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ह"रयाणा (व*यालय ,श.ा बोड2
अंक योजना
क*ा – ,यारहवीं 1वषय : (5ह6द8 आधार )
समयाव>ध : 3 घंटे कुल अंक : 80
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सामा6य HनदI श :-
1) अंक योजना का उ-दे 0य म3
ू यांकन को अ4धका4धक व7त:ु न;ठ बनाना है ।
2) वणCनाDमक E0नF के अंक योजना मG Hदये गये उJर Lबंद ु अं:तम नहMं है बि3क
सझ
ु ावाDमक एवम ् सांके:तक हS।
ु ं से [भ]न ^कंतु उपय_
3) यHद परMVाथX इन सांके:तक Lबंदओ ु त उJर दG तो उ]हG अंक Hदए
जाएँ।
4) म3
ू यांकन कायC :नजी cयाdयानस
ु ार नहMं बि3क अंक योजना मG Hदए गए :नदe शानस
ु ार हM
^कया जाए।
"#न "#न उ.र संकेत/ म6
ू य 7बंद ु अंक
सं'या उप <वभाज
भाग न
खंड – अ ( बहु<वक6पीय "#न)
1 (i) स- सहनशीलता और सेवा 1
(ii) ग- 5वाथ7पण
ू 7 1
(iii) घ- प=
ृ वी का तापमान बढ़ रहा है 1
(iv) ख - वD
ृ ारोपण और जल संरDण करना चाIहए 1
(v) घ- आने वालL पीIढ़यN के Oलए जीवन कIठन हो जाएगा 1
2 (i) ख - RकृSत कT चप
ु बातV भी अथ7पण
ू 7 होती हY 1
(ii) ग- मानवीकरण 1
(iii) ख - मौन कT गहराई मV उतरना 1
(iv) ग- ठहराव और आ]म^चंतन 1
(v) ग- RकृSत के भीतर Sछपी कहाSनयाँ हY 1
3 (i) ग – कुcहार (ईdवर) 1
(ii) क – सार त]व eहण करना 1
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(iii) ग – भौSतक सख
ु N को 1
(iv) घ - आIदवाOसयN का 1
(v) ग – 1(iii) , 2(i) , 3(ii) 1
4 (i) ख – अलोपीदLन 1
(ii) घ –iयश
ू न न लेने पर अjयापकkवारा कम अंक दे ने के कारण 1
(iii) ग – सं5मरण 1
(iv) ख – कुशाe बk
ु ^ध 1
(v) ख - 1(ii) , 2(iii) , 3(i) 1
5 (i) क - समह
ू संचार 1
(ii) ग – संपादन के Oसkधांत 1
(iii) ख – डायरL Sनतांत वैयिpतक रचना है 1
(iv) क – qलैशबैक 1
(v) ग – मज़ेदार और मनोरं जक समाचारN को 1
6 (i) क- त]पt
ु ष 1
(ii) ग - 1(iii) , 2(i) , 3(iv) , 4 (ii) 1
(iii) क – वह दस आम लेकर आया 1
(iv) क – शvद wम संबंधी 1
(v) लंबा उदर है िजसका (गणेश जी) 1
खंड ख ( वणGनाHमक "#न)
7 !संग व संदभ) – कबीर के पद 1
*या-या – ईdवर के एक 5वyप का वण7न 3
का*य – सौ1दय) – अनR
ु ास व यमक अलंकार, सधp
ु कड़ी / पंचमेलL |खचड़ी 1
, Sनगण
ु7 ईdवर/एक ईdवर के अि5त]व मV }वdवास, संगीता]मकता,संबोधन
शैलL आIद
(i) क}वता का नाम 'चंपा काले काले अ•छर नहLं ची€हती' क}व का नाम- 1
•‚लोचन
(ii) यह काƒयांश लोक भावना से संबं^धत है । चंपा अनपढ़ बाOलका है और वह 1
क}व को पढ़ते-Oलखते दे खकर है रान होती है ।
चंपा स€
ु दर नामक गवाले कT अनपढ़ बेटL है । वह पशु चराने का काम
(iii) 1
करती है ।
(iv) चंपा क}व के पास उस समय आकर खड़ी हो जाती है जब क}व कुछ पढ़ने 1
लगता है । 1
(v) चंपा को काले-काले अDर दे खकर अचरज होता है pयN†क उसे अDरN कT
पहचान नहLं है । उसकT ‡िˆट मV तो वे लकTरV हL हY।
8 (क) • परू े संसार मV एक हL पवन का बहना। 3
• परू े संसार मV एक हL Rकार का जल का बहना।
• एक हL OमiटL का होना। पर उससे Oभ€न-Oभ€न बत7नN का Sनमा7ण।
• संवेदनहLन शासन ƒयव5था पर कटाD।
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• सामIू हक आवाज़ मV शासन को को बदलने कT ताकत ।
•अपने राजनैSतक लोगN का भी, }वदे शी शासकN जैसा ƒयवहार।
(ख) 2
9 !संग व संदभ) - 1
*या-या - }ववेकानस
ु ार 3
5वशेष - }ववेचनातमक शैलL, वाpय }व€यास सटLक, भाषा सहज । 1
शेखर जोशी व गलता लोहा
(i) मोहन एक Iदन बड़ा आदमी बनकर, 5कूल और उनका नाम ऊँचा करे गा 1
(ii) बड़ा आदमी बनाने का 5व•न दे खने लगे। 1
मोहन एक Iदन बड़ा आदमी बने और अपने वंश कT गरLबी को दरू करे ।
(iii) गाँव मV आगे कT पढ़ाई के Oलए 5कूल न होना। 1
(iv) 1
(v) 1
10 (क) Sनध7न एवं अभावe5त 3
‡ढ़ Sनdचयी और कम7ठ
क•7ƒयSनˆठ
पारखी
(ख) उ•र- RकृSत Rेम के साथ-साथ सं5कृSत-Rेम कT भी Rेरणा,
क}वता का Rमख
ु ल•य झारखंड के संथालL रं ग और जीवन-शैलL को 2
बचाना, आज के बढ़ते भौSतकतावादL व उपयो^गतावादL यग
ु मV आँचOलक
सं5कृSत और RकृSत को गहरा धpका, कवSय‚ी इस क}वता के माjयम से
वहाँ कT सं5कृSत को शहरL अपसं5कृSत से बचाकर झारखंड कT माटL के रं ग
मV रं गना चाहती है ।
11 5
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• प“रचय
• अनभ
ु व
• शैD|णक यो”यता
• उपलिvध
• t^च
12 (क) सच
ू ना Rदान करना 3
Oश•Dत/ जागyक करना
मनोरं जन करना
Sनगरानी करना
एजVडा तय करना
}वचार }वमश7 के मंच
(ख) ‡dय योजना मV अंतर 2
नाटक सजीव कला का माjयम जब†क पटकथा “रकॉ—ड7ड
नाटक – सीOमत अव^ध, पटकथा – कोई Sनिdचत अव^ध नहLं
नाटक – ‡dयN व पा‚N कT सं˜या सीOमत, पटकथा – Sनिdचत नहLं
13 (क) • पण
ू त
7 ः असहमत 3
• कtणा का भाव गीत कT आवdयकता के अनस
ु ार
• जीवन से जड़
ु ाव
• कtण रस के गानN के 5वर मV भी कोमलता
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(ख) • जल को RकृSत कT अनमोल धरोहर बताया है 2
• मtभOू म मV कंु ई और कुओं के मह›व को दशा7या गया है ।
• भावी पीढ़L Oलए पानी के बचाव RSत सजगता।
(ग) • बड़े लड़के कT दो महLने से कोई सच
ू ना न होना। 2
• बेटे को ले जाने वाले लोगN से संतोषजनक उ•र न Oमलना।
14 (क) यमक – समान शvद ले†कन अथ7 अलग 3
जैसे – कालL घटा का घमंड घटा
(बादलN कT घटा) (कम होना)
dलेष – शvद एक ले†कन अथ7 दो या दो से œयादा
मंगन को दे ख पट दे त बार – बार है
पट – व5‚ और दरवाज़ा
(ख) भो+ अन, नौ + इक 1+1=2
15 (क) 'गीता' मV यह बताया गया है †क कम7 करो फल कT ^चंता मत करो। हमारे 2
हाथ मV केवल कम7 करना है । उस कम7 का फल Rा•त करना हमारे हाथ मV
नहLं है । अतः 'गीता' कहती है †क कत7ƒय को हL अपना अ^धकार समझकर
उसमV हL अपनी ऊजा7 और Dमता को }वdवासपव
ू क
7 लगा दो। फल कT इ•छा
अथा7त ् भ}वˆय कT ^च€ता मत करो।
एक यव
ु क से आधी रात के समय सो रहा था। अचानक वह उठा और
(ख) 'बचाओ-बचाओ' ^च¡लाते हुए भागा। इससे पहले †क प“रवार के लोग उसे 2
पकड़ पाते. वह भागते-भागते दरू जाकर ^गर पड़ा और बरु L तरह घायल हो
गया। पछ
ू ने पर उसने बताया †क सोने से पहले वह ऐसा हL उप€यास पढ़
रहा था। उस उप€यास कT घटना ने उसके मि5तˆक पर ऐसा Rभाव डाला
िजसका प“रणाम यह Sनकला।
• RSतकूल प“रि5थSतयN मV धैय7 धारण करना
• परLDा प“रणाम मV तSनक सी RSतकूलता मV Sनराशा व अवसाद कT
(ग) बजाय धैय7 धारण करना
2
• भारतीय रDा अनस
ु ंधान संगठन मV वै¤ाSनक
• सन ् 1992 से 1999 तक रDामं‚ी के }व¤ान सलाहकार तथा सरु Dा
(घ) शोध और }वकास }वभाग के स^चव 2
• भारत सरकार के Rमख
ु वै¤ाSनक सलाहकार थे।
• भारत के राˆ¥पSत - जल
ु ाई 2002 से जल
ु ाई 2007 तक