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वािषक पाठ्य म: 2024-25
क ा–7
िवषय – िहंदी
. (वसतं भाग 2) िवधा/िवषय-व तु याकरण और रचना मक लेखन अिधगम उ े य अिधगम सं ाि सदं भ/सझ
ु ावा मक
स.ं पाठ सं या और नाम ि याकलाप
1 पाठ. 1 किवता/ वतं ता पवू वत क ाओ ं से िलए गए किवता िवधा से प रिचत ह गे, अपने प रवेश म मौजदू लोककथाओ ं और कायप क स.ं 7-
िवषय व तु लोकगीत के बारे म बताते/सनु ाते ह। 8
भावानकु ू ल स वर वाचन क
हम पं ी उ मु गगन पि य के मा यम से क ा 5
कोिशश करगे, पढ़कर अप रिचत प रि थितय और घटनाओ ं पश/ु पि य को
के मनु य क पराधीनता िवशेषण: पहचान का. स.ं 39A
ाकृ ितक प रवेश, पश-ु पि य के क क पना करते ह और उन पर अपने मन म िपंजरे म रखने के
(िशवमंगल िसहं समु न) क पीड़ा को समझाने क ा 6
ित िज ासु ह गे, बनने वाली छिवय और िवचार के बारे म औिच य पर वाद-
का यास िवशेषण: योग का. स.ं 9
मौिखक/सांकेितक भाषा म बताते ह। िववाद ।
िचिड़या के खान-पान, रहन-सहन
क ा7 प रवेश आिद के बारे म जान सकगे, ब चे िविभ न िवषय पर आधा रत िविवध वत ता के
िवशेषण: भेद का. स.ं 13 पाठा तगत कार क रचनाओ ं को पढ़कर चचा करते ह, मह व पर
िविभ न िचिड़या के नाम और व प
याकरिणक िबदं -ु जैस-े पाठ्यपु तक म िकसी प ी के बारे म अनु छे द लेखन ।
को गौर करगे,
ं समास पढ़कर पि य पर िलखी गई सािलम अली क
पश-ु प ी के ित संवेदनशील ह गे, िकताब पढ़कर चचा करते ह।
पश/ु प ी/पयावरण पर आधा रत पि य के मा यम से मनु य क पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के िलए वयं
पिठत/अपिठत ग ांश / प ांश का पराधीनता क पीड़ा को समझने का बनाते ह और पछू ते ह । अपने अनभु व को
अ यास य न करगे, अपनी भाषा शैली म िलखते ह ।
परतं भारत के िनवािसय क पीड़ा भाषा क बारीिकय / यव था का िलिखत योग
और ि िटश गल ु ामी से वतं ता क करते ह, जैसे किवता के श द को बदलकर अथ
उ कट अिभलाषा को जान सकगे, और लय को समझना। अपने अनभु व को अपनी
क पनाशीलता का िवकास होगा, भाषा शैली म िलखते ह। लेखन के िविवध
पाठा तगत यु नए श द एवं तरीक और शैिलय का योग करते ह, जैसे
याकरिणक िब दओ ु ं से प रिचत िविभ न तरीक से (कहानी, किवता, िनबंध
होते हए उनका भािषक योग कर आिद) कोई अनभु व िलखना ।
सकगे
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2 पाठ. 4 किवता/ वतं ता पूववत क ाओ ं से िलए गए किवता िवधा से प रिचत ह गे, अपने प रवेश म मौजदू लोककथाओ ं और कायप क स.ं
िवषय व तु लोकगीत के बारे म बताते/सनु ाते ह । 14-15
भावानकु ू ल स वर वाचन क
कठपतु ली कठपतु िलय के क ा5
कोिशश करगे, पढ़कर अप रिचत प रि थितय और घटनाओ ं परु ाने कपड़े /
(भवानी साद िम ) मा यम से वतं ता सवनाम: पहचान का. स.ं 10
गल
ु ामी/ परतं ता क पीड़ा को समझ क क पना करते ह और उन पर अपने मन म अखबार/ बेकार
क इ छा को दशाने क ा6
सकगे, बनने वाली छिवय और िवचार के बारे म व तओु ं से गिु ड़या
वाली किवता सवनाम: योग का. स.ं 7
मौिखक/सांकेितक भाषा म बताते ह । बनाना ।
क ा7 वतं ता/ आज़ादी के मह व को
समझ पाएँग,े िविभ न सवं ेदनशील मु /िवषय , जैसे- जाित, यावसाियक
सवनाम के भेद
धम, रंग, जडर, रीित- रवाज़ के बारे म अपने िश ण से जोड़ते
ये, मेरे, इ ह,मझु ,े हम आिद का े ीय और पारंप रक खेल ,
िम , अ यापक या प रवार से करते ह हए कठपतु ली
सवनाम के भेद के अनसु ार मनोरंजन के साधन और
जैसे अपने मोह ले के लोग से योहार मनाने बनाना व लोक
वग करण का. स.ं 25, 27 गितिविधय के ित िज ासु ह गे,
के तरीके और एकता/सामिू हकता पर बातचीत कलाओ ं का
पाठा तागत याकरिणक िबंद-ु पाठा तगत यु याकरिणक करना । प रचय ।
दो श द के जुड़ने से उनके मल ू िब दओ
ु ं के अवगत होते हए उनका
पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के िलए वयं
प म प रवतन जैस-े काठ और भािषक योग करने म समथ ह गे,
बनाते ह और पछू ते ह ।
पतु ली िमलकर कठपतु ली बनते ह।
इसी कार दो श द को िमलाकर अपने अनभु व को अपनी भाषा शैली म
नए श द का िनमाण िलखते ह अ यास हल करने म स म ह गे
भाषा म चिलत श द यु म म
प रवतन करना जैसे आगे-पीछे का
पीछे -आगे आिद ।
3 पाठ. 5 कहानी/ एक पाठा तागत याकरिणक िबंद-ु कहानी िवधा से प रिचत ह गे, िहदं ी भाषा म िविभ न कार क साम ी कायप क स.ं 14-
िमठाईवाला फे रीवाले क दो श द के जुड़ने से उनके मल (समाचार, प -पि का, कहानी, जानकारीपरक 15
ू भावानक ु ू ल आदश वाचन क
(भगवती साद प म प रवतन जैस-े िमठाई और साम ी, इटं रनेट, लॉग पर छपने वाली साम ी
कोिशश करगे, फे रीवाल के ित
वाजपेयी) वाला िमलकर िमठाईवाला आिद) को समझकर पढ़ते ह और उसम अपनी
फे रीवाले क िदनचया, उनक िज ासु होते हए
बनते ह । इसी कार दो श द को पसंद-नापसंद, िट पणी, राय, िन कष आिद को उनके बारे म जानने
सम याएँ आिद को समझ सकगे,
िमलाकर नए श द का िनमाण मौिखक/सांकेितक भाषा म अिभ य करते ह। क कोिशश
फे रीवाले के मह व को समझ पाएँग,े पढ़ी गई साम ी पर िचंतन करते हए समझ के िलए
भाषा म चिलत श द यु म म यार बाँटने से
प रवतन करना जैसे आगे-पीछे का पाठा तगत यु याकरिणक पछू ते ह।
बढ़ता है इस िवषय
पीछे -आगे आिद । िब दओ ु ं के अवगत होते हए उनका पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के िलए वयं पर तक कर सकते
भािषक योग करने म समथ ह गे, बनाते ह और पछू ते ह । अपने अनभु व को
िलंग, वचन- पहचान और योग ह।
अपनी भाषा शैली म िलखते ह ।
‘मानवीयता का
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गणु ’ िवषय पर
चचा व अनु छे द
लेखन ।
4 पाठ. 7 नाटक/ बाल- पूववत क ाओ ं से िलए गए ‘नाटक’ श द से प रिचत होते हए िहदं ी भाषा म िविभ न कार क साम ी कायप क स.ं 16-
पापा खो गए मनोिव ान िवषय व तु इस िवधा से प रिचत ह गे, (समाचार, प -पि का, कहानी, जानकारीपरक 21
(िवजय तदल
ु कर) क ा5 साम ी, इटं रनेट, लॉग पर छपने वाली साम ी
एकांक / लघनु ािटका श द से संवाद लेखन : दो
िनज व व तुओ ं और िवराम िच :पहचान का. स.ं 112 आिद) को समझकर पढ़ते ह और उसम अपनी
प रिचत ह गे, या दो से अिधक
सजीव जीव के A, पसंद-नापसंद, िट पणी, राय, िन कष आिद को
भावानक ु ू ल एवं आदश वाचन म िनज व व तुओ ं के
च र के मा यम से िवलोम श द:पहचान का. स.ं मौिखक/सांकेितक भाषा म अिभ य करते ह।
स म ह गे, बीच क पना पर
बाल-मनोिव ान को 135A
पढ़ी गई साम ी पर िचंतन करते हए समझ के िलए आधा रत संवाद
दशाता मनोरंजक क ा6 नाटक के िविभ न त व यथा पा ,
पछू ते ह। लेखन
नाटक िवलोम श द : योग संवाद, घटना म आिद से प रिचत
क ा7 ह गे,
पाठा तागत याकरिणक िबंद-ु संवाद के मा यम से वाचन कौशल
िवराम िच का वा य म योग को समृ कर सकगे,
िवलोम श द का वा य म योग अपनी क पनाशि का िव तार कर
सकगे,
िव ािथय क िच, अवसर,
पाठा तगत यु याकरिणक
आव यकता एवं अिधगम के
िब दओ ु ं के अवगत होते हए उनका
आधार पर औपचा रक/ भािषक योग करने म समथ ह गे
अनौपचा रक प लेखन का
अ यास
िव ािथय क िच, अवसर,
आव यकता एवं अिधगम के
आधार पर अनु छे द/ िनबंध/ िच
वणन का अ यास
उपयु पाठ्य म 13 िसत बर 2024 तक पूरा कर िलया जाए ।
म याविध परी ा हेतु पुनराविृ त करवाई जाए।
यात य है िक परू क पाठ्य-पु तक “बाल महाभारत” क ा-7 अिधगम सवं िृ (Learning Enrichment) के उ े य मा से ह ।
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म याविध परी ा
पाठ सं या और िवधा/ िवषय-व तु याकरण और रचना मक लेखन अिधगम उ े य अिधगम सं ाि सदं भ/सझ ु ावा मक
नाम ि याकलाप
5 पाठ.10 सं मरण (जापानी)/ पूववत क ाओ ं से िलए गए सं मरण’ श द से प रिचत होते हए िविभ न पठन सामि य म यु श द , अनभु व को
सवं ेदना िवषय व तु इस िवधा के बारे म जान सकगे, महु ावर , लोकोि य को समझते हए उनक सराहना साझा करवाना ।
अपूव अनभ ु व क ा5 करते ह।
भावानक ु ू ल एवं आदश वाचन म
(ते सक
ु ो कु रयानागी) िद यांग ब चे के पेड़ नए श द जोड़कर श द िनमाण स म ह गे, िविभ न पठन सामि य को पढ़ते हए उनके िश प
पर चढ़ने के सपन को क ा 6
िद यांगजन के ित संवेदनशील क सराहना करते ह और अपने तरानक ु ू ल मौिखक,
परू ा करने क उपसग और यय :पहचान
ह गे, िलिखत, ेल/ सांकेितक प म उसके बारे म अपने
सं मरणा मक कहानी क ा 7
िवचार य करते ह।
उपसग और यय ारा नए श द का िद यांगजन के आ मिव ास और
िनमाण, पाठा तागत याकरिणक आ मिनभरता क भावना का स मान िकसी पाठ्यव तु को पढ़ने के दौरान
िबदं -ु कर सकगे, समझने के िलए ज़ रत पड़ने पर अपने िकसी
सहपाठी या िश क क मदद लेकर उपयु सदं भ
सं यावाची श द जैस-े ि शाखा , िद यांग िम के साथ िबना िकसी
साम ी, जैस-े श दकोश, िव कोश,
ि कोण आिद क जानकारी भेदभाव के समान प से यवहार
मानिच ,इटं रनेट या अ य पु तक क मदद लेते ह।
करग,
आना यय से श द िनमाण भाषा क बारीिकय / यव था का िलिखत योग करते
अ य देश और भाषाओ ं के सािह य ह, जैसक े िवता के श द को बदलकर अथ और लय
िद यांग जन के ित हमारा से प रिचत ह गे, को समझना।
नज रया िवषय पर अनु छे द/िनबंध पाठा तगत यु याकरिणक
लेखन/ िच वणन का अ यास िब दओ ु ं के अवगत होते हए उनका
भािषक योग करने म समथ ह गे,
6 पाठ.11 दोहे/भाषा और पूववत क ाओ ं से िलए गए दोहा िवधा से प रिचत ह गे, अपने प रवेश म मौजदू लोककथाओ ं और कायप क स.ं
सं कृित िवषय व तु लोकगीत के बारे म बताते/सनु ाते ह । 30,32
भावानक ु ू ल स वर वाचन क
रहीम के दोहे क ा6 िव ालय और घर
कोिशश करगे, पढ़कर अप रिचत प रि थितय और घटनाओ ं
(रहीम) जीवन जीने क कला त सम और त व श द क : के िम के बारे म
पाठ म िदए गए रहीम के दोह का क क पना करते ह और उन पर अपने मन म
को समझाते हए रहीम पहचान जानकारी एक
अथ समझ सकगे, बनने वाली छिवय और िवचार के बारे म
के िस दोह का क ा7 करते हए एक
मौिखक/सांकेितक भाषा म बताते ह ।
संकलन त सम और त व श द क : येक दोहे म सि निहत भाव एवं
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पहचान और उनका वा य योग सीख से प रिचत ह गे, िविभ न सवं ेदनशील मु /िवषय , जैसे- जाित, सदंु र ै प-बक
ु
पाठा तागत याकरिणक िबदं -ु स ची िम ता क कसौटी को जान धम, रंग, जडर, रीित- रवाज़ के बारे म अपने का िनमाण
जभाषा या आँचिलक भाषा के सकगे, िम , अ यापक या प रवार से करते ह सह-अि त व के
श द के चिलत िहदं ी प वा तिवक लगाव को समझ पाएँग,े जैसे अपने मोह ले के लोग से योहार मनाने मू य पर
वण क आवृि वाले वा य के तरीके और एकता/सामिू हकता पर बातचीत आधा रत
परोपकार क भावना को सोदाहरण
करना । पिठत/अपिठत
रहीम के दोह का स वर पाठ समझ पाएँग,े
पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के िलए वयं प ांश का
कराया जाए । सहनशि और उदारता क भावना
बनाते ह और पछू ते ह । अ यास
जीवन मू य पर आधा रत को सोदाहरण समझ पाएगं ,े
अपने अनभु व को अपनी भाषा शैली म आपसी स ाव
पिठत/अपिठत ग ाश ं / प ाशं पाठा तगत यु याकरिणक
िलखते ह अ यास हल करने म स म ह गे एवं भाईचारा क
का अ यास िब दओ
ु ं के अवगत होते हए उनका वृि का िवकास
भािषक योग करने म समथ ह गे, आपसी स ाव
एवं भाईचारा से
संबंिधत िवषय पर
प , िनबंध या
अनु छे द लेखन।
रहीम के दोह का
े प बुक म
संकलन ।
7 पाठ.13 किवता / सबका म से िनकलकर हम क भावना किवता िवधा से प रिचत ह गे, अपने प रवेश म मौजदू लोककथाओ ं और किवता म या
एक ितनका - अि त व होता है व का िवकास लोकगीत के बारे म बताते/सनु ाते ह। िश ा िमलती है
भावानक
ु ू ल स वर वाचन क
अयो या िसहं कोई व तु छोटी व चचा क िजये
सह-अि त व के मू य पर कोिशश करगे, पढ़कर अप रिचत प रि थितय और घटनाओ ं क
उपा याय हीन नह है । और ऐसा स देश
आधा रत पिठत/अपिठत ग ांश / सह अि त व क भावना से प रिचत क पना करते ह और उन पर अपने मन म बनने
‘ह रऔध’ देने वाले दोहे
प ांश का अ यास ह गे वाली छिवय और िवचार के बारे म
मौिखक/सांकेितक भाषा म बताते ह। एक क रए
छोटे से ितनके के मह व को भी “म” के घमंड क पहचान करते हए
समझना हम क भावना को समझ सकगे, पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के िलए
वयं बनाते ह और पछू ते ह । अपने अनभु व को
आपसी स ाव एवं भाईचारा क
अपनी भाषा शैली म िलखते ह ।
वृित का िवकास
भाषा क बारीिकय / यव था का िलिखत
योग करते ह, जैसे किवता के श द को बदलकर
अथ और लय को समझना
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8 पाठ.14 िनबधं / खानपान एवं पूववत क ाओ ं से िलए गए ● िनबंध’ श द से प रिचत होते हए पढ़ी गई साम ी पर बेहतर समझ के िलए वयं खानपान पर
खानपान क रहन-सहन म हो रहे िवषय व तु इस िवधा के बारे म जान सकगे, बनाते ह और पछू ते ह । अपने अनभु व को अनु छे द/िनबधं
बदलती त वीर प रवतन क ा5 ● भावानक अपनी भाषा शैली म िलखते ह । लेखन/ िच वणन
ु ू ल एवं आदश वाचन म
याग शु ल खानपान क बदलती पूववत क ाओ ं से िलए गए का अ यास।
स म ह गे, भाषा क बारीिकय / यव था का िलिखत योग
सं कृित पर िवमश िवषय व तु
● इस यवहार िवषयक पाठ के करते ह, जैसे किवता के श द को बदलकर अथ कै न ेक
क ा6
मा यम से खानपान एवं रहन-सहन म और लय को समझना। िवषय पर चचा
देशज अथवा आचं िलक श द से
हो रहे िनत नए प रवतन के बारे म अिभ यि क िविवध शैिलय / प को ‘जैसा अ न वैसा
प रचय
जान सकगे, पहचानते ह, वयं िलखते ह, जैस-े मन’ िवषय पर
क ा7
● खानपान क उपयोिगता और हमारे किवता,कहानी, िनबधं आिद। अनु छे द लेखन ।
त सम और त व श द क :
पहचान और उनका वा य योग जीवन के िलए उसके मह व को जान खानपान का संसकृ ित के चार- सार व सौहाद
पाठा तागत याकरिणक िबंद-ु सकगे, बढ़ाने म योगदान ।
आँचिलक भाषा के श द के ● खानपान क े ीय सं कृ ित आज
चिलत िहदं ी प वैि क हो गई है, इस िवषय के बारे
म जानगे,
वण क आवृि वाले वा य
का योग ● भोजन क कमी से होनेवाली
परे शािनय एवं उसके भाव से
पाठा तागत याकरिणक िबंद-ु अवगत ह गे,
दो श द के जुड़ने से उनके मल
ू
प म प रवतन जैस-े खान और ● समय के साथ-साथ खानपान मे
पान िमलकर खानपान बनते ह । आने वाली प रवतन के बारे म जान
सकगे,
इसी कार दो श द को िमलाकर
नए श द का िनमाण पाठा तगत यु याकरिणक
िब दओु ं के अवगत होते हए उनका
भाषा म चिलत श द यु म म
भािषक योग करने म समथ ह गे,
प रवतन करना जैसे आगे-पीछे का
पीछे -आगे आिद ।
9 पाठ.15 रेखािच /सवं ेदना एक श द से अ य श द का ‘रे खािच ’ श द से प रिचत होते िविभ न कार क साम ी, जैसे कहानी, समहू चचा:
िनमाण जैस-े ‘ प’ श द से हए इस िवधा के बारे म जान सकगे, किवता, लेख, रपोताज, सं मरण, िनबंध, यं य पश/ु पि य को
नीलकंठ नीलकंठ और राधा कु प , व प, बह प आिद श द आिद को पढ़ते हए अथवा पाठ्यव तु क बारीक से घर म पालना सही
स वर आदश वाचन म स म ह गे,
(महादेवी वमा) नामक मोर और मोरनी । जाँच करते हए उसका अनमु ान लगाते ह, िव े षण या गलत?
का रेखािच िजसम ाकृ ितक प रवेश, पश-ु पि य के महादेवी वमा के
पाठ म दी गई सिं ध का अ यास करते ह, िवशेष िबदं ु को खोजते ह।
दोन के जीवन के ित िज ासु ह गे, अ य सं मरण
महु ावर के अथ , उनका वा य िविभ न पठन सामि य म यु श द ,
बहआयामी रंग को िचिड़य के खान-पान, रहन-सहन पढ़ने हेतु िदए जा
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दशाया गया है । योग प रवेश आिद के बारे म जान सकगे, महु ावर , लोकोि य को समझते हए उनक सराहना सकते ह ।
पि य के भाव ससं ार िव ािथय क िच, अवसर, िविभ न िचिड़य के नाम और व प करते ह।
ेम व अ य चे ाओ ं से आव यकता एवं अिधगम के को गौर करगे, िविभ न पठन सामि य को पढ़ते हए उनके िश प
प रचय, पि य व क सराहना करते ह और अपने तरानक ु ू ल मौिखक,
आधार पर औपचा रक/ पश-ु पि य के ित सवं ेदनशील
पशुओ ं से संवेदना िलिखत, ेल/ सांकेितक प म उसके बारे म अपने
अनौपचा रक प लेखन का ह गे,
िवचार य करते ह।
अ यास रा ीय प ी मोर के बारे म अिधक
िज ासु होकर उनसे स बिं धत िकसी पाठ्यव तु को पढ़ने के दौरान
िव ािथय क िच, अवसर, समझने के िलए ज़ रत पड़ने पर अपने िकसी
जानका रयाँ एकि त कर सकते ह,
आव यकता एवं अिधगम के सहपाठी या िश क क मदद लेकर उपयु सदं भ
आधार पर अनु छे द/ िनबंध/ िच मनु य और पि य के बीच के
साम ी, जैस-े श दकोश, िव कोश,
वणन का अ यास अंतरस ब ध को जान सकगे,
मानिच ,इटं रनेट या अ य पु तक क मदद लेते ह।
क पनाशीलता िवकिसत होगी, भाषा क बारीिकय / यव था का िलिखत योग
पाठा तगत यु याकरिणक िब दओ ु ं करते ह, जैसके िवता के श द को बदलकर अथ
से अवगत होते हए उनका भािषक और लय को समझना ।
योग करने म समथ ह गे
उपयु पाठ्य म 31 जनवरी 2025 तक पूरा कर िलया जाए।
वािषक परी ा म सम त पाठ्य म से पूछे जाएगं े ।
वािषक परी ा हेतु सम त पाठ्य म क पुनरावृित करवाई जाए।
यात य है िक पूरक पाठ्य-पु तक “बाल महाभारत” क ा-7 अिधगम सवं ृि (Learning Enrichment) के उ े य मा से है।
वािषक परी ा
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