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अ यतं गोपनीय - के वल आतं रक एव ं सी मत योग हेत ु
सीिनयर ूल सिटिफके ट परी ा - 2020
अंक-योजना HISTORY
SUBJECT CODE : 027 PAPER CODE : 61/5/1
सामा िनदश :-
1. आप जानते ह क परी ा थय के सही और उिचत आकलन के िलए उ र पुि तका का मू यांकन एक मह वपूण
या है। मू यांकन म एक छोटी-सी भूल भी गंभीर सम या को ज म दे सकती है जो परी ा थय के भिव य,
िश ा णाली और अ यापन- व था को भी भािवत कर सकती है। इससे बचने के िलए अनुरोध कया जाता है
क मू यांकन ारं भ करने से पूव ही आप मू यांकन िनदश को पढ़ और समझ ल। मू यांकन हम सबके िलए 10-12
दन का िमशन है अतः यह आव यक है क आप इसम अपना मह वपूण योगदान द।
2. मू यांकन अंक-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही कया जाना चािहए, अपनी ि गत ा या या कसी
अ य धारणा के अनुसार नह । यह अिनवाय है क अंक-योजना का अनुपालन पूरी तरह और िन ापूवक कया जाए।
हालाँ क, मू याक
ं न करते समय नवीनतम सच
ू ना और ान पर आधा रत अथवा नवाचार पर आधा रत उ र को
उनक स यता और उपयु ता को परखते ए परूे अक ं दए जाएँ।
3. मु य परी क येक मू यांकन कता के ारा पहले दन जाँची गई पाँच उ र पुि तका के मू यांकन क जाँच
यानपूवक कर और आ त ह क मू यांकन-योजना म दए गए िनदश के अनुसार ही मू यांकन कया जा रहा है।
परी क को बाक उ र पुि तकाएँ तभी दी जाएँ जब वह आ त हो क उनके अंकन म कोई िभ ता नह है।
4. परी क सही उ र पर सही का िनशान (√) लगाएँ और गलत उ र पर गलत का (×)। मू यांकन-कता ारा ऐसा
िच न न लगाने से ऐसा समझ म आता है क उ र सही है परं तु उस पर अंक नह दए गए। परी क ारा यह भूल
सवािधक क जाती ह।ै
5. य द कसी का उपभाग ह तो कृ पया के उपभाग के उ र पर दाय ओर अंक दए जाएँ। बाद म इन
उपभाग के अंक का योग बाय ओर के हािशये म िलखकर उसे गोलाकृ त कर दया जाए। इसका अनुपालन
दृढ़तापूवक कया जाए।
6. य द कसी के कोई उपभाग न हो तो बाय ओर के हािशये म अंक दए जाएँ और उ ह गोलाकृ त कया जाए।
इसके अनुपालन म भी दृढ़ता बरती जाए।
7. य द परी ाथ ने कसी का उ र दो थान पर िलख दया है और कसी को काटा नह है तो िजस उ र पर
अिधक अंक ा हो रहे ह , उस पर अंक द और दूसरे को काट द। य द परी ाथ ने अित र / का उ र दे
दया है तो िजन उ र पर अिधक अंक ा हो रहे ह उ ह ही वीकार कर/ उ ह पर अंक द।
8. एक ही कार क अशुि बार-बार हो तो उसे अनदख
े ा कर और उस पर अंक न काटे जाएँ।
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9. यहाँ यह यान रखना होगा क मू यांकन म संपूण अंक पैमाने 0 – 80 का योग अभी है अथात परी ाथ ने
य द सभी अपेि त उ र- बदु का उ लेख कया है तो उसे पूरे अंक दने े म संकोच न कर।
10. येक परी क को पूण काय-अविध म अथात 8 घंटे ित दन अिनवाय प से मू यांकन काय करना है और
ित दन मु य िवषय क बीस उ र-पुि तकाएँ तथा अ य िवषय क 25 उ र पुि तकाएँ जाँचनी ह। (िव तृत
िववरण ‘ पॉट गाइडलाइन’ म दया गया है)
11. यह सुिनि त कर क आप िन िलिखत कार क ु टयाँ न कर जो िपछले वष म क जाती रही ह –
उ र पुि तका म कसी उ र या उ र के अंश को जाँचे िबना छोड़ देना।
उ र के िलए िनधा रत अंक से अिधक अंक देना।
उ र या दए गए अंक का योग ठीक न होना।
उ र पुि तका के अंदर दए गए अंक का आवरण पृ पर सही अंतरण न होना।
आवरण पृ पर ानुसार योग करने म अशुि ।
योग करने म अंक और श द म अंतर होना।
उ र पुि तका से ऑनलाइन अंकसूची म सही अंतरण न होना।
कु ल अंक के योग म अशुि
उ र पर सही का िच न ( √ ) लगाना कतु अंक न देना। सुिनि त कर क ( √) या (×) का उपयु
िनशान ठीक ढंग से और प प से लगा हो। यह मा एक रे खा के प म न हो)
उ र का एक भाग सही और दूसरा गलत हो कतु अंक न दए गए ह ।
12. उ र पुि तका का मू यांकन करते ए य द कोई उ र पूण प से गलत हो तो उस पर (x) िनशान लगाएँ
और शू य (0) अंक द।
13. उ र पुि तका म कसी का िबना जाँचे ए छू ट जाना या योग म कसी भूल का पता लगना, मू यांकन काय
म लगे सभी लोग क छिव को और बोड क ित ा को धूिमल करता ह।ै
14. सभी परी क वा तिवक मू यांकन काय से पहले ‘ पॉट इवै यूएशन’ के िनदश से सुप रिचत हो जाएँ।
15. येक परी क सुिनि त करे क सभी उ र का मू यांकन आ है, आवरण पृ पर तथा योग म कोई अशुि
नह रह गई है तथा कु ल योग को श द और अंक म िलखा गया है।
16. क ीय मा यिमक िश ा बोड पुन: मू यांकन या के अंतगत परी ा थय के अनुरोध पर िनधा रत शु क
भुगतान के बाद उ ह उ र पुि तका क फोटो कॉपी ा करने क अनुमित दते ा ह।ै
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MARKING SCHEME HISTORY-027
CLASS XII
AISSCE MARCH 2020
CODE NO. Set-61/5/1
Q.NO अपेक्षित उत्तर / मूल्य अंक PAG MA
भाग--A E RK
NO. S
1 Pg- 1
एस.एन. रॉय (सौर द्र
ीं नाथ रॉय) 20
2 Pg- 1
शिलालेख: - शिखित अशििेि पत्थर, धातु या शिटट के कठोर सतह पर िुदे 37
होते है जो िोगो क शियाकिाप उपिखिशदयो के बारे िें बताते है
प्रशस्ति – िासकोीं के बारे िें जानकार रिता है। शकस के शििेषतः अपने
पािक या सींरक्षक के गुणोीं, शििेषताओीं आशद क कुछ बढा चढाकर क
जानेिाि शिस्तृत प्रसींिा
3 A- केिि 1 और 2 Pg-1 1
4 िातृ दे ि ( हड़प्पा) Pg- 1
23
नेत्रह नोीं के शिए: -उन्नत ( Unicorn.)
5 C-. Pg- 1
शिद्वान ( पढे शििे) उस शिशप को पढ नह ीं सके है 15
6 पाटशिपुत्र Pg- 1
31
अथवा
िगध
7 धम्म Pg- 1
32
8 Pg- 1
अि-ब्रुन ख्वाररज़ि / उज़्बेशकस्तान से था और उसने अरब िाषा िें शकताब- 116
उि-शहींद शििा था।
अथवा Pg-
िुहम्मद शबन तुगिक इब्न बतूता क शिद्वता से प्रिाशित था 118
9 A-(i-b,ii-c,iii-d, iv-a) Pg- 1
121,
122,
137
10 A- Pg- 1
बड़ आबाद , बाज़ारोीं और कुिि सींचार 126`
1
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11 A- कािल िार्क्ल Pg- 1
132
12 निशयरा शदव्य प्रबन्धनि् Pg- 1
144
13 िशिक िुहम्मद जायस Pg- 1
158
14 आशद ग्रन्थ साशहब Pg- 1
161
15 रै दास / रशिदास Pg- 1
165
16 इस्तिरार बींदोबस्त Pg- 1
260/
262
17 A डे शिड ररकाडो Pg- 1
277
18 C-1,2 और 3 Pg- 1
319
19 A- दोनोीं (A) और (R) सह हैं और (R), ( A) क सह व्याख्या है (A) Pg- 1
328
20 A- िॉडल िैिेस्ल Pg- 1
336
21 भाग Part -B
अक्षभलेख साक्ष्यं की सीमाएं
तकन क स िाएँ -
i. अशििेि धूशिि उत्क णल हैं और पुनशनलिालण अशनशित हैं।
ii. शििािेि क्षशतग्रस्त हो सकता है या पत्र गायब हैं।
iii. शििािेि िें प्रयुक्त िब्ोीं के सट क अथल के बारे िें सुशनशित होना
हिेिा आसान नह ीं होता है।
iv. अशििेि नष्ट ि हो जाते है शजनसे िब् िुप्त हो जाते है 1
v. अशििेिोीं के िब्ोीं का अथल शनकाि पाना आसान नह ीं 1
vi. अनेक अशििेि कािाींतर िें सुरशक्षत नह ीं बचे।
Pg-
vii. कुछ अशििेि अींि िात्र है ।
48 3
viii. अशििेि केिि उन्ह िोगो के शिचार व्यक्त करते है जो उन्हें बनिाते
थे।
ix. कोई अन्य प्रासींशगक शबींदु
शकस ि त न शबींदुओीं क व्याख्या
अथवा
2
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भूक्षम और नदी मागग
i. िागों को शिशिन्न शदिाओीं िें बढाया गया था: - िध्य एशिया, उत्तर
अफ्र का, पशिि एशिया, दशक्षण पूिल एशिया और च न।
ii. िासकोीं ने इन िागों को शनयींशत्रत करने का प्रयास शकया।
Pg-44
iii. व्यापाररयोीं ने इन िागों पर यात्रा क ।
iv. इन िागों के िाध्यि से िाि क शिस्तृत श्ृींििा को िे जाया गया।
v. कोई अन्य प्रासींशगक शबींदु 3
शकस ि त न शबींदुओीं क व्याख्या
.
22 महानवमी क्षिब्बा की औपचाररक( अनुष्ठान सम्बन्धी ) क्षवशेषताएं
i. शिजयनगर के राजाओीं ने शिशिन्न अिसरोीं पर अपन प्रशतष्ठा और
परािि का प्रदिलन शकया।
ii. राज्य के घोड़ोीं क पूजा।
iii. जानिरोीं का बशिदान।
iv. िहाीं पर नृत्य, कुश्त जैसे िेि प्रशत स्पधाल
v. घोड़ोीं, हाशथयोीं, रथोीं, सैशनकोीं आशद के जुिूस
vi. िुिे िैदान िें नायक क सेनाओीं का शनर क्षण
vii. राजाओीं को नायक द्वारा िेंट
viii. कोई अन्य प्रासींशगक शबींदु
Pg-
शकन्ह त न शबींदुओीं क व्याख्या
181
3
23 सांप्रदाक्षिक सौहादग कय बहाल करने के क्षलए गांधीजी के प्रिास
3
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i. उन्होींने अपने शसद्ाींतोीं के िाध्यि से साींप्रदाशयक शहींसा को रोकने क
कोशिि क ।
ii. उन्होींने शिशिन्न क्षेत्रोीं के दीं गाग्रस्त क्षेत्रोीं का दौरा शकया।
iii. उन्होींने अल्पसींख्यकोीं के कष्टोीं के प्रशत अपन शचींता शदिाई।
iv. उन्होींने सि िगों क सिानता के शिए काि शकया।
Pg-
v. उन्होींने दो सिुदायोीं के ब च आपस शिश्वास और शिश्वास क िािना का
365-
शनिालण करने क कोशिि क । 395 3
vi. कोई अन्य प्रासींशगक शबींदु।
शकन्ह ीं त न शबींदुओीं क व्याख्या
24 अंग्रेजयं द्वारा अवध के क्षवनाश के कारण
i. कपास और न ि क िेत के शिए उपयुक्त शिट्ट ।
ii. अिध को ऊपर िारत के बाजार के रूप िें शिकशसत शकया जा सकता
था।
iii. अिध के अशधग्रहण से क्षेत्र य शनयींत्रण क प्रशिया पूर होने क उम्म द
थ।
अवध के उद् घयष के बहाने
i. अींग्रेज़ ऐसा िान रहे थे क क्षेत्र को गित तर के से सींचाशित शकया जा
रहा था। Pg-
ii. गित तर के से िाना जाता है शक िाशजद अि िाह एक अिोकशप्रय 296 1
+
िासक थे।
2
iii. सहायक गठबींधन।
=
3
कारण का कोई एक शबींदु और बहाने के शिए दो शबींदु।
4
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25 सांची िूप का संरिण
i. िोपाि के िासकोीं (िाहजहाँ बेगि और उनके उत्तराशधकार सुल्तान
जहाँ बेगि) ने इसके सींरक्षण के शिए धन प्रदान शकया।
ii. उसने सींग्रहािय को शित्त पोशषत शकया।
iii. उन्होींने प्राच न स्थि के रि रिाि के शिए धन अनुदान शदया ।
iv. अशतशथिािा बनाने के शिए धन अनुदान शदया जहाीं जॉन िािलि रहते थे
और पुस्तकें शििते थे।
v. जॉन ििाि के िींडो के प्रकािन के शिए अनुदान शदए।
vi. एएसआई ने इसे बहाि करने और सींरशक्षत करने िें ि िदद क ।
अमरावती की क्षनिक्षत
i. स्थान य राजा स्तूप के िींडहरोीं पर िींशदर बनाना चाहते थे।
ii. कॉशिन िेकानाइज़ ने अिराित पर ररपोटल तैयार क
िेशकन कि प्रकाशित नह ीं हुई।
iii. गुींटूर के आयुक्त िाल्टर इशियट, अिराित के िद्रास िें
िूशतलकिा पैनि िे गए।
iv. अिराित के स्लैब को एशियाशटक सोसाइट ऑफ़ बींगाि
Pg-
को िेजा गया था।
83,98
V अशनशितकाि न न शत के कारण अिराित के िूि कायल िें
शगरािट आई।
4+4
vi कोई अन्य प्रासींशगक शबींदु।
=8
दोनोीं िें से चार शबींदुओीं क व्याख्या
अथवा
क्षहंदू और बौद्ध कला और मूक्षतगकला
शहींदू िूशतलकिा और किा
5
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i. िैष्णििाद - दस अितारोीं क िूशतलकिा। उदाहरण के शिए। िेषनाग
के साथ पृथ्व दे ि (ऐहोि), िराह,,आशद ।
ii. िैि ित- शिींग िें शिि क िूशतलयाीं
iii. िानि रूप िें ि शिि क िूशतलयाीं
iv. िहाबि पुरि िें दु गाल क छशि
v. िथुरा िें िासुदेि-कृष्ण क िूशतल
vi. एिोरा क िूशतलयाीं
vii. कैिाि नाथ िींशदर
viii. कोई अन्य प्रासींशगक शबींदु
बौद्ध कला और मूक्षतगकला
i. ररक्त स्थान बुद् के ध्यान क दिा
ii. स्तूप िहाशनबनना के प्रत क
iii. सारनाथ बुद् के पहिे उपदे ि का प्रत क
iv. पेड़ बुद् क ज िन क घटना का प्रत क Pg-
v. स्तूप के तोरण द्वार पर िैििींशजका सिृखद् का िुि प्रत क 99-
vi. गजिक्ष्म -सौिाग्य क प्रशतिा 106
vii. िृक्ष बुद् के ज िन क एक घटना का प्रत क है।
viii. बुद् और बोशधसत्ोीं क छशियाँ
ix. सपल और पिु रूपाींकनोीं
x. हाथ , घोड़े , बींदर और झोपड़ जैसे जानिरोीं क िूशतलयाीं स्तूप पर शिशिन्न
4+4
जातक कहाशनयोीं से सिझा जा सकता है।
=8
xi. कुछ जानिरोीं को िानि य शििेषताओीं के प्रत क के रूप िें इस्तेिाि
शकया गया था उदाहरण के शिए हाशथयोीं को िखक्त और ज्ञान को दिालने
के शिए शचशत्रत शकया गया था।
6
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xii. किि और हाशथयोीं से शघर एक िशहिा क िूशतल प्रिुि है
xiii. -कुछ िोगोीं ने गजिक्ष्म के रूप िें पहचाना, (सौिाग्य क दे ि ) और
कुछ के रूप िें िाया (बुद् क िाँ)
xiv. जातक कहाशनयोीं और बुद् क ज िन के दृश्य
xv. कोई अन्य प्रासींशगक शबींदु
कथन का सिथलन करने के शिए प्रत्येक का कोई चार उदाहरण
26 अकबर-नामा
i. अबुि फ़ज़्ि द्वारा शिखित।
ii. यह पाण्डु शिशप स्रोतोीं, शििरण दे ने के पारम्पररक ऐशतहाशसक
दृशष्टकोण , आशधकाररक दस्तािेजोीं और िौखिक प्रिींसापत्रोीं पर
आधाररत है।
iii. इसे त न पुस्तकोीं िें शििाशजत शकया गया है और त सर पुस्तक
ऐन-ए-अकबर है - िींशज़ि आबाद , शसपाह आबाद और िुल्क
आबाद क रचना।
iv. सि पक्षोीं का शििरण प्रस्तुत शकया है
v. यह िौगोशिक, सािाशजक, राजन शतक, प्रिासशनक और
साींस्कृशतक को बताते हुए अकबर के िासनकाि का शिस्तृत
शििरण प्रदान करता है।
Pg-
vi. अबुि फज़ि क िाषा अिींकृत थ सो इसिें कथन िैि और िय
218,
को िहत्पूणल स्थान शदया गया
230
vii. िाषा िें िारत य फ़ारस िैि को िहत्पूणल स्थान शदया गया है 8
viii. उन्होींने अकबर से जुड़े शिचारोीं को स्पष्ट शकया।
ix. यह तेरह साि िें शििा गया था।
x. यह शहींदू, जैन, बौद् और िुखस्लि जैसे साम्राज्य क शिशिध आबाद
को दिालता है।
xi. इसने सिग्र सींस्कृशत को शदिाया।
7
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xii. कोई अन्य प्रासींशगक शबींदु।
शकन्ह आठ शबींदुओीं का िणलन
अथवा
मुगल दरबार की भौक्षतक व्यवस्था
i. राज शसींहासन ि तख़्त शजसे सम्प्रिुता क तरह दे िा गया , एक ऐसा
स्तम्भ शजसपर धरत शटक हुई हो।
ii. छतर िासक क काींशत को सूयल क काींशत से पृशथक करने िाि िान
जात थ ।
iii. राजा के शिए स्थाशनक शनकटता द्वारा खस्थशत शनधालररत क गई थ ।
Pg-
iv. राजा क अनुिशत के शबना शकस को जाने क अनुिशत नह ीं थ ।
239-
v. दरबार िें शिष्टाचार का पािन शकया जाता था।
241
vi. दरबार सिाज िें सािाशजक शनयींत्रण का व्यिहार दरबार िें िान्य
सम्भोधन , शिष्टाचार और बोिने के शनयिो द्वारा होता था ।
vii. आत्मशनिेदन का उच्चति रूप शसजदा या दीं डित िेटना था । 8
viii. दरबार िें राजशनयक दू तो सींबध नयाचार िें ऐस ह सुस्पष्टता थ ।
ix. राजा द्वारा झरोिा दिलन एक अनुष्ठान था। झरोिा दिलन क प्रथा थ
शजसका उद्दे श्य जन शिश्वास के रूप िें िाह सत्ता को स्व कृशत दे ना था
x. प्राथशिक व्यिसाय द िान-ए-आि िें आयोशजत शकया गया और शनज
चचालएँ द िान-ए-खास िें ।
xi. ईद, िब-ए-बारात, होि , आशद जैसे अिसरोीं के दौरान दरबार ज िन
से िरा था।
xii. जन्मशदन के शदन, राजा को दान के शिए िस्तुओीं से तौिा जाता था ।
xiii. कोई अन्य प्रासींशगक शबींदु
शकन्ह आठ शबींदुओीं का िणलन
8
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27
संक्षवधान सभा बनाने में कांग्रेस पार्टी की भूक्षमका
i. सींशिधान सिा िें काींग्रेस का िचलस्व था।
ii. 82% सदस्य काींग्रेस के थे।
iii. काींग्रेस के सदस्य िहत्पूणल िुद्दोीं पर अपन राय िें शिन्न थे।
iv. जिाहर िाि नेहरू, िल्लि िाई पटे ि और राजेंद्र प्रसाद काींग्रेस के
सदस्य थे शजन्होींने सींशिधान सिा िें िहत्पूणल िूशिका शनिाई थ ।
v. नेहरू ने उद्दे श्य सींकल्प ’और शत्र रीं ग राष्टर य ध्वज को िहत् शदया
vi. पटे ि ने ररपोटों का िसौदा तैयार करने और शिचारोीं िें सािींजस्य
स्थाशपत करने िें िहत्पूणल िूशिका शनिाई।
vii. डॉ राजेंद्र प्रसाद सींशिधान सिा अध्यक्ष थे।
viii. डॉ ब .आर. अम्बेडकर ने िसौदा सशिशत के अध्यक्ष के रूप िें कायल
शकया।
ix. के एि िुींि और अल्लाद कृष्णस्वाि अय्यर ने िहत्पूणल जानकार द
और कानून और सशिींधान के प्रारूप के सुझाि शदए ।
x. सींशिधान सिा के ि तर क चचालएीं ि जनता द्वारा व्यक्त क गई राय से
प्रिाशित थ ।ीं Pg-
xi. कोई अन्य प्रासींशगक शबींदु 409-
425
शकस ि चार शबींदुओीं क व्याख्या
8
अथवा
संक्षवधान सभा में पृथक क्षनवागचन का मुद्दा
9
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i. पृथक शनिालचक िींडि क िाींग अल्पसींख्यकोीं के
अशधकारोीं को पररिाशषत करने पर आधाररत थ ।
ii. सिा ने आशथलक रूप से किजोर सिूहोीं, आशदिास
सिुदाय, धाशिलक सिुदाय और शपछड़ जाशत िािे सिूहोीं के
सींदिल िें अल्पसींख्यक क व्याख्या क ।
iii. सिूहोीं के नेताओीं ने पृथक शनिालचकोीं के रूप िें िाींगोीं का
अनुिान िगाया।
iv. इस प्रश्न पर सिा िें िार बहस हुई।
v. ब .प . बहादु र अल्पसींख्यकोीं के शिए अिग शनिालचक
िींडि चाहते थे।
vi. एनज रीं गा ने गर बोीं और दशितोीं के अशधकारोीं के शिए
आग्रह शकया।
vii. जयपाि शसींह आशदिाशसयोीं के शिए अशधकार चाहते थे।
viii. अम्बेडकर ने दशित जाशत के शिए अिग शनिालचक िींडि
क िाींग क ।
ix. जे नागप्पा ने व्यिखस्थत हाशिए के बारे िें चचाल क ।
x. कई सदस्य जैसे सरदार पटे ि, आर.ि . धुिेकर, ज .ब . पींत
अिग ितदाताओीं को शििाजन का कारण िानते थे और
िारत क एकता के खििाफ।
xi. सरदार पटे ि पृथक शनिालचन को दे ि क एकता के शिए
जहर के सािान िानते थे।
Pg-
xii. पृशथक शनिालचन दे ि क एकता के शिए आत्मघातक 416-
साशबत होगा। 419
xiii. सदस्योीं के अनुसार, यह िींशडत शनष्ठाीं का कारण होगा
और अल्पसींख्यकोीं को बहुित से अिग करे गा।
xiv. कोई अन्य प्रासींशगक शबींदु
8
सिग्रता िें िूियाींकन
10
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28 Part D: स्रयत आधाररत प्रश्न
एक धनाढ्य शूद्र
२.१ ब्राह्मण स्विं कय अन्य जाक्षत से श्रेष्ठ क्यं मानते थे?
i. उत्तर:ब्राह्मण िुद को अन्य जाशत से श्ेष्ठ िानते थे
a) उनक बुखद् के आधार पर
b) उशचत रीं ग के आधार पर।
c) िुद्ता के आधार पर
d) ब्रह्मा के पुत्रोीं के रूप िें िाना जाता है
e) कोई अन्य प्रासींशगक शबींदु
शकन्ह दो शबींदुओीं क व्याख्या (2)
28.2 कच्छना के अनुसार एक शूद्र ने अपनी स्तस्थक्षत में कैसे सुधार क्षकिा?
उत्तर:कच्छना के अनुसार, एक िूद्र अपन खस्थशत िें सुधार कर सकता था
a) धन के आधार पर
b) आशथलक खस्थशत और गररिा के आधार पर (2)
28.3 वणग व्यवस्थाता के प्रक्षत बौद्ध दृक्षिकयण के बारे में िह कहानी क्ा Pg-
बताती है? 70
उत्तर: िणल व्यिस्थाता के प्रशत बौद् दृशष्टकोण 2
+
a) जाशत आधाररत शिचारोीं क अस्व कृशत
2
b) जन्म के आधार पर श्ेष्ठता के शिचारोीं को िाररज कर शदया।
+
c) सािाशजक सिानता के शिए अनुरोध
2
11
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d) कोई अन्य प्रासींशगक शबींदु। =
6
शकन्ह दो शबींदुओीं क व्याख्या (2)
29
स्रयत आधाररत प्रश्न
भारत में चााँदी कैसे आिी
29.1 मुग़ल साम्राज्य क्षकस प्रकार भारी मात्रा में धन एकक्षत्रत कर सका ?
उत्तर: िुगिोीं द्वारा िार धन का सींचय।
a) िस्तुओीं के आयात शनयालत से
b) व्यापार के ज िींत िाध्यि से।
c) िस्तु सींरचना और व्यापार िें शिस्तार के कारण।
शकन्ह दो शबींदुओीं क व्याख्या (2)
29.2 चांदी क्षकस प्रकार दु क्षनिाभर में हयते हुए भारत पहुंची?
उत्तर: चाींद दु शनयािर िें होते हुए िारत पहुींच
क) धातु िुद्रा क उपििता।
ब ) िनन तकन क का शिस्तार।
Pg-
c) अथलव्यिस्था िें धन का पररसींचरण।
217 2
d) नकद िें करोीं और राजस्व क शनकास ।
+
शकन्ह दो शबींदुओीं क व्याख्या (2) 2
+
29.3 भारत में विु क्षवक्षनमि क्षकस प्रकार हयता था? 2
a) नकद िेनदे न के िाध्यि से। =
6
b) िस्तुओीं के िेनदे न के िाध्यि से
12
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(2)
30
कल हम नमक कानून तयडें गे
30.1 नमक कानून के प्रक्षत भारतीियं की प्रक्षतक्षििाओं की जााँच करें ।
उत्तर:निक कर कानून के प्रशत िारत योीं क प्रशतशियाएँ ।
a) निक कानून के खििाफ व्यापक असींतोष था।
b) निक पर राज्य का एकाशधकार अिोकशप्रय था।
(2)
30.2 गांधीजी कय िह क्षवश्वास क्यं था क्षक सरकार सत्याग्रक्षहियं कय क्षगरफ्तार
नही ं करे गी?
उत्तर: गाींध ज सत्याग्रशहयोीं क शगरफ्तार पर िरोसा नह ीं कर रहे थे
a) िह अपने प्रदिलनकाररयोीं को िाींशत क सेना िानता था।
b) अींग्रेजोीं पर दु शनया क राय का डर। (2)
30.3 दांिी माचग के आधार की की व्याख्या कीक्षजिे
उत्तर:दाींड िाचल का आधार
a) शब्रशटिोीं के सबसे व्यापक रूप से नापसींद कानून को तोड़ने के शिए।
Pg-
b) शब्रशटि िासन के खििाफ असींतोष को बढाने के शिए।
358
c) अींग्रेजोीं के खििाफ राष्टरिाद अशियान िुरू करना। 2+2
d) सि िगों के सिुदायोीं को एकजुट करने के शिए, +2=
e) स्वराज क ओर जाने के शिए। 6
(2)
शकन्ह दो शबींदुओीं क व्याख्या
31 31.1 & 31.2 मानक्षचत्र पर संलग्न
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Pg-2 3
दृक्षिबाक्षधत परीिाक्षथगियं के क्षलए
31.1 हडप्पा स्थल
काि बींगन, िोथि, नागेश्वर, धोिाि रा, राि गढ , बनिाि - (िारत)
हड़प्पा, , बािाकोट, चाहँजोदड़ो ,िोहनजोदड़ो
3
कयई तीन Pg-95
अथवा
Pg-
बौद्ध स्थल 3
305
साींच , बरहुत, अजींता, नाशसक, कारिा, नागाजुलनकोींडा, अिराित , बोधगया
कयई तीन
31.2
क्षवद्रयह का केंद्र 1857
शदल्ल , िेरठ, आगरा, ििनऊ, झाँस , कानपुर, आज़िगढ, बनारस, किकत्ता
कयई तीन
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