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CBSE Class 12 Marking Scheme 2022 for Hindi Elective Term 2

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About CBSE Class 12 Marking Scheme 2022 for Hindi Elective Term 2

CBSE Class 12 Marking Scheme 2022 for Hindi Elective Term 2 is available here for free download. Published by CBSE for Class 12, this marking scheme can be viewed online or downloaded as a PDF (6 pages). Candidates preparing for Class 12 can use CBSE Class 12 Marking Scheme 2022 for Hindi Elective Term 2 to understand the exam pattern, the type of questions asked, and the overall difficulty level.

Frequently Asked Questions

How can I download CBSE Class 12 Marking Scheme 2022 for Hindi Elective Term 2?

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Is CBSE Class 12 Marking Scheme 2022 for Hindi Elective Term 2 free to download?

Yes. CBSE Class 12 Marking Scheme 2022 for Hindi Elective Term 2 can be viewed online and downloaded as a PDF free of cost on AglaSem Docs.

How many pages does CBSE Class 12 Marking Scheme 2022 for Hindi Elective Term 2 have?

CBSE Class 12 Marking Scheme 2022 for Hindi Elective Term 2 contains 6 pages, which you can read online or download together as a single PDF.

Where can I find more Class 12 study material?

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CBSE Class 12 Marking Scheme 2022 for Hindi Elective Term 2 – Text

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Page 1

सत्रीय परीक्षा - 2
प्रतिदर्श प्रश्नपत्र 2021-22
विषय - हिंदी (ऐच्छिक)
विषय कोड - 002
कक्षा - बारहवीं
अंक योजना

निर्धारित समय : 2 घंटे पर्णां
ू क : 40

सामान्य निर्देश :-

-अंक योजना का उद्दे श्य मल् ू यांकन को अधिकाधिक वस्तनि ु ष्ठ बनाना है ।
- वर्णनात्मक प्रश्नों के अंक योजना में दिए गए उत्तर-बिंद ु अंतिम नहीं हैं ।यह सझ ु ावात्मक एवं सांकेतिक हैं ।
-यदि परीक्षार्थी इन संकेत बिंदओ ु ं से भिन्न, किंतु उपयक्
ु त उत्तर दे तो उसे अंक दिए जाएँ। -मल्
ू यांकन कार्य निजी
व्याख्या के अनस ु ार नहीं, बल्कि योजना में निर्दिष्ट निर्देशानस
ु ार अनसु ार ही किया जाए।

प्रश्न 1 किसी एक विषय पर लगभग 150 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए। (5×1 =5अंक)

भमि
ू का - 1 अंक
विषयवस्तु - 3 अंक
भाषा - 1 अंक

प्रश्न 2 दो में से किसी एक विषय पर पत्र( शब्द सीमा लगभग 120 शब्द) (5×1 =5अंक)

आरं भ और अंत की औपचारिकताएँ- 1अंक

विषय वस्तु - 3 अंक

भाषा - 1 अंक

प्रश्न 3 ( शब्द सीमा लगभग 50 शब्द)
(3×1 =3) + (2×1 =2)

(क) कहानी में पात्रों के चरित्र-चित्रण का महत्वपर्ण
ू स्थान होता है । पात्रों का चरित्र चित्रण करके ही कहानीकार
कहानी को आगे बढ़ाता है । हर पात्र का अपना स्वभाव होता है । पात्रों का चरित्र चित्रण पात्रों की अभिरुचियों के
माध्यम से भी होता है । समाज में अलग-अलग प्रकार के लोगों की अपने स्वभाव के अनस ु ार अलग-अलग
अभिरुचियाँ होती हैं, इन्हें ध्यान में रखकर ही कहानीकार पात्रों का चरित्र चित्रण करता है ।
चरित्र चित्रण का सरल तरीका यह है कि लेखक पात्रों की विशेषताओं का बखान स्वयं करता है । जैसे- श्री अनंत राम
शर्मा बहुत परोपकारी व धार्मिक प्रवत्तिृ के व्यक्ति थे। इलाके के सभी लोग उनका सम्मान करते थे।

Page 2

पात्रों के काम के द्वारा भी उनका चरित्र चित्रण स्वयं ही हो जाता है । उनके स्वभाव और स्वरूप का वर्णन किया
जाता है ।दस ू रे पात्र के माध्यम से भी कई बार कहानीकार किसी अन्य पात्र का चरित्र-चित्रण करवाता है । (3 अंक )

अथवा

नाटक हिंदी साहित्य की एक विधा है । यह लिखित रूप से दृश्यता की ओर जाता है । जब नाटक का मंचन होता है
तब जाकर उसमें संपर्ण ू ता आती है । नाटक को तीन या उससे अधिक अंकों में विभाजित किया जाता है । प्रत्येक
अंक दृश्यों में विभाजित होता है । नाटक में पात्रों का चरित्र चित्रण सजीव रूप से किया जाता है ।

नाटक और कहानी में अंतर

- कहानी का संबध
ं लेखक और पाठक से जड़ ु ा हुआ होता है और नाटक का संबध
ं लेखक, निर्देशक, पात्र, श्रोता,
दर्शक तथा अन्य अनेक लोगों से जड़
ु ता है ।

-कहानी को पढ़ा या सन ु ा जा सकता है जबकि नाटक को दे खा जाता है । इसे मंच पर प्रस्तत
ु किया जाता है । नाटक
में मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, अभिनय, संगीत आदि का समावेश होता है । (3 अंक)

(ख) 'समय का बंधन' नाटक की रचना प्रक्रिया पर परू ा प्रभाव डालता है । इसीलिए यह निश्चित किया जाता है कि
नाटक निर्धारित समय सीमा के भीतर परू ा होना चाहिए। नाटक को वर्तमान काल में ही संयोजित करना होता है
भले ही वह भतू काल या भविष्यकाल की रचनाओं पर आधारित हों। काल चाहे कोई भी हो उसे एक विशेष समय में ,
एक विशेष स्थान पर वर्तमान काल में ही घटित होना होता है । साहित्य की अन्य विधाओं, कहानी, उपन्यास या
कविता को पढ़ते या सन
ु ते हुए हम बीच में रूक सकते हैं और कुछ समय बाद वहीं से शरूु कर सकते हैं परं तु नाटक
के साथ ऐसा करना संभव नहीं है नाटककार को इस बात का ध्यान भी रखना होता है कि दर्शक कितनी दे र तक
किसी घटना को घटित होते हुए दे ख सकते हैं। नाटककार से अपेक्षा की जाती है कि नाटक के प्रत्येक अंक की
अवधि कम से कम 48 मिनट की हो यही समय का बंधन कहलाता है । ( 2 अंक )

अथवा

कहानी का केंद्रीय बिंद ु उसका कथानक होता है कथानक कहानी का वह संक्षिप्त रूप होता है जिसमें प्रारं भ से अंत
तक कहानी की सभी घटनाओं और पात्रों का समावेश किया जाता है कहानी और कथानक में थोड़ा अंतर होता है
उदाहरण के लिए प्रेमचंद की कहानी 'कफ़न' 10-12 पष्ृ ठों की कहानी है , पर इसका कथानक 10-12 पंक्तियों में
लिखा जा सकता है ।
इस आधार पर जा सकता है कि कथानक (Plot) कहानी का प्रारं भिक नक्शा होता है । यह लगभग उसी प्रकार का
होता है जैसे किसी मकान को बनाने से पहले उसका नक्शा बनाया जाता है । कभी-कभी कहानीकार के हाथ में
कथानक एक सत्र ू आ जाता है , फिर यह उसे विस्तार दे ने में जट
ु जाता है । यह विस्तार कल्पना के आधार पर भी
किया जा सकता है । प्रायः कथानक में प्रारं भ मध्य और अंत-कथानक का परू ा स्वरूप होता है । कथानक में इस के
तत्त्व भी रहते हैं। इनसे कहानी रोचक बनी रहती है । कथानक की पर्ण ू ता की शर्त भी यही होती है कि कहानी
नाटकीय ढं ग से अपने उद्दे श्य को परू ा करने के बाद समाप्त हो। ( 2 अंक )

प्रश्न 4 ( शब्द सीमा लगभग 50 शब्द)
(3×1 =3) + (2×1 =2)

Page 3

(क) ऐसा माना जाता है कि पत्रकारिता जल्दी में लिखा गया साहित्य है परं तु वास्तव में ऐसा नहीं है । पत्रकारिता
और साहित्य लेखन में अंतर है । पत्रकारीय लेखन अनिवार्य रूप से तात्कालिकता और अपने पाठकों की रुचियों को
ध्यान में रखकर लिखा जाने वाला लेखन है । इसके विपरीत साहित्यिक रचनात्मक लेखन में लेखक को काफ़ी छूट
होती है । कविता, कहानी, उपन्यास साहित्यिक लेखन है ।पत्रकारीय लेखन में अलंकारिक-संस्कृतनिष्ठ भाषा-शैली
के बजाय आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया जाता है । पत्रकारीय लेखन की भाषा सरल, सहज और रोचक
होती है ।

अथवा

पत्रकारीय लेखन का सबसे जाना-पहचाना रूप समाचार लेखन है । आमतौर पर अखबारों में समाचार पर्ण
ू कालिक
और अंशकालिक पत्रकार लिखते हैं, जिन्हें संवाददाता या रिपोर्टर कहते हैं।

अखबारों में प्रकाशित अधिकांश समाचार एक खास शैली में लिखे जाते हैं। समाचार लेखन की शैली को उलटा
पिरामिड शैली के नाम से जाना जाता है । यह समाचार लेखन की सबसे लोकप्रिय, उपयोगी और बनि ु यादी शैली है ।
समाचारों में किसी भी घटना, समस्या या विचार के सबसे महत्वपर्ण ू तथ्य को सबसे पहले पैराग्राफ में लिखा जाता
है । उसके बाद के पैराग्राफ में कम महत्वपर्ण
ू सचू ना तथा तथ्य दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब
तक समाचार खत्म नहीं हो जाता।

(ख) संवाददाताओं के बीच काम का विभाजन आम तौर पर उनकी दिलचस्पी और ज्ञान को ध्यान में रखते हुए
किया जाता है मीडिया की भाषा में इसे बीट कहते हैं । बीट की रिपोर्टिंग के लिए संवाददाता में उस क्षेत्र के बारे में
जानकारी और दिलचस्पी का होना पर्याप्त है । एक बीट रिपोर्टर को आमतौर पर अपनी बीट से जड़ ु ी सामान्य खबरें
ही लिखनी होती हैं।

लेकिन विशेषीकृत रिपोर्टिंग का तात्पर्य यह है कि आप सामान्य खबरों से आगे बढ़कर उस विशेष क्षेत्र या विषय से
जड़
ु ी घटनाओं, मद्
ु दों और समस्याओं का बारीकी से विश्लेषण करें और पाठकों के लिए उसका अर्थ स्पष्ट करने की
कोशिश करें ।

अथवा

विचारपरक लेखन का एक प्रमख ु रूप है - स्तंभ लेखन। कुछ महत्वपर्ण ू लेखक अपने खास वैचारिक रुझान के लिए
जाने जाते हैं । उनकी अपनी एक लेखन-शैली भी विकसित हो जाती है ।ऐसे लेखकों की लोकप्रियता को दे खकर
अखबार उन्हें एक नियमित स्तंभ लिखने का जिम्मा दे दे ते हैं। स्तंभ का विषय चन
ु ने और उसमें अपने विचार
व्यक्त करने की स्तंभ लेखक को परू ी छूट होती है ।

प्रश्न 5 ( शब्द सीमा लगभग 60 शब्द) (2×3=6)

किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर

(क) भाव-सौंदर्य - इस चौपाई में तल
ु सीदास जी ने भरत की मनोदशा का मार्मिक चित्रण किया है जब वह मनि ु
वसिष्ट के अनरु ोध पर अपने मन की बात कहने के लिए श्री राम के सामने खड़े होते हैं तो उनका शरीर पल ु कित हो
जाता है । इससे भरत की भावकु ता का ज्ञान होता है । उनकी आँखों से आँसओ ु ं की धारा बह निकलती है ।उनके मँह

से बोल निकलने बड़े कठिन प्रतीत हो रहे हैं, फिर भी वे बोलते हैं कि मैं इससे अधिक क्या कह सकता हूँ। मनिु
वसिष्ट ने पहले से ही कह दिया है श्री राम के स्नेह और प्रेम के कारण वे भावविभोर हो जाते हैं।

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शिल्प सौंदर्य -

- 'नीरज नयन नेह' और 'मोर मनि
ु नाथ' में अनप्र
ु ास अलंकार है ।

-'नीरज नयन', 'नेह जल' में रूपक अलंकार है ।

-अवधी भाषा का प्रयोग है ।

-चौपाई छं द है । (3 अंक)

(ख) इन पंक्तियों में विद्यापति प्रेम में अतप्ति
ृ के बारे में बताते हैं। सखी द्वारा प्रेम का अनभ ु व पछ ू ने पर नायिका
सखी को बताती है -मैं जन्म-जन्मांतर से अपने प्रियतम का रूप निहारती चली आ रही हूँ परं तु अभी भी मेरे नेत्र
तप्ृ त नहीं हुए हैं । प्रियतम के मधरु बोल मेरे कानों में गँज
ू ते रहते हैं फिर भी ऐसा लगता है कि मैंने उन्हें कभी सन ु ा
ही न हो। रूप और वाणी की चिर नवीनता मझ ु े अत प्
ृ त बनाए रखती है । निष्कर्ष यह है कि सच्चे प्रे म में अतप्ति

बनी रहती है । (3 अंक)

(ग) मलिक मह ु म्मद जायसी की काव्य रचना 'पद्मावत' से बारहमासा के अंश में नायिका पर अगहन मास और
फागन ु मास के प्रभाव का वर्णन है । इन मासों में नागमती की विरह दशा का मार्मिक चित्रण किया गया है । अगहन
में नायिका नागमती विरहाग्नि में जलती है तथा भँवरे और काग के समक्ष अपनी दशा का उल्लेख करती है । पस ू
मास में नायिका शीत के कारण काँपती प्रतीत होती है । शीत उसके शरीर को कँपाता है तो विरह उसके हृदय को।
इसमें चकई और कोकिला से नायिका के विरह की तल ु ना की गई है । नायिका विरह में शंख के समान हो गई है ।
माघ महीने में जाड़े से हुई नागमती की विरह-दशा का मार्मिक वर्णन है । वर्षा का होना तथा पवन का बढ़ना नायिका
के विरह को बढ़ा हता है । फागन ु मास में चलने वाले पवन झकोरे शीत को चौगन ु ा बढ़ा रहे हैं। सभी फाग खेलने में
मस्त हैं पर नायिका विरह-ताप के कारण संतप्त है । (3 अंक)

प्रश्न 6 ( शब्द सीमा लगभग 30-40 शब्द) (1×2 =2)

(क) छात्र-छात्राओं द्वारा किन्हीं दो कविताओं में प्रयक्
ु त विभिन्न अलंकारों का वर्णन किए जाने पर तथा महत्व
दर्शाने पर अंक प्रदान करें । (2 अंक)

(ख) सखु काल में सखु दायी प्रतीत होने वाली वस्तए ु ँ भी वियोगावस्था में दखु का कारण बन जाती हैं। इसका कारण
यह है कि हम उन चीजों को दे खकर उनसे जड़ ु ी सख
ु द स्मति ृ यों में खो जाते हैं। उनसे जड़
ु े व्यक्तियों का स्मरण हो
जाता है । यह बात श्रग
ं ृ ार तथा वात्सल्य दोनों अवस्थाओं में उत्पन्न होती है । माता कौशल्या भी अपने पत्र ु राम से
संबधि
ं त वस्तओ ु ं को दे खकर भाव विह्वल हो जाती हैं। वह राम के शीघ्र लौटने की कामना करने लगती हैं। (2 अंक)

प्रश्न 7 ( शब्द सीमा लगभग 50-60 शब्द) (3×2 =6)

(क) 'जहाँ कोई वापसी नहीं' पाठ यात्रा-वत ृ ांत शैली में रचित है । जहाँ अमझर गाँव के पर्यावरण विनाश का वर्णन
किया गया है ।छात्र-छात्राएँ 'जहाँ कोई वापसी नहीं' शीर्षक के स्थान पर कोई अन्य शीर्षक जैसे 'क्या वे दिन लौट

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आएँगे', 'परु ानी वापसी' इत्यादि का चयन कर सकते हैं। तर्क सहित उपयक्
ु त शीर्षक दे ने पर अंक प्रदान करें । (3
अंक)

(ख) छात्र-छात्राएँ 'शेर', 'पहचान', 'चार हाथ' और 'साझा', असगर वजाहत द्वारा लिखी लघु कथाओं में से जिसे
सर्वाधिक प्रभावी मानते हैं उसके विषय में बताते हुए कारण सहित अपने विचार स्पष्ट करें गे।

शेर लघक
ु था में शेर को सत्ता की व्यवस्था का प्रतीक बताया गया है । यह सत्ता तभी खामोश रहती है जब तक सब
उसकी आज्ञा का पालन करते रहें ।

'पहचान' लघु कथा में राजा को बहरी, गँग
ू ी और अंधी प्रजा पसंद आती है जो बिना कुछ बोले और दे खें आज्ञा का
पालन करती है ।

'चार हाथ' कथा पँज
ू ीवादी व्यवस्था में मज़दरू ों के शोषण को उजागर करती है ।

'साझा' में उद्योगों पर कब्ज़ा जमाने के बाद पँज
ू ीपतियों की नज़र किसानों की ज़मीन और उत्पाद पर होने की दशा
को दर्शाया गया है । (3 अंक)

(ग) छात्र-छात्राएँ 'दस
ू रा दे वदास' कहानी के मख्
ु य पात्र पारो और संभव में से किसी एक पात्र के प्रति अपनी
सहानभु ति
ू दर्शाते हुए उनकी मनःस्थिति का वर्णन करें गे। (3 अंक)

प्रश्न 8 किसी एक प्रश्न का उत्तर लगभग 30-40 शब्दों में लिखिए। (1×2 =2 अंक )

(क) '' व्यापार यहाँ भी था। '' के माध्यम से 'दस
ू रा दे वदास' कहानी में हरिद्वार के परू े क्षेत्र में अनेक लोगों की
व्यापारिक गतिविधियों के विषय में बताया गया है । बाहर तो व्यापार चल ही रहा था, मंसा दे वी के मंदिर के अंदर
भी व्यापारिक गतिविधियाँ चल रही थीं।मनोकामनाओं की पर्ति ू के लिए लाल-पीले धागे बिक रहे थे… (2 अंक)

(ख) औद्योगीकरण ने पर्यावरण को परू ी तरह से प्रभावित किया है । 'जहाँ कोई वापसी नहीं' पाठ में लेखक ने इस
बात को परू ी तरह से स्पष्ट किया है । औद्योगीकरण के लिए लोगों की ज़मीन अधिग्रहित की गई, उन्हें उजाड़ा
गया। वहाँ के परिवेश को नष्ट कर दिया गया जिससे पर्यावरण का संतल ु न बिगड़ गया। नए उद्योगों के स्थापित
होने से तथा उनसे निकलने वाले कचरे व अन्य पदार्थों के कारण पर्यावरण प्रदषि
ू त हो रहा है तथा खतरा उत्पन्न हो
रहा है । (2 अंक)

प्रश्न 9 किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 30-40 शब्दों में लिखिए। (2 × 2 =4अंक)

(क) लेखक बिसनाथ ने माँ और बत्तख को ममता के आधार पर समान दिखाया है । बत्तख अंडा दे ने के समय पानी
को छोड़कर ज़मीन पर आ जाती है । बत्तखें अपने अंडों को सेती हैं। वे अपने पंख फुलाए उन्हें दनि
ु या की नज़रों से
छुपा कर रखती हैं। बत्तख बहुत कोमलता एवं सतर्क ता से कार्य करती है ।
इसी प्रकार माँ भी अपने बच्चे की दे खभाल करती है । माँ भी बत्तख की तरह अपने बच्चों को अपने आँचल की छाया
में छिपाकर रखती हैं। दोनों को अपने बच्चों के साथ लगाव होता है इसीलिए दोनों की तल ु ना लेखक विश्वनाथ ने
की है । (2 अंक)

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(ख) लेखक मालवा का उदाहरण दे ते हुए औद्योगिक विकास को उजाड़ की अपसभ्यता मान रहे हैं। लेखक को
लगता है कि हम एक गलतफ़हमी के शिकार हैं। यह वास्तव में विकास ना होकर हमें उजाड़ की ओर ले जा रही है ।
यह अपसभ्यता है । पाश्चात्य दृष्टिकोण से अपनाई जा रही सभ्यता हमें उजाड़कर मानव जाति और प्रकृति दोनों
का विनाश करने पर तल ु ी है । इस सभ्यता ने पर्यावरण असंतल
ु न पैदा कर दिया है और मौसम चक्र को बिगाड़ दिया
है ।(2 अंक)

(ग) शरद में ही हरसिंगार फूलता है । पितर-पक्ख (पितप ृ क्ष) में मालिन दाई घर के दरवाजे पर हरसिंगार की राशि
रख जाती थीं रख जाती थीं, तो खड़ी बोली हुई। गाँव की बोली में 'कुरइ जात रहीं।' बहुत ढे र सारे फूल मानो इकट्ठे
ही अनायास उनसे गिर पड़ते थे। 'कुरइ दे ना' है तो सकर्मक लेकिन सहजता अकर्मक की है ।

शरद में हारसिंगार का खिलना, गाँव की बोली व अन्य वनस्पतियों का वर्णन लेखक विश्वनाथ द्वारा अपनी
आत्मकथा बिस्कोहर की माटी के माध्यम से किया गया है । इस परू ी कथा के केंद्र में है - बिस्कोहर , जो लेखक का
गाँव है और एक पात्र बिसनाथ जो स्वयं लेखक विश्वनाथ हैं। गर्मी, वर्षा एवं शरद ऋतु में गाँव में होने वाली
परे शानियों का वर्णन भी लेखक ने किया है । परू ी रचना में लेखक ने अपने अनभु व और दे खे गए प्राकृतिक सौंदर्य
को प्रस्तत
ु किया है । (2 अंक)

Document Details

Board / OrgCBSE
ExamClass 12
TypeSolution
Pages6
Languagehindi
Updated30 Apr 2026