुओं की व्याख्या
29.
अनुभाग- ग
नीचे लिए र्गए स्रोतों को पढ़ें और लनम्न प्रश्ों के उत्तर िें :
स्त्रोत 1- िाममचक सुिार और सािचिमनक बिस। PG-169- 1+2+2=5
29.1। इस बात का मूल्यांकन करें लक िारत में उन्नीसवीं शताब्दी की शुरुआत में 172.
लप्रंि ने बहस की प्रकृलत कैसे बनाई। (1) H
सामालजक और धालमथक सुधारकों और लवधवाओं के अिर्गाव, एकेश्वरवाि,
िाह्मणवािी पुरोलहतवाि और मूलतथपूजा जैसे मामिों पर लहंिू और कट्टरपंलर्यों के
बीच र्गहन लववाि। बंर्गाि में, जैसा लक बहस लवकलसत हुई, िर ै क्स और अखबारों
ने कई तरह के तकथ प्रसाररत लकए।
स्त्रोत 2- प्रकाशन के नए रूप।
29.2। आप लकस हि तक सहमत हैं लक लप्रंि ने अनुिव की नई िु लनया को
खोिा, और मानव जीवन की लवलवधता का एक ज्विंत अर्थ लिया? (2)
अन्य नए सालहक्तत्यक रूपों ने िी पढ़ने-पढ़ने की िु लनया में प्रवेश लकया, िघु
कर्ाएाँ , सामालजक और राजनीलतक मामिों के बारे में लनबंध। अिर्ग-अिर्ग
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तरीकों से, उन्ोंने मानव जीवन और अंतरं र्ग िावनाओं पर नए जोर को मजबूत
लकया, राजनीलतक और सामालजक लनयमों के बारे में लजन्ोंने इस तरह की चीजों
को आकार लिया।
स्त्रोत 3- ममिलाएं और मुद्रण
29.3। लप्रंि संस्ृलत ने मलहिाओं के जीवन और िावनाओं में लकस हि तक रुलच
लिखाई? (2)
i. मलहिाओं के जीवन और िावनाओं में बहुत रुलच पैिा की,
ii. मध्यम वर्गथ के घरों में मलहिाओं की रीलडं र्ग बहुत बढ़ र्गई।
iii. मलहिा लशक्षा में वृक्ति,
लकसी िी िो का आकिन लकया जाना है
30. उद्योगों को प्रभामित करने िाले भौमतक करक
i. कच्चे माि की उपिब्धता PG- 66 5
ii. लबजिी संसाधनों की उपिब्धता G
iii. पानी की उपिब्धता
iv. अनुकूि जिवायु
मानिीय कारक:
v. कुशि और अकुशि श्रम की श्रम-उपिब्धता अलधक उद्योर्गों
को प्रेररत करती है
vi। बाजार - बाजार में लनकिता आवश्यक है क्ोंलक पररवहन में न
केवि व्यय शालमि है , बक्तल्क लविंब िी शालमि है
vii। सरकारी नीलत --इन सिी िौलतक और मानवीय कारकों से ऊपर,
सबसे महत्वपूणथ कारक सरकारी नीलत है।
viii। पररवहन सुलवधा - एक कुशि पररवहन नेिवकथ कारखानों तक
पहुंचने के लिए कच्चे माि और बाजारों तक पहुंचने के लिए तैयार माि
की मिि करता है।
झ। पूंजी - प्रत्येक उद्योर्ग को क्रय मशीनों, लबजिी और कच्चे माि के
लिए पूंजी की आवश्यकता होती है , और मजिू री का िुर्गतान करने और
पररवहन िार्गतों को पूरा करने के लिए िी।
vi। कोई अन्य प्रासंलर्गक लबंिु।
लकन्ी पााँच लबंिुओं की व्याख्या
Page 13
अथिा
औद्योमगक प्रदू षण:
i. पुन: उपयोर्ग करके प्
PG-78 5
ii. पानी का उपयोर्ग कम से कम करके और इसे िो या अलधक
G
क्रलमक चरणों में पुनचथक्रण करके।
iii. पानी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वषाथ जि का
संचयन।
iv. नलियों और तािाबों में छोड़ने से पहिे र्गमथ पानी और अपलशष्ट्ों
का उपचार करना।
v. औद्योलर्गक अपलशष्ट्ों का उपचार तीन चरणों में लकया जा सकता
है।
(ए) यांलत्रक तरीकों, स्क्रीलनंर्ग, पीस, flocculation और
अवसािन द्वारा प्रार्लमक उपचार।
(b) जैलवक प्रलक्रया द्वारा लद्वतीयक उपचार
c) जैलवक, रासायलनक और िौलतक प्रलक्रयाओं द्वारा तृतीयक
उपचार, अपलशष्ट् जि का पुनचथक्रण।
vi. िूजि की अलधकता को कानूनी रूप से लवलनयलमत करने की
आवश्यकता है।
vii. कोई अन्य प्रासंलर्गक लबंिु।
लकन्ी पााँच लबंिुओं की व्याख्या
31. ‘सांप्रदामयकता रािनीमत में मिमभन्न रूप ले सकती िै। ' PG-47 5
DP
i. ये लनयलमत रूप से धालमथक पूवाथग्रहों, धालमथक समुिायों की रूलढ़यों को
शालमि करते हैं।
ii. अन्य धमों के मुकाबिे लकसी के धमथ की श्रेष्ठता में लवश्वास।
iii. अपने स्वयं के धालमथक समुिाय के राजनीलतक प्रिुत्व की खोज की ओर
जाता है।
iv. धालमथक तजथ पर राजनीलतक र्गोिबंिी, सांप्रिालयकता का एक और
िर्गातार रूप है।
v. इसमें राजनीलतक क्षेत्र में एक धमथ के अनुयालययों को एक सार् िाने के
लिए पलवत्र प्रतीकों, धालमथक नेताओं, िावनात्मक अपीि और सािे िय
के उपयोर्ग का समावेश है ।
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vi. चुनावी राजनीलत में अक्सर िू सरों के लिए एक धमथ के लहतधारकों की
िावनाओं या िावनाओं की लवशेष अपीि शालमि होती है।
vii. किी-किी सांप्रिालयकता सांप्रिालयक लहंसा, िं र्गे और नरसंहार का
सबसे रूप िे िेती है।
viii. कोई अन्य प्रासंलर्गक लबंिु।
लकन्ी पााँच लबंिुओं की व्याख्या
32. लोकतांमत्रक दे शों में रािनीमतक दलों की आिश्यकता: PG-75 5
i. लनवाथलचत प्रलतलनलध अपने लनवाथचन क्षेत्र के लिए जवाबिे ह होर्गा लक DP
वे स्र्ानीय स्तर पर क्ा करते हैं।
ii. राजनीलतक ििों का उिय प्रत्यक्ष रूप से प्रलतलनलध िोकतंत्रों के
उद्भव से जुड़ा हुआ है।
iii. बड़े पैमाने पर समाजों को प्रलतलनलध िोकतंत्र की आवश्यकता है।
iv. जैसे-जैसे समाज बड़े और जलिि होते र्गए, उन्ें लवलिन्न मुद्दों पर
लवलिन्न लवचारों को एकत्र करने और सरकार के समक्ष प्रस्तुत करने
के लिए कुछ एजेंसी की िी आवश्यकता होती है।
v. उन्ें लवलिन्न प्रलतलनलधयों को एक सार् िाने के लिएकोलशश करते
है तालक एक लजम्मेिार सरकार बनाई जा सके।
vi. राजनीलतक िि इन जरूरतों को पूरा करते हैं जो प्रत्येक प्रलतलनलध
सरकार के पास है।
vii। कोई अन्य प्रासंलर्गक लबंिु
लकन्ी पांच लबंिुओं की व्याख्या ।
अथिा
भारत में रािनीमतक दलों और उसके नेताओं में सुिार के मलए िाल के
प्रयास:
PG-83 5
i. लनवाथलचत लवधायकों और सांसिों को िि बििने से रोकने के लिए
DP
संलवधान में संशोधन लकया र्गया।
ii. सांसिों और लवधायकों को पािी के नेताओं को जो िी तय करना है
उसे स्वीकार करना होर्गा।
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iii. यह हर उस उम्मीिवार के लिए अलनवायथ है जो अपनी संपलत्त और
उसके क्तखिाफ िंलबत आपरालधक मामिों का लववरण िे ते हुए
AFFIDAVIT िाक्तखि करने के लिए चुनाव िड़ता है।
iv. नई प्रणािी ने बहुत सी जानकारी जनता के लिए उपिब्ध कराई है।
v. इसके कारण अमीरों और अपरालधयों के प्रिाव में कमी आई है।
vi. चुनाव आयोर्ग ने एक आिे श पाररत कर राजनीलतक ििों के लिए
यह आवश्यक कर लिया लक वे अपने संर्गठनात्मक चुनाव आयोलजत
करें और अपने आयकर ररिनथ िाक्तखि करें ।
vii. राजनीलतक ििों के आं तररक मामिों को लवलनयलमत करने के लिए
एक कानून बनाया जाना चालहए। राजनीलतक ििों को अपने सिस्यों
के एक रलजस्टर को बनाए रखने, अपने स्वयं के संलवधान का पािन
करने, एक स्वतंत्र अलधकार रखने, पािी लववािों के मामिे में
न्यायाधीश के रूप में कायथ करने, सवोच्च पिों पर खुिे चुनाव
कराने के लिए अलनवायथ लकया जाना चालहए।
viii. राजनीलतक ििों को मलहिा उम्मीिवारों को न्यूनतम संख्या में एक
लतहाई लिकि िे ना अलनवायथ लकया जाना चालहए।
ix. ।चुनावों का राज्य लवत्त पोषण होना चालहए।
x. कोई अन्य प्रासंलर्गक लबंिु
लकन्ी पांच लबंिुओं की व्याख्या ।
33. िैश्वीकरण का प्रभाि एक समान निी ं : PG-66 – 5
69
i. उत्पािकों और श्रलमकों के बीच, वैश्वीकरण का प्रिाव एक समान नहीं E
रहा है। बहुराष्ट्रीय कंपलनयों को सेि फोन, ऑिोमोबाइि, इिेक्टरॉलनक्स,
सॉफ्ट लडर ं क, फास्ट फूड या शहरी क्षेत्रों में बैंलकंर्ग जैसी सेवाओं में
लििचस्पी रही है। इन उत्पािों में बड़ी संख्या में अच्छी तरह से खरीिार
हैं।
ii. इन उद्योर्गों और सेवाओं में, नई नौकररयां पैिा हुई हैं।
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iii. इन उद्योर्गों को कच्चे माि आलि की आपूलतथ करने वािी स्र्ानीय
कंपलनयां समृि हुई हैं।
iv. शीषथ िारतीय कंपलनयों में से कई बढ़ी हुई प्रलतस्पधाथ से िाि उठाने में
सक्षम हैं।
v. वैश्वीकरण ने कुछ बड़ी िारतीय कंपलनयों को स्वयं बहुराष्ट्रीय कंपलनयों
के रूप में उिरने में सक्षम बनाया है -िािा मोिसथ (ऑिोमोबाइि),
इं फोलसस (आईिी)।
vi. वैश्वीकरण ने सेवा प्रिान करने वािी कंपलनयों के लिए िी नए अवसर
पैिा लकए हैं , लवशेष रूप से आईिी से जुड़े िोर्गों के लिए
नकारात्मक प्रभाि -
vii. छोिे लनमाथताओं को प्रलतस्पधाथ के कारण कड़ी िक्कर लमिी है।
viii. कई इकाइयों ने कई श्रलमकों को रोजर्गार िे ने के लिए बंि कर लिया है।
ix. प्रलतस्पधाथ और अलनलित रोजर्गार वैश्वीकरण और प्रलतस्पधाथ के िबाव ने
श्रलमकों के जीवन को काफी हि तक बिि लिया है।
पूरे के रूप में मूल्यांकन लकया जाना है।
34. मिकास के मलए िारणीयता का मुद्दा मित्वपूणच िै : PG-14 – 5
15
i. वतथमान पीलढ़यों द्वारा संसाधनों का लववेकपूणथ उपयोर्ग िावी E
पीलढ़यों के लिए पयाथप्त है ।
ii. जीवन और स्वास्थ्य की र्गुणवत्ता सुलनलित करना।
iii. याथवरण का संरक्षण जो लवकास के लिए आवश्यक है।
iv. पवन ऊजाथ और सौर ऊजाथ जैसे नवीकरणीय संसाधनों का
उपयोर्ग करके।
v. र्गैर-नवीकरणीय संसाधनों की बचत।
vi. स्टॉक में जोड़े जाने वािे ऊजाथ के नए स्रोत।
vii. कोई अन्य प्रासंलर्गक लबंिु।
कोई पााँच समझाया जाए।
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35. OnMap: 35A & 35 B- संलग्न मानमर्त्र दे खे 2+4=6
नोट: मनम्नमलक्तखत प्रश्न (केिल प्रश्न संख्या 35 ) दृमिबामित परीक्षामथचयों 1X6=6
के मलए िैं ,।
35.1 लबहार
35.2 किकत्ता (कोिकाता)
35.3 अमृतसर
35.4 केरिा
35.5 महाराष्ट्र
35.6 र्गााँधी नर्गर
35.7 र्गोवा
35.8 तलमि नाडु